नागौर। राजस्थान के नागौर जिले की खींवसर पुलिस ने रात के समय घरों में चोरी और नकबजनी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने गिरोह के पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी वारदात वाली जगह के पास 18 चक्का ट्रेलर खड़ा कर चोरी की योजना बनाते थे और पुलिस से बचने के लिए वारदात के दौरान मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करते थे।
ASP आसाराम चौधरी के अनुसार, गिरोह राजस्थान और मध्यप्रदेश में 100 से ज्यादा वारदात कर चुका है। पिछले दो वर्षों में गिरोह ने करीब 10 करोड़ रुपए से अधिक की ज्वेलरी और नकदी चोरी करने का दावा पुलिस ने किया है।
8.30 लाख की चोरी के बाद खुला मामला
पुलिस के मुताबिक, 6 अगस्त को बिरलोका निवासी रतनसिंह के घर करीब 8.30 लाख रुपए की चोरी हुई थी। इसके बाद पुलिस ने आसपास लगे CCTV कैमरों की जांच शुरू की।
जांच में पुलिस को एक खास पैटर्न नजर आया। जिन-जिन इलाकों में चोरी की वारदातें हुई थीं, वहां आसपास 18 चक्का ट्रेलर की आवाजाही भी सामने आई।
पुलिस ने करीब 400 CCTV कैमरों और 18 टोल प्लाजा की फुटेज खंगाली। इसके बाद ट्रेलर की पहचान कर पुलिस ने गिरोह तक पहुंच बनाई।
650 किलोमीटर तक किया पीछा
ASP आसाराम चौधरी के मुताबिक, गिरोह 13 अगस्त को चित्तौड़गढ़ से ट्रेलर लेकर निकला था। इसकी जानकारी मिलने के बाद खींवसर पुलिस ने ट्रेलर का पीछा शुरू किया।
आरोपियों ने रास्ते में पुलिस को चकमा देकर जयपुर की तरफ जाने की कोशिश की। पुलिस टीम ने करीब 650 किलोमीटर तक पीछा किया और 14 अगस्त को भीलवाड़ा जिले के जहाजपुर में ट्रेलर को रोक लिया।
इसके बाद पुलिस ने ट्रेलर में सवार पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने रविवार को मामले का खुलासा किया।
ट्रेलर में रहता था एक आरोपी, बाकी करते थे चोरी
पुलिस के मुताबिक, आरोपी चोरी की वारदात को अंजाम देने के लिए ट्रेलर को रात में सड़क किनारे खड़ा कर देते थे।
- एक आरोपी ट्रेलर में ही रहता था।
- दूसरा गांव या इलाके के बाहर निगरानी करता था।
- बाकी तीन आरोपी घरों के दरवाजे और खिड़कियां तोड़कर चोरी करते थे।
दूर स्थित घरों को निशाना बनाने के लिए आरोपी आसपास के इलाकों से बाइक चोरी करते और उसी से वारदात वाली जगह पहुंचते थे। चोरी के बाद बाइक को करीब 8 से 10 किलोमीटर दूर छोड़ देते थे।
मोबाइल नहीं रखते थे, बार-बार बदलते थे रास्ता
पुलिस से बचने के लिए आरोपी वारदात के दौरान मोबाइल फोन अपने पास नहीं रखते थे। इसके अलावा पुलिस की नजर से बचने के लिए बार-बार अपना रास्ता बदलते थे।
हालांकि, चोरी के लिए इस्तेमाल की गई बाइक के साथ-साथ उनका 18 चक्का ट्रेलर भी इलाके के आसपास मौजूद रहता था। टोल प्लाजा की CCTV फुटेज में ट्रेलर की लगातार मौजूदगी सामने आने के बाद पुलिस ने उसके FASTag रिकॉर्ड की जानकारी जुटाई।
जांच में पता चला कि ट्रेलर जिन रास्तों से गुजरता था, वहां चोरी की वारदातों से उसका संबंध सामने आ रहा था। पुलिस के मुताबिक, ट्रेलर टोल से गुजरते समय अक्सर खाली दिखाई देता था और आरोपी इसका इस्तेमाल मुख्य रूप से वारदातों के लिए करते थे।
पुलिस जांच में कई वारदातों का खुलासा होने की उम्मीद
पुलिस अब गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ कर रही है। उनसे राजस्थान और मध्यप्रदेश में की गई अन्य चोरी और नकबजनी की वारदातों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस को उम्मीद है कि पूछताछ के बाद गिरोह से जुड़ी अन्य घटनाओं और सदस्यों का भी खुलासा हो सकता है।
