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Rain vs Heatwave: मौसम ने ली करवट, जैसलमेर में उठा रेतीला तूफान

देश के कई हिस्सों में लोगों को झुलसा देने वाली गर्मी अब धीरे-धीरे कम होती नजर आ रही है। पिछले कुछ दिनों से जारी Heatwave का असर लगभग खत्म हो गया है और बारिश के चलते तापमान में गिरावट दर्ज की गई है। मौसम के इस बदलाव ने जहां लोगों को राहत दी है, वहीं कुछ इलाकों में तेज हवाओं और बारिश ने नई चुनौतियां भी खड़ी कर दी हैं। मौसम विभाग के अनुसार उत्तर भारत, मध्य भारत और पहाड़ी राज्यों में सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ के कारण मौसम ने करवट ली है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और उत्तराखंड समेत कई राज्यों में बारिश और तेज हवाओं का असर देखने को मिला, जिससे तापमान सामान्य स्तर के करीब पहुंच गया। जैसलमेर में उठा रेतीला तूफान राजस्थान के जैसलमेर में मौसम का अलग ही रूप देखने को मिला। यहां तेज हवाओं के साथ रेतीला तूफान उठा, जिससे कई इलाकों में दृश्यता काफी कम हो गई। सड़क पर चल रहे वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ा। हालांकि तूफान के बाद कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश भी हुई, जिससे लोगों को गर्मी से राहत मिली। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले कई दिनों से पड़ रही भीषण गर्मी के बाद मौसम में आया यह बदलाव राहत भरा जरूर है, लेकिन अचानक आए धूलभरे तूफान ने जनजीवन को प्रभावित किया। उत्तराखंड के चंपावत में बड़ा रेस्क्यू ऑपरेशन उत्तराखंड के चंपावत जिले में भारी बारिश के बाद नदियों का जलस्तर अचानक बढ़ गया। श्री रीठा साहिब गुरुद्वारा में आयोजित मेले के दौरान करीब 50 श्रद्धालु नदी के बीच फंस गए। पानी का बहाव तेज होने से हालात चिंताजनक बन गए। सूचना मिलते ही SDRF की टीम मौके पर पहुंची और रेस्क्यू अभियान शुरू किया। घंटों की मशक्कत के बाद सभी श्रद्धालुओं को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया। राहत की बात यह रही कि इस घटना में किसी तरह की जनहानि नहीं हुई। बारिश से मिली राहत, लेकिन सतर्क रहने की जरूरत मौसम विभाग ने आने वाले दिनों में कई राज्यों में बारिश, तेज हवाएं और गरज-चमक की संभावना जताई है। विशेषज्ञों का मानना है कि फिलहाल लोगों को गर्मी से राहत मिलेगी, लेकिन कुछ क्षेत्रों में भारी बारिश और आंधी के कारण सतर्क रहने की जरूरत है। देशभर में बदले मौसम ने यह साफ कर दिया है कि गर्मी का प्रकोप अब कमजोर पड़ रहा है और मानसून की दस्तक भी धीरे-धीरे सुनाई देने लगी है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग की सलाह का पालन करने और खराब मौसम के दौरान सावधानी बरतने की जरूरत है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mumbai

Mumbai-Pune Highway Crash: तेज रफ्तार बनी काल, भीषण टक्कर में 2 की मौके पर मौत

सप्ताह की शुरुआत महाराष्ट्र के लिए एक दुखद खबर लेकर आई। सोमवार सुबह Mumbai-Pune एक्सप्रेसवे पर एक भीषण सड़क हादसे में दो लोगों की जान चली गई। ट्रक, कंटेनर और एक अर्टिगा कार के बीच हुई जोरदार टक्कर ने कुछ ही पलों में खुशियों को मातम में बदल दिया। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा इतना भयानक था कि अर्टिगा कार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। टक्कर की आवाज दूर तक सुनाई दी और मौके पर अफरा-तफरी का माहौल बन गया। सड़क पर गुजर रहे अन्य वाहन चालकों ने तुरंत पुलिस और आपातकालीन सेवाओं को सूचना दी। मौके पर ही दो लोगों ने तोड़ा दम हादसे में कार सवार दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कुछ अन्य लोग घायल बताए जा रहे हैं। घायलों को तत्काल नजदीकी अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। मृतकों की पहचान और उनके परिजनों को सूचना देने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। रेस्क्यू टीम ने संभाला मोर्चा सूचना मिलते ही हाईवे पुलिस, एंबुलेंस और बचाव दल घटनास्थल पर पहुंच गए। क्षतिग्रस्त वाहन में फंसे लोगों को बाहर निकालने के लिए काफी देर तक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। हादसे के कारण एक्सप्रेसवे पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, हालांकि बाद में यातायात को धीरे-धीरे सामान्य कर दिया गया। हादसे की वजह तलाश रही पुलिस प्रारंभिक जांच में तेज रफ्तार और वाहन पर नियंत्रण खोने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि पुलिस सभी पहलुओं की जांच कर रही है। दुर्घटना के सही कारणों का पता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही चल सकेगा। सड़क सुरक्षा को लेकर फिर उठे सवाल मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे देश के सबसे व्यस्त और आधुनिक हाईवे में शामिल है, लेकिन यहां आए दिन होने वाले हादसे चिंता का विषय बने हुए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि तेज रफ्तार, थकान में ड्राइविंग और यातायात नियमों की अनदेखी ऐसी घटनाओं की बड़ी वजह बन रही है। यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि सड़क पर कुछ सेकंड की लापरवाही भी जिंदगी भर का दर्द दे सकती है। सुरक्षित ड्राइविंग ही ऐसे हादसों को रोकने का सबसे प्रभावी तरीका है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bengal

Bengal Politics में बड़ा बदलाव: 35 नए मंत्रियों के साथ मजबूत हुई शुभेंदु कैबिनेट

Bengal की राजनीति में सोमवार का दिन बेहद अहम रहा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने अपनी सरकार का बड़ा कैबिनेट विस्तार करते हुए 35 नए मंत्रियों को मंत्रिमंडल में शामिल किया। कोलकाता स्थित नबान्न (लोक भवन) में आयोजित शपथ ग्रहण समारोह में राज्यपाल आर.एन. रवि ने सभी मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाई। भाजपा सरकार के गठन के बाद यह पहला बड़ा कैबिनेट विस्तार माना जा रहा है। राजनीतिक गलियारों में इसकी चर्चा पिछले कई दिनों से चल रही थी और आखिरकार सरकार ने अपने प्रशासनिक ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठा लिया। क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन पर दिखा फोकस नए मंत्रिमंडल में राज्य के अलग-अलग क्षेत्रों को प्रतिनिधित्व देने की कोशिश की गई है। उत्तर बंगाल, जंगलमहल, कोलकाता और सीमावर्ती जिलों के कई नेताओं को जिम्मेदारी मिली है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भाजपा ने आगामी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए क्षेत्रीय और सामाजिक संतुलन साधने की रणनीति अपनाई है। कैबिनेट में अनुभवी नेताओं के साथ कई नए चेहरों को भी मौका दिया गया है। इससे साफ संकेत मिलता है कि सरकार प्रशासनिक अनुभव और युवा नेतृत्व के बीच संतुलन बनाना चाहती है। कई बड़े नेताओं को मिली जिम्मेदारी शपथ लेने वाले नेताओं में भाजपा के कई प्रमुख चेहरे शामिल रहे। पार्टी संगठन में लंबे समय से सक्रिय नेताओं को सरकार में जगह देकर नेतृत्व ने कार्यकर्ताओं को भी सकारात्मक संदेश देने की कोशिश की है। विभागों का अंतिम बंटवारा जल्द घोषित किया जाएगा, जिसके बाद यह स्पष्ट होगा कि किस मंत्री को कौन-सी जिम्मेदारी सौंपी गई है। महिलाओं के लिए बड़ी घोषणा कैबिनेट विस्तार के बीच मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने महिलाओं को बड़ी सौगात भी दी। राज्य की सरकारी बसों में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा योजना लागू करने की घोषणा की गई है। भाजपा ने विधानसभा चुनाव के दौरान यह वादा किया था और अब सरकार इसे जमीन पर उतारती दिखाई दे रही है। सरकार का कहना है कि यह फैसला महिलाओं की आर्थिक भागीदारी बढ़ाने और उन्हें अधिक सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। भाजपा सरकार के लिए क्यों खास है यह विस्तार? पश्चिम Bengal में पहली बार भाजपा पूर्ण बहुमत के साथ सत्ता में आई है। ऐसे में यह कैबिनेट विस्तार केवल प्रशासनिक प्रक्रिया नहीं बल्कि राजनीतिक रूप से भी काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नए मंत्रिमंडल के जरिए सरकार विकास, सुशासन और जनहित से जुड़े मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं तय करने की तैयारी में है। आने वाले दिनों में विभागों के आवंटन और सरकार की नई योजनाओं पर सभी की नजरें रहेंगी। फिलहाल इस विस्तार ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई हलचल जरूर पैदा कर दी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Commercial LPG Price Hike June 2026: 19 किलो LPG सिलेंडर महंगा, जानें नई कीमतें

Breaking News: फिर महंगा हुआ कमर्शियल LPG सिलेंडर, 19 किलो सिलेंडर के दाम बढ़े, होटल-रेस्टोरेंट पर बढ़ेगा बोझ

कमर्शियल LPG सिलेंडर फिर महंगा, 1 जून से बढ़ी कीमतें; होटल-रेस्टोरेंट कारोबार पर असर नई दिल्ली। जून महीने की शुरुआत के साथ ही कारोबारियों को महंगाई का एक और झटका लगा है। सरकारी तेल कंपनियों ने 19 किलो वाले कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में बढ़ोतरी कर दी है। नई दरें 1 जून 2026 से लागू हो गई हैं। दिल्ली में कमर्शियल सिलेंडर अब ₹3113.50 में मिलेगा, जो पहले ₹3071.50 था। यानी एक सिलेंडर पर ₹42 की बढ़ोतरी हुई है। किन शहरों में कितना बढ़ा दाम? तेल कंपनियों द्वारा जारी नई दरों के अनुसार देश के विभिन्न शहरों में कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमतों में ₹42 से ₹53.50 तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। दिल्ली समेत कई महानगरों में नई कीमतें लागू हो चुकी हैं। घरेलू गैस सिलेंडर पर राहत हालांकि इस बार घरेलू रसोई गैस (14.2 किलो) उपभोक्ताओं को राहत मिली है। घरेलू LPG सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे करोड़ों परिवारों को फिलहाल अतिरिक्त बोझ नहीं उठाना पड़ेगा। क्यों बढ़े कमर्शियल LPG के दाम? रिपोर्ट्स के मुताबिक पश्चिम एशिया में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ती लागत के कारण तेल कंपनियों पर दबाव बढ़ा है। ऊर्जा सुरक्षा और LPG भंडारण को मजबूत करने के लिए कीमतों में यह संशोधन किया गया है। होटल, रेस्टोरेंट और छोटे कारोबार होंगे प्रभावित कमर्शियल LPG सिलेंडर का उपयोग मुख्य रूप से होटल, रेस्टोरेंट, ढाबे, कैटरिंग सर्विस और छोटे उद्योग करते हैं। कीमत बढ़ने से इन व्यवसायों की लागत बढ़ेगी, जिसका असर खाने-पीने की वस्तुओं की कीमतों पर भी पड़ सकता है। पिछले महीने भी हुआ था बड़ा इजाफा गौरतलब है कि मई 2026 में भी कमर्शियल LPG सिलेंडर की कीमत में भारी बढ़ोतरी की गई थी। तब 19 किलो सिलेंडर के दाम में लगभग ₹993 की वृद्धि हुई थी। लगातार तीसरे महीने हुई बढ़ोतरी ने व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है। देश हरपल निष्कर्ष घरेलू उपभोक्ताओं को फिलहाल राहत जरूर मिली है, लेकिन कमर्शियल LPG सिलेंडर की बढ़ती कीमतें होटल, रेस्टोरेंट और छोटे व्यापारियों की लागत बढ़ाने वाली हैं। आने वाले दिनों में इसका असर बाजार की कीमतों पर भी देखने को मिल सकता है।
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Education Row: CBSE छात्रों से मिले Rahul Gandhi, OSM विवाद पर केंद्र सरकार को घेरा

Education Crisis: CBSE OSM विवाद के बीच छात्रों से मिले राहुल गांधी नई दिल्ली। CBSE की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली को लेकर जारी विवाद अब राजनीतिक और शैक्षणिक दोनों स्तरों पर बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है। इसी बीच लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने उन छात्रों से मुलाकात की, जिन्होंने उत्तर पुस्तिकाओं में कथित गड़बड़ियों और मूल्यांकन संबंधी समस्याओं को लेकर आवाज उठाई थी। राहुल गांधी ने सोशल मीडिया पर तंज कसते हुए कहा कि वे उन छात्रों से मिलने जा रहे हैं जिन्हें कुछ लोगों ने “एंटी-नेशनल”, “पाकिस्तानी” और “सोरोस एजेंट” तक कह दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर 17 साल के छात्रों को इस तरह के राजनीतिक विशेषणों से क्यों जोड़ा जा रहा है। क्या है पूरा OSM विवाद? CBSE ने इस वर्ष उत्तर पुस्तिकाओं के मूल्यांकन के लिए ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) सिस्टम लागू किया था। कई छात्रों और अभिभावकों ने आरोप लगाया कि स्कैन की गई उत्तर पुस्तिकाओं में पेज गायब थे, कुछ उत्तर दिखाई नहीं दे रहे थे और मूल्यांकन पोर्टल में तकनीकी समस्याएं थीं। कांग्रेस और राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि OSM कॉन्ट्रैक्ट देने की प्रक्रिया में पारदर्शिता नहीं बरती गई और पात्रता मानकों में बदलाव कर एक विशेष कंपनी को लाभ पहुंचाया गया। सरकार और CBSE का क्या कहना है? केंद्रीय शिक्षा मंत्री Dharmendra Pradhan ने माना कि OSM सिस्टम में कुछ तकनीकी समस्याएं सामने आई हैं और उन्हें दूर करने के लिए सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। वहीं CBSE ने राहुल गांधी के आरोपों को “भ्रामक” बताते हुए कहा कि कॉन्ट्रैक्ट पूरी सरकारी प्रक्रिया और General Financial Rules के तहत दिया गया था। बोर्ड के अनुसार सभी प्रक्रियाओं का पालन किया गया और किसी प्रकार की अनियमितता नहीं हुई। छात्रों के भविष्य पर बढ़ी चिंता इस पूरे विवाद के कारण लाखों छात्रों और उनके परिवारों में चिंता का माहौल है। विपक्ष लगातार स्वतंत्र जांच की मांग कर रहा है, जबकि सरकार और CBSE का दावा है कि सभी शिकायतों का समाधान किया जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल मूल्यांकन प्रणाली को लागू करने से पहले व्यापक परीक्षण और तकनीकी तैयारी आवश्यक थी, ताकि छात्रों के परिणामों पर किसी भी तरह का प्रभाव न पड़े। Desh Harpal Analysis यह विवाद केवल एक परीक्षा परिणाम का मामला नहीं रह गया है, बल्कि शिक्षा व्यवस्था की पारदर्शिता, तकनीकी विश्वसनीयता और छात्रों के अधिकारों से जुड़ा राष्ट्रीय मुद्दा बन चुका है। आने वाले दिनों में सरकार, CBSE और विपक्ष के बीच यह बहस और तेज हो सकती है।
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Kalyan Banerjee Attack News

हुगली में TMC सांसद कल्याण बनर्जी पर हमला, सिर में चोट का दावा; BJP-TMC आमने-सामने

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद जारी राजनीतिक तनाव के बीच रविवार को एक और बड़ा विवाद सामने आया। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ सांसद Kalyan Banerjee ने दावा किया कि हुगली जिले के चंदीतला पुलिस स्टेशन के बाहर उन्हें निशाना बनाया गया और इस दौरान उनके सिर में चोट लगी। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, कल्याण बनर्जी पुलिस स्टेशन में कथित पोस्ट-पोल हिंसा और पार्टी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में ज्ञापन देने पहुंचे थे। इसी दौरान वहां भारी संख्या में समर्थक और विरोधी कार्यकर्ता मौजूद थे, जिसके बाद स्थिति तनावपूर्ण हो गई। क्या हुआ घटनास्थल पर? बताया जा रहा है कि चंदीतला पुलिस स्टेशन के बाहर दोनों पक्षों के समर्थकों के बीच तीखी नारेबाजी हुई। इसी दौरान धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। TMC नेताओं का आरोप है कि यह हमला सुनियोजित था और विपक्षी कार्यकर्ताओं ने सांसद को निशाना बनाया। वहीं भाजपा नेताओं ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि यह केवल राजनीतिक ड्रामा है और जनता में बढ़ते असंतोष को छिपाने की कोशिश की जा रही है। अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद दूसरा बड़ा विवाद यह घटना ऐसे समय में हुई है जब एक दिन पहले ही TMC के राष्ट्रीय महासचिव Abhishek Banerjee ने भी दक्षिण 24 परगना के सोनारपुर इलाके में अपने ऊपर हमले का आरोप लगाया था। उन्होंने दावा किया था कि प्रदर्शनकारियों ने उन पर अंडे, पत्थर और ईंटें फेंकी थीं। लगातार दो दिनों में TMC नेताओं पर हमले के आरोपों ने पश्चिम बंगाल की राजनीति में नया विवाद खड़ा कर दिया है। बंगाल में क्यों बढ़ रहा है राजनीतिक तनाव? 2026 के पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बाद राज्य में राजनीतिक हिंसा और आरोप-प्रत्यारोप का दौर लगातार जारी है। भाजपा और TMC दोनों ही एक-दूसरे पर कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने और हिंसा फैलाने के आरोप लगा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनावी नतीजों के बाद पैदा हुई कटुता अब सड़क तक पहुंच चुकी है और छोटे-छोटे विरोध प्रदर्शन भी बड़े टकराव में बदल रहे हैं। इसे भी पढ़े –अभिषेक बनर्जी पर हमले के बाद ममता बनर्जी का बड़ा आरोप, अस्पताल और बीजेपी पर साधा निशाना पुलिस का क्या कहना है? घटना को लेकर पुलिस की ओर से विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। हालांकि स्थानीय प्रशासन ने पूरे मामले की जांच शुरू करने की बात कही है। पुलिस घटनास्थल के वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी जुटा रही है। Desh Harpal Analysis लगातार दो दिनों में TMC के शीर्ष नेताओं पर हमले के आरोप पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था और राजनीतिक माहौल को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर रहे हैं। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी और तेज हो सकती है।
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Weather Update: उत्तर भारत में बारिश से राहत, राजस्थान में धूल भरी आंधी का अलर्ट

Weather Update: उत्तर भारत में बदला मौसम का मिजाज, गर्मी से राहत लेकिन राजस्थान में नया खतरा

कई दिनों से भीषण गर्मी और हीटवेव की मार झेल रहे उत्तर भारत के लोगों को आखिरकार राहत मिलने लगी है। राजस्थान, हरियाणा, दिल्ली और आसपास के कई इलाकों में तेज हवाओं, धूल भरी आंधी और हल्की बारिश ने तापमान में गिरावट दर्ज कराई है। मौसम विभाग के अनुसार पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbance) के प्रभाव से अगले कुछ दिनों तक मौसम में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। राजस्थान के कई जिलों में शुक्रवार और शनिवार को अचानक मौसम बदला। कई जगहों पर धूल भरी आंधी चली, जबकि कुछ क्षेत्रों में बारिश और बादल छाए रहने से लोगों को तपती गर्मी से राहत मिली। राजस्थान में धूल भरे तूफान ने बढ़ाई चिंता राजस्थान के बीकानेर, चूरू और आसपास के इलाकों में धूल भरे तूफान ने जनजीवन को प्रभावित किया। कई स्थानों पर दृश्यता लगभग शून्य तक पहुंच गई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में आसमान पीले और काले रंग की धूल से ढका नजर आया। मौसम विभाग ने राज्य के कई हिस्सों में तेज हवाओं, गरज-चमक और बारिश की संभावना जताई है। कुछ जिलों में ओलावृष्टि की भी चेतावनी जारी की गई है। हीटवेव से मिलेगी राहत पिछले सप्ताह राजस्थान के श्रीगंगानगर सहित कई शहरों में तापमान 47 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया था। लेकिन अब बारिश और बादलों की वजह से तापमान में गिरावट देखने को मिल रही है। मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले 2-3 दिनों में उत्तर-पश्चिम भारत के अधिकांश हिस्सों में हीटवेव का असर कम हो सकता है। IMD ने लोगों को दी ये सलाह किन राज्यों में रहेगा असर? मौसम विभाग के अनुसार राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में अगले कुछ दिनों तक तेज हवाएं, गरज-चमक और हल्की से मध्यम बारिश देखने को मिल सकती है।
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LPG New Rules 2026

LPG New Rules 2026: PNG कनेक्शन वालों के लिए बड़ा अपडेट, जून से बदलेंगे गैस सिलेंडर के नियम

नई दिल्ली। देशभर में एलपीजी (LPG) और पाइप्ड नेचुरल गैस (PNG) उपभोक्ताओं के लिए जून 2026 से नियमों में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है। केंद्र सरकार और ऑयल मार्केटिंग कंपनियां ऐसे घरों की पहचान कर रही हैं जहां LPG और PNG दोनों कनेक्शन एक साथ इस्तेमाल किए जा रहे हैं। इसके चलते लाखों उपभोक्ताओं के बीच यह सवाल खड़ा हो गया है कि क्या उनका गैस सिलेंडर कनेक्शन बंद हो सकता है। क्या है ‘One Household, One Connection’ नियम? सरकार का उद्देश्य घरेलू गैस की उपलब्धता को बेहतर बनाना और दुरुपयोग रोकना है। इसी के तहत कई शहरों में ऐसे घरों की जांच की जा रही है जिनके पास PNG सुविधा होने के बावजूद LPG कनेक्शन भी सक्रिय है। पहले ऐसी स्थिति में उपभोक्ताओं को LPG कनेक्शन सरेंडर करने के लिए कहा जा रहा था। हालांकि हाल ही में सरकार ने नियमों में संशोधन करते हुए उपभोक्ताओं को कुछ राहत भी दी है। अब क्या होगा LPG कनेक्शन का? नए संशोधित नियमों के अनुसार यदि किसी उपभोक्ता ने PNG कनेक्शन ले लिया है तो उसके पास दो विकल्प होंगे— 1. LPG कनेक्शन बंद करवा सकते हैं PNG मिलने के 30 दिनों के भीतर उपभोक्ता अपना LPG कनेक्शन बंद कराने के लिए आवेदन कर सकता है। 2. ट्रांसफर वाउचर ले सकते हैं यदि भविष्य में उपभोक्ता ऐसे इलाके में शिफ्ट होता है जहां PNG उपलब्ध नहीं है, तो वह ट्रांसफर वाउचर की मदद से LPG कनेक्शन दोबारा सक्रिय करवा सकेगा। किन लोगों को होगा सबसे ज्यादा फायदा? सरकार के इस फैसले से उन लोगों को बड़ी राहत मिलेगी जिनकी नौकरी ट्रांसफरेबल है या जो अक्सर शहर बदलते रहते हैं। इसमें शामिल हैं— इन लोगों को हर बार नया गैस कनेक्शन लेने की लंबी प्रक्रिया से नहीं गुजरना पड़ेगा। क्या गैस कनेक्शन तुरंत बंद हो जाएगा? विशेषज्ञों का मानना है कि हर शहर और गैस वितरण कंपनी की प्रक्रिया अलग हो सकती है। जिन क्षेत्रों में PNG नेटवर्क पूरी तरह उपलब्ध है, वहां कंपनियां उपभोक्ताओं से स्थिति स्पष्ट करने को कह सकती हैं। इसलिए यदि आपके पास दोनों कनेक्शन हैं तो अपनी गैस कंपनी से संपर्क कर नियमों की जानकारी लेना जरूरी है। सरकार ने नियम क्यों बदले? मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति को लेकर बढ़ी चिंताओं के बीच सरकार गैस संसाधनों के बेहतर प्रबंधन पर जोर दे रही है। इसी कारण PNG नेटवर्क को बढ़ावा देने और LPG की उपलब्धता जरूरतमंद उपभोक्ताओं तक सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया गया है। यदि आपके घर में PNG कनेक्शन मौजूद है और LPG कनेक्शन भी चालू है, तो जून 2026 में लागू होने वाले नियमों की जानकारी रखना बेहद जरूरी है। हालांकि नए संशोधन के बाद उपभोक्ताओं को ट्रांसफर वाउचर जैसी सुविधा मिल गई है, जिससे भविष्य में LPG कनेक्शन दोबारा लेने की परेशानी कम होगी। सरकार का उद्देश्य गैस वितरण व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता हितैषी बनाना है।
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Supreme Court - हाईकोर्ट 3 महीने से ज्यादा फैसला सुरक्षित न रखें

Supreme Court – हाईकोर्ट 3 महीने से ज्यादा फैसला सुरक्षित न रखें

आम लोगों को समय पर न्याय मिले, इसके लिए Supreme Court ने देश के सभी हाईकोर्टों को अहम निर्देश जारी किए हैं। सुप्रीम Court ने कहा है कि कोई भी फैसला 3 महीने से ज्यादा समय तक सुरक्षित नहीं रखा जाना चाहिए। खासकर जमानत से जुड़े मामलों में आदेश उसी दिन या अधिकतम अगले दिन जारी किए जाएं। सुप्रीम कोर्ट ने यह भी साफ किया कि अदालतों के आदेशों को तुरंत ऑनलाइन अपलोड किया जाए, ताकि लोगों को फैसले की जानकारी समय पर मिल सके। कोर्ट ने माना कि फैसलों में देरी होने से लोगों को मानसिक, सामाजिक और आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। दरअसल, कई मामलों में देखा गया है कि सुनवाई पूरी होने के बाद भी फैसले लंबे समय तक सुरक्षित रखे जाते हैं। इससे आरोपी, पीड़ित और उनके परिवारों को अनिश्चितता में रहना पड़ता है। जमानत मामलों में देरी होने पर कई लोगों को जरूरत से ज्यादा समय जेल में बिताना पड़ता है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्याय में देरी, न्याय से वंचित करने के बराबर है। अदालतों को यह सुनिश्चित करना होगा कि फैसले तय समय सीमा में आएं और लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बना रहे। कोर्ट के इन निर्देशों को न्याय प्रक्रिया में पारदर्शिता और तेजी लाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे आम नागरिकों को राहत मिलने की उम्मीद है और लंबित मामलों के जल्द निपटारे में भी मदद मिल सकती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Charbagh Railway Station पर बड़ा हादसा: टिन शेड गिरने से टीटीई समेत 3 लोग गंभीर घायल

Charbagh Railway Station पर बड़ा हादसा: टिन शेड गिरने से टीटीई समेत 3 लोग गंभीर घायल

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के व्यस्त Charbagh Railway Station पर शुक्रवार को बड़ा हादसा हो गया। स्टेशन पर बने टिन शेड का एक हिस्सा अचानक भरभराकर गिर पड़ा। हादसे में टीटीई समेत तीन लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद स्टेशन पर अफरा-तफरी मच गई और यात्रियों में दहशत फैल गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, हादसा उस समय हुआ जब हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस प्लेटफॉर्म पर पहुंच चुकी थी। अचानक तेज आवाज के साथ टिन शेड नीचे गिर गया। मौके पर मौजूद लोग अपनी जान बचाने के लिए इधर-उधर भागने लगे। हादसे की सूचना मिलते ही रेलवे अधिकारी और राहत टीम तुरंत मौके पर पहुंची। घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनका इलाज जारी है। बताया जा रहा है कि घायलों में एक टीटीई भी शामिल है, जिसकी हालत गंभीर बनी हुई है। हादसे के बाद सुरक्षा के मद्देनजर हावड़ा-देहरादून एक्सप्रेस को कुछ देर के लिए रोक दिया गया। रेलवे प्रशासन ने प्लेटफॉर्म खाली कराकर जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच में टिन शेड की जर्जर हालत को हादसे की वजह माना जा रहा है। यात्रियों का कहना है कि स्टेशन पर कई जगहों पर पुराने और कमजोर शेड बने हुए हैं, जिनकी समय-समय पर जांच नहीं होती। लोगों ने रेलवे प्रशासन से स्टेशन की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने और पुराने ढांचों की तत्काल मरम्मत कराने की मांग की है। रेलवे अधिकारियों का कहना है कि मामले की जांच की जा रही है और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Imran Khan

Imran Khan भारत छोड़ने के नोटिस पर विवाद, Akshay Kumar और Adnan Sami की Citizenship भी चर्चा में

बॉलीवुड में किसी अभिनेता की फिल्म हिट हो या फ्लॉप, उससे जुड़ी खबरें अक्सर चर्चा में रहती हैं। लेकिन जब बात नागरिकता की आती है, तो मामला थोड़ा अलग हो जाता है। अभिनेता इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस मिलने के बाद एक बार फिर अक्षय कुमार, अदनान सामी, आलिया भट्ट और कटरीना कैफ की नागरिकता को लेकर सवाल उठने लगे हैं। किसी कलाकार का भारत में जन्म लेना, यहां रहना या हिंदी फिल्मों में काम करना उसे अपने आप भारतीय नागरिक नहीं बना देता। वहीं, विदेशी नागरिकता रखने वाले व्यक्ति के भारत में रहने और काम करने के भी कुछ नियम हैं। ऐसे में समझना जरूरी है कि इमरान खान के मामले में क्या सामने आया है और भारत में Citizenship Rules आखिर क्या कहते हैं। Imran Khan को क्यों मिला भारत छोड़ने का नोटिस? मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभिनेता इमरान खान (Imran Khan) को मुंबई पुलिस ने 28 अक्टूबर 2026 तक भारत छोड़ने का नोटिस दिया है। इमरान खान अमेरिकी नागरिक हैं और उनकी नागरिकता को लेकर यह मामला चर्चा में आया है। यह विवाद 10 अक्टूबर को मुंबई के अगस्त क्रांति मैदान में हुए विरोध प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारे लगाए गए थे। इस आंदोलन में इमरान खान की भागीदारी के बाद भाजपा नेता किरीट सोमैया ने उनकी विदेशी नागरिकता का हवाला देते हुए अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की थी। इसके बाद इमरान खान को नोटिस जारी किए जाने की खबर सामने आई। हालांकि, किसी व्यक्ति को नोटिस मिलना और उसके खिलाफ किसी आरोप का अंतिम रूप से साबित होना दो अलग-अलग बातें हैं। इस मामले में नोटिस के आधार और आगे की कानूनी प्रक्रिया पर नजर रखना जरूरी होगा। भारत में Citizenship Rules क्या कहते हैं? नागरिकता मुख्य रूप से Citizenship Act, 1955 के तहत तय होती है। कानून में जन्म, वंश, पंजीकरण और देशीयकरण यानी Naturalisation के जरिए नागरिकता प्राप्त करने के प्रावधान हैं। हर रास्ते के लिए अलग-अलग शर्तें निर्धारित हैं। भारत की नागरिकता से जुड़े 5 जरूरी नियम: नागरिकता से जुड़े नियमों की आधिकारिक जानकारी भारत सरकार के Indian Citizenship Online Portal पर उपलब्ध है। OCI Card क्या है और इसके धारकों को कौन-से अधिकार मिलते हैं? OCI का पूरा नाम Overseas Citizen of India है। कई लोग इसे दोहरी नागरिकता समझ लेते हैं, लेकिन यह भारतीय नागरिकता नहीं है। OCI कार्डधारक विदेशी नागरिक ही रहते हैं और उनके पास किसी दूसरे देश का पासपोर्ट होता है। कार्ड के जरिए पात्र लोगों को भारत आने-जाने और रहने सहित कई सुविधाएं मिलती हैं। हालांकि, वे भारतीय नागरिकों की तरह चुनाव में मतदान नहीं कर सकते और न ही संसद या राज्य विधानसभाओं का चुनाव लड़ सकते हैं। कार्डधारकों पर विदेशी नागरिकों और इमिग्रेशन से जुड़े लागू नियम भी प्रभाव डालते हैं। किसी व्यक्ति के मामले में कार्रवाई की वैधता संबंधित कानून और परिस्थितियों के आधार पर तय होती है। क्या विदेशी नागरिक भारत में Protest कर सकते हैं? इमरान खान के मामले के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या विदेशी नागरिक या OCI कार्डधारक भारत में राजनीतिक प्रदर्शन में शामिल हो सकते हैं। भारतीय संविधान के अनुच्छेद 19 के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और शांतिपूर्ण तरीके से एकत्र होने जैसे अधिकार भारतीय नागरिकों को प्राप्त हैं, जो कानून के तहत उचित प्रतिबंधों के अधीन हैं। विदेशी नागरिकों को ये अधिकार उसी रूप में प्राप्त नहीं हैं। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि किसी प्रदर्शन में विदेशी नागरिक की मौजूदगी अपने आप गैरकानूनी हो जाती है। मामले की परिस्थितियां, लागू इमिग्रेशन नियम, संबंधित गतिविधि और प्रशासन की कार्रवाई के आधार को समझना जरूरी है। इमरान खान के मामले में भी नोटिस जारी करने का आधार और आगे की कानूनी प्रक्रिया अहम होगी। Citizenship Controversy: इन मामलों से क्या समझें? इमरान खान, अक्षय कुमार, अदनान सामी, आलिया भट्ट और कटरीना कैफ की नागरिकता से जुड़े मामले अलग-अलग हैं। इमरान खान को भारत छोड़ने का नोटिस मिलने की खबर सामने आई है, अक्षय कुमार को 2023 में भारतीय नागरिकता मिली, जबकि अदनान सामी ने 2016 में भारतीय नागरिकता प्राप्त की थी। दूसरी ओर, आलिया भट्ट और कटरीना कैफ के पास ब्रिटिश नागरिकता है। इन सभी मामलों में एक बात समान है—किसी व्यक्ति की लोकप्रियता, जन्मस्थान या भारत में काम करने से उसकी नागरिकता अपने आप तय नहीं होती। इसके लिए कानूनी प्रावधान और आधिकारिक दस्तावेज मायने रखते हैं। इसलिए नागरिकता से जुड़े किसी भी विवाद को समझते समय सोशल मीडिया पर चल रही चर्चाओं के बजाय तथ्यों, आधिकारिक जानकारी और लागू कानूनों पर भरोसा करना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Stock Market

Stock Market Today: सेंसेक्स 1400 अंक उछला, 74 हजार के पार; Nifty में भी तूफानी तेजी

भारतीय शेयर बाजार (Stock Market) में आज 15 अक्टूबर को जोरदार तेजी देखने को मिली। सेंसेक्स करीब 1,400 अंक उछलकर 74,000 के पार पहुंच गया, जबकि निफ्टी में भी लगभग 400 अंकों की बढ़त दर्ज की गई। बाजार में आई इस तेजी से निवेशकों के बीच उत्साह देखने को मिला। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और IT व Auto सेक्टर के शेयरों में खरीदारी को इस उछाल की प्रमुख वजहों में गिना जा रहा है। पिछले कारोबारी सत्रों में बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच आई इस तेजी ने निवेशकों का ध्यान खींचा है। हालांकि, बाजार की यह बढ़त आगे कितनी टिकती है, इस पर घरेलू और वैश्विक परिस्थितियों का असर बना रहेगा। Sensex Today: 74 हजार के पार पहुंचा सेंसेक्स शेयर बाजार में खरीदारी बढ़ने से सेंसेक्स में करीब 1,400 अंकों की तेजी आई और यह 74,000 के स्तर के पार निकल गया। प्रमुख कंपनियों के शेयरों में खरीदारी से बाजार को मजबूती मिली। वहीं, निफ्टी भी लगभग 400 अंक चढ़ गया। शेयर बाजार में इस तरह की तेजी निवेशकों की धारणा में सुधार का संकेत दे सकती है। हालांकि, बाजार की वास्तविक स्थिति समझने के लिए यह देखना भी जरूरी है कि तेजी कितने शेयरों में रही और कारोबार के अंत तक बाजार अपनी बढ़त बनाए रखता है या नहीं। Crude Oil Price: कच्चा तेल सस्ता होने से क्यों मिली राहत? कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए राहत भरी खबर हो सकती है। भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चा तेल सस्ता होने से देश के आयात खर्च पर दबाव कम हो सकता है। इसका फायदा परिवहन, विमानन और तेल पर निर्भर दूसरे कारोबारों को भी मिल सकता है। साथ ही, तेल की कीमतों में लंबे समय तक नरमी रहने पर महंगाई के दबाव को कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट का असर तुरंत सभी कंपनियों या आम लोगों तक पहुंचे, यह जरूरी नहीं है। इसका प्रभाव रुपये की विनिमय दर, सरकारी करों और घरेलू कीमतों जैसे कई कारकों पर निर्भर करता है। IT और Auto Stocks में खरीदारी से बाजार को सपोर्ट आज की तेजी में IT और Auto सेक्टर के शेयरों में खरीदारी अहम रही। इन सेक्टरों की बड़ी कंपनियों के शेयरों में बढ़त का असर सेंसेक्स और निफ्टी जैसे प्रमुख सूचकांकों पर पड़ सकता है। आईटी सेक्टर पर निवेशकों की नजर वैश्विक मांग, अमेरिकी बाजारों और कंपनियों के वित्तीय नतीजों के कारण रहती है। वहीं, ऑटो सेक्टर में बिक्री, त्योहारी मांग, कच्चे माल की लागत और ब्याज दरें कंपनियों के प्रदर्शन को प्रभावित करती हैं। इन सेक्टरों में आई खरीदारी ने बाजार को सहारा दिया, लेकिन निवेशकों को किसी भी कंपनी का शेयर चुनने से पहले उसके कारोबार और वित्तीय स्थिति का आकलन करना चाहिए। Share Market में तेजी के बाद निवेशक क्या करें? सेंसेक्स और निफ्टी में बड़ी तेजी देखकर निवेशकों के मन में यह सवाल उठना स्वाभाविक है कि क्या बाजार में निवेश करने का सही समय आ गया है। लेकिन केवल एक दिन की तेजी के आधार पर फैसला लेना जोखिम भरा हो सकता है। निवेश से पहले इन बातों पर ध्यान देना उपयोगी रहेगा: आगे कैसी रहेगी Stock Market की चाल? आने वाले दिनों में शेयर बाजार की दिशा कई कारकों से प्रभावित हो सकती है। कच्चे तेल की कीमतें, वैश्विक बाजारों का प्रदर्शन, विदेशी निवेशकों की खरीदारी या बिकवाली और कंपनियों के तिमाही नतीजे इसमें अहम भूमिका निभाएंगे। अगर सकारात्मक संकेत बने रहते हैं, तो बाजार को आगे भी समर्थन मिल सकता है। दूसरी ओर, वैश्विक स्तर पर किसी प्रतिकूल घटनाक्रम या निवेशकों की मुनाफावसूली से बाजार में फिर उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है। कुल मिलाकर, 15 अक्टूबर को सेंसेक्स में करीब 1,400 अंकों और निफ्टी में लगभग 400 अंकों की तेजी शेयर बाजार के लिए बड़ा उछाल है। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट और IT व Auto शेयरों में खरीदारी ने बाजार को मजबूती दी। अब निवेशकों की नजर इस बात पर रहेगी कि यह तेजी आगे भी जारी रहती है या बाजार में फिर उतार-चढ़ाव शुरू होता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
CJI Surya Kant

CJI Surya Kant राहुल गांधी के मार्च पर बोले- कोर्ट के बाहर क्या हो रहा, सब पता है

राहुल गांधी के मार्च और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सुप्रीम कोर्ट में गुरुवार, 15 अक्टूबर को सुनवाई हुई। इस दौरान मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अदालत को बाहर दिए जा रहे बयानों और अंदर चल रही कार्यवाही, दोनों की जानकारी है। न्यायपालिका किसी दबाव में काम नहीं करती। राहुल गांधी और INDIA गठबंधन के अन्य नेताओं की ओर से 12 अक्टूबर को निकाले गए मार्च के बाद यह मामला चर्चा में है। दूसरी ओर, SIR प्रक्रिया को लेकर विपक्ष चुनाव आयोग से लगातार सवाल पूछ रहा है। विपक्ष का आरोप है कि मतदाता सूची में गड़बड़ियों से वास्तविक मतदाताओं के अधिकार प्रभावित हो सकते हैं। अब इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट की आगे की सुनवाई पर सबकी नजर है। CJI सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान क्या कहा? सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका को किसी तरह के दबाव या धमकी से प्रभावित नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि अदालत को पता है कि बाहर क्या कहा जा रहा है और कोर्ट के भीतर क्या हो रहा है। उनकी टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब सुप्रीम कोर्ट के बाहर हुए राजनीतिक मार्च और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर विवाद जारी है। अदालत ने इस मामले में संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है। हालांकि, नोटिस जारी होने का मतलब यह नहीं है कि किसी नेता के खिलाफ आरोप साबित हो गए हैं। अंतिम निर्णय सुनवाई और उपलब्ध तथ्यों के आधार पर होगा। Rahul Gandhi March: 12 अक्टूबर को क्या हुआ था? 12 अक्टूबर को राहुल गांधी के नेतृत्व में INDIA गठबंधन के कई नेताओं ने दिल्ली में सुप्रीम कोर्ट की ओर मार्च किया था। इस दौरान मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) को लेकर विरोध जताया गया। विपक्षी नेताओं का कहना है कि मतदाता सूची से नाम हटाने की प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए और किसी भी पात्र मतदाता का नाम गलती से नहीं हटना चाहिए। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ भी अपनी मांगें रखीं। विपक्ष इस मुद्दे को लोकतांत्रिक अधिकारों से जोड़कर देख रहा है। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूची को अपडेट करने की प्रक्रिया को चुनाव व्यवस्था का जरूरी हिस्सा बताया जाता है। राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे की CJI से मुलाकात क्यों नहीं हुई? मार्च से पहले राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने CJI सूर्यकांत से मुलाकात का समय मांगा था। वे SIR और मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर अपना पक्ष रखना चाहते थे। हालांकि, CJI ने मुलाकात के अनुरोध को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने संकेत दिया कि न्यायिक प्रक्रिया से जुड़े मुद्दों को उचित कानूनी माध्यम से अदालत के सामने रखा जाना चाहिए। इसका मतलब यह है कि यदि किसी पक्ष को चुनाव प्रक्रिया या मतदाता सूची को लेकर शिकायत है, तो वह संबंधित नियमों के तहत याचिका दाखिल कर सकता है। अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों को अपना पक्ष रखने का अवसर मिलता है। SIR Controversy: मतदाता सूची से नाम हटाने पर क्यों है विवाद? SIR को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि मतदाता सूची को अपडेट करते समय वास्तविक मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाए। विपक्ष का आरोप है कि पुनरीक्षण प्रक्रिया में बड़ी संख्या में नाम हटाए जाने से पात्र मतदाताओं को परेशानी हो सकती है। वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया का उद्देश्य मृत, स्थानांतरित और अन्य कारणों से अपात्र हो चुके मतदाताओं के रिकॉर्ड को अपडेट करना है। ऐसे में पारदर्शिता, उचित सत्यापन और शिकायतों के समय पर समाधान की भूमिका अहम हो जाती है। किसी मतदाता का नाम सूची में नहीं होने पर उसके मतदान के अधिकार पर असर पड़ सकता है, इसलिए इस प्रक्रिया में सावधानी बरतना जरूरी है। Supreme Court Hearing: अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट में SIR से संबंधित याचिकाओं पर आगे की सुनवाई महत्वपूर्ण होगी। अदालत संबंधित पक्षों के जवाब और उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर मामले पर विचार करेगी। राहुल गांधी के मार्च से जुड़े विवाद में भी अदालत की अगली कार्रवाई पर नजर रहेगी। फिलहाल, न्यायपालिका की स्वतंत्रता, अदालत की गरिमा और मतदाता सूची की पारदर्शिता इस पूरे मामले के प्रमुख पहलू बने हुए हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

इंदौर में कमजोर मानसून से जल संकट का खतरा, महापौर ने मांगा 50 करोड़ का पैकेज

इंदौर। मध्य प्रदेश में कमजोर मानसून के कारण आने वाले महीनों में जल संकट की आशंका बढ़ गई है। प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में सामान्य तौर पर करीब 37 इंच बारिश होती है, लेकिन इस बार अब तक केवल 23 इंच वर्षा दर्ज की गई है। हालात को देखते हुए महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव से जल प्रबंधन के लिए 50 करोड़ रुपये का विशेष पैकेज देने की मांग की है। जल संकट से निपटने की रणनीति तैयार करने के लिए नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय, जल संसाधन मंत्री तुलसी सिलावट और इंदौर नगर निगम सहित संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ बैठक की जा रही है। 40 लाख आबादी, रोजाना 750 से 800 एमएलडी पानी की मांग इंदौर की आबादी करीब 40 लाख है। शहर में घरेलू जरूरतों के लिए प्रतिदिन लगभग 620 एमएलडी पानी की आवश्यकता होती है। औद्योगिक, व्यावसायिक, संस्थागत और अन्य उपयोगों को शामिल करने पर कुल मांग बढ़कर 750 से 800 एमएलडी तक पहुंच जाती है। वर्ष 2008 में भी शहर में करीब 20 इंच बारिश हुई थी, जिसके कारण जल संकट की स्थिति बनी थी। अब 18 साल बाद कम बारिश ने एक बार फिर गर्मियों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ा दी है। डीमार्ट के पास नर्मदा की पाइपलाइन फूटी, अंडरपास बंद कम बारिश के बीच पानी की बर्बादी से जुड़ी समस्या भी सामने आई है। गुरुवार सुबह बंगाली चौराहे से बायपास के बीच डीमार्ट के पास नर्मदा जलापूर्ति की पाइपलाइन फूट गई। पाइपलाइन से तेज दबाव के साथ पानी निकलने लगा, जिससे सड़क पर जाम लग गया। पानी भरने के कारण अंडरपास भी बंद करना पड़ा। भूजल दोहन 90 प्रतिशत के करीब विशेषज्ञों के मुताबिक, इंदौर की बड़ी आबादी नर्मदा जलापूर्ति पर निर्भर है। इसके जरिए शहर को प्रतिदिन करीब 440 एमएलडी पानी मिलता है। हालांकि, लीकेज और अन्य कारणों से लगभग 22 प्रतिशत पानी बर्बाद हो जाता है। शहर में एक लाख से अधिक निजी बोरवेल हैं। इसके अलावा नगर निगम के करीब 6,500 बोरवेल और हाइड्रेंट भी हैं। केंद्रीय भूजल बोर्ड की 2025 की रिपोर्ट में शहर और ग्रामीण क्षेत्रों को क्रिटिकल जोन में रखे जाने का उल्लेख है। रिपोर्ट के मुताबिक, भूजल दोहन का स्तर करीब 90 प्रतिशत है। इसमें और वृद्धि होने पर जल संकट की स्थिति गंभीर हो सकती है। पिछली गर्मियों में 700 टैंकरों से पहुंचाना पड़ा था पानी पिछली गर्मियों में बोरवेल पर निर्भर आबादी के करीब 40 प्रतिशत हिस्से को गंभीर जल संकट का सामना करना पड़ा था। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगभग 700 टैंकरों के जरिए पानी की आपूर्ति करनी पड़ी थी। इस बार तालाबों में कम जलभराव, भूजल का लगातार दोहन और जलापूर्ति नेटवर्क में पानी की बर्बादी प्रशासन के सामने बड़ी चुनौतियां बन सकती हैं। ऐसे में शहर की जल जरूरतों को पूरा करने के लिए बेहतर जल प्रबंधन, लीकेज पर नियंत्रण और उपलब्ध जल स्रोतों का प्रभावी उपयोग अहम होगा।
Punjab

Punjab Protest: झोटा हत्याकांड पर सड़कों पर उतरे लोग, SHO सस्पेंड; DSP पर कार्रवाई की मांग

Punjab में नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले सामाजिक कार्यकर्ता परविंदर सिंह झोटा की हत्या के बाद लोगों में गुस्सा है। इसी के विरोध में गुरुवार, 15 अक्टूबर को पंजाब बंद का आह्वान किया गया। राज्य के कई शहरों में बाजार बंद रहे और कुछ जगहों पर स्कूल-कॉलेज भी नहीं खुले। बठिंडा-चंडीगढ़ हाईवे पर प्रदर्शनकारियों ने जाम लगाया। वहीं, झोटा का परिवार न्याय की मांग पर अड़ा है और उसने शव का अंतिम संस्कार करने से इनकार कर दिया है। इस मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी को गिरफ्तार किया है। दूसरी ओर, संबंधित SHO को सस्पेंड किए जाने की खबर सामने आई है। परिवार और प्रदर्शनकारी अब मामले की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई और नशे के अवैध कारोबार पर सख्ती की मांग कर रहे हैं। Punjab Bandh Today: बाजार बंद, सड़कों पर उतरे लोग परविंदर सिंह झोटा के पिता भीम सिंह ने 15 अक्टूबर को सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक पंजाब बंद का आह्वान किया था। इस बंद को विभिन्न राजनीतिक दलों, किसान संगठनों और कर्मचारी संगठनों का समर्थन मिला। मानसा, बठिंडा, लुधियाना, जालंधर और अमृतसर समेत कई शहरों में बंद का असर देखने को मिला। कई बाजारों में दुकानें नहीं खुलीं, जबकि कुछ इलाकों में निजी स्कूल और कॉलेज भी बंद रहे। बंद के दौरान आवश्यक सेवाओं को चालू रखने की अपील की गई। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि नशे के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है। उन्होंने सरकार से इस मामले में गंभीरता से कार्रवाई करने और जांच में पारदर्शिता बनाए रखने की मांग की। बठिंडा-चंडीगढ़ हाईवे पर जाम, यातायात प्रभावित पंजाब बंद के दौरान बठिंडा-चंडीगढ़ हाईवे पर प्रदर्शन के कारण यातायात प्रभावित हुआ। कई जगहों पर लोगों ने सड़क पर उतरकर विरोध जताया। कुछ अन्य मार्गों पर भी जाम की स्थिति बनी। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि जब तक परिवार को न्याय का भरोसा नहीं मिलता, तब तक उनका आंदोलन जारी रह सकता है। बंद के कारण आम लोगों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ा। परिवार ने शव का अंतिम संस्कार करने से किया इनकार परविंदर सिंह झोटा का शव मानसा के सिविल अस्पताल की मोर्चरी में रखा गया है। परिवार ने मांग की है कि मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से कराई जाए। इसके साथ ही पोस्टमॉर्टम PGIMER चंडीगढ़ में कराने की मांग भी उठाई गई है। झोटा के पिता भीम सिंह का कहना है कि परिवार को न्याय चाहिए और हत्या से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। परिवार ने मुख्यमंत्री भगवंत मान और पंजाब के DGP गौरव यादव के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। परिवार का विरोध केवल आरोपी की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं है। वह यह जानना चाहता है कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका भी थी। फिलहाल अंतिम संस्कार को लेकर परिवार का रुख सख्त बना हुआ है। Parvinder Singh Jhota Murder Case: मुख्य आरोपी गिरफ्तार परविंदर सिंह झोटा की 13 अक्टूबर को मानसा में गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। वह नशे के खिलाफ अभियान चलाते थे और कथित तौर पर मेडिकल स्टोरों पर नशीले पदार्थों की अवैध बिक्री के मुद्दे उठाते थे। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, घटना से पहले झोटा का मेडिकल स्टोर संचालक अश्वनी कुमार के साथ विवाद हुआ था। इसी दौरान गोली चलने से झोटा की मौत हो गई। घटना के समय वह कथित तौर पर फेसबुक लाइव भी कर रहे थे। पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी अश्वनी कुमार को राजस्थान के सालासर से गिरफ्तार किया। अब पुलिस हत्या के पीछे की परिस्थितियों और विवाद के कारणों की जांच कर रही है। मामले में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका होने या साजिश से जुड़े पहलुओं की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। SHO सस्पेंड, DSP पर कार्रवाई की मांग हत्या के बाद पुलिस की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मामले में मानसा की संबंधित SHO बिएंत कौर को सस्पेंड किए जाने की खबर सामने आई है। वहीं, DSP और अन्य अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जा रही है। परिवार और प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच हो और यदि किसी अधिकारी की लापरवाही सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाए। DSP के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश और अन्य विभागीय कदमों की अंतिम स्थिति की आधिकारिक पुष्टि जरूरी है। फिलहाल इस मामले में पुलिस की जवाबदेही भी विरोध का एक प्रमुख मुद्दा बनी हुई है। आरोपी की दुकान में तोड़फोड़, घर के हिस्से पर बुलडोजर कार्रवाई झोटा की हत्या के बाद मानसा में आक्रोशित लोगों ने आरोपी की मेडिकल दुकान में तोड़फोड़ की। इसके बाद दुकान को नुकसान पहुंचने और आग लगाए जाने की खबरें सामने आईं। प्रशासन ने आरोपी के घर के एक हिस्से को भी गिराया। इन घटनाओं के बीच इलाके में तनाव बढ़ गया और पुलिस को सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करनी पड़ी। प्रशासन के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने के साथ-साथ प्रदर्शनकारियों की मांगों पर ध्यान देने की चुनौती है। CM भगवंत मान ने जांच और कार्रवाई का भरोसा दिया पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने मामले की जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का भरोसा दिया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं को देखा जाएगा और जांच में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका सामने आने पर उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। वहीं, विपक्षी दलों ने राज्य में कानून-व्यवस्था और नशे के अवैध कारोबार को लेकर सरकार से जवाब मांगा है। झोटा हत्याकांड ने पंजाब में नशे के खिलाफ अभियान चलाने वाले लोगों की सुरक्षा का मुद्दा भी फिर चर्चा में ला दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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