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नकटी बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस की 14 किमी पदयात्रा, राज्यपाल से मुलाकात नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी

रायपुर। राजधानी रायपुर के नकटी गांव में हुई बुलडोजर कार्रवाई के विरोध में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज के नेतृत्व में कांग्रेस ने बुधवार को राजभवन तक लगभग 14 किलोमीटर लंबी पदयात्रा निकाली। पदयात्रा वीआईपी चौक होते हुए लोकभवन तक पहुंची, लेकिन कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल की राज्यपाल से मुलाकात नहीं हो सकी। कांग्रेस नेताओं ने राज्यपाल से मिलने के लिए समय मांगा है। पार्टी ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिनों के भीतर मुलाकात का समय नहीं मिलता, तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। रास्ते में सड़क पर बैठकर किया भोजन पदयात्रा के दौरान कांग्रेस नेताओं, कार्यकर्ताओं और नकटी गांव के प्रभावित परिवारों ने सड़क पर बैठकर सामूहिक भोजन किया। पार्टी ने इसे प्रभावित लोगों के समर्थन और एकजुटता का प्रतीक बताया। मेक इन इंडिया चौक पर पुलिस से धक्का-मुक्की पदयात्रा जब मेक इन इंडिया चौक के पास पहुंची, तब प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच धक्का-मुक्की की स्थिति बन गई। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश की, जबकि पुलिस ने उन्हें रोकने का प्रयास किया। इस दौरान कुछ महिलाओं ने पुलिस पर मारपीट का आरोप भी लगाया। हालांकि, इस संबंध में पुलिस की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। गांव में ही पुनर्वास की मांग प्रदर्शन के दौरान प्रभावित परिवारों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने “नकटी में ही घर बनाओ” के नारे लगाए। उनका कहना था कि जिन परिवारों के मकानों पर कार्रवाई हुई है, उनका पुनर्वास उसी गांव में किया जाए। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रभावित लोगों के साथ न्याय नहीं हुआ है और सरकार को पुनर्वास की स्पष्ट व्यवस्था करनी चाहिए। नोट: कांग्रेस ने बुलडोजर कार्रवाई का विरोध करते हुए राज्यपाल को ज्ञापन सौंपने की कोशिश की। पार्टी ने कहा है कि यदि जल्द मुलाकात नहीं होती, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ की राजनीति और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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भोपाल में कांग्रेस का ‘छात्रों की गूंज’ अभियान: जीतू पटवारी ने पेपर लीक और भर्ती घोटालों पर सरकार को घेरा

भोपाल। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में कांग्रेस के ‘छात्रों की गूंज’ अभियान के तहत आयोजित कार्यक्रम में पार्टी नेताओं ने पेपर लीक, भर्ती परीक्षाओं और शिक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र और राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। कार्यक्रम में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार, कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी और विधायक आरिफ मसूद सहित कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। इंदौर से शुरू हुई कांग्रेस की साइक्लोथॉन का समापन भोपाल में सभा के साथ हुआ, जिसमें बड़ी संख्या में युवा शामिल हुए। जीतू पटवारी ने पेपर लीक को लेकर सरकार पर साधा निशाना पीसीसी चीफ जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि पिछले 12 वर्षों में देशभर में 90 बार पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में व्यापम घोटाले से लेकर लोक सेवा आयोग (PSC) की परीक्षाओं तक कई विवाद सामने आए और ऐसा कोई बड़ा परीक्षा आयोजन नहीं हुआ जो पूरी तरह विवादों से मुक्त रहा हो। पटवारी ने दावा किया कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी द्वारा किए गए अध्ययन में यह सामने आया कि पेपर लीक मामलों के पीछे भाजपा से जुड़े लोगों की भूमिका रही है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान पर भी निशाना साधते हुए कहा कि लगातार पेपर लीक की घटनाओं के बावजूद उन्होंने अब तक जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की है। आरिफ मसूद का RSS पर हमला कांग्रेस विधायक आरिफ मसूद ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर कई छात्रों ने अपने भविष्य के लिए संघर्ष किया और कुछ ने अपनी जान भी गंवाई। उन्होंने आरोप लगाया कि डॉ. भीमराव आंबेडकर की शिक्षा और विचारधारा से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) को शुरू से ही असहजता रही है। हरीश चौधरी बोले- शिक्षा संस्थाओं पर दबाव कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी हरीश चौधरी ने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में बड़ी संख्या में सरकारी स्कूल बंद हुए हैं और राज्य सरकार शिक्षा के क्षेत्र में अपनी जिम्मेदारी निभाने में विफल रही है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि CBSE, NEET और अन्य शैक्षणिक संस्थानों की कार्यप्रणाली पर राजनीतिक प्रभाव पड़ा है। साथ ही उन्होंने परीक्षा प्रक्रियाओं में कथित अनियमितताओं का भी आरोप लगाया। उमंग सिंघार ने युवाओं से किया बदलाव का आह्वान नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि किसी भी देश में परिवर्तन लाने में युवाओं की सबसे महत्वपूर्ण भूमिका होती है। उन्होंने युवाओं से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने की अपील की। सिंघार ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार नियमित सरकारी भर्तियों के बजाय आउटसोर्सिंग को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस मध्य प्रदेश में सरकारी भर्तियों का वार्षिक कैलेंडर जारी करने की मांग उठाएगी। साइक्लोथॉन के समापन पर ट्रैफिक जाम इंदौर से भोपाल पहुंची लगभग 200 किलोमीटर लंबी साइक्लोथॉन के समापन पर हमीदिया अस्पताल के सामने सभा आयोजित की गई। कार्यक्रम के दौरान रॉयल मार्केट रोड पर यातायात प्रभावित रहा और बैरिकेडिंग के कारण कुछ समय के लिए जाम की स्थिति बनी। इस दौरान एक एम्बुलेंस भी ट्रैफिक में फंस गई, जबकि दूसरी एम्बुलेंस को अस्पताल परिसर में प्रवेश के लिए कुछ समय तक इंतजार करना पड़ा। बाद में पुलिस ने रास्ता खुलवाकर एम्बुलेंस को अस्पताल तक पहुंचाया। नमाज के दौरान पटवारी ने रोका भाषण सभा के दौरान पास की मस्जिद में नमाज अदा की जा रही थी। नमाज की आवाज सुनकर जीतू पटवारी ने कुछ देर के लिए अपना संबोधन रोक दिया। नमाज समाप्त होने के बाद उन्होंने फिर से भाषण शुरू किया। इसके बाद पटवारी ने प्रशासन पर आरोप लगाया कि कार्यक्रम की अनुमति अस्पताल के समीप जानबूझकर दी गई, जबकि पहले ऐसे आयोजन अन्य स्थानों पर कराए जाते रहे हैं। कार्यक्रम में कमलनाथ और दिग्विजय सिंह नहीं पहुंचे सभा में उमंग सिंघार, हरीश चौधरी, आरिफ मसूद सहित कई कांग्रेस नेता मौजूद रहे, लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और वरिष्ठ कांग्रेस नेता दिग्विजय सिंह कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में युवाओं ने नारेबाजी की। हालांकि, मीडिया द्वारा जब कुछ प्रतिभागियों से नीट परीक्षा और साइक्लोथॉन के उद्देश्य को लेकर सवाल पूछे गए, तो कई प्रतिभागी स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। इस दौरान विधायक आरिफ मसूद कार्यकर्ताओं से शांत और व्यवस्थित रहने की अपील करते भी नजर आए। नोट: कार्यक्रम के दौरान नेताओं ने केंद्र और राज्य सरकार पर कई आरोप लगाए। इन आरोपों पर संबंधित पक्षों की ओर से तत्काल कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। मध्य प्रदेश और देश की राजनीति से जुड़ी ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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खंडवा में 8.43 करोड़ के विकास कार्यों का भूमिपूजन, मंच पर महापौर के स्वागत को लेकर दिखी भाजपा की गुटबाजी

खंडवा। मध्य प्रदेश के खंडवा शहर में बुधवार को 8 करोड़ 43 लाख रुपये की लागत से होने वाले विकास कार्यों का भूमिपूजन किया गया। ये सभी कार्य विधायक के लिए आरक्षित विशेष मुख्यमंत्री अधोसंरचना मद से स्वीकृत किए गए हैं। इनमें रामेश्वर कुंड और पदमकुंड के जीर्णोद्धार एवं सौंदर्यीकरण सहित कुल 11 विकास परियोजनाएं शामिल हैं। हालांकि, कार्यक्रम विकास कार्यों से अधिक मंच पर हुई राजनीतिक हलचल को लेकर चर्चा में रहा। नगर निगम के मंच पर शुरुआत में महापौर अमृता यादव का स्वागत नहीं किए जाने पर एमआईसी सदस्य ने विरोध जताया, जिसके बाद उन्हें बुके देकर सम्मानित किया गया। विकास कार्यों के श्रेय को लेकर अलग-अलग दावे कार्यक्रम के दौरान महापौर अमृता यादव ने विकास कार्यों का श्रेय मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को दिया। वहीं, विधायक कंचन तनवे ने कहा कि 8.43 करोड़ रुपये के इन कार्यों को उनकी विशेष निधि से स्वीकृति दिलाई गई, जिसे मुख्यमंत्री ने मंजूरी प्रदान की। इस दौरान मंच पर जिले के प्रभारी मंत्री धर्मेंद्र सिंह लोधी, कैबिनेट मंत्री विजय शाह सहित भाजपा के कई वरिष्ठ नेता मौजूद रहे। कार्यक्रम में भाजपा के भीतर गुटबाजी की चर्चा भी देखने को मिली। इन विकास कार्यों का हुआ भूमिपूजन भूमिपूजन किए गए प्रमुख कार्यों में शामिल हैं— सांसद समर्थक पार्षद के वार्ड में हुआ आयोजन जिस रामेश्वर वार्ड में कार्यक्रम आयोजित किया गया, वहां भाजपा पार्षद काजल यादव निर्वाचित हैं। उनके प्रतिनिधि प्रदीप यादव भाजपा मंडल अध्यक्ष होने के साथ-साथ सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल के समर्थक माने जाते हैं। कार्यक्रम के दौरान सांसद ज्ञानेश्वर पाटिल ने मुकेश तनवे की सराहना करते हुए उन्हें “सुपर विधायक” बताया। महापौर के स्वागत को लेकर बना चर्चा का विषय कार्यक्रम के दौरान जब मंच पर महापौर अमृता यादव का स्वागत नहीं किया गया, तो एमआईसी सदस्य वरुण बावरे ने इसका विरोध जताया। इसके बाद भाजपा पार्षद डिंपल चौरसिया ने महापौर का बुके देकर स्वागत किया। यह घटनाक्रम पूरे कार्यक्रम में चर्चा का विषय बना रहा। मध्य प्रदेश और देश की ताजा राजनीतिक एवं विकास संबंधी खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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गुना में शुरू हुआ ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान, पुलिस ने ली नशामुक्ति की शपथ

गुना में पुलिस मुख्यालय के निर्देश पर ‘नशे से दूरी है जरूरी 2.0’ अभियान की शुरुआत बुधवार को पुलिस लाइन से की गई। अभियान के तहत पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों ने नशामुक्ति की शपथ ली और इसके बाद शहर में जागरूकता रैली निकालकर लोगों को नशे के दुष्प्रभावों के प्रति जागरूक किया। एसपी ने दिलाई नशामुक्ति की शपथ कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक हितिका वासल ने सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को नशे से दूर रहने और समाज को जागरूक करने की शपथ दिलाई। उन्होंने कहा कि नशामुक्त समाज बनाने की शुरुआत स्वयं से करनी होगी। जब पुलिसकर्मी इस संकल्प का पालन करेंगे, तभी समाज में सकारात्मक संदेश जाएगा। एएसपी ने समझाई अभियान की रूपरेखा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक प्रशांत सिंह सुमन ने अभियान की रूपरेखा बताते हुए कहा कि यदि कोई व्यक्ति नशा करता दिखाई दे तो उसे समझाने और सही राह दिखाने का प्रयास करें। उन्होंने कहा कि पुलिसकर्मियों की जिम्मेदारी केवल कानून व्यवस्था तक सीमित नहीं है, बल्कि समाज को जागरूक करना भी उनकी अहम भूमिका है। पुलिस लाइन से जयस्तंभ चौराहे तक निकली जागरूकता रैली शपथ ग्रहण के बाद पुलिस लाइन से जयस्तंभ चौराहे तक बाइक और पैदल जागरूकता रैली निकाली गई। रैली के दौरान पुलिसकर्मियों ने लोगों को नशे के दुष्प्रभावों की जानकारी दी और नशामुक्त समाज बनाने का संदेश दिया। ‘हर पुलिसकर्मी बने नशामुक्ति का दूत’ एसपी हितिका वासल ने कहा कि गुना जिले में नशे की समस्या चिंताजनक है और इसका समाधान जनभागीदारी से ही संभव है। उन्होंने सभी पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों से अपील की कि वे गांव-गांव और शहर के हर इलाके में जाकर लोगों को जागरूक करें और ‘नशामुक्ति के दूत’ की भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि आज लिया गया यह संकल्प तभी सफल होगा, जब इसका संदेश समाज के हर व्यक्ति तक पहुंचे। अधिक जानकारी और मध्यप्रदेश-छत्तीसगढ़ की ताज़ा खबरों के लिए जुड़े रहें www.deshharpal.com
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खंडवा में साइबर ठगी का नया तरीका: RTO चालान की APK फाइल डाउनलोड करते ही छात्र के खाते से उड़ गए ₹59 हजार

खंडवा में जागरूकता अभियान ‘सेफ क्लिक’ चलाए जाने के बावजूद साइबर ठगी के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। ताजा मामले में एक बीएससी छात्र को व्हाट्सएप पर RTO चालान के नाम से APK फाइल भेजकर 59 हजार रुपए से अधिक की ठगी कर ली गई। पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। RTO चालान की फर्जी APK फाइल बनी ठगी का जरिया कोतवाली पुलिस के अनुसार, पीड़ित करण डूडवे खरगोन जिले के भीकनगांव का निवासी है। वह वर्तमान में खंडवा की एक निजी यूनिवर्सिटी से बीएससी एग्रीकल्चर की पढ़ाई कर रहा है और गणेश तलाई क्षेत्र में किराए के मकान में रहता है। करण ने पुलिस को बताया कि 8 जुलाई की सुबह करीब 11:45 बजे उसके मोबाइल पर बैंक से दो ट्रांजेक्शन के मैसेज आए। पहला ट्रांजेक्शन ₹49,999 और दूसरा ₹8,999 का था। खाते की जांच करने पर पता चला कि उसके अकाउंट से कुल ₹59,466 निकाल लिए गए हैं। पीड़ित का कहना है कि यह ठगी व्हाट्सएप पर मिले RTO चालान की APK फाइल डाउनलोड करने के बाद हुई। दो यूट्यूबर पर ब्लैकमेलिंग का मामला दर्ज इधर, पंधाना थाना पुलिस ने दो स्थानीय यूट्यूबरों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग का मामला दर्ज किया है। पुलिस के मुताबिक, गोपाल सावनेर और लक्ष्मीनारायण उर्फ लक्ष्मण केल्दे पर आरोप है कि उन्होंने मोहनपुर पंचायत के सचिव रामप्रकाश मोरे से 50 हजार रुपए की मांग की। शिकायत में कहा गया है कि दोनों सड़क और नाली से जुड़े मुद्दों पर सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल करने की धमकी देकर पैसे मांग रहे थे। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ ब्लैकमेलिंग की धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साइबर ठगी से बचने के लिए रखें ये सावधानियां अधिक जानकारी और ताज़ा खबरों के लिए विजिट करें:www.deshharpal.com
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CAG रिपोर्ट में जल जीवन मिशन की पोल: छत्तीसगढ़ में 33% नल कनेक्शन गैर-कार्यशील, ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा

रायपुर। भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन (JJM) के क्रियान्वयन को लेकर कई गंभीर खामियों का खुलासा किया है। रिपोर्ट के अनुसार कमजोर योजना, धीमा क्रियान्वयन, निगरानी की कमी और गलत रिपोर्टिंग के कारण ग्रामीण पेयजल योजनाओं की प्रभावशीलता और दीर्घकालिक स्थिरता प्रभावित हुई है। मार्च 2024 तक की अवधि पर आधारित ‘छत्तीसगढ़ में जल जीवन मिशन का प्रदर्शन ऑडिट’ रिपोर्ट मंगलवार को वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने विधानसभा में पेश की। रिपोर्ट सामने आने के बाद राज्य सरकार ने इसके लिए पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को जिम्मेदार ठहराया, जबकि उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने दावा किया कि भाजपा सरकार बनने के बाद मिशन के कार्यों में तेजी आई है। योजना निर्माण में गंभीर खामियां CAG की रिपोर्ट के मुताबिक जल जीवन मिशन के लिए निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। कई स्थानों पर गांव स्तर की कार्ययोजना तैयार किए बिना ही जिला स्तरीय योजनाएं बना दी गईं, जबकि राज्य स्तरीय कार्ययोजना तैयार ही नहीं की गई। रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि राज्य स्तर पर जल सुरक्षा योजना नहीं बनाई गई, जिससे जल स्रोतों की दीर्घकालिक उपलब्धता और योजनाओं के रखरखाव की स्पष्ट रणनीति विकसित नहीं हो सकी। 33 प्रतिशत नल कनेक्शन निकले गैर-कार्यशील रिपोर्ट के अनुसार मार्च 2025 तक 50 लाख ग्रामीण परिवारों को नल जल कनेक्शन देने का लक्ष्य रखा गया था। जनवरी 2025 तक 40.10 लाख फंक्शनल हाउसहोल्ड टैप कनेक्शन (FHTC) लगाए गए। हालांकि, इनमें से 13.31 लाख (करीब 33%) कनेक्शन गैर-कार्यशील पाए गए। इसके पीछे सूख चुके जल स्रोत, अधूरी ओवरहेड टंकियां, बिजली कनेक्शन का अभाव और सोलर पंप स्थापित नहीं होना प्रमुख कारण बताए गए हैं। ‘हर घर जल’ लक्ष्य भी अधूरा राज्य के 19,656 गांवों को मार्च 2024 तक ‘हर घर जल’ प्रमाणित किया जाना था, लेकिन केवल 716 गांव (3.64 प्रतिशत) ही इस लक्ष्य तक पहुंच सके। ऑडिट में ऐसे मामले भी सामने आए, जहां अधूरे कार्यों के बावजूद गांवों को ‘हर घर जल’ प्रमाणित कर दिया गया। किसी भी जिले में 100% कवरेज नहीं मार्च 2024 तक राज्य के 33 में से किसी भी जिले और 146 में से किसी भी विकासखंड में 100 प्रतिशत नल जल कवरेज नहीं था। योजनाओं की प्रगति बेहद धीमी रिपोर्ट के अनुसार जल जीवन मिशन के तहत स्वीकृत 29,153 सिंगल विलेज स्कीम में से मार्च 2024 तक केवल 172 योजनाएं पूरी हो सकीं। इनमें भी सिर्फ 32 ग्राम पंचायतों को योजनाओं का संचालन सौंपा गया। वहीं, स्वीकृत 70 मल्टी विलेज स्कीम में से मार्च 2025 तक एक भी योजना पूरी नहीं हो सकी, जिससे करीब 9.85 लाख घरों तक सतही जल स्रोतों से पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य प्रभावित हुआ। सोलर आधारित योजनाओं में भी अनियमितताएं CAG ने पाया कि कई सोलर आधारित पेयजल योजनाओं में निर्धारित क्षमता से अधिक नल कनेक्शन जोड़ दिए गए। इसके कारण 28,984 परिवारों को निर्धारित मानकों के अनुसार पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। वित्तीय और गुणवत्ता संबंधी कमियां रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य सरकार केंद्र और राज्यांश मिलाकर 6,480.04 करोड़ रुपये की आवश्यक वित्तीय व्यवस्था सुनिश्चित करने में विफल रही। साथ ही मनरेगा, स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण), जिला खनिज न्यास (DMF), सांसद निधि और CSR जैसी योजनाओं के संसाधनों के समन्वय के लिए भी कोई प्रभावी रणनीति नहीं बनाई गई। जल गुणवत्ता जांच की व्यवस्था कमजोर राज्य की 75 जल परीक्षण प्रयोगशालाओं में से केवल 4 प्रयोगशालाएं ही सभी 13 निर्धारित जल गुणवत्ता मानकों की जांच करने में सक्षम पाई गईं। इसके अलावा 37 प्रतिशत प्रयोगशालाओं को NABL की मान्यता प्राप्त नहीं थी। रिपोर्ट में स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में भी निर्धारित मानकों के अनुसार जल गुणवत्ता जांच नहीं होने की बात कही गई है। CAG की प्रमुख सिफारिशें रिपोर्ट में सरकार को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं, जिनमें शामिल हैं— सरकार ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार को ठहराया जिम्मेदार CAG रिपोर्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि दिसंबर 2023 में भाजपा सरकार बनने के बाद जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी आई है। उन्होंने आरोप लगाया कि पिछली कांग्रेस सरकार मिशन को खराब स्थिति में छोड़कर गई थी, जिसके कारण परियोजनाएं समय पर पूरी नहीं हो सकीं। उन्होंने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने जल जीवन मिशन की समय-सीमा 2024 से बढ़ाकर 2028 तक कर दी है। मार्च 2026 में स्वीकृत मिशन के दूसरे चरण को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा, ताकि प्रत्येक ग्रामीण परिवार तक सुरक्षित और स्वच्छ पेयजल पहुंचाया जा सके।
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रायपुर में 16 जुलाई को निकलेगी भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा, राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा

रायपुर। राजधानी रायपुर के गायत्री नगर स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की विश्वविख्यात रथयात्रा 16 जुलाई को धार्मिक आस्था, वैदिक परंपराओं और भव्य आयोजन के साथ निकाली जाएगी। वहीं बाहुड़ा यात्रा 24 जुलाई को आयोजित होगी। मंदिर परिसर में सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं और भगवान जगन्नाथ, बलभद्र तथा माता सुभद्रा के तीनों रथों को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। रथयात्रा से पहले 14 जुलाई की शाम 6 बजे भगवान का नेत्रोत्सव आयोजित किया जाएगा। यह पर्व धार्मिक आस्था के साथ-साथ छत्तीसगढ़ और ओडिशा की सांस्कृतिक एकता, भाईचारे और सनातन परंपरा का भी प्रतीक माना जाता है। भक्त और भगवान के मिलन का महापर्व श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति के संस्थापक अध्यक्ष एवं विधायक पुरंदर मिश्रा ने बताया कि रथयात्रा भक्तों और भगवान के प्रत्यक्ष मिलन का महापर्व है। वर्ष में केवल इसी अवसर पर भगवान जगन्नाथ अपने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के साथ मंदिर से बाहर निकलकर श्रद्धालुओं को दर्शन देते हैं। 11 वैदिक पंडित कराएंगे विशेष पूजन रथयात्रा के दिन सुबह 11 वैदिक पंडितों के सान्निध्य में भगवान का विशेष अभिषेक, पूजन और हवन कराया जाएगा। चंदन, केसर, कस्तूरी, कपूर सहित विभिन्न सुगंधित द्रव्यों से भगवान का दिव्य स्नान कराया जाएगा। इसके बाद भगवान को गजामूंग महाप्रसाद अर्पित किया जाएगा। वैदिक मंत्रोच्चार, शंखनाद और मंगल वाद्यों की गूंज के बीच भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और माता सुभद्रा अपने-अपने रथों पर विराजमान होकर नगर भ्रमण के लिए प्रस्थान करेंगे। राज्यपाल और मुख्यमंत्री निभाएंगे ‘छेरा पहरा’ की परंपरा रथयात्रा की सबसे प्रमुख परंपराओं में शामिल ‘छेरा पहरा’ का निर्वहन इस वर्ष भी किया जाएगा। परंपरा के अनुसार राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भगवान के रथ के आगे सोने की झाड़ू से मार्ग की प्रतीकात्मक सफाई करेंगे। यह परंपरा सेवा, समर्पण और विनम्रता का संदेश देती है। इस अवसर पर विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह, जनप्रतिनिधि, संत-महात्मा, सामाजिक एवं धार्मिक संगठनों के पदाधिकारी और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के शामिल होने की संभावना है। भजन, झांकियों और लोकनृत्य से गूंजेगा शहर रथयात्रा के दौरान महिला मंडलों द्वारा भजन-कीर्तन, आकर्षक सांस्कृतिक झांकियां और पारंपरिक लोकनृत्य प्रस्तुत किए जाएंगे। “जय जगन्नाथ” के जयघोष के साथ मंदिर परिसर और आसपास का क्षेत्र पूरी तरह भक्तिमय वातावरण में सराबोर रहेगा। श्रद्धालुओं से की गई विशेष अपील श्री जगन्नाथ मंदिर सेवा समिति ने प्रदेशभर के श्रद्धालुओं से सपरिवार रथयात्रा में शामिल होकर भगवान जगन्नाथ का आशीर्वाद प्राप्त करने और सनातन संस्कृति की इस गौरवशाली परंपरा का हिस्सा बनने की अपील की है। रायपुर और छत्तीसगढ़ की धार्मिक, सांस्कृतिक और ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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बिलासपुर: CM हेल्पलाइन शिकायतों के खराब निराकरण पर PHE के ईई को नोटिस, कलेक्टर ने अधिकारियों को लगाई फटकार

बिलासपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की पहल पर संचालित सीएम हेल्पलाइन में प्राप्त शिकायतों के निराकरण की समीक्षा बैठक में लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी (PHE) विभाग का प्रदर्शन संतोषजनक नहीं मिलने पर कलेक्टर संजय अग्रवाल ने कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने पीएचई विभाग के कार्यपालन अभियंता (ईई) रूपेश कुमार धनंजय को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए। टीएल (समय-सीमा) बैठक में कलेक्टर ने सभी विभागों के अधिकारियों से कहा कि शिकायतों का केवल औपचारिक निपटारा करने के बजाय उनका गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक समाधान सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने समय-सीमा का पालन करने और लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की चेतावनी भी दी। एकल शिक्षकीय स्कूलों में जल्द होंगे अतिथि शिक्षकों की नियुक्ति शिक्षा विभाग की समीक्षा के दौरान कलेक्टर ने एकल शिक्षकीय स्कूलों में तत्काल अतिथि शिक्षक नियुक्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आवश्यकता पड़ने पर सेवानिवृत्त शिक्षकों की सेवाएं भी ली जाएं, ताकि विद्यार्थियों की पढ़ाई प्रभावित न हो। जर्जर स्कूल भवनों में नहीं लगेंगी कक्षाएं कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जर्जर भवनों में किसी भी स्थिति में कक्षाएं संचालित नहीं की जाएं। ऐसे विद्यालयों के लिए वैकल्पिक भवन की व्यवस्था करने और नए भवन या अतिरिक्त कक्षों के निर्माण के प्रस्ताव शीघ्र भेजने को कहा गया। स्वास्थ्य विभाग को भी लगाई फटकार जिला खनिज न्यास (DMF) से जुड़े कार्यों की समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत नहीं किए जाने पर कलेक्टर ने नाराजगी जताई। उन्होंने निर्देश दिए कि स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए डीएमएफ की राशि का प्रभावी और समयबद्ध उपयोग सुनिश्चित किया जाए। बैठक में दिए गए प्रमुख निर्देश कलेक्टर ने अधिकारियों से कहा कि शासन की योजनाओं और जनहित से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी विभाग समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित करें। बिलासपुर और छत्तीसगढ़ की ताजा खबरों के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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छत्तीसगढ़ में दो साल में 2960 हत्याएं: रायपुर सबसे आगे, नक्सल प्रभावित जिलों से भी ज्यादा दर्ज हुए हत्या के मामले

रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले दो वर्षों के दौरान हत्या के मामलों के आंकड़े चिंता बढ़ाने वाले हैं। गृह विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 1 जुलाई 2024 से 30 जून 2026 के बीच प्रदेश में 2,960 हत्या के मामले दर्ज किए गए। इसका मतलब है कि राज्य में औसतन हर महीने 123 और हर दिन करीब 4 लोगों की हत्या हुई। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि राजधानी रायपुर में हत्या के मामले नक्सल प्रभावित रहे कई जिलों की तुलना में अधिक दर्ज किए गए हैं। रायपुर में सबसे ज्यादा 169 हत्या के मामले गृह विभाग के आंकड़ों के मुताबिक दो वर्षों में सबसे अधिक 169 हत्या के मामले रायपुर जिले में दर्ज हुए। इसके बाद जशपुर और रायगढ़ में 114-114, जबकि दुर्ग और सरगुजा में 113-113 हत्या के मामले सामने आए। वहीं बिलासपुर में इस अवधि के दौरान 109 लोगों की हत्या दर्ज की गई। नक्सल प्रभावित जिलों में अपेक्षाकृत कम मामले आंकड़ों के अनुसार, नक्सल प्रभावित रहे कई जिलों में हत्या के मामले राजधानी रायपुर से कम रहे। दो वर्षों के दौरान दर्ज हत्या के मामले इस प्रकार हैं— इन सभी जिलों की तुलना में अकेले रायपुर में कहीं अधिक हत्याएं दर्ज होना कानून-व्यवस्था के लिहाज से गंभीर संकेत माना जा रहा है। पिछले एक साल में भी रायपुर पहले स्थान पर यदि केवल 1 जुलाई 2025 से 30 जून 2026 तक के आंकड़ों पर नजर डालें, तब भी रायपुर हत्या के मामलों में प्रदेश में सबसे आगे रहा। इस अवधि में हत्या के मामले इस प्रकार रहे— बड़े शहरों में बढ़ रही हत्या की घटनाएं आंकड़े बताते हैं कि प्रदेश के बड़े शहरों में हत्या के मामलों की संख्या लगातार अधिक बनी हुई है। रायपुर लगातार पहले स्थान पर है, जबकि दुर्ग में पिछले वर्ष की तुलना में मामलों में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा बलौदाबाजार और कोरिया जैसे जिलों में भी हत्या की घटनाओं में इजाफा देखने को मिला है, जिससे कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ी है। हालांकि, इन आंकड़ों के पीछे के कारणों और अपराध नियंत्रण के लिए उठाए गए कदमों पर सरकार की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। छत्तीसगढ़ की राजनीति, अपराध, प्रशासन और ताजा खबरों की हर अपडेट के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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अनियमित कर्मचारियों और बेरोजगारी भत्ते को लेकर AAP का सरकार पर हमला, 1 अगस्त से चलाएगी हस्ताक्षर अभियान

रायपुर। आम आदमी पार्टी (AAP) ने प्रदेश में अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण और बेरोजगार युवाओं को बेरोजगारी भत्ता नहीं मिलने के मुद्दे पर राज्य सरकार को घेरते हुए विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए वादों को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया है। पार्टी ने 1 अगस्त से पूरे प्रदेश में बेरोजगारी भत्ते की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाने का भी ऐलान किया है। 7.30 लाख अनियमित कर्मचारियों का उठाया मुद्दा प्रेस कॉन्फ्रेंस में AAP नेताओं ने कहा कि प्रदेश में 7.30 लाख से अधिक अनियमित कर्मचारी वर्षों से विभिन्न विभागों में सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन उनके नियमितीकरण का वादा अब तक पूरा नहीं किया गया। पार्टी का आरोप है कि कम मानदेय पर कार्यरत कर्मचारियों को 4 हजार रुपये प्रतिमाह विशेष भत्ता भी नहीं मिल रहा है। नेताओं ने यह भी कहा कि वर्ष 2017 के बाद न्यूनतम वेतन का पुनरीक्षण नहीं किया गया है। वहीं, संविदा कर्मचारियों के वेतन में अगस्त 2023 के बाद से कोई बढ़ोतरी नहीं होने के कारण कर्मचारियों को आर्थिक परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बेरोजगारी भत्ता बंद होने का लगाया आरोप AAP ने दावा किया कि प्रदेश के रोजगार कार्यालयों में 14.62 लाख से अधिक बेरोजगार पंजीकृत हैं और हर साल करीब दो लाख नए बेरोजगार जुड़ रहे हैं। पार्टी के अनुसार, बेरोजगारी भत्ता योजना के तहत अंतिम भुगतान अगस्त 2023 में किया गया था, जिसके बाद यह योजना प्रभावी रूप से बंद हो गई। पार्टी नेताओं ने आरोप लगाया कि प्रदेश के युवाओं को न तो रोजगार मिल रहा है और न ही बेरोजगारी भत्ता, जिससे चुनावी वादों पर सवाल खड़े हो रहे हैं। 1 अगस्त से प्रदेशभर में हस्ताक्षर अभियान आम आदमी पार्टी ने घोषणा की कि 1 अगस्त से पूरे प्रदेश में बेरोजगारी भत्ता दोबारा शुरू करने की मांग को लेकर हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा। इसके अलावा विभिन्न कर्मचारी संगठनों के साथ मिलकर अनियमित कर्मचारियों के नियमितीकरण की मांग को लेकर आंदोलन भी तेज किया जाएगा। सरकार के सामने रखीं प्रमुख मांगें छत्तीसगढ़ की राजनीति, सरकारी योजनाओं और ताजा खबरों की विस्तृत जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com
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X पर अब लाइक बटन दबाकर भेज सकेंगे $1 की टिप, मस्क ने नए फीचर का किया ऐलान

नई दिल्ली। इलॉन मस्क सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X को फाइनेंशियल सर्विसेज से जोड़ने की दिशा में एक और कदम उठा रहे हैं। मस्क ने ऐलान किया है कि X पर यूजर्स लाइक बटन को लॉन्ग-प्रेस करके किसी यूजर या क्रिएटर को 1 डॉलर की टिप भेज सकेंगे। यह पेमेंट कंपनी के फाइनेंशियल प्लेटफॉर्म X मनी के जरिए किया जाएगा। मस्क ने X पर पोस्ट कर इसकी जानकारी दी। उन्होंने लिखा कि X मनी के माध्यम से किसी को भी 1 डॉलर भेजने के लिए लाइक बटन पर लॉन्ग-प्रेस करने का विकल्प जोड़ा जा रहा है। कैसे काम करेगा नया टिपिंग फीचर? इस फीचर के जरिए यूजर्स किसी पोस्ट के लेखक या क्रिएटर को सीधे आर्थिक मदद दे सकेंगे। इसके लिए लाइक बटन को कुछ देर तक दबाना होगा। इसके बाद X मनी के पेमेंट सिस्टम के जरिए 1 डॉलर ट्रांसफर करने का विकल्प मिलेगा। इस व्यवस्था का मकसद क्रिएटर्स को सपोर्ट करने की प्रक्रिया आसान बनाना है, ताकि यूजर्स को अलग से पेमेंट ऐप या लंबी प्रक्रिया का सहारा न लेना पड़े। हालांकि, X ने अभी तक इस फीचर के लॉन्च की तारीख और इसकी उपलब्धता से जुड़ी शर्तों की जानकारी नहीं दी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि यूजर्स 1 डॉलर की तय रकम को बदल सकेंगे या भविष्य में अलग-अलग रकम भेजने के विकल्प भी मिलेंगे। क्या है X मनी और इसमें कौन-सी सुविधाएं हैं? X मनी, X का फाइनेंशियल सर्विस प्लेटफॉर्म है। इसके जरिए यूजर्स के बीच पैसे ट्रांसफर करने, डिपॉजिट अकाउंट और X-ब्रांडेड वीजा डेबिट कार्ड जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। इसका पेमेंट और बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर क्रॉस रिवर बैंक के साथ जुड़ा है। X मनी खुद बैंक नहीं है, बल्कि बैंकिंग पार्टनर के माध्यम से वित्तीय सेवाएं उपलब्ध कराने वाला प्लेटफॉर्म है। इससे जुड़ी सुविधाओं में पात्र डिपॉजिट पर ब्याज, खरीदारी पर कैशबैक और डेबिट कार्ड को Apple Pay से कनेक्ट करने जैसे विकल्प शामिल हैं। इन सुविधाओं की उपलब्धता यूजर की पात्रता और लागू शर्तों पर निर्भर करती है। X को ‘एवरीथिंग ऐप’ बनाना चाहते हैं मस्क इलॉन मस्क लंबे समय से X को सिर्फ सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म तक सीमित नहीं रखना चाहते। उनका लक्ष्य इसे ‘एवरीथिंग ऐप’ यानी सुपर ऐप के रूप में विकसित करना है, जहां सोशल मीडिया, मैसेजिंग और वित्तीय सेवाएं एक ही जगह मिल सकें। X मनी के जरिए टिप भेजने का फीचर इसी रणनीति का हिस्सा है। अगर यह सुविधा व्यापक स्तर पर शुरू होती है, तो क्रिएटर्स को अपने कंटेंट के जरिए सीधे आर्थिक सहयोग पाने का एक और माध्यम मिल सकता है। भारत में कब शुरू होगा X मनी? X ने भारत में X मनी या नए टिपिंग फीचर को लॉन्च करने की कोई आधिकारिक तारीख घोषित नहीं की है। फिलहाल भारतीय यूजर्स के लिए इसकी उपलब्धता को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है। भारत में पहले से ही UPI आधारित डिजिटल पेमेंट का बड़ा नेटवर्क मौजूद है। ऐसे में X मनी को भारत में वित्तीय सेवाएं शुरू करने के लिए देश के लागू बैंकिंग, भुगतान और नियामकीय नियमों का पालन करना होगा। क्या होता है ‘एवरीथिंग ऐप’? एवरीथिंग ऐप या सुपर ऐप ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म होता है, जिसमें एक ही ऐप के जरिए कई तरह की सेवाएं इस्तेमाल की जा सकती हैं। इनमें सोशल मीडिया, मैसेजिंग, डिजिटल पेमेंट, शॉपिंग और बैंकिंग जैसी सुविधाएं शामिल हो सकती हैं। चीन का WeChat इसका प्रमुख उदाहरण है, जहां मैसेजिंग के साथ भुगतान और कई अन्य डिजिटल सेवाएं भी मिलती हैं। मस्क X को भी इसी तरह का बहुउद्देशीय प्लेटफॉर्म बनाना चाहते हैं।

पूर्व जज संजय किशन कौल का पूर्व CJI चंद्रचूड़ पर निशाना, बोले- जजों की नियुक्ति में सरकार के प्रति ज्यादा झुके थे

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज संजय किशन कौल ने पूर्व मुख्य न्यायाधीश (CJI) डीवाई चंद्रचूड़ के रवैए पर सवाल उठाए हैं। अपनी आगामी किताब ‘विदाउट फियर ऑर फेवर’ में कौल ने आरोप लगाया है कि न्यायाधीशों की नियुक्ति के मामले में चंद्रचूड़ सरकार के प्रति जरूरत से ज्यादा झुके हुए थे। कौल के मुताबिक, नियुक्तियों से पहले सरकार की राय लेने की प्रवृत्ति न्यायपालिका की स्वतंत्रता के लिए चिंता का विषय है। कौल ने किताब में कॉलेजियम की उस बैठक का जिक्र किया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट की छह रिक्तियों को भरने के लिए नामों पर विचार किया गया था। उन्होंने कहा कि सरकार से निपटने के तरीके को लेकर मतभेदों के कारण चंद्रचूड़ के साथ उनके संबंधों में तनाव आया। कॉलेजियम बैठक में छठे नाम को लेकर मतभेद कौल के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट के छह जजों की नियुक्ति पर विचार के दौरान पांच नामों पर पहले सहमति बन चुकी थी। बैठक से ठीक पहले तत्कालीन CJI चंद्रचूड़ ने छठे उम्मीदवार का नाम उनके सामने रखा। कौल ने बताया कि चंद्रचूड़ उन्हें एक अलग कमरे में ले गए और पूछा कि क्या उन्हें सरकार का रुख जानने के लिए फोन करना चाहिए। कौल ने द वायर से बातचीत में कहा कि उन्हें नहीं लगता कि यह सरकार को खुश करने का मामला था, लेकिन नामों पर पहले उनके साथ चर्चा हुई थी। उन्होंने कहा कि छठे उम्मीदवार के नाम पर उनकी सहमति नहीं थी और उन्हें लगा कि कॉलेजियम के अन्य सदस्य भी उस नाम को स्वीकार नहीं करेंगे। कौल के अनुसार, बैठक में वही हुआ और छठे नाम पर सहमति नहीं बन सकी। उन्होंने आशंका जताई कि शायद चंद्रचूड़ ने इस नाम सहित अन्य नामों को लेकर सरकार से पहले ही किसी तरह की मंजूरी ले ली थी। नियुक्तियों से पहले सरकार की राय लेने पर आपत्ति जस्टिस कौल ने कहा कि कॉलेजियम की औपचारिक चर्चा से पहले सरकार के साथ नामों पर विचार-विमर्श करने की परंपरा चिंता पैदा करती है। उनके मुताबिक, सरकार से सलाह लेना और पहले से मंजूरी लेना दो अलग-अलग बातें हैं। कौल का मानना है कि कॉलेजियम को न्यायपालिका की स्वतंत्रता बनाए रखने के लिए सरकार के दबाव का विरोध करना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर नियुक्तियों से पहले सरकार की सहमति लेने की प्रक्रिया परंपरा बन जाती है, तो भविष्य में आने वाले मुख्य न्यायाधीशों के लिए इससे अलग चलना मुश्किल हो सकता है। NJAC पर भी रखी अपनी राय किताब में कौल ने 2015 में केंद्र सरकार की ओर से पेश किए गए नेशनल ज्यूडिशियल अपॉइंटमेंट्स कमीशन (NJAC) का भी उल्लेख किया है। उन्होंने कहा कि उस समय नियुक्ति व्यवस्था को लेकर आमने-सामने बैठकर चर्चा की जा सकती थी। कौल के मुताबिक, मौजूदा व्यवस्था में सुधार और उसके तौर-तरीकों में बदलाव की गुंजाइश थी। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सुधार के नाम पर नियुक्तियों से पहले सरकार की मंजूरी लेने की परंपरा को बढ़ावा नहीं मिलना चाहिए। PMLA मामले को दूसरी बेंच में भेजने पर भी सवाल कौल ने अपनी बेंच के एक फैसले से जुड़े मामले को दूसरी बेंच में भेजे जाने पर भी आपत्ति जताई। यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) से जुड़े फैसले के कुछ हिस्सों पर दोबारा विचार करने से संबंधित था। कौल का कहना था कि किसी मामले को इस आशंका के आधार पर एक बेंच से दूसरी बेंच में नहीं भेजा जाना चाहिए कि फैसला किस दिशा में जा सकता है। कांग्रेस ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता का मुद्दा उठाया कौल की किताब अभी बाजार में नहीं आई है, लेकिन उनके बयानों के आधार पर कांग्रेस ने न्यायपालिका की स्वतंत्रता को लेकर सवाल उठाए हैं। कांग्रेस महासचिव और संचार प्रभारी जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट कर कहा कि कौल ने न्यायाधीशों की नियुक्ति में सरकार के दखल से जुड़ी चिंताएं सामने रखी हैं। रमेश के मुताबिक, इनमें कॉलेजियम की बैठकों से पहले सरकार की मंजूरी लेने की कोशिश और अल्पसंख्यक समुदाय से आने वाले एक न्यायाधीश की जाति को लेकर सरकार की ओर से पूछताछ का मुद्दा भी शामिल है। उन्होंने कहा कि कौल ने इन विषयों को नपे-तुले शब्दों में दर्ज किया है। कांग्रेस ने इसे न्यायपालिका को सत्ता में बैठे लोगों के दबाव से मुक्त रखने की जरूरत से जोड़कर देखा है। कौल बोले- भविष्य के CJI के लिए परंपरा बदलना मुश्किल होगा कौल ने अपने रुख को स्पष्ट करते हुए कहा कि मुख्य न्यायाधीश का कार्यकाल सीमित होता है, लेकिन उनके फैसलों से बनी परंपराएं आगे भी जारी रह सकती हैं। उनके मुताबिक, यदि नियुक्तियों से पहले सरकार से चर्चा करने की प्रक्रिया सामान्य बन जाती है, तो बाद में आने वाले मुख्य न्यायाधीशों के लिए उससे अलग रास्ता अपनाना मुश्किल हो सकता है। इसी वजह से उन्होंने चंद्रचूड़ को इस तरह की प्रक्रिया से बचने की सलाह देने की कोशिश की।

भोपाल में 1.50 लाख की MD ड्रग्स के साथ दो युवक गिरफ्तार, बाइक-मोबाइल समेत 3 लाख का सामान जब्त

भोपाल। राजधानी भोपाल में परवलिया सड़क थाना पुलिस ने बायपास रोड पर घेराबंदी कर दो युवकों को MD ड्रग्स के साथ गिरफ्तार किया है। आरोपियों के कब्जे से 12.63 ग्राम MD ड्रग्स बरामद हुई है, जिसकी कीमत करीब 1.50 लाख रुपए बताई गई है। पुलिस ने तस्करी में इस्तेमाल बाइक और मोबाइल फोन भी जब्त किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 3 लाख रुपए आंकी गई है। मुखबिर की सूचना पर पुलिस ने की घेराबंदी पुलिस के मुताबिक, 24 अक्टूबर की रात मुखबिर से सूचना मिली थी कि दो युवक बाइक से MD ड्रग्स लेकर थाना क्षेत्र से गुजरने वाले हैं। सूचना मिलने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया गया। थाना प्रभारी के नेतृत्व में पांच पुलिस टीमें गठित कर बायपास रोड पर घेराबंदी की गई। रात करीब 1:40 बजे पुलिस को बाइक पर सवार दो संदिग्ध युवक दिखाई दिए। पुलिस को देखकर दोनों ने बाइक मोड़कर भागने की कोशिश की, लेकिन घेराबंदी के चलते उन्हें पकड़ लिया गया। तरुण सराठे और अखिलेश मेहरा गिरफ्तार पुलिस के अनुसार, तलाशी के दौरान तरुण सराठे (24), निवासी छावनी पठार, बिलखिरिया के पास से 12.63 ग्राम MD ड्रग्स बरामद हुई। बाइक पर उसके साथ मौजूद अखिलेश मेहरा (24), निवासी छावनी पठार को भी गिरफ्तार किया गया। पुलिस ने आरोपियों के पास से ड्रग्स के अलावा तस्करी में इस्तेमाल बाइक और मोबाइल फोन जब्त किए हैं। जब्त सामान की कुल कीमत करीब 3 लाख रुपए बताई गई है। दोनों आरोपियों पर पहले से दर्ज हैं मामले पुलिस के मुताबिक, तरुण सराठे के खिलाफ बिलखिरिया थाने में मारपीट और आर्म्स एक्ट के दो मामले दर्ज हैं। वहीं, अखिलेश मेहरा के खिलाफ मारपीट के चार प्रकरण पहले से दर्ज हैं। पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ NDPS एक्ट की संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क की जांच जारी गिरफ्तारी के बाद पुलिस दोनों युवकों से पूछताछ कर रही है। जांच में यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि MD ड्रग्स कहां से लाई गई थी और इसे किसे सप्लाई किया जाना था। पुलिस ड्रग्स की खरीद-फरोख्त से जुड़े नेटवर्क की जानकारी भी जुटा रही है।

हरमनप्रीत और दीप्ति के शतक, भारत ने जिम्बाब्वे को दिया 329 रन का टारगेट

वडोदरा। भारतीय महिला क्रिकेट टीम ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे वनडे मुकाबले में शानदार बल्लेबाजी करते हुए 50 ओवर में 6 विकेट पर 328 रन बनाए। वडोदरा के कोटांबी स्टेडियम में रविवार को टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी भारतीय टीम की ओर से कप्तान हरमनप्रीत कौर और दीप्ति शर्मा ने शतक लगाए। दोनों के बीच छठे विकेट के लिए 153 रन की अहम साझेदारी हुई। भारत की शुरुआत खराब, 19 रन पर गिरे 2 विकेट भारतीय टीम की शुरुआत बेहद खराब रही। स्मृति मंधाना पारी की चौथी गेंद पर बिना खाता खोले आउट हो गईं। इसके बाद शेफाली वर्मा भी 8 रन बनाकर पवेलियन लौट गईं। तीसरे ओवर में भारत का स्कोर 19 रन पर 2 विकेट हो गया। मुश्किल समय में प्रतीका रावल और हरमनप्रीत कौर ने पारी को संभाला। दोनों ने संभलकर बल्लेबाजी करते हुए टीम को शुरुआती झटकों से उबारा। प्रतीका रावल ने 67 गेंदों पर 61 रन बनाए। उनकी पारी में 4 चौके और 2 छक्के शामिल रहे। वह 22.2 ओवर में 143 रन के स्कोर पर आउट हुईं। हरमनप्रीत कौर ने 121 गेंदों पर बनाए 126 रन कप्तान हरमनप्रीत कौर ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 121 गेंदों पर 126 रन बनाए। उन्होंने अपनी पारी में 15 चौके लगाए। यह उनके वनडे करियर का आठवां शतक रहा। हालांकि, पारी के दौरान उनके तीन कैच भी छूटे। हरमनप्रीत का विकेट 46.2 ओवर में गिरा। उस समय भारतीय टीम 301 रन बना चुकी थी। पारी के बाद उन्होंने कहा कि लंबे समय बाद धूप में खेलना आसान नहीं था। उन्होंने बताया कि जब दूसरे छोर पर बल्लेबाज अच्छी लय में रन बना रही हो, तो स्ट्राइक बदलते रहना और साझेदारी को आगे बढ़ाना जरूरी होता है। दीप्ति शर्मा ने 86 गेंदों में जड़ा शतक छठे नंबर पर बल्लेबाजी करने उतरीं दीप्ति शर्मा ने 86 गेंदों पर 106 रन की पारी खेली। उन्होंने 15 चौके लगाए। दीप्ति ने 37 गेंदों में अपना अर्धशतक पूरा किया और पारी के आखिरी ओवर में चौका लगाकर वनडे करियर का दूसरा शतक पूरा किया। दीप्ति ने हरमनप्रीत के साथ मिलकर भारतीय पारी को मजबूत स्थिति में पहुंचाया। दोनों ने पांचवें विकेट के लिए 137 गेंदों पर 153 रन की साझेदारी की। इस दौरान दोनों ने विकेट बचाने के साथ रन गति भी बनाए रखी। दीप्ति शर्मा ने बनाए तीन रिकॉर्ड आखिरी 10 ओवर में बने 72 रन भारतीय टीम ने आखिरी 10 ओवर में 72 रन जोड़े और इस दौरान 2 विकेट गंवाए। हरमनप्रीत के आउट होने के बाद ऋचा घोष भी ज्यादा देर नहीं टिक सकीं। वह 9 गेंदों पर 7 रन बनाकर 47.6 ओवर में आउट हुईं। भारत ने निर्धारित 50 ओवर में 6 विकेट पर 328 रन बनाकर जिम्बाब्वे के सामने 329 रन का लक्ष्य रखा। दोनों टीमों की प्लेइंग-11 भारत: प्रतीका रावल, स्मृति मंधाना (कप्तान), शेफाली वर्मा, हरमनप्रीत कौर, तेजल हसब्निस, दीप्ति शर्मा, ऋचा घोष (विकेटकीपर), श्री चरणी, जिंतिमणि कलिता, सयाली सतघरे और वैष्णवी शर्मा। जिम्बाब्वे: मोडेस्टर मुपाचिकवा (विकेटकीपर), लोरिन फिरी, चिपो मुगेरी-तिरिपानो, बिलव्ड बिजा, जोसेफिन नकोमो (कप्तान), न्याशा ग्वांजुरा, चिएद्जा धुरुरु, मिशेल मावुंगा, नोमवेलो सिबांडा, तेंदाई मकुशा और ओलिंडर चारे।
BSF

BSF Action: कच्छ के Sir Creek में पकड़े गए 4 Pakistani Fishermen

गुजरात के कच्छ से भारत-पाकिस्तान सीमा पर सुरक्षा से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने रविवार, 25 अक्टूबर 2026 को सर क्रीक के संवेदनशील इलाके में चार पाकिस्तानी मछुआरों को पकड़ लिया। इस दौरान उनकी फाइबर से बनी मछली पकड़ने वाली नाव भी जब्त की गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, चारों मछुआरे कथित तौर पर केकड़े पकड़ने के लिए भारतीय जलक्षेत्र में दाखिल हुए थे। यह कार्रवाई खुफिया जानकारी मिलने के बाद की गई। घटना के बाद एक बार फिर कच्छ के समुद्री सीमा क्षेत्र में सुरक्षा और निगरानी को लेकर चर्चा शुरू हो गई है। हालांकि, मछुआरों के भारतीय जलक्षेत्र में पहुंचने की परिस्थितियों और उनकी गतिविधियों की पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। BSF ने कैसे पकड़े चार पाकिस्तानी मछुआरे? India Today की 25 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, BSF को सूचना मिली थी कि कुछ पाकिस्तानी मछुआरे भारतीय जलक्षेत्र में मौजूद हैं। इसके बाद जवानों ने सर क्रीक इलाके में कार्रवाई करते हुए चारों को पकड़ लिया। पकड़े गए मछुआरों की पहचान कादिर थैमोर, मुहम्मद मूसा, अजगर थैमोर और अहसान जाट के रूप में बताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, चारों पाकिस्तान के सिंध प्रांत के निवासी हैं। कार्रवाई के दौरान उनकी फाइबर की नाव भी जब्त की गई। फिलहाल, पूछताछ और आगे की कानूनी प्रक्रिया से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं हुई है। आखिर क्या है मछुआरों का अपराध? इस मामले में सबसे अहम सवाल है कि चारों मछुआरे भारतीय जलक्षेत्र में क्यों पहुंचे थे। शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया है कि वे केकड़े पकड़ने के लिए सीमा पार कर भारतीय क्षेत्र में दाखिल हुए थे। भारत के जलक्षेत्र में बिना अनुमति प्रवेश करना या वहां अवैध रूप से मछली पकड़ना संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई का कारण बन सकता है। हालांकि, इस मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और उपलब्ध सबूतों के आधार पर तय होगी। अभी तक सामने आई रिपोर्ट में चारों मछुआरों के जासूसी या किसी अन्य गंभीर गतिविधि में शामिल होने की पुष्टि नहीं हुई है। इसलिए मामले को लेकर किसी अपुष्ट दावे को तथ्य मानना सही नहीं होगा। कच्छ का Sir Creek इलाका क्यों है संवेदनशील? गुजरात का कच्छ क्षेत्र भारत और पाकिस्तान की समुद्री सीमा के पास स्थित है। सर क्रीक एक ज्वारीय जलमार्ग है, जो अपनी भौगोलिक स्थिति और दलदली इलाके के कारण सीमा पर निगरानी के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है। इस क्षेत्र में मछली पकड़ने के लिए नावों की आवाजाही होती है। समुद्री सीमा के आसपास होने के कारण किसी दूसरे देश की नाव का भारतीय जलक्षेत्र में प्रवेश करना सुरक्षा एजेंसियों के लिए जांच का विषय बन जाता है। BSF यहां नियमित गश्त और निगरानी करती है। संदिग्ध नाव या गतिविधि दिखाई देने पर जवान संबंधित लोगों से पूछताछ करते हैं और जरूरत पड़ने पर कानूनी कार्रवाई की जाती है। Kutch Border पर हाल की घटनाओं से बढ़ी निगरानी कच्छ के समुद्री सीमा क्षेत्र में अक्टूबर 2026 के दौरान पाकिस्तानी नागरिकों और नावों से जुड़े दूसरे मामले भी रिपोर्ट किए गए हैं। 19 अक्टूबर को कोटेश्वर के पास क्रीक क्षेत्र में गश्त के दौरान BSF ने एक पाकिस्तानी नागरिक को नाव के साथ पकड़ा था। शुरुआती जांच में नाव से मछली पकड़ने के उपकरण मिलने की जानकारी दी गई थी। इसके बाद इलाके में तलाशी अभियान चलाए जाने की खबर भी सामने आई। 20 अक्टूबर को कच्छ के लखपत और आसपास के क्रीक क्षेत्र से जुड़ी अन्य घटनाओं की भी रिपोर्ट आई थी। इन मामलों में नावों, पाकिस्तानी नागरिकों और तलाशी अभियान का जिक्र किया गया था। हालांकि, ये अलग-अलग घटनाएं हैं और इन्हें 25 अक्टूबर को पकड़े गए चार मछुआरों के मामले से अलग समझना जरूरी है। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बीच समुद्री सीमा पर निगरानी का महत्व बढ़ जाता है। फिर भी, केवल इन घटनाओं के आधार पर किसी बड़ी साजिश का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। क्या पाकिस्तानी नाव से कोई संदिग्ध सामान मिला? 25 अक्टूबर की घटना से जुड़ी शुरुआती रिपोर्ट में फाइबर की नाव जब्त किए जाने की पुष्टि हुई है। हालांकि, नाव से किसी हथियार, नशीले पदार्थ या अन्य संदिग्ध सामान की बरामदगी के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। इसलिए फिलहाल ऐसी किसी बरामदगी का दावा नहीं किया जा सकता। आगे की जांच में नाव, मछुआरों की गतिविधियों और भारतीय जलक्षेत्र में उनकी मौजूदगी से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जा सकती है। अब आगे क्या होगा? चारों मछुआरों को पकड़े जाने के बाद अब जांच और कानूनी प्रक्रिया के अगले चरण महत्वपूर्ण होंगे। संबंधित अधिकारी उनकी पहचान, भारतीय जलक्षेत्र में प्रवेश की परिस्थितियों और घटना से जुड़े दूसरे पहलुओं की जांच कर सकते हैं। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार, BSF ने गुजरात के कच्छ स्थित सर क्रीक इलाके में चार पाकिस्तानी मछुआरों को पकड़ा है और उनकी नाव जब्त की है। वे भारतीय जलक्षेत्र में किन परिस्थितियों में पहुंचे और इस मामले में आगे क्या कार्रवाई होगी, इसकी पूरी जानकारी जांच के बाद ही सामने आएगी। भारत-पाकिस्तान सीमा के पास स्थित इस संवेदनशील क्षेत्र में BSF की निगरानी सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा है। मामले में आधिकारिक अपडेट आने पर आगे की स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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