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₹103 में खरीदो, ₹135 में बेचो! महाराजगंज सीमा पर Petrol Smuggling का खुलासा

उत्तर प्रदेश के महाराजगंज जिले से लगी भारत-नेपाल सीमा इन दिनों पेट्रोल तस्करी को लेकर चर्चा में है। यहां भारत में करीब ₹103 प्रति लीटर मिलने वाला पेट्रोल नेपाल पहुंचते-पहुंचते ₹135 तक बिक रहा है। दोनों देशों के बीच तेल की कीमतों में बड़ा अंतर होने की वजह से सीमा पार अवैध कारोबार तेजी से फैल रहा है। स्थानीय लोगों के मुताबिक, सीमा से जुड़े गांवों में सुबह से देर रात तक संदिग्ध गतिविधियां देखी जा रही हैं। कुछ लोग बाइक और छोटे वाहनों में बार-बार पेट्रोल भरवाकर नेपाल ले जा रहे हैं। वहां ऊंचे दामों में तेल बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जा रहा है। Border Area में कैसे चल रहा है पूरा खेल? महाराजगंज से लगी भारत-नेपाल सीमा का बड़ा हिस्सा खुला है। कई गांव ऐसे हैं जहां छोटे रास्तों से आसानी से आवाजाही हो जाती है। तस्कर इसी का फायदा उठा रहे हैं। बताया जा रहा है कि पेट्रोल को छोटे कैन, ड्रम और बाइक की टंकियों में भरकर नेपाल पहुंचाया जा रहा है। सीमा क्षेत्र में रहने वाले लोगों का कहना है कि कुछ पेट्रोल पंपों पर अचानक बिक्री बढ़ गई है। कई बार आम ग्राहकों को लंबी लाइन में भी लगना पड़ रहा है। ग्रामीणों को शक है कि बड़ी मात्रा में तेल सीमा पार भेजा जा रहा है। Petrol Price Difference बना तस्करी की बड़ी वजह भारत और नेपाल में पेट्रोल की कीमतों का अंतर इस पूरे मामले की सबसे बड़ी वजह माना जा रहा है। भारत में सस्ता मिलने वाला पेट्रोल नेपाल में महंगे दामों पर बिक रहा है। ऐसे में तस्करों को हर लीटर पर अच्छा फायदा मिल रहा है। जानकारों का मानना है कि जब तक दोनों देशों में ईंधन की कीमतों में इतना अंतर रहेगा, तब तक इस तरह की तस्करी को पूरी तरह रोक पाना मुश्किल होगा। प्रशासन और SSB ने बढ़ाई निगरानी मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस, एसएसबी और स्थानीय प्रशासन ने बॉर्डर एरिया में निगरानी बढ़ा दी है। पेट्रोल पंपों पर संदिग्ध खरीदारी पर नजर रखी जा रही है। कई इलाकों में चेकिंग अभियान भी चलाए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अवैध तरीके से ईंधन ले जाने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। हालांकि खुली सीमा और गांवों के छोटे रास्ते प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। स्थानीय लोगों में बढ़ी चिंता सीमा से जुड़े इलाकों में रहने वाले लोगों का कहना है कि इस अवैध कारोबार का असर अब आम जिंदगी पर भी दिखने लगा है। पेट्रोल की मांग बढ़ने से कई बार स्थानीय लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है। वहीं सुरक्षा एजेंसियों को भी आशंका है कि इस तरह का नेटवर्क भविष्य में बड़ी समस्या बन सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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CM Siddaramaiah

मंच पर भावुक दिखे DK Shivakumar, CM Siddaramaiah को किया प्रणाम

कर्नाटक की राजनीति में उस वक्त भावुक माहौल बन गया, जब उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने सार्वजनिक मंच पर मुख्यमंत्री सिद्धारमैया (CM Siddaramaiah) के पैर छू लिए। यह दृश्य कैमरे में कैद होते ही सोशल media पर तेजी से वायरल हो गया और राज्य की राजनीति में नई चर्चाओं को जन्म दे गया। इस्तीफे की चर्चाओं के बीच वायरल हुआ Video पिछले कुछ दिनों से कर्नाटक कांग्रेस में नेतृत्व बदलाव और इस्तीफे को लेकर कई तरह की अटकलें लगाई जा रही थीं। इसी बीच एक कार्यक्रम के दौरान डीके शिवकुमार का यह भावुक अंदाज लोगों का ध्यान खींच ले गया। वीडियो में देखा जा सकता है कि शिवकुमार मंच पर सिद्धारमैया के पास पहुंचे और सम्मान जताते हुए उनके पैर छुए। इस दौरान वहां मौजूद नेताओं और कार्यकर्ताओं ने तालियां बजाकर इस पल का स्वागत किया। Congress में एकता का संदेश या सियासी रणनीति? राजनीतिक माहौल के बीच सामने आया यह दृश्य कांग्रेस के भीतर एक अलग संदेश देता नजर आया। कांग्रेस के दोनों बड़े नेताओं के बीच लंबे समय से राजनीतिक तालमेल और नेतृत्व को लेकर चर्चा होती रही है। कुछ लोग इसे पार्टी में एकता और सम्मान का प्रतीक मान रहे हैं, जबकि विपक्ष और राजनीतिक विश्लेषक इसे कर्नाटक की अंदरूनी सियासत से जोड़कर देख रहे हैं। Social Media पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई यूजर्स ने इसे भारतीय संस्कृति और वरिष्ठ नेताओं के सम्मान से जोड़कर देखा, जबकि कुछ लोगों ने इसे सियासी रणनीति बताया। कांग्रेस की तरफ से अभी तक नहीं आया Official Statement हालांकि कांग्रेस की तरफ से अब तक किसी भी तरह के इस्तीफे या नेतृत्व परिवर्तन को लेकर आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। लेकिन इस Emotional Moment ने कर्नाटक की राजनीति में हलचल जरूर बढ़ा दी है। आने वाले दिनों में पार्टी क्या फैसला लेती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Shivraj Singh Chouhan Book Launch

शिवराज की किताब में बड़ा खुलासा: चुनावी संकट में PM मोदी ने ऐसे संभाला ‘मामाजी’ को

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय कृषि मंत्री Shivraj Singh Chouhan ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के साथ अपने 35 वर्षों के राजनीतिक और व्यक्तिगत अनुभवों को एक किताब में समेटा है।‘अपनापन : नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव’ नाम की इस किताब का विमोचन मंगलवार 26 मई को दिल्ली के पूसा स्थित NASC कॉम्प्लेक्स में हुआ। कार्यक्रम में देश के पूर्व प्रधानमंत्री H. D. Deve Gowda और पूर्व उपराष्ट्रपति M. Venkaiah Naidu विशेष रूप से मौजूद रहे। यह किताब सिर्फ राजनीतिक संस्मरण नहीं, बल्कि भाजपा संगठन, कार्यकर्ता संस्कृति, संकट के समय नेतृत्व और नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व के कई अनसुने पहलुओं को सामने लाती है। किताब में 1990 के दशक से लेकर कोरोना काल, मध्य प्रदेश चुनाव, संगठनात्मक संघर्ष और पहलगाम आतंकी हमले जैसे कई महत्वपूर्ण प्रसंगों का जिक्र किया गया है। 2023 चुनाव से पहले का सबसे भावुक किस्सा किताब का सबसे चर्चित हिस्सा 2023 के मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव से जुड़ा है। उस समय भाजपा की पहली सूची जारी हुई थी, लेकिन उसमें शिवराज सिंह चौहान का नाम शामिल नहीं था। विपक्ष ने इसे तुरंत मुद्दा बना लिया और यह नैरेटिव बनाया जाने लगा कि “मामाजी का दौर खत्म हो गया है।” इसी दौरान शिवराज सिंह चौहान के एक भाषण की लाइन —“यदि हम चले जाएंगे तो याद बहुत आएंगे”को सोशल मीडिया और विपक्षी नेताओं ने राजनीतिक विदाई के संकेत की तरह प्रचारित करना शुरू कर दिया। शिवराज लिखते हैं कि उस समय वे बेहद मानसिक दबाव में थे। तभी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का फोन आया। किताब के अनुसार, मोदी ने बातचीत की शुरुआत इन शब्दों से की— “मैं मुख्यमंत्री से बात नहीं कर रहा, मैं अपने शिवराज से बात कर रहा हूं।” शिवराज के मुताबिक, इसके बाद मोदी ने राजनीति की नहीं बल्कि उनके मन की बात की। उन्होंने कहा— “इतनी चिंता क्यों कर रहे हो? कुछ दिन एकांत में जाओ, अपने भीतर झांको, मन को शांत करो।” किताब में शिवराज ने लिखा है कि उस समय मोदी किसी प्रधानमंत्री की तरह नहीं, बल्कि बड़े भाई की तरह बात कर रहे थे। उन्हें समझ आ गया था कि यदि शिवराज का मनोबल कमजोर हुआ, तो उसका असर लाखों भाजपा कार्यकर्ताओं पर पड़ेगा। उत्तराखंड जाकर किया आत्ममंथन फोन कॉल के बाद शिवराज सिंह चौहान कुछ दिनों के लिए उत्तराखंड गए। गंगा किनारे समय बिताया और आत्ममंथन किया।वापस लौटने के बाद उन्होंने पूरी ताकत के साथ चुनाव प्रचार संभाला। किताब में दावा किया गया है कि उन्होंने सिर्फ 13-14 दिनों में 165 से ज्यादा जनसभाएं और रोड शो किए। भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच यह संदेश गया कि पार्टी नेतृत्व पूरी तरह उनके साथ खड़ा है। पहलगाम आतंकी हमला: “इस बार का ऑपरेशन अलग होगा” किताब की शुरुआत अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के जिक्र से होती है, जिसमें 26 लोगों की मौत हुई थी। उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सऊदी अरब दौरे पर थे, लेकिन घटना के बाद तुरंत भारत लौट आए। शिवराज किताब में लिखते हैं कि हमले के बाद हुई कैबिनेट बैठक में पूरे देश की तरह मंत्रियों के मन में भी गुस्सा और बेचैनी थी। लेकिन नरेंद्र मोदी बेहद शांत दिखाई दे रहे थे। उसी बैठक में उन्होंने कहा— “इस बार का ऑपरेशन अलग होगा। यह सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक से भी अलग होगा। जिन्होंने यह किया है, उन्हें और उनके आकाओं को नहीं छोड़ेंगे।” शिवराज के अनुसार, मोदी का यह बयान भावनात्मक प्रतिक्रिया नहीं बल्कि एक ठोस रणनीतिक संकल्प था। उन्होंने इसे संकट के समय धैर्यपूर्ण नेतृत्व की मिसाल बताया। 1998 का किस्सा: जब भाजपा कार्यकर्ताओं से पूछा गया था — किसके पास ईमेल आईडी है? किताब में 1990 के दशक का एक दिलचस्प प्रसंग भी शामिल है। उस समय भारत में कंप्यूटर और इंटरनेट का इस्तेमाल बहुत सीमित था। शिवराज लिखते हैं कि उन्होंने नरेंद्र मोदी को दिल्ली के एक छोटे से कमरे में घंटों डेस्कटॉप कंप्यूटर पर काम करते देखा था। उस समय मोदी भाजपा संगठन में महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाल रहे थे और तकनीक को लेकर काफी उत्साहित रहते थे। 1998 में मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव की तैयारी के दौरान एक बैठक में मोदी ने कार्यकर्ताओं से पूछा— “किसके पास ईमेल आईडी है?” उस दौर में अधिकांश नेताओं और कार्यकर्ताओं को ईमेल की जानकारी तक नहीं थी। शिवराज के मुताबिक, मोदी राजनीति में तकनीक और डिजिटल कम्युनिकेशन की ताकत को बहुत पहले समझ चुके थे। कोरोना काल और कार्यकर्ताओं के लिए मोदी की चिंता किताब में कोरोना महामारी के दौरान के अनुभवों का भी जिक्र है। शिवराज ने लिखा कि महामारी के सबसे कठिन दौर में भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार राज्यों के संपर्क में रहते थे। वे सिर्फ प्रशासनिक रिपोर्ट नहीं लेते थे, बल्कि यह भी पूछते थे कि कार्यकर्ताओं, गरीबों और जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंच रही है या नहीं।शिवराज ने दावा किया कि मोदी संगठन और सरकार के बीच तालमेल को लेकर हमेशा बेहद गंभीर रहे। किताब में क्या खास है? ‘अपनापन : नरेंद्र मोदी संग मेरे अनुभव’ सिर्फ राजनीतिक घटनाओं का संग्रह नहीं है, बल्कि इसमें नरेंद्र मोदी के व्यक्तित्व के मानवीय पक्ष को सामने लाने की कोशिश की गई है। किताब में खास तौर पर इन विषयों पर फोकस किया गया है—
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Supreme Court ने कहा- SIR प्रक्रिया अवैध नहीं, चुनाव आयोग ने कानून के तहत किया काम

Supreme Court ने कहा- SIR प्रक्रिया अवैध नहीं, चुनाव आयोग ने कानून के तहत किया काम

देश की सबसे बड़ी अदालत Supreme Court of India ने वोटर लिस्ट से जुड़े विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) मामले में अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने साफ कहा कि SIR प्रक्रिया को अवैध नहीं कहा जा सकता, क्योंकि Election Commission of India ने यह कार्रवाई कानून के दायरे में रहकर की है। सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को निर्देश दिया है कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से संदिग्ध मानकर हटाए गए हैं, उनकी जानकारी चार हफ्तों के भीतर केंद्र सरकार को भेजी जाए। कोर्ट ने कहा कि लोकतंत्र में पारदर्शिता और सही मतदाता सूची बेहद जरूरी है। सुनवाई के दौरान अदालत ने माना कि फर्जी या संदिग्ध नामों को हटाना चुनाव आयोग की जिम्मेदारी है, ताकि निष्पक्ष चुनाव कराए जा सकें। हालांकि कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी नागरिक के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होना चाहिए और पूरी प्रक्रिया निष्पक्ष तरीके से होनी चाहिए। इस मामले को लेकर कई राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों ने सवाल उठाए थे। उनका कहना था कि बिना पर्याप्त जांच के नाम हटाए जाने से कई असली मतदाता परेशान हो सकते हैं। वहीं चुनाव आयोग का पक्ष था कि मतदाता सूची को शुद्ध और अपडेट रखना उसकी संवैधानिक जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी के बाद साफ हो गया है कि SIR प्रक्रिया फिलहाल कानूनी दायरे में मानी जा रही है। अब सबकी नजर इस बात पर रहेगी कि केंद्र सरकार और चुनाव आयोग आगे इस मामले में क्या कदम उठाते हैं। लोकतंत्र में हर वोट की अहमियत होती है। ऐसे में सही मतदाता सूची बनाना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी है कि किसी योग्य नागरिक का नाम गलत तरीके से न हटे। यही संतुलन बनाए रखना अब सबसे बड़ी चुनौती माना जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Demographic

Demographic Shift पर केंद्र सरकार का Action Mode नई हाई लेवल कमेटी तैयार

देश में बढ़ती घुसपैठ (Infiltration) और कुछ इलाकों में बदलते जनसंख्या संतुलन (Demographic Change) को लेकर केंद्र सरकार ने अब सख्त रुख अपनाया है। इस संवेदनशील मुद्दे पर निगरानी, अध्ययन और समाधान के लिए एक हाई-लेवल कमेटी (High Level Committee) का गठन किया गया है। सरकार का मानना है कि सीमावर्ती क्षेत्रों में हाल के वर्षों में सामने आए कुछ मामलों को हल्के में नहीं लिया जा सकता, क्योंकि इसका सीधा असर राष्ट्रीय सुरक्षा और सामाजिक संतुलन पर पड़ता है। सरकार ने क्यों उठाया यह कदम? सूत्रों के अनुसार, यह फैसला अचानक नहीं लिया गया है। कई रिपोर्ट्स और सुरक्षा एजेंसियों की फीडबैक में यह सामने आया कि: इन्हीं सब पहलुओं को देखते हुए सरकार ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर प्राथमिकता दी है। High Level Committee में कौन-कौन शामिल हैं? इस कमेटी में ऐसे अधिकारियों और विशेषज्ञों को शामिल किया गया है जो जमीनी स्तर की स्थिति को बेहतर तरीके से समझ सकें: इस टीम का उद्देश्य सिर्फ रिपोर्ट बनाना नहीं, बल्कि व्यावहारिक और लागू होने वाले समाधान सुझाना है। कमेटी के मुख्य फोकस पॉइंट्स नई गठित कमेटी निम्न विषयों पर विस्तार से काम करेगी: यह मुद्दा इतना अहम क्यों है? पिछले कुछ समय में सामने आई रिपोर्ट्स के अनुसार: इन्हीं कारणों से सरकार ने इसे केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा माना है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bihar

Bihar Politics में बड़ा उलटफेर! RJD से निकलीं Ritu Jaiswal BJP में शामिल

Bihar की राजनीति में एक बड़ा राजनीतिक बदलाव देखने को मिला है। राजद (RJD) से निष्कासित नेता Ritu Jaiswal ने अब आधिकारिक तौर पर Bharatiya Janata Party का दामन थाम लिया है। बीजेपी में शामिल होने के बाद उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि उनके लिए “राष्ट्र सर्वोपरि” है और देशहित की राजनीति ही उनकी प्राथमिकता रहेगी। बीजेपी कार्यालय में आयोजित कार्यक्रम के दौरान पार्टी नेताओं ने उनका स्वागत किया। इस मौके पर रितु जायसवाल ने प्रधानमंत्री Narendra Modi के नेतृत्व की तारीफ करते हुए कहा कि आज देश विकास और मजबूत नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ रहा है। “जनता की आवाज उठाने पर मिली सजा” रितु जायसवाल ने बिना नाम लिए राजद नेतृत्व पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जब कोई नेता जनता की समस्याओं और सच को सामने रखने की कोशिश करता है, तो उसे दबाने का प्रयास किया जाता है। उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि राजनीति उनके लिए सिर्फ पद नहीं, बल्कि लोगों की सेवा का माध्यम है। “मैं हमेशा जनता और राष्ट्रहित की बात करती रही हूं। अगर सच बोलना गलती है, तो मैं यह गलती आगे भी करती रहूंगी,” उन्होंने कहा। RJD से निष्कासन के बाद बढ़ी थीं चर्चाएं कुछ समय पहले पार्टी विरोधी गतिविधियों और बयानबाजी के आरोप में राजद ने रितु जायसवाल को निष्कासित कर दिया था। इसके बाद से ही बिहार के राजनीतिक गलियारों में उनके बीजेपी में जाने की चर्चाएं तेज हो गई थीं। आखिरकार अब उन्होंने भाजपा की सदस्यता लेकर इन अटकलों को सच साबित कर दिया। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह फैसला आने वाले बिहार चुनावों में असर डाल सकता है। खासतौर पर महिला वोटर्स और सामाजिक समीकरणों पर इसका प्रभाव देखने को मिल सकता है। BJP ने बताया मजबूत कदम बीजेपी नेताओं का कहना है कि रितु जायसवाल के जुड़ने से पार्टी को बिहार में और मजबूती मिलेगी। पार्टी ने उनके सामाजिक कार्यों और जनसंपर्क क्षमता की भी सराहना की। फिलहाल बिहार की राजनीति में यह चर्चा तेज है कि आने वाले दिनों में कई और नेता भी राजनीतिक पाला बदल सकते हैं। ऐसे में रितु जायसवाल की बीजेपी में एंट्री को सिर्फ एक शामिल होने की घटना नहीं, बल्कि बड़े राजनीतिक संकेत के तौर पर देखा जा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bengal

Bengal Border Alert: अवैध बांग्लादेशी प्रवासियों की बढ़ी हलचल, BSF हाई अलर्ट पर

Bengal में अवैध बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ चल रही सख्त कार्रवाई का असर अब भारत-बांग्लादेश सीमा पर साफ नजर आने लगा है। उत्तर 24 परगना, मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे सीमावर्ती इलाकों में बॉर्डर चेकपोस्टों पर अचानक भीड़ बढ़ गई है। कई लोग परिवार और सामान के साथ सीमा की ओर पहुंच रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हाल के दिनों में प्रशासन की सख्ती बढ़ने के बाद माहौल पूरी तरह बदल गया है। Border Checkposts पर क्यों बढ़ी हलचल? हाकिमपुर और स्वरूपनगर बॉर्डर चेकपोस्ट पर मंगलवार सुबह से ही लोगों की लंबी कतारें देखने को मिलीं। बताया जा रहा है कि इनमें कई ऐसे लोग शामिल हैं, जो लंबे समय से फर्जी दस्तावेजों के सहारे भारत में रह रहे थे। अब पहचान और सत्यापन अभियान तेज होने के बाद उनमें डर का माहौल है। सीमावर्ती गांवों के लोगों के मुताबिक, पिछले कुछ दिनों में कई बस्तियों से अचानक लोग गायब होने लगे हैं। वहीं, बॉर्डर इलाकों में सुरक्षा एजेंसियों की आवाजाही भी बढ़ गई है। BSF लगातार निगरानी कर रही है और संदिग्ध लोगों से पूछताछ की जा रही है। Bengal Government का बड़ा कदम पश्चिम बंगाल में अवैध प्रवासियों की पहचान के लिए “Detect, Delete and Deport” अभियान को तेज कर दिया गया है। इसी के तहत मालदा और मुर्शिदाबाद में होल्डिंग सेंटर बनाए गए हैं, जहां संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों और रोहिंग्या घुसपैठियों को रखा जा रहा है। इन सेंटरों में दस्तावेज जांच, पुलिस निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि जिन लोगों के पास वैध दस्तावेज नहीं मिलेंगे, उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। BSF हाई अलर्ट पर भारत-बांग्लादेश सीमा पर बढ़ती गतिविधियों को देखते हुए BSF को हाई अलर्ट पर रखा गया है। सीमा पार अवैध आवाजाही रोकने के लिए लगातार गश्त बढ़ाई जा रही है। कई संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त जवान भी तैनात किए गए हैं। दूसरी तरफ, बांग्लादेश की सीमा सुरक्षा एजेंसी BGB ने भी सीमावर्ती क्षेत्रों में निगरानी तेज कर दी है। दोनों देशों की सुरक्षा एजेंसियां हालात पर नजर बनाए हुए हैं ताकि किसी तरह की अवैध घुसपैठ या तनाव की स्थिति न बने। राजनीतिक माहौल भी गरमाया बंगाल में घुसपैठ का मुद्दा अब राजनीतिक रंग भी लेने लगा है। विपक्ष लगातार राज्य सरकार पर सवाल उठा रहा है, जबकि सरकार का दावा है कि सीमा सुरक्षा और दस्तावेज सत्यापन को मजबूत किया जा रहा है। आने वाले चुनावों को देखते हुए यह मुद्दा और ज्यादा चर्चा में आ गया है। सीमा पर डर और बेचैनी का माहौल सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों का कहना है कि हालात पहले जैसे नहीं रहे। कई परिवारों में डर और अनिश्चितता का माहौल है। वहीं, स्थानीय व्यापार और रोजमर्रा की गतिविधियों पर भी इसका असर दिखाई देने लगा है। फिलहाल, प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरे मामले पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले दिनों में सीमा पर सुरक्षा और जांच अभियान और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Kanpur Central

Kanpur Central 21 जून को रेलवे स्टेशन रहेगा बंद, कई ट्रेनें Cancel और Diversion पर

उत्तर भारत के सबसे व्यस्त रेलवे स्टेशनों में गिने जाने वाले Kanpur Central Railway Station पर एक बार फिर ट्रेनों का ‘लॉकडाउन’ लगने जा रहा है। करीब 6 साल बाद ऐसा होगा जब पूरे 24 घंटे तक स्टेशन से एक भी ट्रेन नहीं चलेगी। रेलवे के इस फैसले ने लाखों यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है, क्योंकि रोजाना यहां से हजारों लोग सफर करते हैं। रेलवे प्रशासन ने 21 जून 2026 को “No Train Day” घोषित किया है। इस दौरान स्टेशन पर बड़े स्तर पर इंटरलॉकिंग और सिग्नल अपग्रेडेशन का काम किया जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक यह काम भविष्य में ट्रेनों की सुरक्षा और बेहतर संचालन के लिए बेहद जरूरी है। क्यों बंद रहेगा Kanpur Central? रेलवे के अनुसार 11 जून से 20 जून तक प्री-नॉन इंटरलॉकिंग का काम चलेगा। इसके बाद 21 जून को मुख्य इंटरलॉकिंग प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इसी वजह से पूरे दिन ट्रेनों की आवाजाही रोकने का फैसला लिया गया है। दरअसल, कानपुर सेंट्रल देश के सबसे व्यस्त रेलवे जंक्शनों में शामिल है। यहां हर दिन सैकड़ों ट्रेनें गुजरती हैं। ऐसे में बिना ट्रैफिक रोके इस तरह का तकनीकी काम करना आसान नहीं माना जाता। कोरोना लॉकडाउन के बाद पहली बार ऐसा फैसला इससे पहले साल 2020 में कोरोना महामारी के दौरान देशव्यापी लॉकडाउन में ट्रेनों का संचालन बंद हुआ था। अब 6 साल बाद फिर से ऐसा मौका आएगा जब स्टेशन पर पूरा सन्नाटा दिखाई देगा। रेलवे कर्मचारियों का कहना है कि यह फैसला यात्रियों को थोड़ी परेशानी जरूर देगा, लेकिन लंबे समय में इसका फायदा मिलेगा। नए सिस्टम के लागू होने के बाद ट्रेन संचालन पहले से ज्यादा सुरक्षित और तेज हो सकेगा। कई ट्रेनें होंगी Cancel और Diversion पर रेलवे ने संकेत दिए हैं कि इस दौरान कई ट्रेनों को रद्द, डायवर्ट या शॉर्ट टर्मिनेट किया जा सकता है। कुछ ट्रेनों को गोविंदपुरी और आसपास के स्टेशनों से चलाने की तैयारी की जा रही है। दिल्ली, प्रयागराज, लखनऊ, वाराणसी और बिहार रूट की कई ट्रेनों पर इसका असर पड़ सकता है। हालांकि रेलवे जल्द ही प्रभावित ट्रेनों की आधिकारिक सूची जारी करेगा। यात्रियों के लिए रेलवे की खास तैयारी यात्रियों को परेशानी से बचाने के लिए रेलवे प्रशासन ने वैकल्पिक स्टेशनों पर अतिरिक्त इंतजाम करने की बात कही है। गोविंदपुरी स्टेशन पर पेयजल, सुरक्षा और खानपान की अतिरिक्त व्यवस्था की जाएगी। साथ ही आरपीएफ और जीआरपी को भी अलर्ट मोड पर रखा जाएगा। सफर से पहले ये बातें जरूर जान लें रेलवे का मानना है कि यह 24 घंटे की असुविधा आने वाले समय में यात्रियों को ज्यादा सुरक्षित और बेहतर सफर का अनुभव देगी। हालांकि फिलहाल Kanpur Central पर लगने वाला यह “Train Lockdown” लोगों के बीच चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Deepankar Bhattacharya

Deepankar Bhattacharya Cash Case: राहत सामग्री घोटाले ने बढ़ाई TMC की मुश्किलें

पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर भ्रष्टाचार का मुद्दा गर्म हो गया है। All India Trinamool Congress (TMC) से जुड़े नेता Deepankar Bhattacharya के ठिकानों पर हुई छापेमारी में करीब ₹80 लाख नकद बरामद होने का दावा किया गया है। इसके साथ ही राहत सामग्री में गड़बड़ी और सरकारी फंड के गलत इस्तेमाल के आरोपों ने मामले को और गंभीर बना दिया है। कई ठिकानों पर हुई एक साथ छापेमारी सूत्रों के अनुसार, जांच एजेंसियों ने कोलकाता समेत कई स्थानों पर एक साथ कार्रवाई की। रेड के दौरान बड़ी मात्रा में कैश, अहम दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड हाथ लगे हैं। शुरुआती जांच में यह संकेत मिले हैं कि जरूरतमंद लोगों के लिए भेजी गई राहत सामग्री के वितरण में अनियमितताएं हुईं और कुछ सामान कथित तौर पर बीच रास्ते में ही गायब कर दिया गया। स्थानीय लोगों में नाराजगी स्थानीय लोगों के बीच भी इस मामले को लेकर काफी नाराजगी देखी जा रही है। कई लोगों का कहना है कि आपदा और राहत जैसे संवेदनशील मुद्दों पर भ्रष्टाचार की खबरें आम जनता का भरोसा तोड़ती हैं। यही वजह है कि मामला सामने आते ही सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक चर्चा तेज हो गई। विपक्ष ने सरकार को घेरा विपक्षी दलों ने All India Trinamool Congress सरकार को घेरते हुए कहा है कि अगर राहत सामग्री में घोटाला हुआ है तो यह सीधे गरीबों के हक पर डाका है। विपक्ष ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। TMC ने आरोपों को बताया राजनीतिक साजिश वहीं, TMC नेताओं का कहना है कि यह कार्रवाई राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित है। पार्टी का दावा है कि केंद्रीय एजेंसियों का इस्तेमाल विपक्षी नेताओं को दबाव में लाने के लिए किया जा रहा है। हालांकि जांच एजेंसियां फिलहाल कैश के स्रोत, बैंक ट्रांजैक्शन और राहत सामग्री से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल में जुटी हैं। आगे क्या हो सकता है? राजनीतिक विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले दिनों में यह मामला पश्चिम बंगाल की राजनीति में बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है। यदि जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो इसका असर सीधे जनता और सरकार की छवि पर पड़ सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बिलासपुर में 7-8 मिनट में हो रही वाहनों की फिटनेस जांच पर सवाल, 800 की फीस के बदले 5 हजार मांगने का आरोप

बिलासपुर। मटियारी-बेलतरा बाईपास स्थित निजी वाहन फिटनेस सेंटर में व्यावसायिक वाहनों की जांच प्रक्रिया पर सवाल उठने लगे हैं। मौके पर एक वाहन की फिटनेस जांच महज 7 से 8 मिनट में पूरी होती दिखाई दी। जांच के बाद बाहर निकली एक बस गेट पर दस्तावेज लेते समय ही बंद हो गई। चालक ने दोबारा इंजन स्टार्ट करने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिरकार लोगों को धक्का लगाकर बस को हटाना पड़ा। घटना ने फिटनेस जांच की गुणवत्ता और प्रक्रिया को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। सेंटर के बाहर सुबह से ही बसों और ट्रकों की कतार लगी थी। कई वाहन मालिक जांच से पहले इंडिकेटर, हेडलाइट और दूसरी लाइटों की खराबियां ठीक कराते नजर आए। कुछ वाहनों पर रेडियम पट्टियां भी लगाई जा रही थीं। कमियां दूर करने के बाद वाहनों को जांच के लिए अंदर भेजा जा रहा था। ढाई साल पहले निजी संस्था को सौंपी गई व्यवस्था करीब ढाई साल पहले तक व्यावसायिक वाहनों की फिटनेस जांच आरटीओ परिसर में होती थी। बाद में यह व्यवस्था निजी संस्था रोविंग आई सिस्टम्स प्राइवेट लिमिटेड को सौंप दी गई। इसके बाद फिटनेस सेंटर को मटियारी-बेलतरा बाईपास पर स्थानांतरित कर दिया गया। अब वाहन मालिकों को लगरा स्थित आरटीओ कार्यालय से करीब पांच किलोमीटर दूर इस सेंटर तक जाना पड़ता है। व्यवस्था निजी हाथों में जाने के बाद जांच प्रक्रिया, समय और खर्च को लेकर वाहन मालिकों की शिकायतें सामने आ रही हैं। 29 बिंदुओं की जांच 7-8 मिनट में कैसे? बिलासपुर बस मालिक परिवहन संघ के महासचिव नितिन जुनेजा ने कहा कि फिटनेस जांच निजी हाथों में जाने के बाद वाहन मालिकों की परेशानियां बढ़ी हैं। उनके मुताबिक, कुछ लोग संपर्कों के जरिए जल्दी काम करा लेते हैं, जबकि अन्य वाहन मालिकों को चार-चार घंटे तक इंतजार करना पड़ता है। इससे उनका समय और पैसा दोनों प्रभावित होते हैं। जुनेजा के अनुसार, फिटनेस जांच के दौरान करीब 29 बिंदुओं की जांच की जानी होती है। इसमें ब्रेक, सस्पेंशन, स्टीयरिंग, लाइट, टायर, उत्सर्जन मानक और अन्य सुरक्षा उपकरणों की स्थिति शामिल है। संबंधित वाहन श्रेणियों में स्पीड गवर्नर और जीपीएस उपकरणों की जांच भी जरूरी हो सकती है। ऐसे में मौके पर 7 से 8 मिनट में जांच पूरी होते दिखाई देने से यह सवाल उठ रहा है कि सभी जरूरी तकनीकी बिंदुओं की जांच किस तरह की जा रही है। हालांकि, जांच की गुणवत्ता और नियमों के पालन की वास्तविक स्थिति रिकॉर्ड और प्रक्रिया की विस्तृत पड़ताल के बाद ही स्पष्ट होगी। 800 रुपये की फीस के बदले 5 हजार मांगने का आरोप कुछ वाहन मालिकों ने आरोप लगाया कि करीब 800 रुपये की निर्धारित सरकारी फीस वाले काम के लिए उनसे 5 हजार रुपये तक मांगे जाते हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। वाहन मालिकों के मुताबिक, सेंटर के बाहर एजेंट सक्रिय रहते हैं। उनका दावा है कि आरटीओ कार्यालय के पास एजेंटों से बातचीत के बाद उन्हें फिटनेस सेंटर भेजा जाता है। वहीं, सेंटर में दलालों के प्रवेश पर प्रतिबंध होने की बात भी कही जा रही है। इन आरोपों के संबंध में शुल्क का आधिकारिक विवरण, भुगतान की रसीदें और संबंधित रिकॉर्ड सामने आने पर ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। सेंटर प्रबंधन का दावा- जांच प्रक्रिया सही फिटनेस सेंटर के मैनेजर नवीन ने बताया कि एक वाहन की जांच में 7 से 8 मिनट लगते हैं। उनके मुताबिक, वाहनों की फिटनेस जांच सही तरीके से की जाती है और जांच क्षेत्र में किसी को प्रवेश नहीं दिया जाता। उन्होंने बताया कि सेंटर में निगरानी के लिए 36 कैमरे लगाए गए हैं। इसके अलावा, वाहन चालकों के लिए पीने के पानी और बैठने की व्यवस्था भी की गई है। फिलहाल, कम समय में फिटनेस जांच पूरी होने और अतिरिक्त रकम मांगे जाने के आरोपों की निष्पक्ष जांच से ही व्यवस्था की पारदर्शिता और सुरक्षा मानकों के पालन की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
CEC

Anti-CEC Protest: ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग तेज, 16 अक्टूबर को Tiranga March

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जारी विरोध प्रदर्शन के बीच दिल्ली में राजनीतिक माहौल गर्म है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके, AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल की प्रेस कॉन्फ्रेंस को लेकर भी चर्चा तेज है। इस पूरे विवाद के केंद्र में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की कार्रवाई है। 10 अक्टूबर को दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले पुलिस ने कई नेताओं और प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया था। इसके बाद CJP और छात्र संगठनों ने कार्रवाई पर सवाल उठाए। वहीं, पुलिस ने कानून-व्यवस्था बनाए रखने और संभावित सुरक्षा जोखिमों को प्रतिबंधों की वजह बताया। प्रेस कॉन्फ्रेंस और हंगामे को लेकर क्या है अपडेट? 15 अक्टूबर को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में अभिजीत दिपके, नेहा बोरा और कपिल सिब्बल की प्रेस कॉन्फ्रेंस प्रस्तावित थी। इसका संबंध CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आंदोलन और प्रदर्शनकारियों पर हुई कार्रवाई से था। हालांकि, प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान हंगामा होने के दावे की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए इस घटना के बारे में किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले आधिकारिक बयान और प्रत्यक्षदर्शियों की जानकारी सामने आना जरूरी है। इससे पहले 11 अक्टूबर को प्रेस क्लब ऑफ इंडिया के बाहर प्रदर्शनकारियों के जुटने और नारेबाजी के बाद पुलिस की मौजूदगी बढ़ गई थी। इस घटनाक्रम ने विरोध प्रदर्शन को लेकर चल रहे विवाद को और चर्चा में ला दिया था। CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग क्यों? CJP और कई विपक्षी दल मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। उनका आरोप है कि मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR के दौरान अनियमितताएं हुई हैं और बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम हटाए जाने को लेकर सवाल उठते हैं। विरोध करने वाले संगठनों का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित होनी चाहिए। उनका तर्क है कि मतदान का अधिकार लोकतंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा है और मतदाता सूची में किसी भी तरह की गड़बड़ी की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। दूसरी ओर, चुनाव आयोग ने किसी भी गलत काम के आरोपों को स्वीकार नहीं किया है। ऐसे में SIR से जुड़े दावों और आपत्तियों का आकलन आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित कानूनी प्रक्रियाओं के आधार पर किया जाना जरूरी है। सौरव दास और आशुतोष रांका की हिरासत से बढ़ा विवाद CJP से जुड़े सौरव दास और आशुतोष रांका को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने के मामले में हिरासत में लिया गया था। बाद में दोनों को पांच दिन की न्यायिक हिरासत में भेजे जाने की खबर सामने आई। CJP ने इस कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि शांतिपूर्ण विरोध की आवाज को दबाया जा रहा है। संगठन के नेताओं ने साफ किया कि CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर उनका आंदोलन जारी रहेगा। दिल्ली पुलिस ने अपने पक्ष में कहा कि प्रदर्शन की अनुमति, पहले के घटनाक्रम और कानून-व्यवस्था से जुड़ी चिंताओं को ध्यान में रखते हुए कदम उठाए गए। पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच कार्रवाई को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए हैं। नेहा बोरा समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया 10 अक्टूबर को दिल्ली में हुए घटनाक्रम के दौरान AISA की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा समेत कई राजनीतिक और छात्र संगठनों से जुड़े लोगों को हिरासत में लिया गया था। इस कार्रवाई में CJP के नेता और अन्य प्रदर्शनकारी भी शामिल थे। इसके बाद छात्र संगठनों और विपक्षी नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। उनका कहना था कि विरोध दर्ज कराने के अधिकार का सम्मान किया जाना चाहिए। वहीं, पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था और संभावित अव्यवस्था का हवाला दिया। इस पूरे मामले ने प्रदर्शन की अनुमति और लोकतांत्रिक अधिकारों के बीच संतुलन को लेकर बहस छेड़ दी है। 16 अक्टूबर को तिरंगा मार्च का ऐलान CJP संस्थापक अभिजीत दिपके ने 16 अक्टूबर को दिल्ली के कनॉट प्लेस स्थित सेंट्रल पार्क में शाम 5 बजे तिरंगा मार्च का आह्वान किया है। उन्होंने लोगों से राष्ट्रीय ध्वज के साथ जुटने की अपील की है। दिपके के मुताबिक, इस कार्यक्रम का उद्देश्य यह संदेश देना है कि तिरंगा फहराना अपराध नहीं है। यह आह्वान CJP नेताओं की हिरासत और जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर हुए विवाद के बाद किया गया है। अब इस कार्यक्रम पर भी लोगों की नजर है। प्रशासन की अनुमति और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़ी जानकारी सामने आने के बाद ही आयोजन की स्थिति अधिक स्पष्ट होगी। Jantar Mantar Protest: आगे क्या होगा? दिल्ली में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग से शुरू हुआ विवाद अब SIR, मतदाता सूची, प्रदर्शन की अनुमति और पुलिस कार्रवाई जैसे कई मुद्दों से जुड़ गया है। एक तरफ CJP और अन्य संगठन अपने विरोध को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़ रहे हैं, तो दूसरी तरफ पुलिस कानून-व्यवस्था बनाए रखने की जरूरत पर जोर दे रही है। फिलहाल, प्रेस कॉन्फ्रेंस में हुई कथित घटना की पुष्टि, तिरंगा मार्च को लेकर प्रशासन का रुख और SIR से संबंधित कानूनी कार्यवाही आगे की अहम कड़ियां होंगी। इन घटनाक्रमों से तय होगा कि दिल्ली में जारी Anti-CEC Protest आगे क्या मोड़ लेता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CNAP

CNAP Service: अब अनजान नंबर से कॉल आने पर दिखेगा नाम, 1 नवंबर से नया नियम

अब अनजान नंबर से फोन आने पर यह जानना आसान हो सकता है कि कॉल किसके नाम पर रजिस्टर्ड है। केंद्र सरकार की नई व्यवस्था के तहत 1 नवंबर 2026 से मोबाइल स्क्रीन पर कॉल करने वाले का नाम दिखाने की सुविधा शुरू करने की तैयारी है। इस सिस्टम का नाम Calling Name Presentation (CNAP) है। इसका मकसद अनजान कॉल की पहचान आसान बनाना और लोगों को स्पैम व धोखाधड़ी वाली कॉल के प्रति सतर्क करना है। इस व्यवस्था के तहत अगर आपके फोन पर किसी ऐसे नंबर से कॉल आती है, जो कॉन्टैक्ट लिस्ट में सेव नहीं है, तो स्क्रीन पर केवल नंबर ही नहीं, बल्कि टेलीकॉम रिकॉर्ड में दर्ज नाम भी दिखाई दे सकता है। वहीं, विदेश से आने वाली कॉल के लिए स्क्रीन पर ‘International Call’ लिखा दिख सकता है। Caller Name Display: कैसे काम करेगी नई सुविधा? अभी तक अनजान नंबर से कॉल आने पर ज्यादातर लोगों को यह पता लगाने के लिए Truecaller जैसे ऐप या दूसरी सेवाओं की मदद लेनी पड़ती है कि फोन किसने किया है। CNAP सुविधा लागू होने के बाद कॉल करने वाले की पहचान दिखाने के लिए टेलीकॉम कंपनियों के रिकॉर्ड का इस्तेमाल किया जाएगा। इसमें कॉल करने वाले के मोबाइल कनेक्शन के साथ दर्ज नाम दिखाया जा सकता है। यानी नंबर सेव नहीं होने पर भी आपको कॉल करने वाले की पहचान का अंदाजा लगाने में मदद मिलेगी। दूरसंचार विभाग के निर्देश के अनुसार, 1 नवंबर 2026 से 4G और उससे नई तकनीक वाले मोबाइल नेटवर्क पर यह सुविधा शुरू की जानी है। हालांकि, अलग-अलग नेटवर्क पर इसकी उपलब्धता और शुरुआत की स्थिति अलग हो सकती है। विदेशी नंबर से फोन आया तो स्क्रीन पर क्या दिखेगा? नई व्यवस्था का एक अहम हिस्सा इंटरनेशनल कॉल की पहचान करना है। अगर विदेश से किसी अनजान नंबर पर कॉल आती है, तो स्क्रीन पर ‘International Call’ लिखा दिखाई दे सकता है। इससे यूजर को यह समझने में मदद मिलेगी कि कॉल अंतरराष्ट्रीय नंबर से आ रही है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि विदेश से आने वाली हर कॉल फर्जी होती है। विदेश में रहने वाले रिश्तेदार, दोस्त या कारोबारी संपर्क भी कॉल कर सकते हैं। इसलिए केवल इस संदेश को देखकर किसी कॉल को धोखाधड़ी मान लेना सही नहीं होगा। क्या फर्जी कॉल और साइबर फ्रॉड पर लगेगी लगाम? आजकल बैंक अधिकारी, सरकारी कर्मचारी या दूसरी संस्थाओं का प्रतिनिधि बनकर लोगों को फोन करने के मामले सामने आते रहते हैं। कई बार लोग कॉल करने वाले की बातों में आकर अपनी निजी जानकारी साझा कर देते हैं। CNAP सुविधा से कॉल करने वाले की पहचान समझने में मदद मिल सकती है। लेकिन यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि स्क्रीन पर नाम दिखने का मतलब यह नहीं है कि कॉल पूरी तरह सुरक्षित है। किसी भी अनजान व्यक्ति को OTP, बैंकिंग पासवर्ड या संवेदनशील जानकारी न बताएं। बैंक या सरकारी संस्था के नाम पर कॉल आने पर आधिकारिक माध्यम से जानकारी की पुष्टि करना बेहतर है। क्या 4G और 5G यूजर्स को मिलेगा फायदा? CNAP को 4G और उससे नई तकनीक वाले मोबाइल नेटवर्क पर लागू करने की योजना है। इसमें 5G नेटवर्क भी शामिल हैं। हालांकि, शुरुआत में सभी यूजर्स को एक साथ या एक ही तरीके से यह सुविधा मिले, यह जरूरी नहीं है। पुराने 2G और 3G नेटवर्क के लिए व्यवस्था को लेकर अलग से निर्णय लिया जा सकता है। यूजर्स को सुविधा मिलने की स्थिति उनके टेलीकॉम ऑपरेटर और नेटवर्क सपोर्ट पर भी निर्भर करेगी। Privacy को लेकर क्या है व्यवस्था? कॉलर का नाम दिखाने की सुविधा के साथ यूजर्स की निजता का ध्यान रखना भी जरूरी है। CNAP में पहचान से जुड़ी जानकारी टेलीकॉम रिकॉर्ड के आधार पर दिखाई जाती है। जिन यूजर्स ने नियमानुसार Calling Line Identification Restriction (CLIR) सुविधा ली है, उनके लिए नाम छिपाने से जुड़े प्रावधान भी लागू हो सकते हैं। बिजनेस कनेक्शन के मामले में सत्यापन के बाद कंपनी या कारोबार का नाम दिखाने की सुविधा भी दी जा सकती है। इससे ग्राहकों को आधिकारिक बिजनेस कॉल पहचानने में मदद मिल सकती है। 1 नवंबर से मोबाइल यूजर्स को क्या फायदा होगा? नई Caller Name Display सुविधा का सबसे बड़ा फायदा यह है कि अनजान नंबर से कॉल आने पर यूजर को कॉल करने वाले के बारे में अतिरिक्त जानकारी मिल सकती है। विदेश से आने वाली कॉल के लिए ‘International Call’ का संकेत भी उपयोगी हो सकता है। हालांकि, यह सुविधा हर फर्जी कॉल को रोकने का पक्का समाधान नहीं है। कॉल उठाने से पहले पहचान पर ध्यान देना, संदिग्ध लिंक से बचना और निजी जानकारी साझा न करना अब भी जरूरी रहेगा। कुल मिलाकर, CNAP सुविधा मोबाइल कॉल की पहचान को पहले से आसान बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हो सकती है। अगर इसे प्रभावी तरीके से लागू किया जाता है, तो आम लोगों को अनजान कॉल समझने और संभावित धोखाधड़ी से सतर्क रहने में मदद मिल सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

जर्मनी में रिहायशी इमारत में आग से 3 भारतीयों की मौत, हत्या के शक में रोमानियाई नागरिक गिरफ्तार

बोखुम। जर्मनी केl बोखुम शहर में एक रिहायशी इमारत में आग लगने से तीन भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। मृतकों में 25 और 27 साल की दो महिलाएं और 26 साल का एक युवक शामिल है। हादसे में धुएं की चपेट में आए पांच अन्य लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने मामले में हत्या के संदेह में 41 वर्षीय रोमानियाई नागरिक को गिरफ्तार किया है। जांचकर्ता आगजनी की आशंका समेत आग लगने के कारणों का पता लगा रहे हैं। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि आग जानबूझकर लगाई गई थी या इसके पीछे कोई अन्य वजह थी। तड़के 4:15 बजे लगी आग, दूसरी मंजिल पर मिले शव आग मंगलवार तड़के करीब 4:15 बजे बोखुम के होफ्स्टेड इलाके की एक बहुमंजिला रिहायशी इमारत में लगी। दमकलकर्मियों के मौके पर पहुंचने तक आग काफी फैल चुकी थी। बाद में दूसरी मंजिल पर स्थित एक फ्लैट से तीनों भारतीयों के शव बरामद किए गए। दमकलकर्मियों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन सफलता नहीं मिली। आग और धुएं के कारण इमारत में फंसे अन्य लोगों को भी बाहर निकालने में काफी परेशानी हुई। सीढ़ियों तक पहुंची आग, बाहर निकलने का रास्ता हुआ बंद जर्मन अखबार ‘बिल्ड’ के मुताबिक, पड़ोसियों ने बताया कि इमारत के गलियारे में रखी बच्चों की कुछ गाड़ियों में आग लगी थी। इसके बाद आग लकड़ी की सीढ़ियों तक फैल गई, जिससे लोगों के बाहर निकलने का रास्ता बंद हो गया। हालांकि, आग लगने की इस वजह की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। दमकलकर्मियों ने दो लोगों को हाइड्रोलिक सीढ़ी और दो अन्य को पोर्टेबल सीढ़ियों की मदद से बाहर निकाला। एक अन्य व्यक्ति ने जान बचाने के लिए सुरक्षा के लिहाज से लगाए गए एयर कुशन पर छलांग लगाई। दमकल विभाग के प्रवक्ता के अनुसार, आग और धुएं की वजह से सीढ़ियों के रास्ते ऊपरी मंजिलों तक पहुंचना संभव नहीं था। आग लगने से एक दिन पहले भी पहुंची थी पुलिस बोखुम पुलिस के प्रवक्ता जेन्स आर्ट्सवागर ने ‘बिल्ड’ को बताया कि घटना से एक दिन पहले इसी इमारत में विवाद की सूचना मिलने पर पुलिस पहुंची थी। मौके पर पुलिस की एक गाड़ी भेजी गई थी, लेकिन किसी ने औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई थी। अब पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि पहले हुए विवाद का आग लगने की घटना से कोई संबंध था या नहीं। तकनीकी खराबी की आशंका खारिज, आगजनी के एंगल से जांच जांचकर्ताओं ने आग लगने के पीछे तकनीकी खराबी की आशंका को खारिज कर दिया है। हालांकि, आग की वास्तविक वजह अभी सामने नहीं आई है। पुलिस गिरफ्तार व्यक्ति की संभावित भूमिका, आग लगने की परिस्थितियों और तीनों भारतीय नागरिकों की मौत से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही है।
Imran Khan

Imran Khan भारत छोड़ने के नोटिस पर विवाद, Akshay Kumar और Adnan Sami की Citizenship भी चर्चा में

बॉलीवुड में किसी अभिनेता की फिल्म हिट हो या फ्लॉप, उससे जुड़ी खबरें अक्सर चर्चा में रहती हैं। लेकिन जब बात नागरिकता की आती है, तो मामला थोड़ा अलग हो जाता है। अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस मिलने के बाद एक बार फिर अक्षय कुमार, अदनान सामी, आलिया भट्ट और कटरीना कैफ की नागरिकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। किसी कलाकार का भारत में जन्म लेना, यहां रहना या हिंदी फिल्मों में काम करना उसे अपने आप भारतीय नागरिक नहीं बना देता। वहीं, विदेशी नागरिकता रखने वाले व्यक्ति के भारत में रहने और काम करने के भी कुछ नियम हैं। ऐसे में समझना जरूरी है कि इमरान खान के मामले में क्या सामने आया है और भारत में Citizenship Rules आखिर क्या कहते हैं। Imran Khan को क्यों मिला भारत छोड़ने का नोटिस? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनेता इमरान खान (Imran Khan) को मुंबई पुलिस ने 28 अक्टूबर 2026 तक भारत छोड़ने का नोटिस दिया है। इमरान खान अमेरिकी नागरिक हैं और उनकी नागरिकता को लेकर यह मामला चर्चा में आया है। यह विवाद 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए गए थे। इस आंदोलन में इमरान खान की भागीदारी के बाद भाजपा नेता किरीट सोमैया ने उनकी विदेशी नागरिकता का हवाला देते हुए अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद इमरान खान को नोटिस जारी किए जाने की खबर सामने आई। हालांकि, किसी व्यक्ति को नोटिस मिलना और उसके खिलाफ किसी आरोप का अंतिम रूप से साबित होना दो अलग-अलग बातें हैं। इस मामले में नोटिस के आधार और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रखना जरूरी होगा। भारत में Citizenship Rules क्या कहते हैं? नागरिकता मुख्य रूप से Citizenship Act, 1955 के तहत तय होती है। कानून में जन्म, वंश, पंजीकरण और देशीयकरण यानी Naturalisation के जरिए नागरिकता प्राप्त करने के प्रावधान हैं। हर रास्ते के लिए अलग-अलग शर्तें निर्धारित हैं। भारत की नागरिकता से जुड़े 5 जरूरी नियम: नागरिकता से जुड़े नियमों की आधिकारिक जानकारी भारत सरकार के Indian Citizenship Online Portal पर उपलब्ध है। OCI Card क्या है और इसके धारकों को कौन-से अधिकार मिलते हैं? OCI का पूरा नाम Overseas Citizen of India है। कई लोग इसे दोहरी नागरिकता समझ लेते हैं, लेकिन यह भारतीय नागरिकता नहीं है। OCI कार्डधारक विदेशी नागरिक ही रहते हैं और उनके पास किसी दूसरे देश का पासपोर्ट होता है। कार्ड के जरिए पात्र लोगों को भारत आने-जाने और रहने सहित कई सुविधाएं मिलती हैं। हालांकि, वे भारतीय नागरिकों की तरह चुनाव में मतदान नहीं कर सकते और न ही संसद या राज्य विधानसभाओं का चुनाव लड़ सकते हैं। कार्डधारकों पर विदेशी नागरिकों और इमिग्रेशन से जुड़े लागू नियम भी प्रभाव डालते हैं। किसी व्यक्ति के मामले में कार्रवाई की वैधता संबंधित कानून और परिस्थितियों के आधार पर तय होती है। क्या विदेशी नागरिक भारत में Protest कर सकते हैं? इमरान खान के मामले के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या विदेशी नागरिक या OCI कार्डधारक भारत में राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने जैसे अधिकार भारतीय नागरिकों को प्राप्त हैं, जो कानून के तहत उचित प्रतिबंधों के अधीन हैं। विदेशी नागरिकों को ये अधिकार उसी रूप में प्राप्त नहीं हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि किसी प्रदर्शन में विदेशी नागरिक की मौजूदगी अपने आप गैरकानूनी हो जाती है। मामले की परिस्थितियां, लागू इमिग्रेशन नियम, संबंधित गतिविधि और प्रशासन की कार्रवाई के आधार को समझना जरूरी है। इमरान खान के मामले में भी नोटिस जारी करने का आधार और आगे की कानूनी प्रक्रिया अहम होगी। Citizenship Controversy: इन मामलों से क्या समझें? इमरान खान, अक्षय कुमार, अदनान सामी, आलिया भट्ट और कटरीना कैफ की नागरिकता से जुड़े मामले अलग-अलग हैं। इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस मिलने की खबर सामने आई है, अक्षय कुमार को 2023 में भारतीय नागरिकता मिली, जबकि अदनान सामी ने 2016 में भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी। दूसरी ओर, आलिया भट्ट और कटरीना कैफ के पास ब्रिटिश नागरिकता है। इन सभी मामलों में एक बात समान है—किसी व्यक्ति की लोकप्रियता, जन्मस्थान या भारत में काम करने से उसकी नागरिकता अपने आप तय नहीं होती। इसके लिए कानूनी प्रावधान और आधिकारिक दस्तावेज मायने रखते हैं। इसलिए नागरिकता से जुड़े किसी भी विवाद को समझते समय सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बजाय तथ्यों, आधिकारिक जानकारी और लागू कानूनों पर भरोसा करना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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