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Mod. Yunus

चिकन नेक कॉरिडोर पर यूनुस का बयान: ‘हम बांग्लादेश को तोड़कर समंदर तक अपना रास्ता बना सकते हैं…’, पूर्वोत्तर में भड़के विरोध के स्वर

नई दिल्ली। बांग्लादेश के नोबेल पुरस्कार विजेता मोहम्मद यूनुस के एक बयान ने भारत के पूर्वोत्तर राज्यों में तीखी प्रतिक्रियाओं को जन्म दिया है। यूनुस ने कथित तौर पर कहा कि अगर बांग्लादेश भारत के खिलाफ खड़ा हो जाए, तो वह समुद्र तक अपना रास्ता बना सकता है। यह टिप्पणी भारत के लिए रणनीतिक रूप से अहम चिकन नेक कॉरिडोर को लेकर की गई, जिसे देश के पूर्वोत्तर राज्यों को शेष भारत से जोड़ने वाली पतली ज़मीन की पट्टी माना जाता है। यूनुस का विवादित बयान और पृष्ठभूमि खबरों के मुताबिक, मोहम्मद यूनुस हाल ही में चीन की यात्रा पर थे, जहां उन्होंने कथित तौर पर बांग्लादेश को चीन के साथ मजबूत आर्थिक साझेदारी की जरूरत बताई। उन्होंने यह भी कहा कि बांग्लादेश एक लैंडलॉक्ड (चारों ओर से भूमि से घिरा) देश नहीं है और अगर वह भारत से टकराने को तैयार हो, तो समुद्र तक अपनी पहुंच बना सकता है। यूनुस के इस बयान के बाद पूर्वोत्तर भारत के राजनीतिक और सामाजिक संगठनों में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिली। कई नेताओं और संगठनों ने इसे भारत की अखंडता के खिलाफ खुली धमकी बताया है। क्या है चिकन नेक कॉरिडोर? चिकन नेक या सिलीगुड़ी कॉरिडोर भारत के लिए एक अत्यंत संवेदनशील भौगोलिक क्षेत्र है। यह सिर्फ 22 किलोमीटर चौड़ी भूमि पट्टी है, जो देश के पूर्वोत्तर राज्यों को बाकी भारत से जोड़ती है। चीन और बांग्लादेश की सीमा के बेहद करीब स्थित इस क्षेत्र को रणनीतिक और सैन्य दृष्टि से अत्यधिक संवेदनशील माना जाता है। यदि इस क्षेत्र पर किसी तरह का बाहरी खतरा उत्पन्न होता है, तो पूर्वोत्तर राज्यों का भारत से संपर्क कट सकता है। पूर्वोत्तर में भड़का गुस्सा यूनुस के बयान के बाद असम, अरुणाचल प्रदेश, त्रिपुरा और पश्चिम बंगाल के कई राजनीतिक और सामाजिक संगठनों ने विरोध जताया है। असम गण परिषद (AGP) और बोडोलैंड पीपुल्स फ्रंट (BPF) के नेताओं ने इस बयान को पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा के खिलाफ गंभीर खतरा बताया है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने कहा,“भारत का कोई भी हिस्सा, खासकर पूर्वोत्तर, बाहरी ताकतों के लिए कभी कमजोर नहीं रहा। हम अपनी सीमाओं की सुरक्षा को लेकर पूरी तरह सतर्क हैं और कोई भी व्यक्ति या देश हमारी संप्रभुता को चुनौती नहीं दे सकता।” इसके अलावा, कई राष्ट्रवादी संगठनों और छात्र संघों ने भी यूनुस के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। भारत की सुरक्षा पर असर? विशेषज्ञों के अनुसार, यदि बांग्लादेश के भीतर ऐसी भावनाएं पनपती हैं, तो यह भारत-बांग्लादेश संबंधों को प्रभावित कर सकता है। हालांकि, भारत और बांग्लादेश के रिश्ते अभी तक सकारात्मक रहे हैं और दोनों देशों के बीच व्यापारिक और कूटनीतिक संबंध मजबूत हैं। लेकिन इस तरह की बयानबाजी से पूर्वोत्तर भारत की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ सकती है। बांग्लादेश सरकार की प्रतिक्रिया अब तक बांग्लादेश सरकार की ओर से यूनुस के इस बयान पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है। हालांकि, बांग्लादेश के कई राजनीतिक विशेषज्ञों ने इस बयान को व्यक्तिगत विचार बताते हुए कहा कि यह सरकारी नीति का प्रतिनिधित्व नहीं करता। निष्कर्ष मोहम्मद यूनुस का यह बयान भारत के लिए सिर्फ एक राजनीतिक विवाद नहीं बल्कि एक रणनीतिक चेतावनी भी है। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा और संप्रभुता को लेकर पहले से ही संवेदनशील माहौल में ऐसे बयान आग में घी डालने का काम कर सकते हैं। अब देखना होगा कि भारत सरकार और पूर्वोत्तर राज्यों की सुरक्षा एजेंसियां इस मामले पर क्या कदम उठाती हैं।
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BREAKING NEWS:वक्फ संशोधन बिल पर लोकसभा में कल 12 बजे होगी चर्चा: सरकार और विपक्ष आमने-सामने, बड़ा सियासी संग्राम तय

नई दिल्ली: वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन और प्रशासन से जुड़े वक्फ संशोधन विधेयक (Waqf Amendment Bill) को लेकर राजनीतिक माहौल गरमाया हुआ है। यह विधेयक कल दोपहर 12 बजे लोकसभा में पेश किया जाएगा, जिस पर 8 घंटे की चर्चा निर्धारित की गई है। हालांकि, विपक्ष ने इस चर्चा को 12 घंटे तक बढ़ाने की मांग की है, जिससे यह साफ हो गया है कि इस मुद्दे पर सरकार और विपक्ष के बीच बड़ा टकराव हो सकता है। क्या है वक्फ संशोधन विधेयक? वक्फ संपत्तियों का प्रबंधन भारत में वक्फ अधिनियम, 1995 के तहत किया जाता है। वक्फ बोर्ड मुस्लिम समुदाय की धार्मिक और सामाजिक संपत्तियों को नियंत्रित करता है। हालांकि, समय-समय पर इस अधिनियम को लेकर विवाद होते रहे हैं। नए संशोधन में क्या बदलाव किए जा रहे हैं? विपक्ष ने जताया कड़ा विरोध इस विधेयक को लेकर विपक्ष ने तीखा विरोध जताया है। समाजवादी पार्टी (SP) के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने इसे समुदाय के खिलाफ बताया और कहा,“सरकार बिना सभी पक्षों को सुने यह विधेयक लाना चाहती है, जो पूरी तरह अनुचित है। यह मुसलमानों की धार्मिक और सामाजिक संपत्तियों पर हमला है। हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे और पूरी ताकत से इसका विरोध करेंगे।” कांग्रेस, टीएमसी और अन्य विपक्षी दलों ने भी विधेयक पर चर्चा का समय बढ़ाने की मांग की है। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा,“यह कानून देश के लाखों लोगों को प्रभावित करेगा, इसलिए इस पर विस्तृत चर्चा होनी चाहिए। केवल 8 घंटे की चर्चा काफी नहीं है।” योगी आदित्यनाथ का समर्थन, कहा- बदलाव समय की मांग उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस विधेयक का खुलकर समर्थन किया है। उन्होंने कहा,“देश में वक्फ संपत्तियों का सही उपयोग बहुत ज़रूरी है। यह संशोधन पारदर्शिता लाने और गलत इस्तेमाल को रोकने के लिए किया जा रहा है।” योगी आदित्यनाथ ने यह भी कहा कि,“वक्फ संपत्तियों को लेकर वर्षों से विवाद और अनियमितताएं रही हैं। अगर कोई बदलाव किया जा रहा है, तो वह राष्ट्रहित और समाजहित में है।” विधेयक के समर्थक और विरोधी कौन? इस विधेयक को लेकर दो खेमे बन चुके हैं।✅ समर्थक (BJP, JDU, AIADMK) – इन दलों का कहना है कि यह विधेयक संपत्तियों का सही प्रबंधन सुनिश्चित करेगा और भ्रष्टाचार को रोकेगा।❌ विरोधी (SP, Congress, TMC, AIMIM, Left) – विपक्षी दलों का मानना है कि सरकार इस कानून के ज़रिए वक्फ संपत्तियों पर नियंत्रण करना चाहती है और अल्पसंख्यकों को नुकसान पहुंचाने का प्रयास कर रही है। अब आगे क्या होगा? निष्कर्ष: वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर संसद में जबरदस्त हंगामा देखने को मिल सकता है। सरकार इसे भ्रष्टाचार रोकने वाला कदम बता रही है, जबकि विपक्ष इसे अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ साजिश करार दे रहा है। कल संसद में होने वाली बहस के बाद ही यह तय होगा कि यह विधेयक पास होगा या नहीं।
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क्या राणा सांगा ने बाबर को भारत आने का निमंत्रण दिया था? इतिहासकारों की राय और प्रमाण

देश हरपल एक्सक्लूसिव मुगल साम्राज्य के संस्थापक बाबर का भारत आगमन इतिहास के सबसे चर्चित विषयों में से एक है। एक लंबे समय से यह चर्चा होती रही है कि क्या मेवाड़ के राजा राणा सांगा ने वास्तव में बाबर को भारत पर आक्रमण करने के लिए आमंत्रित किया था या नहीं। इस सवाल का जवाब खोजने के लिए हमने कई प्रामाणिक ऐतिहासिक स्रोतों और इतिहासकारों की राय को खंगाला। क्या था ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य? 16वीं शताब्दी के प्रारंभ में उत्तर भारत छोटे-छोटे राज्यों में बंटा हुआ था। दिल्ली की सत्ता लोदी वंश के हाथों में थी, लेकिन सुल्तान इब्राहिम लोदी के खिलाफ कई विरोधी शासक थे, जिनमें राणा सांगा प्रमुख थे। दूसरी ओर, बाबर मध्य एशिया का एक शक्तिशाली शासक था, जिसने समरकंद और काबुल पर शासन किया था और उसकी नजरें हिंदुस्तान पर थीं। इतिहासकारों की राय और प्रमुख ग्रंथों का उल्लेख खानवा की लड़ाई: विश्वासघात या गलतफहमी? निष्कर्ष इतिहासकारों और प्रामाणिक ग्रंथों के अध्ययन से स्पष्ट होता है कि राणा सांगा ने बाबर को भारत आने का कोई औपचारिक निमंत्रण नहीं दिया था। हां, इब्राहिम लोदी के खिलाफ एक अनकहा गठबंधन जरूर था, लेकिन बाबर ने भारत पर अपने हितों के कारण आक्रमण किया था, न कि राणा सांगा के निमंत्रण पर। बाद में जब राणा सांगा को एहसास हुआ कि बाबर वापस नहीं जाने वाला, तो उन्होंने उसके खिलाफ युद्ध किया। (लेखक: देश हरपल न्यूज़ डेस्क)
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Kiran Rijiju

वक्फ संशोधन बिल पर किरन रिजिजू का बड़ा बयान: ‘विरोध करने वाले करोड़ों की जमीन पर काबिज’, जानिए पूरा मामला

नई दिल्ली: वक्फ संशोधन बिल को लेकर देशभर में बहस तेज हो गई है। इस बीच, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने इस मुद्दे पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों की जमीन पर अवैध कब्जा जमाए बैठे हैं। क्या है वक्फ संशोधन बिल? वक्फ संशोधन बिल 2023 को लेकर संसद में चर्चा जोरों पर है। सरकार का कहना है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों से जुड़े विवादों को हल करने और पारदर्शिता लाने के लिए लाया गया है। इस बिल के जरिए वक्फ बोर्डों को दी जाने वाली कुछ विशेष शक्तियों में बदलाव किया गया है, जिससे संपत्ति विवादों को सुलझाने में आसानी होगी। किरन रिजिजू ने क्या कहा? केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने एक इंटरव्यू में कहा कि जो लोग इस बिल का विरोध कर रहे हैं, वे खुद करोड़ों रुपये की जमीन पर अवैध रूप से काबिज हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि वक्फ की आड़ में कई जगहों पर अवैध कब्जे हुए हैं और सरकार इन मामलों को ठीक करने के लिए यह कानून ला रही है। केरल के बिशप का समर्थन केरल के कैथोलिक बिशप ने भी वक्फ संशोधन बिल का समर्थन किया है। उन्होंने कहा कि वक्फ संपत्तियों को लेकर कई राज्यों में विवाद हैं और इस बिल से इस समस्या का हल निकल सकता है। विपक्ष का विरोध क्यों? विपक्षी दलों का कहना है कि यह बिल मुस्लिम समुदाय की संपत्तियों के खिलाफ है और इससे उनके अधिकारों का हनन होगा। वहीं, सरकार का कहना है कि यह बिल केवल पारदर्शिता और न्याय सुनिश्चित करने के लिए लाया गया है। सरकार की मंशा क्या है? सरकार का कहना है कि वक्फ संपत्तियों पर अनियमितताओं और अवैध कब्जों को रोकने के लिए इस बिल की जरूरत है। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि इससे किसी भी धर्म विशेष के अधिकारों का उल्लंघन नहीं होगा। आगे क्या होगा? वक्फ संशोधन बिल पर संसद में बहस जारी है। यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यह बिल पास होता है या विपक्षी विरोध के कारण इसमें और बदलाव किए जाते हैं।
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PM pays tribute to RSS founders in Nagpur

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नागपुर दौरा: संघ संस्थापकों को श्रद्धांजलि, माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में संबोधन

नागपुर, 30 मार्च: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने नागपुर दौरे के दौरान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के संस्थापकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और माधव नेत्रालय के एक विशेष कार्यक्रम में लोगों को संबोधित किया। इस अवसर पर उन्होंने चिकित्सा सेवा, सामाजिक योगदान और भारत के दृष्टिहीन नागरिकों के लिए सरकार द्वारा किए जा रहे प्रयासों पर प्रकाश डाला। संघ संस्थापकों को पुष्पांजलि प्रधानमंत्री मोदी ने नागपुर स्थित केशव कुंज पहुंचकर संघ के संस्थापकों डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार और माधव सदाशिव गोलवलकर (गुरुजी) को पुष्पांजलि अर्पित की। यह स्थान राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का ऐतिहासिक केंद्र माना जाता है, जहां से संघ की विचारधारा और राष्ट्र निर्माण की दिशा में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए जाते हैं। माधव नेत्रालय के कार्यक्रम में PM मोदी का संबोधन इसके बाद प्रधानमंत्री माधव नेत्रालय के एक कार्यक्रम में पहुंचे, जहां उन्होंने समाज के जरूरतमंद लोगों के लिए इस संस्थान की सेवाओं की सराहना की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा,“माधव नेत्रालय केवल नेत्रों का इलाज करने का केंद्र नहीं, बल्कि समाज की सेवा का एक बड़ा उदाहरण है। दृष्टिहीनता को कम करने के लिए किए जा रहे प्रयास सराहनीय हैं।” प्रधानमंत्री ने यह भी बताया कि सरकार की विभिन्न योजनाओं के तहत देशभर में आंखों की बीमारियों से बचाव और इलाज के लिए बड़े स्तर पर कार्य किया जा रहा है। उन्होंने आयुष्मान भारत योजना, डिजिटल हेल्थ मिशन और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया। राष्ट्रीय सेवा और स्वास्थ्य के क्षेत्र में योगदान प्रधानमंत्री नेत्रालय के डॉक्टरों, विशेषज्ञों और सामाजिक कार्यकर्ताओं की भी प्रशंसा की, जो नि:स्वार्थ भाव से जरूरतमंदों की मदद कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा और समाज सेवा के क्षेत्र में नागपुर जैसे शहरों की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है, और यह संस्थान इस दिशा में एक मिसाल कायम कर रहा है। नागपुर दौरे का महत्व प्रधानमंत्री मोदी का यह दौरा कई मायनों में अहम माना जा रहा है। संघ के गढ़ नागपुर में उनकी उपस्थिति राजनीतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि आने वाले चुनावों में इससे भाजपा और संघ के संबंधों को नई ऊर्जा मिलने की संभावना जताई जा रही है। प्रधानमंत्री का यह दौरा केवल श्रद्धांजलि और संबोधन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उन्होंने नागपुरवासियों को यह संदेश दिया कि सरकार स्वास्थ्य, सेवा और समाज कल्याण के लिए निरंतर प्रयासरत है। (देश हरपल न्यूज के लिए विशेष रिपोर्ट)
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सामूहिक विवाह में भाई-बहन की शादी

उत्तर प्रदेश के जौनपुर में आयोजित एक महोत्सव के दौरान हुए सामूहिक विवाह कार्यक्रम में फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आरोप है कि इस कार्यक्रम में भाई-बहन को दूल्हा-दुल्हन के रूप में बैठाकर उनकी शादी कराई गई। इस सामूहिक विवाह में लगभग 1001 जोड़ों का विवाह संपन्न हुआ था, जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी शामिल हुए थे। घटना के अनुसार, एक युवक ने अपनी बहन के साथ विवाह मंडप में बैठने के पीछे सफा पहनने की इच्छा का कारण बताया। उसका कहना था कि उसे सफा पहनने का शौक था, इसलिए वह अपनी बहन के साथ विवाह मंडप में बैठ गया। इस मामले के उजागर होने के बाद प्रशासन ने जांच शुरू कर दी है।  यह घटना मुख्यमंत्री सामूहिक विवाह योजना के तहत आयोजित कार्यक्रमों में सामने आए फर्जीवाड़े की घटनाओं में से एक है। इससे पहले भी अमरोहा जिले में एक महिला ने अपने चचेरे भाई के साथ शादी करके सरकारी लाभ प्राप्त करने की कोशिश की थी। इन घटनाओं के प्रकाश में आने के बाद प्रशासन ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी है और जांच के आदेश दिए गए हैं। इन घटनाओं से स्पष्ट होता है कि सामूहिक विवाह योजनाओं में सख्त निगरानी और सत्यापन की आवश्यकता है, ताकि इस तरह के फर्जीवाड़े रोके जा सकें और सरकारी योजनाओं का सही लाभ पात्र लोगों तक पहुंच सके।
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SupremeCourtHearingControversy; Supreme Court

सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, कहा- ‘टिप्पणी असंवेदनशील और अमानवीय’

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले पर रोक लगाते हुए उसकी कड़ी आलोचना की। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किसी नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को ‘असंवेदनशील’ और ‘अमानवीय दृष्टिकोण’ बताया है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “यह बहुत गंभीर मामला है और जिस जज ने यह फैसला दिया, उसकी तरफ से बहुत असंवेदनशीलता दिखाई गई। हमें यह कहते हुए बहुत दुख हो रहा है कि फैसला लिखने वाले में संवेदनशीलता की पूरी तरह से कमी थी।” सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया था। यह फैसला आते ही कानूनी विशेषज्ञों, राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए तुरंत सुनवाई का निर्णय लिया। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सुप्रीम कोर्ट के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने खुद लिया संज्ञान “कुछ फैसलों को रोकने के पीछे महत्वपूर्ण कारण होते हैं, और यह उनमें से एक है।” हाईकोर्ट का विवादास्पद फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, “किसी लड़की के निजी अंग पकड़ लेना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ देना और जबरन उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता।” हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद महिला संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि यह पीड़िता के अधिकारों का हनन करता है और यौन उत्पीड़न को हल्के में लेने जैसा है। न्यायपालिका पर उठे सवाल यह मामला देश में महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनी ढांचे को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले अपराधियों को बचाव का आधार दे सकते हैं और महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों के खिलाफ न्याय मिलने में बाधा बन सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अब पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। इस मामले की अगली सुनवाई जल्द ही होने की संभावना है। (देश हरपल की विशेष रिपोर्ट)
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PM Modi

PM Modi NEET Support: छात्रों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट पर मॉनिटरिंग

नई दिल्ली में NEET परीक्षा के दिन एक अहम और संवेदनशील स्थिति देखने को मिली, जब PM Modi ने छात्रों की सुविधा और समय पर परीक्षा केंद्र तक पहुंच सुनिश्चित करने के लिए दिल्ली एयरपोर्ट पर ही ट्रैवल व्यवस्था पर नजर बनाए रखी। सूत्रों के मुताबिक, उस दिन एयर ट्रैवल और फ्लाइट संचालन को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही थी, ताकि किसी भी NEET अभ्यर्थी को यात्रा में देरी या किसी तरह की परेशानी का सामना न करना पड़े। इसी दौरान प्रधानमंत्री ने एयरपोर्ट पर रुककर पूरी स्थिति का जायजा लिया और संबंधित अधिकारियों से लगातार अपडेट लेते रहे। NEET जैसी बड़ी राष्ट्रीय परीक्षा में देशभर से लाखों छात्र हिस्सा लेते हैं। कई उम्मीदवार दूसरे शहरों में जाकर परीक्षा देते हैं, ऐसे में समय पर परीक्षा केंद्र पहुंचना बेहद जरूरी होता है। छोटी सी देरी भी छात्रों के भविष्य पर बड़ा असर डाल सकती है। इसी वजह से प्रशासन ने एयरपोर्ट और ट्रैवल सिस्टम को पूरी तरह अलर्ट मोड पर रखा। दिल्ली एयरपोर्ट पर मौजूद अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि फ्लाइट संचालन सामान्य रहे और किसी भी छात्र की यात्रा प्रभावित न हो। यात्रियों की सुविधा और परीक्षा के महत्व को ध्यान में रखते हुए पूरी व्यवस्था को सक्रिय और सुचारू रखा गया। यह घटना एक बार फिर दर्शाती है कि बड़े एग्जाम के दौरान ट्रैवल मैनेजमेंट और सरकारी समन्वय कितना महत्वपूर्ण होता है। खासकर NEET जैसे एग्जाम में, जहां हर मिनट की कीमत होती है, वहां सही व्यवस्था छात्रों के लिए बड़ी राहत बनती है।
Tiruvallur

Tiruvallur Factory Accident: Ammonia Gas Leak से 65+ Workers प्रभावित, 6 गंभीर

तमिलनाडु के Tiruvallur में एक फैक्ट्री के अंदर हुए अमोनिया गैस लीक ने पूरे इलाके में दहशत फैला दी। अचानक हुए इस हादसे में 65 से ज्यादा कर्मचारी प्रभावित हो गए, जबकि 6 वर्करों की हालत गंभीर बताई जा रही है। सभी घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पतालों में भर्ती कराया गया है। सुबह की शिफ्ट के दौरान हुए इस हादसे ने कामकाज के माहौल को पूरी तरह बदल दिया। कुछ ही मिनटों में फैक्ट्री के अंदर घबराहट फैल गई और लोग सुरक्षित बाहर निकलने के लिए दौड़ पड़े। कैसे हुआ यह हादसा? प्रारंभिक जानकारी के मुताबिक फैक्ट्री के एक तकनीकी यूनिट में Ammonia Gas Leakage हुआ। गैस जैसे ही फैलनी शुरू हुई, वहां मौजूद कर्मचारियों को सांस लेने में परेशानी होने लगी। कुछ ही देर में स्थिति बिगड़ गई और कई कर्मचारी बेहोश होकर गिर पड़े। इसके बाद फैक्ट्री प्रशासन ने तुरंत इमरजेंसी अलर्ट जारी कर दिया। कुछ ही मिनटों में फैक्ट्री बनी “खतरे का जोन” राहत और बचाव कार्य तेज हादसे के तुरंत बाद रेस्क्यू टीम और प्रशासन मौके पर पहुंचा और प्रभावित लोगों को अस्पताल पहुंचाने का काम शुरू किया। अस्पताल में भर्ती कई कर्मचारी अभी भी गैस के असर से उबर रहे हैं। सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल इस घटना के बाद फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों और कर्मचारियों का कहना है कि अगर सुरक्षा सिस्टम मजबूत होते तो यह हादसा टल सकता था। लोग पूछ रहे हैं कि क्या: प्रशासन ने शुरू की जांच जिला प्रशासन ने पूरे मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं। अधिकारियों का कहना है कि फैक्ट्री की सुरक्षा व्यवस्था और संचालन प्रक्रिया की गहन जांच की जाएगी। अगर लापरवाही साबित होती है तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Murmu

MP Breaking: Jabalpur में राष्ट्रपति Murmu का दौरा, Yoga Event और Convocation में शामिल

मध्य प्रदेश के जबलपुर में आज एक बेहद खास और प्रेरणादायक दृश्य देखने को मिला, जब राष्ट्रपति Droupadi Murmu अपने एक दिवसीय दौरे पर शहर पहुंचीं। उनका यह दौरा सिर्फ औपचारिक कार्यक्रमों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें योग, शिक्षा और सामाजिक संदेशों का मजबूत समावेश देखने को मिला। योग कार्यक्रम में दिखा उत्साह और एकता जबलपुर में आयोजित योग कार्यक्रम में राष्ट्रपति मुर्मु ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ हिस्सा लिया। खुले वातावरण में हुए इस कार्यक्रम में लोगों ने सामूहिक योगाभ्यास किया और पूरे माहौल में सकारात्मक ऊर्जा देखने को मिली। राष्ट्रपति ने योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने की अपील की और कहा कि यह शरीर के साथ-साथ मन को भी संतुलित और शांत रखता है। कार्यक्रम में मौजूद लोगों के लिए यह क्षण बेहद खास रहा, जब देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर बैठी राष्ट्रपति ने खुद योग कर एक मजबूत संदेश दिया कि स्वास्थ्य ही असली संपत्ति है। RDVV दीक्षांत समारोह में छात्रों को मिला प्रेरणादायक संदेश इसके बाद राष्ट्रपति मुर्मु ने Rani Durgavati Vishwavidyalaya के दीक्षांत समारोह में शिरकत की। यहां उन्होंने मेधावी छात्रों को सम्मानित किया और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि आज के युवा देश का भविष्य हैं और उन्हें न केवल शिक्षा में बल्कि चरित्र निर्माण में भी आगे रहना चाहिए। दीक्षांत समारोह में राज्यपाल, मुख्यमंत्री और कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। विश्वविद्यालय परिसर में राष्ट्रपति के आगमन को लेकर सुरक्षा और व्यवस्थाओं के विशेष इंतजाम किए गए थे। शिक्षा और स्वास्थ्य का मिला सुंदर संदेश पूरा दिन जबलपुर के लिए बेहद महत्वपूर्ण और यादगार बन गया, जहां एक ओर योग के माध्यम से स्वास्थ्य का संदेश दिया गया, वहीं दूसरी ओर शिक्षा के क्षेत्र में युवाओं को नई दिशा और प्रेरणा मिली। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Keir Starmer

UK Politics Breaking: लेबर पार्टी में उथल-पुथल, PM Keir Starmer पर संकट गहराया

ब्रिटेन की राजनीति इस समय एक बड़े सियासी तनाव से गुजर रही है। प्रधानमंत्री Keir Starmer को लेकर इस्तीफे की चर्चाएं तेज हो गई हैं। कई रिपोर्ट्स और दावों में कहा जा रहा है कि उनकी ही पार्टी लेबर पार्टी के भीतर असंतोष लगातार बढ़ता जा रहा है, जिससे नेतृत्व पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। हालांकि अभी तक किसी भी आधिकारिक स्तर पर इस्तीफे की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक माहौल काफी गर्म हो चुका है। पार्टी के भीतर बढ़ा असंतोष, 100 सांसदों की नाराज़गी का दावा रिपोर्ट्स के मुताबिक लेबर पार्टी के अंदर हालात सामान्य नहीं हैं। बताया जा रहा है कि: इस स्थिति ने प्रधानमंत्री पर दबाव और बढ़ा दिया है। ब्रिटेन की राजनीति में लगातार अस्थिरता पिछले कुछ वर्षों में ब्रिटेन की राजनीतिक स्थिति काफी अस्थिर रही है: यह पैटर्न ब्रिटेन की राजनीतिक स्थिरता पर गंभीर सवाल उठाता है। आखिर क्यों बढ़ रहा है PM पर दबाव? विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा संकट के पीछे कई कारण हो सकते हैं: इन सभी कारणों ने मिलकर हालात को और जटिल बना दिया है। क्या सच में इस्तीफा देंगे Keir Starmer? फिलहाल यह पूरा मामला मीडिया रिपोर्ट्स और राजनीतिक दावों पर आधारित है। सरकार या प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से इस्तीफे की कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। लेकिन जिस तरह पार्टी के भीतर असंतोष बढ़ रहा है, उससे यह साफ है कि आने वाले दिनों में ब्रिटिश राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
भारतीय नौसेना

भारतीय नौसेना को मिले 3 नए Warships: INS Androth और Sandhayak की बड़ी एंट्री

भारतीय नौसेना के बेड़े में तीन नए स्वदेशी युद्धपोतों की एंट्री हुई है, जिससे देश की समुद्री सुरक्षा और मजबूत हो गई है। ये जहाज न सिर्फ आधुनिक तकनीक से लैस हैं, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को भी नई दिशा देते हैं। इन नए युद्धपोतों में प्रमुख हैं INS Dunagiri, INS Androth और INS Sandhayak। इन तीनों को अलग-अलग रणनीतिक भूमिकाओं के लिए तैयार किया गया है, जिससे भारतीय नौसेना की ऑपरेशनल ताकत कई गुना बढ़ गई है। INS Dunagiri: Modern Stealth Frigate with BrahMos Capability INS Dunagiri को एक एडवांस स्टील्थ फ्रिगेट के रूप में डिजाइन किया गया है, जो दुश्मन के रडार से बचकर ऑपरेशन करने में सक्षम है। इसमें BrahMos missile जैसी हाई-स्पीड और सटीक मार करने वाली मिसाइल प्रणाली को इंटीग्रेट करने की क्षमता है, जिससे यह जहाज बेहद घातक बन जाता है। यह युद्धपोत समुद्री निगरानी, हमला और सुरक्षा अभियानों में अहम भूमिका निभाएगा। INS Androth: Anti-Submarine Warfare में नई ताकत INS Androth को खास तौर पर पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) के लिए विकसित किया गया है। इसका मुख्य काम समुद्र में छिपी दुश्मन पनडुब्बियों का पता लगाना और उन्हें निष्क्रिय करना है। आधुनिक सेंसर और हथियार प्रणालियों के साथ यह जहाज भारत की समुद्री सीमाओं को और सुरक्षित बनाता है। INS Sandhayak: Hydrographic Survey में अहम भूमिका INS Sandhayak एक आधुनिक सर्वे वेसल है, जो समुद्र की गहराई, जलमार्ग और नेविगेशन मैपिंग का काम करती है। यह जहाज लगातार लंबे समय तक समुद्र में ऑपरेशन कर सकता है, जिससे भारत के समुद्री रास्तों की सुरक्षा और बेहतर योजना संभव होती है। आत्मनिर्भर भारत की ओर मजबूत कदम ये तीनों युद्धपोत पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से बनाए गए हैं, जो भारत के “Make in India” और “Atmanirbhar Bharat” मिशन को मजबूत करते हैं। इनके शामिल होने से भारतीय नौसेना की समुद्री निगरानी, युद्ध क्षमता और रणनीतिक पकड़ पहले से कहीं अधिक मजबूत हो गई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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