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Supreme Court - कुत्तों में वायरस, बीमारी लाइलाज; बच्चों पर हमले का जिम्मेदार कौन?

Supreme Court – कुत्तों में वायरस, बीमारी लाइलाज; बच्चों पर हमले का जिम्मेदार कौन?

देश में बढ़ते आवारा कुत्तों के हमलों को लेकर Supreme Court ने गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने साफ कहा कि कई कुत्तों में खतरनाक वायरस पाए जा रहे हैं, जिनसे फैलने वाली बीमारियां इलाज से बाहर हो सकती हैं। खासतौर पर बच्चों पर हो रहे हमलों को लेकर कोर्ट ने सख्त सवाल पूछे हैं। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर कोई व्यक्ति सड़क पर रहने वाले कुत्तों को खाना खिला रहा है, तो उसे उनकी जिम्मेदारी भी लेनी चाहिए। कोर्ट ने टिप्पणी की कि ऐसे लोग कुत्तों को अपने घर ले जाएं या फिर उनकी सुरक्षा और निगरानी की पूरी व्यवस्था करें। अदालत ने पूछा,“जब कोई बच्चा आवारा कुत्तों के हमले में घायल होता है या जान गंवाता है, तो इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा?” कोर्ट ने यह भी कहा कि पशु प्रेम अपनी जगह सही है, लेकिन जन सुरक्षा उससे भी ज्यादा जरूरी है। सड़कें सिर्फ कुत्तों की नहीं, बल्कि आम लोगों—खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं—की भी हैं। सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो इस मामले में सख्त दिशा-निर्देश जारी किए जा सकते हैं। साथ ही राज्य सरकारों और नगर निगमों से भी आवारा कुत्तों की संख्या नियंत्रित करने को लेकर जवाब मांगा गया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bangladesh

Bangladesh Hindu Murder बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ती हिंसा डर के साये में जी रहा अल्पसंख्यक समाज

बांग्लादेश (Bangladesh) में अल्पसंख्यक हिंदू समुदाय के लिए बीते कुछ हफ्ते बेहद डरावने रहे हैं। अलग-अलग इलाकों से सामने आ रही हत्या और हमलों की खबरें सिर्फ आंकड़े नहीं हैं—ये उन परिवारों की टूटती ज़िंदगियों की कहानी हैं, जिनके घरों से अचानक किसी अपने की आवाज़ हमेशा के लिए खामोश हो गई। एक और जान गई, एक और घर उजड़ गया हाल में एक युवा हिंदू ऑटो-रिक्शा चालक की हत्या ने पूरे इलाके को हिला दिया। रोज़ की तरह काम करके घर लौट रहा यह युवक अपने परिवार के लिए रोज़ी-रोटी जुटा रहा था। रास्ते में उस पर हमला हुआ, उसे चाकू मारा गया और उसकी जान ले ली गई। उसका वाहन भी लूट लिया गया। यह सिर्फ एक अपराध नहीं, बल्कि उस असुरक्षा का प्रतीक है जिसमें आज कई अल्पसंख्यक परिवार जी रहे हैं। उसके बूढ़े माता-पिता, पत्नी और बच्चों के लिए अब हर सुबह एक सवाल लेकर आती है—“क्या हम सुरक्षित हैं?” यह कोई एक घटना नहीं यह दुखद मामला अकेला नहीं है। हाल के दिनों में बांग्लादेश के अलग-अलग हिस्सों से हिंदू नागरिकों पर हमले, मारपीट और हत्याओं की खबरें सामने आई हैं। कभी किसी दुकानदार पर धारदार हथियार से हमला होता है, कभी किसी युवक को भीड़ घेर लेती है, तो कहीं किसी को सिर्फ उसकी पहचान के कारण निशाना बनाया जाता है। इन घटनाओं की वजहें अलग-अलग बताई जाती हैं—कभी लूट, कभी निजी रंजिश, कभी अफ़वाहें। लेकिन पीड़ित परिवारों के लिए सच्चाई एक ही है: उनके अपने अब लौटकर नहीं आएंगे। डर के साये में जीता एक समुदाय हिंदू मोहल्लों में आज डर साफ महसूस किया जा सकता है। लोग रात में बाहर निकलने से कतराते हैं, दुकानें जल्दी बंद हो जाती हैं और बच्चे भी सहमे रहते हैं। त्योहारों और धार्मिक आयोजनों, जो कभी खुशियों से भरे होते थे, अब सुरक्षा की चिंता के बीच मनाए जाते हैं। स्थानीय समुदायों का कहना है कि उन्हें सिर्फ न्याय ही नहीं, बल्कि भरोसा भी चाहिए—कि कानून सभी के लिए बराबर है और किसी को उसकी आस्था के कारण निशाना नहीं बनाया जाएगा। प्रशासन और प्रतिक्रियाएँ इन घटनाओं पर पुलिस जांच की बात कह रही है और कुछ मामलों में कार्रवाई का दावा भी किया गया है। साथ ही, मानवाधिकार समूहों और अल्पसंख्यक संगठनों ने सरकार से सख़्त कदम उठाने की मांग की है ताकि दोषियों को सज़ा मिले और आगे ऐसी घटनाएं न हों। भारत और दूसरे देशों में भी इन खबरों को लेकर चिंता जताई गई है और बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों की सुरक्षा पर सवाल उठे हैं। क्यों ज़रूरी है यह बात उठाना यह मुद्दा सिर्फ एक देश या एक समुदाय तक सीमित नहीं है। जब कहीं भी किसी इंसान को उसकी पहचान के कारण हिंसा का शिकार होना पड़ता है, तो वह पूरी इंसानियत के लिए एक चेतावनी होती है। बांग्लादेश (Bangladesh) की विविधता उसकी ताकत रही है—हिंदू, मुस्लिम, बौद्ध, ईसाई सभी ने मिलकर इस देश को बनाया है। इस साझी विरासत को बचाने के लिए ज़रूरी है कि नफ़रत और डर की जगह कानून, इंसाफ़ और इंसानियत को आगे रखा जाए। आज Bangladesh के कई हिंदू परिवार अपने घरों में यह दुआ कर रहे हैं कि अगली सुबह शांति के साथ आए। उनकी मांग बहुत साधारण है—जीने का हक़, बिना डर के, बिना भेदभाव के। यह सिर्फ एक समुदाय की नहीं, बल्कि पूरे समाज की परीक्षा है कि वह हिंसा के सामने खड़ा होता है या चुप रहता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Donald Trump

Donald Trump का India Visit अगले 1-2 साल में संभव भारत बनेगा Pax Silica का सदस्य

अमेरिका के नए राजदूत सर्जियो गोर ने आशा जताई है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) अगले एक-दो साल में भारत (India) का दौरा करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ट्रंप के बीच दोस्ताना संबंध द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत करते हैं और यह दौरा भारत-अमेरिका संबंधों को और गहरा कर सकता है। भारत को मिलेगा Pax Silica Group का हिस्सा राजदूत गोर ने यह भी बताया कि भारत को अमेरिकी नेतृत्व वाले Pax Silica समूह में शामिल होने का निमंत्रण मिलेगा। यह समूह सिलिकॉन और सेमीकंडक्टर सप्लाई चेन, महत्वपूर्ण खनिज, एआई और तकनीकी सहयोग के क्षेत्र में रणनीतिक साझेदारी को बढ़ावा देता है।भारत के शामिल होने के बाद यह समूह जापान, दक्षिण कोरिया, यूके और इज़राइल जैसे देशों के साथ मिलकर काम करेगा। औपचारिक घोषणा अगले महीने होने की उम्मीद है। व्यापार वार्ता में नई उम्मीदें गोर ने कहा कि भारत-अमेरिका व्यापार वार्ता (India-US Trade Talks) जल्द ही फिर से शुरू होगी, और 13 जनवरी को नई बातचीत आयोजित होगी। उन्होंने विश्वास जताया कि दोनों देशों के बीच आर्थिक मतभेदों का समाधान निकाला जाएगा।उनके इस बयान से भारतीय शेयर बाजारों में तेजी आई और सेंसेक्स (Sensex) और निफ्टी (Nifty) में सकारात्मक उछाल देखा गया। अमेरिका-भारत रिश्ते: सिर्फ व्यापार तक सीमित नहीं सर्जियो गोर ने यह भी कहा कि भारत-अमेरिका सहयोग केवल व्यापार तक नहीं, बल्कि सुरक्षा, ऊर्जा, तकनीक, आतंकवाद विरोधी प्रयास, शिक्षा और स्वास्थ्य तक फैला है। उन्होंने इसे इस सदी की सबसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय साझेदारी बताया। ट्रंप का भारत दौरा अगले 1-2 साल में संभव है। भारत Pax Silica समूह का हिस्सा बनेगा। व्यापार वार्ता में सुधार और बाजारों में सकारात्मक प्रभाव। द्विपक्षीय सहयोग केवल आर्थिक नहीं, बल्कि तकनीक और सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में भी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Mamata Banerjee

ED vs Mamata Banerjee Supreme Court में I-PAC Raid विवाद पर नया मोड़

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ Enforcement Directorate (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका (Writ Petition) दायर की है। ED का आरोप है कि मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारियों ने I-PAC जांच के दौरान ED अधिकारियों को धमकाया और उनकी जांच में बाधा डाली। याचिका में ED के अधिकारियों निशांत कुमार, विक्रम अहलावत और प्रशांत चंडिला ने कहा है कि जब वे कोलकाता में छानबीन (Search & Seizure) कर रहे थे, तब मुख्यमंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अचानक मौके पर पहुंचे। ED का दावा है कि इस दौरान उनके दस्तावेज, लैपटॉप और मोबाइल फोन जबरन ले लिए गए, जिससे मामले की जांच प्रभावित हुई। ED ने सुप्रीम कोर्ट से अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश देने की मांग की है। साथ ही, ममता बनर्जी और अन्य अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की अपील भी की गई है। मामले की पृष्ठभूमि (Background) यह विवाद I-PAC और कोयला हेराफेरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले से संबंधित है। पहले ED ने इसे कोलकाता हाई कोर्ट में उठाया था, लेकिन सुनवाई स्थगित (Adjourned) कर दी गई। इसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने Supreme Court में Caveat दाखिल किया ताकि कोर्ट किसी भी आदेश से पहले उनकी दलील सुने। राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ (Political Reactions) यह मामला अब Supreme Court में विचाराधीन है और आने वाले दिनों में सुनवाई होने की उम्मीद है। I-PAC raid और ED vs Mamata Banerjee की यह लड़ाई न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि कानूनी और संवैधानिक (Legal & Constitutional) दृष्टि से भी ध्यान आकर्षित कर रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PM Modi

PM Modi in Gujarat सोमनाथ की आस्था और Rajkot का विकास एक साथ

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) का तीन दिन का गुजरात दौरा सिर्फ एक राजनीतिक यात्रा नहीं था, बल्कि यह भारत की आत्मा, उसकी विरासत और भविष्य की दिशा को एक साथ दिखाने वाला सफर बन गया।सोमनाथ के पवित्र तट से लेकर राजकोट के निवेश मंच तक, हर पड़ाव पर भारत के गौरव और विकास की झलक साफ दिखाई दी। Somnath Swabhiman Parv: इतिहास जो आज भी जीवित है गिर सोमनाथ में आयोजित ‘सोमनाथ स्वाभिमान पर्व’ इस यात्रा का सबसे भावनात्मक और ऐतिहासिक हिस्सा रहा।प्रधानमंत्री मोदी ने यहां शौर्य यात्रा का नेतृत्व किया, जिसमें घोड़ों का जुलूस, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और भव्य ड्रोन शो शामिल था। सोमनाथ मंदिर केवल एक तीर्थ नहीं, बल्कि भारत की जिजीविषा का प्रतीक है। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि— सोमनाथ की कहानी हार की नहीं, बल्कि हर बार फिर उठ खड़े होने की कहानी है। उन्होंने याद दिलाया कि कैसे महमूद गजनवी और औरंगजेब जैसे आक्रांताओं के हमलों के बावजूद यह मंदिर बार-बार पुनर्निर्मित हुआ और आज भी उतनी ही मजबूती से खड़ा है।यह संदेश सिर्फ अतीत के लिए नहीं, बल्कि आज के भारत के आत्मविश्वास को भी दर्शाता है। Rajkot में Vibrant Gujarat Regional Conference सोमनाथ से सीधे राजकोट पहुंचकर प्रधानमंत्री मोदी ने Vibrant Gujarat Regional Conference (Kutch–Saurashtra) का उद्घाटन किया।यह मंच गुजरात की निवेश क्षमता, उद्योग और भविष्य की अर्थव्यवस्था को दुनिया के सामने रखने के लिए था। पीएम मोदी (PM Modi) ने बताया कि कच्छ और सौराष्ट्र अब भारत के ग्रीन एनर्जी हब बन रहे हैं।कच्छ में बन रहा 30 GW का हाइब्रिड रिन्यूएबल एनर्जी पार्क दुनिया के सबसे बड़े प्रोजेक्ट्स में से एक होगा। उन्होंने कहा कि गुजरात अब सिर्फ उद्योगों का राज्य नहीं, बल्किग्रीन एनर्जी, मैन्युफैक्चरिंग, MSME और स्टार्टअप्स का नया सेंटर बन चुका है। Investment, Jobs और Youth की नई दिशा राजकोट सम्मेलन में निवेशकों और उद्योगपतियों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा किगुजरात में अब इंटरनेशनल एजुकेशन हब, स्किल यूनिवर्सिटी और डिफेंस लॉजिस्टिक्स ट्रेनिंग पर खास फोकस किया जा रहा है। इसका सीधा फायदा युवाओं को मिलेगा —नौकरियां, स्टार्टअप्स और ग्लोबल लेवल पर काम करने के मौके। India Growth Story में Gujarat की बड़ी भूमिका PM Modi ने कहा कि भारत आज दुनिया की सबसे तेजी से बढ़ती बड़ी अर्थव्यवस्था है और गुजरात इस विकास की रीढ़ बना हुआ है।पोर्ट, इंडस्ट्री, ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर के दम पर गुजरात भारत को Viksit Bharat 2047 की ओर ले जा रहा है। सोमनाथ से राजकोट तक: एक भारत की दो तस्वीरें इस पूरे दौरे में दो भारत एक साथ दिखाई दिए— यही PM Modi की गुजरात यात्रा की असली पहचान रही —जहां विरासत भी है और विज़न भी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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PSLV-C62

ISRO PSLV-C62 Anvesha Mission तीसरे Stage की गड़बड़ी

आज सुबह श्रीहरिकोटा से जब ISRO का PSLV-C62 आसमान में उठा, तो देश की धड़कनें उसके साथ तेज़ हो गईं। यह भारत का 2026 का पहला स्पेस मिशन था और इसके केंद्र में था DRDO का ‘अन्वेषा (EOS-N1)’ सैटेलाइट—एक ऐसा उपग्रह, जिससे देश की अर्थ-अवलोकन और रणनीतिक क्षमताएँ नई ऊँचाई पर पहुँचने वाली थीं। शुरुआत बिलकुल सटीक रही, लेकिन कहानी ने तीसरे चरण में अचानक मोड़ ले लिया। लॉन्च से लेकर उम्मीदों तक PSLV-C62 ने तय समय पर उड़ान भरी और पहले दो चरणों ने योजना के मुताबिक काम किया। मिशन में अन्वेषा के साथ कई सह-यात्री उपग्रह भी थे—भारत और विदेशों के छोटे-बड़े पेलोड, जो विज्ञान, संचार और पृथ्वी अवलोकन से जुड़े अहम काम करने वाले थे। तीसरे स्टेज (PS3) में क्या हुआ? जैसे ही रॉकेट का तीसरा चरण सक्रिय हुआ, फ्लाइट-पाथ में विचलन (deviation) दर्ज किया गया। ISRO ने इसे एक तकनीकी अनोमली बताया और साफ कहा कि उस पल से मिशन का ऑर्बिट-इन्सर्शन प्रभावित हो गया। शुरुआती संकेत यही हैं कि उपग्रहों को उनकी निर्धारित कक्षा में स्थापित नहीं किया जा सका और टेलीमेट्री डेटा का विश्लेषण जारी है। मिशन निदेशक की भाषा में कहें तो “तीसरे चरण के अंत में वाहन के व्यवहार में असामान्यता दिखी”—यही वह पल था जिसने उम्मीदों की उड़ान को थाम लिया। अन्वेषा’ क्यों था इतना खास? अन्वेषा (EOS-N1) को भारत की उन्नत Earth Observation और निगरानी क्षमताओं के लिए बनाया गया है। बेहतर स्पेक्ट्रल इमेजिंग से लेकर तेज़ डेटा-डिलीवरी तक, यह उपग्रह सुरक्षा, आपदा प्रबंधन और संसाधन निगरानी जैसे क्षेत्रों में बड़ा योगदान दे सकता था। इसलिए इस मिशन का भावनात्मक और रणनीतिक महत्व दोनों ही बहुत बड़ा था। झटका, लेकिन हौसला बरकरार PSLV भारत का सबसे भरोसेमंद रॉकेट रहा है। हर असफलता—या आंशिक असफलता—से ISRO ने सीखा है और और भी मज़बूत होकर लौटा है। इस बार भी डेटा-ड्रिवन जांच चल रही है, ताकि तीसरे स्टेज की जड़ तक पहुँचा जा सके और अगला मिशन और सुरक्षित बने। ISRO जल्द ही विस्तृत तकनीकी रिपोर्ट साझा करेगा—क्या प्रेशर में गिरावट आई, थ्रस्ट में असंगति थी या किसी सेंसर ने गलत संकेत दिया? जवाब आएँगे। और उनके साथ आएगा अगला लॉन्च—ज़्यादा सावधानी, ज़्यादा आत्मविश्वास के साथ। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Iran Protest News Hindi

Breaking News: ईरान में महंगाई के खिलाफ रात भर से बेकाबू प्रदर्शन, 100 से ज्यादा शहरों में हिंसा,

ईरान में महंगाई और टैक्स बढ़ोतरी के खिलाफ 13 दिनों से प्रदर्शन जारी है। 100 से ज्यादा शहरों में हिंसा, 45 मौतें, इंटरनेट बंद और ट्रम्प की धमकी से हालात गंभीर। ईरान इस वक्त अपने सबसे बड़े आंतरिक संकट से गुजर रहा है। महंगाई, बेरोजगारी और टैक्स बढ़ोतरी से नाराज़ जनता बीते 13 दिनों से सड़कों पर उतर आई है। हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि प्रदर्शन अब देश के 100 से ज्यादा शहरों तक फैल चुके हैं। कई जगहों पर आगजनी, सड़क जाम और सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाने की खबरें सामने आई हैं। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, गुरुवार रात हालात और ज्यादा तनावपूर्ण हो गए। प्रदर्शनकारियों ने खुले तौर पर सत्ता के खिलाफ नारे लगाए —“खामेनेई को मौत”,“इस्लामिक रिपब्लिक का अंत हुआ” जैसे नारे सड़कों पर गूंजते रहे। कुछ शहरों में लोग ईरान के निर्वासित युवराज क्राउन प्रिंस रेजा पहलवी के समर्थन में भी दिखाई दिए। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि अब बदलाव का समय आ चुका है। हिंसा में 45 मौतें, 8 बच्चे शामिल अमेरिकी मानवाधिकार एजेंसी के अनुसार अब तक हुई हिंसा में 45 लोगों की मौत हो चुकी है, जिनमें 8 मासूम बच्चे भी शामिल हैं। एक पुलिस अधिकारी की चाकू मारकर हत्या किए जाने की भी पुष्टि हुई है। वहीं, 2,270 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने पूरे देश में इंटरनेट और फोन सेवाएं बंद कर दी हैं। तेहरान एयरपोर्ट को भी अस्थायी रूप से बंद किया गया है और सेना को हाई अलर्ट पर रखा गया है। नेटवर्क मॉनिटरिंग संस्था NetBlocks ने इसे बड़े पैमाने पर दमन की तैयारी बताया है। हालांकि कुछ लोग अब भी स्टारलिंक जैसे वैकल्पिक नेटवर्क के जरिए वीडियो और जानकारी बाहर पहुंचा रहे हैं। बाजार बंद, यूनिवर्सिटी कैंपस पर छात्रों का कब्जा तेहरान समेत कई बड़े शहरों में बाजार पूरी तरह बंद रहे। कई यूनिवर्सिटी कैंपस पर छात्रों ने कब्जा कर लिया है और सरकार विरोधी प्रदर्शन तेज कर दिए हैं। युवा वर्ग खासतौर पर इस आंदोलन की अगुवाई कर रहा है। रेजा पहलवी की अपील से भड़की चिंगारी गुरुवार को निर्वासित प्रिंस रेजा पहलवी ने जनता से खुलकर सड़कों पर उतरने की अपील की। वे ईरान के आखिरी शाह मोहम्मद रजा पहलवी के बेटे हैं, जिन्हें 1979 की इस्लामिक क्रांति में सत्ता से हटाया गया था। फिलहाल वे अमेरिका में रहते हैं। रेजा पहलवी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की सराहना करते हुए कहा कि अब दुनिया को ईरानी जनता के समर्थन में खुलकर खड़ा होना चाहिए। ट्रम्प की चेतावनी: “लोगों को मारा गया तो हमला करेंगे” इस बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को कड़ी चेतावनी दी है। ट्रम्प ने कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों पर हिंसा जारी रही तो अमेरिका ईरान पर जवाबी कार्रवाई कर सकता है। उनके बयान ने पश्चिम एशिया की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है। आर्थिक बदहाली बनी असली वजह ईरान में गुस्से की असली जड़ है आर्थिक संकट।दिसंबर 2025 में ईरानी मुद्रा रियाल गिरकर लगभग 1.45 मिलियन प्रति डॉलर पहुंच गई थी — जो अब तक का सबसे निचला स्तर है। सबसे ज्यादा नाराज़गी GenZ और युवा वर्ग में देखने को मिल रही है, जिनके लिए रोजगार और महंगाई दोनों बड़ी चुनौती बन चुके हैं। आगे क्या होगा? ईरान की मौजूदा स्थिति सिर्फ आंतरिक संकट नहीं बल्कि वैश्विक राजनीति पर भी असर डाल सकती है। इंटरनेट बंदी, सेना की तैनाती और अमेरिका की धमकी हालात को और संवेदनशील बना रही है। आने वाले दिन ईरान और पूरी दुनिया के लिए बेहद अहम साबित हो सकते हैं।
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Kolkata

Kolkata ED Raid IPAC Chief Prateek Jain के घर और ऑफिस पर कार्रवाई, ममता बनर्जी ने जताया गुस्सा

Kolkata में आज IPAC (Indian Political Action Committee) के प्रमुख प्रतीक जैन के घर और उनके सॉल्ट लेक स्थित ऑफिस पर Enforcement Directorate (ED) ने छापेमारी की। यह कार्रवाई कथित money laundering और financial irregularities की जांच के तहत की जा रही है। सुबह से ED की टीम दस्तावेजों और रिकॉर्ड की जांच में जुटी हुई है। इस कार्रवाई के दौरान पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी भी现场 पहुंचीं। उन्होंने ED के अधिकारियों से बातचीत की और मीडिया के सामने इसे राजनीतिक targeting करार दिया। ममता ने कहा कि ED केवल IPAC से TMC के अंदरूनी दस्तावेज और sensitive जानकारी हासिल करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताते हुए कहा कि केंद्र की एजेंसियां राज्य की राजनीतिक गतिविधियों में सीधे हस्तक्षेप कर रही हैं। ममता बनर्जी की यह कदम भावनात्मक और साहसिक दोनों नजर आ रहा है। उन्होंने कहा कि TMC और उसके सहयोगियों को दबाव में लाने की यह कोशिश चुनावों से पहले की गई है। दूसरी ओर, BJP नेताओं ने इस मामले को TMC पर आरोप लगाने का मौका बताया। उनका कहना है कि ममता और उनकी पार्टी अनियमितताओं को छिपा रही हैं। बीजेपी ने इसे accountability और governance से जुड़े मुद्दे के रूप में पेश किया। विशेषज्ञों का मानना है कि IPAC जैसी राजनीतिक consultancy कंपनियों की कार्रवाई अक्सर राजनीतिक बहस का विषय बन जाती है। IPAC चुनावी रणनीति और प्रचार अभियान में अहम भूमिका निभाती है, इसलिए उनके financial records पर जांच राजनीति में महत्वपूर्ण असर डाल सकती है। इस ED छापेमारी ने राज्य और केंद्र के बीच बढ़ते राजनीतिक तनाव को और गहरा कर दिया है। आने वाले दिनों में इस मामले से जुड़े कानूनी और राजनीतिक developments पर सभी की नजर बनी रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Delhi Police

Security Alert के बीच Delhi Police की बड़ी कार्रवाई 20 Bangladeshi नागरिक पकड़े गए

राजधानी दिल्ली में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ Delhi Police ने बड़ी कार्रवाई की है। दक्षिण-पूर्वी दिल्ली इलाके में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान 20 बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़ा गया, जो बिना किसी वैध दस्तावेज के भारत में रह रहे थे। खुफिया सूचना के आधार पर हुई कार्रवाई Delhi Police अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई खुफिया इनपुट और सत्यापन अभियान के आधार पर की गई। लंबे समय से कुछ इलाकों में अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों की सूचना मिल रही थी, जिसके बाद दिल्ली पुलिस ने योजनाबद्ध तरीके से यह ऑपरेशन चलाया। जांच के दौरान पकड़े गए सभी 20 लोग पासपोर्ट, वीज़ा या वैध रहने से जुड़े कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं कर सके। SIR से पहले बढ़ी सख्ती बताया जा रहा है कि यह अभियान Special Intelligence Review (SIR) से पहले चलाए जा रहे व्यापक सत्यापन ड्राइव का हिस्सा है। इस दौरान दिल्ली के कई संवेदनशील इलाकों में पुलिस और अन्य एजेंसियां सतर्कता के साथ जांच कर रही हैं। FRRO को सौंपे जाएंगे आरोपी Delhi Police ने सभी हिरासत में लिए गए बांग्लादेशी नागरिकों को आगे की कानूनी प्रक्रिया के लिए Foreigners Regional Registration Office (FRRO) को सौंपने की तैयारी शुरू कर दी है। दस्तावेजों की पुष्टि के बाद Foreigners Act और Immigration Laws के तहत कार्रवाई की जाएगी, जिसमें डिपोर्टेशन की प्रक्रिया भी शामिल है। अवैध घुसपैठ पर जीरो टॉलरेंस पुलिस अधिकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा और कानून-व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों के खिलाफ Zero Tolerance Policy अपनाई गई है। आने वाले दिनों में दिल्ली और एनसीआर के अन्य इलाकों में भी ऐसे अभियान जारी रहेंगे। आम लोगों से सहयोग की अपील दिल्ली पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उनके आसपास कोई व्यक्ति संदिग्ध तरीके से या बिना पहचान के रह रहा हो, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस को दें। पुलिस का कहना है कि आम जनता का सहयोग ऐसे अभियानों को सफल बनाने में अहम भूमिका निभाता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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आवारा कुत्तों पर Supreme Court में सुनवाई, अदालत की तीखी टिप्पणी

आवारा कुत्तों पर Supreme Court में सुनवाई, अदालत की तीखी टिप्पणी

देश में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर Supreme Court में अहम सुनवाई हुई। इस दौरान अदालत में दी गई एक दलील पर जजों ने तीखी और व्यंग्यात्मक टिप्पणी की, जो अब चर्चा का विषय बन गई है। सुनवाई के दौरान एक पक्ष ने तर्क दिया कि अगर सड़कों से आवारा कुत्तों को हटाया गया तो चूहों की संख्या बढ़ सकती है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा, “तो फिर क्या चूहे रोकने के लिए बिल्लियां ले आएं?” अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि ऐसी दलीलों से मूल समस्या का समाधान नहीं निकलता। कोर्ट ने यह भी जताया कि आम लोगों, खासकर बच्चों और बुजुर्गों की सुरक्षा सर्वोपरि है। कई शहरों में कुत्तों के हमलों की बढ़ती घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्थानीय प्रशासन और नगर निगमों से जिम्मेदारी के साथ समाधान निकालने को कहा। कोर्ट ने यह भी संकेत दिया कि केवल बहाने बनाने से काम नहीं चलेगा, बल्कि ठोस और व्यावहारिक कदम उठाने होंगे। इस मामले में अगली सुनवाई में केंद्र और राज्यों से विस्तृत जवाब मांगा गया है। देशभर में आवारा कुत्तों को लेकर चल रही बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी काफी अहम मानी जा रही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Sugar Rate Hike: त्योहारों से पहले चीनी के दाम बढ़े, Blinkit-Swiggy पर खरीदना हुआ Limited

चीनी (Sugar), जो हर घर की रसोई की रोजमर्रा की जरूरत है, इन दिनों लोगों की जेब पर भारी पड़ रही है। पिछले कुछ हफ्तों में चीनी के दाम तेजी से बढ़े हैं। इसी बीच Blinkit, Swiggy Instamart, BigBasket और D-Mart जैसे रिटेल और क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर चीनी की खरीद को लेकर लिमिट लगाई गई है। कई जगहों पर ग्राहक एक बार में 3 से 5 किलो तक ही चीनी खरीद पा रहे हैं। यानी अगर घर में ज्यादा मात्रा में चीनी खरीदने की जरूरत है, तो एक साथ बड़ी खरीदारी करना अब आसान नहीं है। Sugar Price: एक महीने में तेजी से बढ़े दाम Sugar की कीमतों में हालिया तेजी ने आम परिवारों की चिंता बढ़ा दी है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई में चीनी की औसत खुदरा कीमत करीब ₹48 प्रति किलो के आसपास थी, जो अगस्त में बढ़कर ₹55 से ऊपर पहुंच गई। इसके बाद कुछ बाजारों में कीमतें और ऊपर गई हैं। शहर और बाजार के हिसाब से कीमतों में अंतर जरूर है, लेकिन जिस रफ्तार से दाम बढ़े हैं, उसका असर घर के मासिक बजट पर साफ दिखाई दे रहा है। Online Grocery पर क्यों लगाई गई खरीद Limit? Blinkit और Swiggy Instamart जैसे क्विक-कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स पर खरीदारी की लिमिट लगाए जाने के पीछे मुख्य वजह उपलब्ध स्टॉक को संतुलित रखना मानी जा रही है। त्योहारी सीजन में चीनी की मांग अचानक बढ़ जाती है। मिठाइयों से लेकर घर में बनने वाले पकवानों तक, इस दौरान चीनी की खपत सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कंपनियां ज्यादा मात्रा में खरीदारी को रोककर स्टॉक को ज्यादा ग्राहकों तक पहुंचाने की कोशिश कर रही हैं। हालांकि, यह लिमिट हर जगह एक जैसी नहीं है। कुछ स्थानों पर 5 किलो तक की खरीद की अनुमति है, जबकि कुछ जगहों पर इससे कम मात्रा की सीमा दिखाई दे रही है। चीनी महंगी होने की क्या है वजह? चीनी के दाम बढ़ने के पीछे कई कारण सामने आ रहे हैं। घरेलू उत्पादन में कमी, मौसम से जुड़ी परेशानियां, बढ़ती मांग और बाजार में स्टॉक को लेकर गतिविधियां कीमतों पर दबाव बना रही हैं। त्योहारी सीजन भी इस समय एक बड़ा फैक्टर है। रक्षाबंधन के बाद अब आने वाले त्योहारों में मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों की मांग बढ़ने की उम्मीद है। इसका सीधा असर चीनी की खपत पर पड़ सकता है। सरकार ने Duty-Free Sugar Import को दी मंजूरी बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने 10 लाख टन कच्ची चीनी के Duty-Free Import की अनुमति दी है। सरकार का लक्ष्य बाजार में पर्याप्त उपलब्धता बनाए रखना और कीमतों पर दबाव कम करना है। इसके अलावा बड़े थोक खरीदारों के लिए चीनी का स्टॉक रखने की सीमा में भी बदलाव किया गया है। इससे बाजार में जरूरत से ज्यादा चीनी जमा करने की गतिविधियों पर रोक लगाने की कोशिश की जा रही है। आम लोगों के लिए क्या मतलब? फिलहाल इसका सबसे सीधा असर उन परिवारों पर पड़ रहा है, जो महीने का राशन एक साथ खरीदते हैं। जहां दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर खरीद सीमा लागू है, वहां लोगों को जरूरत के हिसाब से छोटी मात्रा में चीनी खरीदनी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, सरकार की ओर से सप्लाई बढ़ाने के कदमों के बाद बाजार में स्थिति सामान्य होने की उम्मीद है। अगर नई चीनी समय पर बाजार में पहुंचती है और त्योहारी मांग के मुताबिक स्टॉक उपलब्ध रहता है, तो कीमतों में आगे राहत मिल सकती है। Sugar Price पर आगे रहेगी नजर चीनी के बढ़ते दाम इस समय सिर्फ घरेलू बजट का मुद्दा नहीं हैं, बल्कि आने वाले त्योहारी सीजन के लिए भी अहम हैं। सरकार, मिलों और रिटेल कंपनियों के फैसलों पर अब बाजार की नजर रहेगी। फिलहाल ग्राहकों के लिए बेहतर यही है कि जरूरत के मुताबिक ही खरीदारी करें और अलग-अलग दुकानों या ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर कीमतों की तुलना कर लें। आने वाले दिनों में सप्लाई की स्थिति साफ होने के साथ चीनी के दाम में भी बदलाव देखने को मिल सकता है।
Gold-Silver

Gold-Silver Price: त्योहार से पहले मिली राहत, सोना-चांदी के दाम में बड़ी गिरावट

Gold-Silver Price Today: रक्षाबंधन की खरीदारी के बीच सोना और चांदी खरीदने वालों के लिए बाजार से राहत वाली खबर आई है। 27 अगस्त 2026 को सोने और चांदी दोनों के भाव में गिरावट दर्ज की गई। 24 कैरेट सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम सस्ता होकर ₹1,58,477 पर आ गया। वहीं, 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 घटकर करीब ₹2,40,168 रह गया। त्योहार से ठीक पहले कीमतों में आई इस कमी से उन लोगों को थोड़ी राहत मिल सकती है, जो राखी के मौके पर बहन या परिवार के लिए सोने-चांदी की ज्वेलरी खरीदने का मन बना रहे हैं। Gold Price Today: सोने के भाव में ₹2,860 की गिरावट 27 अगस्त को 24 कैरेट सोने की कीमत में अच्छी-खासी गिरावट देखने को मिली। IBJA आधारित आंकड़ों के अनुसार, सोना करीब ₹2,860 प्रति 10 ग्राम टूटकर ₹1,58,477 पर पहुंच गया। वहीं, 23 कैरेट सोना करीब ₹1,57,842, 22 कैरेट सोना लगभग ₹1,45,165 और 18 कैरेट सोना करीब ₹1,18,858 प्रति 10 ग्राम के स्तर पर रहा। हालांकि, यहां एक बात ध्यान रखना जरूरी है कि शहर और ज्वेलर के हिसाब से Gold Rate थोड़ा अलग हो सकता है। ज्वेलरी खरीदते समय मेकिंग चार्ज और दूसरे शुल्क भी जुड़ते हैं। Silver Price Today: चांदी भी हुई ₹2,791 सस्ती सोने के साथ चांदी की कीमत में भी गिरावट आई है। 1 किलो चांदी का भाव ₹2,791 कम होकर करीब ₹2,40,168 पर आ गया। चांदी में पिछले दिनों तेजी देखने को मिली थी, इसलिए मौजूदा गिरावट के बावजूद इसका भाव काफी ऊंचे स्तर पर बना हुआ है। त्योहारों और शादी-ब्याह के सीजन में चांदी की मांग बढ़ने से इसकी कीमत पर भी असर पड़ सकता है। Raksha Bandhan से पहले क्यों खास है Gold-Silver Price? रक्षाबंधन के मौके पर लोग सिर्फ राखी और मिठाई ही नहीं खरीदते, बल्कि कई परिवार इस दिन सोने या चांदी की छोटी ज्वेलरी खरीदना भी पसंद करते हैं। ऐसे में त्योहार से एक दिन पहले Gold और Silver के दाम में आई गिरावट खरीदारों के लिए अच्छी खबर मानी जा रही है। अगर आप भी खरीदारी की तैयारी कर रहे हैं तो बाजार में जाने से पहले अपने शहर का ताजा रेट जरूर देख लें। ऑनलाइन दिखने वाला IBJA या बुलियन रेट और ज्वेलरी शॉप का अंतिम बिल एक जैसा होना जरूरी नहीं है। सोना खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान सोने की ज्वेलरी खरीदते समय केवल Gold Rate देखना काफी नहीं है। बिल बनते समय मेकिंग चार्ज, GST और अन्य शुल्क जुड़ सकते हैं। इसलिए खरीदारी से पहले ज्वेलर से पूरी कीमत का ब्रेकअप मांगना बेहतर रहेगा। साथ ही, सोने की शुद्धता के लिए BIS Hallmark जरूर जांचें। इससे आपको खरीदे जा रहे सोने की शुद्धता के बारे में भरोसा मिलता है। आगे क्या हो सकता है Gold और Silver का भाव? सोने और चांदी की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार, डॉलर की चाल, ब्याज दरों की उम्मीद और निवेशकों की खरीदारी जैसे कई फैक्टर कीमती धातुओं के भाव को प्रभावित करते हैं। इसलिए आज आई गिरावट को देखकर यह तय नहीं किया जा सकता कि आने वाले दिनों में कीमतें लगातार नीचे जाएंगी। बाजार की चाल बदलने में ज्यादा समय नहीं लगता। Gold-Silver Price Today का सीधा अपडेट रक्षाबंधन से पहले 24 कैरेट Gold करीब ₹2,860 सस्ता होकर ₹1,58,477 प्रति 10 ग्राम और Silver करीब ₹2,791 गिरकर ₹2,40,168 प्रति किलो पर आ गई है। अगर आप आज सोना या चांदी खरीदने जा रहे हैं, तो अंतिम खरीदारी से पहले अपने स्थानीय बाजार का लेटेस्ट रेट जरूर जांचें।
Raksha Bandhan

Raksha Bandhan 2026: राखी बांधने से पहले जान लें Bhadra का समय, ये है शुभ Muhurat

Raksha Bandhan 2026: भाई-बहन के रिश्ते में प्यार, अपनापन और थोड़ी-सी नोकझोंक हमेशा बनी रहती है। इन्हीं खूबसूरत रिश्तों को सेलिब्रेट करने वाला रक्षाबंधन इस बार 28 अगस्त 2026, शुक्रवार को मनाया जाएगा। राखी को लेकर इस बार एक सवाल काफी लोगों के मन में है—27 अगस्त या 28 अगस्त, आखिर किस दिन भाई की कलाई पर राखी बांधना शुभ रहेगा? पंचांग के अनुसार सावन पूर्णिमा 27 अगस्त की सुबह शुरू होगी और 28 अगस्त की सुबह तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर रक्षाबंधन 28 अगस्त को मनाया जाएगा। Raksha Bandhan 2026 Date: 27 या 28 अगस्त? रक्षाबंधन सावन मास की पूर्णिमा तिथि पर मनाया जाता है। इस साल पूर्णिमा तिथि 27 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे के बाद शुरू होकर 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे तक रहेगी। चूंकि 28 अगस्त को सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए इसी दिन रक्षाबंधन मनाने की परंपरा रहेगी। यानी बहनें 28 अगस्त को भाई की कलाई पर राखी बांध सकती हैं। Rakhi Shubh Muhurat 2026: इस समय बांधें राखी 28 अगस्त को राखी बांधने के लिए सुबह का समय शुभ माना जा रहा है। उपलब्ध पंचांग गणना के अनुसार सुबह करीब 5:57 बजे से 9:48 बजे तक राखी बांधने का समय बताया गया है। हालांकि, शुभ मुहूर्त में शहर के सूर्योदय और स्थानीय पंचांग के अनुसार थोड़ा अंतर हो सकता है। इसलिए अगर आप किसी खास शहर में हैं, तो वहां के पंचांग से समय जरूर मिला लें। Bhadra Kaal: इस बार नहीं होगी बड़ी परेशानी रक्षाबंधन पर भद्रा का विशेष ध्यान रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भद्रा के दौरान राखी बांधना शुभ नहीं माना जाता। यही वजह है कि हर साल राखी बांधने से पहले लोग भद्रा समाप्त होने का इंतजार करते हैं। इस बार राहत की बात यह है कि 28 अगस्त को राखी बांधने के प्रमुख समय में भद्रा का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में बहनों को राखी बांधने के लिए भद्रा खत्म होने का लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। Raksha Bandhan 2026: एक नजर में पूरी जानकारी जानकारी विवरण रक्षाबंधन 28 अगस्त 2026, शुक्रवार पर्व सावन पूर्णिमा पूर्णिमा शुरुआत 27 अगस्त की सुबह पूर्णिमा समाप्त 28 अगस्त की सुबह करीब 9:48 बजे राखी बांधने का शुभ समय सुबह करीब 5:57 से 9:48 बजे तक भद्रा 28 अगस्त के प्रमुख राखी मुहूर्त में नहीं Rakhi बांधने की पूजा विधि रक्षाबंधन के दिन सुबह स्नान करके भगवान का ध्यान करें और पूजा की तैयारी करें। राखी की थाली में रोली या कुमकुम, अक्षत, दीपक, फूल, मिठाई और राखी रखें। भाई को आसन पर बैठाकर पहले तिलक लगाएं। इसके बाद अक्षत लगाकर आरती करें और शुभ मुहूर्त में उसकी कलाई पर राखी बांधें। फिर मिठाई खिलाकर भाई के सुखी और खुशहाल जीवन की कामना करें। भाई भी बहन को प्यार और सम्मान के साथ उपहार देता है और हर परिस्थिति में उसके साथ खड़े रहने का संकल्प करता है। Raksha Bandhan का असली मतलब क्या है? राखी का धागा देखने में भले ही छोटा हो, लेकिन इसके पीछे छिपी भावना बहुत बड़ी है। बचपन में एक-दूसरे से लड़ने वाले भाई-बहन जब बड़े होते हैं तो यही रिश्ता सबसे मजबूत सहारा बन जाता है। रक्षाबंधन इसी भरोसे और अपनापन को फिर से महसूस करने का दिन है। इसलिए इस बार राखी बांधते समय सिर्फ मुहूर्त ही नहीं, बल्कि उस रिश्ते की मिठास को भी याद रखें, जो जिंदगी के हर पड़ाव पर साथ चलती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Kanpur

Kanpur Plane Crash: अचानक नीचे गिरा Training Plane, दो पायलटों की मौत

उत्तर प्रदेश के कानपुर (Kanpur) से गुरुवार को एक बेहद दुखद खबर सामने आई। गंगा बैराज के पास नत्थूपुरवा गांव के नजदीक एक Twin-Engine Training Aircraft खेत में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। विमान में सवार इंस्ट्रक्टर पायलट और ट्रेनी पायलट की मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने इलाके को घेरकर राहत एवं बचाव कार्य शुरू किया। Training Flight के दौरान हुआ हादसा मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक विमान ट्रेनिंग उड़ान पर था और इसी दौरान हादसे का शिकार हो गया। यह चार सीटों वाला ट्विन-इंजन विमान था। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि विमान नीचे गिरने से पहले आसपास के लोगों ने तेज आवाज सुनी थी। हालांकि, उस आवाज की वजह क्या थी, इसे लेकर अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। बताया जा रहा है कि विमान गंगा बैराज के करीब नत्थूपुरवा गांव के पास खुले खेत में गिरा। हादसा आबादी वाले इलाके से कुछ दूरी पर हुआ, जिसके बाद स्थानीय लोगों की भीड़ मौके पर जमा हो गई। हादसे के बाद मची अफरा-तफरी विमान के खेत में गिरने की सूचना मिलते ही पुलिस और इमरजेंसी टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। दुर्घटनाग्रस्त विमान बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया था और उसका मलबा खेत में बिखरा मिला। पुलिस ने घटनास्थल को सुरक्षित किया और दोनों पायलटों को मलबे से बाहर निकालने की कोशिश की, लेकिन उनकी जान नहीं बचाई जा सकी। शुरुआती रिपोर्टों में एक पायलट की मौत और दूसरे के गंभीर रूप से घायल होने की जानकारी सामने आई थी। बाद में पुलिस अधिकारियों के हवाले से दोनों पायलटों की मौत की पुष्टि हुई। Crash की असली वजह अभी सामने नहीं आई कानपुर Plane Crash की वजह फिलहाल साफ नहीं है। शुरुआती स्तर पर विमान के अचानक नियंत्रण खोने और नीचे गिरने की बात सामने आई है, लेकिन तकनीकी खराबी, इंजन से जुड़ी समस्या या किसी अन्य कारण की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। अधिकारियों की ओर से दुर्घटना की परिस्थितियों की जांच की जा रही है। विमान के मलबे, उड़ान से जुड़ी जानकारी और घटनास्थल से मिले सबूतों की जांच के बाद ही Crash की वास्तविक वजह सामने आ सकेगी। Aviation Safety पर फिर उठे सवाल कानपुर में हुआ यह हादसा Flight Training के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर भी सवाल खड़े करता है। हालांकि, अभी किसी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि हादसा किस वजह से हुआ और क्या इसके पीछे कोई तकनीकी या संचालन संबंधी कारण था। फिलहाल प्रशासन की टीमें घटनास्थल पर मौजूद हैं और मामले की जांच आगे बढ़ाई जा रही है। कानपुर विमान हादसे से जुड़ी नई जानकारी जांच एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी। Kanpur Plane Crash Latest Update: गंगा बैराज के पास Training Aircraft के क्रैश होने से दो पायलटों की मौत ने इलाके में शोक का माहौल पैदा कर दिया है। हादसे की पूरी तस्वीर जांच के बाद ही साफ होगी।
Share Market

Share Market Today: Sensex 77,250 के करीब, Nifty भी टूटा; जानें बाजार में क्यों आई गिरावट

भारतीय शेयर बाजार (Indian Share Market) में गुरुवार, 27 अगस्त को कारोबार के दौरान उतार-चढ़ाव देखने को मिला। शुरुआती कारोबार में Sensex और Nifty बढ़त के साथ खुले, लेकिन कुछ ही देर बाद बाजार की चाल बदल गई। बिकवाली बढ़ने से दोनों प्रमुख इंडेक्स लाल निशान में पहुंच गए। सुबह 10:30 बजे Sensex 123.89 अंक की गिरावट के साथ 77,349.05 पर था, जबकि Nifty 24.60 अंक टूटकर 24,183.15 पर कारोबार कर रहा था। Sensex-Nifty पर बढ़ा दबाव गुरुवार की शुरुआत बाजार के लिए सकारात्मक रही। Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से निवेशकों को कुछ राहत मिली, लेकिन यह बढ़त ज्यादा देर टिक नहीं पाई। Nifty 24,200 के स्तर के नीचे चला गया, वहीं Sensex भी शुरुआती बढ़त गंवाकर कमजोर हो गया। इससे पहले सुबह 10:13 बजे Reuters के आंकड़ों में Sensex 77,379.50 और Nifty 24,191.85 पर था। यानी उस समय दोनों इंडेक्स में हल्की गिरावट दर्ज की जा रही थी। FMCG और Media Shares में बिकवाली सेक्टोरल कारोबार की बात करें तो FMCG शेयरों पर दबाव नजर आया। शुरुआती कारोबार में Nifty FMCG इंडेक्स भी लाल निशान में था। इसके साथ ही Media शेयरों में भी कमजोरी देखने को मिली। सुबह 10:30 बजे Nifty Media करीब 0.60 फीसदी नीचे 1,601.30 पर कारोबार कर रहा था। Media इंडेक्स इससे पहले लगातार दो कारोबारी सत्रों में बढ़त दर्ज कर चुका था। ऐसे में आज की गिरावट को कुछ हद तक मुनाफावसूली से भी जोड़कर देखा जा रहा है। HDFC Bank बना बाजार पर दबाव का बड़ा कारण आज बाजार में HDFC Bank का प्रदर्शन भी निवेशकों के रडार पर रहा। शेयर में करीब 1 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। Reuters के मुताबिक, अमेरिका में बैंक और उसके दो वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ दायर एक securities lawsuit की खबर के बाद शेयर पर दबाव बढ़ा। Upstox के अनुसार, HDFC Bank में बिकवाली के चलते Sensex दिन के ऊपरी स्तर से करीब 300 अंक नीचे आया, जबकि Nifty 24,200 के महत्वपूर्ण स्तर के नीचे फिसल गया। Global Market से मिले-जुले संकेत भारतीय बाजार को एक तरफ Nvidia के मजबूत नतीजों और कच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सहारा मिला। Brent crude करीब 87.4 डॉलर प्रति बैरल तक आ गया था। ईरान और ओमान के बीच Strait of Hormuz को लेकर बातचीत आगे बढ़ने की खबरों से तेल आपूर्ति को लेकर चिंता कुछ कम हुई है। दूसरी ओर, अमेरिकी महंगाई के आंकड़ों को लेकर बनी चिंता ने निवेशकों को थोड़ा सतर्क रखा। यही वजह रही कि एशियाई बाजारों में मजबूती के बावजूद भारतीय बाजार में तेजी टिक नहीं सकी। निवेशकों की नजर अब बाजार की अगली चाल पर फिलहाल घरेलू बाजार में तस्वीर पूरी तरह साफ नहीं है। एक तरफ कच्चे तेल में नरमी और मजबूत ग्लोबल टेक्नोलॉजी संकेत सकारात्मक हैं, तो दूसरी तरफ HDFC Bank जैसे बड़े शेयरों में कमजोरी और सेक्टोरल बिकवाली बाजार पर दबाव बना रही है। ऐसे माहौल में Sensex और Nifty की आगे की दिशा, 24,200 के आसपास Nifty की चाल और प्रमुख सेक्टर्स में खरीदारी-बिकवाली पर निवेशकों की नजर रहेगी। बाजार में उतार-चढ़ाव को देखते हुए किसी भी निवेश निर्णय से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय लेना बेहतर है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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