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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।
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मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।
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मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में विवादों की लंबी फेहरिस्त, खरीदी से लेकर भर्ती तक उठे सवाल

मध्यप्रदेश के सरकारी मेडिकल कॉलेजों में प्रशासनिक व्यवस्था सुधारने के उद्देश्य से अप्रैल 2024 में डीन की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव किया गया था। पदोन्नति की पुरानी व्यवस्था के स्थान पर 18 सरकारी मेडिकल कॉलेजों में पहली बार सीधी भर्ती के जरिए डीन नियुक्त किए गए। इसका उद्देश्य कॉलेजों के प्रशासन और वित्तीय कामकाज में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना था। हालांकि, करीब ढाई साल बाद भी सरकारी मेडिकल कॉलेजों से जुड़ी शिकायतों में कमी आती नजर नहीं आ रही है। कहीं मेडिकल उपकरणों की खरीदी में अनियमितताओं के आरोप लगे, तो कहीं कर्मचारियों की भर्ती और वित्तीय लेन-देन पर सवाल उठे। कई मामलों में जांच शुरू हुई, जबकि कुछ मामलों में पुलिस और लोकायुक्त तक कार्रवाई के लिए पहुंचे। रीवा मेडिकल कॉलेज में डीन बदले, अस्पताल की घटनाओं से उठे सवाल स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ला के गृह जिले रीवा में मेडिकल कॉलेज से जुड़े अस्पताल में पहले प्रसूता की मौत और फिर जीवित व्यक्ति को मृत घोषित किए जाने जैसी घटनाएं सामने आईं। इसके बाद डीन डॉ. सुनील अग्रवाल को पद से हटाकर सतना भेज दिया गया। उनकी जगह डॉ. शशिधर गर्ग को नया डीन नियुक्त किया गया। इसी कॉलेज से जुड़े संजय गांधी अस्पताल में 80 नर्सिंग छात्राओं ने ईएनटी विभाग के एक डॉक्टर पर अभद्रता करने का आरोप लगाया। इन घटनाओं ने अस्पताल के प्रशासन और व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े किए। उधर, शिवपुरी मेडिकल कॉलेज के वरिष्ठ अधिकारियों पर आयुष्मान योजना की प्रोत्साहन राशि अपने खातों में ट्रांसफर कराने के आरोप लगे। मामले में लोकायुक्त ने प्रारंभिक जांच शुरू की है। वहीं, नए मेडिकल कॉलेजों में डीन की सीधी भर्ती को लेकर हाईकोर्ट ने रोक लगा रखी है। इंदौर: मशीन खरीदी में गड़बड़ी के आरोप, डीन को आरोप पत्र इंदौर के एमजीएम मेडिकल कॉलेज में मेडिकल उपकरणों की खरीदी को लेकर गंभीर सवाल उठाए गए। शिकायत में दावा किया गया कि करीब 98 लाख रुपए में खरीदी गई ओटी लाइट जैसी लाइट जेम पोर्टल पर लगभग 7 लाख रुपए में उपलब्ध थी। इसके अलावा करीब 70.50 लाख रुपए के कैमरों की खरीदी पर भी सवाल उठे। मामले की जांच के लिए छह सदस्यीय समिति गठित की गई। लोकायुक्त ने भी विभाग से रिपोर्ट मांगी है। वहीं, जीनोम सिक्वेंसिंग मशीन की खरीदी के मामले में डीन के खिलाफ आरोप पत्र जारी किए जाने की जानकारी सामने आई। भोपाल: उपकरणों की खरीदी पर शिकायत, वेतन नहीं मिलने से हड़ताल भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज में मेडिकल उपकरणों की खरीदी को लेकर शिकायतें सामने आईं। मामले की जांच के लिए समिति गठित की गई। शिकायतकर्ता ने जांच समिति की रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति मांगते हुए मुख्य सचिव को भी आवेदन दिया। इसी बीच हमीदिया अस्पताल में आउटसोर्स कर्मचारियों को दो महीने तक वेतन नहीं मिलने के कारण हड़ताल करनी पड़ी। इससे अस्पताल के कामकाज और कर्मचारियों की समस्याओं को लेकर सवाल उठे। ग्वालियर: डाइट सप्लाई और वित्तीय अनियमितताओं की जांच ग्वालियर के गजराराजा मेडिकल कॉलेज में मरीजों के लिए डाइट सप्लाई को लेकर विवाद सामने आया। इसके अलावा वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें भी जांच के दायरे में आईं। वर्ष 2024 में कॉलेज में करीब 19 करोड़ रुपए के खर्च और खरीदी से जुड़े मामलों की जांच की जानकारी सामने आई थी। इन मामलों में वरिष्ठ अधिकारियों की भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए गए। जबलपुर: 1.63 करोड़ रुपए की गड़बड़ी, तीन कर्मचारी गिरफ्तार जबलपुर के नेताजी सुभाषचंद्र बोस मेडिकल कॉलेज की कैश शाखा में वर्ष 2026 में 1.63 करोड़ रुपए से अधिक की राशि के हिसाब में गड़बड़ी का मामला सामने आया। आंतरिक जांच के बाद डीन डॉ. नवनीत सक्सेना की शिकायत पर पुलिस ने पांच कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज किया। इनमें से तीन कर्मचारियों को गिरफ्तार किया गया। खंडवा से सागर तक, दूसरे मेडिकल कॉलेजों में भी शिकायतें खंडवा मेडिकल कॉलेज: छात्रों ने मेस की साफ-सफाई और भोजन की गुणवत्ता को लेकर शिकायत की। खाद्य सुरक्षा विभाग की जांच में रसोई में गंदगी और कीड़े-मकोड़े मिलने की बात सामने आई। विदिशा मेडिकल कॉलेज: आउटसोर्स कर्मचारियों की नियुक्ति में गड़बड़ी के आरोप लगे। शहडोल मेडिकल कॉलेज: नवजात के इलाज में लापरवाही के आरोपों के बाद हंगामा हुआ और पुलिस ने जांच शुरू की। इसके अलावा करीब 150 कर्मचारियों ने वेतन वृद्धि और एसीआर से जुड़ी शिकायतें कीं। दतिया मेडिकल कॉलेज: वर्ष 2026 में नर्सिंग अधीक्षक की नियुक्ति को हाईकोर्ट ने निरस्त कर दिया। रतलाम मेडिकल कॉलेज: अनियमितताओं से जुड़ी शिकायत का मुद्दा विधानसभा में उठाया गया। सागर मेडिकल कॉलेज: सोनोग्राफी सेवा बंद रहने और इलाज में लापरवाही सहित कई शिकायतें सीएम हेल्पलाइन पर दर्ज कराई गईं। सीधी भर्ती से बदलाव की उम्मीद, लेकिन जवाबदेही पर सवाल सरकारी मेडिकल कॉलेजों में डीन की नियुक्ति प्रक्रिया बदलने का उद्देश्य प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करना और वित्तीय कामकाज में पारदर्शिता लाना था। लेकिन अलग-अलग कॉलेजों से सामने आए मामलों ने निगरानी व्यवस्था, खरीद प्रक्रिया, भर्ती और अस्पताल प्रबंधन की जवाबदेही पर सवाल खड़े किए हैं। अब इन शिकायतों की जांच और उन पर होने वाली कार्रवाई अहम होगी। इससे ही स्पष्ट होगा कि अनियमितताओं के आरोपों पर कितनी प्रभावी कार्रवाई होती है और सरकारी मेडिकल कॉलेजों की व्यवस्था में कितना सुधार आता है।
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MP SEIAA में विवाद गहराया: अध्यक्ष ने IAS हर्षल पंचोली को निलंबित करने की सिफारिश की, गंभीर अनियमितताओं के लगाए आरोप

मध्यप्रदेश राज्य स्तरीय पर्यावरण समाघात निर्धारण प्राधिकरण (SEIAA) में पर्यावरण मंजूरी से जुड़े मामलों को लेकर विवाद गहरा गया है। प्राधिकरण के अध्यक्ष शिवनारायण सिंह चौहान ने सदस्य सचिव और IAS अधिकारी हर्षल पंचोली पर गंभीर अनियमितताओं और वैधानिक प्रावधानों के उल्लंघन के आरोप लगाए हैं। उन्होंने पंचोली को तत्काल निलंबित करने और उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की है। इस संबंध में अध्यक्ष ने 20 अक्टूबर को मध्यप्रदेश शासन के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है। पत्र की प्रतिलिपि केंद्र सरकार के पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय को भी आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजी गई है। हालांकि, पत्र में लगाए गए आरोपों पर संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आना बाकी है। 974वीं और 975वीं बैठकों के एजेंडे पर सवाल अध्यक्ष ने आरोप लगाया है कि SEIAA की 974वीं और 975वीं बैठकों का एजेंडा तैयार करते समय निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। उनके अनुसार, प्राधिकरण में करीब 500 प्रकरण लंबित हैं, लेकिन एजेंडा तैयार करते समय मामलों के क्रम का ध्यान नहीं रखा गया। आरोप है कि परिवेश पोर्टल पर उपलब्ध सूची में कई प्रकरणों को छोड़कर बीच के मामलों को एजेंडे में शामिल किया गया। पत्र के मुताबिक, दोनों बैठकों का एजेंडा 17 अक्टूबर 2026 को पोर्टल पर अपलोड किया गया था। अध्यक्ष ने यह भी दावा किया है कि एजेंडे में कुछ ऐसे मामले शामिल किए गए, जो SEIAA के बजाय राज्य स्तरीय विशेषज्ञ मूल्यांकन समिति (SEAC) में लंबित थे। वहीं, पर्यावरण मंजूरी से जुड़े कुछ अन्य मामलों को एजेंडे में शामिल नहीं किए जाने पर भी सवाल उठाए गए हैं। बिना अनुमोदन एजेंडा अपलोड करने का आरोप पत्र में पर्यावरण प्रभाव आकलन अधिसूचना-2006 और केंद्र सरकार के कार्यालय ज्ञापन के प्रावधानों का हवाला दिया गया है। अध्यक्ष का आरोप है कि सदस्य सचिव ने कुछ बैठकों का एजेंडा उनके अनुमोदन के बिना ही परिवेश पोर्टल पर अपलोड कर दिया। पत्र के अनुसार, SEIAA की 966वीं बैठक में भी सात प्रकरणों को अध्यक्ष की मंजूरी के बिना एजेंडे में शामिल किए जाने पर आपत्ति दर्ज कराई गई थी। अब 974वीं और 975वीं बैठकों के एजेंडे को लेकर भी इसी तरह की अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं। NGT के आदेश के पालन में लापरवाही का दावा अध्यक्ष ने राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के 3 फरवरी 2026 के आदेश का उल्लेख करते हुए कहा है कि खनन से जुड़े कुछ मामलों में SEIAA की अनुमति और सहमति के बिना कार्रवाई को नियमों का उल्लंघन माना गया था। पत्र में आरोप लगाया गया है कि आदेश के अनुपालन के लिए अध्यक्ष की ओर से कई बार पत्र लिखे जाने के बावजूद संबंधित मामलों को विचार के लिए एजेंडे में शामिल नहीं किया गया। इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट में लंबित एक मामले में केंद्र सरकार की ओर से दाखिल जवाब के संदर्भ में भी आवश्यक प्रकरणों को एजेंडे में शामिल नहीं करने का आरोप लगाया गया है। पर्यावरण मंजूरी के पत्र जारी करने में देरी पत्र में पर्यावरण मंजूरी (EC) मिलने के बाद संबंधित स्वीकृति पत्र समय पर जारी नहीं किए जाने का मुद्दा भी उठाया गया है। अध्यक्ष के मुताबिक, कुछ मामलों में मंजूरी मिलने के बावजूद EC लेटर जारी करने में देरी होती है, जिससे आवेदकों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। उन्होंने इस पूरे मामले की निष्पक्ष और स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने की जरूरत भी जताई है। बैठकों की कार्यवाही समय पर अपलोड नहीं करने का आरोप अध्यक्ष ने बैठकों की कार्यवाही का विवरण यानी मिनट्स ऑफ मीटिंग (MoM) निर्धारित पांच कार्यदिवस की समयसीमा में परिवेश पोर्टल पर अपलोड नहीं किए जाने पर भी आपत्ति जताई है। पत्र में कुछ बैठकों की कार्यवाही देर से अपलोड किए जाने के उदाहरणों का उल्लेख करते हुए इसे प्रक्रिया संबंधी गंभीर लापरवाही बताया गया है। अध्यक्ष ने की निलंबन और जांच की मांग शिवनारायण सिंह चौहान ने पत्र में कहा है कि सदस्य सचिव के पद पर रहते हुए कथित अनियमितताओं से प्राधिकरण की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है। उन्होंने पर्यावरण को अपूरणीय क्षति होने की आशंका भी जताई है। अध्यक्ष ने मुख्य सचिव से IAS हर्षल पंचोली को तत्काल निलंबित करने, उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू करने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने का अनुरोध किया है। फिलहाल, ये आरोप अध्यक्ष की ओर से लिखे गए पत्र पर आधारित हैं। मामले में संबंधित अधिकारी का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
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इंदौर में हेड कॉन्स्टेबल फिरोज खान की 46 अचल संपत्तियों का खुलासा, बाजार मूल्य 64 करोड़ रुपये से अधिक

इंदौर में पुलिस प्रशिक्षण महाविद्यालय (PTC) में पदस्थ हेड कॉन्स्टेबल (ड्राइवर) फिरोज खान के खिलाफ लोकायुक्त की आय से अधिक संपत्ति मामले की जांच में नए खुलासे हुए हैं। लोकायुक्त के मुताबिक, 19 अक्टूबर तक की जांच में फिरोज खान, उनके परिवार, सहयोगियों और संबंधित फर्म के नाम पर कुल 46 अचल संपत्तियां खरीदे जाने की जानकारी सामने आई है। इन संपत्तियों की अनुमानित वर्तमान बाजार कीमत 64 करोड़ रुपये से अधिक आंकी गई है, जबकि इनकी कुल गाइडलाइन कीमत करीब 17.19 करोड़ रुपये बताई गई है। जांच एजेंसी के अनुसार, फिरोज खान और उनसे जुड़े लोगों की चल-अचल संपत्तियों पर अब तक 18.79 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए जाने की जानकारी मिली है। लोकायुक्त संपत्तियों के दस्तावेजों, खरीद में इस्तेमाल की गई राशि और संबंधित लोगों की भूमिका का सत्यापन कर रहा है। जांच अभी जारी है। रंगवासा से लसूड़िया मोरी तक जमीन खरीदने की जानकारी जांच के दौरान इंदौर जिले की देपालपुर तहसील के ग्राम रंगवासा में कई कृषि भूमि की रजिस्ट्रियां सामने आई हैं। ये जमीनें वर्ष 2023 और 2024 में अलग-अलग तारीखों पर खरीदी गई थीं। इसके अलावा, जुलाई 2024 में लसूड़िया मोरी क्षेत्र में रेड कारपेट के पीछे 11.771 हेक्टेयर कृषि भूमि खरीदे जाने की जानकारी मिली है। इस जमीन का गाइडलाइन मूल्य करीब 3.85 करोड़ रुपये बताया गया है। लोकायुक्त के मुताबिक, इन जमीनों की खरीद स्पार्कवेव रियलिटी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड के नाम पर की गई। जांच में सामने आया है कि यह फर्म फिरोज खान की पत्नी हिना खान और इंदौर निवासी युवराज पंवार के संयुक्त नाम से संचालित है। एजेंसी फर्म से जुड़े दस्तावेजों और अन्य जानकारियों की भी जांच कर रही है। लोकायुक्त की जांच में अब तक सामने आए आंकड़े लोकायुक्त की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, जांच में अब तक ये आंकड़े सामने आए हैं: ये आंकड़े जांच के दौरान अब तक जुटाई गई जानकारी पर आधारित हैं। संपत्तियों के वास्तविक स्वामित्व, खरीद के लिए इस्तेमाल की गई राशि और संबंधित व्यक्तियों की भूमिका का सत्यापन किया जा रहा है। 14 अक्टूबर को कई ठिकानों पर हुई थी सर्चिंग लोकायुक्त ने 14 अक्टूबर को फिरोज खान के विभिन्न आवासों और अन्य ठिकानों पर सर्च कार्रवाई की थी। इसके बाद से जांच एजेंसी संपत्तियों, वित्तीय लेन-देन और उनसे जुड़े दस्तावेजों की जानकारी जुटा रही है। जांच में संपत्तियों की खरीद की तारीख, गाइडलाइन मूल्य और अनुमानित बाजार मूल्य का मिलान किया जा रहा है। आय के ज्ञात स्रोतों और संपत्तियों पर किए गए खर्च के बीच संभावित अंतर का आकलन जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। फिलहाल लोकायुक्त की कार्रवाई जारी है और मामले में आगे की जानकारी जांच के निष्कर्षों के आधार पर सामने आएगी।
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ऑफिस में घंटों बैठकर काम करने से बढ़ सकता है गर्दन और कमर दर्द, हर 30-45 मिनट में लें ब्रेक

लगातार कई घंटे तक कुर्सी पर बैठकर कंप्यूटर पर काम करना गर्दन और रीढ़ की हड्डी से जुड़ी समस्याओं का कारण बन सकता है। गलत पॉश्चर, लंबे समय तक एक ही स्थिति में बैठे रहना और शारीरिक गतिविधियों की कमी से गर्दन व कमर दर्द की परेशानी बढ़ सकती है। इससे बचने के लिए हर 30 से 45 मिनट में 5 मिनट का ब्रेक लेना, बैठने की मुद्रा सही रखना और नियमित एक्सरसाइज करना जरूरी है। ये बातें ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय इंदौर में रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य और देखभाल पर आयोजित संगोष्ठी में स्पाइन सर्जन डॉ. प्रसाद पाटगांवकर ने कहीं। उन्होंने लंबे समय तक टेबल-कुर्सी पर बैठकर काम करने से होने वाली समस्याओं और उनसे बचाव के उपायों की जानकारी दी। कार्यक्रम में क्षेत्रीय आयुक्त रमेश कुमार और अतिरिक्त आयुक्त मोहम्मद शेख भी मौजूद रहे। सही पॉश्चर से कम हो सकता है गर्दन और कमर दर्द का खतरा विशेषज्ञों ने बताया कि ऑफिस में काम करते समय बैठने की मुद्रा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। कंप्यूटर स्क्रीन को आंखों के स्तर पर रखना चाहिए और गर्दन को ज्यादा झुकाकर काम करने से बचना चाहिए। कीबोर्ड और माउस का इस्तेमाल करते समय हाथों को पर्याप्त सहारा देना भी जरूरी है। इसके अलावा, कमर को सहारा देने वाली लंबर सपोर्ट कुर्सी और आर्म सपोर्ट वाली कुर्सी का इस्तेमाल करने से बैठने की स्थिति बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सकती है। लंबे समय तक एक ही मुद्रा में बैठे रहने के बजाय बीच-बीच में उठकर चलना भी फायदेमंद हो सकता है। रोज 20 मिनट एक्सरसाइज करने की सलाह संगोष्ठी में फिजियोथेरेपिस्ट रेहान फ्रांसिस ने सरल व्यायाम और रोजमर्रा की शारीरिक गतिविधियों के जरिए रीढ़ की हड्डी को स्वस्थ रखने के तरीके बताए। उन्होंने गर्दन, कमर और कोर मसल्स को मजबूत बनाने वाली एक्सरसाइज को दिनचर्या में शामिल करने पर जोर दिया। विशेषज्ञों ने सलाह दी कि योग और एक्सरसाइज की शुरुआत धीरे-धीरे करनी चाहिए। अचानक बहुत ज्यादा व्यायाम करने से बचना चाहिए, ताकि शरीर पर अनावश्यक दबाव न पड़े। रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना उद्देश्य कार्यक्रम का उद्देश्य रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और कामकाजी लोगों को गर्दन व कमर से जुड़ी समस्याओं से बचाव के उपाय बताना था। अंत में कौशलेंद्र सिंह सेंगर ने अतिथियों, विशेषज्ञों और कार्यक्रम में उपस्थित लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया।
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मध्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर और AI पर होगा मंथन, 6,200 करोड़ के निवेश से OSAT यूनिट लगाने की तैयारी

मध्य प्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग को बढ़ावा देने और निवेश आकर्षित करने के लिए दो दिवसीय समिट आयोजित की जा रही है। इसमें सेमीकंडक्टर पैकेजिंग एवं टेस्टिंग, चिप डिजाइन, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), विनिर्माण और आपूर्ति शृंखला जैसे विषयों पर चर्चा होगी। आयोजन का उद्देश्य उद्योग, शिक्षण संस्थानों और अनुसंधान केंद्रों के बीच सहयोग बढ़ाना है। पहले दिन सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम पर चर्चा समिट के पहले दिन मध्य प्रदेश को सेमीकंडक्टर पैकेजिंग एवं टेस्टिंग हब के रूप में विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया जाएगा। इसके साथ ही फैबलेस इकोसिस्टम, चिप विनिर्माण और आपूर्ति शृंखला को मजबूत बनाने पर चर्चा होगी। कार्यक्रम में AI इंफ्रास्ट्रक्चर, बौद्धिक संपदा और सेमीकंडक्टर क्षेत्र में शिक्षण संस्थानों की भूमिका जैसे विषय भी शामिल रहेंगे। दूसरे दिन AI, चिप टेक्नोलॉजी और स्टार्टअप पर मंथन समिट के दूसरे दिन चिप टेक्नोलॉजी, AI, इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादों के निर्माण, डिजाइन सेवाओं, अनुसंधान एवं विकास और तकनीकी प्रतिभाओं को तैयार करने पर चर्चा होगी। इसके अलावा फोटोनिक्स, क्वांटम टेक्नोलॉजी और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) से जुड़ी बैठकें भी आयोजित की जाएंगी। कार्यक्रम के समापन समारोह में ‘मध्य प्रदेश सेमीकॉन स्टार्टअप प्रतियोगिता’ के अंतिम चरण में चयनित विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा। प्रतियोगिता का उद्देश्य सेमीकंडक्टर क्षेत्र में काम कर रहे स्टार्टअप और नए तकनीकी समाधानों को प्रोत्साहित करना है। सेमीकंडक्टर नीति-2025 में 25% सब्सिडी का प्रावधान राज्य सरकार ने सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देने के लिए ‘मध्य प्रदेश सेमीकंडक्टर नीति-2025’ को मंजूरी दी है। नीति के तहत 25% सब्सिडी और 10 साल तक 2 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली उपलब्ध कराने का प्रावधान बताया गया है। सरकार को उम्मीद है कि इन प्रोत्साहनों से प्रदेश में सेमीकंडक्टर उद्योग से जुड़ी परियोजनाओं को आकर्षित करने में मदद मिलेगी। पारस सेमीकंडक्टर्स का 6,200 करोड़ रुपए के निवेश का प्रस्ताव सेमीकंडक्टर क्षेत्र में निवेश की दिशा में पारस सेमीकंडक्टर्स ने 6,200 करोड़ रुपए के प्रस्तावित निवेश से उन्नत सेमीकंडक्टर असेंबली एवं टेस्टिंग (OSAT) सुविधा स्थापित करने के लिए समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं। प्रस्तावित परियोजना से प्रदेश में सेमीकंडक्टर पैकेजिंग और टेस्टिंग से जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों के विस्तार की संभावना है। हालांकि, परियोजना का वास्तविक क्रियान्वयन आगे की प्रक्रियाओं और निवेश संबंधी निर्णयों पर निर्भर करेगा। निवेश के साथ कौशल विकास पर भी जोर समिट के जरिए उद्योग जगत, शिक्षण संस्थानों और अनुसंधान केंद्रों के बीच साझेदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। इसके तहत तकनीकी अधोसंरचना, नवाचार, अनुसंधान और कुशल मानव संसाधन विकसित करने जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श होगा। आयोजन में निवेशकों को प्रदेश की सेमीकंडक्टर नीति और उपलब्ध अवसरों से परिचित कराने की भी योजना है। इससे मध्य प्रदेश में चिप टेक्नोलॉजी, AI और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में निवेश की संभावनाओं को आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
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भोपाल में दशहरे पर ट्रैफिक डायवर्जन, 18 मैदानों पर होगा रावण दहन; भारी वाहनों की एंट्री बंद

भोपाल में दशहरा पर्व के दौरान मंगलवार, 20 अक्टूबर को शहर की यातायात व्यवस्था में बदलाव किया जाएगा। रावण दहन के प्रमुख आयोजनों और श्री रामविजय रथ यात्रा को देखते हुए कई मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्ट रहेगा। नगरीय यातायात पुलिस के अनुसार, दोपहर 2 बजे से शहर में भारी वाहनों का प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। वहीं, शाम 5 बजे के बाद जरूरत के अनुसार अलग-अलग इलाकों में ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया जाएगा। शहर के 18 प्रमुख दशहरा मैदानों पर रावण दहन के आयोजन होंगे। इसके अलावा करीब 50 से 60 स्थानों पर पथ संचलन निकाले जाएंगे। ऐसे में पुराने शहर और प्रमुख आयोजन स्थलों के आसपास यातायात का दबाव बढ़ने की संभावना है। इन रास्तों से शहर में नहीं आ सकेंगे भारी वाहन 20 अक्टूबर को दोपहर 2 बजे से खजूरी बायपास, मुबारकपुर चौराहा, नया बायपास लांबाखेड़ा, चौपड़ाकला बायपास, पटेलनगर, भानपुर, बेस्टप्राइज, करोंद चौराहा, लालघाटी, प्रभात पेट्रोल पंप चौराहा, सुभाष नगर फाटक, जिन्सी चौराहा, हबीबगंज नाका, सूरज नगर और मिसरोद 11 मील से भारी वाहनों का शहर में प्रवेश प्रतिबंधित रहेगा। छोला दशहरा मैदान जाने के लिए वैकल्पिक रास्ते भानपुर चौराहे से छोला दशहरा मैदान की ओर केवल उन्हीं हल्के और दोपहिया वाहनों को जाने की अनुमति होगी, जिन्हें रावण दहन कार्यक्रम में शामिल होना है। नादरा बस स्टैंड और डीआईजी बंगले की ओर जाने वाले वाहन बेस्टप्राइज तिराहा, कृषि उपज मंडी, जेपी नगर तिराहा, डीआईजी बंगला चौराहा या गणेश मंदिर छोला अंडरब्रिज के रास्ते जा सकेंगे। विदिशा और बैरसिया की ओर से आने वाली नादरा बस स्टैंड और पुतलीघर बस स्टैंड जाने वाली बसें भानपुर चौराहे या बेस्टप्राइज तिराहे तक ही आ सकेंगी। शाम 6 बजे के बाद इन बसों को दोनों बस स्टैंड की ओर जाने की अनुमति नहीं होगी। श्री रामविजय रथ यात्रा के दौरान इन रास्तों पर रोक श्री रामविजय रथ यात्रा बांके बिहारी मंदिर, मारवाड़ी रोड से शुरू होगी। इसके बाद यात्रा चिंतामन चौराहा, यूनानी सफाखाना, सुल्तानिया रोड, चौकी चौक, घोड़ा नक्कास, छोटे भैया चौराहा और नादरा बस स्टैंड होते हुए छोला दशहरा मैदान पहुंचेगी। रथ यात्रा के नादरा बस स्टैंड पहुंचने पर भोपाल टॉकीज चौराहा और अल्पना तिराहे से नादरा की ओर वाहनों की आवाजाही बंद रहेगी। वहीं, रथ यात्रा के छोला रोड में प्रवेश करने पर छोला दशहरा मैदान जाने वाले वाहन काजी कैंप, डीआईजी बंगला, जेपी नगर तिराहा, कृषि उपज मंडी के सामने और बेस्टप्राइज होते हुए पहुंच सकेंगे। छोला मैदान में यहां करें पार्किंग छोला दशहरा मैदान में रावण दहन देखने आने वाले लोगों के वाहनों के लिए रेलवे गोदाम के पास, टिंबर मार्केट और स्टेडियम के पास पार्किंग निर्धारित की गई है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे अपने वाहन निर्धारित पार्किंग स्थलों पर ही खड़े करें। भेल दशहरा मैदान जाने वालों के लिए बदले रास्ते भेल दशहरा मैदान में रावण दहन के दौरान चेतक ब्रिज, अन्ना नगर, करियर कॉलेज, बीएचईएल गेट नंबर-6, सिक्योरिटी लाइन तिराहा और हेमा स्कूल के आसपास यातायात का दबाव रहने की संभावना है। एमपी नगर और चेतक ब्रिज से अवधपुरी जाने वाले वाहन अन्ना नगर से दाएं मुड़कर हबीबगंज मस्जिद तिराहा पहुंच सकेंगे। यहां से बाएं मुड़कर जवाहरलाल नेहरू गुलाब उद्यान होते हुए बीएचईएल और अवधपुरी की ओर जा सकेंगे। सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक पथ संचलन का असर दशहरा पर्व पर शहर में करीब 50 से 60 स्थानों पर पथ संचलन निकाले जाएंगे। पुराने शहर के अशोका गार्डन, छोला, शाहजहांनाबाद, कोतवाली, तलैया, बुधवारा, मंगलवारा और हनुमानगंज क्षेत्रों में सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक यातायात का दबाव अधिक रहने की संभावना है। भोपाल के इन 18 मैदानों पर होगा रावण दहन दशहरे पर शहर के 18 प्रमुख स्थानों पर रावण दहन के आयोजन होंगे। इनमें शामिल हैं: इन आयोजन स्थलों की ओर जाने वाले मार्गों पर जरूरत के अनुसार यातायात डायवर्ट किया जाएगा। ट्रैफिक संबंधी परेशानी होने पर यहां करें संपर्क यातायात पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि वे घर से निकलने से पहले वैकल्पिक मार्गों की जानकारी लें, निर्धारित पार्किंग का उपयोग करें और यातायात नियमों का पालन करें। यातायात संबंधी परेशानी होने पर हेल्पलाइन नंबर 0755-2677340 पर संपर्क किया जा सकता है।
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ग्वालियर में शीतला माता मंदिर के पास भीषण हादसा, ट्रक ने श्रद्धालुओं को कुचला; 15 की मौत, 26 घायल

मध्य प्रदेश के ग्वालियर में शनिवार देर रात शीतला माता मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे श्रद्धालुओं पर तेज रफ्तार ट्रक चढ़ गया। हादसे में 15 लोगों की मौत हो गई, जबकि दो पुलिसकर्मियों समेत 26 लोग घायल हुए हैं। दुर्घटना के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घायलों को इलाज के लिए जयारोग्य अस्पताल में भर्ती कराया गया है। ढलान पर बेकाबू हुआ धान से भरा ट्रक हादसा देर रात करीब 1:30 बजे चीनौर रोड पर ढलान के पास हुआ। श्रद्धालु मंदिर में दर्शन करने के लिए सड़क किनारे कतार में खड़े थे। इसी दौरान चीनौर की ओर से आ रहा धान से भरा ट्रक ढलान पर बेकाबू हो गया। बताया गया कि ट्रक करीब 90 डिग्री के तीखे ढलान से नीचे उतर रहा था। इस दौरान वह पुलिस चेकपोस्ट को तोड़ते हुए श्रद्धालुओं को कुचलता चला गया। इसके बाद ट्रक मंदिर की बाहरी दीवार और गेट से टकरा गया, जिससे दीवार ढह गई। हादसे में कई लोग मलबे में दब गए। ड्राइवर ने बताया- ब्रेक फेल हो गए थे प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, ट्रक चालक गूगल मैप की मदद से रास्ते पर आगे बढ़ रहा था। हादसे के बाद चालक ने पुलिस को बताया कि ट्रक के ब्रेक फेल हो गए थे। हालांकि, दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। परिजनों ने पुलिस पर लगाया लापरवाही का आरोप हादसे के बाद मृतकों के परिजनों और स्थानीय लोगों ने पुलिस पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए हंगामा किया। घटना में दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। पुलिस ने मामले में ट्रक चालक और ट्रक मालिक को गिरफ्तार कर लिया है। हादसे के बाद प्रशासनिक स्तर पर भी कार्रवाई की गई है। सिटी एसपी हटाए गए, 8 अफसर-पुलिसकर्मी सस्पेंड हादसे के बाद सरकार ने ग्वालियर के सिटी एसपी को हटा दिया है। इसके अलावा आठ अधिकारियों और पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। निलंबित किए गए लोगों में चार थाना प्रभारी (टीआई) भी शामिल हैं। फिलहाल हादसे की जांच जारी है। दुर्घटना में जान गंवाने वाले श्रद्धालुओं के परिवारों में शोक का माहौल है, जबकि घायल अस्पताल में उपचार करा रहे हैं।
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Gwalior Truck Accident: ग्वालियर में मंदिर जा रहे श्रद्धालुओं को ट्रक ने कुचला, 15 की मौत; कई घायल

Gwalior Truck Accident: ग्वालियर में मंदिर जा रहे श्रद्धालुओं को ट्रक ने कुचला, 15 की मौत; कई घायल

मध्य प्रदेश के Gwalior में रविवार, 18 अक्टूबर की सुबह एक दर्दनाक सड़क हादसा हुआ। शीतला माता मंदिर के पास धान से भरा एक ट्रक बेकाबू होकर श्रद्धालुओं की भीड़ में घुस गया। इस हादसे में 15 लोगों की मौत की खबर है, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और घायलों को तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया। शीतला माता मंदिर के पास कैसे हुआ हादसा? प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक, हादसा रात करीब 1:30 बजे शीतला माता मंदिर रोड पर हुआ। नवरात्रि के अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर में दर्शन के लिए पहुंचे थे। कई लोग मंदिर के पास अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे। इसी दौरान धान से लदा एक ट्रक छिनोर की तरफ से आया। बताया जा रहा है कि ढलान वाले रास्ते पर ट्रक चालक वाहन पर नियंत्रण नहीं रख पाया। ट्रक बैरिकेडिंग पार करते हुए श्रद्धालुओं और सड़क किनारे लगी दुकानों से टकरा गया। इसके बाद वह मंदिर के प्रवेश द्वार और बाहरी दीवार से जा भिड़ा। 15 लोगों की मौत, कई घायल अस्पताल में भर्ती इस हादसे में अब तक 15 लोगों की मौत होने की जानकारी सामने आई है। घायलों को ग्वालियर के अलग-अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। कुछ घायलों की हालत गंभीर बताई जा रही है। हादसे में ड्यूटी पर तैनात दो पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस, प्रशासन और एंबुलेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं। राहत और बचाव कार्य चलाकर घायलों को अस्पताल पहुंचाया गया। प्रशासन की ओर से घायलों को इलाज उपलब्ध कराया जा रहा है। बैरिकेडिंग के बावजूद रास्ते पर कैसे पहुंचा ट्रक? नवरात्रि के दौरान मंदिर की ओर जाने वाले रास्ते पर भारी वाहनों की आवाजाही रोकने के लिए बैरिकेडिंग और पुलिस चेक-पॉइंट लगाए गए थे। इसके बावजूद ट्रक श्रद्धालुओं तक कैसे पहुंचा, इसकी जांच की जा रही है। प्रशासन ने ट्रक की तकनीकी जांच के लिए क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) की टीम को भी भेजा है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि ट्रक में कोई तकनीकी खराबी थी या हादसा किसी अन्य वजह से हुआ।
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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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