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CM Mohan Yadav

Fake News Alert: मंदसौर में CM मोहन यादव के हॉट एयर बैलून पर लगी आग की खबर झूठी, कलेक्टर ने किया खंडन

मंदसौर (देश हरपल)। मध्य प्रदेश के मंदसौर जिले से जुड़ी एक बड़ी अफ़वाह पर प्रशासन ने स्पष्टिकरण जारी किया है। सोशल मीडिया और कुछ माध्यमों में यह खबर चलाई जा रही थी कि मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के Hot Air Balloon में आग लग गई। इस मामले में मंदसौर कलेक्टर अदिति गर्ग ने बयान जारी कर कहा कि यह खबर पूरी तरह भ्रामक और झूठी है। कलेक्टर ने साफ कहा कि मुख्यमंत्री मोहन यादव केवल हॉट एयर बैलून को देखने गए थे, उड़ान पर सवार नहीं हुए थे। पूरी प्रक्रिया के दौरान सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन किया गया। क्या कहा कलेक्टर अदिति गर्ग ने? कलेक्टर ने बताया कि – Fake News का सच क्या है? दरअसल, कुछ सोशल मीडिया पेजों और चैनलों ने यह दावा कर दिया था कि CM Mohan Yadav के Hot Air Balloon में आग लग गई। लेकिन प्रशासन ने तुरंत खंडन कर इस अफवाह पर विराम लगाया। नागरिकों से अपील प्रशासन ने आम लोगों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया पर वायरल हो रही झूठी खबरों पर यकीन न करें। सटीक और विश्वसनीय जानकारी के लिए लोग देश हरपल की आधिकारिक वेबसाइट या प्रशासन की प्रेस विज्ञप्तियों को ही देखें। सीएम का दौरा बिना किसी परेशानी के संपन्न सुरक्षा कारणों से CM Mohan Yadav की उड़ान रद्द करनी पड़ी, लेकिन उनका दौरा बिना किसी और परेशानी के पूरा हुआ। प्रशासन ने सुनिश्चित किया कि सभी सुरक्षा प्रोटोकॉल (Safety Protocols) का पालन किया गया। दर्शकों और मीडिया में बनी चर्चा यह घटना दर्शकों और मीडिया में चर्चा का विषय बनी, लेकिन प्रशासन और सुरक्षा अधिकारियों की तत्परता ने किसी भी गंभीर स्थिति को टाल दिया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhopal

Bhopal Illegal Government Land पर अवैध कब्जा 57 खसरे की जमीन की जांच

Bhopal शहर के अनंतपुरा और कानासैया क्षेत्रों में सरकारी जमीन पर बड़े पैमाने पर कब्जे का मामला सामने आया है। प्रशासन की जांच में पता चला कि कुल 57 खसरे की लगभग 18 एकड़ भूमि पर अनधिकृत कॉलोनी बनाई गई है। इस मामले में कुछ मछली परिवार के सदस्यों का नाम भी सामने आया है। प्रशासन की सख्त कार्रवाई स्थानीय प्रशासन ने इस मामले में सख्त कार्रवाई करने का निर्णय लिया है। अधिकारियों ने कहा कि अवैध कब्जे के आरोपियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू की जाएगी और कब्जे की गई जमीन को सरकारी नियंत्रण में वापस लाया जाएगा। Bhopal में पहले भी सामने आए मामले Bhopal में पहले भी Government Land Occupation के कई मामले सामने आ चुके हैं। प्रशासन ने समय-समय पर कार्रवाई की है, ताकि शहर की सरकारी संपत्ति की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। नागरिकों से अपील अधिकारियों ने नागरिकों से अपील की है कि यदि उन्हें किसी भी illegal land occupation की जानकारी हो, तो तुरंत नगर निगम या तहसील कार्यालय को सूचित करें। इससे प्रशासन को कार्रवाई में आसानी होगी और कानून के उल्लंघन पर रोक लगेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhopal

Bhopal Road Accident तेज रफ्तार कार ट्रक से टकराई

Bhopal Car Accident: तेज रफ्तार वाहन Collision में मौतें Bhopal और आसपास के क्षेत्रों में सड़क हादसों (Road Accidents) की घटनाएं लगातार बढ़ रही हैं। तेज रफ्तार वाहनों के कारण कई लोगों की जान जा चुकी है और कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। वीआईपी रोड पर दर्दनाक हादसा आज सुबह करीब 5 बजे Bhopal के वीआईपी रोड पर एक काले रंग की तेज रफ्तार कार पीछे से ट्रक में टकरा गई। हादसे के बाद कार चालक को बाहर निकाला गया, लेकिन गंभीर चोटों के कारण मौके पर ही उसकी मौत हो गई। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजकर मामले की जांच शुरू कर दी है। रायसेन और सुखी सेवनिया में अन्य हादसे रायसेन जिले में एक कार पुल के किनारे लगे कंक्रीट संरचना (culvert) से टकरा गई, जिसमें दो लोगों की मौत और दो लोग घायल हुए।सुखी सेवनिया क्षेत्र के बालामापुर घाट में भी एक ट्रक Collision के कारण एक व्यक्ति की मौत हुई। वहीं, एक बाइक और पार्क किए गए ट्रक के बीच हुई टक्कर में भी एक अन्य व्यक्ति की जान चली गई। स्थानीय लोगों और अधिकारियों की प्रतिक्रिया स्थानीय लोग सड़क सुरक्षा और तेज रफ्तार वाहन नियंत्रण की सख्त आवश्यकता पर जोर दे रहे हैं। पुलिस ने घटनास्थल पर सुरक्षा बढ़ाई है और जांच जारी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhopal

Exam Stress का असर Bhopal Carmel School में छात्रा ने लगाई Jump, अस्पताल में भर्ती

भोपाल में बड़ा हादसा मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल (Bhopal) के मशहूर Carmel Convent School से चौंकाने वाला मामला सामने आया है। कक्षा 10वीं की एक छात्रा ने अचानक स्कूल की बिल्डिंग से छलांग लगा दी। घटना स्कूल के CCTV कैमरे में कैद हो गई और अब सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। छात्रा की हालत गंभीर नहीं छात्रा के छलांग लगाने के बाद स्कूल स्टाफ ने तुरंत उसे अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने जांच के बाद बताया कि उसके हाथ और पैर में फ्रैक्चर हुआ है, लेकिन खतरे से बाहर है। छात्रा फिलहाल इलाज के अधीन है और उसकी स्थिति स्थिर बताई जा रही है। CCTV फुटेज में पूरा सच CCTV फुटेज के मुताबिक, छात्रा अचानक क्लास से बाहर निकली और सीधे ऊपरी मंजिल से कूद गई। यह सब कुछ चंद सेकंड में हुआ जिससे वहां मौजूद लोग कुछ कर ही नहीं पाए। क्यों लगाई छात्रा ने छलांग? प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि छात्रा Exam Pressure और Stress के चलते मानसिक रूप से परेशान थी। पुलिस और स्कूल प्रबंधन इस मामले की गहराई से जांच कर रहे हैं। परिजनों से भी पूछताछ की जा रही है ताकि असली वजह सामने आ सके। स्कूल और प्रशासन की प्रतिक्रिया स्कूल मैनेजमेंट का कहना है कि छात्रा को तुरंत मेडिकल मदद दी गई और उसकी हर ज़रूरत का ख्याल रखा जा रहा है। वहीं, पुलिस ने कहा कि CCTV फुटेज की जांच की जा रही है और छात्रा व उसके परिवार से पूछताछ के बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhopal

Bhopal Aishbagh ROB Update CM Mohan Yadav बोले – सुधार के बाद ही होगा Inauguration

Bhopal शहर में पहली बार बने Aishbagh Railway Over Bridge (ROB) को लेकर जमकर चर्चा हो रही है। लगभग 18 करोड़ रुपये की लागत से बने इस पुल की लंबाई 648 मीटर और चौड़ाई 8 मीटर है। इसे पुरानी रेलवे क्रॉसिंग से राहत दिलाने के लिए बनाया गया, लेकिन इसका 90 डिग्री का तीखा मोड़ अब विवाद का कारण बन गया है। क्यों है Aishbagh ROB Controversial? इस पुल पर वाहन चालकों को अचानक तीखा मोड़ लेना पड़ता है, जिससे road accidents का खतरा बढ़ सकता है। यही वजह है कि सोशल मीडिया पर लोग इसे “Engineering Marvel” और “Design Disaster” दोनों तरह से टैग कर रहे हैं। Railway की Warning अनसुनी! अप्रैल 2024 में ही Indian Railways ने PWD (लोक निर्माण विभाग) को चेतावनी दी थी कि यह डिज़ाइन “कार्यक्षम नहीं” है और इससे इंजीनियरों की छवि खराब हो सकती है। इसके बावजूद ROB को इसी स्ट्रक्चर में बना दिया गया। सरकार और PWD की सफाई विवाद के बाद PWD ने कहा कि – CM Mohan Yadav का बयान मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने साफ कहा कि जब तक तकनीकी खामी दूर नहीं होगी, तब तक Aishbagh ROB का Inauguration नहीं किया जाएगा। साथ ही, दोषी इंजीनियरों और अधिकारियों पर कार्रवाई के भी संकेत दिए। Public Reaction हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhopal Metro

Bhopal Metro Launch 2025 अक्टूबर से शुरू होगी Subhash Nagar-AIIMS Metro सुविधा

भोपाल के नागरिकों के लिए खुशखबरी है। Bhopal Metro (Bhoj Metro) की सेवाएँ अब अक्टूबर 2025 से शुरू होने की संभावना है। पहले चरण में सुबाश नगर से AIIMS तक की लाइन चालू होगी, जो लगभग 7.5 किलोमीटर लंबी है। CMRS (Commissioner of Metro Rail Safety) द्वारा सुरक्षा निरीक्षण पूरा होने के बाद ही यह सेवा जनता के लिए शुरू होगी। प्राथमिक कॉरिडोर और टाइमलाइन Phase 1 और Blue Line अपडेट भोपाल शहर में इन्फ्रास्ट्रक्चर और सुविधा Bhopal Metro न केवल शहर के यातायात को तेज करेगी बल्कि शहरी विकास और नागरिक सुविधाओं में भी सुधार लाएगी। मेट्रो सेवाओं के साथ सड़क, जल आपूर्ति और अन्य शहरी परियोजनाएँ भी प्रगति पर हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Vedic Clock

Bhopal में लगी Vikramaditya Vedic Clock वैदिक Time System और Modern Technology का संगम

Bhopal में सोमवार (1 सितंबर 2025) को मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने नए आवास के प्रवेश द्वार पर लगी अनोखी Vikramaditya Vedic Clock (विक्रमादित्य वैदिक घड़ी) का शुभारंभ किया। इस खास मौके पर उन्होंने Vedic Clock App भी लॉन्च किया, जिसमें पंचांग और समय से जुड़ी पूरी जानकारी उपलब्ध होगी। क्या है Vikramaditya Vedic Clock? Vedic Clock App की खासियत मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर मोबाइल एप्लिकेशन भी लॉन्च किया। इसमें यूज़र्स को मिलेंगे: युवाओं का “India’s Time – Earth’s Time” मार्च लोकार्पण कार्यक्रम से पहले युवाओं ने “India’s Time – Earth’s Time” थीम पर मार्च निकाला। यह यात्रा शौर्य स्मारक से सीएम हाउस तक पहुंची, जो परंपरा और आधुनिकता के संगम का प्रतीक बनी। किसने बनाई यह घड़ी? यह घड़ी Aarohan Institute, Lucknow के इंजीनियर अरोहन श्रीवास्तव और उनकी टीम ने तैयार की है। इसमें Dongla Observatory की गणनाओं और Maharaja Vikramaditya Research Institute का सहयोग लिया गया। पहले Ujjain में भी लगी थी Vedic Clock याद दिला दें कि 29 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उज्जैन के Jantar Mantar पर पहली वैदिक घड़ी का शुभारंभ किया था। भोपाल सीएम हाउस पर लगी घड़ी उसी परियोजना का दूसरा चरण है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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OBC

Madhya Pradesh OBC आरक्षण 27% को लेकर CM Mohan Yadav का बड़ा कदम

मध्यप्रदेश में लंबे समय से चल रहा OBC Reservation (ओबीसी आरक्षण) विवाद अब निर्णायक मोड़ पर पहुँच गया है। मुख्यमंत्री Mohan Yadav ने गुरुवार (28 अगस्त 2025) को सीएम हाउस में सर्वदलीय बैठक बुलाई, जिसमें बीजेपी, कांग्रेस, आप, बसपा, सपा, CPI और अन्य दलों के नेता शामिल हुए। 27% OBC Quota पर सर्वसम्मति बैठक में सभी दलों ने यह ठोस प्रस्ताव पारित किया कि ओबीसी समाज को पूरा 27% आरक्षण मिलना चाहिए। फिलहाल प्रदेश में केवल 14% आरक्षण लागू है, जबकि 2019 में कमलनाथ सरकार ने 27% कोटा तय किया था, लेकिन वह अदालत में अटका रहा। सीएम मोहन यादव ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट 22 सितंबर 2025 से इस मामले पर रोज़ाना सुनवाई (Daily Hearing) करेगा। इसलिए सभी राजनीतिक दलों और उनके वकीलों को मिलकर एक मजबूत कानूनी रणनीति बनानी होगी ताकि अदालत में सरकार का पक्ष मज़बूत रहे। सुप्रीम कोर्ट की सख्ती जून 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार से पूछा था कि अब तक 27% आरक्षण लागू क्यों नहीं किया गया। कोर्ट ने साफ कर दिया था कि इसके रास्ते में कोई कानूनी रुकावट नहीं है। इसी दबाव के चलते अब सरकार और विपक्ष एक साथ खड़े दिखाई दे रहे हैं। सरकार की तैयारी Political Significance (राजनीतिक महत्व) यह सर्वदलीय सहमति मध्यप्रदेश की राजनीति में Rare Unity (दुर्लभ एकता) का उदाहरण है। जहां आमतौर पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने रहते हैं, वहीं इस बार सामाजिक न्याय और OBC अधिकारों के मुद्दे पर सब एक मंच पर आए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मुख्यमंत्री डॉ. यादव

हर काल और हर युग में रही है उज्जैन की गौरव गाथा मुख्यमंत्री डॉ. यादव

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने उज्जैन में 79.27 करोड़ के विकास कार्यो का किया भूमि-पूजन25 करोड़ रूपये से अधिक की लागत से रीगल टॉकीज का होगा उन्नयन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि देश की सात पवित्र नगरियों में अवंतिका (उज्जैन) भी शामिल है। यहां राजा विक्रमादित्य, महाकवि कालिदास, सम्राट अशोक, चंद्र प्रद्योत के नाम अजर-अमर हो चुके हैं। हमारे पास राष्ट्र वीर दुर्गादास राठौर की ऐतिहासिक विरासत भी है। आज उनकी छत्री के जीर्णोद्धार के लिए भूमिपूजन किया गया है। हर काल और युग में उज्जैन की गौरवशाली गाथा रही है। हम एक नये दौर में प्रवेश कर रहे है। उज्जैन गोपाल मंदिर क्षेत्र स्थित रीगल टॉकीज का इतिहास बहुत गौरवशाली रहा है। यहां भगवान श्री महाकालेश्वर की सवारी निकलती है, सिंहस्थ के दौरान यहां से पेशवाई निकलती है और यह स्थान हरि और हर के मिलन का साक्षी भी होता है। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने बुधवार को उज्जैन में गोपाल मंदिर छत्री चौक स्थित कार्यक्रम में 79.27 करोड़ रूपये लागत के विभिन्न विकास कार्यों का भूमिपूजन किया। इनमें 25.15 करोड़ रूपये की लागत से रीगल टॉकीज के विकास कार्य, आगामी सिंहस्थ महापर्व के अंतर्गत 22.30 करोड़ रूपये की लागत से गदा पुलिया से रविशंकर नगर, जयसिंह पुरा होते हुए लालपुल ब्रिज तक मार्ग चौड़ीकरण कार्य और 31.83 करोड़ रूपये की लागत से गाड़ी अड्डा चौराहे से वी.डी क्लाथ मार्केट, निकास चौराहा, खजूर वाली मस्जिद, के.डी. गेट मार्ग वाया जूना सोमवारिया से बड़ी पुलिया तक मार्ग चौड़ीकरण कार्य का भूमिपूजन किया गया है। कार्यक्रम में रीगल टॉकीज के उन्नयन पर आधारित लघु फिल्प का प्रसारण भी किया गया। रीगल टॉकीज का निर्माण कार्य 36 हजार स्क्वेयर फीट क्षेत्र में किया जाएगा।       मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि उज्जैन शहर का हर काल में विशेष महत्व रहा है। आगामी सिंहस्थ-2028 को ध्यान में रखते हुए विकास के कार्य निरंतर किये जा रहे हैं। आज उज्जैन को कुल 107 करोड़ रूपये के विकास कार्यों की सौगात मिली है। आगामी सिंहस्थ महापर्व में स्नान क्षिप्रा नदी के जल से ही होगा। सेवरखेडी – सिलारखेड़ी परियोजना से क्षिप्रा नदी में पूरे वर्ष जल रहेगा, क्षिप्रा सदैव प्रवहमान रहेगी। सिंहस्थ में सुगम आवागमन को ध्यान में रखते हुए शीघ्र ही उज्जैन को नई 4 लेन सड़क की सौगात मिलने वाली है। साथ ही लगभग 10 हजार करोड़ की लागत से नई मेट्रो लाइन उज्जैन से इंदौर और पीथमपुर को कनेक्ट करेगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि विक्रम उद्योगपुरी में इंडस्ट्रियल सैट अप किया गया है और यहां से हम विश्व स्तरीय उत्पाद बनाकर विश्व के कई देशों को सप्लाई कर रहे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की लखपति दीदी योजना ने बहनों का सशक्तिकरण किया है। प्रधानमंत्री श्री मोदी से प्रेरणा लेकर बहनों के सशक्तिकरण के लिए प्रदेश सरकार ने लाड़ली बहना योजना शुरू की है, जिसमें बहनों को अभी 1250 रुपए की राशि दी जा रही है। जल्दी ही बहनों को प्रतिमाह 1500 रुपए की राशि दी जाएगी। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि राज्य सरकार ने माताओं-बहनों को स्थानीय निकाय चुनावों में 33 प्रतिशत आरक्षण दिया है। अब ओबीसी वर्ग को 27 प्रतिशत आरक्षण देना चाहते हैं। सरकार हर वर्ग के विकास के लिए कार्य कर रही है। अब प्रदेश में सरकारी और निजी मिलाकर कुल 32 मैडिकल कॉलेज हो जाएंगे। वर्ष 2002-03 के बाद मध्यप्रदेश में सिंचाई का रकबा तेजी से बढ़ रहा है। पिछले डेढ़ साल में 7.5 लाख हेक्टेयर सिंचाई रकबा बढ़ा है।                                                       कार्यक्रम में विधायक श्री अनिल जैन कालूहेडा, महापौर श्री मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, श्री संजय अग्रवाल, श्री कैलाश प्रजापत, गणमान्य नागरिक मौजूद थे। आभार प्रर्दशन एमआईसी सदस्य श्री शिवेंद्र तिवारी ने किया। मुख्यमंत्री और केन्द्रीय मंत्री ने 52 करोड़ के विकास कार्यों का किया भूमिपूजन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने उज्जैन में एक अन्य कार्यक्रम में 52 करोड़ 69 लाख रुपए से अधिक की लागत से राष्ट्र वीर दुर्गादास छत्री के संरक्षण संवर्धन एवं विभिन्न विकास कार्यों का भूमि पूजन किया। मध्य प्रदेश शासन संस्कृति विभाग के अंतर्गत संचालनालय पुरातत्व अभिलेखागार एवं संग्रहालय तथा मध्य प्रदेश पर्यटन विभाग के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम में जिले के प्रभारी मंत्री श्री गौतम टेटवाल, विधायक श्री अनिल जैन कालूहेड़ा, महापौर श्री मुकेश टटवाल, नगर निगम सभापति श्रीमती कलावती यादव, श्री रवि सोलंकी, श्री संजय अग्रवाल आदि उपस्थित रहे। वीर दुर्गादास छत्री पर किया माल्यार्पण मुख्यमंत्री डॉ. यादव एवं केंद्रीय मंत्री श्री शेखावत तथा अन्य अतिथियों द्वारा राष्ट्र वीर दुर्गादास छत्री पर पहुंचकर माल्यार्पण किया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि नई पीढ़ी को राष्ट्र वीर दुर्गादास के पराक्रम एवं शौर्य एवं देश के गौरवशाली इतिहास से परिचित करवाने के लिए विभिन्न कार्य किए जाएंगे। इनमें राष्ट्र वीर दुर्गादास की प्रतिमा स्थापना के साथ ही पैदल पुल, बगीचा, एक्टिविटीज जोन, रिटेनिंग वॉल, पार्किंग, हॉर्स ट्रैकिंग जोन, ओपन एयर थिएटर, संग्रहालय निर्माण आदि कार्य सम्मिलित हैं। मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने प्रस्तावित निर्माण कार्यों का नक्शे पर अवलोकन किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bhopal

Bhopal में पहली बार Body Donation को मिला राजकीय सम्मान, Guard of Honor के साथ विदाई

Bhopal में बना इतिहास भोपाल (Bhopal) के गांधी मेडिकल कॉलेज (GMC) में पहली बार किसी Body Donation को Rajkiya Samman (राजकीय सम्मान) दिया गया। 79 वर्षीय महिला, जिन्होंने अपनी मृत्यु के बाद देहदान (Body Donation) किया, उन्हें राज्य सरकार की ओर से Guard of Honor देकर विदाई दी गई। इस दौरान GMC के डॉक्टर, स्टाफ और परिजन मौजूद रहे। सरकार की नई पहल: Body Donation को मिलेगा सम्मान कुछ महीने पहले मध्यप्रदेश सरकार (Madhya Pradesh Government) ने घोषणा की थी कि अंगदान (Organ Donation) और देहदान (Body Donation) करने वाले व्यक्तियों को राजकीय सम्मान दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य समाज में जागरूकता फैलाना और ज्यादा से ज्यादा लोगों को देहदान व अंगदान के लिए प्रेरित करना है। नीमच और अन्य जिलों में भी हुआ सम्मान भोपाल से पहले नीमच (Neemuch) जिले में भी एक महिला के बॉडी डोनेशन पर गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया था। अब धीरे-धीरे यह पहल प्रदेश के अन्य जिलों में भी लागू की जा रही है। समाज को मिला बड़ा संदेश मेडिकल एक्सपर्ट्स का कहना है कि देहदान (Body Donation) मेडिकल स्टूडेंट्स की पढ़ाई और रिसर्च के लिए बेहद जरूरी है। जब सरकार ऐसे दानदाताओं को सम्मान देती है, तो समाज में यह संदेश जाता है कि Body Donation समाज सेवा और मानवता की सबसे बड़ी मिसाल है। बढ़ रही जागरूकता और प्रेरणा भोपाल की यह घटना साबित करती है कि अब लोग बॉडी डोनेशन को सिर्फ व्यक्तिगत निर्णय नहीं, बल्कि मानवता और समाज के प्रति योगदान मानने लगे हैं। यह पहल आने वाली पीढ़ियों को भी अंगदान और देहदान के लिए प्रेरित करेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Bittu Tabahi

Bittu Tabahi ने बदली सोच, अकेले शुरू किया नदी सफाई अभियान; नगरपालिका भी हुई प्रभावित

नदी में गंदगी देखकर ज्यादातर लोग शिकायत करते हैं, लेकिन मध्य प्रदेश के एक युवक ने शिकायत करने के बजाय खुद कुछ करने की ठानी। स्थानीय स्तर पर ‘बिट्टू तबाही’ (Bittu Tabahi) के नाम से पहचाने जाने वाले इस युवक ने अकेले ही नदी की सफाई का जिम्मा उठा लिया। उनका यह जज्बा अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बना हुआ है। बिट्टू ने नदी में जमा कचरे और गंदगी को देखकर सफाई अभियान शुरू किया। शुरुआत किसी बड़े इंतजाम या टीम के साथ नहीं हुई। उन्होंने अपने स्तर पर सफाई करना शुरू किया और लगातार इस काम में जुटे रहे। नदी को साफ रखने का लिया संकल्प बिट्टू का मानना है कि नदी सिर्फ पानी का स्रोत नहीं, बल्कि आसपास के लोगों और पर्यावरण के लिए बेहद जरूरी है। इसी सोच के साथ उन्होंने नदी में जमा कचरे को हटाने की पहल की। उनका यह प्रयास धीरे-धीरे स्थानीय लोगों का ध्यान खींचने लगा। लोगों ने देखा कि बिना किसी दबाव या दिखावे के बिट्टू लगातार नदी की सफाई में लगे हुए हैं। नगरपालिका ने भी की पहल की सराहना बिट्टू के लगातार सफाई अभियान की जानकारी नगरपालिका तक पहुंची तो उनके प्रयास की सराहना की गई। एक युवक द्वारा अपने स्तर पर नदी को साफ रखने की कोशिश को अधिकारियों ने सकारात्मक कदम माना। इस पहल ने यह भी दिखाया कि अगर कोई व्यक्ति अपने आसपास के पर्यावरण को लेकर जिम्मेदारी महसूस करे, तो छोटी शुरुआत भी बड़ा संदेश दे सकती है। सोशल मीडिया पर भी चर्चा में आया अभियान बिट्टू का नदी सफाई अभियान अब स्थानीय लोगों के बीच चर्चा का विषय बन गया है। उनके प्रयास को देखकर दूसरे लोगों में भी स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता बढ़ाने की उम्मीद है। आज नदियों में बढ़ता कचरा और प्रदूषण बड़ी चुनौती है। ऐसे में बिट्टू की पहल लोगों को यह संदेश देती है कि नदी को साफ रखना सिर्फ प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि समाज की भी साझा जिम्मेदारी है। ‘बिट्टू तबाही’ ने दी एक अलग मिसाल बिट्टू की कहानी इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने बदलाव का इंतजार नहीं किया, बल्कि खुद बदलाव की शुरुआत करने का फैसला लिया। अकेले शुरू किया गया उनका यह सफाई अभियान अब दूसरों के लिए प्रेरणा बनता दिखाई दे रहा है। कई बार किसी बड़े बदलाव की शुरुआत बड़े अभियान से नहीं, बल्कि एक छोटे से कदम से होती है। बिट्टू का यह प्रयास उसी सोच की मिसाल है—अगर इरादा मजबूत हो, तो एक इंसान भी बदलाव की शुरुआत कर सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
UN

World Map में बड़ा बदलाव! UN ने Africa के असली Size को दिखाने का रास्ता साफ किया

दुनिया का नक्शा (World Map) देखते हुए शायद ही किसी ने सोचा होगा कि इसमें दिखाई देने वाले देशों और महाद्वीपों का आकार असलियत से अलग भी हो सकता है। लेकिन अब इसी मुद्दे को लेकर संयुक्त राष्ट्र में एक अहम पहल हुई है। UN महासभा ने ऐसे World Map को बढ़ावा देने वाले प्रस्ताव का समर्थन किया है, जिसमें धरती के अलग-अलग हिस्सों को उनके वास्तविक क्षेत्रफल के ज्यादा करीब दिखाने की कोशिश की गई है। इस बदलाव के बाद नक्शे पर Africa पहले से काफी बड़ा दिखाई देगा, जबकि Europe और North America, खासकर US का आकार पुराने नक्शे की तुलना में छोटा नजर आ सकता है। प्रस्ताव को भारी समर्थन मिला, लेकिन अमेरिका ने इसका विरोध किया। पुराने World Map में आखिर समस्या क्या है? दुनिया के स्कूलों और कई नक्शों में लंबे समय से Mercator Projection का इस्तेमाल किया जाता रहा है। इसे 16वीं सदी में Gerardus Mercator ने तैयार किया था। उस समय इसका सबसे बड़ा फायदा समुद्री यात्राओं और Navigation में था। लेकिन Mercator Projection की एक खासियत ही इसकी सबसे बड़ी कमी भी बन गई। इसमें जैसे-जैसे कोई क्षेत्र Equator से दूर जाता है, उसका आकार नक्शे पर ज्यादा बड़ा दिखाई देने लगता है। यही कारण है कि Greenland जैसे इलाके नक्शे पर अपनी वास्तविकता से बहुत बड़े नजर आते हैं। दूसरी तरफ Africa, जो दुनिया के सबसे बड़े महाद्वीपों में से एक है, अपेक्षाकृत छोटा दिखाई देता है। मसलन, सामान्य Mercator Map में Greenland और Africa का आकार देखकर किसी को लग सकता है कि दोनों लगभग बराबर हैं। असल में Africa का क्षेत्रफल Greenland से करीब 14 गुना ज्यादा है। Equal Earth Projection क्यों चर्चा में है? UN के प्रस्ताव में Equal Earth Projection जैसे नक्शों को बढ़ावा देने की बात कही गई है। इस Projection की खासियत यह है कि इसमें अलग-अलग महाद्वीपों के क्षेत्रफल को ज्यादा सही अनुपात में दिखाया जाता है। यानी नक्शे को देखकर Africa का वास्तविक विशाल आकार ज्यादा साफ समझ में आता है। Europe और North America भी Mercator Map की तुलना में छोटे दिखाई देते हैं। हालांकि यहां एक बात समझना जरूरी है—न तो Africa बड़ा हुआ है और न ही Europe या America छोटा। बदलाव सिर्फ उस तरीके में है, जिससे उन्हें नक्शे पर दिखाया जाता है। America ने UN के प्रस्ताव का विरोध क्यों किया? इस प्रस्ताव पर अमेरिका का रुख बाकी देशों से अलग रहा। मतदान के दौरान अमेरिका ने इसके खिलाफ वोट किया। अमेरिकी पक्ष की ओर से यह सवाल उठाया गया कि संयुक्त राष्ट्र को वैश्विक स्तर की बड़ी समस्याओं पर ज्यादा ध्यान देना चाहिए। वहीं प्रस्ताव के समर्थकों का मानना है कि नक्शा सिर्फ रास्ता या देश की लोकेशन बताने वाला साधन नहीं है। यह लोगों के मन में दुनिया की एक तस्वीर भी बनाता है। अफ्रीकी देशों की तरफ से लंबे समय से यह बात उठती रही है कि पुराने नक्शों में Africa का वास्तविक आकार सही तरीके से सामने नहीं आता। इसी सोच के साथ “Correct the Map” अभियान को आगे बढ़ाया गया। UN के फैसले से क्या सभी Maps बदल जाएंगे? यह मान लेना सही नहीं होगा कि अब अचानक हर जगह नया नक्शा दिखाई देने लगेगा। UN महासभा का यह फैसला कानूनी रूप से बाध्यकारी नहीं है। यानी Google Maps, स्कूल की किताबों, सरकारी दस्तावेजों या दूसरे Digital Platforms को तुरंत अपना नक्शा बदलना जरूरी नहीं है। इसका मकसद देशों, शैक्षणिक संस्थानों, मीडिया और दूसरे संगठनों को ऐसे Map Projections अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना है, जो दुनिया के क्षेत्रफल को ज्यादा सही तरीके से दिखाते हों। इसके बावजूद Mercator Projection पूरी तरह खत्म होने की संभावना नहीं है। Navigation और समुद्री यात्राओं जैसी जरूरतों में इसका इस्तेमाल आज भी उपयोगी माना जाता है। India पर क्या असर पड़ेगा? भारत को लेकर सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या इस नए World Map से देश का आकार या सीमा बदल जाएगी? इसका जवाब है—नहीं। भारत की जमीन, क्षेत्रफल और अंतरराष्ट्रीय सीमाओं पर इस प्रस्ताव का कोई असर नहीं पड़ेगा। सिर्फ नक्शे पर भारत और बाकी देशों को दिखाने का अनुपात बदल सकता है। अगर Equal Earth या इसी तरह की Projection का इस्तेमाल ज्यादा बढ़ता है तो आने वाले समय में School Geography Books, Educational Charts, News Graphics और Digital Maps में दुनिया की तस्वीर कुछ अलग दिखाई दे सकती है। भारत के लिए इसका असर मुख्य रूप से शिक्षा और Geography की समझ के स्तर पर होगा। बच्चों और आम लोगों को यह समझने में मदद मिलेगी कि नक्शे पर दिखाई देने वाला आकार हमेशा किसी देश या महाद्वीप के वास्तविक क्षेत्रफल के बराबर नहीं होता। Africa के लिए इसे बड़ी उपलब्धि क्यों माना जा रहा है? इस पूरे विवाद में Africa सबसे ज्यादा चर्चा के केंद्र में है। समर्थकों का कहना है कि सदियों से इस्तेमाल हो रहे नक्शों ने अनजाने में दुनिया के अलग-अलग हिस्सों की एक असंतुलित तस्वीर बना दी है। Africa दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा महाद्वीप है और इसके बावजूद Mercator Map में इसका आकार उसकी वास्तविक विशालता के मुकाबले कम नजर आता है। यही वजह है कि African countries और African Union की ओर से इस मुद्दे को लगातार उठाया गया। उनके लिए यह केवल Map Projection का मामला नहीं, बल्कि दुनिया के सामने Africa की वास्तविक तस्वीर रखने का भी सवाल है। क्या दुनिया सच में बदल गई? नहीं। दुनिया का भूगोल बिल्कुल नहीं बदला है। न कोई नया देश बना है, न किसी देश की सीमा बदली है और न ही Africa का क्षेत्रफल अचानक बढ़ गया है। बदलाव सिर्फ इतना है कि दुनिया को कागज या स्क्रीन पर किस तरह दिखाया जाए, इस पर अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई दिशा सामने आई है। एक तरह से देखें तो यह कहानी हमें यह भी याद दिलाती है कि नक्शा हमेशा पूरी तरह निष्पक्ष तस्वीर नहीं होता। उसे बनाने का तरीका तय करता है कि हमें दुनिया का कौन-सा हिस्सा कितना बड़ा या छोटा दिखाई देगा। आने वाले वर्षों में अगर Equal Earth जैसी projections को ज्यादा अपनाया जाता है, तो संभव है कि नई पीढ़ी के लिए World Map की तस्वीर वही न हो,...
Swatantra Bhardwaj

Swatantra Bhardwaj Detained: CJP Protest के बाद स्वतंत्र भारद्वाज हिरासत में

दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए CJP Protest के दौरान एक छात्रा के पिता के साथ कथित मारपीट का मामला अब फिर चर्चा में है। मामले में आरोपी बताए जा रहे सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर स्वतंत्र भारद्वाज (Swatantra Bhardwaj) को दिल्ली पुलिस ने उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर से हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थकों के प्रदर्शन और आरोपी के खिलाफ कार्रवाई की मांग के कुछ घंटे बाद हुई। Parliament Street Police Station के बाहर प्रदर्शन स्वतंत्र भारद्वाज के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर CJP के प्रतिनिधि और समर्थक शुक्रवार को दिल्ली के संसद मार्ग थाने पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस से मामले में जल्द कार्रवाई करने और आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कुछ राजनीतिक नेता भी वहां पहुंचे। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच बातचीत हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, पुलिस ने मामले में कार्रवाई का भरोसा दिया और इसके बाद भारद्वाज को ट्रेस करने के लिए टीमें सक्रिय की गईं। क्या है पूरा मामला? यह विवाद जंतर-मंतर पर CJP के एक प्रदर्शन से जुड़ा है। प्रदर्शन के दौरान छात्रा निशु आजाद के पिता संजय कुमार के साथ कथित तौर पर मारपीट हुई थी। इस मामले में स्वतंत्र भारद्वाज और सूरज कुमार के नाम FIR में शामिल किए गए थे। मामला उस समय और गरमा गया, जब स्वतंत्र भारद्वाज से जुड़े एक Podcast Video की क्लिप सोशल मीडिया पर वायरल हुई। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वीडियो में भारद्वाज ने घटना को लेकर आपत्तिजनक दावे किए थे। इसके बाद उनकी गिरफ्तारी की मांग तेज हो गई। Viral Video ने बढ़ाया विवाद वायरल वीडियो सामने आने के बाद CJP ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाए। संगठन का कहना था कि वीडियो में कथित तौर पर घटना को लेकर किए गए दावों को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। वहीं दिल्ली पुलिस ने राजनीतिक हस्तक्षेप के आरोपों को खारिज किया है। पुलिस के मुताबिक, मामले की जांच कानूनी प्रक्रिया के तहत की जा रही थी और मेडिकल रिपोर्ट में चोट को लेकर सोशल मीडिया पर किए गए कुछ दावों की पुष्टि नहीं हुई थी। Bulandshahr में पुलिस ने पकड़ा पुलिस सूत्रों के मुताबिक, दिल्ली पुलिस की टीमों ने स्वतंत्र भारद्वाज को उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर में ट्रेस किया। रिपोर्टों में बताया गया कि पुलिस की कार्रवाई से पहले वह वहां से निकलने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन बाद में उन्हें हिरासत में ले लिया गया। यह कार्रवाई उस समय हुई जब संसद मार्ग थाने के बाहर CJP समर्थक स्वतंत्र भारद्वाज की गिरफ्तारी की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे। इससे मामले में पुलिस की कार्रवाई को लेकर चल रहा विवाद भी फिलहाल एक नए चरण में पहुंच गया है। FIR में SC/ST Act की धाराएं जोड़ने की जानकारी प्रदर्शन के बाद पुलिस की ओर से मामले में SC/ST Act से संबंधित धाराएं जोड़ने की बात सामने आई। पीड़ित की दोबारा मेडिकल जांच कराए जाने की जानकारी भी रिपोर्टों में दी गई है। हालांकि, मामले में अंतिम कानूनी स्थिति जांच और आगे की पुलिस कार्रवाई पर निर्भर करेगी। आरोपों की पुष्टि अदालत की प्रक्रिया में ही होगी। पुलिस के सामने अब आगे की जांच बड़ी चुनौती स्वतंत्र भारद्वाज को हिरासत में लिए जाने के बाद अब पुलिस के सामने वायरल वीडियो, FIR में दर्ज आरोपों, मेडिकल रिपोर्ट और घटना से जुड़े अन्य साक्ष्यों की जांच अहम होगी। फिलहाल इस मामले ने CJP Protest, Delhi Police और Social Media Influencer को लेकर राजनीतिक और सामाजिक बहस को भी तेज कर दिया है। अब देखना होगा कि जांच आगे बढ़ने के बाद पुलिस की ओर से क्या कानूनी कार्रवाई की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Saharanpur

UP Bulldozer Action: Saharanpur कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर चला बुलडोजर, मायावती-इकरा हसन ने उठाए सवाल

Saharanpur उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में कलेक्ट्रेट परिसर की मस्जिद को लेकर चल रहा विवाद अब एक नए मोड़ पर पहुंच गया है। अदालत के आदेश के बाद प्रशासन ने शनिवार को मस्जिद के खिलाफ Bulldozer Action शुरू कर दिया। कार्रवाई की खबर फैलते ही इलाके में हलचल बढ़ गई और राजनीतिक प्रतिक्रियाओं का दौर भी शुरू हो गया। कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास के इलाके में सुरक्षा बढ़ा दी गई। किसी तरह की अप्रिय स्थिति से बचने के लिए बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई। प्रशासन का कहना है कि कार्रवाई अदालत के आदेश के अनुपालन में की जा रही है। कोर्ट के फैसले के बाद प्रशासन का एक्शन कलेक्ट्रेट परिसर में बनी मस्जिद को लेकर जमीन के स्वामित्व और निर्माण की वैधता पर काफी समय से विवाद चल रहा था। प्रशासन का दावा है कि मस्जिद सरकारी जमीन पर बनी है और निर्माण को अवैध माना गया है। मामला पहले सिटी मजिस्ट्रेट की अदालत में पहुंचा। जुलाई में अदालत ने मस्जिद को हटाने का आदेश दिया था। इसके साथ ही संबंधित पक्ष पर करीब 6.41 करोड़ रुपये की क्षतिपूर्ति लगाए जाने की बात भी सामने आई थी। इस फैसले को जिला अदालत में चुनौती दी गई थी। 4 सितंबर को जिला जज की अदालत ने सिटी मजिस्ट्रेट के आदेश को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी। इसके बाद प्रशासन ने ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की। इकरा हसन को सहारनपुर जाने से रोका मस्जिद पर कार्रवाई की जानकारी मिलने के बाद कैराना से समाजवादी पार्टी की सांसद इकरा हसन सहारनपुर जाने की कोशिश कर रही थीं। लेकिन पुलिस ने उन्हें आगे जाने से रोक दिया। इकरा हसन और पुलिस अधिकारियों के बीच इस दौरान तीखी बहस भी हुई। इसका वीडियो सामने आने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा में आ गया। बाद में उनके आवास के बाहर पुलिस बल तैनात किए जाने की भी खबर सामने आई। इकरा हसन ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्हें सहारनपुर जाने से रोका जा रहा है। उनका कहना था कि वह मौके पर जाकर हालात देखना चाहती थीं। मायावती ने सरकार से कार्रवाई रोकने को कहा सहारनपुर मस्जिद विवाद पर बहुजन समाज पार्टी प्रमुख मायावती ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने सरकार से कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की और मामले को संवेदनशील बताते हुए सावधानी से कदम उठाने की बात कही। मायावती ने कहा कि ऐसे मामलों में किसी भी तरह का तनाव बढ़ने से रोकना जरूरी है। उन्होंने लोगों से भी शांति और भाईचारा बनाए रखने की अपील की। इमरान मसूद बोले- हाईकोर्ट जाएंगे सहारनपुर से कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने प्रशासन की कार्रवाई का विरोध किया है। उनका कहना है कि मस्जिद की जमीन और उससे जुड़े दस्तावेजों को लेकर उनका पक्ष अलग है। जिला अदालत से राहत नहीं मिलने के बाद मसूद ने मामले को हाईकोर्ट ले जाने की बात कही है। उनका कहना है कि आगे की कानूनी लड़ाई अदालत में लड़ी जाएगी और उपलब्ध दस्तावेजों को वहां रखा जाएगा। प्रशासन और विपक्ष के दावे अलग-अलग पूरे विवाद में प्रशासन और मस्जिद पक्ष के दावे अलग हैं। प्रशासन जहां निर्माण को सरकारी जमीन पर हुआ अवैध निर्माण बता रहा है, वहीं मस्जिद से जुड़े लोग और कुछ विपक्षी नेता इस दावे पर सवाल उठा रहे हैं। यही वजह है कि मामला सिर्फ बुलडोजर कार्रवाई तक सीमित नहीं रहा। अब इसकी गूंज राजनीतिक मंच से लेकर अदालत तक सुनाई दे रही है। आगे क्या होगा? सहारनपुर कलेक्ट्रेट की मस्जिद पर हुई कार्रवाई के बाद अब सबकी नजर आगे की कानूनी प्रक्रिया पर है। इमरान मसूद की ओर से हाईकोर्ट जाने की बात कही गई है। ऐसे में आने वाले दिनों में अदालत में इस मामले को लेकर क्या रुख सामने आता है, यह महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल प्रशासन की कार्रवाई के बाद सहारनपुर में राजनीतिक माहौल गर्म है। एक तरफ अधिकारी कोर्ट के आदेश के पालन की बात कह रहे हैं, तो दूसरी ओर विपक्ष इसे लेकर सरकार पर सवाल उठा रहा है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Nepal

Nepal Flood: दार्चुला में Landslide का खतरा बढ़ा, Trishuli से भारतीय परिवार का Rescue; हजारों Missing

नेपाल (Nepal) में बाढ़ और भूस्खलन से मची तबाही के बाद हालात अभी भी सामान्य नहीं हुए हैं। नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण बाढ़ ने कई इलाकों को अपनी चपेट में ले लिया। नदियों का जलस्तर बढ़ने, मलबा आने और पहाड़ी इलाकों में Landslide के खतरे ने राहत और बचाव अभियान को और मुश्किल बना दिया है। सबसे चिंता की बात यह है कि हादसे के कई दिन बाद भी हजारों लोगों का पता नहीं चल पाया है। हालांकि, इसी बीच Trishuli क्षेत्र से दो लोगों को नौ दिन बाद जिंदा निकालना राहत और उम्मीद की बड़ी खबर बनकर सामने आया है। दार्चुला में Landslide का खतरा, निचले इलाकों पर नजर नेपाल के पहाड़ी इलाकों में लगातार भूस्खलन का खतरा बना हुआ है। दार्चुला समेत संवेदनशील क्षेत्रों में प्रशासन की ओर से निचले इलाकों को लेकर सतर्कता बरती जा रही है। पहाड़ों से मलबा आने और नदियों में अचानक पानी बढ़ने की आशंका के बीच लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। बाढ़ से कई सड़कें और पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे प्रभावित क्षेत्रों तक राहत पहुंचाना भी चुनौती बना हुआ है। Trishuli से भारतीय नागरिकों का Rescue इस बीच त्रिशूली इलाके से तीन भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकाले जाने की खबर सामने आई है। इनमें एक परिवार शामिल है। भारतीय अधिकारियों के मुताबिक, रेस्क्यू किए गए लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया और उनके भारत लौटने की प्रक्रिया में मदद की जा रही है। भारत सरकार नेपाल में फंसे अपने नागरिकों को निकालने के लिए लगातार नेपाली प्रशासन के संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब तक 166 भारतीय नागरिकों को Rescue किया गया है, जबकि 275 भारतीयों के लापता होने की जानकारी दी गई है। भारत ने राहत अभियान के लिए करीब 95 टन राहत सामग्री भी भेजी है। 9 दिन बाद Trishuli Tunnel से जिंदा निकले 2 मजदूर नेपाल में चल रहे Rescue Operation की सबसे बड़ी खबर Trishuli-3A Hydropower Project से आई। यहां सुरंग में फंसे संजय साह और कबीर महारजन को करीब नौ दिन बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। दोनों को सुरंग के अंदर काफी गहराई से निकाला गया। बचाव दल ने पहले अंदर से आवाजें सुनीं और फिर संपर्क स्थापित होने के बाद ऑपरेशन तेज किया। आखिरकार दोनों को बाहर निकाल लिया गया। इस घटना ने उन परिवारों में भी उम्मीद जगाई है जिनके अपने लोग अभी तक लापता हैं। राहत दल अब अन्य संभावित Survivors तक पहुंचने की कोशिश में जुटे हैं। 1300 के करीब मौतें, 5 हजार से ज्यादा लोग Missing इस प्राकृतिक आपदा का असर कितना बड़ा है, इसका अंदाजा मृतकों और लापता लोगों की संख्या से लगाया जा सकता है। नेपाल की आपदा प्रबंधन एजेंसी के आंकड़ों के अनुसार 1,294 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी थी और 5,053 लोग अब भी लापता बताए गए हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में आंकड़ों में बदलाव देखने को मिल रहा है। कई इलाकों में घरों, सड़कों, पुलों और Hydropower Projects को भारी नुकसान पहुंचा है। बड़ी संख्या में लोग विस्थापित हुए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। Rescue Operation अभी भी जारी Trishuli Tunnel से दो लोगों को जिंदा निकाले जाने के बाद Rescue Teams का हौसला बढ़ा है। नेपाल सेना, पुलिस और तकनीकी विशेषज्ञ लगातार प्रभावित इलाकों में Search Operation चला रहे हैं। Hydropower Projects के आसपास अभी भी बड़ी संख्या में लोगों के फंसे होने की आशंका है। मलबा, पानी और क्षतिग्रस्त सुरंगें बचाव अभियान में सबसे बड़ी बाधा बनी हुई हैं। इसके बावजूद टीमें लगातार नए रास्ते तलाश रही हैं। भारत ने नेपाल की मदद बढ़ाई नेपाल की इस मुश्किल घड़ी में भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहयोग बढ़ाया है। भारतीय विशेषज्ञों और राहत सामग्री को नेपाल भेजा गया है। विदेश मंत्रालय के मुताबिक, भारत की टीमें Rescue, Medical और अन्य जरूरी सेवाओं में सहायता कर रही हैं। फिलहाल नेपाल के सामने सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की तलाश, प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाना और पहाड़ी इलाकों में नए Landslide और Flood के खतरे से निपटना है। Trishuli Tunnel से नौ दिन बाद दो लोगों का जिंदा निकलना इस त्रासदी के बीच उम्मीद की एक किरण जरूर लेकर आया है। अब Rescue Teams की कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला जा सके। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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