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पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भोपाल पहुंचे, इस्तीफे के बाद पहला बड़ा सार्वजनिक कार्यक्रम आज

पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ शुक्रवार को भोपाल पहुंचे। वे यहां करीब साढ़े चार घंटे तक राजभवन में रुकेंगे और फिर शाम 4:15 बजे रवीन्द्र भवन में आयोजित पुस्तक विमोचन समारोह में शामिल होंगे। यह उनके लिए खास मौका है, क्योंकि 21 जुलाई को संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले दिए गए इस्तीफे के बाद यह उनका पहला सार्वजनिक संबोधन होगा। कार्यक्रम के बाद वे रात करीब 8 बजे दिल्ली लौट जाएंगे। मनमोहन वैद्य की नई किताब का विमोचन रवीन्द्र भवन में RSS के अखिल भारतीय कार्यकारिणी सदस्य डॉ. मनमोहन वैद्य की नई पुस्तक “हम और यह विश्व” का विमोचन किया जाएगा।इस कार्यक्रम में: धनखड़ इस मौके पर मंच से संबोधित भी करेंगे। इस्तीफे के बाद से नहीं दिया था कोई सार्वजनिक बयान 21 जुलाई को इस्तीफा देने के बाद से जगदीप धनखड़ किसी भी सार्वजनिक कार्यक्रम में नहीं दिखे थे।वे केवल 12 सितंबर को नए उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन के शपथ ग्रहण समारोह में नजर आए थे, लेकिन उन्होंने वहां भी कोई भाषण नहीं दिया था। ठीक चार महीने बाद मंच पर वापसी धनखड़ की यह चार महीने बाद पहली सार्वजनिक उपस्थिति और संबोधन होगा।21 जुलाई को इस्तीफा देने के बाद, 21 नवंबर को वे पहली बार किसी बड़े मंच से जनता और मीडिया के सामने आएंगे। For More Info:www.deshharpal.com
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इछावर में दर्दनाक सड़क हादसा: ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर से दो लोगों की मौके पर मौत

सीहोर जिले के इछावर क्षेत्र में बुधवार को एक भयावह सड़क हादसे में दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। यह दुर्घटना इछावर थाना क्षेत्र के गुराड़ी गांव के पास हुई। जानकारी के मुताबिक, सरकारी शिक्षक हनुमत सिंह ऊईके और उनके साथी ज्ञान सिंह बाइक से धाईखेड़ा की ओर जा रहे थे। तभी गुराड़ी की दिशा से आ रही तेज रफ्तार ट्रैक्टर-ट्रॉली ने लापरवाही से उनकी बाइक को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों बाइक सवारों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया। हादसे के बाद इछावर पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र में पहले भी कई सड़क हादसे हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन की लापरवाही के कारण यहां न तो चेतावनी बोर्ड लगाए गए और न ही स्पीड ब्रेकर। लोगों ने मांग की है कि आगे ऐसे हादसे न हों, इसलिए जल्द से जल्द आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए जाएं। More updates and latest news on:www.deshharpal.com
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ग्राम बड़ौदा अहीर में अवैध शराब बिक्री के खिलाफ फूटा आक्रोश, महिलाओं ने किया चक्काजाम

जननायक टंट्या मामा की जन्मभूमि ग्राम बड़ौदा अहीर में अवैध शराब की बढ़ती बिक्री को लेकर ग्रामीणों का धैर्य आखिर टूट गया। बुधवार सुबह 10 बजे पंधाना–कालंका मुख्य मार्ग पर महिलाओं ने चक्काजाम कर दिया और गांव में पूरी तरह शराबबंदी की मांग उठाई।महिलाओं का कहना था कि गांव में अवैध शराब खुलेआम बिक रही है और प्रशासन इस पर रोक लगाने में नाकाम रहा है। चक्काजाम के दौरान महिलाओं ने आरोप लगाया कि गांव में 10 से ज्यादा जगहों पर अवैध शराब की बिक्री हो रही है, जिससे युवाओं और बच्चों पर बुरा असर पड़ रहा है। उनका कहना है कि शिवराज मामा ने गांव की सुरक्षा की जिम्मेदारी ली थी, लेकिन आज भी हालात नहीं सुधरे। शराबखोरी बढ़ने के कारण कई महिलाएं मायके जाने को मजबूर हैं। पहले भी दी शिकायतें, लेकिन कार्रवाई नहीं ग्रामीणों ने बताया कि वे कई बार आवेदन दे चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। मजबूरी में सड़कों पर उतरना पड़ा।महिलाओं ने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन और जनप्रतिनिधि इसे गंभीरता से नहीं लेते तो अगला आंदोलन और बड़ा होगा। पुलिस की कार्रवाई शुरू, एक आरोपी पर केस दर्ज चक्काजाम की सूचना मिलते ही पंधाना थाना प्रभारी दिलीप देवड़ा मौके पर पहुंचे। महिलाओं की शिकायत पर मुकेश पिता दरियाव सिंह (42) निवासी बड़ौदा अहीर के खिलाफ धारा 34(1) के तहत केस दर्ज किया गया और अवैध शराब जब्त की गई। थाना प्रभारी टीम के साथ गांव के कई स्थानों पर पहुंचे, जहां अवैध शराब बिक्री की जानकारी मिली थी। पुलिस ने जांच की और ग्रामीणों को आश्वासन दिया कि गांव में अवैध शराब के खिलाफ लगातार कार्रवाई जारी रहेगी। More updates and latest local news only on:www.deshharpal.com
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भोपाल मिसरोद: मैजिक स्पॉट कैफे पर नकाबपोशों का हमला, दो मिनट में की जबरदस्त तोड़फोड़

भोपाल के मिसरोद इलाके में मंगलवार देर रात एक डराने वाली घटना हुई। मैजिक स्पॉट कैफे में अचानक 20 से ज्यादा नकाबपोश बदमाश घुस आए और तलवार-डंडों से जबरदस्त तोड़फोड़ कर दी। उस समय कैफे में एक युवक और युवती मौजूद थे, जो हमलावरों को देखकर घबराकर बाहर की ओर भाग निकले। सीसीटीवी फुटेज वायरल, पुलिस रंजिश की आशंका में जांच में जुटी घटना के सीसीटीवी फुटेज सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहे हैं। डीसीपी जोन-2 विवेक सिंह ने बताया कि पूरी वारदात दो मिनट से भी कम समय में हो गई। बदमाश सीधे कैफे के अंदर घुसे, हमला किया और तुरंत फरार हो गए।प्राथमिक जांच में साफ है कि उनकी नीयत लूट की नहीं थी, इसलिए पुलिस इस मामले को पुरानी रंजिश या विवाद से जोड़कर देख रही है। कैफे संचालक सक्षम गिरि ने किसी खास दुश्मनी से इनकार किया है, लेकिन एफआईआर में उन्होंने 2-3 संदिग्धों के नाम दर्ज कराए हैं। दो संदिग्ध हिरासत में, पूछताछ जारी पुलिस ने एफआईआर में दर्ज नामों में से दो लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। अभी तक घटना की वजह साफ नहीं हो सकी है। पुलिस यह पता लगा रही है कि यह हमला किसी पुरानी रंजिश का नतीजा था या कोई और विवाद सामने आएगा। तीन थानों की टीमें मिलकर कर रहीं जांच हमले की गंभीरता को देखते हुए मिसरोद, बागसेवनिया और कटारा हिल्स थाना क्षेत्रों की पुलिस संयुक्त रूप से जांच कर रही है। टीमें सीसीटीवी फुटेज, रूट मैप और संभावित विवादों के आधार पर कार्रवाई कर रही हैं।हमलावरों ने चेहरे ढक रखे थे, जिससे पहचान मुश्किल हो रही है, लेकिन पुलिस को कुछ अहम सुराग मिले हैं जिन पर काम किया जा रहा है। कैफे संचालक ने योगी, निखिल, अभिषेक समेत पांच नामजद और अज्ञात आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। More updates and full story on:www.deshharpal.com
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गुना में मनाई गई पंडित नेहरू की जयंती: कांग्रेस नेताओं ने किया माल्यार्पण, KV में बाल दिवस पर आधार अपडेशन शिविर आयोजित

देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू की जयंती गुना जिले में श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कांग्रेस नेताओं ने हनुमान चौराहा स्थित नेहरू पार्क पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और उनके योगदान को याद किया। नेहरू के सिद्धांत आज भी प्रासंगिक: कांग्रेस नेता पूर्व जिला अध्यक्ष हरिशंकर विजयवर्गीय ने कहा कि आज देश जिन परिस्थितियों से गुजर रहा है, उसमें नेहरू के सिद्धांत और नीतियाँ देश को सही दिशा देने का काम कर सकती हैं।कांग्रेस नेताओं ने बताया कि: कार्यक्रम में कई कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। KV गुना में बाल दिवस पर दो दिवसीय आधार अपडेशन शिविर बाल दिवस के मौके पर केंद्रीय विद्यालय, गुना में दो दिवसीय आधार अपडेशन शिविर आयोजित किया गया।अधीक्षक डाकघर गुना ओपी चतुर्वेदी के मार्गदर्शन में: बच्चों को सरकारी योजनाओं, बचत योजनाओं, फिलेटैली और माय स्टाम्प जैसी योजनाओं की जानकारी भी दी गई। 100 से ज्यादा बच्चों ने उठाया लाभ इस शिविर का लाभ लगभग 100 बच्चों ने लिया।शिविर में प्राचार्य सुरेंद्र कुमार चतुर्वेदी, पुस्तकालयाध्यक्ष ऋषिकेश भार्गव, शिक्षक-शिक्षिकाएं और आधार ऑपरेटर आयुषी भार्गव व संजय लोधी का विशेष सहयोग रहा। For more info visit: www.deshharpal.com
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जबलपुर में बड़ा घोड़ा कांड: 57 में से 19 घोड़ों की मौत, 14 घोड़े गायब — हाईकोर्ट में मामला पेंडिंग, कलेक्टर ने जांच और FIR के संकेत दिए

हैदराबाद से जबलपुर लाए गए 57 घोड़ों के मामले में नया खुलासा सामने आया है। इनमें से 19 घोड़ों की मौत हो चुकी है, जबकि 14 घोड़े रहस्यमयी तरीके से गायब हैं। पशुपालन विभाग की गिनती में गुरुवार को यह बड़ा अंतर सामने आया। यह पूरा मामला मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में भी पेंडिंग है। कैसे शुरू हुआ मामला? मई 2025 में रायपुर निवासी सचिन तिवारी 57 घोड़ों को ट्रकों से हैदराबाद से जबलपुर लेकर आए। इन्हें पनागर के रैपुरा स्थित फॉर्म हाउस में रखा गया।धीरे-धीरे 19 घोड़ों की मौत हो गई। उस समय कलेक्टर रहे दीपक सक्सेना ने जांच करवाई, लेकिन यह साफ नहीं हो पाया कि इतने घोड़े क्यों लाए गए और किस उद्देश्य से रखे गए। 14 घोड़े कहां गए? विभाग भी परेशान पशु चिकित्सा विभाग के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. प्रफुल्ल मून ने बताया कि: डॉ. मून के अनुसार, सचिन तिवारी घोड़ों को किसी दूसरे स्थान पर ले गया है, लेकिन वह इसकी जानकारी देने से बच रहा है। कलेक्टर ने कहा — “FIR भी होगी” कलेक्टर राघवेंद्र सिंह ने जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।उन्होंने कहा: घातक बीमारी ने भी बढ़ाया संकट सूत्रों के अनुसार, एक घोड़े में गैलेंडर नामक घातक बीमारी की पुष्टि हुई थी।यह बीमारी: उच्च नस्ल के, लाखों रुपये कीमत वाले घोड़े लाए गए घोड़ों में शामिल थे: कुल: 41 फीमेल और 16 मेल घोड़ेये नस्लें रेस में उपयोग होती हैं और इनकी कीमत लाखों तक होती है। PETA का गंभीर आरोप — मामला ऑनलाइन सट्टे से जुड़ा PETA की कार्यकर्ता सिमरन ईशर ने बड़ा दावा किया है: फिलीपींस सरकार के अलर्ट के बाद तेलंगाना सरकार ने यह रेस बंद करवा दी।गिरफ्तारी से बचने के लिए सुरेश पलादुगू ने 154 घोड़ों को देशभर में इधर-उधर भेज दिया, जिनमें से 57 घोड़े जबलपुर पहुंचे। यह मामला लगातार गहराता जा रहा है और अब प्रशासन, हाईकोर्ट और पशुपालन विभाग तीनों की नजरें इस पर हैं। आने वाले दिनों में घोड़ों के गायब होने की सच्चाई सामने आ सकती है। For more info visit: www.deshharpal.com
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भोपाल मेट्रो की बड़ी खबर: CMRS टीम ट्रैक पर उतरी, 4 बजे तक चलेगा निरीक्षण — नवंबर में शुरू हो सकता है कॉमर्शियल रन

भोपाल मेट्रो को शुरू करने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ गया है। कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम अब सीधे मेट्रो ट्रैक पर निरीक्षण कर रही है। शुक्रवार सुबह 10 बजे से टीम का निरीक्षण शुरू हुआ, जो शाम 4 बजे तक चलेगा। इस दौरान टीम खुद मेट्रो में सफर कर सारे तकनीकी और सुरक्षा मानकों की जांच कर रही है तीन दिन के भोपाल दौरे पर CMRS टीम नई दिल्ली से आई टीम ने गुरुवार को डिपो, एम्स स्टेशन तक के ट्रैक, सिग्नलिंग सिस्टम और सुरक्षा उपायों की जांच की। आरकेएमपी स्टेशन पर रेल ट्रैक की ढाल और पानी निकासी की जांच के लिए ट्रैक पर पानी छोड़ा गया। पहले दिन टीम लगभग 8 घंटे मेट्रो प्रोजेक्ट की हर डिटेल जांचती रही। सुभाषनगर डिपो में पूरे प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन भी देखा गया। दूसरे दिन भी भारी निरीक्षण, मेट्रो में सफर कर होगी जांच शुक्रवार को फिर सुबह 10 बजे से निरीक्षण शुरू हुआ। टीम मेट्रो में बैठकर ट्रैक पर जा रही है ताकि मेट्रो के अंदर से ही हर तकनीकी बिंदु की सटीक जांच की जा सके। CMRS क्या करता है? किसी भी मेट्रो को यात्रियों के लिए शुरू करने से पहले अंतिम सुरक्षा स्वीकृति CMRS ही देता है।टीम इन बिंदुओं पर जांच कर रही है: अगर कोई कमी मिलती है तो उसे ठीक किए बिना मेट्रो को चलाने की अनुमति नहीं मिलती। पिछले दौरे में जो खामियां मिली थीं, उन्हें अब तक ठीक किया जा चुका है। इसलिए इस बार टीम से “ओके रिपोर्ट” मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पहली बार भोपाल पहुंचे मेट्रो कमिश्नर नए मेट्रो कमिश्नर नीलाभ्र सेनगुप्ता पहली बार भोपाल आए हैं। टीम वही पुरानी है, इसलिए कॉमर्शियल रन में रुकावट की संभावना कम मानी जा रही है। अक्टूबर में नहीं मिली अनुमति, अब नवंबर में दौड़ने की उम्मीद सरकार ने पहले अक्टूबर में मेट्रो चलाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन बिहार चुनाव की वजह से निरीक्षण में देरी हुई।अब माना जा रहा है कि नवंबर में भोपाल मेट्रो यात्रियों के लिए ट्रैक पर दौड़ सकती है। सीएमआरएस की रिपोर्ट सीधे राज्य सरकार को सौंपी जाएगी, और मंजूरी मिलते ही कॉमर्शियल रन की फाइनल डेट घोषित होगी।संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भोपाल मेट्रो के पहले यात्री बनें। पहले ही मिल चुकी है RDSO की ओके रिपोर्ट रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) पहले ही मेट्रो की टेस्टिंग कर अपनी ओके रिपोर्ट दे चुका है। वहीं से दस्तावेज CMRS को भेजे गए, जिसके बाद निरीक्षण तय हुआ। 2018 में शुरू हुआ था मेट्रो प्रोजेक्ट 3 अक्टूबर 2023 को पहला ट्रायल हुआ था, जब तब के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मेट्रो में सफर किया था। अब CMRS की रिपोर्ट का इंतजार है — और उसके बाद भोपाल मेट्रो आम लोगों के लिए कभी भी शुरू हो सकती है। For more info visit: deshharpal.com भोपाल मेट्रो को शुरू करने की दिशा में एक और बड़ा कदम बढ़ गया है। कमिश्नर मेट्रो रेल सेफ्टी (CMRS) की टीम अब सीधे मेट्रो ट्रैक पर निरीक्षण कर रही है। शुक्रवार सुबह 10 बजे से टीम का निरीक्षण शुरू हुआ, जो शाम 4 बजे तक चलेगा। इस दौरान टीम खुद मेट्रो में सफर कर सारे तकनीकी और सुरक्षा मानकों की जांच कर रही है। तीन दिन के भोपाल दौरे पर CMRS टीम नई दिल्ली से आई टीम ने गुरुवार को डिपो, एम्स स्टेशन तक के ट्रैक, सिग्नलिंग सिस्टम और सुरक्षा उपायों की जांच की। आरकेएमपी स्टेशन पर रेल ट्रैक की ढाल और पानी निकासी की जांच के लिए ट्रैक पर पानी छोड़ा गया। पहले दिन टीम लगभग 8 घंटे मेट्रो प्रोजेक्ट की हर डिटेल जांचती रही। सुभाषनगर डिपो में पूरे प्रोजेक्ट का प्रेजेंटेशन भी देखा गया। दूसरे दिन भी भारी निरीक्षण, मेट्रो में सफर कर होगी जांच शुक्रवार को फिर सुबह 10 बजे से निरीक्षण शुरू हुआ। टीम मेट्रो में बैठकर ट्रैक पर जा रही है ताकि मेट्रो के अंदर से ही हर तकनीकी बिंदु की सटीक जांच की जा सके। CMRS क्या करता है? किसी भी मेट्रो को यात्रियों के लिए शुरू करने से पहले अंतिम सुरक्षा स्वीकृति CMRS ही देता है।टीम इन बिंदुओं पर जांच कर रही है: अगर कोई कमी मिलती है तो उसे ठीक किए बिना मेट्रो को चलाने की अनुमति नहीं मिलती। पिछले दौरे में जो खामियां मिली थीं, उन्हें अब तक ठीक किया जा चुका है। इसलिए इस बार टीम से “ओके रिपोर्ट” मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। पहली बार भोपाल पहुंचे मेट्रो कमिश्नर नए मेट्रो कमिश्नर नीलाभ्र सेनगुप्ता पहली बार भोपाल आए हैं। टीम वही पुरानी है, इसलिए कॉमर्शियल रन में रुकावट की संभावना कम मानी जा रही है। अक्टूबर में नहीं मिली अनुमति, अब नवंबर में दौड़ने की उम्मीद सरकार ने पहले अक्टूबर में मेट्रो चलाने का लक्ष्य रखा था, लेकिन बिहार चुनाव की वजह से निरीक्षण में देरी हुई।अब माना जा रहा है कि नवंबर में भोपाल मेट्रो यात्रियों के लिए ट्रैक पर दौड़ सकती है। सीएमआरएस की रिपोर्ट सीधे राज्य सरकार को सौंपी जाएगी, और मंजूरी मिलते ही कॉमर्शियल रन की फाइनल डेट घोषित होगी।संभावना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भोपाल मेट्रो के पहले यात्री बनें। पहले ही मिल चुकी है RDSO की ओके रिपोर्ट रिसर्च डिज़ाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गेनाइजेशन (RDSO) पहले ही मेट्रो की टेस्टिंग कर अपनी ओके रिपोर्ट दे चुका है। वहीं से दस्तावेज CMRS को भेजे गए, जिसके बाद निरीक्षण तय हुआ। 2018 में शुरू हुआ था मेट्रो प्रोजेक्ट 3 अक्टूबर 2023 को पहला ट्रायल हुआ था, जब तब के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मेट्रो में सफर किया था। अब CMRS की रिपोर्ट का इंतजार है — और उसके बाद भोपाल मेट्रो आम लोगों के लिए कभी भी शुरू हो सकती है। For more info visit: www.deshharpal.com
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अन्नपूर्णा मंदिर ट्रस्ट की जमीन से अतिक्रमण हटाने पहुंची टीम पर हंगामा, आत्मदाह और सुसाइड की धमकी देकर रोका कार्रवाई

इंदौर के अन्नपूर्णा मंदिर ट्रस्ट की जमीन पर चल रहा कब्जे का विवाद शुक्रवार को उस समय तनावपूर्ण हो गया, जब कलेक्टर के निर्देश पर पुलिस, नगर निगम और प्रशासन की संयुक्त टीम अतिक्रमण हटाने पहुंची। टीम के पहुंचते ही वहां मौजूद कई परिवारों ने जमकर विरोध शुरू कर दिया। परिवारों का हंगामा, खुद को आग लगाने की कोशिश जैसे ही कार्रवाई शुरू हुई, एक महिला सहित दो युवकों ने खुद पर घासलेट उड़ेलकर आग लगाने की कोशिश की। पुलिस ने तत्‍काल पानी डालकर उन्हें काबू में किया और हिरासत में ले लिया। इसी दौरान एक युवती घर की चद्दर पर चढ़कर सुसाइड की धमकी देने लगी। महिला पुलिसकर्मी ने जोखिम उठाकर उसे नीचे उतारा, इस दौरान युवती घायल भी हो गई। चार परिवार कर रहे थे कब्जा पुलिस के अनुसार, कुल चार परिवारों ने अन्नपूर्णा मंदिर ट्रस्ट की जमीन पर अवैध कब्जा किया हुआ था। ट्रस्ट ने इस संबंध में लंबे समय से शिकायतें दी थीं। कलेक्टर शिवम वर्मा के निर्देश पर एसडीएम और तहसीलदार ने जांच की, जिसमें जमीन मंदिर की ही पाई गई। इसके बाद गुरुवार को कब्जा हटाने का आदेश जारी किया गया। बिजली पोल पर चढ़कर धमकी हंगामे के दौरान एक युवक मंदिर परिसर की दीवार और फिर बिजली के पोल पर चढ़ गया। उसने तार पकड़कर आत्महत्या की धमकी दी, ताकि कार्रवाई रुक सके। हालांकि प्रशासन पहले ही एहतियातन बिजली सप्लाई बंद करवा चुका था। पुलिस ने काफी प्रयास के बाद युवक को नीचे उतारा। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई जारी तनाव और विरोध के बावजूद नगर निगम की टीम अतिक्रमण हटाने में जुटी रही। पूरे मामले में प्रशासन ने स्थिति पर नियंत्रण पा लिया है और आगे की कार्रवाई जारी है। For more info visit: www.deshharpal.com
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इंदौर में चूहों का कहर: एमवाय अस्पताल के बाद अब शास्त्री ब्रिज और गांधी प्रतिमा के नीचे हजारों बिल, निगम ने शुरू की कार्रवाई

इंदौर में चूहों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। सितंबर में एमवाय अस्पताल में दो मासूमों की उंगलियां चूहों ने कुतर दी थीं, और अब शहर के शास्त्री ब्रिज व रीगल तिराहा स्थित गांधी प्रतिमा के नीचे चूहों के बिलों ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। शास्त्री ब्रिज की सड़क चूहों के कारण धंसी 2 नवंबर को शास्त्री मार्केट की तरफ जाने वाले शास्त्री ब्रिज की सड़क अचानक धंस गई, जिससे लगभग 5 फीट गहरा और 6 फीट लंबा गड्ढा बन गया था।जांच में पाया गया कि सड़क के नीचे चूहों के बिल होने से मिट्टी कमजोर हो गई थी। निगम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर रोड बंद कराई और ट्रैफिक डायवर्ट किया। नगर निगम के जनकार्य प्रभारी राजेंद्र राठौर ने बताया कि गड्ढे के अंदर अब चूहों के लिए ट्रीटमेंट कराया जाएगा, ताकि वे दोबारा वहां बिल न बना सकें।उन्होंने कहा, “गड्ढे के अंदर दीवार बनाकर उसे प्लास्टर किया जा रहा है। ट्रीटमेंट के बाद ब्लॉक लगाकर सड़क को पूरी तरह दुरुस्त किया जाएगा।” गांधी प्रतिमा परिसर में भी हजारों चूहे मिले इसी बीच, रीगल तिराहा स्थित गांधी प्रतिमा परिसर में भी चूहों की भरमार देखने को मिली है।राठौर ने बताया कि प्रतिमा के नीचे और आसपास हजारों चूहों के बिल बने हुए हैं। उन्होंने कहा, “हमें कई शिकायतें मिली थीं कि यहां पक्षियों को दाना डालने से चूहों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हमने स्थल का निरीक्षण किया है और विशेषज्ञों की टीम से परीक्षण कराया जाएगा।” बड़ा हादसा होने की आशंका राठौर ने चेतावनी दी कि अगर चूहों की समस्या को समय रहते नहीं सुलझाया गया तो भविष्य में किसी बड़े हादसे की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।नगर निगम जल्द ही एक एक्शन प्लान तैयार कर इन दोनों स्थलों पर स्थायी समाधान की दिशा में काम करेगा। 👉 ऐसी ही स्थानीय और सटीक खबरों के लिए पढ़ें:www.deshharpal.com
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खेत से लौट रहे किसान को बाइक सवार ने मारी टक्कर, मौके पर मौत — गांव में छाया मातम

खंडवा जिले के पंधाना क्षेत्र के ग्राम निहालवाड़ी में बुधवार देर रात एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। हादसे में 48 वर्षीय किसान लक्ष्मीनारायण पिता हीरालाल पटेल की मौके पर ही मौत हो गई। वह रात में अपने खेत से पैदल घर लौट रहे थे, तभी पीछे से आ रहे एक बाइक सवार ने जोरदार टक्कर मार दी। आरोपी भी उसी गांव का, हादसे के बाद बेहोश हुआ हादसे में बाइक सवार युवक भी गंभीर रूप से घायल हो गया। बताया जा रहा है कि वह भी निहालवाड़ी गांव का ही रहने वाला है। टक्कर के बाद वह सड़क पर गिरकर बेहोश हो गया था। ग्रामीणों की मदद से उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज जारी है। परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़ लक्ष्मीनारायण की मौत से उनके परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनके पीछे एक बेटा और दो बेटियां हैं। पिता की मौत की खबर मिलते ही परिवार और पूरे गांव में मातम छा गया। ग्रामीणों ने बताया कि लक्ष्मीनारायण मेहनती और शांत स्वभाव के व्यक्ति थे, जो रोज की तरह उस दिन भी खेत से घर लौट रहे थे। पुलिस ने मर्ग कायम कर शुरू की जांच घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा। गुरुवार सुबह पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।गांव के संगमेश्वर मुक्तिधाम में उनका अंतिम संस्कार किया गया। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। 👉 ऐसी ही और खबरों के लिए पढ़ें: www.deshharpal.com
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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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