मध्यप्रदेश हाईकोर्ट (Madhya Pradesh High Court) ने मंगलवार को चर्चित छतरपुर मर्डर केस (Chhatarpur Murder Case) में बड़ा फैसला सुनाते हुए केमिस्ट्री प्रोफेसर ममता पाठक (Mamta Pathak) की अपील खारिज कर दी। कोर्ट ने सेशन कोर्ट द्वारा सुनाई गई उम्रकैद (Life Imprisonment) की सजा को बरकरार रखा है।
Murder Case की पूरी कहानी
अप्रैल 2021 में छतरपुर जिले में ममता पाठक पर आरोप लगा कि उन्होंने अपने पति डॉ. नीरज पाठक (Dr. Neeraj Pathak) को नींद की गोलियां खिलाने के बाद इलेक्ट्रिक शॉक (Electrocution) देकर मार डाला।
- पुलिस ने IPC धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया।
- केस में सबूत के रूप में पीड़ित की आवाज़ की रिकॉर्डिंग, ड्राइवर के बयान और ममता का घटना के बाद का व्यवहार अहम साबित हुआ।
- 2022 में सेशन कोर्ट ने ममता को दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई।
- 2024 में अपील लंबित होने के दौरान उन्हें जमानत मिली।
Courtroom में Viral Chemistry Argument
अप्रैल 2025 में जब ममता पाठक ने हाईकोर्ट में खुद अपनी पैरवी (Self-Representation) की, तो उनका एक बयान सोशल मीडिया पर वायरल हुआ।
“पोस्टमार्टम के दौरान थर्मल बर्न और इलेक्ट्रिक बर्न के निशान में फर्क करना संभव नहीं है। इसके लिए केमिकल एनालिसिस ज़रूरी है।”
जज ने उनसे पूछा – “आप प्रोफेसर हैं?” ममता ने हां में जवाब दिया। कोर्टरूम का यह वीडियो इंटरनेट पर छा गया और इसे लोग “Chemistry Masterclass in Court” कहने लगे।
High Court का Final Decision
30 जुलाई 2025 को हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए कहा कि सेशन कोर्ट का आदेश सही है। सबूतों के आधार पर यह स्पष्ट है कि ममता पाठक ने पति की हत्या की थी, इसलिए उनकी सजा में कोई बदलाव नहीं होगा।
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