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रायसेन की 6 साल की मासूम से दरिंदगी के आरोपी सलमान के चौंकाने वाले खुलासे, भोपाल में खुलेआम घूमता रहा 4 दिन

रायसेन के गौहरगंज में 6 साल की मासूम के साथ हुई दर्दनाक घटना के आरोपी सलमान इस समय हमीदिया अस्पताल में भर्ती है और उसकी हालत में लगातार सुधार हो रहा है। पुलिस ने इस मामले में सलमान को फरारी में मदद करने वाले तीन युवकों को गिरफ्तार कर भोपाल जेल भेज दिया है। सुरक्षा कारणों से तीनों को वहीं रखा गया है। पूछताछ में सलमान का बड़ा खुलासा – भोपाल में 4 दिन तक खुलेआम रहा, मजदूरी भी तलाशता रहा पुलिस पूछताछ में सलमान ने हैरान कर देने वाले खुलासे किए। उसने बताया कि घटना के बाद वह चार दिन तक भोपाल में ही छिपा रहा और इस दौरान— जैसे इलाकों में फरारी काटता रहा। सबसे हैरानी की बात यह है कि वह खुलेआम पीठे पर मजदूरी ढूंढने खड़ा रहता, चोरी का मोबाइल बेचकर खाना खाता और उसका फोटो सोशल मीडिया पर वायरल होता रहा—लेकिन फिर भी वह पकड़ा नहीं गया। बुधवार को रायसेन पुलिस ने पुष्टि की कि सलमान इन दिनों में भोपाल में ही खुलेआम घूमता रहा था। कैसे पकड़ा गया सलमान? – कोई पहचान पत्र नहीं, घटना से भी किया इंकार 27 नवंबर की रात करीब 11:15 बजे सेक्टर 11 में लोगों को सलमान संदिग्ध लगा।उसे पकड़ने वाले रिजवान ने बताया कि— जब उससे पहचान पत्र मांगा गया, तो उसके पास आधार सहित कोई भी दस्तावेज नहीं मिला।पूछने पर उसने खुद को रेप का आरोपी मानने से इनकार कर दिया और घटना की जानकारी होने तक से मना कर दिया। करीब डेढ़ घंटे में रायसेन पुलिस पहुंची और उसे अपने साथ ले गई।अगली सुबह उसके एनकाउंटर की खबर आई, तब जाकर पक्का हुआ कि पकड़ा गया व्यक्ति वास्तव में सलमान ही था। तीन युवक जेल भेजे गए, दो और संदिग्धों की जांच जारी गौहरगंज पुलिस ने सलमान को शरण देने के आरोप में तीन युवकों को JMFC कोर्ट में पेश कर भोपाल जेल भेज दिया।पुलिस अब भोपाल के दो और युवकों की भूमिका की जांच कर रही है, जो लेबर ठेकेदारी से जुड़े हैं और सलमान की मदद के शक में हैं। मासूम बच्ची अस्पताल से डिस्चार्ज, हालत में सुधार एसपी आशुतोष गुप्ता ने बताया कि मासूम की हालत में सुधार होने के बाद उसे अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है और वह अब अपने घर पहुंच चुकी है।परिवार के लिए यह राहत की बड़ी खबर है, लेकिन बच्ची और परिवार जो दर्द झेलकर निकले हैं, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है। For more information, visit: www.deshharpal.com
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इंदौर BRTS हटाने में सुस्ती: हाईकोर्ट की सख्ती के बाद भी सिर्फ 300 मीटर हिस्सा ही टूटा, शहरवासी परेशान

इंदौर में BRTS की एक साइड हटाने को लेकर हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए नगर निगम को 15 दिन का समय दिया था, लेकिन ग्राउंड पर हालत बिल्कुल अलग है। तय समय बीतने के बाद भी अब तक सिर्फ 300 मीटर हिस्सा ही पूरी तरह हटाया जा सका है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि जिस कंपनी को तोड़फोड़ का ठेका दिया गया था, उसी ने यह काम आगे कबाड़ी को सौंप दिया। शहर में कुल 19 बस स्टॉप हैं, लेकिन अब तक सिर्फ एक ही बस स्टॉप पूरी तरह हट पाया है। एक-एक बस स्टॉप तोड़ने में 4–5 दिन लग रहे हैं। शहर की सबसे बड़ी समस्या: 7 किलोमीटर हिस्सा अभी तक जस का तस शिवाजी वाटिका से लेकर देवास नाका तक लगभग 7 किलोमीटर BRTS कॉरिडोर अभी तक नहीं टूट सका। इसी हिस्से में पलासिया, गीता भवन, एलआईजी, रसोमा, विजयनगर और सत्य सांई जैसे बड़े चौराहे आते हैं, जहां रोज भारी जाम लगता है। लोगों की उम्मीद थी कि BRTS हटने से ट्रैफिक में राहत मिलेगी, लेकिन सुस्ती से काम होते देख शहरवासी निराश हैं। कितना हिस्सा टूटा? (एक नजर में) ✔ 300 मीटर हिस्सा पूरी तरह हटाया गया जीपीओ चौराहे से भाजपा कार्यालय तक का हिस्सा हटा दिया गया है और अस्थाई बैरिकेड भी लगा दिए गए हैं। ✔ 5 किमी हिस्से की एक साइड की रेलिंग हटाई गई राजीव गांधी चौराहे से भंवरकुआं, नौलखा, इंदिरा प्रतिमा और जीपीओ तक की एक साइड की रेलिंग हटा दी गई है।लेकिन बीच के बस स्टॉप अभी भी खड़े हैं। ✔ सिर्फ एक बस स्टॉप पूरा हट पाया कंपनी का दावा: “4–5 दिन में एक साइड हटा देंगे” काम कर रहे कर्मचारी रऊफ भाई का कहना है कि वे 11.5 किमी लंबे BRTS की एक साइड 4–5 दिन में हटाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन ट्रैफिक की वजह से काम धीमा है। बस स्टॉप बाद में तोड़े जाएंगे क्योंकि अभी सिर्फ रेलिंग हटाने का आदेश मिला है। कबाड़ी को दिया गया काम, इसलिए और सुस्त हुई रफ्तार बीआरटीएस हटाने का ठेका पहले राजगढ़ के ठेकेदार दिनेश यादव को दिया गया था, लेकिन उसने काम करने से मना कर दिया।बाद में यह ठेका एक स्थानीय सहयोगी को और फिर उससे एक कबाड़ी को दे दिया गया। तीन–तीन हाथ बदलकर पहुंचे इस काम में तेजी आ ही नहीं पा रही। सबसे मुश्किल काम: बस स्टॉप हटाना रेलिंग और बीम हटाना आसान है, लेकिनबस स्टॉप तोड़ने व नया सेंटर डिवाइडर बनाने में सबसे ज्यादा समय लगेगा। तीन एजेंसियों को काम सौंपा गया है, लेकिन 6 महीने सिर्फ टेंडर और प्रक्रियाओं में ही निकल गए।अब भी काम की रफ्तार बेहद धीमी है। For more information, visit: www.deshharpal.com
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जबलपुर: बिरसा मुंडा जयंती कार्यक्रम में पहुंचे 62 वर्षीय बुजुर्ग 13 दिन से लापता, परिजन बेहाल—प्रशासन पर सवाल

जबलपुर के गैरीसन मैदान में 15 नवंबर को आयोजित बिरसा मुंडा जयंती और जनजातीय गौरव दिवस कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे 62 वर्षीय किशन लाल कोल रहस्यमय तरीके से गायब हो गए। कार्यक्रम को 13 दिन हो चुके हैं, लेकिन अब तक बुजुर्ग का कोई पता नहीं चला है। परिजनों की हालत बेहद खराब है और उन्हें अनहोनी की आशंका सता रही है। इस बड़े आयोजन में राज्यपाल मंगुभाई पटेल, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव समेत कई मंत्री और विधायक मौजूद थे। खाना खाकर बस के पास बैठे थे, फिर अचानक गायब हो गए किशन लाल कोल माढ़ोताल थाना क्षेत्र के मंगेला ग्राम के निवासी हैं। गांव के सरपंच द्वारा कार्यक्रम के लिए बस की व्यवस्था की गई थी, जिसमें वे अन्य ग्रामीणों के साथ जबलपुर आए थे। कार्यक्रम में साथ गए ग्रामीण गरीब लाल ने बताया कि खाने के बाद किशन लाल बस के पास आकर बैठ गए थे। जब बस गांव लौटने के लिए चली, तो वे अचानक गायब मिले। काफी देर तलाश के बाद भी उनका कोई पता नहीं चला। रात करीब 10 बजे गांव लौटकर परिजनों को इसकी जानकारी दी गई। 13 दिन से लगातार तलाश, पर कोई सुराग नहीं ग्रामीणों और परिवार के लोगों ने लगातार खोजबीन की, लेकिन अब तक कोई भी जानकारी नहीं मिल सकी है। कैंट थाना पुलिस ने गुमशुदगी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कांग्रेस ने उठाए सवाल—कहा, प्रशासन जिम्मेदार बुजुर्ग के सरकारी कार्यक्रम से ही लापता होने पर कांग्रेस ने सरकार और प्रशासन पर सवाल खड़े किए हैं। आदिवासी कांग्रेस संघ के जिला अध्यक्ष निलेश बरकड़े ने कहा कि जब पूरा कार्यक्रम राज्य सरकार और जिला प्रशासन की देखरेख में था, और ग्रामीणों को सरकारी व्यवस्था से लाया गया था, तो उन्हें सुरक्षित वापस पहुंचाना भी प्रशासन की जिम्मेदारी थी।चेतावनी देते हुए उन्होंने कहा कि यदि जल्द ही किशन लाल का पता नहीं चलता, तो उग्र आंदोलन किया जाएगा। पुलिस की खोज जारी थाना प्रभारी पुष्पेंद्र पटले ने बताया कि कई टीमें तलाश में लगाई गई हैं। संभावना यह भी है कि बुजुर्ग बिना जानकारी दिए किसी रिश्तेदार के यहां चले गए हों। सभी संभावित जगहों पर खोज की जा रही है। परिजन बोले—शुरू से गंभीरता होती तो शायद मिल जाते लगातार 13 दिनों से कोई खबर न मिलने पर परिजन बेहद परेशान हैं। उनका कहना है कि यदि शुरू से प्रशासन ने गंभीरता दिखाई होती, तो शायद आज किशन लाल सुरक्षित घर लौट आए होते। For more information, visit: www.deshharpal.com
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ग्वालियर: S-3 संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाखन सिंह बौद्ध पर देर रात हमला, कार का कांच टूटा—हमलावर बोले “बहुत नेतागिरी करता है”

ग्वालियर में गुरुवार देर रात एक हैरान कर देने वाली घटना हुई। सम्यक समाज संघ (S-3) के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाखन सिंह बौद्ध पर बाइक सवार चार बदमाशों ने हमला कर दिया। लाखन शादी समारोह से लौट रहे थे, तभी उनकी कार के सामने अचानक दो बाइक आ गईं। हमलावरों ने कार रुकवाने की कोशिश की और लाखन को बाहर खींचने की कोशिश भी की। लेकिन लाखन ने तुरंत गेट लॉक कर कार आगे बढ़ा दी। तभी बदमाशों ने पीछे से पथराव कर दिया, जिससे कार का पिछला कांच टूट गया। घटना गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात करीब 1:40 बजे सुरेश नगर सरकारी मल्टी के पास हुई। हमले के बाद लाखन सीधे थाटीपुर थाने पहुंचे और शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने अज्ञात चार आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर तलाश शुरू कर दी है। महिला पदाधिकारी भी थीं कार में 42 वर्षीय लाखन सिंह मुरार के मुगलपुरा स्थित इंटरनेशनल बुद्ध विहार में रहते हैं। उनके साथ उस रात S-3 की प्रदेश सुरक्षा अधिकारी दीपिका बौद्ध भी थीं। लाखन का कहना है कि हमले के दौरान उनकी जान को खतरा था। हमलावर बोले—“बहुत नेतागिरी करता है” जैसे ही लाखन ने कार तेजी से आगे बढ़ाई, बदमाश भी बाइक से पीछे लग गए और करीब आधा किलोमीटर तक पीछा करते रहे। आगे पुलिस प्वाइंट देखकर वे भाग गए। लाखन सिंह ने बताया कि हमलावर लगातार गालियां दे रहे थे और कह रहे थे—“ये बहुत नेतागिरी करता है, आज इसे सबक सिखाना है।” लाखन का कहना है कि उन्हें पिछले कुछ समय से टारगेट किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर शाम तक पुलिस आरोपियों की पहचान नहीं करती, तो समर्थकों में नाराज़गी बढ़ सकती है। 2018 के जातिगत उपद्रव में आया था संगठन का नाम S-3 संगठन 2018 के ग्वालियर जातिगत उपद्रव के बाद सुर्खियों में आया था। उस समय लाखन सिंह पर भी उपद्रव भड़काने की FIR दर्ज हुई थी, हालांकि बाद में मामले वापस ले लिए गए। CCTV की मदद से तलाश जारी थाटीपुर पुलिस घटनास्थल और आसपास लगे कैमरों की फुटेज खंगाल रही है।एसएसपी धर्मवीर सिंह का कहना है कि जांच तेज़ी से चल रही है और आरोपी जल्द पकड़ लिए जाएंगे। For more information, visit: www.deshharpal.com
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रायसेन में 6 साल की बच्ची से दुष्कर्म का आरोपी ‘सलमान’ शॉर्ट एनकाउंटर में घायल, लोगों में गुस्सा

मध्य प्रदेश के रायसेन में 6 साल की बच्ची से दुष्कर्म करने वाला आरोपी सलमान गुरुवार देर रात पुलिस की कार्रवाई में घायल हो गया। पुलिस उसे गौहरगंज ले जा रही थी, तभी उसने भागने की कोशिश की। खुद को बचाने के लिए पुलिस ने उसके पैर में गोली मार दी।फिलहाल आरोपी का इलाज हमीदिया अस्पताल में चल रहा है और उसकी हालत खतरे से बाहर है। कैसे हुआ था वारदात का खुलासा 21 नवंबर की शाम आरोपी सलमान बच्ची को चॉकलेट दिलाने के बहाने जंगल में ले गया और उसके साथ दुष्कर्म कर फरार हो गया। बच्ची रोती हुई जंगल में मिली।घटना के बाद इलाके में उबाल था और लोगों ने आरोपी के एनकाउंटर की मांग की। लंदन के बिजनेसमैन ने बढ़ाया मदद का हाथ सुल्तानपुर निवासी और लंदन में बिजनेस करने वाले रविराज सिंह (रॉबी) ने आरोपी की गिरफ्तारी पर 1 लाख रुपए देने की घोषणा की थी।रॉबी ने कहा कि वे बच्ची की पूरी शिक्षा का खर्च उठाएंगे। 6 दिन बाद गिरफ्तारी गुरुवार रात पुलिस ने आरोपी को भोपाल के गांधी नगर से गिरफ्तार किया।अब्दुल, रिजवान और आसिफ नाम के युवाओं ने आरोपी की पहचान कर पुलिस को सूचना दी।इन युवाओं ने आग्रह किया कि इनाम की राशि बच्ची को दी जाए। कैसे हुई मुठभेड़? गौहरगंज ले जाते समय पुलिस गाड़ी जंगल में पंक्चर हो गई। इसी दौरान सलमान ने थाना प्रभारी की पिस्टल छीनकर भागने की कोशिश की। पुलिस ने जवाबी कार्रवाई की और उसे पैर में गोली लगी।फॉरेंसिक टीम ने मौके की जांच कर पुलिस के संघर्ष के सबूत भी जुटाए हैं। विधायक ने की कड़ी सजा की मांग विधायक रामेश्वर शर्मा ने कहा कि सलमान जैसे दरिंदों को फांसी की सजा मिलनी चाहिए ताकि ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। हिंदू संगठनों का प्रदर्शन हिंदू संगठनों ने हमीदिया अस्पताल के बाहर पहुंचकर आरोपी को कड़ी सजा देने की मांग की। बच्ची की हालत गंभीर, ICU में भर्ती बच्ची के शरीर पर गंभीर चोटें थीं और उसके निजी अंगों पर गहरी क्षति हुई है।डॉक्टरों ने कई सर्जरी की हैं। बच्ची फिलहाल ICU में है और धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।डॉक्टरों के अनुसार पूरी रिकवरी में 6 महीने लग सकते हैं। मां ने बताया—“मेरी बच्ची को बहुत मारा गया… उसके गाल सूज गए थे और शरीर पर गहरे निशान थे।” CM ने रायसेन SP को हटाया गिरफ्तारी में देरी और बढ़ते प्रदर्शनों के चलते मुख्यमंत्री मोहन यादव ने रायसेन SP को हटाकर नए SP की नियुक्ति की है। For more info, visit: www.deshharpal.com
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MP में बच्ची से रेप का आरोपी ‘शॉर्ट एनकाउंटर’ में घायल, पुलिस कस्टडी से भागने की कोशिश कर रहा था

MP में बच्ची से रेप के गंभीर आरोप में पकड़ा गया आरोपी पुलिस कस्टडी से फरार होने की कोशिश कर रहा था। पुलिस के मुताबिक, आरोपी को मंगलवार देर रात जांच के लिए ले जाया जा रहा था, तभी उसने मौके का फायदा उठाकर भागने की कोशिश की।पुलिस ने चेतावनी दी, लेकिन न मानने पर उसके पैर में गोली मारनी पड़ी। गोली लगने से आरोपी घायल हो गया, जिसे तुरंत अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार उसकी हालत फिलहाल स्थिर बताई जा रही है। स्थानीय लोगों का कहना है कि ऐसे मामलों में पुलिस की त्वरित कार्रवाई बच्चों की सुरक्षा को लेकर समाज में भरोसा बढ़ाती है। वहीं पीड़ित परिवार अभी भी सदमे में है और न्याय की उम्मीद लगाए बैठा है। पुलिस ने बताया कि आरोपी पर पहले से भी कई गंभीर मामले दर्ज हैं। उसके फरार होने की आशंका को देखते हुए सुरक्षा और कड़ी की गई थी। घटना की सूचना मिलते ही इलाके में तनाव का माहौल बन गया, लेकिन प्रशासन ने हालात अब नियंत्रण में होने की बात कही है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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VIT

VIT Sehore Campus प्रदर्शन छात्रों ने बस और वीसी की कार में लगाई आग, हालात बेकाबू

मध्य प्रदेश के सीहोर स्थित VIT University में मंगलवार देर रात हालात अचानक तनावपूर्ण हो गए। हॉस्टल और कैंपस में पानी व भोजन की खराब क्वालिटी, बढ़ते बीमारी के मामलों और मैनेजमेंट की लापरवाही के आरोपों के बीच छात्रों का गुस्सा फूट पड़ा। कुछ ही देर में शांत माहौल एक भीषण विरोध और आगजनी में बदल गया। विरोध हिंसक, Students ने बस और VC की कार जलाई प्रदर्शन के दौरान नाराज़ छात्रों ने कॉलेज की एक बस में आग लगा दी, साथ ही Vice Chancellor की कार, एक एंबुलेंस, और कई वाहनों को तोड़फोड़ कर नुकसान पहुंचाया।छात्रों का आरोप है कि उन्होंने कई दिनों से शिकायतें कीं, लेकिन कॉलेज प्रशासन ने गंभीर मुद्दों को नज़रअंदाज़ किया। 4000+ Students Protest: कैंपस में भारी पुलिस बल तैनात रिपोर्ट्स के अनुसार 4000 से अधिक छात्र विरोध प्रदर्शन में शामिल थे।स्थिति बिगड़ती देख प्रशासन ने तुरंत पुलिस बल बुलाया। पुलिस ने छात्रों से बातचीत की और बाद में हालात पर नियंत्रण किया। कुछ समय तक कैंपस को अर्ध-सैनिक क्षेत्र (Cantonment जैसी स्थिति) में बदल दिया गया। Water-Food Quality पर सवाल, Jaundice फैलने का दावा कई छात्रों ने दावा किया है कि कैंपस में पानी की गुणवत्ता बेहद खराब है, जिससे जॉन्डिस (Jaundice) के मामले बढ़ रहे हैं।हालांकि अभी तक किसी आधिकारिक स्वास्थ्य विभाग की रिपोर्ट ने इसे पुष्टि नहीं की है।छात्रों का कहना है कि हॉस्टल का खाना भी लंबे समय से खराब है लेकिन प्रशासन कार्रवाई नहीं करता। Administrative Action: Holiday घोषित, क्लासेस स्थगित घटना के बाद VIT कॉलेज प्रशासन ने तत्काल छुट्टी घोषित कर दी।क्लासेस और सभी गतिविधियां अगले आदेश तक रोक दी गईं।छात्र फिलहाल हॉस्टल में ही रहेंगे, लेकिन कैंपस में अतिरिक्त सुरक्षा तैनात है। CCTV जांच शुरू, हिंसा में शामिल छात्रों की पहचान होगी सीहोर पुलिस ने इस मामले में जांच शुरू कर दी है।कैंपस के CCTV फ़ुटेज खंगाले जा रहे हैं ताकि उन छात्रों की पहचान हो सके जिन्होंने आगजनी, तोड़फोड़ और हिंसा में सीधा हिस्सा लिया। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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भोपाल के गौतम नगर में तोड़फोड़ करने वाले बदमाशों का नया वीडियो वायरल, पुलिस को खुलेआम दी चुनौती

भोपाल के गौतम नगर थाना क्षेत्र की ग्रीन पार्क कॉलोनी में शनिवार देर रात वाहनों में तोड़फोड़ करने वाले बदमाशों ने अब सोशल मीडिया पर नया वीडियो जारी कर पुलिस को खुली चुनौती दे दी है। साथियों की गिरफ्तारी के बाद सामने आए इस वीडियो में आरोपी कहते दिख रहे हैं—“पहली बार जेल नहीं जा रहे… और हमें जेल जाने से कोई डर नहीं लगता। जिन लोगों ने हमारी मुखबिरी की है, उन्हें नहीं छोड़ेंगे।” एक आरोपी तो हाथ में चाकू दिखाकर यह तक कहता है—“मुखबिरों को इसी चाकू से काटेंगे।” वीडियो में बदमाश यह भी दावा कर रहे हैं कि अगर पुलिस उन्हें पकड़ेगी, तो वे खुलासे करेंगे कि किसके कहने पर वारदात की गई। अड़ीबाजी के विवाद से शुरू हुआ मामला फरियादी चंदन इंदौरिया के अनुसार, घटना के कुछ घंटे पहले वह सीहोर से लौटे थे और अपनी कार घर के सामने पार्क की थी। तभी ‘लड्डू’ नाम का आरोपी और उसके साथी वहां पहुंचे और कार देखकर गालियां देने लगे।जब चंदन ने विरोध किया, तो आरोपियों ने उस पर हमला कर दिया। डर के मारे चंदन घर में छिप गए। इसके बाद बदमाशों ने गली में खड़ी अन्य गाड़ियों के कांच भी तोड़ दिए और मौके से फरार हो गए। सोशल मीडिया पर धमकी भरा लाइव वीडियो घटना के बाद पुलिस ने कई आरोपियों को गिरफ्तार किया। इसके बावजूद कुछ बदमाश सोशल मीडिया पर लाइव आए और पुलिस को चुनौती देते दिखे।वीडियो में एक युवक हाथ में चाकू लहराते हुए कह रहा है—“हमें पुलिस पकड़कर दिखाए… तब बताएंगे किसने तोड़फोड़ करवाई।” पुलिस का कहना है कि वीडियो तकनीकी जांच में लिया गया है और आरोपियों की तलाश तेज कर दी गई है। चार आरोपी गिरफ्तार, बाकी की तलाश जारी पुलिस ने अब तक चार बदमाशों को गिरफ्तार कर लिया है। ये सभी पूर्व से ही आपराधिक गतिविधियों में शामिल रहे हैं। गिरफ्तार आरोपी—नाम और अपराध रिकॉर्ड पुलिस फरार बदमाशों की तलाश कर रही है और जल्द गिरफ्तारी की संभावना जताई है। 👉 More Information ke liye visit karein: deshharpal.com
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IAS संतोष वर्मा का विवादित बयान विवादों में, माफी मांगकर कहा—मेरे शब्द तोड़-मरोड़कर पेश किए गए

अजाक्स के प्रांताध्यक्ष और सीनियर IAS अधिकारी संतोष वर्मा ब्राह्मण समाज की बेटियों पर दिए गए अपने विवादित बयान को लेकर घिर गए हैं। बयान के वायरल होने के बाद अब उन्होंने माफी मांग ली है। दैनिक भास्कर से बातचीत में वर्मा ने कहा कि उनके बयान को संदर्भ से हटकर चलाया गया है।उन्होंने कहा—“मेरा पूरा भाषण 27 मिनट का था, लेकिन 2 सेकंड की क्लिप चलाकर मेरे बयान को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया।” क्या कहा था संतोष वर्मा ने? रविवार को हुए अजाक्स कार्यक्रम में संतोष वर्मा को प्रांताध्यक्ष चुना गया था। इसी दौरान मंच से उन्होंने कहा था—“जब तक मेरे बेटे को कोई ब्राह्मण अपनी बेटी दान नहीं देता या उससे संबंध नहीं बनता, तब तक आरक्षण जारी रहना चाहिए।” यह बयान सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ, जिसके बाद सवर्ण समाज सहित कई संगठनों ने तीखी प्रतिक्रिया दी। सपाक्स का कड़ा विरोध—‘इतना निकृष्ट बयान कोई नहीं दे सकता’ सपाक्स के राष्ट्रीय संयोजक डॉ. हीरालाल त्रिवेदी ने वर्मा के शब्दों को निकृष्ट, निंदनीय और शर्मनाक बताते हुए कहा—“जो अपनी बेटी और दूसरे की बेटी में फर्क करे, उसके लिए कोई शब्द नहीं है। चाहे अजाक्स, सपाक्स या अपाक्स—ऐसे लोगों का बहिष्कार होना चाहिए। सरकार को भी ऐसे अधिकारी को पद से हटाना चाहिए।” त्रिवेदी ने मांग की कि पुलिस तुरंत FIR दर्ज करे और वर्मा की गिरफ्तारी हो। मंत्रालय में आज विरोध प्रदर्शन IAS संतोष वर्मा के बयान के खिलाफ आज मंत्रालय में बड़ा प्रदर्शन होने जा रहा है।सवर्ण कर्मचारी उपमुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ल को ज्ञापन सौंपकर कार्रवाई की मांग करेंगे। मंत्रालय सेवा अधिकारी कर्मचारी संघ के अध्यक्ष इंजीनियर सुधीर नायक ने कहा कि वे वर्मा के खिलाफ IAS सर्विस रूल के उल्लंघन में कार्रवाई की मांग करेंगे। सांस्कृतिक संगठनों का भी विरोध भोपाल हिंदू उत्सव समिति और संस्कृति बचाओ मंच ने भी इस बयान को आपत्तिजनक बताते हुए सख्त नाराजगी जताई है। ब्राह्मण समाज ने की सख्त कार्रवाई की मांग अखिल भारतीय ब्राह्मण समाज के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र मिश्र ने कहा—“जब केंद्र और राज्य सरकार बेटी-बचाओ, बेटी-बढ़ाओ, लाड़ली लक्ष्मी और बहना योजनाएं चला रही हों… तब एक IAS अधिकारी द्वारा बेटियों पर ऐसा बयान देना अक्षम्य है।” उन्होंने साफ कहा कि जब तक IAS संतोष वर्मा को निलंबित कर गिरफ्तार नहीं किया जाता, ब्राह्मण समाज शांत नहीं बैठेगा। 👉 More Information ke liye visit karein: deshharpal.com
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गुना में पेंशनरों के लिए बड़ी राहत: अब घर बैठे बनेगा जीवन प्रमाणपत्र, सिर्फ 70 रुपए में पूरी होगी प्रक्रिया

गुना के सरकारी पेंशनरों के लिए एक खुशखबरी है। अब उन्हें जीवन प्रमाणपत्र जमा कराने के लिए न तो कोषागार जाना पड़ेगा, न बैंक और न ही किसी विभाग के चक्कर लगाने होंगे।अब यह सुविधा आपके घर पर ही उपलब्ध है—वो भी सिर्फ ₹70 में। पेंशनर अपने नजदीकी डाकघर के पोस्टमैन या ग्रामीण डाक सेवक के जरिए घर बैठे जीवन प्रमाणपत्र बनवा सकते हैं। तैयार होते ही यह प्रमाणपत्र सीधा संबंधित विभाग तक ऑनलाइन भेज दिया जाएगा, जिससे पेंशन में किसी भी तरह की देरी नहीं होगी। यह जानकारी गुना डाक संभाग के अधीक्षक ओ.पी. चतुर्वेदी ने दी। डिजिटल इंडिया को मजबूत करने वाली पहल अधीक्षक ने बताया कि यह सेवा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के डिजिटल इंडिया विजन का बड़ा हिस्सा है।सरकारी सेवाओं को सीधे लोगों के घर तक पहुंचाने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री मोदी ने अपने मन की बात और संविधान दिवस संबोधन में भी बताया था कि डिजिटल जीवन प्रमाणपत्र जैसी सुविधाएं देशभर के वरिष्ठ नागरिकों के जीवन को आसान बना रही हैं। 10 मिनट में जीवन प्रमाणपत्र जारी – गुना में अनोखी पहल इसी पहल के तहत गुना डाक संभाग की टीम ने गुना विधायक पन्नालाल शाक्य के घर जाकर सिर्फ 10 मिनट में उनका जीवन प्रमाणपत्र तैयार कर दिया। डाक विभाग की टीमें बीमार और वृद्ध पेंशनरों के घर-घर जाकर यह सेवा दे रही हैं, ताकि किसी बुजुर्ग को परेशान न होना पड़े। डाक विभाग: अब सिर्फ डाक नहीं, डिजिटल सेवाएँ भी आपके द्वार पर डाक विभाग लगातार नागरिक-केंद्रित सेवाओं को आसान बनाने की दिशा में काम कर रहा है।इंडिया पोस्ट पेमेंट्स बैंक के माध्यम से अब केंद्र और राज्य सरकार के सभी विभागों के पेंशनरों को घर बैठे डिजिटल लाइफ सर्टिफिकेट बनाने की सुविधा दी जा रही है। अति-वरिष्ठ और दिव्यांग पेंशनरों को विशेष प्राथमिकता दी जा रही है। इस तरह पाएं सुविधा – पेंशनर बस ये दस्तावेज दें पेंशनर अपने क्षेत्र के पोस्टमैन या निकटतम डाकघर से संपर्क कर सकते हैं। इसके लिए सिर्फ यह जानकारी देनी होगी: प्रमाणपत्र बनते ही पेंशनर के मोबाइल पर कन्फर्मेशन मैसेज आएगा।अगले दिन वे इसे jeevanpramaan-gov-in पर लॉगिन करके ऑनलाइन देख भी सकते हैं और चाहें तो उसका प्रिंट भी निकाल सकते हैं। For More Info:www.deshharpal.com
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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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