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LPG New Rules 2026

LPG New Rules 2026: PNG कनेक्शन वालों के लिए बड़ा अपडेट, जून से बदलेंगे गैस सिलेंडर के नियम

नई दिल्ली। देशभर में एलपीजी (LPG) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) उपभोक्ताओं के लिए जून 2026 से नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां ऐसे घरों की पहचान कर रही हैं जहां LPG और PNG दोनों कनेक्शन एक साथ इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इसके चलते लाखों उपभोक्ताओं के बीच यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या उनका गैस सिलेंडर कनेक्शन बंद हो सकता है। क्या है ‘One Household, One Connection’ नियम? सरकार का उद्देश्य घरेलू गैस की उपलब्धता को बेहतर बनाना और दुरुपयोग रोकना है। इसी के तहत कई शहरों में ऐसे घरों की जांच की जा रही है जिनके पास PNG सुविधा होने के बावजूद LPG कनेक्शन भी सक्रिय है। पहले ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को LPG कनेक्शन सरेंडर करने के लिए कहा जा रहा था। हालांकि हाल ही में सरकार ने नियमों में संशोधन करते हुए उपभोक्ताओं को कुछ राहत भी दी है। अब क्या होगा LPG कनेक्शन का? नए संशोधित नियमों के अनुसार यदि किसी उपभोक्ता ने PNG कनेक्शन ले लिया है तो उसके पास दो विकल्प होंगे— 1. LPG कनेक्शन बंद करवा सकते हैं PNG मिलने के 30 दिनों के भीतर उपभोक्ता अपना LPG कनेक्शन बंद कराने के लिए आवेदन कर सकता है। 2. ट्रांसफर वाउचर ले सकते हैं यदि भविष्य में उपभोक्ता ऐसे इलाके में शिफ्ट होता है जहां PNG उपलब्ध नहीं है, तो वह ट्रांसफर वाउचर की मदद से LPG कनेक्शन दोबारा सक्रिय करवा सकेगा। किन लोगों को होगा सबसे ज्यादा फायदा? सरकार के इस फैसले से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जिनकी नौकरी ट्रांसफरेबल है या जो अक्सर शहर बदलते रहते हैं। इसमें शामिल हैं— इन लोगों को हर बार नया गैस कनेक्शन लेने की लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। क्या गैस कनेक्शन तुरंत बंद हो जाएगा? विशेषज्ञों का मानना है कि हर शहर और गैस वितरण कंपनी की प्रक्रिया अलग हो सकती है। जिन क्षेत्रों में PNG नेटवर्क पूरी तरह उपलब्ध है, वहां कंपनियां उपभोक्ताओं से स्थिति स्पष्ट करने को कह सकती हैं। इसलिए यदि आपके पास दोनों कनेक्शन हैं तो अपनी गैस कंपनी से संपर्क कर नियमों की जानकारी लेना जरूरी है। सरकार ने नियम क्यों बदले? मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच सरकार गैस संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर जोर दे रही है। इसी कारण PNG नेटवर्क को बढ़ावा देने और LPG की उपलब्धता जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। यदि आपके घर में PNG कनेक्शन मौजूद है और LPG कनेक्शन भी चालू है, तो जून 2026 में लागू होने वाले नियमों की जानकारी रखना बेहद जरूरी है। हालांकि नए संशोधन के बाद उपभोक्ताओं को ट्रांसफर वाउचर जैसी सुविधा मिल गई है, जिससे भविष्य में LPG कनेक्शन दोबारा लेने की परेशानी कम होगी। सरकार का उद्देश्य गैस वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता हितैषी बनाना है।
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Supreme Court - हाईकोर्ट 3 महीने से ज्यादा फैसला सुरक्षित न रखें

Supreme Court – हाईकोर्ट 3 महीने से ज्यादा फैसला सुरक्षित न रखें

आम लोगों को समय पर न्याय मिले, इसके लिए Supreme Court ने देश के सभी हाईकोर्टों को अहम निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम Court ने कहा है कि कोई भी फैसला 3 महीने से ज्यादा समय तक सुरक्षित नहीं रखा जाना चाहिए। खासकर जमानत से जुड़े मामलों में आदेश उसी दिन या अधिकतम अगले दिन जारी किए जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अदालतों के आदेशों को तुरंत ऑनलाइन अपलोड किया जाए, ताकि लोगों को फैसले की जानकारी समय पर मिल सके। कोर्ट ने माना कि फैसलों में देरी होने से लोगों को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, कई मामलों में देखा गया है कि सुनवाई पूरी होने के बाद भी फैसले लंबे समय तक सुरक्षित रखे जाते हैं। इससे आरोपी, पीड़ित और उनके परिवारों को अनिश्चितता में रहना पड़ता है। जमानत मामलों में देरी होने पर कई लोगों को जरूरत से ज्यादा समय जेल में बिताना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के बराबर है। अदालतों को यह सुनिश्चित करना होगा कि फैसले तय समय सीमा में आएं और लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बना रहे। कोर्ट के इन निर्देशों को न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी लाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे आम नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है और लंबित मामलों के जल्द निपटारे में भी मदद मिल सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Charbagh Railway Station पर बड़ा हादसा: टिन शेड गिरने से टीटीई समेत 3 लोग गंभीर घायल

Charbagh Railway Station पर बड़ा हादसा: टिन शेड गिरने से टीटीई समेत 3 लोग गंभीर घायल

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के व्यस्त Charbagh Railway Station पर शुक्रवार को बड़ा हादसा हो गया। स्टेशन पर बने टिन शेड का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर पड़ा। हादसे में टीटीई समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई और यात्रियों में दहशत फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा उस समय हुआ जब हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म पर पहुंच चुकी थी। अचानक तेज आवाज के साथ टिन शेड नीचे गिर गया। मौके पर मौजूद लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। हादसे की सूचना मिलते ही रेलवे अधिकारी और राहत टीम तुरंत मौके पर पहुंची। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि घायलों में एक टीटीई भी शामिल है, जिसकी हालत गंभीर बनी हुई है। हादसे के बाद सुरक्षा के मद्देनजर हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस को कुछ देर के लिए रोक दिया गया। रेलवे प्रशासन ने प्लेटफॉर्म खाली कराकर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में टिन शेड की जर्जर हालत को हादसे की वजह माना जा रहा है। यात्रियों का कहना है कि स्टेशन पर कई जगहों पर पुराने और कमजोर शेड बने हुए हैं, जिनकी समय-समय पर जांच नहीं होती। लोगों ने रेलवे प्रशासन से स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और पुराने ढांचों की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UP में निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरा, 6 मजदूरों की मौत, आंधी-बारिश बनी हादसे की वजह

UP में निर्माणाधीन पुल का स्लैब गिरा, 6 मजदूरों की मौत, आंधी-बारिश बनी हादसे की वजह

UP में एक दर्दनाक हादसे ने कई परिवारों की खुशियां छीन लीं। निर्माणाधीन पुल का स्लैब अचानक गिरने से 6 मजदूरों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य मजदूर मलबे में दब गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और लोगों की चीख-पुकार सुनकर आसपास के ग्रामीण भी मदद के लिए दौड़ पड़े। अधिकारियों के मुताबिक तेज आंधी और बारिश के कारण पुल का स्लैब कमजोर हो गया था, जिसकी वजह से यह हादसा हुआ। राहत और बचाव टीम ने मौके पर पहुंचकर तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। मलबे में फंसे 3 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जबकि अन्य की तलाश जारी रही। घटना के बाद पूरे इलाके में मातम का माहौल है। मृत मजदूरों के परिवारों का रो-रोकर बुरा हाल है। कई मजदूर दूसरे राज्यों से यहां काम करने आए थे और अपने परिवार की रोजी-रोटी के लिए मेहनत कर रहे थे। प्रशासन ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। साथ ही यह भी जांच की जा रही है कि निर्माण कार्य में सुरक्षा मानकों का पालन किया जा रहा था या नहीं। स्थानीय लोगों ने निर्माण कंपनी की लापरवाही पर सवाल उठाए हैं। सरकार की ओर से मृतकों के परिजनों को आर्थिक सहायता देने की बात कही गई है। वहीं घायलों का अस्पताल में इलाज जारी है। यह हादसा एक बार फिर निर्माण कार्यों में सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलता नजर आया है। लोगों का कहना है कि मजदूरों की सुरक्षा को लेकर सख्त नियमों का पालन जरूरी है, ताकि भविष्य में ऐसे हादसे दोबारा न हों। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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WhatsApp, Facebook और Instagram के नए Plus फीचर्स आएंगे, यूजर्स को देना पड़ सकता है पैसा

WhatsApp, Facebook और Instagram के नए Plus फीचर्स आएंगे, यूजर्स को देना पड़ सकता है पैसा

दुनियाभर में करोड़ों लोग रोजाना WhatsApp, Facebook और Instagram का इस्तेमाल करते हैं। अब इन प्लेटफॉर्म्स को चलाने वाली कंपनी Meta अपने यूजर्स के लिए एक नया “Plus” या प्रीमियम वर्जन लाने की तैयारी में है। माना जा रहा है कि इसके लिए यूजर्स को हर महीने कुछ पैसे चुकाने पड़ सकते हैं, लेकिन बदले में कई नए और खास फीचर्स मिलने वाले हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, Meta अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को और ज्यादा पर्सनल और एडवांस बनाने पर काम कर रही है। नए Plus वर्जन में यूजर्स को ऐसी सुविधाएं मिल सकती हैं, जो अभी फ्री वर्जन में उपलब्ध नहीं हैं। 24 घंटे बाद भी नहीं हटेगी स्टोरी Instagram और Facebook पर अभी स्टोरी सिर्फ 24 घंटे तक दिखाई देती है, लेकिन Plus वर्जन में यूजर्स अपनी स्टोरी को ज्यादा समय तक एक्टिव रख सकेंगे। इससे लोग अपनी खास यादों और जरूरी अपडेट्स को लंबे समय तक शेयर कर पाएंगे। पसंदीदा लोगों की अलग-अलग लिस्ट बना सकेंगे नए फीचर के तहत यूजर्स अपने करीबी दोस्तों, परिवार और ऑफिस के लोगों की अलग-अलग लिस्ट बना पाएंगे। इससे हर पोस्ट और स्टोरी को अपनी पसंद के लोगों तक ही शेयर करना आसान हो जाएगा। यह फीचर प्राइवेसी और पर्सनल कंट्रोल को बेहतर बनाएगा। आम यूजर्स पर क्या असर पड़ेगा? अगर Meta अपने Plus वर्जन को लॉन्च करता है, तो इससे यूजर्स को फ्री और पेड दोनों विकल्प मिल सकते हैं। जो लोग ज्यादा फीचर्स और बेहतर अनुभव चाहते हैं, वे प्रीमियम प्लान चुन सकते हैं। वहीं सामान्य यूजर्स पहले की तरह फ्री वर्जन इस्तेमाल कर पाएंगे। हालांकि, Meta की तरफ से अभी तक इन फीचर्स और कीमतों को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स के बीच इसे लेकर काफी उत्सुकता बनी हुई है। अधिक जानकारी और ताजा खबरों के लिए पढ़ते रहें Deshharpal News Portal। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Twisha

Twisha Case Investigation: CBI ने तेज की जांच, गिरफ्तारी को लेकर बढ़ा Suspense

Twisha केस की जांच अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां हर नई जानकारी लोगों की बेचैनी बढ़ा रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मामले में अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य संदिग्ध मानी जा रही गिरिबाला से लगातार पूछताछ की जा रही है और एजेंसी अब हर छोटे-बड़े सबूत को जोड़कर केस की पूरी सच्चाई सामने लाने की कोशिश में जुटी है। जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस केस में बड़ा कदम उठाया जा सकता है। इसी वजह से गिरिबाला की गिरफ्तारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि CBI की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। 3D Camera Technology से रिकॉर्ड हो रहा पूरा घर इस हाई-प्रोफाइल मामले में CBI आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। जांच टीम ने घटनास्थल और घर के अंदर के हिस्सों को 3D कैमरे की मदद से रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया है। इससे पूरे घर का डिजिटल मॉडल तैयार किया जाएगा, ताकि घटना के समय की परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझा जा सके। सूत्रों के अनुसार, टीम घर के हर कमरे, एंट्री और एग्जिट पॉइंट, फर्नीचर की स्थिति और अन्य संदिग्ध जगहों की बारीकी से जांच कर रही है। माना जा रहा है कि इस डिजिटल रिकॉर्डिंग से जांच एजेंसी को कई अहम सुराग मिल सकते हैं। पूछताछ में सामने आ रहे नए पहलू CBI अधिकारियों ने गिरिबाला से कई दौर की पूछताछ की है। जांच एजेंसी मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल सबूत और घटनास्थल से मिले संकेतों को एक-दूसरे से जोड़कर पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश कर रही है। सूत्रों का दावा है कि पूछताछ के दौरान कुछ ऐसे जवाब मिले हैं, जिन्होंने जांच को नई दिशा दी है। यही वजह है कि एजेंसी अब मामले से जुड़े हर व्यक्ति पर नजर बनाए हुए है। इलाके में बढ़ी हलचल ट्विशा केस को लेकर स्थानीय लोगों में भी काफी चर्चा है। इलाके में लगातार CBI की मौजूदगी और जांच टीम की गतिविधियों ने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है। परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि जांच के बाद जल्द सच्चाई सामने आएगी। फिलहाल CBI हर एंगल से केस की जांच कर रही है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और तकनीकी टीम की मदद से जुटाए जा रहे सबूत आने वाले दिनों में इस मामले में बड़ा खुलासा कर सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बकरीद

बकरीद Special: Delhi से UP तक Security Tight, Bengal और Uttarakhand में हलचल

बकरीद 2026 के मौके पर पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। त्योहार के बीच जहां एक ओर शांति और सौहार्द बनाए रखने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी ओर अलग-अलग राज्यों से कुछ चर्चित मुद्दे भी सामने आए हैं। Delhi-UP में मस्जिदों और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर Drone से निगरानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश में बकरीद के अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है।प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों की मदद से लगातार निगरानी शुरू की है। अधिकारियों के अनुसार, किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी की गई है ताकि त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। West Bengal में Security Tight, Flag March से बढ़ा Confidence पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में सुरक्षा बलों ने फ्लैग मार्च निकाला। इसका मकसद लोगों में भरोसा बढ़ाना और किसी भी तरह की अफवाह या तनाव को रोकना है। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की गई है और लगातार पेट्रोलिंग जारी है। Uttarakhand में Cow को National Animal बनाने की मांग पर चर्चा उत्तराखंड में बकरीद के दौरान एक अलग ही मुद्दा चर्चा में रहा। कुछ लोगों ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाई है। इस मांग के बाद स्थानीय स्तर पर बहस शुरू हो गई है और अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। प्रशासन फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है। Administration Alert: Peaceful Celebration की अपील देशभर के प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बकरीद को शांति, भाईचारे और आपसी सम्मान के साथ मनाया जाए। Administration Alert: Peaceful Celebration की अपील देशभर के प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बकरीद को शांति, भाईचारे और आपसी सम्मान के साथ मनाया जाए।
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Shocking Incident: बंद खदान में कूदा युवक, 4 Hour Rescue Operation के बाद बरामद हुआ शव

Shocking Incident: बंद खदान में कूदा युवक, 4 Hour Rescue Operation के बाद बरामद हुआ शव

एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है, जहां एक युवक ने कथित तौर पर “जय मां काली” बोलते हुए बंद पड़ी खदान में छलांग लगा दी। यह घटना अचानक हुई, जिससे मौके पर मौजूद लोग कुछ समझ ही नहीं पाए और देखते ही देखते इलाके में अफरा-तफरी मच गई। मौके पर मचा हड़कंप घटना की जानकारी मिलते ही स्थानीय लोगों ने पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। इसके बाद रेस्क्यू टीम तुरंत मौके पर पहुंची और युवक को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया गया। लेकिन खदान की गहराई और अंदर की कठिन परिस्थितियों के कारण राहत कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया। 4 घंटे चला रेस्क्यू ऑपरेशन करीब 4 घंटे तक चले लगातार रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद टीम को युवक का शव खदान से बाहर निकालने में सफलता मिली। जैसे ही शव बाहर लाया गया, वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं और पूरे इलाके में गहरा सन्नाटा छा गया। पुलिस जांच जारी पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि युवक ने यह कदम किन परिस्थितियों में उठाया। सुरक्षा पर उठे सवाल स्थानीय लोगों का कहना है कि यह खदान लंबे समय से बंद पड़ी थी और वहां सुरक्षा व्यवस्था न के बराबर थी। इसी लापरवाही को लेकर अब प्रशासन पर भी सवाल उठने लगे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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G7 Summit

G7 Summit 2026: France जाएंगे PM Modi, Donald Trump से मुलाकात पर टिकी दुनिया की नजर

प्रधानमंत्री Narendra Modi अगले महीने एक अहम यूरोप दौरे पर जाने वाले हैं। इस दौरान वह फ्रांस में आयोजित होने वाले G7 Summit में हिस्सा लेंगे और फिर स्लोवाकिया का दौरा करेंगे। अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिहाज से यह यात्रा भारत के लिए काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। बीते कुछ वर्षों में भारत ने दुनिया के बड़े देशों के बीच अपनी मजबूत पहचान बनाई है। ऐसे में पीएम मोदी का यह दौरा सिर्फ एक औपचारिक यात्रा नहीं, बल्कि भारत की बढ़ती ग्लोबल भूमिका का बड़ा संकेत माना जा रहा है। France में G7 Summit में शामिल होंगे पीएम मोदी फ्रांस के राष्ट्रपति Emmanuel Macron के निमंत्रण पर पीएम मोदी जून में होने वाले G7 Summit में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेता वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे। बताया जा रहा है कि इस बार समिट में AI Technology, Climate Change, Energy Security, Ukraine Crisis और Global Trade जैसे विषय प्रमुख रहेंगे। भारत को इस मंच पर लगातार बुलाया जाना यह दिखाता है कि दुनिया अब भारत को एक अहम रणनीतिक साझेदार के तौर पर देख रही है। Donald Trump से मुलाकात की भी चर्चा G7 Summit में अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump के शामिल होने की संभावना है। ऐसे में पीएम मोदी और ट्रंप की संभावित मुलाकात पर भी सबकी नजरें टिकी हुई हैं। अगर दोनों नेताओं की मुलाकात होती है तो व्यापार, रक्षा, टेक्नोलॉजी और इंडो-पैसिफिक रणनीति जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा हो सकती है। हालांकि अभी तक किसी आधिकारिक बैठक की पुष्टि नहीं हुई है। Slovakia दौरा क्यों है खास? फ्रांस के बाद पीएम मोदी स्लोवाकिया जाएंगे। यह दौरा इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि दोनों देशों के रिश्तों के इतिहास में पहली बार कोई भारतीय प्रधानमंत्री स्लोवाकिया का दौरा करेगा। भारत और स्लोवाकिया के बीच पिछले कुछ समय में व्यापार और तकनीकी सहयोग तेजी से बढ़ा है। खासकर ऑटोमोबाइल, मैन्युफैक्चरिंग, डिजिटल टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप सेक्टर में दोनों देशों की दिलचस्पी बढ़ी है। भारत की Global Image हो रही मजबूत अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार मानते हैं कि पीएम मोदी के लगातार विदेशी दौरों का असर भारत की वैश्विक छवि पर साफ दिखाई दे रहा है। चाहे G20 हो, QUAD हो या G7 जैसे बड़े मंच, भारत अब हर जगह मजबूत उपस्थिति दर्ज करा रहा है। यूरोप के साथ मजबूत होते रिश्ते आने वाले समय में भारत के व्यापार, निवेश और टेक्नोलॉजी सेक्टर को भी फायदा पहुंचा सकते हैं। यही वजह है कि पीएम मोदी का यह दौरा राजनीतिक के साथ-साथ आर्थिक नजरिए से भी बेहद अहम माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IMD

IMD Alert: नौतपा के बीच बदलेगा मौसम, 15 राज्यों में बारिश और तेज हवा संभव

देशभर में पड़ रही भीषण गर्मी के बीच लोगों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली, यूपी और बिहार समेत करीब 15 राज्यों में अगले तीन दिनों तक बारिश और तेज आंधी का अलर्ट जारी किया है। मौसम विभाग का कहना है कि पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने की वजह से कई इलाकों में मौसम करवट लेने वाला है, जिससे तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है। हालांकि बारिश की राहत आने से पहले उत्तर और मध्य भारत के कई हिस्सों में गर्मी ने लोगों की हालत खराब कर दी है। राजस्थान का श्रीगंगानगर एक बार फिर देश का सबसे गर्म शहर रिकॉर्ड किया गया, जहां तापमान 48 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया। Rajasthan में Heatwave का कहर, श्रीगंगानगर सबसे गर्म राजस्थान इस समय तेज लू और झुलसा देने वाली गर्मी की चपेट में है। श्रीगंगानगर में तापमान 48.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा बीकानेर, फलोदी, जैसलमेर और चूरू जैसे शहरों में भी पारा 45 से 47 डिग्री के बीच बना हुआ है। दोपहर के समय सड़कें सूनी नजर आ रही हैं। गर्म हवाओं के कारण लोग घरों से बाहर निकलने से बच रहे हैं। कई शहरों में बिजली और पानी की बढ़ती मांग ने भी लोगों की परेशानियां बढ़ा दी हैं। MP, Delhi-UP में भी लोगों का हाल बेहाल मध्य प्रदेश में नौतपा के दौरान गर्मी ने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। खजुराहो, नौगांव और ग्वालियर जैसे इलाकों में तापमान 46 डिग्री के करीब पहुंच गया। भोपाल और इंदौर समेत कई जिलों में हीटवेव अलर्ट जारी किया गया है। वहीं दिल्ली, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में भी लोगों को उमस और तेज धूप का सामना करना पड़ रहा है। दिन के समय गर्म हवाएं चलने से आम जनजीवन प्रभावित हो रहा है। अगले 72 घंटे में बदल सकता है मौसम IMD के मुताबिक अगले तीन दिनों में राजस्थान, मध्य प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, यूपी, बिहार, झारखंड और महाराष्ट्र के कुछ हिस्सों में हल्की से मध्यम बारिश हो सकती है। कई जगहों पर तेज हवाएं और गरज-चमक के साथ बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों का मानना है कि इस बदलाव से तापमान में 2 से 4 डिग्री तक गिरावट आ सकती है और लोगों को भीषण गर्मी से कुछ राहत मिलेगी। क्या होता है नौतपा? मई के आखिरी दिनों में पड़ने वाले नौतपा को साल का सबसे गर्म दौर माना जाता है। इस दौरान सूर्य की किरणें सीधे धरती पर पड़ती हैं, जिससे तापमान तेजी से बढ़ता है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक यही गर्मी आगे चलकर मानसून सिस्टम को मजबूत बनाने में मदद करती है। Health Experts ने दी सावधानी बरतने की सलाह डॉक्टरों और मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर में बाहर निकलने से बचने की सलाह दी है। ज्यादा पानी पीने, हल्के कपड़े पहनने और बच्चों व बुजुर्गों का खास ध्यान रखने को कहा गया है। विशेषज्ञों का कहना है कि गर्मी और लू को हल्के में लेना खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे में मौसम बदलने तक सतर्क रहना बेहद जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बिलासपुर में 7-8 मिनट में हो रही वाहनों की फिटनेस जांच पर सवाल, 800 की फीस के बदले 5 हजार मांगने का आरोप

बिलासपुर। मटियारी-बेलतरा बाईपास स्थित निजी वाहन फिटनेस सेंटर में व्यावसायिक वाहनों की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। मौके पर एक वाहन की फिटनेस जांच महज 7 से 8 मिनट में पूरी होती दिखाई दी। जांच के बाद बाहर निकली एक बस गेट पर दस्तावेज लेते समय ही बंद हो गई। चालक ने दोबारा इंजन स्टार्ट करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिरकार लोगों को धक्का लगाकर बस को हटाना पड़ा। घटना ने फिटनेस जांच की गुणवत्ता और प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेंटर के बाहर सुबह से ही बसों और ट्रकों की कतार लगी थी। कई वाहन मालिक जांच से पहले इंडिकेटर, हेडलाइट और दूसरी लाइटों की खराबियां ठीक कराते नजर आए। कुछ वाहनों पर रेडियम पट्टियां भी लगाई जा रही थीं। कमियां दूर करने के बाद वाहनों को जांच के लिए अंदर भेजा जा रहा था। ढाई साल पहले निजी संस्था को सौंपी गई व्यवस्था करीब ढाई साल पहले तक व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच आरटीओ परिसर में होती थी। बाद में यह व्यवस्था निजी संस्था रोविंग आई सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दी गई। इसके बाद फिटनेस सेंटर को मटियारी-बेलतरा बाईपास पर स्थानांतरित कर दिया गया। अब वाहन मालिकों को लगरा स्थित आरटीओ कार्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर इस सेंटर तक जाना पड़ता है। व्यवस्था निजी हाथों में जाने के बाद जांच प्रक्रिया, समय और खर्च को लेकर वाहन मालिकों की शिकायतें सामने आ रही हैं। 29 बिंदुओं की जांच 7-8 मिनट में कैसे? बिलासपुर बस मालिक परिवहन संघ के महासचिव नितिन जुनेजा ने कहा कि फिटनेस जांच निजी हाथों में जाने के बाद वाहन मालिकों की परेशानियां बढ़ी हैं। उनके मुताबिक, कुछ लोग संपर्कों के जरिए जल्दी काम करा लेते हैं, जबकि अन्य वाहन मालिकों को चार-चार घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। इससे उनका समय और पैसा दोनों प्रभावित होते हैं। जुनेजा के अनुसार, फिटनेस जांच के दौरान करीब 29 बिंदुओं की जांच की जानी होती है। इसमें ब्रेक, सस्पेंशन, स्टीयरिंग, लाइट, टायर, उत्सर्जन मानक और अन्य सुरक्षा उपकरणों की स्थिति शामिल है। संबंधित वाहन श्रेणियों में स्पीड गवर्नर और जीपीएस उपकरणों की जांच भी जरूरी हो सकती है। ऐसे में मौके पर 7 से 8 मिनट में जांच पूरी होते दिखाई देने से यह सवाल उठ रहा है कि सभी जरूरी तकनीकी बिंदुओं की जांच किस तरह की जा रही है। हालांकि, जांच की गुणवत्ता और नियमों के पालन की वास्तविक स्थिति रिकॉर्ड और प्रक्रिया की विस्तृत पड़ताल के बाद ही स्पष्ट होगी। 800 रुपये की फीस के बदले 5 हजार मांगने का आरोप कुछ वाहन मालिकों ने आरोप लगाया कि करीब 800 रुपये की निर्धारित सरकारी फीस वाले काम के लिए उनसे 5 हजार रुपये तक मांगे जाते हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वाहन मालिकों के मुताबिक, सेंटर के बाहर एजेंट सक्रिय रहते हैं। उनका दावा है कि आरटीओ कार्यालय के पास एजेंटों से बातचीत के बाद उन्हें फिटनेस सेंटर भेजा जाता है। वहीं, सेंटर में दलालों के प्रवेश पर प्रतिबंध होने की बात भी कही जा रही है। इन आरोपों के संबंध में शुल्क का आधिकारिक विवरण, भुगतान की रसीदें और संबंधित रिकॉर्ड सामने आने पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। सेंटर प्रबंधन का दावा- जांच प्रक्रिया सही फिटनेस सेंटर के मैनेजर नवीन ने बताया कि एक वाहन की जांच में 7 से 8 मिनट लगते हैं। उनके मुताबिक, वाहनों की फिटनेस जांच सही तरीके से की जाती है और जांच क्षेत्र में किसी को प्रवेश नहीं दिया जाता। उन्होंने बताया कि सेंटर में निगरानी के लिए 36 कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा, वाहन चालकों के लिए पीने के पानी और बैठने की व्यवस्था भी की गई है। फिलहाल, कम समय में फिटनेस जांच पूरी होने और अतिरिक्त रकम मांगे जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच से ही व्यवस्था की पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों के पालन की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
CEC

Anti-CEC Protest: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज, 16 अक्टूबर को Tiranga March

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन के बीच दिल्ली में राजनीतिक माहौल गर्म है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके, AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भी चर्चा तेज है। इस पूरे विवाद के केंद्र में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई है। 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पुलिस ने कई नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था। इसके बाद CJP और छात्र संगठनों ने कार्रवाई पर सवाल उठाए। वहीं, पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संभावित सुरक्षा जोखिमों को प्रतिबंधों की वजह बताया। प्रेस कॉन्फ्रेंस और हंगामे को लेकर क्या है अपडेट? 15 अक्टूबर को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में अभिजीत दिपके, नेहा बोरा और कपिल सिब्बल की प्रेस कॉन्फ्रेंस प्रस्तावित थी। इसका संबंध CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन और प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई से था। हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हंगामा होने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस घटना के बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक बयान और प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी सामने आना जरूरी है। इससे पहले 11 अक्टूबर को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के बाहर प्रदर्शनकारियों के जुटने और नारेबाजी के बाद पुलिस की मौजूदगी बढ़ गई थी। इस घटनाक्रम ने विरोध प्रदर्शन को लेकर चल रहे विवाद को और चर्चा में ला दिया था। CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग क्यों? CJP और कई विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान अनियमितताएं हुई हैं और बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठते हैं। विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होनी चाहिए। उनका तर्क है कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने किसी भी गलत काम के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। ऐसे में SIR से जुड़े दावों और आपत्तियों का आकलन आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर किया जाना जरूरी है। सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत से बढ़ा विवाद CJP से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने के मामले में हिरासत में लिया गया था। बाद में दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की खबर सामने आई। CJP ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध की आवाज को दबाया जा रहा है। संगठन के नेताओं ने साफ किया कि CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर उनका आंदोलन जारी रहेगा। दिल्ली पुलिस ने अपने पक्ष में कहा कि प्रदर्शन की अनुमति, पहले के घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कदम उठाए गए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कार्रवाई को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। नेहा बोरा समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए घटनाक्रम के दौरान AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा समेत कई राजनीतिक और छात्र संगठनों से जुड़े लोगों को हिरासत में लिया गया था। इस कार्रवाई में CJP के नेता और अन्य प्रदर्शनकारी भी शामिल थे। इसके बाद छात्र संगठनों और विपक्षी नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि विरोध दर्ज कराने के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। वहीं, पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और संभावित अव्यवस्था का हवाला दिया। इस पूरे मामले ने प्रदर्शन की अनुमति और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च का ऐलान CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में शाम 5 बजे तिरंगा मार्च का आह्वान किया है। उन्होंने लोगों से राष्ट्रीय ध्वज के साथ जुटने की अपील की है। दिपके के मुताबिक, इस कार्यक्रम का उद्देश्य यह संदेश देना है कि तिरंगा फहराना अपराध नहीं है। यह आह्वान CJP नेताओं की हिरासत और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर हुए विवाद के बाद किया गया है। अब इस कार्यक्रम पर भी लोगों की नजर है। प्रशासन की अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद ही आयोजन की स्थिति अधिक स्पष्ट होगी। Jantar Mantar Protest: आगे क्या होगा? दिल्ली में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से शुरू हुआ विवाद अब SIR, मतदाता सूची, प्रदर्शन की अनुमति और पुलिस कार्रवाई जैसे कई मुद्दों से जुड़ गया है। एक तरफ CJP और अन्य संगठन अपने विरोध को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत पर जोर दे रही है। फिलहाल, प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुई कथित घटना की पुष्टि, तिरंगा मार्च को लेकर प्रशासन का रुख और SIR से संबंधित कानूनी कार्यवाही आगे की अहम कड़ियां होंगी। इन घटनाक्रमों से तय होगा कि दिल्ली में जारी Anti-CEC Protest आगे क्या मोड़ लेता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CNAP

CNAP Service: अब अनजान नंबर से कॉल आने पर दिखेगा नाम, 1 नवंबर से नया नियम

अब अनजान नंबर से फोन आने पर यह जानना आसान हो सकता है कि कॉल किसके नाम पर रजिस्टर्ड है। केंद्र सरकार की नई व्यवस्था के तहत 1 नवंबर 2026 से मोबाइल स्क्रीन पर कॉल करने वाले का नाम दिखाने की सुविधा शुरू करने की तैयारी है। इस सिस्टम का नाम Calling Name Presentation (CNAP) है। इसका मकसद अनजान कॉल की पहचान आसान बनाना और लोगों को स्पैम व धोखाधड़ी वाली कॉल के प्रति सतर्क करना है। इस व्यवस्था के तहत अगर आपके फोन पर किसी ऐसे नंबर से कॉल आती है, जो कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव नहीं है, तो स्क्रीन पर केवल नंबर ही नहीं, बल्कि टेलीकॉम रिकॉर्ड में दर्ज नाम भी दिखाई दे सकता है। वहीं, विदेश से आने वाली कॉल के लिए स्क्रीन पर ‘International Call’ लिखा दिख सकता है। Caller Name Display: कैसे काम करेगी नई सुविधा? अभी तक अनजान नंबर से कॉल आने पर ज्यादातर लोगों को यह पता लगाने के लिए Truecaller जैसे ऐप या दूसरी सेवाओं की मदद लेनी पड़ती है कि फोन किसने किया है। CNAP सुविधा लागू होने के बाद कॉल करने वाले की पहचान दिखाने के लिए टेलीकॉम कंपनियों के रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें कॉल करने वाले के मोबाइल कनेक्शन के साथ दर्ज नाम दिखाया जा सकता है। यानी नंबर सेव नहीं होने पर भी आपको कॉल करने वाले की पहचान का अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी। दूरसंचार विभाग के निर्देश के अनुसार, 1 नवंबर 2026 से 4G और उससे नई तकनीक वाले मोबाइल नेटवर्क पर यह सुविधा शुरू की जानी है। हालांकि, अलग-अलग नेटवर्क पर इसकी उपलब्धता और शुरुआत की स्थिति अलग हो सकती है। विदेशी नंबर से फोन आया तो स्क्रीन पर क्या दिखेगा? नई व्यवस्था का एक अहम हिस्सा इंटरनेशनल कॉल की पहचान करना है। अगर विदेश से किसी अनजान नंबर पर कॉल आती है, तो स्क्रीन पर ‘International Call’ लिखा दिखाई दे सकता है। इससे यूजर को यह समझने में मदद मिलेगी कि कॉल अंतरराष्ट्रीय नंबर से आ रही है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि विदेश से आने वाली हर कॉल फर्जी होती है। विदेश में रहने वाले रिश्तेदार, दोस्त या कारोबारी संपर्क भी कॉल कर सकते हैं। इसलिए केवल इस संदेश को देखकर किसी कॉल को धोखाधड़ी मान लेना सही नहीं होगा। क्या फर्जी कॉल और साइबर फ्रॉड पर लगेगी लगाम? आजकल बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या दूसरी संस्थाओं का प्रतिनिधि बनकर लोगों को फोन करने के मामले सामने आते रहते हैं। कई बार लोग कॉल करने वाले की बातों में आकर अपनी निजी जानकारी साझा कर देते हैं। CNAP सुविधा से कॉल करने वाले की पहचान समझने में मदद मिल सकती है। लेकिन यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि स्क्रीन पर नाम दिखने का मतलब यह नहीं है कि कॉल पूरी तरह सुरक्षित है। किसी भी अनजान व्यक्ति को OTP, बैंकिंग पासवर्ड या संवेदनशील जानकारी न बताएं। बैंक या सरकारी संस्था के नाम पर कॉल आने पर आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करना बेहतर है। क्या 4G और 5G यूजर्स को मिलेगा फायदा? CNAP को 4G और उससे नई तकनीक वाले मोबाइल नेटवर्क पर लागू करने की योजना है। इसमें 5G नेटवर्क भी शामिल हैं। हालांकि, शुरुआत में सभी यूजर्स को एक साथ या एक ही तरीके से यह सुविधा मिले, यह जरूरी नहीं है। पुराने 2G और 3G नेटवर्क के लिए व्यवस्था को लेकर अलग से निर्णय लिया जा सकता है। यूजर्स को सुविधा मिलने की स्थिति उनके टेलीकॉम ऑपरेटर और नेटवर्क सपोर्ट पर भी निर्भर करेगी। Privacy को लेकर क्या है व्यवस्था? कॉलर का नाम दिखाने की सुविधा के साथ यूजर्स की निजता का ध्यान रखना भी जरूरी है। CNAP में पहचान से जुड़ी जानकारी टेलीकॉम रिकॉर्ड के आधार पर दिखाई जाती है। जिन यूजर्स ने नियमानुसार Calling Line Identification Restriction (CLIR) सुविधा ली है, उनके लिए नाम छिपाने से जुड़े प्रावधान भी लागू हो सकते हैं। बिजनेस कनेक्शन के मामले में सत्यापन के बाद कंपनी या कारोबार का नाम दिखाने की सुविधा भी दी जा सकती है। इससे ग्राहकों को आधिकारिक बिजनेस कॉल पहचानने में मदद मिल सकती है। 1 नवंबर से मोबाइल यूजर्स को क्या फायदा होगा? नई Caller Name Display सुविधा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अनजान नंबर से कॉल आने पर यूजर को कॉल करने वाले के बारे में अतिरिक्त जानकारी मिल सकती है। विदेश से आने वाली कॉल के लिए ‘International Call’ का संकेत भी उपयोगी हो सकता है। हालांकि, यह सुविधा हर फर्जी कॉल को रोकने का पक्का समाधान नहीं है। कॉल उठाने से पहले पहचान पर ध्यान देना, संदिग्ध लिंक से बचना और निजी जानकारी साझा न करना अब भी जरूरी रहेगा। कुल मिलाकर, CNAP सुविधा मोबाइल कॉल की पहचान को पहले से आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। अगर इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो आम लोगों को अनजान कॉल समझने और संभावित धोखाधड़ी से सतर्क रहने में मदद मिल सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

जर्मनी में रिहायशी इमारत में आग से 3 भारतीयों की मौत, हत्या के शक में रोमानियाई नागरिक गिरफ्तार

बोखुम। जर्मनी केl बोखुम शहर में एक रिहायशी इमारत में आग लगने से तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। मृतकों में 25 और 27 साल की दो महिलाएं और 26 साल का एक युवक शामिल है। हादसे में धुएं की चपेट में आए पांच अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने मामले में हत्या के संदेह में 41 वर्षीय रोमानियाई नागरिक को गिरफ्तार किया है। जांचकर्ता आगजनी की आशंका समेत आग लगने के कारणों का पता लगा रहे हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि आग जानबूझकर लगाई गई थी या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी। तड़के 4:15 बजे लगी आग, दूसरी मंजिल पर मिले शव आग मंगलवार तड़के करीब 4:15 बजे बोखुम के होफ्स्टेड इलाके की एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत में लगी। दमकलकर्मियों के मौके पर पहुंचने तक आग काफी फैल चुकी थी। बाद में दूसरी मंजिल पर स्थित एक फ्लैट से तीनों भारतीयों के शव बरामद किए गए। दमकलकर्मियों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। आग और धुएं के कारण इमारत में फंसे अन्य लोगों को भी बाहर निकालने में काफी परेशानी हुई। सीढ़ियों तक पहुंची आग, बाहर निकलने का रास्ता हुआ बंद जर्मन अखबार ‘बिल्ड’ के मुताबिक, पड़ोसियों ने बताया कि इमारत के गलियारे में रखी बच्चों की कुछ गाड़ियों में आग लगी थी। इसके बाद आग लकड़ी की सीढ़ियों तक फैल गई, जिससे लोगों के बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया। हालांकि, आग लगने की इस वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दमकलकर्मियों ने दो लोगों को हाइड्रोलिक सीढ़ी और दो अन्य को पोर्टेबल सीढ़ियों की मदद से बाहर निकाला। एक अन्य व्यक्ति ने जान बचाने के लिए सुरक्षा के लिहाज से लगाए गए एयर कुशन पर छलांग लगाई। दमकल विभाग के प्रवक्ता के अनुसार, आग और धुएं की वजह से सीढ़ियों के रास्ते ऊपरी मंजिलों तक पहुंचना संभव नहीं था। आग लगने से एक दिन पहले भी पहुंची थी पुलिस बोखुम पुलिस के प्रवक्ता जेन्स आर्ट्सवागर ने ‘बिल्ड’ को बताया कि घटना से एक दिन पहले इसी इमारत में विवाद की सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची थी। मौके पर पुलिस की एक गाड़ी भेजी गई थी, लेकिन किसी ने औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि पहले हुए विवाद का आग लगने की घटना से कोई संबंध था या नहीं। तकनीकी खराबी की आशंका खारिज, आगजनी के एंगल से जांच जांचकर्ताओं ने आग लगने के पीछे तकनीकी खराबी की आशंका को खारिज कर दिया है। हालांकि, आग की वास्तविक वजह अभी सामने नहीं आई है। पुलिस गिरफ्तार व्यक्ति की संभावित भूमिका, आग लगने की परिस्थितियों और तीनों भारतीय नागरिकों की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
Imran Khan

Imran Khan भारत छोड़ने के नोटिस पर विवाद, Akshay Kumar और Adnan Sami की Citizenship भी चर्चा में

बॉलीवुड में किसी अभिनेता की फिल्म हिट हो या फ्लॉप, उससे जुड़ी खबरें अक्सर चर्चा में रहती हैं। लेकिन जब बात नागरिकता की आती है, तो मामला थोड़ा अलग हो जाता है। अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस मिलने के बाद एक बार फिर अक्षय कुमार, अदनान सामी, आलिया भट्ट और कटरीना कैफ की नागरिकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। किसी कलाकार का भारत में जन्म लेना, यहां रहना या हिंदी फिल्मों में काम करना उसे अपने आप भारतीय नागरिक नहीं बना देता। वहीं, विदेशी नागरिकता रखने वाले व्यक्ति के भारत में रहने और काम करने के भी कुछ नियम हैं। ऐसे में समझना जरूरी है कि इमरान खान के मामले में क्या सामने आया है और भारत में Citizenship Rules आखिर क्या कहते हैं। Imran Khan को क्यों मिला भारत छोड़ने का नोटिस? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनेता इमरान खान (Imran Khan) को मुंबई पुलिस ने 28 अक्टूबर 2026 तक भारत छोड़ने का नोटिस दिया है। इमरान खान अमेरिकी नागरिक हैं और उनकी नागरिकता को लेकर यह मामला चर्चा में आया है। यह विवाद 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए गए थे। इस आंदोलन में इमरान खान की भागीदारी के बाद भाजपा नेता किरीट सोमैया ने उनकी विदेशी नागरिकता का हवाला देते हुए अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद इमरान खान को नोटिस जारी किए जाने की खबर सामने आई। हालांकि, किसी व्यक्ति को नोटिस मिलना और उसके खिलाफ किसी आरोप का अंतिम रूप से साबित होना दो अलग-अलग बातें हैं। इस मामले में नोटिस के आधार और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रखना जरूरी होगा। भारत में Citizenship Rules क्या कहते हैं? नागरिकता मुख्य रूप से Citizenship Act, 1955 के तहत तय होती है। कानून में जन्म, वंश, पंजीकरण और देशीयकरण यानी Naturalisation के जरिए नागरिकता प्राप्त करने के प्रावधान हैं। हर रास्ते के लिए अलग-अलग शर्तें निर्धारित हैं। भारत की नागरिकता से जुड़े 5 जरूरी नियम: नागरिकता से जुड़े नियमों की आधिकारिक जानकारी भारत सरकार के Indian Citizenship Online Portal पर उपलब्ध है। OCI Card क्या है और इसके धारकों को कौन-से अधिकार मिलते हैं? OCI का पूरा नाम Overseas Citizen of India है। कई लोग इसे दोहरी नागरिकता समझ लेते हैं, लेकिन यह भारतीय नागरिकता नहीं है। OCI कार्डधारक विदेशी नागरिक ही रहते हैं और उनके पास किसी दूसरे देश का पासपोर्ट होता है। कार्ड के जरिए पात्र लोगों को भारत आने-जाने और रहने सहित कई सुविधाएं मिलती हैं। हालांकि, वे भारतीय नागरिकों की तरह चुनाव में मतदान नहीं कर सकते और न ही संसद या राज्य विधानसभाओं का चुनाव लड़ सकते हैं। कार्डधारकों पर विदेशी नागरिकों और इमिग्रेशन से जुड़े लागू नियम भी प्रभाव डालते हैं। किसी व्यक्ति के मामले में कार्रवाई की वैधता संबंधित कानून और परिस्थितियों के आधार पर तय होती है। क्या विदेशी नागरिक भारत में Protest कर सकते हैं? इमरान खान के मामले के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या विदेशी नागरिक या OCI कार्डधारक भारत में राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने जैसे अधिकार भारतीय नागरिकों को प्राप्त हैं, जो कानून के तहत उचित प्रतिबंधों के अधीन हैं। विदेशी नागरिकों को ये अधिकार उसी रूप में प्राप्त नहीं हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि किसी प्रदर्शन में विदेशी नागरिक की मौजूदगी अपने आप गैरकानूनी हो जाती है। मामले की परिस्थितियां, लागू इमिग्रेशन नियम, संबंधित गतिविधि और प्रशासन की कार्रवाई के आधार को समझना जरूरी है। इमरान खान के मामले में भी नोटिस जारी करने का आधार और आगे की कानूनी प्रक्रिया अहम होगी। Citizenship Controversy: इन मामलों से क्या समझें? इमरान खान, अक्षय कुमार, अदनान सामी, आलिया भट्ट और कटरीना कैफ की नागरिकता से जुड़े मामले अलग-अलग हैं। इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस मिलने की खबर सामने आई है, अक्षय कुमार को 2023 में भारतीय नागरिकता मिली, जबकि अदनान सामी ने 2016 में भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी। दूसरी ओर, आलिया भट्ट और कटरीना कैफ के पास ब्रिटिश नागरिकता है। इन सभी मामलों में एक बात समान है—किसी व्यक्ति की लोकप्रियता, जन्मस्थान या भारत में काम करने से उसकी नागरिकता अपने आप तय नहीं होती। इसके लिए कानूनी प्रावधान और आधिकारिक दस्तावेज मायने रखते हैं। इसलिए नागरिकता से जुड़े किसी भी विवाद को समझते समय सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बजाय तथ्यों, आधिकारिक जानकारी और लागू कानूनों पर भरोसा करना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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