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वन-वे पर ऑटो-रिक्शा को एंट्री देने की मांग:सागर में चालकों ने हड़ताल की चेतावनी दी; रैली निकालकर कलेक्ट्रेट पहुंचे

शहर के मोतीनगर चौराहे से तीनबत्ती तिराहे तक के मार्ग को वन-वे घोषित करने के फैसले का विरोध अब तेज हो गया है। इस मार्ग पर तीन और चार पहिया वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी गई है, जिससे सबसे ज्यादा परेशानी ऑटो चालकों और आम लोगों को हो रही है। कलेक्टर ऑफिस पहुंचे ऑटो चालक, सौंपा ज्ञापन शुक्रवार को ऑटो चालकों ने रैली निकालकर कलेक्टर कार्यालय पहुंचकर अपनी मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा। उनका कहना है कि वन-वे लागू होने के बाद अब उन्हें बड़े बाजार वाले इलाके में एंट्री नहीं मिल रही, जिससे न केवल उनकी आमदनी प्रभावित हो रही है बल्कि मरीजों, बुजुर्गों और जरूरतमंद लोगों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। पैदल चलने को मजबूर लोग, बंद हो रही ऑटो चालकों की कमाई ज्ञापन में बताया गया कि लोग अब तीनबत्ती तक पैदल चलने को मजबूर हैं क्योंकि ऑटो अंदर तक नहीं जा पा रहे। बुजुर्गों और बीमारों के लिए यह बेहद मुश्किल हो गया है। वहीं ऑटो चालकों की रोज़ी-रोटी पर भी असर पड़ रहा है। आंदोलन की चेतावनी, विधायक से करेंगे मुलाकात ऑटो यूनियन के अध्यक्ष पप्पू तिवारी ने कहा, “वन-वे नियम में ऑटो और ई-रिक्शा को भी एंट्री नहीं दी जा रही है। इससे न केवल हमारी कमाई बंद हो रही है बल्कि आम लोग भी बेहद परेशान हैं। हमने प्रशासन को ज्ञापन सौंप दिया है और अब शनिवार को सागर विधायक शैलेंद्र जैन से भी मुलाकात करेंगे। अगर फिर भी हमारी मांगें नहीं मानी गईं, तो हमें मजबूरन हड़ताल करनी पड़ेगी।” जनता भी कर रही समर्थन(deshharpal.com) इस मुद्दे को लेकर सिर्फ ऑटो चालक ही नहीं, आम जनता भी चिंता जता रही है। स्थानीय दुकानदारों और राहगीरों का कहना है कि इस इलाके में ऑटो की सुविधा न होने से दिक्कतें बढ़ गई हैं। बाजारों तक पहुंचने के लिए अब लंबा पैदल सफर करना पड़ रहा है।
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सीहोर में व्यापारी के घर हुई चोरी का वीडियो:सो रहे परिवार को कमरे में बंद किया; कार समेत 3 लाख नकदी लेकर भागे चोर

सीहोर जिले के छिदगांव में एक दिल दहला देने वाली चोरी की घटना सामने आई है। बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात, अज्ञात नकाबपोश चोरों ने एक व्यापारी के घर में घुसकर करीब डेढ़ घंटे तक लूटपाट मचाई। चोर न सिर्फ 3.20 लाख रुपये नकद और सामान लेकर भागे, बल्कि पांच लाख रुपये की कार भी ले उड़े। सीसीटीवी में कैद हुए तीन नकाबपोश चोर व्यापारी कमलेश शर्मा के घर और दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों में तीन नकाबपोश चोर साफ दिखाई दे रहे हैं, जिन्होंने पहले घर के मेन गेट की जाली काटी और फिर अंदर घुसकर इत्मीनान से चोरी की। कमलेश शर्मा ने बताया: “चोरों ने हमारे घर को पूरी तरह खंगाल डाला। जिस कमरे में हम सो रहे थे, वहीं से उन्होंने कैश और गाड़ी की चाबी उठाई और हमें कमरे में बंद कर दिया। इसके बाद दुकान से तेल के डिब्बे, नकदी और कोल्ड ड्रिंक व ड्राय फ्रूट्स तक लेकर चले गए।” बच्चे उठे तो खुला राज – दरवाजा बाहर से था बंद रात करीब 4 बजे जब बच्चे पानी पीने के लिए उठे, तो उन्होंने देखा कि कमरा बाहर से बंद है। पड़ोसियों की मदद से दरवाजा खोला गया। बाहर निकलते ही परिवार के होश उड़ गए – सामान बिखरा पड़ा था और घर की कार गायब थी। वारदात से एक दिन पहले ही निकाले थे पैसे कमलेश शर्मा ने बताया कि उन्होंने गेहूं की बिक्री के पैसे केसीसी खाते में जमा कराने के लिए एक दिन पहले ही बैंक से पैसे निकाले थे और शाम को घर लाए थे। उन्हें शक है कि किसी ने बैंक से लेकर घर तक उनकी रेकी की और फिर रात में वारदात को अंजाम दिया। 36 घंटे बाद भी चोर फरार, जांच में जुटी पुलिस घटना को हुए 36 घंटे बीत चुके हैं, लेकिन अब तक चोरों का कोई सुराग नहीं मिल पाया है। एफएसएल (फॉरेंसिक साइंस लेब) की टीम ने घटनास्थल से फिंगरप्रिंट और अन्य साक्ष्य इकट्ठे किए हैं। टीआई घनश्याम सिंह दांगी ने बताया: “हम सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर जांच तेजी से चल रही है। जल्द ही आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।” 👉 चिंता की बात (deshharpal.com)इस घटना ने ग्रामीण इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिस तरह से चोरों ने डेढ़ घंटे तक घर और दुकान में आराम से चोरी की, वह पुलिस की गश्त और सतर्कता पर गंभीर सवाल खड़ा करता है।
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भोपाल में पेड़ से टकराई कार, 3 की मौत:गाड़ी के परखच्चे उडे़, एयरबैग फटे; चेसिस टूटने से दो हिस्सों में बंट गई

भोपाल के खजूरी सड़क थाना क्षेत्र में गुरुवार और शुक्रवार की दरमियानी रात एक भयानक सड़क हादसा हुआ। तेज रफ्तार से जा रही हुंडई वेन्यू कार पहले एक गुमटी से टकराई, फिर सीधे पेड़ से जा भिड़ी। हादसे में तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। मरने वालों की पहचान प्रीत आहूजा, विशाल डाबी और पंकज सिसोदिया के रूप में हुई है। घायल युवक राहुल कंडारे का इलाज चिरायु अस्पताल में चल रहा है। खाना खाकर लौट रहे थे दोस्त, बीच रास्ते मौत ने घेरा परिजनों के मुताबिक, चारों दोस्त सीहोर के दरबार होटल में खाना खाने गए थे। रात में भोपाल लौटते समय, इंदौर-भोपाल हाईवे पर उनकी कार अनियंत्रित होकर गुमटी और फिर पेड़ से टकरा गई। कार चला रहा था प्रीत, उसके बगल में विशाल बैठा था, जबकि पीछे राहुल और पंकज थे। कार के परखच्चे उड़ गए, दो टुकड़ों में बंट गई हादसा इतना भीषण था कि कार दो टुकड़ों में बंट गई। एयरबैग तक फट गए, जिससे अनुमान लगाया जा रहा है कि स्पीड 120 किमी/घंटे से ज्यादा रही होगी। प्रीत और विशाल कार के डैशबोर्ड के नीचे बुरी तरह फंस गए थे। रेस्क्यू टीम को गेट और डैशबोर्ड काटकर शव निकालने में एक घंटे से ज्यादा का समय लगा। परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़ पंकज अपने परिवार का इकलौता सहारा था। मां की पहले ही बीमारी से मौत हो चुकी है, और उसके पिता नेत्रहीन हैं। बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। पंकज ही घर की पूरी जिम्मेदारी निभा रहा था। उसकी मौत ने पिता को पूरी तरह बेसहारा कर दिया। प्रीत भोपाल में कपड़ों की दुकान चलाता था, जबकि विशाल उसी दुकान में काम करता था। दोनों 12वीं तक पढ़े थे। तीनों स्कूल के दोस्त थे। दुख की बात ये है कि प्रीत अपने भाई कमलेश आहूजा की गाड़ी (MP04 EA 6004) बिना बताए लेकर निकला था। चश्मदीद बोले- एक घंटे बाद पहुंची पुलिस और एम्बुलेंस स्थानीय लोगों का कहना है कि हादसे की सूचना देने के करीब एक घंटे बाद पुलिस और एम्बुलेंस मौके पर पहुंची। समय रहते मदद मिल जाती, तो शायद किसी की जान बच सकती थी। थाना प्रभारी का बयान खजूरी थाना प्रभारी नीरज वर्मा ने कहा कि हादसे का मुख्य कारण तेज रफ्तार है। उन्होंने देरी के आरोपों को खारिज किया और बताया कि “मैं उस समय फंदा टोल नाके पर वाहनों की चेकिंग कर रहा था, जो घटनास्थल से करीब 20 किमी दूर है। हमारी प्राथमिकता घायल को तुरंत अस्पताल पहुंचाना था, जिससे उसकी जान बच सकी।” 👉 सोचने वाली बात(deshharpal.com)हर बार की तरह इस हादसे में भी लापरवाही और तेज रफ्तार ने तीन जिंदगियों को लील लिया। एक पल की जल्दबाज़ी ने तीन परिवारों को मातम में डुबो दिया। ये हादसा एक सबक है – सड़क पर सावधानी ही सुरक्षा है।
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Road Accident

भोपाल Road Accident: कार पेड़ और Lamp Post से टकराई, तीन की मौत, 1 घायल

भोपाल में भीषण सड़क हादसा, तेज रफ्तार कार ने मचाई तबाही भोपाल के खजूरी सड़क इलाके में शुक्रवार तड़के करीब 3 बजे एक भयंकर road accident हुआ। तेज रफ्तार कार पहले सड़क किनारे लगे पेड़ से टकराई और फिर बिजली के lamp post से जा टकराई। इस दुर्घटना में तीन युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक गंभीर रूप से घायल हो गया। मृतकों की पहचान और घायल की हालत मृतकों की पहचान प्रीत आहूजा, सत्यम डाबी और पंकज सिसोदिया के रूप में हुई है। प्रीत आहूजा कपड़ों की दुकान के मालिक थे और सत्यम वहां सहायक के रूप में काम करते थे। घायल चौथे व्यक्ति को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उसकी हालत नाजुक बताई जा रही है। पुलिस जांच जारी, ड्राइवर की पहचान नहीं हो सकी पुलिस ने बताया कि हादसे के वक्त कार कौन चला रहा था, इसकी पुष्टि नहीं हो सकी है। मामले की जांच जारी है। वहीं, राहत कार्य में देरी की वजह से आपातकालीन सेवाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठे हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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BJP की सागर नगर मंडल की कार्यकारिणी घोषित:6 मंडल उपाध्यक्ष-2 महामंत्री बनाए; आईटी सेल की जिम्मेदारी जयश्री को सौंपी

भारतीय जनता पार्टी ने सागर विधानसभा के अंतर्गत सागर नगर मंडल की नई कार्यकारिणी की घोषणा कर दी है। यह सूची मंडल अध्यक्ष अमित बैसाखिया ने भाजपा जिला अध्यक्ष श्याम तिवारी की सहमति से जारी की। नई टीम में प्रमुख जिम्मेदारियां इस प्रकार हैं: इसके अलावा मंडल की कार्यकारिणी में 43 अन्य सदस्यों को भी शामिल किया गया है। पार्टी संगठन ने इन नियुक्तियों के जरिए मंडल को और अधिक सक्रिय और सशक्त बनाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। — देश हरपल https://deshharpal.com/ पल-पल की खबर हरपल
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ब्लैकमेलिंग से तंग आकर हेड f ने किया सुसाइड:इंदौर में युवती रुपए मांग रही थी,झूठे केस में फंसाने की दे रही थी धमकी

इंदौर के एमआईजी थाना क्षेत्र में उस समय सनसनी फैल गई जब वहां स्थित सरकारी क्वार्टर में तैनात हेड कांस्टेबल विनोद यादव ने फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। पुलिस जांच में सामने आया है कि कनाड़िया क्षेत्र की एक युवती उन्हें ब्लैकमेल कर रही थी। वह रुपये नहीं देने पर झूठे केस में फंसाने की धमकी दे रही थी। बुधवार देर रात पुलिस ने युवती को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। घटना की जानकारी मिलते ही एडिशनल डीसीपी अमरेंद्र सिंह, एएसपी सोनू डाबर, टीआई आर.डी. कानवा और अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे। डिप्रेशन में थे कांस्टेबल पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, विनोद यादव काफी समय से मानसिक तनाव यानी डिप्रेशन में थे। टीआई सीबी सिंह ने दी जानकारी: “घटना एमआईजी थाने के पीछे बने सरकारी क्वार्टर की है। विनोद यादव परदेशीपुरा थाने में पदस्थ थे और बुधवार को ड्यूटी खत्म करने के बाद उन्होंने फांसी लगा ली।” मौके पर एफएसएल टीम भी पहुंची और साक्ष्य जुटाए। पुलिस की प्राथमिक जांच में यह साफ हो गया है कि आत्महत्या के पीछे मानसिक तनाव और ब्लैकमेलिंग एक बड़ी वजह रही है। पुलिस अब युवती से पूछताछ कर रही है और पूरे मामले की गहराई से जांच जारी है। deshharpal.com — पल-पल की खबर हरपल
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NEET UG रिजल्ट मामले में आज सुनवाई:अब उज्जैन सहित 50 से ज्यादा याचिककर्ता; रिज्वाइंडर के लिए मांगा जाएगा समय, रिएक्जाम कराने की मांग भी

NEET-UG परीक्षा में तकनीकी गड़बड़ियों और बिजली कटौती के चलते प्रभावित हुए छात्रों की याचिका पर आज मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई होगी। याचिकाकर्ता पक्ष की ओर से आज रिवाइंडर दाखिल किया जाएगा। इस मामले में 25 से अधिक परीक्षा केंद्रों से जुड़े 50 से ज्यादा छात्र प्रभावित हुए हैं। इन छात्रों की प्रमुख मांग है कि दोबारा परीक्षा (Re-exam) कराई जाए ताकि उनका भविष्य खराब न हो। याचिकाकर्ताओं की ओर से एडवोकेट मृदुल भटनागर ने बताया कि इन छात्रों में कई ऐसे हैं जिन्होंने तीन-चार बार परीक्षा दी है और उन्होंने कड़ी मेहनत की थी। क्या है मामला? 4 मई को हुई NEET-UG परीक्षा के दौरान इंदौर और उज्जैन सहित कई शहरों में तेज आंधी और बारिश के कारण बिजली गुल हो गई थी। इंदौर के 49 सेंटरों में से लगभग 25 केंद्रों पर छात्रों को अंधेरे में परीक्षा देनी पड़ी। कई जगहों पर छात्रों ने मोमबत्तियों और मोबाइल टॉर्च की रोशनी में पेपर हल किया। घुप्प अंधेरे में कई छात्र प्रश्नपत्र तक ठीक से नहीं पढ़ पाए। उज्जैन के शासकीय माधव महाविद्यालय में भी बिजली जाने से परीक्षा बाधित हुई। यहां छात्रों ने आरोप लगाया कि कुछ कक्षों में लाइट जाने के बाद अतिरिक्त समय मिला, लेकिन रूम नंबर 212 के छात्रों को न तो अतिरिक्त समय मिला और न ही समय पर परीक्षा शुरू हो सकी। अब उज्जैन के भी 5 से ज्यादा छात्र याचिकाकर्ताओं में शामिल हो चुके हैं। NTA की दलील क्या रही? 16 मई को हुई पिछली सुनवाई में सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने NTA की ओर से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के ज़रिए कोर्ट में पक्ष रखा था। उन्होंने कहा था कि पूरे परिणाम पर रोक लगाने से सैकड़ों छात्रों पर असर पड़ेगा। हालांकि NTA ने यह स्वीकार किया कि कुछ केंद्रों पर बिजली की समस्या हुई थी, लेकिन वहां मोमबत्ती और जनरेटर के जरिए व्यवस्था की गई थी। NTA का यह भी कहना है कि परीक्षा समर सीज़न में थी और सभी जरूरी इंतजाम किए गए थे। लेकिन याचिकाकर्ताओं का दावा है कि वास्तविक हालात NTA के दावों से काफी अलग थे। क्या है छात्रों की मांग? प्रभावित छात्रों की स्पष्ट मांग है कि जिन 25 परीक्षा केंद्रों में परीक्षा प्रभावित हुई, वहां फिर से परीक्षा कराई जाए। छात्रों का कहना है कि खराब व्यवस्था के कारण उनका एक साल बर्बाद होने की कगार पर है, क्योंकि NEET के अलावा उनके पास कोई और विकल्प नहीं है—न मेडिकल, न नर्सिंग, न आयुर्वेद या होम्योपैथी। क्या हो सकता है अगला कदम? आज की सुनवाई में याचिकाकर्ता पक्ष कोर्ट से दोबारा परीक्षा की मांग को लेकर मजबूत तर्क पेश करेगा। साथ ही कोर्ट से अनुरोध किया जाएगा कि रिवाइंडर दाखिल करने के लिए पर्याप्त समय दिया जाए। अब यह देखना होगा कि हाईकोर्ट NTA और बिजली कंपनी के जवाबों के आधार पर क्या फैसला सुनाता है। “देश हरपल”https://deshharpal.com/ इस अहम मामले पर लगातार नजर बनाए हुए है।
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मारुति वैन में आग लगी, जिंदा जला ड्राइवर:खेत की फेंसिंग में फंसा था ड्राइविंग सीट का गेट; शव की पहचान भी मुश्किल

बीना में बुधवार दोपहर एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई, जहां चलते-चलते एक मारुति वैन में अचानक आग लग गई। आग इतनी भीषण थी कि ड्राइवर जिंदा जल गया और शव की हालत इतनी खराब है कि उसकी पहचान तक नहीं हो सकी है। खेत की फेंसिंग में फंसी वैन, बाहर नहीं निकल सका ड्राइवर यह हादसा आगासौद थाना क्षेत्र में देहरी और सेमरखेड़ी गांव के बीच दोपहर करीब 12 बजे हुआ। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, वैन सड़क किनारे एक खेत की फेंसिंग में फंस गई थी। ड्राइवर की ओर का दरवाजा फेंसिंग में अटक गया, जिससे वह बाहर नहीं निकल पाया और वैन में ही फंस गया। गैस किट की वजह से तेजी से भड़की आग! स्थानीय लोगों ने बताया कि वैन में शायद गैस किट लगी थी। आग लगते ही महज 10-15 मिनट में पूरी वैन जलकर खाक हो गई। लोगों ने बताया कि उन्होंने ड्राइवर की चीखें सुनीं, लेकिन आग की तेज़ी और हालात की वजह से कोई भी उसकी मदद नहीं कर सका। कौन था ड्राइवर, अब तक रहस्य पुलिस ने बताया कि जल चुकी वैन का रजिस्ट्रेशन नंबर MP04 CB 2153 है। ग्रामीणों के मुताबिक, यह वैन अक्सर इलाके में किराना का सामान बेचने आती थी, लेकिन वैन चलाने वाले शख्स का नाम या पता उन्हें नहीं मालूम। जिस खेत की फेंसिंग में वैन फंसी, वह देहरी गांव के किसान कैलाश पटेल का बताया जा रहा है। जांच जारी, आग लगने की वजह अभी स्पष्ट नहीं फिलहाल आग लगने की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। आगासौद थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और वैन के रजिस्ट्रेशन से अब मृतक की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं। देशहरपाल(deshharpal.com)की संवेदना: ये हादसा एक दर्दनाक चेतावनी है कि वाहनों में गैस किट का इस्तेमाल सावधानीपूर्वक किया जाए और सुरक्षा उपायों की अनदेखी न की जाए। देशहरपाल मृतक के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करता है।
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जबलपुर के पूर्व शहर युवक कांग्रेस अध्यक्ष पर इनाम घोषित:कांग्रेसी नेता के साथ मिलकर किया था JDA की जमीन का फर्जीवाड़ा, एक माह से फरार

जबलपुर विकास प्राधिकरण (JDA) की जमीनों को फर्जी दस्तावेजों के जरिए हड़पने वाले गिरोह के दो मुख्य आरोपियों—यूथ कांग्रेस के पूर्व नगर अध्यक्ष जतिन राज और उनके सहयोगी मनोज नामदेव—की गिरफ्तारी के लिए अब पुलिस ने कमर कस ली है। एसपी संपत उपाध्याय ने दोनों फरार आरोपियों पर 5-5 हजार रुपए का इनाम घोषित किया है। कांग्रेस से जुड़ा चेहरा, अब भगोड़ा जतिन राज पहले एनएसयूआई और यूथ कांग्रेस में पदाधिकारी रह चुके हैं। वे पार्षद भी रह चुके हैं और कांग्रेस के कई चुनाव अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। लेकिन अब वही चेहरा जमीन के गोरखधंधे में मुख्य साजिशकर्ता बन चुका है। मनोज नामदेव के साथ मिलकर जतिन राज ने JDA की एक योजना में शामिल जमीन के फर्जी दस्तावेज तैयार कर उसे लाखों में बेच डाला। पुलिस ने इस मामले में सैफ नगर निवासी कयाज उर्फ शुभम उर्फ शिवम को गिरफ्तार किया है, जिसने पूछताछ में कई बड़े खुलासे किए हैं। ऐसे हुआ खुलासा दरअसल, एक माह पहले कयाज उर्फ शुभम JDA दफ्तर पहुंचा और खुद को विजय नगर निवासी केपी लटोरिया का बेटा बताकर एक जमीन को अपने नाम करने की कोशिश की। उसने नकली आधार कार्ड और अन्य दस्तावेज लगाए। लेकिन JDA के CEO दीपक वैद्य को शक हुआ। जब दस्तावेजों की जांच करवाई गई तो मालूम पड़ा कि जिनके नाम पर शुभम जमीन लेना चाहता था, वे दोनों पति-पत्नी पहले ही गुजर चुके हैं और उनकी कोई संतान भी नहीं थी। इसके बाद JDA ने तुरंत पुलिस को सूचना दी और शुभम को गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में शुभम ने कबूल किया कि वह जतिन राज और मनोज नामदेव के साथ मिलकर JDA की खाली पड़ी जमीनों की जानकारी निकालता था। फिर नकली वारिस तैयार कर जमीनों पर कब्जा किया जाता था और उन्हें लाखों में बेच दिया जाता था। पुलिस की दबिश, लेकिन अभी तक आरोपी लापता ओमती थाना पुलिस जतिन और मनोज को पकड़ने के लिए लगातार दबिश दे रही है, लेकिन अब तक दोनों फरार हैं। पुलिस ने उनके घरों पर भी छापे मारे, लेकिन वहां से कोई सुराग नहीं मिला। एसपी ने ओमती थाना प्रभारी को दोनों की जल्द गिरफ्तारी के निर्देश दिए हैं। साथ ही इनाम घोषित कर आम जनता से भी सूचना देने की अपील की है। देशहरपाल(deshharpal.com)की अपील: अगर आपके पास जतिन राज या मनोज नामदेव के संबंध में कोई भी जानकारी है, तो तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें। जमीन से जुड़े फर्जीवाड़े और घोटाले रोकने के लिए नागरिकों की सतर्कता बेहद जरूरी है।
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ग्वालियर HC में अंबेडकर प्रतिमा विवाद राजस्थान-दिल्ली-हरियाणा पहुंचा:भीम सेना की जयपुर हाईकोर्ट से ऋषि मनु की मूर्ति हटाने की चेतावनी, दोनों पक्ष बना रहे रणनीति

ग्वालियर हाईकोर्ट में संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर शुरू हुआ विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है। यह मामला न सिर्फ मध्य प्रदेश बल्कि दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान तक पहुंच चुका है। खासकर जब से भीम सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष नवाब सतपाल तंवर इस मुद्दे में कूदे हैं, तब से हालात और ज्यादा संवेदनशील हो गए हैं। भीम सेना ने सरकारों को खुली चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर ग्वालियर हाईकोर्ट में डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा नहीं लगाई गई, तो जयपुर हाईकोर्ट में लगी मनु ऋषि की प्रतिमा को हटाने के लिए आंदोलन छेड़ा जाएगा। इस बयान के बाद दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान और एमपी की इंटेलिजेंस एजेंसियां अलर्ट पर आ गई हैं। कैसे शुरू हुआ विवाद? पूरा मामला 19 फरवरी 2025 को शुरू हुआ था, जब ग्वालियर हाईकोर्ट में कुछ अधिवक्ताओं ने चीफ जस्टिस सुरेश कुमार कैत को ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने कोर्ट परिसर में अंबेडकर प्रतिमा लगाने की मांग की थी। मौखिक सहमति के बाद पीडब्ल्यूडी ने प्लेटफार्म भी तैयार करा दिया और वकीलों ने आपसी सहयोग से मूर्ति बनवाने का ऑर्डर दे दिया। लेकिन बाद में हाईकोर्ट बार एसोसिएशन ने यह कहते हुए विरोध शुरू कर दिया कि उन्हें न तो सूचना दी गई, न ही बिल्डिंग कमेटी से इजाजत ली गई। इसके बाद विवाद बढ़ता गया और मामला जातिगत खेमों में बंट गया—एक ओर एससी-एसटी वर्ग के वकील, दूसरी ओर सनातन परंपरा से जुड़े अधिवक्ता। सोशल मीडिया पर पोस्टर वार, चेतावनी से खौफ भीम सेना ने इस मुद्दे को लेकर सोशल मीडिया पर पोस्टर और वीडियो जारी कर सरकार को खुली चेतावनी दी है। अध्यक्ष सतपाल तंवर ने कहा कि “डॉ. अंबेडकर की प्रतिमा को रोकना संविधान और दलित समाज का अपमान है। अगर मूर्ति नहीं लगी, तो हम जयपुर में मनु की प्रतिमा को नहीं रहने देंगे।” भीम सेना की इस खुली धमकी के बाद मध्य प्रदेश और राजस्थान सरकारों ने अलर्ट मोड पर सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। एमपी सरकार ने इस मामले पर बयानबाजी से बचने की हिदायत दी है, लेकिन सोशल मीडिया पर दोनों पक्षों के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। 14 मई को भड़का विवाद, अब सुप्रीम कोर्ट तक जाने की तैयारी 14 मई को मूर्ति स्थापना के दिन जब वकीलों का एक पक्ष कोर्ट परिसर में मूर्ति स्थापित करने पहुंचा, तो बार एसोसिएशन ने विरोध करते हुए विवाद को नया मोड़ दे दिया। देखते ही देखते यह मामला जातिगत टकराव में बदल गया। अब दोनों पक्ष लगातार बैठकें कर रहे हैं। 19 मई को दोनों पक्षों ने जबलपुर में चीफ जस्टिस से मुलाकात की थी, जिसमें उन्हें फिलहाल माहौल शांत रखने और समाज में सौहार्द बनाए रखने की सलाह दी गई है। हालांकि, वकीलों के बीच इस मुद्दे को सुप्रीम कोर्ट तक ले जाने की चर्चाएं भी तेज हो गई हैं। क्या बोले सतपाल तंवर? गुरुग्राम में मीडिया से बातचीत करते हुए सतपाल तंवर ने कहा, “डॉ. अंबेडकर ने इस देश के संविधान को बनाया और करोड़ों शोषितों को सम्मान दिया। ऐसे में उनकी प्रतिमा को रोकना सरासर गलत है। अगर जरूरत पड़ी, तो हम सड़कों पर उतरेंगे। ये सिर्फ मूर्ति की बात नहीं, हमारे सम्मान और अधिकार की बात है।” 👉 देशहरपाल(deshharpal.com)की अपील: यह मामला संविधान, न्याय और सामाजिक समरसता से जुड़ा है। हम सभी नागरिकों से अपील करते हैं कि शांति बनाए रखें और विवाद को बातचीत से सुलझाएं।
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रानी कमलापति स्टेशन पर दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट, 29 मिनट खड़ी रही ट्रेन

भोपाल के रानी कमलापति रेलवे स्टेशन पर मंगलवार सुबह दूरंतो एक्सप्रेस में यात्रियों और पैंट्री कर्मचारियों के बीच मारपीट हो गई। घटना सुबह करीब 11:30 बजे की बताई जा रही है। सामान चढ़ाने और यात्रियों के आने-जाने को लेकर शुरू हुआ विवाद बढ़ गया, जिसके चलते ट्रेन करीब 29 मिनट तक स्टेशन पर खड़ी रही। आरोप है कि पैंट्री कर्मचारियों ने एकजुट होकर यात्रियों पर हमला किया। विवाद के दौरान कर्मचारियों द्वारा चेन पुलिंग किए जाने की बात भी सामने आई है। बताया गया कि ट्रेन रानी कमलापति स्टेशन पर पहले ही निर्धारित समय से 3 घंटे 33 मिनट की देरी से पहुंची थी। जीआरपी ने मौके पर पहुंचकर शांत कराया विवाद घटना की सूचना मिलने पर जीआरपी मौके पर पहुंची और यात्रियों व पैंट्री कर्मचारियों के बीच चल रहे विवाद को शांत कराया। जीआरपी टीआई अमित शर्मा के मुताबिक, पीड़ित यात्री बेंगलुरु जा रहा था। उन्होंने बताया कि रानी कमलापति स्टेशन पर इस मामले में शिकायत नहीं मिली। वहीं, नागपुर में जीरो पर प्रकरण दर्ज किए जाने की सूचना है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित जीआरपी के स्तर पर की जाएगी।

मध्यप्रदेश में पारंपरिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए खर्च होंगे 7.5 करोड़ रुपए, 330 विकासखंडों में होगा खेल महोत्सव

मध्यप्रदेश में पारंपरिक और आंचलिक खेलों को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार करीब साढ़े सात करोड़ रुपए खर्च करने की तैयारी कर रही है। खेल विभाग ने इसके लिए छोटे शहरों में प्रशिक्षण केंद्र खोलने की योजना बनाई है। इसके साथ ही प्रदेश के सभी 330 विकासखंडों में हर साल पारंपरिक खेल महोत्सव आयोजित किए जाएंगे। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पारंपरिक खेलों को संरक्षण देना और ग्रामीण व आदिवासी क्षेत्रों में छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करना है। सरकार की इस पहल से स्थानीय खेलों को प्रतियोगिताओं और व्यवस्थित प्रशिक्षण के जरिए आगे बढ़ाने की कोशिश की जाएगी। पिट्ठू से मलखंभ तक, कई खेल होंगे शामिल प्रस्तावित योजना में पिट्ठू, गदा और साइकिल रेस जैसे पारंपरिक व आंचलिक खेलों को शामिल किया गया है। इसके अलावा कबड्डी, खो-खो, पैदल चाल, तीरंदाजी और मलखंभ जैसे खेलों को भी बढ़ावा दिया जाएगा। खेल विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, पारंपरिक खेल महोत्सव में विकासखंड स्तर से लेकर प्रदेश स्तर तक प्रतियोगिताएं आयोजित होंगी। इन स्पर्धाओं के लिए पूरे प्रदेश में एक समान नियम तैयार किए जाएंगे, ताकि खिलाड़ियों को प्रतियोगिताओं में भाग लेने के समान अवसर मिल सकें। छोटे शहरों में खुलेंगे प्रशिक्षण केंद्र खेल विभाग का मानना है कि ग्रामीण और आदिवासी क्षेत्रों में कई पारंपरिक खेल लंबे समय से स्थानीय संस्कृति का हिस्सा रहे हैं। हालांकि, इन खेलों से जुड़े खिलाड़ियों को अक्सर औपचारिक प्रशिक्षण और बड़े स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने का अवसर नहीं मिल पाता। प्रस्तावित प्रशिक्षण केंद्रों के माध्यम से ऐसे खिलाड़ियों को व्यवस्थित प्रशिक्षण देने की योजना है। इससे स्थानीय स्तर पर प्रतिभाओं की पहचान करने और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है। आधुनिक खेलों से जोड़ने की भी तैयारी खेल विभाग इन प्रतियोगिताओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की पहचान करेगा। इसके बाद उन्हें आगे के प्रशिक्षण के लिए तैयार करने की योजना है। विभाग पारंपरिक खेलों से जुड़ी प्रतिभाओं को आधुनिक खेल व्यवस्था से जोड़ने के विकल्पों पर भी काम कर रहा है। इस पहल के जरिए पारंपरिक खेलों को नई पहचान देने के साथ-साथ ग्रामीण युवाओं की खेलों में भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा। पारंपरिक खेलों के केंद्र स्थापित किए जाएंगे: विश्वास सारंग खेल मंत्री विश्वास सारंग के अनुसार, प्रदेश के विभिन्न अंचलों में कई देशी खेल प्रचलित हैं, लेकिन उन्हें बड़े पैमाने पर खेलने के अवसर सीमित हैं। अब इनके केंद्र स्थापित कर इन खेलों को बढ़ावा देने की योजना है। उन्होंने बताया कि प्रस्तावित योजना में टीम आधारित और व्यक्तिगत, दोनों तरह के खेलों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है।

एशियन पैरा गेम्स में भारत का धमाकेदार प्रदर्शन, दूसरे दिन जीते 24 मेडल; कुल पदक 35 हुए

जापान के आइची-नागोया में चल रहे एशियन पैरा गेम्स में भारत का शानदार प्रदर्शन जारी है। प्रतियोगिता के दूसरे दिन भारतीय खिलाड़ियों ने 24 मेडल जीते, जिनमें 5 गोल्ड, 6 सिल्वर और 13 ब्रॉन्ज शामिल हैं। इसके साथ ही भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। भारतीय खिलाड़ियों ने अब तक 9 गोल्ड, 11 सिल्वर और 15 ब्रॉन्ज मेडल अपने नाम किए हैं। दूसरे दिन एथलेटिक्स में भारतीय खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारत ने गोल्ड, सिल्वर और ब्रॉन्ज तीनों मेडल जीतकर शानदार उपलब्धि हासिल की। वहीं, निषाद कुमार ने हाई जंप में गेम्स रिकॉर्ड के साथ गोल्ड जीता। सिमरन शर्मा और दीप्ति जीवनजी ने भी क्रमशः 200 मीटर और 400 मीटर रेस में गोल्ड मेडल अपने नाम किए। शूटिंग में मनीष नरवाल ने सिल्वर मेडल जीता। इसके साथ ही उन्होंने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस पैरालिंपिक्स के लिए कोटा भी हासिल किया। डिस्कस थ्रो में भारत का क्लीन स्वीप पुरुषों की डिस्कस थ्रो स्पर्धा में भारतीय खिलाड़ियों ने तीनों पदक जीतकर अपना दबदबा कायम किया। देवेंद्र कुमार ने 781 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल हासिल किया। राकेश ने 771 पॉइंट्स लेकर सिल्वर, जबकि प्रदीप कुमार ने 669 पॉइंट्स के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता। इस मुकाबले की खास बात यह रही कि प्रदीप कुमार ने 51.15 मीटर का सबसे लंबा थ्रो किया, इसके बावजूद उन्हें ब्रॉन्ज मेडल मिला। इसकी वजह यह है कि इस स्पर्धा में अलग-अलग तरह की शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी एक साथ मुकाबला करते हैं। इसमें F43, F44, F62 और F64 कैटेगरी के खिलाड़ी शामिल थे। खिलाड़ियों की शारीरिक स्थिति और थ्रो करने की क्षमता में अंतर होने के कारण उनके प्रदर्शन का आकलन रजा पॉइंट्स सिस्टम के आधार पर किया जाता है। इस प्रणाली में खिलाड़ी की कैटेगरी के अनुसार प्रदर्शन को अंक दिए जाते हैं, जिससे अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के परिणामों की निष्पक्ष तुलना की जा सके। निषाद कुमार ने हाई जंप में जीता दूसरा गोल्ड भारतीय पैरा-एथलीट निषाद कुमार ने पुरुषों की हाई जंप T47 स्पर्धा में 2.02 मीटर की छलांग लगाकर गोल्ड मेडल जीता। यह इन गेम्स में उनका दूसरा गोल्ड है। इससे पहले वह लॉन्ग जंप में भी पहला स्थान हासिल कर चुके हैं। हाई जंप में खिलाड़ियों को एक निश्चित ऊंचाई पर रखी बार को बिना गिराए पार करना होता है। हर सफल प्रयास के बाद बार की ऊंचाई बढ़ाई जाती है और सबसे अधिक ऊंचाई पार करने वाला खिलाड़ी विजेता बनता है। T47 पैरा-एथलेटिक्स की वह श्रेणी है, जिसमें हाथ से जुड़ी शारीरिक दिव्यांगता वाले खिलाड़ी हिस्सा लेते हैं। निषाद की इस उपलब्धि से भारत के पदक अभियान को मजबूती मिली है। प्रणव सूरमा को गोल्ड, राम रतन सिंह ने जीता सिल्वर पुरुषों की डिस्कस थ्रो F51/F52/F53 स्पर्धा में भी भारतीय खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। प्रणव सूरमा ने 932 रजा पॉइंट्स के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि राम रतन सिंह 809 पॉइंट्स लेकर दूसरे स्थान पर रहे और उन्हें सिल्वर मेडल मिला। प्रणव ने अपने छह प्रयासों में 11.66 मीटर का सर्वश्रेष्ठ थ्रो किया। इस स्पर्धा में भी अलग-अलग कैटेगरी के खिलाड़ियों के प्रदर्शन की तुलना रजा पॉइंट्स के आधार पर की जाती है। इसलिए केवल थ्रो की दूरी के आधार पर विजेता तय नहीं होता। प्रणव और राम रतन के अंकों ने उन्हें क्रमशः पहला और दूसरा स्थान दिलाया। भारत की पदक तालिका पर नजर दूसरे दिन के शानदार प्रदर्शन के बाद भारत के कुल पदकों की संख्या 35 हो गई है। एथलेटिक्स में लगातार मिल रही सफलताओं और शूटिंग में मनीष नरवाल की उपलब्धि ने भारतीय अभियान को नई गति दी है। प्रतियोगिता के अगले दिनों में भी भारतीय खिलाड़ियों से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद रहेगी।
SBI

SBI ग्राहकों का डेटा Dark Web पर मिलने से बढ़ी चिंता, जांच में जुटा बैंक

देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के ग्राहकों की निजी जानकारी डार्क वेब पर मिलने का मामला सामने आया है। बैंक की शुरुआती जांच में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड में व्यक्तिगत जानकारी उजागर होने की पहचान की गई है। इनमें नाम, मोबाइल नंबर, ईमेल आईडी और पते जैसी जानकारियां शामिल हैं। इस खबर के सामने आने के बाद ग्राहकों की डेटा सिक्योरिटी को लेकर चिंता बढ़ गई है। SBI ने कहा है कि इस घटना से बैंक के सामान्य कामकाज, वित्तीय प्रदर्शन और सेवाओं पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ा है। वहीं, डेटा कहां से आया, कितने ग्राहकों की जानकारी प्रभावित हुई और इसके पीछे क्या वजह रही, इन सवालों के जवाब तलाशने के लिए जांच की जा रही है। SBI Data Leak: कैसे सामने आया डेटा लीक का मामला? बैंक के अनुसार, 16 अक्टूबर 2026 को उसे अपने Threat Intelligence Service Provider, Defence Cyber Agency और भारतीय कंप्यूटर इमरजेंसी रिस्पॉन्स टीम (CERT-In) से डार्क वेब पर ग्राहकों का डेटा उपलब्ध होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद SBI ने शुरुआती स्तर पर करीब 3.75 लाख रिकॉर्ड का विश्लेषण किया। इस प्रक्रिया में 3,897 ग्राहक रिकॉर्ड ऐसे मिले, जिनमें व्यक्तिगत पहचान से जुड़ी जानकारी मौजूद थी। हालांकि, डार्क वेब पर मिले सभी रिकॉर्ड के बारे में अभी पूरी जानकारी सामने नहीं आई है। बैंक जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश कर रहा है कि डेटा कितना वास्तविक है और किस माध्यम से बाहर पहुंचा। ग्राहकों की कौन-सी निजी जानकारी हुई उजागर? शुरुआती जांच में सामने आए रिकॉर्ड में ग्राहकों से जुड़ी कई तरह की जानकारियां शामिल बताई गई हैं। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं: इनमें से कुछ जानकारियों का इस्तेमाल साइबर ठग लोगों को निशाना बनाने के लिए कर सकते हैं। उदाहरण के लिए, किसी ग्राहक का नाम, मोबाइल नंबर और बैंकिंग से जुड़ी जानकारी पता होने पर ठग खुद को बैंक कर्मचारी बताकर भरोसा जीतने की कोशिश कर सकते हैं। हालांकि, इस मामले में ग्राहकों के बैंक खातों से पैसे निकलने या किसी खास तरह की धोखाधड़ी होने की पुष्टि नहीं हुई है। SBI ने जांच के लिए उठाए जरूरी कदम डेटा लीक की जानकारी मिलने के बाद बैंक ने अपने साइबर सिक्योरिटी प्रोटोकॉल सक्रिय कर दिए। साथ ही, मामले की विस्तृत जांच के लिए CERT-In से सूचीबद्ध एक स्वतंत्र साइबर सुरक्षा एजेंसी को नियुक्त किया गया है। जांच में यह पता लगाने पर ध्यान दिया जा रहा है कि डेटा का स्रोत क्या था, जानकारी कैसे उजागर हुई और इससे ग्राहकों की सुरक्षा पर कितना असर पड़ सकता है। बैंक के अनुसार, जांच के नतीजों के आधार पर जरूरी सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे। फिलहाल डेटा लीक के पीछे किसी व्यक्ति या समूह की भूमिका को लेकर कोई अंतिम निष्कर्ष सामने नहीं आया है। क्या SBI ग्राहकों के बैंक खाते खतरे में हैं? डेटा लीक की खबर सुनकर ग्राहकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि क्या उनके बैंक खाते सुरक्षित हैं? यहां एक बात समझना जरूरी है। ग्राहकों का नाम, मोबाइल नंबर या पता सामने आने का मतलब यह नहीं है कि उनके बैंक खाते भी हैक हो गए हैं। निजी जानकारी का उजागर होना और खाते से पैसे निकलना दो अलग-अलग बातें हैं। SBI ने कहा है कि इस घटना से उसके मुख्य कामकाज और सेवाओं पर कोई महत्वपूर्ण असर नहीं पड़ा है। हालांकि, निजी जानकारी का गलत इस्तेमाल करके फर्जी कॉल, मैसेज और ऑनलाइन ठगी की कोशिश की जा सकती है। इसलिए ग्राहकों को सावधानी बरतने की जरूरत है। Data Leak के बाद ग्राहकों को क्या करना चाहिए? डिजिटल बैंकिंग के दौर में थोड़ी सी लापरवाही भी परेशानी बढ़ा सकती है। ऐसे में SBI ग्राहकों को कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना चाहिए। 1. OTP और PIN किसी को न बताएं: बैंक अधिकारी बनकर फोन करने वाला व्यक्ति भी आपसे OTP, ATM PIN या CVV मांगे, तो जानकारी साझा न करें। 2. संदिग्ध लिंक से बचें: KYC अपडेट, बैंक खाता बंद होने या रिफंड मिलने के नाम पर आए अनजान लिंक पर क्लिक न करें। 3. बैंक खाते पर नजर रखें: अपने खाते के लेनदेन की नियमित जांच करें। कोई संदिग्ध ट्रांजैक्शन दिखे तो तुरंत बैंक से संपर्क करें। 4. फर्जी कॉल से सावधान रहें: अगर कोई व्यक्ति बैंकिंग जानकारी बताकर आपका भरोसा जीतने की कोशिश करे, तो उसकी पहचान की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करें। 5. साइबर ठगी होने पर शिकायत करें: वित्तीय साइबर धोखाधड़ी की स्थिति में 1930 हेल्पलाइन या भारत सरकार के आधिकारिक साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं। ध्यान रखें कि किसी ठग के पास आपकी कुछ निजी जानकारी होने का मतलब यह नहीं है कि वह बैंक का अधिकृत प्रतिनिधि है। SBI Data Leak मामले में अब आगे क्या होगा? फिलहाल SBI डेटा लीक मामले की जांच जारी है। बैंक यह पता लगाने में जुटा है कि डार्क वेब पर उपलब्ध जानकारी कहां से आई और घटना का वास्तविक दायरा कितना बड़ा है। जांच पूरी होने के बाद ही डेटा लीक की वजह और ग्राहकों पर इसके संभावित प्रभाव को लेकर ज्यादा स्पष्ट तस्वीर सामने आएगी। तब तक ग्राहकों के लिए अपनी बैंकिंग जानकारी सुरक्षित रखना और संदिग्ध गतिविधियों से सतर्क रहना सबसे जरूरी है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Delhi HighCourt

Delhi HighCourt: सौरव दास-आशुतोष रांका ने वापस ली याचिका, Bond की शर्तों पर कोर्ट के सवाल

दिल्ली हाईकोर्ट (Delhi HighCourt) में बुधवार, 21 अक्टूबर को CJP नेताओं सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका पर सुनवाई हुई। दोनों नेताओं ने स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट (SEM) के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी न्यायिक हिरासत दो दिन के लिए बढ़ाई गई थी। सुनवाई के दौरान कोर्ट की टिप्पणियों के बाद दोनों ने अपनी याचिका वापस ले ली। जस्टिस सुब्रमणियम प्रसाद की बेंच ने सुनवाई के दौरान सवाल उठाया कि जब इस मामले में दूसरी कानूनी प्रक्रिया अपनाने का विकल्प मौजूद है, तो सीधे हाईकोर्ट का रुख क्यों किया गया। कोर्ट ने दोनों नेताओं की ओर से शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन के आरोपों पर भी टिप्पणी की। Jantar Mantar Protest Case: क्या है पूरा मामला? सौरव दास और आशुतोष रांका को 13 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए प्रदर्शन के बाद हिरासत में लिया गया था। यह प्रदर्शन मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ किया गया था। पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेडिंग पार कर उस स्थान पर प्रवेश किया था, जिसे प्रदर्शन स्थल के रूप में पहले ही अधिसूचित सूची से हटा दिया गया था। इसके बाद दोनों नेताओं को न्यायिक हिरासत में भेजा गया। शुरुआत में उनकी हिरासत पांच दिन के लिए तय की गई थी। 19 अक्टूबर को स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट ने उनकी हिरासत दो दिन और बढ़ाने का आदेश दिया था। इसी फैसले को चुनौती देते हुए दोनों ने दिल्ली हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी। Court Remarks: बॉन्ड की शर्तों पर क्या कहा? सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने शांति बनाए रखने के लिए दिए गए बॉन्ड और उसके कथित उल्लंघन को लेकर सवाल उठाए। कोर्ट ने यह भी कहा कि बैरिकेडिंग तोड़ने जैसी घटना के बाद दूसरे लोगों के भी नियमों का उल्लंघन करने की आशंका बढ़ सकती है। दोनों नेताओं की ओर से पेश वकील ने हिरासत बढ़ाने के आदेश और जमानतदारों से जुड़ी प्रक्रिया पर सवाल उठाए। उनका पक्ष था कि दोनों ने आवश्यक जमानतदार पेश किए थे, इसके बावजूद उन्हें हिरासत में रखा गया। हालांकि, हाईकोर्ट ने मामले में उपलब्ध वैकल्पिक कानूनी उपाय अपनाने की बात कही। इसके बाद दोनों नेताओं की ओर से याचिका वापस लेने का फैसला किया गया। याचिका वापस लेने का क्या मतलब है? सौरव दास और आशुतोष रांका की याचिका वापस लिए जाने का अर्थ यह नहीं है कि हाईकोर्ट ने हिरासत बढ़ाने के आदेश को सही ठहरा दिया है। अदालत ने मामले के गुण-दोष पर कोई अंतिम राय दिए बिना याचिका वापस लेने की अनुमति दी। कोर्ट ने दोनों पक्षों को पहले स्पेशल एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट के समक्ष चल रही प्रक्रिया के नतीजे का इंतजार करने और जरूरत पड़ने पर उचित अपीलीय मंच का रुख करने की सलाह दी। इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया और मजिस्ट्रेट के समक्ष होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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