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आवारा कुत्तों पर Supreme Court में सुनवाई, अदालत की तीखी टिप्पणी

आवारा कुत्तों पर Supreme Court में सुनवाई, अदालत की तीखी टिप्पणी

देश में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर Supreme Court में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत में दी गई एक दलील पर जजों ने तीखी और व्यंग्यात्मक टिप्पणी की, जो अब चर्चा का विषय बन गई है। सुनवाई के दौरान एक पक्ष ने तर्क दिया कि अगर सड़कों से आवारा कुत्तों को हटाया गया तो चूहों की संख्या बढ़ सकती है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “तो फिर क्या चूहे रोकने के लिए बिल्लियां ले आएं?” अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि ऐसी दलीलों से मूल समस्या का समाधान नहीं निकलता। कोर्ट ने यह भी जताया कि आम लोगों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सर्वोपरि है। कई शहरों में कुत्तों के हमलों की बढ़ती घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय प्रशासन और नगर निगमों से जिम्मेदारी के साथ समाधान निकालने को कहा। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि केवल बहाने बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस और व्यावहारिक कदम उठाने होंगे। इस मामले में अगली सुनवाई में केंद्र और राज्यों से विस्तृत जवाब मांगा गया है। देशभर में आवारा कुत्तों को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी काफी अहम मानी जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Stray Dogs

Stray Dogs in Delhi NCR सुप्रीम कोर्ट की आज की Hearing और Guidelines

दिल्ली‑एनसीआर में stray dogs (आवारा कुत्तों) की बढ़ती संख्या ने लोगों की सुरक्षा को गंभीर खतरे में डाल दिया है। इस मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट आज, 7 जनवरी 2026, को सुनवाई कर रहा है। मामला सिर्फ दिल्ली‑एनसीआर तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे देश में आवारा कुत्तों के management और human safety से जुड़ा हुआ है। Supreme Court की Hearing: क्या हुआ आज? सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों वाली बेंच (जस्टिस विक्रम नाथ, जस्टिस संदीप मेहता और जस्टिस एन. वी. अंजारिया) ने मामले में कहा कि इतनी सारी applications इतनी गंभीरता से दायर होना असामान्य है। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि आवारा कुत्तों के मामले में human safety और animal rights दोनों का संतुलन जरूरी है। कोर्ट ने आज सुनवाई में यह बात भी उठाई कि राजस्थान हाई कोर्ट के दो जज भी आवारा कुत्तों के हमले के शिकार हो चुके हैं, जिसमें एक अभी भी गंभीर चोटों से जूझ रहा है। पिछले Orders और Controversy सुप्रीम कोर्ट ने पहले यह निर्देश दिए थे कि: हालांकि, इस दिशा में कुछ लोगों और local authorities के बीच विवाद भी सामने आया। डॉग लवर्स ने कहा कि animal rights की अनदेखी नहीं होनी चाहिए और humane तरीके से ही कुत्तों को relocate किया जाए। Pet Lovers और Activists की प्रतिक्रिया डॉग लवर्स और animal activists का कहना है कि आवारा कुत्तों को हटाने की प्रक्रिया मानवता और statutory rules के खिलाफ नहीं होनी चाहिए। दिल्ली के जंतर मंतर पर भी कई प्रदर्शन हुए हैं, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के आदेश को वापस लेने की मांग की गई। Government Agencies की तैयारी सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद दिल्ली और NCR की municipal agencies ने आवारा कुत्तों के management के लिए कदम उठाए हैं। Case की जटिलता यह मामला केवल local issue नहीं है। पूरे देश में stray dog management को लेकर awareness और legal framework की जरूरत महसूस की जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने अब तक जो orders दिए हैं, उनके पालन की जिम्मेदारी municipal authorities और government agencies पर है। अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई जारी है। अगले आदेश में यह तय किया जा सकता है कि: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BJP

Maharashtra Politics अंबरनाथ नगर परिषद में BJP-Congress की जोड़ी, शिंदे गुट हाशिये पर

महाराष्ट्र की राजनीति में अंबरनाथ नगर परिषद से एक ऐसा घटनाक्रम सामने आया है, जिसने सभी को चौंका दिया है। जिन पार्टियों को देश की राजनीति में एक-दूसरे का कट्टर विरोधी माना जाता है, वही भारतीय जनता पार्टी (BJP) और कांग्रेस इस बार स्थानीय स्तर पर एक साथ नजर आईं। इस गठबंधन का नतीजा यह हुआ कि शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) को सत्ता से बाहर रहना पड़ा। अंबरनाथ में क्या बदला? अंबरनाथ नगर परिषद में कुल 60 सीटें हैं। हालिया चुनाव में शिवसेना (शिंदे गुट) 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। आम तौर पर माना जा रहा था कि शिवसेना यहां परिषद पर नियंत्रण बनाएगी, लेकिन राजनीतिक समीकरण अचानक बदल गए। BJP ने कांग्रेस और एनसीपी (अजित पवार गुट) के साथ मिलकर बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। इस गठबंधन को स्थानीय स्तर पर “Ambernath Vikas Aghadi” नाम दिया गया। इसके बाद परिषद की सत्ता शिवसेना के हाथ से निकल गई। BJP-Congress गठबंधन क्यों है चर्चा में? यह गठबंधन इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि BJP लंबे समय से “कांग्रेस-मुक्त भारत” का नारा देती रही है। ऐसे में कांग्रेस के साथ मिलकर सरकार बनाना राजनीतिक गलियारों में बहस का विषय बन गया है। स्थानीय BJP नेताओं का कहना है कि यह फैसला शहर के विकास और स्थिर प्रशासन को ध्यान में रखकर लिया गया है। वहीं कांग्रेस नेताओं ने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा बताया और कहा कि नगर परिषद में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। Shinde Sena की नाराज़गी शिवसेना (शिंदे गुट) ने इस पूरे घटनाक्रम पर कड़ा ऐतराज जताया है। पार्टी नेताओं का कहना है कि सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद उन्हें सत्ता से बाहर रखना जनादेश का अपमान है। शिंदे गुट ने BJP पर “अवसरवादी राजनीति” करने का आरोप भी लगाया है। स्थानीय शिवसेना कार्यकर्ताओं में भी इस फैसले को लेकर नाराज़गी देखी जा रही है, और आने वाले दिनों में राजनीतिक बयानबाज़ी और तेज़ होने की संभावना है। महाराष्ट्र Politics पर क्या असर पड़ेगा? अंबरनाथ का यह राजनीतिक प्रयोग सिर्फ एक नगर परिषद तक सीमित नहीं माना जा रहा। जानकारों के मुताबिक: अंबरनाथ नगर परिषद में बना BJP-Congress Alliance यह दिखाता है कि स्थानीय राजनीति में विचारधाराओं से ज़्यादा संख्याबल और सत्ता समीकरण अहम हो जाते हैं। शिवसेना (शिंदे गुट) के लिए यह झटका जरूर है, लेकिन महाराष्ट्र की राजनीति के लिए यह एक साफ संदेश भी है कि आने वाला समय और भी दिलचस्प होने वाला है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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UP Voter List

UP Voter List 2026 उत्तर प्रदेश की Draft Voter List जारी, SIR के बाद लाखों नाम कटे

उत्तर प्रदेश में वोटरों के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। चुनाव आयोग (Election Commission of India) ने 6 जनवरी 2026 को UP SIR Draft Voter List 2026 जारी कर दी है। यह सूची Special Intensive Revision (SIR) प्रक्रिया के बाद तैयार की गई है, जिसमें मतदाता सूची को शुद्ध और अपडेट करने का काम किया गया। इस बार ड्राफ्ट वोटर लिस्ट को लेकर चर्चा इसलिए ज्यादा है, क्योंकि करीब 2.8 से 2.9 करोड़ मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए हैं। क्या है SIR और क्यों जारी की गई Draft Voter List? SIR यानी Special Intensive Revision एक विशेष प्रक्रिया है, जिसके तहत चुनाव आयोग यह सुनिश्चित करता है कि मतदाता सूची में केवल योग्य और सक्रिय मतदाताओं के ही नाम हों। इस दौरान: इन सभी मामलों की जांच की जाती है। इसी प्रक्रिया के बाद अब ड्राफ्ट वोटर लिस्ट 2026 जारी की गई है। UP Voter List 2026 में क्या बड़ा बदलाव हुआ? SIR शुरू होने से पहले उत्तर प्रदेश में मतदाताओं की संख्या करीब 15.44 करोड़ थी।नई ड्राफ्ट लिस्ट में यह संख्या घटकर लगभग 12.55 करोड़ रह गई है। यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग अब अपना नाम दोबारा चेक कर रहे हैं। UP Draft Voter List 2026 में अपना नाम कैसे चेक करें? अगर आप जानना चाहते हैं कि आपका नाम वोटर लिस्ट में है या नहीं, तो नीचे दिए गए आसान स्टेप्स फॉलो करें: Online तरीका Offline तरीका अगर Draft Voter List में नाम नहीं है तो क्या करें? अगर आपका नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं दिख रहा है, तो घबराने की जरूरत नहीं है। चुनाव आयोग ने दावे और आपत्तियों (Claims & Objections) के लिए समय दिया है। जरूरी तारीखें कौन-सा फॉर्म भरें? फॉर्म ऑनलाइन भी भरे जा सकते हैं या फिर BLO के पास जमा किए जा सकते हैं। Draft List क्यों है इतनी अहम? ड्राफ्ट वोटर लिस्ट इसलिए जरूरी है ताकि: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Silver ने तोड़ा रिकॉर्ड, ₹2.45 लाख के ऑल-टाइम हाई पर पहुंची

Silver ने तोड़ा रिकॉर्ड, ₹2.45 लाख के ऑल-टाइम हाई पर पहुंची

देश में कीमती धातुओं की कीमतों ने एक बार फिर नया इतिहास रच दिया है। आज Silver की कीमतों में जोरदार उछाल देखने को मिला और यह ₹2.45 लाख प्रति किलो के ऑल-टाइम हाई स्तर पर पहुंच गई। सिर्फ एक दिन में चांदी ₹7,725 महंगी हो गई, जिससे निवेशकों और बाजार दोनों में हलचल मच गई है। वहीं सोने की कीमतों में भी मजबूती बनी हुई है। आज सोना ₹741 की बढ़त के साथ ₹1.37 लाख प्रति 10 ग्राम के स्तर के करीब पहुंच गया। लगातार बढ़ती कीमतों के कारण आम खरीदारों से लेकर निवेशकों तक सभी की नजर सर्राफा बाजार पर टिकी हुई है। क्यों बढ़ रही हैं सोना-चांदी की कीमतें? बाजार विशेषज्ञों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय बाजार में मजबूती, डॉलर में उतार-चढ़ाव, भू-राजनीतिक तनाव और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के चलते सोना और चांदी दोनों की कीमतों में तेजी देखी जा रही है। इसके अलावा घरेलू बाजार में मांग बढ़ने से भी दाम ऊपर जा रहे हैं। निवेशकों के लिए क्या है संकेत? सोना और चांदी को हमेशा से सुरक्षित निवेश माना जाता रहा है। मौजूदा हालात में कीमतों का यह उछाल संकेत देता है कि आने वाले दिनों में भी सर्राफा बाजार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। ऐसे में निवेश से पहले बाजार की स्थिति को समझना जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Bangladesh Violence 18 दिनों में 6 हिंदुओं की हत्या, सरत चक्रवर्ती केस ने हिलाया देश

बांग्लादेश (Bangladesh) में हिंदू अल्पसंख्यकों की सुरक्षा एक बार फिर सवालों के घेरे में है। नरसिंदी ज़िले के चारसिंदूर बाज़ार में 40 वर्षीय हिंदू किराना दुकानदार सरत चक्रवर्ती मणि की नृशंस हत्या ने पूरे इलाके को हिला कर रख दिया है। यह घटना सिर्फ एक व्यक्ति की मौत नहीं, बल्कि उस डर की तस्वीर है जो आज बांग्लादेश के कई हिंदू परिवारों के मन में बैठ चुका है। दुकान पर हमला, अस्पताल में तोड़ा दम स्थानीय लोगों के मुताबिक, 5 जनवरी की रात सरत चक्रवर्ती अपनी रोज़ की तरह दुकान चला रहे थे। तभी अज्ञात हमलावर धारदार हथियारों के साथ आए और उन पर हमला कर दिया। गंभीर हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन डॉक्टर उनकी जान नहीं बचा सके। सरत को इलाके में एक शांत, मेहनती और किसी से विवाद न रखने वाले व्यक्ति के रूप में जाना जाता था। यही बात उनकी हत्या को और भी चौंकाने वाली बनाती है। 18 दिनों में 6 हिंदुओं की हत्या, चिंता बढ़ी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह कोई अकेली घटना नहीं है। पिछले 18 दिनों में बांग्लादेश में हिंदू समुदाय से जुड़े 6 लोगों की हत्या हो चुकी है। इनमें से दो हत्याएँ सिर्फ 24 घंटों के भीतर अलग-अलग ज़िलों में हुईं, जिनमें नरसिंदी और जशोर शामिल हैं। लगातार हो रही इन घटनाओं ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या बांग्लादेश में अल्पसंख्यक अब खुद को सुरक्षित महसूस कर पा रहे हैं? हिंदू समुदाय में खौफ, बदल रही रोज़मर्रा की ज़िंदगी इन हत्याओं के बाद स्थानीय हिंदू समुदाय में डर साफ़ दिखाई दे रहा है। कई दुकानदार अब जल्दी दुकान बंद कर रहे हैं, कुछ लोग अकेले बाहर निकलने से बच रहे हैं। परिवारों में यह चिंता बढ़ रही है कि अगला नंबर किसका होगा। एक स्थानीय निवासी ने कहा,“हम यहीं पैदा हुए, यहीं पले-बढ़े, लेकिन आज अपने ही देश में डर लग रहा है।” प्रशासन पर सवाल, जवाब की तलाश अब तक कई मामलों में हमलावरों की पहचान नहीं हो पाई है। इससे कानून-व्यवस्था को लेकर चिंता और गहरी हो गई है। लोगों का कहना है कि अगर दोषियों को सख़्त सज़ा नहीं मिली, तो ऐसे अपराध और बढ़ सकते हैं। मानवाधिकार संगठनों की अपील मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इन घटनाओं को गंभीर बताते हुए बांग्लादेश सरकार से अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। उनका कहना है कि सिर्फ बयान नहीं, ज़मीन पर ठोस कार्रवाई ज़रूरी है। Sarat Chakraborty Mani की हत्या एक चेतावनी है। यह बताती है कि धार्मिक अल्पसंख्यकों के बीच असुरक्षा की भावना कितनी गहरी हो चुकी है। अगर समय रहते हालात नहीं संभाले गए, तो इसका असर पूरे समाज की शांति और भरोसे पर पड़ेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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JNU

JNU Protest Viral Umar Khalid Bail Reject के बाद JNU में नारेबाज़ी, देशभर में मचा हंगामा

देश की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) एक बार फिर सुर्खियों में है। वजह है—छात्र नेता उमर ख़ालिद की जमानत याचिका खारिज होने के बाद हुआ विरोध प्रदर्शन, जिसका एक वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेज़ी से वायरल हो रहा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिल्ली दंगों के 2020 मामले में उमर ख़ालिद और शारजील इमाम को जमानत न दिए जाने के फैसले के बाद जेएनयू कैंपस में छात्र संगठनों ने प्रदर्शन किया। इसी दौरान लगाए गए कुछ उग्र और विवादित नारों ने पूरे मामले को राष्ट्रीय बहस में बदल दिया। Viral Video में क्या दिखा? सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में कुछ छात्र समूह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के खिलाफ नारे लगाते हुए नजर आ रहे हैं। इन नारों को लेकर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आई हैं।कई लोगों ने इसे सीमा लांघने वाला विरोध बताया, जबकि कुछ छात्र संगठनों का कहना है कि यह सरकार के फैसलों के खिलाफ आक्रोश की अभिव्यक्ति है। Protest का असली कारण प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना है कि उमर ख़ालिद पिछले कई वर्षों से जेल में हैं और बार-बार जमानत याचिका खारिज होना न्याय व्यवस्था पर सवाल खड़े करता है। छात्रों के अनुसार, यह मुद्दा केवल एक व्यक्ति का नहीं बल्कि असहमति की आवाज़ और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता से जुड़ा हुआ है। Political Reaction तेज़ वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक गलियारों में भी हलचल तेज़ हो गई।सत्तापक्ष से जुड़े नेताओं ने इसे देश विरोधी मानसिकता करार दिया, जबकि विपक्षी नेताओं ने कहा कि सरकार को नारों से ज़्यादा मूल मुद्दों—जैसे न्यायिक प्रक्रिया और छात्रों की समस्याओं—पर ध्यान देना चाहिए। Police और University Administration का रुख अब तक मिली जानकारी के मुताबिक, इस नारेबाज़ी को लेकर कोई आधिकारिक पुलिस शिकायत दर्ज नहीं हुई है, हालांकि वीडियो की जांच की जा रही है।वहीं, जेएनयू प्रशासन ने फिलहाल संयम बरतते हुए किसी सख्त कार्रवाई की घोषणा नहीं की है। Background: क्यों अहम है यह मामला? उमर ख़ालिद पर UAPA के तहत दिल्ली दंगों की साजिश में शामिल होने का आरोप है। वे 2020 से न्यायिक हिरासत में हैं।जेएनयू पहले भी ऐसे कई राजनीतिक आंदोलनों और प्रदर्शनों का गवाह रहा है, जहां छात्रों की आवाज़ अक्सर राष्ट्रीय राजनीति तक पहुंचती रही है। जेएनयू का यह ताज़ा विरोध प्रदर्शन एक बार फिर यह सवाल खड़ा करता है किविरोध की सीमा क्या होनी चाहिए?और अभिव्यक्ति की आज़ादी और कानून-व्यवस्था के बीच संतुलन कैसे बने? आने वाले दिनों में यह साफ होगा कि इस वायरल वीडियो पर प्रशासन और जांच एजेंसियाँ क्या कदम उठाती हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IRCTC

IRCTC Ticket Booking में Aadhaar Linking Rule जनवरी 2026 से मिलेगा Priority Access

भारतीय रेलवे ने जनवरी 2026 से IRCTC टिकट बुकिंग में आधार लिंकिंग को लेकर नया नियम लागू करने की घोषणा की है। इस नियम के तहत आधार से लिंक किए गए यात्रियों को पहले दिन आरक्षण विंडो में प्राथमिकता मिलेगी। नया बदलाव कब से लागू होगा? किस पर लागू होगा? क्यों किया जा रहा है बदलाव? रेलवे का कहना है कि यह कदम एजेंट्स, बॉट्स और टिकट touts के गलत इस्तेमाल को रोकने और सच्चे यात्रियों को आरक्षण में बेहतर अवसर देने के लिए उठाया गया है। स्टेशन काउंटर से बुकिंग पर असर प्राथमिकता का लाभ कैसे उठाएं? इस बदलाव के बाद, रेलवे का लक्ष्य है कि टिकट बुकिंग प्रक्रिया समान और पारदर्शी बने, और genuine यात्रियों को सुविधाजनक अनुभव मिले। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Donald Trump की Venezuela की अंतरिम राष्ट्रपति को खुली धमकी, बोले- बात नहीं मानी तो हालात और बिगड़ेंगे

Donald Trump की Venezuela की अंतरिम राष्ट्रपति को खुली धमकी, बोले- बात नहीं मानी तो हालात और बिगड़ेंगे

अमेरिका के राष्ट्रपति Donald Trump ने एक बार फिर वेनेजुएला को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। ट्रम्प ने वेनेजुएला की अंतरिम राष्ट्रपति को सीधे शब्दों में चेतावनी दी है कि अगर अमेरिका की शर्तें नहीं मानी गईं तो हालात और ज्यादा खराब किए जा सकते हैं। ट्रम्प के इस बयान के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल तेज हो गई है। वेनेजुएला पहले से ही आर्थिक संकट, राजनीतिक अस्थिरता और जनता की परेशानियों से जूझ रहा है। ऐसे में इस तरह की धमकी ने आम लोगों की चिंता और बढ़ा दी है। UNSC में आज इमरजेंसी मीटिंग ट्रम्प के बयान के बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) ने आज आपात बैठक बुलाई है। इस बैठक में वेनेजुएला की मौजूदा स्थिति, अमेरिका के रुख और इससे वैश्विक शांति पर पड़ने वाले असर पर चर्चा होगी। कई देशों ने अमेरिका के इस कड़े रवैये पर सवाल उठाए हैं, जबकि कुछ देश वेनेजुएला में लोकतंत्र बहाली की बात कर रहे हैं। आम जनता सबसे ज्यादा परेशान राजनीतिक टकराव का सीधा असर वेनेजुएला की जनता पर पड़ रहा है। खाने-पीने की कमी, महंगाई और बेरोजगारी से जूझ रहे लोग अब अंतरराष्ट्रीय तनाव से और डरे हुए हैं। लोगों को उम्मीद है कि UNSC की बैठक से कोई सकारात्मक समाधान निकलेगा। दुनिया भर की नजरें अब इस बैठक और आने वाले फैसलों पर टिकी हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi

Delhi दंगा मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला Umar Khalid और Sharjeel Imam को झटका

साल 2020 के Delhi Riots Case से जुड़े बहुचर्चित larger conspiracy matter में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए उमर खालिद (Umar Khalid) और शरजील इमाम (Sharjeel Imam) की जमानत याचिकाएं खारिज कर दी हैं। अदालत ने साफ कहा कि दोनों आरोपियों के खिलाफ लगे आरोप गंभीर हैं और उनकी भूमिका अन्य आरोपियों से अलग मानी जाती है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब यह मामला न सिर्फ कानूनी बल्कि सामाजिक और राजनीतिक बहस का विषय बना हुआ है। सुप्रीम कोर्ट ने क्यों ठुकराई जमानत? सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने कहा कि उमर खालिद और शरजील इमाम पर UAPA (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत आरोप हैं, जिसमें जमानत के नियम बेहद सख्त हैं। अदालत के अनुसार, इस स्तर पर उपलब्ध रिकॉर्ड और आरोपों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता कि मामला कमजोर है या आरोप प्रथम दृष्टया गलत हैं। कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि दोनों की कथित भूमिका “qualitatively different” यानी अन्य सह-आरोपियों की तुलना में ज्यादा गंभीर मानी गई है। क्या है Delhi Riots 2020 का मामला? फरवरी 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों में 50 से ज्यादा लोगों की जान गई थी और सैकड़ों लोग घायल हुए थे। दिल्ली पुलिस ने जांच के बाद दावा किया कि यह हिंसा अचानक नहीं, बल्कि पूर्व नियोजित साजिश के तहत हुई थी। इसी कथित साजिश के तहत उमर खालिद, शरजील इमाम और अन्य लोगों पर दंगे भड़काने, भाषणों और बैठकों के जरिए माहौल तनावपूर्ण बनाने जैसे आरोप लगाए गए। अन्य आरोपियों को मिली राहत जहां एक ओर उमर खालिद और शरजील इमाम को राहत नहीं मिली, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इसी केस में पांच अन्य आरोपियों —गुलफिशा फातिमा, मीरान हैदर, शिफा-उर-रहमान, मोहम्मद सलीम खान और शादाब अहमद — को सशर्त जमानत दे दी। कोर्ट ने कहा कि इन आरोपियों के खिलाफ आरोप और सबूत, मुख्य आरोपियों की तुलना में उतने गंभीर नहीं हैं। पहले भी खारिज हो चुकी हैं याचिकाएं इससे पहले दिल्ली हाईकोर्ट भी उमर खालिद और शरजील इमाम की जमानत याचिकाएं खारिज कर चुका है। दोनों पिछले कई वर्षों से जेल में बंद हैं और ट्रायल अभी भी जारी है, जिसे लेकर देरी के सवाल उठते रहे हैं। फैसले के मायने सुप्रीम कोर्ट का यह निर्णय एक बार फिर यह दिखाता है कि UAPA जैसे कठोर कानूनों में जमानत पाना आसान नहीं है। साथ ही, यह फैसला उन बहसों को भी हवा देता है जो लंबे समय तक बिना दोष सिद्ध हुए हिरासत, नागरिक अधिकारों और राष्ट्रीय सुरक्षा के संतुलन पर होती रही हैं। फिलहाल, उमर खालिद और शरजील इमाम को जेल में ही रहना होगा और आगे की कानूनी लड़ाई निचली अदालत में जारी रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Suryakumar Yadav

T20 Captaincy से हटाए जाने पर Suryakumar Yadav ने तोड़ी चुप्पी, बोले- लगा था Olympics तक रहूंगा Captain

भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार बल्लेबाज सूर्यकुमार यादव (Suryakumar Yadav) ने T20 कप्तानी से हटाए जाने और टीम से बाहर किए जाने के बाद पहली बार खुलकर अपनी बात रखी है। सूर्यकुमार ने बताया कि चयनकर्ताओं के फैसले के बाद वह करीब डेढ़ महीने तक इस सवाल से जूझते रहे कि आखिर ऐसा कैसे हो गया। उन्हें उम्मीद थी कि वह भारतीय टीम की कप्तानी को कम से कम 2028 Olympics और अगले T20 World Cup तक संभालेंगे। सूर्यकुमार यादव का यह बयान ऐसे समय आया है, जब भारतीय टी20 टीम में नेतृत्व को लेकर बड़ा बदलाव देखने को मिला है। उनकी जगह Shreyas Iyer को टीम की कमान सौंपी गई है। Captaincy जाने के बाद क्या बोले Suryakumar Yadav? सूर्यकुमार ने बातचीत में बताया कि टीम से बाहर किए जाने की खबर उनके लिए आसान नहीं थी। उन्होंने कहा कि जब उन्हें पता चला कि उनका नाम टीम में नहीं है, तो उनके मन में सबसे पहला सवाल यही आया कि “ऐसा कैसे हो गया?” उन्होंने बताया कि वह करीब डेढ़ महीने तक इस फैसले के बारे में सोचते रहे। उनके लिए यह इसलिए भी हैरान करने वाला था क्योंकि भारतीय टीम ने उनकी कप्तानी में लगातार शानदार प्रदर्शन किया था। सूर्यकुमार को उम्मीद थी कि वह आने वाले बड़े टूर्नामेंट्स में भी टीम का नेतृत्व करेंगे। लगा था Olympics और T20 World Cup तक Captain रहूंगा सूर्यकुमार यादव ने कहा कि उन्हें लगा था कि वह भारतीय टी20 टीम के साथ लंबे समय तक जुड़े रहेंगे। उनके सामने 2028 Los Angeles Olympics और अगला T20 World Cup जैसे बड़े टूर्नामेंट थे। उन्हें उम्मीद थी कि इन बड़े मुकाबलों तक वह टीम इंडिया के Captain बने रहेंगे। हालांकि, चयनकर्ताओं ने भविष्य की योजनाओं को देखते हुए नेतृत्व में बदलाव करने का फैसला किया। यह फैसला सूर्यकुमार के लिए इसलिए भी चौंकाने वाला था क्योंकि कप्तान के तौर पर उनका रिकॉर्ड काफी मजबूत रहा था। ‘जब सब अच्छा चल रहा था तो बदलाव क्यों?’ सूर्यकुमार यादव की सबसे बड़ी चिंता कप्तानी जाने से ज्यादा इस बात को लेकर थी कि आखिर बदलाव की जरूरत क्यों पड़ी। उन्होंने सवाल उठाया कि जब टीम अच्छा प्रदर्शन कर रही थी और बड़े टूर्नामेंट में सफलता हासिल कर रही थी, तब अचानक कप्तानी में बदलाव क्यों किया गया। सूर्यकुमार ने हालांकि यह भी स्पष्ट किया कि वह चयनकर्ताओं के फैसले का सम्मान करते हैं। उनका मानना है कि चयनकर्ता टीम के भविष्य को ध्यान में रखकर फैसले लेते हैं और उन्हें जो सही लगा, उन्होंने वही किया। Selection Committee ने पहले ही दे दी थी जानकारी सूर्यकुमार ने बताया कि टीम की घोषणा से करीब 2-3 दिन पहले चयनकर्ताओं की ओर से उन्हें फोन आया था। उन्हें जानकारी दी गई थी कि आगे की सीरीज के लिए टीम में उनका नाम नहीं होगा। यह बातचीत उनके लिए निश्चित तौर पर मुश्किल रही होगी, लेकिन उन्होंने फैसले को स्वीकार किया और विवाद खड़ा करने के बजाय अपने क्रिकेट पर ध्यान देने का फैसला किया। Shreyas Iyer की Captaincy से कोई दिक्कत नहीं नए कप्तान Shreyas Iyer को लेकर सूर्यकुमार यादव ने कोई नाराजगी नहीं जताई। उन्होंने श्रेयस को अच्छा खिलाड़ी और अच्छा इंसान बताया। सूर्यकुमार का मानना है कि श्रेयस के पास कप्तानी का अनुभव है और वह टीम को अच्छी तरह संभाल सकते हैं। इसलिए उन्हें श्रेयस के Captain बनाए जाने से कोई व्यक्तिगत समस्या नहीं है। खराब Batting Form भी बनी वजह? सूर्यकुमार यादव को टीम से बाहर किए जाने के पीछे उनकी Batting Form को भी एक महत्वपूर्ण वजह माना जा रहा है। टी20 वर्ल्ड कप के बाद उनका बल्ला उस स्तर पर नहीं चला, जिसके लिए वह जाने जाते हैं। कप्तानी में शानदार प्रदर्शन के बावजूद व्यक्तिगत बल्लेबाजी में लगातार अच्छी लय हासिल नहीं कर पाने का असर उनकी टीम में जगह पर पड़ा। चयनकर्ताओं के सामने अब एक नई T20 टीम तैयार करने की चुनौती भी है। अब Team India में Comeback पर नजर टीम से बाहर होने के बाद सूर्यकुमार यादव के सामने अब सबसे बड़ा लक्ष्य Team India में Comeback करना है। वह जानते हैं कि भारतीय टी20 टीम में वापसी के लिए उन्हें बल्ले से लगातार शानदार प्रदर्शन करना होगा। कप्तानी का अध्याय फिलहाल पीछे छूट चुका है, लेकिन सूर्यकुमार के लिए भारतीय टीम में वापसी का रास्ता अभी बंद नहीं हुआ है। उनका प्रदर्शन ही तय करेगा कि वह दोबारा टीम इंडिया की T20 योजनाओं में जगह बना पाते हैं या नहीं।
Nepal-Tibet

Nepal Disaster: भूस्खलन से बनी झीलों ने बढ़ाई चिंता, 2500 Missing में 320 भारतीय शामिल

 नेपाल (Nepal) और तिब्बत में भारी बाढ़ और भूस्खलन के बाद हालात अभी भी गंभीर बने हुए हैं। आपदा के बाद बनी दो अस्थायी झीलों ने नई चिंता पैदा कर दी है। एक झील से लगातार पानी रिस रहा है, जबकि दूसरी झील में पानी जमा होने के कारण अचानक Flood का खतरा बना हुआ है। इस प्राकृतिक आपदा में करीब 2,500 लोग Missing बताए जा रहे हैं, जिनमें 320 भारतीय नागरिक भी शामिल हैं। Nepal में Landslide के बाद दो झीलों से बढ़ा खतरा भूस्खलन और भारी मलबे के कारण पहाड़ी इलाके में दो अस्थायी झीलें बन गई हैं। इन झीलों को लेकर नेपाली प्रशासन लगातार निगरानी कर रहा है। अधिकारियों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि अगर पानी का दबाव बढ़ा और किसी झील का प्राकृतिक बांध टूट गया तो निचले इलाकों में अचानक तेज बाढ़ आ सकती है। इनमें से एक झील से पानी धीरे-धीरे बाहर निकल रहा है। हालांकि, विशेषज्ञों के मुताबिक पानी का रिसाव होने के बावजूद खतरा पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। दूसरी झील की स्थिति ज्यादा चिंताजनक बताई जा रही है क्योंकि उसमें पानी बढ़ने की आशंका बनी हुई है। 2,482 लोग Missing, 320 भारतीयों की तलाश नेपाल और तिब्बत में आई इस आपदा के बाद 2,482 लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें नेपाल और तिब्बत के नागरिकों के अलावा बड़ी संख्या में भारतीय भी शामिल हैं। रिपोर्टों के अनुसार 320 Indian citizens अभी तक संपर्क से बाहर हैं। भारतीय अधिकारियों की ओर से नेपाली और चीनी प्रशासन के साथ संपर्क कर लापता नागरिकों की जानकारी जुटाने और उन्हें सुरक्षित निकालने के प्रयास किए जा रहे हैं। Death Toll भी बढ़ा बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई इलाकों में भारी तबाही हुई है। अब तक 584 लोगों की मौत की पुष्टि की गई है। कई घर, सड़कें, पुल और अन्य बुनियादी ढांचे क्षतिग्रस्त हुए हैं। दुर्गम पहाड़ी इलाकों में मलबा और खराब सड़क संपर्क राहत एवं बचाव अभियान में बड़ी चुनौती बन रहा है। कई स्थानों पर Communication Network प्रभावित होने के कारण प्रशासन को लापता लोगों की सही जानकारी जुटाने में भी परेशानी हो रही है। Rescue Operation में जुटी टीमें नेपाल में Rescue Operation लगातार जारी है। सुरक्षाबलों और राहत टीमों की मदद से बाढ़ प्रभावित इलाकों में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने का प्रयास किया जा रहा है। हेलीकॉप्टरों के जरिए भी राहत और बचाव अभियान चलाया जा रहा है। हालांकि, लगातार बदलते मौसम, भूस्खलन के खतरे और अस्थिर पहाड़ी इलाकों के कारण बचावकर्मियों के लिए अभियान बेहद चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। भारतीय नागरिकों को लेकर चिंता नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों को लेकर भारत सरकार भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है। अधिकारियों के स्तर पर नेपाल और चीन के साथ Coordination किया जा रहा है। लापता भारतीयों की संख्या 320 तक पहुंचने के बाद उनके परिवारों की चिंता बढ़ गई है। सरकार की प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीय नागरिकों का पता लगाना और उन्हें सुरक्षित भारत वापस लाना है। दूसरी बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं विशेषज्ञों और स्थानीय अधिकारियों की सबसे बड़ी चिंता फिलहाल इन दोनों अस्थायी झीलों को लेकर है। पहली झील से पानी निकलने के बावजूद उसका जलस्तर और आसपास का मलबा खतरा पैदा कर सकता है। वहीं दूसरी झील में पानी बढ़ने की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है। अगर किसी झील का प्राकृतिक बांध अचानक टूटता है तो पानी और मलबे का तेज बहाव निचले इलाकों में Flash Flood की स्थिति पैदा कर सकता है। इसलिए प्रशासन ने नदी घाटियों और संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी है। Nepal Flood 2026: आगे क्या? फिलहाल नेपाल और तिब्बत में राहत एवं बचाव अभियान जारी है। प्रशासन के सामने एक ओर लापता लोगों की तलाश और दूसरी ओर संभावित नई बाढ़ को रोकने की चुनौती है। दोनों झीलों के जलस्तर की Monitoring, प्रभावित इलाकों से लोगों की सुरक्षित Evacuation और लापता भारतीय नागरिकों की तलाश आने वाले दिनों में सबसे बड़ी प्राथमिकताएं रहेंगी। Nepal Flood 2026 Latest Update: भूस्खलन से बनी दोनों झीलों के कारण खतरा अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। करीब 2,500 लोगों के Missing होने और इनमें 320 भारतीय नागरिकों के शामिल होने से इस आपदा का मानवीय संकट और गंभीर हो गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Sugar

Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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