नवरात्रि के सातवें दिन मां कालरात्रि की आराधना की जाती है। उनका स्वरूप देखने में उग्र है, लेकिन धार्मिक मान्यताओं में वे अपने भक्तों का कल्याण करने वाली देवी मानी जाती हैं। उन्हें भय, अज्ञान और नकारात्मक शक्तियों से मुक्ति का प्रतीक माना जाता है।
मां कालरात्रि की पौराणिक कथा
पौराणिक मान्यताओं में मां कालरात्रि को देवी दुर्गा का वह शक्तिशाली स्वरूप बताया गया है, जो दुष्ट शक्तियों का संहार करता है। उनका उग्र रूप यह संदेश देता है कि बुराई और अन्याय का सामना करने के लिए साहस जरूरी है।
मां का स्वरूप और महत्त्व
- मां का वर्ण गहरा और केश खुले हुए दर्शाए जाते हैं।
- उनका वाहन गर्दभ यानी गधा माना जाता है।
- उनकी पूजा निर्भयता, साहस और विपरीत परिस्थितियों का सामना करने की प्रेरणा देती है।
पूजा विधि
- मां की प्रतिमा के सामने दीपक जलाएं।
- फूल, अक्षत और फल अर्पित करें।
- मां के मंत्र का जाप श्रद्धापूर्वक करें।
- आरती करके परिवार की सुरक्षा और सुख-शांति की प्रार्थना करें।
मंत्र: ॐ देवी कालरात्र्यै नमः।
भोग: मां को गुड़ अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है।
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