पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और राज्य पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ Enforcement Directorate (ED) ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका (Writ Petition) दायर की है। ED का आरोप है कि मुख्यमंत्री और पुलिस अधिकारियों ने I-PAC जांच के दौरान ED अधिकारियों को धमकाया और उनकी जांच में बाधा डाली।
याचिका में ED के अधिकारियों निशांत कुमार, विक्रम अहलावत और प्रशांत चंडिला ने कहा है कि जब वे कोलकाता में छानबीन (Search & Seizure) कर रहे थे, तब मुख्यमंत्री और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी अचानक मौके पर पहुंचे। ED का दावा है कि इस दौरान उनके दस्तावेज, लैपटॉप और मोबाइल फोन जबरन ले लिए गए, जिससे मामले की जांच प्रभावित हुई।
ED ने सुप्रीम कोर्ट से अधिकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और स्वतंत्र जांच कराने के निर्देश देने की मांग की है। साथ ही, ममता बनर्जी और अन्य अधिकारियों के खिलाफ FIR दर्ज करने की अपील भी की गई है।
मामले की पृष्ठभूमि (Background)
यह विवाद I-PAC और कोयला हेराफेरी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले से संबंधित है। पहले ED ने इसे कोलकाता हाई कोर्ट में उठाया था, लेकिन सुनवाई स्थगित (Adjourned) कर दी गई। इसके बाद पश्चिम बंगाल सरकार ने Supreme Court में Caveat दाखिल किया ताकि कोर्ट किसी भी आदेश से पहले उनकी दलील सुने।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएँ (Political Reactions)
- ममता बनर्जी (Mamata Banerjee) और TMC का कहना है कि ED की कार्रवाई राजनीतिक रूप से प्रेरित है। पार्टी ने आरोप लगाया कि एजेंसी ने राजनीतिक रूप से संवेदनशील डेटा मांगने की कोशिश की।
- विपक्षी नेता कहते हैं कि जांच में हस्तक्षेप चिंताजनक है और केंद्र व राज्य की शक्तियों पर बहस ज़रूरी है।
यह मामला अब Supreme Court में विचाराधीन है और आने वाले दिनों में सुनवाई होने की उम्मीद है। I-PAC raid और ED vs Mamata Banerjee की यह लड़ाई न केवल राजनीतिक दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि कानूनी और संवैधानिक (Legal & Constitutional) दृष्टि से भी ध्यान आकर्षित कर रही है।
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