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CM Mohan Yadav

Madhya Pradesh Cabinet Decisions CM Mohan Yadav की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए

CM Mohan Yadav की अध्यक्षता में मंत्रि-परिषद की बैठक मंगलवार 22 अप्रैल 2025 को मंत्रालय में हुई। Madhya Pradesh Cabinet द्वारा मुख्यमंत्री कन्या विवाह/निकाह योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिये संशोधनों को मंजूरी दी गई। योजना अंतर्गत कन्या तथा कन्या के अभिभावक गरीबी रेखा के नीचे जीवन निर्वाह करते हों, साथ ही इनका बी.पी.एल. पोर्टल पर सत्यापन अनिवार्य होगा। कन्या विवाह तथा निकाह सम्मेलन के लिये संभागवार वार्षिक चक्रीय रूप से कैलेण्डर जारी कर सामुहिक विवाह/निकाह कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। संभागवार जिलों मे आयोजित सामूहिक विवाह सम्मेलन में सम्मिलित विवाह जोड़ों की न्यूनतम संख्या 11 एवं अधिकतम 200 जोड़ों की निर्धारित की गयी है। योजना में सामूहिक विवाह/निकाह सम्मेलनों में प्राप्त आवेदनों की स्क्रूटनी पूर्व अनुसार निकाय स्तर पर की जायेगीं। पात्र/अपात्र एवं समग्र पोर्टल पर वर-वधू की आधार ई-केवायसी अनिवार्य होगा। सामूहिक विवाह कार्यक्रमों के लिये शासन की ओर से मिलने वाले आर्थिक लाभ को सार्थक बनाने का प्रयास करते हुये आयोजन में जन-प्रतिनिधियों एवं अन्य सामाजिक संस्थाओं की भागीदारी सुनिश्चित कर समाज के संपन्न और सक्षम व्यक्तियों का सहयोग प्राप्त किया जायेगा। मुख्यमंत्री कन्या विवाह एवं निकाह योजना में प्रति कन्या राशि 55 हजार रूपये में से वधू को राशि रूपये 49 हजार का एकाउन्ट पेयी चेक और शेष 6 हजार रुपये सामूहिक विवाह समारोह आयोजन के लिए संबंधित निकाय को प्रदाय किया जायेगा। सहायता राशि रुपये 49 हजार डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (डी.बी.टी.) के माध्यम से वधू के खाते में एवं शेष 6 हजार रूपये आयोजन की व्यवस्थाओं पर व्यय के लिए प्रदाय की जायेगी। टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्रों के विकास के लिए 145 करोड़ रूपये की सैद्धांतिक स्वीकृति मंत्रि-परिषद द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 से 2027-28 के लिए नवीन योजना “टाइगर रिजर्व के बफर क्षेत्रों के विकास” के लिए 145 करोड़ रूपये की सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गयी। इस योजना में बफर क्षेत्रों में संवेदनशील क्षेत्रों में विभिन्न कार्य किए जाएंगे। इस नवीन योजना में बफर क्षेत्रो में संवेदनशील क्षेत्रों में चेनलिंक फेसिंग का निर्माण किया जाएगा। वन्य प्राणियों की सुरक्षा एवं अग्नि सुरक्षा के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। चारागाहों एवं जल स्त्रोतों का विकास किया जाएगा। वन्य प्राणियों का उपचार और स्वास्थ्य परीक्षण किया जाएगा। नागरिकों के कौशल उन्नयन के लिए प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
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Civil Services Day 2025

Civil Services Day 2025: MP CM मोहन यादव ने दिए Chief Minister’s Excellence Awards, जानिए किसे मिला सम्मान

भोपाल, 22 अप्रैल 2025 मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में सोमवार को ‘Civil Services Day 2025’ के मौके पर एक खास समारोह का आयोजन किया गया, जिसमें मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार’ (Chief Minister’s Excellence Awards) प्रदान किए। यह सम्मान राज्य के उन अधिकारियों और कर्मचारियों को दिया जाता है, जिन्होंने प्रशासनिक सेवाओं में असाधारण कार्य कर समाज में बदलाव लाने में योगदान दिया है। Civil Services Day 2025 कार्यक्रम की शुरुआत: प्रेरणास्पद उदाहरण और इतिहास से जुड़ाव कार्यक्रम का उद्घाटन भोपाल स्थित प्रशासन अकादमी (Academy of Administration) में हुआ, जहां मुख्य सचिव अनुराग जैन ने दीप प्रज्ज्वलन कर कार्यक्रम की शुरुआत की। मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने संबोधन में प्रेरणा के दो ऐतिहासिक उदाहरण साझा किए। उन्होंने कहा, “पहला उदाहरण चाणक्य का है, जिन्होंने 2200 साल पहले चंद्रगुप्त मौर्य को खोजा, उन्हें प्रशिक्षित किया और एक महान प्रशासक बनाया। दूसरा उदाहरण सरदार वल्लभभाई पटेल का है, जिनके आदर्श आज भी सिविल सेवकों के लिए प्रेरणा हैं।” मुख्य सचिव अनुराग जैन ने भी सरदार पटेल के 1947 के ऐतिहासिक भाषण का उल्लेख किया और कहा कि “एक सिविल सर्वेंट को तीन मूल्यों को हमेशा अपनाना चाहिए – गरिमा, ईमानदारी और समर्पण।” उन्होंने आगे कहा, “नेता विजन देते हैं, लेकिन उसे ज़मीन पर उतारने का काम सिविल सेवक करते हैं।” मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार: इन अधिकारियों को मिला सम्मान मुख्यमंत्री उत्कृष्टता पुरस्कार विभिन्न श्रेणियों में असाधारण प्रदर्शन करने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों को प्रदान किया जाता है। एक चयन समिति द्वारा पिछले दो वर्षों के कार्यों के आधार पर अधिकारियों का चयन किया गया। इस वर्ष 18 से अधिक अधिकारियों और कर्मचारियों को सम्मानित किया गया। पुरस्कृत अधिकारियों की सूची:
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Madhya Pradesh Weather Update

Madhya Pradesh Weather Update: 24 अप्रैल तक चलेगी हीटवेव! IMD ने जारी किया अलर्ट – जानें कहां-कहां लू के आसार

Deshharpal | भोपाल, 21 अप्रैल 2025 Madhya Pradesh Weather Update : गर्मी ने अपना कहर दिखाना शुरू कर दिया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने प्रदेश के कई जिलों में 21 से 24 अप्रैल तक हीटवेव (लू) को लेकर येलो अलर्ट जारी किया है। तापमान 43 से 45 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की आशंका है, खासतौर पर उत्तर और पश्चिमी जिलों में। Madhya Pradesh Weather Update 22 से 24 अप्रैल तक लू का तांडव – जानें किन जिलों में रहेगा असर पश्चिमी विक्षोभ के गुजरने और बंगाल की खाड़ी में बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन सिस्टम के चलते मध्य प्रदेश के कई इलाकों में भीषण गर्मी देखने को मिलेगी। आइए जानें दिन-वार मौसम का हाल: 📅 21 अप्रैल: 📅 22 अप्रैल: 📅 23 अप्रैल: 📅 24 अप्रैल: अप्रैल के अंत तक बढ़ेगी गर्मी, मई में भी राहत नहीं IMD के अनुसार, अप्रैल के अंतिम सप्ताह में उत्तर-पश्चिमी हवाओं के कारण गर्म हवाएं चलेंगी और दिन के साथ-साथ रातें भी गर्म रहेंगी। सावधान रहें! लू से बचाव के लिए अपनाएं ये उपाय IMD का अलर्ट साफ है – हीटवेव से बचाव जरूरी है। Deshharpal आपको आगाह करता है: सतर्क रहें और खुद का ख्याल रखें।
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Truck Accident & Oil Looting" – भोपाल में सरसों तेल से भरे ट्रक के पलटते ही शुरू हुई लूट, घायल क्लीनर की मौत पर किसी ने ध्यान नहीं दिया

“Truck Accident & Oil Looting” –भोपाल में सरसों तेल से भरे ट्रक के पलटते ही शुरू हुई लूट, घायल क्लीनर की मौत पर किसी ने ध्यान नहीं दिया

– Truck Accident ,Oil Looting ,Bhopal News ,Humanity Lost , Desh Harpal(Desh Harpal News | 20 अप्रैल 2025 | भोपाल) मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से एक shocking and heartbreaking incident सामने आई है, जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया। शहर के बिलखिरिया थाना क्षेत्र में शनिवार देर रात एक सरसों के तेल से भरा ट्रक पलट गया। हादसे में ट्रक का क्लीनर गंभीर रूप से घायल हो गया, लेकिन हैरानी की बात ये रही कि मौके पर मौजूद लोगों ने मदद करने की बजाय mustard oil की पेटियां लूटनी शुरू कर दीं। जानकारी के मुताबिक, यह ट्रक राजस्थान से नागपुर की ओर जा रहा था। ड्राइवर को झपकी लगने के चलते ट्रक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे पलट गया। ट्रक में mustard oil cartons भरी हुई थीं, जो पलटने के बाद सड़क पर बिखर गईं। हादसे में ड्राइवर और क्लीनर दोनों बुरी तरह घायल हो गए। ड्राइवर ने जैसे-तैसे मदद की गुहार लगाई, लेकिन वहां मौजूद भीड़ ने घायलों की तरफ ध्यान देने की बजाय सारा फोकस तेल की बोतलें और पेटियां उठाने में लगा दिया। कुछ लोगों ने तो अपने स्कूटर, बाइक और ऑटो तक में oil cartons भर लिए और मौके से निकल गए। यह सब उस वक्त हो रहा था जब क्लीनर सड़क पर तड़प रहा था। कई लोगों ने मोबाइल से वीडियो बनाना जरूरी समझा, लेकिन किसी ने एंबुलेंस बुलाना जरूरी नहीं समझा। समय पर इलाज न मिलने की वजह से क्लीनर की मौके पर ही मौत हो गई। इस अमानवीय घटना ने एक बार फिर समाज की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। सवाल यह उठता है कि क्या किसी की जान से ज्यादा जरूरी पेटियों में भरा सरसों का तेल हो गया है? प्रशासन ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं और CCTV फुटेज के आधार पर लूटपाट करने वालों की पहचान की जा रही है। Desh Harpal की राय:ये सिर्फ एक सड़क हादसा नहीं, बल्कि समाज के नैतिक पतन की तस्वीर है। जरूरत है हम सभी को अपने भीतर झांकने की, सोचने की कि अगर यही हादसा हमारे किसी अपने के साथ होता तो क्या तब भी हम पेटियां उठाने में लगे रहते? 👉 अगर आपके पास इस घटना से जुड़ी कोई जानकारी या वीडियो है, तो कृपया Desh Harpal को भेजें। आपकी पहचान गोपनीय रखी जाएगी।
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भोपाल

भोपाल के वीवीआईपी इलाके में सरकारी आवास के आंगन में बनी मजार, ‘लैंड जिहाद’ का आरोप

भोपाल, 18 अप्रैल 2025 — मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के सबसे हाई-सिक्योरिटी और वीवीआईपी इलाके में बने एक सरकारी आवास के आंगन में मजार का निर्माण अब विवाद का कारण बन गया है। हिंदू संगठनों ने इसे ‘लैंड जिहाद’ करार दिया है और प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है। कहां और कैसे हुआ मामला? भोपाल के 1250 क्वार्टर क्षेत्र, जहां राज्य के मंत्रियों, वरिष्ठ IAS अधिकारियों, पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और अन्य वीवीआईपी का निवास है, वहीं एक सरकारी क्वार्टर के प्रांगण में मजार बनाई गई। इस इलाके की सुरक्षा और प्रशासनिक संवेदनशीलता को देखते हुए यह मामला तुरंत सियासी और धार्मिक बहस में बदल गया। किसने उठाया मुद्दा? प्रशासन की क्या है प्रतिक्रिया? भोपाल जिला प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। प्रशासन का बयान: “अगर यह मजार बिना अनुमति के बनाई गई है, तो इसे हटाने और संबंधित लोगों पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।” इस बीच यह भी सवाल उठ रहे हैं कि इतने सेंसिटिव इलाके में यह निर्माण कैसे हुआ, और क्या किसी अफसर की मिलीभगत इसमें शामिल थी। क्या है ‘लैंड जिहाद’ का मतलब? ‘लैंड जिहाद’ एक राजनीतिक और धार्मिक रूप से संवेदनशील शब्द है, जिसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब किसी धर्म विशेष पर भूमि कब्जा करने या धार्मिक स्थल बनाकर अतिक्रमण करने का आरोप लगाया जाता है।
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भोपाल स्थित केरवा गिद्ध प्रजनन केन्द्र से 6 गिद्धों को कल पहली बार प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया

Vulture Conservation Mission: केरवा गिद्ध प्रजनन केन्द्र से 6 गिद्ध हुए Natural Habitat में Release, GPS Tracking से होगी 24×7 Monitoring भोपाल के नजदीक स्थित Kerwa Vulture Breeding Centre से पहली बार 6 दुर्लभ गिद्धों को natural habitat में release किया गया है। यह कदम मध्य प्रदेश में vulture conservation mission की दिशा में एक बड़ा और ऐतिहासिक प्रयास माना जा रहा है। इन सभी गिद्धों को अत्याधुनिक GPS trackers से लैस किया गया है, जिससे उनके मूवमेंट, व्यवहार और सुरक्षा की real-time monitoring की जा सकेगी। गिद्ध केवल एक पक्षी नहीं, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए अत्यंत आवश्यक natural scavengers हैं। ये मृत जीवों को खाकर वातावरण को साफ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिससे zoonotic diseases के फैलने का खतरा भी कम होता है। उनके बिना पर्यावरणीय संतुलन गड़बड़ा सकता है, इसलिए उनका संरक्षण हमारी biodiversity security के लिए अनिवार्य है। गौरतलब है कि गत कुछ वर्षों में भारत में गिद्धों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई, जिसका मुख्य कारण रहा एक पशु-औषधि Diclofenac, जो गिद्धों के लिए ज़हर साबित हुई। इसके बाद भारत सरकार और राज्य सरकारों ने इस दवा पर प्रतिबंध लगाते हुए vulture protection programmes पर विशेष ध्यान देना शुरू किया। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा केरवा स्थित इस गिद्ध प्रजनन केंद्र की स्थापना Indian Vulture Conservation Action Plan के अंतर्गत की गई थी। यहां वैज्ञानिक तरीके से गिद्धों को संरक्षित कर उनकी संख्या बढ़ाने का कार्य चल रहा है। अब जब 6 स्वस्थ गिद्धों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया है, तो यह संकेत है कि संरक्षण के प्रयास अब परिणाम देने लगे हैं। इस अभियान की विशेषता यह है कि इन गिद्धों की गतिविधियों को satellite-based tracking system के जरिए लगातार ट्रैक किया जाएगा। इससे न सिर्फ इनके जीवन के बारे में नए वैज्ञानिक तथ्य मिलेंगे, बल्कि अगर किसी भी प्रकार की खतरे की स्थिति उत्पन्न होती है, तो तुरंत सहायता पहुंचाई जा सकेगी। Desh Harpal इस पहल का स्वागत करता है और सरकार, वन विभाग, वाइल्डलाइफ विशेषज्ञों और सभी सहयोगियों को इस दिशा में निरंतर प्रयास करते रहने के लिए साधुवाद देता है। ऐसे कदम न केवल गिद्धों की वापसी का रास्ता खोलते हैं, बल्कि यह भी साबित करते हैं कि यदि इच्छाशक्ति और वैज्ञानिक दृष्टिकोण साथ हो, तो wildlife conservation सिर्फ एक सपना नहीं, बल्कि सच्चाई बन सकता है। भोपाल स्थित केरवा गिद्ध प्रजनन केन्द्र से 6 गिद्धों को कल पहली बार प्राकृतिक वातावरण में छोड़ा गया
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नवविवाहिता ने की आत्महत्या

भोपाल में नवविवाहिता ने की आत्महत्या, पति के अफेयर और घरेलू हिंसा से परेशान थी 23 वर्षीय भारती

भोपाल (मध्य प्रदेश) – राजधानी के छोला इलाके में एक दर्दनाक घटना सामने आई है जहां एक 23 वर्षीय नवविवाहिता ने की आत्महत्या। बताया जा रहा है कि शादी के महज दो महीने बाद ही महिला मानसिक प्रताड़ना और पति के अवैध संबंधों से परेशान चल रही थी। दो महीने पहले हुई थी शादी, अब हो गई मातम में तब्दील मृतका की पहचान भारती कुचबंदिया के रूप में हुई है, जिनकी शादी 3 फरवरी 2025 को विशाल कुचबंदिया से हुई थी। परिवार का आरोप है कि शादी के बाद से ही विशाल का व्यवहार ठीक नहीं था। भारती के भाई राहुल ने बताया कि विशाल अक्सर कई दिनों तक घर नहीं लौटता था, और जब आता तो मारपीट करता था। इसके साथ ही उसका किसी और महिला के साथ रिश्ता भी था। इस कारण भारती मानसिक रूप से बहुत परेशान रहने लगी थी। अंतिम कॉल बना आखिरी लड़ाई का गवाह घटना से एक दिन पहले, यानि मंगलवार को, एक बार फिर ससुराल में झगड़ा हुआ। इसके बाद भारती को उसके मायके लाया गया। बुधवार रात को जब उसकी मां किसी काम से बाहर गई थी और घर पर कोई नहीं था, तब भारती ने दुपट्टे से फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिवार की एक बच्ची, जो घर में थी, ने बताया कि उसने भारती को उसके पति से फोन पर तेज आवाज़ में बहस करते सुना। थोड़ी ही देर में जब वह कमरे में गई, तो भारती को फंदे पर लटका पाया और तुरंत पड़ोसियों व परिवार को सूचना दी। पुलिस जांच में जुटी, सुसाइड नोट नहीं मिला पुलिस का कहना है कि मौके से कोई सुसाइड नोट बरामद नहीं हुआ है। फिलहाल मामला दर्ज कर लिया गया है और आगे की जांच जारी है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या ससुरालवालों की भूमिका इस घटना में थी। एक मासूम ज़िंदगी की दुखद विदाई भारती की मौत ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि शादी जैसे पवित्र बंधन में जब धोखा, अत्याचार और हिंसा शामिल हो जाए तो उसका अंत कितना भयावह हो सकता है। इस घटना ने इलाके में शोक की लहर फैला दी है।
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Bhopal

भोपाल के एक युवा ने ChatGPT से यह सवाल किया कि “यदि भोपाल पर अंग्रेजों का कब्जा नहीं होता और नवाबों का ही शासन होता तो भोपाल कैसा दिखता?”

भोपाल, 15 अप्रैल | देश हरपल ब्यूरो भोपाल के एक युवा द्वारा की गई एक साधारण सी कल्पना आधारित पूछताछ अब चर्चा का विषय बन चुकी है। कुछ दिन पहले इस युवा ने दुनिया के सबसे लोकप्रिय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस टूल ChatGPT से यह सवाल किया कि “यदि भोपाल पर अंग्रेजों का कब्जा नहीं होता और नवाबों का ही शासन बना रहता तो भोपाल कैसा दिखता?” इस सवाल के जवाब में AI ने एक काल्पनिक छवि तैयार की, जिसमें भोपाल को पूरी तरह एक इस्लामिक राजशाही प्रभाव वाले शहर की तरह दिखाया गया है। तस्वीर में ऊँची-ऊँची मीनारें, विशाल गुम्बद वाली मस्जिदें, मुग़ल शैली की इमारतें और हरियाली लिए हरे रंग के गुंबद प्रमुख रूप से दिखाई दे रहे हैं। हालांकि AI द्वारा बनाई गई यह तस्वीर कल्पनाशीलता पर आधारित है, लेकिन इसमें भोपाल की विविध सांस्कृतिक और ऐतिहासिक पहचान का अभाव महसूस किया गया। शहर के कई नागरिकों और इतिहास के जानकारों का कहना है कि भोपाल की पहचान केवल नवाबी शासन या मुग़ल वास्तुकला तक सीमित नहीं रही है। भोपाल की वास्तुकला में जहाँ एक ओर ताज-उल-मस्जिद जैसी ऐतिहासिक मस्जिदें हैं, वहीं भारत भवन, भीम बेटका की गुफाएं और आदिवासी संस्कृति की छाप भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। मुद्दा उठता है — क्या AI जैसे प्लेटफॉर्म भारत जैसे सांस्कृतिक रूप से विविध देश की पूरी तस्वीर पेश करने में सक्षम हैं? टेक्नोलॉजी विशेषज्ञों का मानना है कि AI अपने उत्तरों को प्रशिक्षित डेटा और एल्गोरिदम के आधार पर बनाता है, जिसमें कभी-कभी एकपक्षीय छवि उभर सकती है। ऐसे में यूज़र्स को भी यह समझना होगा कि AI द्वारा दी गई तस्वीरें या जवाब कल्पना आधारित हो सकते हैं, और उनका ऐतिहासिक या सामाजिक संतुलन जरूरी नहीं। देश हरपल इस मुद्दे पर आने वाले दिनों में विशेषज्ञों, इतिहासकारों और तकनीकी विशेषज्ञों की राय के साथ एक विस्तृत चर्चा प्रकाशित करेगा।
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एमपी अजब है! प्रोफेसर की बीमारी में चपरासी ने जांच दी यूनिवर्सिटी की कॉपियां, 5000 रुपए में छात्रों के भविष्य से खेल

देश हरपल न्यूज़ | पिपरिया, नर्मदापुरम (मध्य प्रदेश) मध्य प्रदेश एक बार फिर अपने “अजब-गजब” कारनामों के लिए चर्चा में है। ताजा मामला नर्मदापुरम जिले के पिपरिया स्थित शहीद भगत सिंह शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय का है, जहां यूनिवर्सिटी परीक्षा की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किसी प्रोफेसर ने नहीं, बल्कि एक चपरासी ने कर डाला। यह घटना जनवरी 2025 की है, जब कॉलेज के चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी पन्नालाल पठारिया द्वारा यूनिवर्सिटी की परीक्षा कॉपियां जांचते हुए एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो में साफ देखा गया कि पन्नालाल, जो कि कॉलेज में चपरासी के पद पर कार्यरत हैं, बड़े आराम से उत्तर पुस्तिकाएं जांच रहे हैं और उन्हें नंबर भी दे रहे हैं। चौंकाने वाला खुलासा: 5000 में हुआ सौदा, छात्रों का भविष्य दांव पर जांच में खुलासा हुआ कि यह कॉपियां कॉलेज की गेस्ट फैकल्टी खुशबू पगारे को जांचने के लिए सौंपी गई थीं। लेकिन खुशबू पगारे ने कथित तौर पर तबीयत खराब होने का हवाला देते हुए यह ज़िम्मेदारी कॉलेज के बुक लिफ्टर राकेश मेहर को 7000 रुपए में दे दी। राकेश ने बदले में 5000 रुपए में यह जिम्मेदारी चपरासी पन्नालाल पठारिया को सौंप दी। यानी प्रोफेसर की बीमारी, बिचौलिए की कमाई और चपरासी की मेहनत ने मिलकर छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर डाला। इतना ही नहीं, छात्रों की मेहनत और यूनिवर्सिटी की साख दोनों पर सवालिया निशान खड़े हो गए। छात्र पहुंचे विधायक के पास, उच्च शिक्षा विभाग में मचा हड़कंप वीडियो वायरल होते ही छात्रों में रोष फैल गया। उन्होंने स्थानीय विधायक ठाकुरदास नागवंशी से इस मामले की शिकायत की और वीडियो सबूत के तौर पर सौंपा। मामला उच्च शिक्षा विभाग तक पहुंचा और प्रोफेसर खुशबू पगारे को तत्काल सस्पेंड कर दिया गया है। साथ ही चपरासी और बुक लिफ्टर के खिलाफ भी जांच के आदेश दिए गए हैं। सवाल बड़े हैं: शिक्षा का ये स्तर? यह घटना सिर्फ एक कॉलेज तक सीमित नहीं है, बल्कि यह प्रदेश की उच्च शिक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल उठाती है। जब परीक्षा कॉपियों की जांच जैसे संवेदनशील कार्य को बिना योग्यता वाले कर्मचारी को सौंप दिया जाए, तो फिर छात्रों की योग्यता और मेहनत का क्या मूल्य रह जाता है? क्या यह लापरवाही नहीं, बल्कि एक आपराधिक लापरवाही है? क्या ऐसे मामलों पर सिर्फ सस्पेंशन ही काफी है या कड़ी कानूनी कार्रवाई भी जरूरी है? देश हरपल की अपील: देश हरपल न्यूज़ इस घटना की कड़ी निंदा करता है और मांग करता है कि ऐसी लापरवाहियों पर सख्त कार्रवाई हो, जिससे देश के युवाओं और शिक्षा प्रणाली पर विश्वास बना रहे।
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Indore Girl Video

Indore Girl Video: 56 दुकान पर ब्रा और शॉर्ट्स पहनकर रील बनाना पड़ा महंगा, सोशल मीडिया पर माफी मांगते हुए बोली- “मुझे माफ कर दो”

देश हरपल डेस्क, इंदौर।मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर की मशहूर जगह 56 दुकान इन दिनों एक अनोखे और विवादित मामले को लेकर चर्चा में है। इस बार मामला न तो किसी खाद्य पदार्थ का है, न ही ट्रैफिक का, बल्कि एक ऐसी सोशल मीडिया रील का, जिसने पूरे शहर के माहौल को हिला कर रख दिया। दरअसल, कुछ दिन पहले एक युवती ने 56 दुकान इलाके में एक रील शूट की थी। इस रील में वह लाल रंग की ब्रा और शॉर्ट्स पहनकर खुलेआम घूमती नजर आई थी। चारों ओर फैमिली क्राउड, महिलाएं और बच्चे मौजूद थे, लेकिन युवती बेपरवाह होकर रील बनाती रही। बाद में इस रील को उसने खुद अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर पोस्ट कर दिया। पुलिस ने दर्ज की FIR, युवती के खिलाफ कार्रवाई शुरूवीडियो वायरल होते ही लोगों की प्रतिक्रियाएं आनी शुरू हो गईं। कई सोशल मीडिया यूज़र्स ने इसे अश्लीलता फैलाने का प्रयास बताया और पुलिस से सख्त कार्रवाई की मांग की। मामले की गंभीरता को देखते हुए इंदौर पुलिस ने युवती के खिलाफ सार्वजनिक स्थल पर अश्लीलता फैलाने के आरोप में एफआईआर दर्ज कर ली है। कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का बयान भी आया सामनेवीडियो के विरोध में कई हिंदू संगठनों ने भी सड़कों पर उतरकर कार्रवाई की मांग की। इस मामले पर मध्य प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी बयान जारी करते हुए कहा – “हमारा देश स्वतंत्र है, हर किसी को खाने, पीने, पहनने की आज़ादी है। लेकिन जब इस स्वतंत्रता का दुरुपयोग होने लगे तो प्रशासन को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए। समाज को भी ऐसे लोगों का बहिष्कार करना चाहिए जो हमारी सांस्कृतिक मर्यादाओं को तोड़ते हैं।” विवाद बढ़ा तो युवती ने मांगी माफी, कहा- “मुझे माफ कर दो”मामले के तूल पकड़ने के बाद युवती ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो जारी कर माफी मांगी। वीडियो में उसने कहा – “मुझे एहसास हुआ है कि मैंने सार्वजनिक जगह पर ऐसे कपड़े पहनकर गलती की है। मैं दोबारा ऐसा कभी नहीं करूंगी। मुझे माफ कर दीजिए।” हालांकि शुरुआत में युवती ने एक अलग ही रुख अपनाया था। उसने कहा था कि – “ऐसे कपड़े बहुत सी लड़कियां पहनती हैं, मैंने कुछ नया नहीं किया। जिसने भी मेरे खिलाफ शिकायत की है, वो मेरा पता पुलिस को दे दें ताकि वो मुझसे मिल सकें।” लेकिन सोशल मीडिया पर जब ट्रोलिंग और आलोचना तेज हो गई तो उसने अपनी गलती स्वीकार कर ली। वीडियो में क्या है?वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि युवती जैसे ही लाल ब्रा और शॉर्ट्स में 56 दुकान की सड़कों पर चलती है, राह चलते लोग हैरान रह जाते हैं। कई लोग मुड़-मुड़ कर उसे देखते हैं, एक लड़का तो शर्म से आंखें भी बंद कर लेता है। कुछ लोग हँसते हुए भी नजर आते हैं, लेकिन यह हंसी ज्यादा देर तक नहीं टिकती, क्योंकि वीडियो ने विवाद का रूप ले लिया। एडिशनल DCP राम स्नेही मिश्र का बयानइंदौर पुलिस के एडिशनल डीसीपी राम स्नेही मिश्र ने कहा – “हमें यह जांचना होगा कि युवती ने छोटे कपड़ों में इस तरह का वीडियो क्यों बनाया। क्या इसका उद्देश्य सिर्फ वायरल होना था या इसके पीछे कोई मानसिक दबाव या व्यक्तिगत कारण थे। साथ ही हम उसके पारिवारिक वातावरण की भी जांच करेंगे।” देश हरपल की टिप्पणीयह मामला केवल फैशन या अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का नहीं है, यह उस सामाजिक मर्यादा की बात करता है जिसमें सार्वजनिक स्थानों पर सभी वर्गों का आना-जाना होता है – बुजुर्ग, बच्चे, महिलाएं और पूरा परिवार। सोशल मीडिया की ‘लाइक और वायरल’ संस्कृति अब वास्तविक जीवन की सीमाओं को तोड़ने लगी है। ऐसे में ज़रूरत है संतुलन और समझदारी की, ताकि हमारी सामाजिक संवेदनाएं और संविधान दोनों सुरक्षित रह सकें। देश हरपल ऐसे हर मुद्दे को उठाता रहेगा, जो हमारी संस्कृति, कानून और सामाजिक चेतना से जुड़ा हो।आपका क्या विचार है इस पर? नीचे कमेंट करके जरूर बताएं।
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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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