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Monsoon

Monsoon का कहर! MP समेत 6 राज्यों में लगातार बारिश, UP में 25 मकान पानी में डूबे

देश के कई राज्यों में मानसून (Monsoon) की बारिश अब लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान समेत कई राज्यों में पिछले 24 घंटे से बारिश का दौर जारी है। लगातार बरसात के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ गया है, निचले इलाकों में पानी भर रहा है और कई जगहों पर सामान्य जनजीवन प्रभावित हुआ है। मौसम विभाग ने भी आने वाले दिनों में कुछ राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी दी है। MP में लगातार बारिश से बढ़ी परेशानी मध्य प्रदेश में बारिश का असर कई जिलों में दिखाई दे रहा है। भोपाल, विदिशा, रायसेन, मंडला और डिंडौरी समेत कई इलाकों में तेज बारिश के बाद नदी-नालों का जलस्तर बढ़ गया है। कुछ जगहों पर सड़कें पानी में डूबने से लोगों की आवाजाही प्रभावित हुई है। भोपाल में भी लगातार बारिश के चलते कई इलाकों में जलभराव की स्थिति बनी। प्रशासन की टीमें प्रभावित क्षेत्रों पर नजर रख रही हैं। नदी और नालों के आसपास रहने वाले लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है। मंडला और डिंडौरी क्षेत्र में तेज बारिश का असर खास तौर पर देखने को मिला है। नदियों के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। UP में गंगा का जलस्तर बढ़ा, कई मकानों पर संकट उत्तर प्रदेश में भी लगातार बारिश के कारण हालात चिंताजनक बने हुए हैं। गंगा का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बसे इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है। कई निचले इलाकों में पानी पहुंचने के बाद लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, गंगा के बढ़ते जलस्तर के कारण करीब 25 मकानों के पानी की चपेट में आने की बात सामने आई है। स्थानीय स्तर पर राहत और बचाव की तैयारियां तेज की गई हैं। प्रशासन लोगों से नदी के आसपास जाने से बचने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील कर रहा है। Rajasthan में 12 इंच तक बारिश, बांधों पर बढ़ा दबाव राजस्थान में मानसून इस समय काफी सक्रिय है। राज्य के कई जिलों में जोरदार बारिश दर्ज की गई है। कुछ इलाकों में करीब 12 इंच तक बारिश होने से सड़कों और निचले क्षेत्रों में पानी भर गया। हाड़ौती क्षेत्र में बारिश का असर ज्यादा दिखाई दे रहा है। झालावाड़, बारां, बूंदी और कोटा समेत आसपास के इलाकों में भारी बारिश के बाद बांधों और जलाशयों का जलस्तर बढ़ गया है। कई जगह पानी की निकासी के लिए बांधों के गेट खोलने पड़े हैं। भारी बारिश के कारण ग्रामीण क्षेत्रों में भी लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। खेतों में पानी भरने से किसानों की चिंता बढ़ गई है, जबकि कई रास्तों पर पानी आने से आवागमन प्रभावित हुआ है। किन राज्यों में बारिश का अलर्ट? मौसम विभाग ने मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और राजस्थान के अलावा देश के कई अन्य हिस्सों में भी बारिश की संभावना जताई है। उत्तर भारत से लेकर मध्य और पश्चिमी भारत तक मानसून सक्रिय रहने के आसार हैं। कई इलाकों में भारी बारिश के साथ तेज हवाएं और बिजली गिरने की आशंका भी जताई गई है। ऐसे में लोगों को मौसम विभाग के अपडेट पर नजर रखने की सलाह दी गई है। नदियों और बांधों पर प्रशासन की नजर लगातार बारिश के बीच प्रशासन की सबसे बड़ी चिंता नदियों और बांधों का बढ़ता जलस्तर है। जलस्तर बढ़ने के साथ निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की जा रही है। स्थानीय प्रशासन और राहत दल संवेदनशील इलाकों पर नजर बनाए हुए हैं। लोगों से अपील की जा रही है कि वे उफनती नदियों, नालों और तेज बहाव वाले रास्तों को पार करने की कोशिश न करें। अगले कुछ दिन भी अहम मानसून की मौजूदा स्थिति को देखते हुए अगले कुछ दिन कई राज्यों के लिए अहम रहने वाले हैं। लगातार बारिश जहां किसानों के लिए राहत लेकर आई है, वहीं अत्यधिक बारिश ने कई इलाकों में बाढ़ और जलभराव का खतरा बढ़ा दिया है। फिलहाल लोगों को सलाह है कि बिना जरूरत घर से बाहर निकलने से बचें और अपने इलाके की स्थानीय Weather Alert को नजरअंदाज न करें। खासकर नदी और निचले इलाकों में रहने वाले लोग प्रशासन की अपील को गंभीरता से लें। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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JSSC-CGL

JSSC-CGL Paper Leak Case: 15 अभ्यर्थियों से करोड़ों की डील? CID जांच में चौंकाने वाले दावे

झारखंड में सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे युवाओं के बीच JSSC-CGL को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ी की जांच कर रही CID को गिरफ्तार किए गए अभय तिवारी से पूछताछ में कई अहम जानकारियां मिलने का दावा किया गया है। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, परीक्षा से पहले कुछ अभ्यर्थियों को सवाल-जवाब उपलब्ध कराने के बदले मोटी रकम लिए जाने की बात सामने आई है। इस पूरे मामले ने उन हजारों छात्रों की चिंता बढ़ा दी है, जो महीनों और वर्षों की मेहनत के बाद सरकारी भर्ती परीक्षाओं में शामिल होते हैं। 15 अभ्यर्थियों से 12-12 लाख रुपये लेने का दावा CID की पूछताछ से सामने आई जानकारी के मुताबिक, बोकारो में करीब 15 अभ्यर्थियों से कथित तौर पर 12-12 लाख रुपये लिए गए थे। इस हिसाब से रकम लगभग 1.80 करोड़ रुपये बताई जा रही है। जांच में यह भी दावा किया गया है कि इन अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले करीब 65 सवाल और उनके जवाब उपलब्ध कराए गए थे। कथित तौर पर उम्मीदवारों को इन्हें याद कराया गया, ताकि परीक्षा के दौरान उन्हें सीधा फायदा मिल सके। हालांकि, इन दावों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पेपर लीक की जांच में एजेंसियों की भूमिका पर भी नजर मामला सामने आने के बाद CID की जांच अब केवल अभय तिवारी तक सीमित नहीं है। जांच एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि परीक्षा से जुड़े सवाल या सामग्री बाहर कैसे पहुंची और इसमें किन लोगों की भूमिका रही। JSSC-CGL की परीक्षा प्रक्रिया में अलग-अलग एजेंसियों और कर्मचारियों की जिम्मेदारियां थीं। ऐसे में जांच का एक अहम हिस्सा यह भी है कि परीक्षा से जुड़े संवेदनशील काम तक किन लोगों की पहुंच थी। CID कथित नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने के साथ-साथ पैसों के लेन-देन की भी जानकारी जुटा रही है। अभय तिवारी पर पहले से भी उठते रहे हैं सवाल अभय तिवारी की गिरफ्तारी के बाद उसकी शैक्षणिक और प्रतियोगी परीक्षा से जुड़ी पृष्ठभूमि भी जांच के केंद्र में आ गई है। रिपोर्टों में दावा किया गया है कि उसने खुद भी कई प्रतियोगी परीक्षाएं पास की थीं। JSSC-CGL में उसकी रैंक और उसके परिवार के कुछ सदस्यों के चयन को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। CID इन सभी पहलुओं को जांच का हिस्सा बनाकर जानकारी जुटा रही है। JPSC-JSSC विवाद के बीच बढ़ी छात्रों की बेचैनी झारखंड में पहले से ही JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं को लेकर छात्रों का गुस्सा देखने को मिल रहा है। छात्र संगठनों का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में बार-बार विवाद सामने आने से मेहनत करने वाले उम्मीदवारों का भरोसा कमजोर हो रहा है। कई अभ्यर्थी पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच की मांग कर रहे हैं। छात्रों का कहना है कि अगर परीक्षा में किसी तरह की गड़बड़ी साबित होती है तो सरकार को प्रभावित उम्मीदवारों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए स्पष्ट फैसला लेना चाहिए। अब CID की जांच में किन सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं? अभय तिवारी से पूछताछ के बाद जांच एजेंसी के सामने कई अहम सवाल हैं। मसलन, कथित तौर पर सवाल-जवाब कहां से मिले? इन्हें अभ्यर्थियों तक किसने पहुंचाया? कितने उम्मीदवारों को इसका फायदा मिला? और इस पूरे मामले में पैसों का लेन-देन किन लोगों के बीच हुआ? इन सवालों के जवाब मिलने के बाद ही कथित पेपर लीक के पूरे नेटवर्क की तस्वीर साफ हो पाएगी। फिलहाल CID की जांच जारी है। ऐसे में सामने आई जानकारियों को जांच में किए गए दावों के तौर पर ही देखा जाना चाहिए। किसी भी आरोपी को अदालत से दोष सिद्ध होने से पहले दोषी नहीं माना जा सकता। छात्रों के लिए सबसे बड़ा सवाल JSSC-CGL जैसी परीक्षा सिर्फ एक एग्जाम नहीं होती। इसके पीछे हजारों युवाओं की मेहनत, समय और उम्मीद जुड़ी होती है। ऐसे में अगर परीक्षा में गड़बड़ी के आरोप सामने आते हैं तो सबसे ज्यादा चिंता उन उम्मीदवारों को होती है, जिन्होंने पूरी ईमानदारी से परीक्षा दी है। अब सबकी नजर CID की अगली कार्रवाई और सरकार के फैसले पर है। जांच में अगर आरोप सही साबित होते हैं, तो यह झारखंड की भर्ती व्यवस्था के लिए बड़ा झटका होगा और परीक्षा की पारदर्शिता को लेकर कई गंभीर सवालों का जवाब देना पड़ेगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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15 अगस्त

15 अगस्त से पहले Delhi High Alert! 19 मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों के Posters से बढ़ी Security

स्वतंत्रता दिवस से ठीक पहले राजधानी दिल्ली की सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी कर दी गई है। 15 अगस्त को लाल किले पर होने वाले कार्यक्रम को देखते हुए दिल्ली पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं। इसी बीच पुलिस ने 19 मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों के पोस्टर सार्वजनिक किए हैं। इन पोस्टरों के जरिए लोगों से संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने और किसी भी महत्वपूर्ण जानकारी को पुलिस तक पहुंचाने की अपील की गई है। रिपोर्टों के मुताबिक, पोस्टरों में इंडियन मुजाहिदीन, अल-कायदा और खालिस्तानी संगठनों से जुड़े वांटेड आरोपियों की जानकारी शामिल है। पुलिस का मकसद इन लोगों की पहचान से जुड़ी जानकारी को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है। 15 अगस्त को लेकर Delhi में बढ़ाई गई Security स्वतंत्रता दिवस के मौके पर दिल्ली में बड़ी संख्या में लोग लाल किले और आसपास के इलाकों में पहुंचते हैं। इसे देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ा दी है। लाल किले के अलावा रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, बाजार, मेट्रो स्टेशन और अन्य भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। पुलिसकर्मियों की तैनाती बढ़ाने के साथ संदिग्ध गतिविधियों पर नजर रखने के लिए निगरानी व्यवस्था को मजबूत किया गया है। 19 आतंकियों के Posters क्यों लगाए गए? सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर लगाने के पीछे पुलिस का एक अहम उद्देश्य आम लोगों को जागरूक करना है। अगर किसी व्यक्ति को पोस्टर में दिखाई गई तस्वीरों या जानकारी से संबंधित कोई विश्वसनीय सूचना मिलती है, तो वह उसे पुलिस तक पहुंचा सकता है। हालांकि, किसी भी संदिग्ध व्यक्ति को खुद पकड़ने या उससे पूछताछ करने के बजाय पुलिस को सूचना देना ज्यादा सुरक्षित है। सुरक्षा एजेंसियां इसी तरह की सतर्कता को स्वतंत्रता दिवस से पहले महत्वपूर्ण मान रही हैं। Delhi Metro में भी Extra Checking स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्ली मेट्रो में भी सुरक्षा जांच बढ़ाई गई है। यात्रियों की अतिरिक्त जांच के कारण कुछ स्टेशनों पर सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा समय लग सकता है। ऐसे में यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे घर से थोड़ा पहले निकलें और स्टेशन पर सुरक्षा जांच के दौरान सुरक्षाकर्मियों का सहयोग करें। भीड़ को देखते हुए यात्रा के दौरान अतिरिक्त समय रखना परेशानी से बचा सकता है। Red Fort पर खास नजर 15 अगस्त का मुख्य कार्यक्रम लाल किले में होता है। प्रधानमंत्री यहां से देश को संबोधित करते हैं और स्वतंत्रता दिवस समारोह में बड़ी संख्या में गणमान्य लोग शामिल होते हैं। यही वजह है कि लाल किले और आसपास के क्षेत्र में सुरक्षा का स्तर काफी ऊंचा रखा जाता है। सुरक्षा एजेंसियां आयोजन स्थल के साथ-साथ आसपास के इलाकों पर भी नजर रख रही हैं, ताकि किसी भी तरह की संदिग्ध गतिविधि पर समय रहते कार्रवाई की जा सके। लोगों से भी सतर्क रहने की अपील दिल्ली पुलिस की सुरक्षा तैयारियों के बीच आम लोगों की भूमिका भी अहम हो जाती है। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वे किसी संदिग्ध वस्तु, व्यक्ति या गतिविधि को नजरअंदाज न करें और इसकी सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें। हालांकि, अफवाहों से बचना भी उतना ही जरूरी है। किसी व्यक्ति के बारे में केवल शक के आधार पर निष्कर्ष निकालने के बजाय सूचना को पुलिस तक पहुंचाना बेहतर है। 15 अगस्त को लेकर दिल्ली में कड़ी निगरानी स्वतंत्रता दिवस से पहले दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को कई स्तरों पर मजबूत किया गया है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों के बीच Coordination बढ़ाया गया है और महत्वपूर्ण स्थानों पर निगरानी रखी जा रही है। 19 मोस्ट वॉन्टेड आतंकियों के Posters जारी होने और सुरक्षा जांच बढ़ने के बाद राजधानी में सतर्कता और बढ़ गई है। फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता यही है कि 15 अगस्त का राष्ट्रीय समारोह शांतिपूर्ण और सुरक्षित माहौल में संपन्न हो। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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NDA

Parliament में NDA vs Congress: Jharkhand Students के मुद्दे पर Rahul Gandhi घिरे

झारखंड में छात्रों का आंदोलन अब सिर्फ सड़कों तक सीमित नहीं रहा। छात्र अपनी मांगों को लेकर लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं और इसी मुद्दे ने संसद में भी सियासी गर्मी बढ़ा दी है। मंगलवार को संसद परिसर में NDA और कांग्रेस सांसदों के बीच प्रदर्शन और बयानबाजी देखने को मिली। BJP ने राहुल गांधी को निशाने पर लेते हुए सवाल किया कि वह झारखंड क्यों नहीं गए, जबकि कांग्रेस की ओर से प्रियंका गांधी ने इसका जवाब दिया। मामला उस वक्त और गरमा गया जब NDA सांसदों ने संसद परिसर में मार्च किया। इस दौरान झारखंड के छात्र आंदोलन का मुद्दा उठाते हुए विपक्ष पर राजनीति करने के आरोप लगाए गए। BJP ने पूछा- राहुल गांधी झारखंड क्यों नहीं गए? संसद में प्रदर्शन के दौरान BJP सांसदों ने राहुल गांधी को लेकर सवाल खड़े किए। BJP नेताओं का कहना था कि अगर कांग्रेस वास्तव में झारखंड के छात्रों की मांगों के साथ खड़ी है, तो राहुल गांधी को खुद छात्रों के बीच जाकर उनकी बात सुननी चाहिए। BJP की ओर से यह भी आरोप लगाया गया कि कांग्रेस अलग-अलग राज्यों में छात्र आंदोलनों को लेकर अलग-अलग रवैया अपनाती है। पार्टी नेताओं ने झारखंड के छात्रों के मुद्दे को लेकर कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाए। Priyanka Gandhi ने दिया सीधा जवाब BJP के सवालों पर कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी ने राहुल गांधी का बचाव किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी झारखंड के छात्रों से पहले ही मुलाकात कर चुके हैं। प्रियंका के इस बयान के बाद BJP के उस सवाल पर कांग्रेस का पक्ष सामने आ गया, जिसमें राहुल गांधी के झारखंड नहीं जाने को मुद्दा बनाया जा रहा था। कांग्रेस का कहना है कि राहुल गांधी छात्रों के मुद्दे को लगातार उठा रहे हैं और उनके साथ हो रहे व्यवहार पर भी सवाल कर चुके हैं। Jharkhand में क्यों चल रहा है Student Protest? झारखंड में छात्रों और नौकरी की तैयारी कर रहे अभ्यर्थियों का आंदोलन भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों को लेकर चल रहा है। प्रदर्शनकारी परीक्षा प्रक्रिया में सुधार, कथित अनियमितताओं की जांच और अपनी अन्य मांगों को लेकर सरकार से जवाब चाहते हैं। कई दिनों से चल रहे इस आंदोलन के कारण राज्य में माहौल गर्म है। छात्रों की कोशिश है कि सरकार उनकी मांगों पर गंभीरता से बातचीत करे और कोई ठोस समाधान निकाला जाए। विधानसभा मार्च के दौरान बढ़ा तनाव छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर विधानसभा की ओर मार्च करने की कोशिश की थी। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव की स्थिति बनी। भीड़ को नियंत्रित करने के लिए पुलिस की कार्रवाई के बाद मामला और ज्यादा राजनीतिक हो गया। विपक्ष ने पुलिस कार्रवाई को लेकर सरकार पर सवाल उठाए, जबकि सत्ता पक्ष की ओर से प्रदर्शन के तरीके और विपक्ष की भूमिका पर सवाल खड़े किए गए। संसद में आमने-सामने आए NDA और Congress झारखंड छात्र आंदोलन को लेकर अब राजनीतिक बयानबाजी तेज हो चुकी है। NDA सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन कर विपक्ष पर छात्रों के मुद्दे को राजनीतिक हथियार बनाने का आरोप लगाया। दूसरी ओर कांग्रेस का कहना है कि छात्रों की आवाज उठाना राजनीति नहीं, बल्कि उनकी समस्याओं को सामने लाना है। पार्टी लगातार सरकार से छात्रों की मांगों पर ध्यान देने की मांग कर रही है। आगे क्या होगा? झारखंड में छात्रों का आंदोलन जिस तरह लंबा खिंच रहा है, उससे साफ है कि आने वाले दिनों में यह मुद्दा और बड़ा हो सकता है। अब नजर सरकार और छात्रों के बीच होने वाली बातचीत पर है। सवाल सिर्फ इतना नहीं है कि कौन-सी पार्टी किस पर आरोप लगा रही है। असली मुद्दा उन हजारों छात्रों का है जो भर्ती परीक्षाओं और नौकरी की तैयारी में अपना समय और मेहनत लगा रहे हैं। छात्रों की मांगों का समाधान बातचीत और पारदर्शी प्रक्रिया से निकलता है या फिर आंदोलन आगे बढ़ता है, यह आने वाले दिनों में साफ होगा। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jantar Mantar Lathicharge मामले पर संसद में जवाब देंगे रिजिजू

Jantar Mantar Lathicharge मामले पर संसद में जवाब देंगे रिजिजू

Jantar Mantar Lathicharge के मामले को लेकर संसद में सियासी माहौल गर्म है। विपक्ष इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री के बयान की मांग कर रहा है। वहीं, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा है कि सरकार इस मामले पर संसद में जवाब देगी, लेकिन विपक्ष को भी सरकार का पक्ष सुनना पड़ेगा। रिजिजू ने कहा कि संसद में केवल अपनी बात रखने से काम नहीं चलेगा। विपक्ष को सरकार की बात भी सुननी होगी। उन्होंने साफ कहा कि सरकार चर्चा से भागने वाली नहीं है और सदन में उठाए जा रहे मुद्दों का जवाब दिया जाएगा। विपक्ष गृह मंत्री के बयान पर अड़ा जंतर-मंतर पर हुए लाठीचार्ज के मामले को लेकर विपक्ष लगातार सरकार पर सवाल उठा रहा है। विपक्ष की मांग है कि केंद्रीय गृह मंत्री संसद में इस मामले पर बयान दें और पूरे घटनाक्रम की जानकारी सदन के सामने रखें। विपक्ष का कहना है कि जंतर-मंतर जैसे महत्वपूर्ण स्थान पर हुई घटना को लेकर सरकार को स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। इसी मांग को लेकर संसद में हंगामे की स्थिति भी देखने को मिली। रिजिजू बोले- विपक्ष को सुनना पड़ेगा किरेन रिजिजू ने विपक्ष के रुख पर कहा कि सरकार संसद में जवाब देने के लिए तैयार है। उन्होंने कहा कि विपक्ष अपनी बात रख सकता है, लेकिन उसे सरकार की बात भी सुननी होगी। उन्होंने यह भी संकेत दिया कि संसद में चर्चा लोकतांत्रिक तरीके से होनी चाहिए। केवल आरोप लगाने के बजाय दोनों पक्षों को एक-दूसरे की बात सुननी चाहिए। संसद में आगे बढ़ सकता है मामला जंतर-मंतर लाठीचार्ज मामले को लेकर आने वाले दिनों में संसद में राजनीतिक बहस और तेज होने की संभावना है। विपक्ष जहां सरकार से जवाब मांग रहा है, वहीं सरकार भी अपना पक्ष सदन में रखने की तैयारी में है। अब सबकी नजर इस बात पर है कि संसद में सरकार इस मामले पर क्या जवाब देती है और विपक्ष की ओर से उस पर क्या प्रतिक्रिया सामने आती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jharkhand विधानसभा के बाहर छात्रों का प्रदर्शन

Jharkhand विधानसभा के बाहर छात्रों का प्रदर्शन

Jharkhand विधानसभा के बाहर सोमवार को छात्रों ने अपनी मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में छात्र विधानसभा की ओर बढ़े। प्रदर्शनकारियों को रोकने के लिए पुलिस ने बैरिकेडिंग और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। प्रदर्शन के दौरान कुछ छात्र कंटीले तारों वाली बैरिकेडिंग पर चढ़ गए। वहीं, पुलिस की ओर से चलाए गए वाटर कैनन के बीच कुछ छात्रों ने डांस करते हुए अपना विरोध दर्ज कराया। इस दौरान मौके पर काफी देर तक गहमागहमी का माहौल बना रहा। प्रदर्शन में देवेंद्रनाथ भी शामिल हुए, जो पिछले 9 दिनों से अपनी मांगों को लेकर अनशन पर बैठे हैं। लगातार अनशन के बावजूद उनके प्रदर्शन में शामिल होने से छात्रों में भी उत्साह देखने को मिला। छात्रों का कहना है कि वे अपनी मांगों को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना चाहते हैं। उनका कहना है कि जब तक उनकी समस्याओं पर गंभीरता से विचार नहीं किया जाता, तब तक वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे। विधानसभा के बाहर प्रदर्शन के चलते सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई थी। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को विधानसभा परिसर की ओर बढ़ने से रोकने के लिए बैरिकेडिंग की थी। इसके बावजूद छात्रों ने अपनी आवाज बुलंद करते हुए विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों का जोश और उनके अनोखे तरीके से विरोध करने का अंदाज लोगों के बीच चर्चा का विषय रहा। अब देखना होगा कि सरकार छात्रों की मांगों पर क्या कदम उठाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Jharkhand

Jharkhand Student Protest: सरकार से दूसरी बातचीत भी बेनतीजा, 15वें दिन जारी आंदोलन

झारखंड (Jharkhand) में परीक्षा से जुड़ी कथित गड़बड़ियों को लेकर छात्रों का आंदोलन थमने का नाम नहीं ले रहा है। प्रदर्शन के 15वें दिन छात्रों और सरकार के बीच दूसरी बार बातचीत हुई, लेकिन इस बैठक में भी किसी ठोस समाधान पर सहमति नहीं बन सकी। हालांकि, सरकार ने छात्रों की शिकायतें और सुझाव सीधे सुनने के लिए ई-मेल और फीडबैक नंबर जारी करने की पहल की है। छात्रों का कहना है कि परीक्षा प्रक्रिया में सामने आए सवालों का स्पष्ट जवाब मिलना चाहिए। उनका जोर इस बात पर है कि पूरी प्रक्रिया पारदर्शी हो और जिन मुद्दों को लेकर वे सड़क पर हैं, उनका जल्द समाधान निकाला जाए। दूसरी बैठक में भी नहीं बनी बात छात्र प्रतिनिधियों और सरकार के बीच हुई दूसरी बैठक में परीक्षा से जुड़े विवादित मुद्दों पर चर्चा हुई। छात्रों ने अपनी मांगें और समस्याएं सरकार के सामने रखीं। दोनों पक्षों के बीच बातचीत जरूर हुई, लेकिन ऐसा कोई फैसला नहीं हो सका जिससे आंदोलन खत्म करने पर सहमति बनती। बैठक के बाद अब छात्रों से सुझाव और शिकायतें लेने के लिए ई-मेल तथा फीडबैक नंबर उपलब्ध कराने की बात सामने आई है। सरकार की यह पहल छात्रों की समस्याओं को सीधे संबंधित अधिकारियों तक पहुंचाने के लिए अहम मानी जा रही है। 15वें दिन भी सड़कों पर छात्र परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ छात्रों का प्रदर्शन लगातार 15वें दिन जारी है। लंबे समय से चल रहे इस आंदोलन ने परीक्षा व्यवस्था और प्रशासन की भूमिका को लेकर सवाल खड़े किए हैं। प्रदर्शन कर रहे छात्र चाहते हैं कि उनकी शिकायतों पर केवल बातचीत तक सीमित न रहकर ठोस कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि परीक्षा से जुड़े मामलों में छात्रों के भविष्य का सवाल होता है, इसलिए किसी भी तरह की गड़बड़ी को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। Feedback के लिए Email और नंबर जारी सरकार की ओर से छात्रों के सुझाव लेने के लिए ई-मेल और फीडबैक नंबर जारी करना बातचीत को आगे बढ़ाने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। अब छात्र अपनी शिकायतें और सुझाव इन माध्यमों के जरिए सरकार तक पहुंचा सकते हैं। हालांकि, छात्रों की मुख्य मांगों पर अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सरकार को मिलने वाले फीडबैक के बाद आगे क्या कदम उठाया जाता है। आंदोलन खत्म होगा या जारी रहेगा? दूसरी बैठक में सहमति नहीं बनने के बाद फिलहाल छात्रों का आंदोलन जारी है। आने वाले दिनों में सरकार और छात्र प्रतिनिधियों के बीच आगे की बातचीत इस पूरे मामले की दिशा तय कर सकती है। एक तरफ सरकार बातचीत और फीडबैक के जरिए समाधान तलाशने की कोशिश कर रही है, वहीं छात्र अपनी मांगों पर स्पष्ट कार्रवाई चाहते हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या अगली बातचीत में कोई ऐसा रास्ता निकल पाएगा, जिससे 15 दिनों से चल रहा यह Student Protest खत्म हो सके। Jharkhand Student Protest से जुड़े इस मामले में छात्रों और सरकार के अगले कदम पर अब सभी की नजर बनी हुई है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Arunachal

China ने बदले नाम तो India ने उठाया बड़ा कदम, Arunachal की 27 जगहें Map पर होंगी अलग

अरुणाचल प्रदेश (Arunachal Pradesh) को लेकर भारत और चीन के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद एक बार फिर चर्चा में है। केंद्र सरकार ने अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों को मैप पर अलग तरीके से प्रदर्शित करने का फैसला किया है। यह कदम ऐसे समय में सामने आया है, जब चीन कई बार भारतीय क्षेत्र के स्थानों के नाम बदलने की कोशिश कर चुका है। भारत ने साफ किया है कि अरुणाचल प्रदेश देश का अभिन्न हिस्सा है और किसी दूसरे देश की ओर से वहां के स्थानों के नाम बदलने से जमीनी स्थिति या भारत के अधिकार में कोई बदलाव नहीं होता। 27 जगहों को Map पर अलग दिखाने का फैसला केंद्र के फैसले के तहत अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों को मानचित्र पर अलग पहचान के साथ दिखाया जाएगा। इसका उद्देश्य इन क्षेत्रों की प्रशासनिक और भौगोलिक पहचान को स्पष्ट रखना है। सरकार का यह कदम चीन की उस रणनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है, जिसके तहत वह अरुणाचल प्रदेश के अलग-अलग इलाकों के लिए अपने हिसाब से नाम जारी करता रहा है। भारत पहले भी चीन की ऐसी कोशिशों को खारिज करता रहा है। China कई बार बदल चुका है नाम अरुणाचल प्रदेश को लेकर चीन की ओर से नाम बदलने की कोशिश कोई नई बात नहीं है। चीन समय-समय पर राज्य के अलग-अलग स्थानों के लिए नए नामों की सूची जारी करता रहा है। चीन इन इलाकों को अपने नक्शे में अलग तरीके से पेश करता है और इन्हें दक्षिणी तिब्बत का हिस्सा बताने का दावा करता है। भारत ने हर बार इस दावे को स्पष्ट रूप से खारिज किया है। भारतीय पक्ष का कहना रहा है कि केवल नाम बदल देने से किसी क्षेत्र पर दावा मजबूत नहीं हो जाता। भारत का रुख साफ, Arunachal Pradesh भारत का हिस्सा अरुणाचल प्रदेश भारत के पूर्वोत्तर का महत्वपूर्ण राज्य है। चीन के साथ इसकी लंबी सीमा लगती है, जिसके कारण यह इलाका रणनीतिक रूप से भी बेहद अहम माना जाता है। भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि Arunachal Pradesh भारत का अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है। राज्य के किसी भी इलाके के नाम में बाहरी स्तर पर बदलाव को भारत स्वीकार नहीं करता। केंद्र का ताजा कदम भी इसी रुख को मजबूत करने वाला माना जा रहा है। नाम बदलने से नहीं बदलती जमीन की हकीकत किसी जगह का नाम बदलना या उसे किसी दूसरे नाम से नक्शे में दिखाना एक राजनीतिक संदेश जरूर हो सकता है, लेकिन इससे उस क्षेत्र की वास्तविक स्थिति अपने आप नहीं बदलती। भारत की ओर से चीन की ऐसी गतिविधियों पर पहले भी कहा गया है कि अरुणाचल प्रदेश को लेकर किए जाने वाले इस तरह के प्रयास वास्तविकता को बदल नहीं सकते। यही वजह है कि 27 स्थानों को भारतीय मानचित्र पर स्पष्ट पहचान देने के फैसले को सिर्फ नक्शे से जुड़ा कदम नहीं, बल्कि एक स्पष्ट diplomatic message के तौर पर भी देखा जा रहा है। Border Areas पर भारत की नजर भारत और चीन के बीच सीमा को लेकर विवाद लंबे समय से बना हुआ है। ऐसे में सीमा से लगे इलाकों की प्रशासनिक मौजूदगी, बुनियादी ढांचे और भौगोलिक पहचान को मजबूत करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल रहा है। अरुणाचल प्रदेश के दूरदराज इलाकों में सड़क, संचार और अन्य सुविधाओं को बढ़ाने पर भी पिछले कुछ वर्षों में जोर दिया गया है। 27 स्थानों को Map पर अलग पहचान देने का फैसला इसी व्यापक रणनीतिक संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। China को भारत का स्पष्ट संदेश केंद्र के इस फैसले से एक बात साफ है—अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत अपने रुख में कोई बदलाव नहीं करने वाला है। चीन अगर किसी भारतीय क्षेत्र के नाम बदलता है तो भारत उसे स्वीकार नहीं करता। आखिरकार नक्शे पर लिखे नाम से ज्यादा महत्वपूर्ण उस क्षेत्र की वास्तविक प्रशासनिक स्थिति और वहां की जमीन पर मौजूद हकीकत होती है। अरुणाचल प्रदेश को लेकर भारत इसी आधार पर लगातार अपना पक्ष मजबूती से रखता आया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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IIT Delhi

IIT Delhi में PM Modi का बड़ा संदेश: Degree के साथ Dreams और जिम्मेदारी लेकर निकलें छात्र

IIT Delhi का दीक्षांत समारोह इस बार छात्रों के लिए सिर्फ डिग्री लेने का अवसर नहीं रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने समारोह में युवाओं को भविष्य की जिम्मेदारियों का एहसास कराया और कहा कि वे संस्थान से केवल डिग्री लेकर नहीं, बल्कि बड़े सपने और उन्हें पूरा करने का हौसला लेकर बाहर निकल रहे हैं। प्रधानमंत्री ने इस दौरान मेधावी विद्यार्थियों को मेडल देकर सम्मानित किया। साथ ही उन्होंने PARAM Pragya Supercomputer का उद्घाटन भी किया। कार्यक्रम में शिक्षा, तकनीक, रिसर्च और Innovation को लेकर भारत की बढ़ती ताकत की झलक देखने को मिली। ‘डिग्री के साथ सपने भी लेकर निकलें’ छात्रों को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि IIT जैसे संस्थानों में पढ़ाई करना अपने आप में बड़ी उपलब्धि है, लेकिन असली परीक्षा इसके बाद शुरू होती है। उन्होंने युवाओं से अपनी पढ़ाई और तकनीकी ज्ञान को देश की जरूरतों से जोड़ने की अपील की। प्रधानमंत्री का संदेश साफ था कि युवा अपनी सफलता को केवल व्यक्तिगत उपलब्धि तक सीमित न रखें। उनके पास नई सोच, तकनीकी समझ और समस्याओं का समाधान खोजने की क्षमता है। ऐसे में देश को उनसे बड़े योगदान की उम्मीद है। मेधावी छात्रों को मिला सम्मान दीक्षांत समारोह में शानदार प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मेडल प्रदान किए। जब छात्रों को मंच पर सम्मान मिला तो उनके चेहरों पर वर्षों की मेहनत की खुशी साफ दिखाई दी। पीएम मोदी ने विद्यार्थियों के साथ उनके माता-पिता और शिक्षकों को भी बधाई दी। उन्होंने माना कि किसी छात्र की सफलता के पीछे उसकी अपनी मेहनत के साथ परिवार और शिक्षकों का योगदान भी अहम होता है। PARAM Pragya Supercomputer का उद्घाटन कार्यक्रम का एक अहम हिस्सा PARAM Pragya Supercomputer का उद्घाटन भी रहा। भारत में High Performance Computing और आधुनिक तकनीक की क्षमता बढ़ाने की दिशा में इसे महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। Supercomputer जैसी तकनीक का इस्तेमाल जटिल वैज्ञानिक गणनाओं, Research, Artificial Intelligence और कई दूसरे क्षेत्रों में किया जा सकता है। इससे देश में अत्याधुनिक रिसर्च और Innovation को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। युवाओं पर भरोसा, देश के भविष्य पर जोर प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में युवाओं की क्षमता पर भरोसा जताया। उन्होंने छात्रों को सलाह दी कि वे बदलती दुनिया के साथ खुद को लगातार अपडेट करते रहें और नई तकनीक को केवल करियर बनाने के साधन के रूप में नहीं, बल्कि समाज की समस्याओं के समाधान के तौर पर भी देखें। उन्होंने कहा कि आज भारत तेजी से Technology और Innovation के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। ऐसे समय में IIT से निकलने वाले युवाओं की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है। IIT Delhi का समारोह क्यों रहा खास? IIT दिल्ली का यह समारोह दो वजहों से खास रहा। एक तरफ देश के होनहार विद्यार्थियों को उनकी मेहनत के लिए सम्मान मिला, वहीं दूसरी तरफ PARAM Pragya Supercomputer के उद्घाटन ने भारत की बढ़ती Computing और Research क्षमता को सामने रखा। प्रधानमंत्री मोदी का छात्रों के लिए संदेश भी इसी दिशा में रहा—सफलता केवल डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं है। असली पहचान इस बात से बनेगी कि युवा अपने ज्ञान, सपनों और तकनीकी क्षमता से देश और समाज के लिए क्या करते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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Rishabh Pant

Rishabh Pant की खास इच्छा: Uttarakhand में बनाना चाहते हैं अपना घर, CM Dhami ने दिया भरोसा

भारतीय क्रिकेट टीम के स्टार विकेटकीपर-बल्लेबाज ऋषभ पंत (Rishabh Pant) इन दिनों अपने क्रिकेट को लेकर ही नहीं, बल्कि उत्तराखंड में अपना घर बनाने की इच्छा को लेकर भी चर्चा में हैं। पंत ने आधी रात को उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी (Pushkar Singh Dhami) से मदद की अपील की। उनकी इस गुहार पर मुख्यमंत्री ने भी सकारात्मक जवाब देते हुए भरोसा दिलाया। पंत लंबे समय से उत्तराखंड में जमीन खरीदकर अपना घर बनाना चाहते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक, वह करीब तीन साल से इसके लिए जमीन की तलाश कर रहे हैं, लेकिन अब तक उनकी तलाश पूरी नहीं हो पाई है। ऐसे में उन्होंने सीधे मुख्यमंत्री से मदद मांगी। आधी रात को CM Dhami से की अपील ऋषभ पंत ने सोशल मीडिया के जरिए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को अपनी परेशानी बताई। उन्होंने उत्तराखंड में जमीन खरीदने की इच्छा जाहिर करते हुए इस प्रक्रिया में सहयोग मांगा। पंत की अपील में सबसे खास बात यह रही कि वह अपने लिए किसी तरह की मुफ्त जमीन नहीं मांग रहे हैं। उनकी इच्छा नियमों के तहत जमीन खरीदकर वहां अपना घर बनाने की है। Delhi से Uttarakhand शिफ्ट करना चाहते हैं पंत ऋषभ पंत का उत्तराखंड से रिश्ता बेहद खास है। उनका जन्म हरिद्वार जिले के रुड़की में हुआ और उन्होंने अपने जीवन का शुरुआती हिस्सा इसी क्षेत्र में बिताया। क्रिकेट में बड़ी पहचान बनाने के बाद भी उनका अपने राज्य से जुड़ाव लगातार बना हुआ है। अब पंत चाहते हैं कि उत्तराखंड में उनका अपना घर हो और आने वाले समय में वह अपना बेस दिल्ली से उत्तराखंड शिफ्ट कर सकें। उनके लिए यह सिर्फ जमीन खरीदने का मामला नहीं है, बल्कि अपनी जड़ों के करीब लौटने की एक व्यक्तिगत इच्छा भी है। CM Pushkar Dhami ने दिया भरोसा पंत की अपील के बाद मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने भी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने क्रिकेटर को भरोसा दिलाया कि उनकी समस्या को देखा जाएगा और जरूरी सहयोग किया जाएगा। मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया सामने आने के बाद पंत की यह अपील चर्चा में आ गई। सोशल मीडिया पर भी क्रिकेट फैंस इसे पंत के उत्तराखंड से जुड़ाव के तौर पर देख रहे हैं। तीन साल से चल रही है जमीन की तलाश रिपोर्ट्स के अनुसार, पंत पिछले करीब तीन वर्षों से उत्तराखंड में अपने घर के लिए उपयुक्त जमीन तलाश रहे हैं। हालांकि, जमीन खरीदने से जुड़ी प्रक्रिया और दूसरी व्यावहारिक परेशानियों के कारण उनकी योजना आगे नहीं बढ़ सकी। इसी वजह से उन्होंने अब मुख्यमंत्री से मदद की उम्मीद जताई है। अगर पंत की यह योजना पूरी होती है तो क्रिकेट के मैदान से दूर अपने hometown में उनका नया ठिकाना बनना उनके लिए भावनात्मक रूप से भी खास पल होगा। उत्तराखंड से पंत का पुराना नाता ऋषभ पंत ने कम उम्र में क्रिकेट की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाई। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में सफलता हासिल करने के बाद वह देश के प्रमुख क्रिकेट सितारों में शामिल हो गए। बावजूद इसके, उत्तराखंड से उनका लगाव कम नहीं हुआ। अब उनका उत्तराखंड में अपना घर बनाने का सपना इसी रिश्ते को और मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है। मुख्यमंत्री से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद उम्मीद है कि जमीन से जुड़ी उनकी परेशानी जल्द दूर हो सकती है। फिलहाल ऋषभ पंत की इस आधी रात वाली अपील ने क्रिकेट के साथ-साथ उनके निजी जीवन और उत्तराखंड से जुड़ाव को भी चर्चा में ला दिया है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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मेरठ हत्याकांड: मुस्कान और साहिल को फांसी की सजा, पति सौरभ की हत्या के मामले में कोर्ट का फैसला

मेरठ। उत्तर प्रदेश के मेरठ में सौरभ राजपूत हत्याकांड में अदालत ने उनकी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को फांसी की सजा सुनाई है। दोनों पर सौरभ की हत्या करने का आरोप साबित होने के बाद यह फैसला सुनाया गया। सजा सुनाते हुए जज ने वारदात को नृशंस हत्याकांड बताया और कहा कि इसमें माफी स्वीकार नहीं होगी। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से कोर्ट में पेश हुए मुस्कान और साहिल सजा सुनाए जाने से पहले जेल में बंद मुस्कान और साहिल को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जोड़ा गया। इस दौरान दोनों रोने लगे। जज ने मुस्कान से पूछा कि पति सौरभ राजपूत की हत्या के मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद वह क्या सजा चाहती है। इस पर मुस्कान ने कहा, “मेरी बच्चियों का ख्याल रखा जाए।” इसके बाद वह खामोश हो गई। वहीं, साहिल से भी यही सवाल पूछा गया, लेकिन उसने कोई जवाब नहीं दिया। सजा के ऐलान के बाद रो पड़ीं सौरभ की मां अदालत के फैसले के बाद सौरभ राजपूत की मां भावुक हो गईं और रो पड़ीं। उन्होंने कहा कि उन्हें शांति से न्याय मिल गया। इस मामले में सजा का ऐलान सौरभ के परिवार के लिए लंबे इंतजार के बाद आया है। 3 मार्च 2025 को हुई थी सौरभ की हत्या सौरभ राजपूत की हत्या 3 मार्च 2025 को हुई थी। मामले में सामने आए विवरण के अनुसार, हत्या के बाद शव के पांच टुकड़े किए गए और उन्हें नीले ड्रम में भर दिया गया था। इस वारदात ने पूरे देश में व्यापक चर्चा बटोरी थी। अदालत ने मामले में मुस्कान रस्तोगी और साहिल को दोषी ठहराते हुए मृत्युदंड की सजा सुनाई है।

इंदौर में प्लॉट बेचने के नाम पर 7.80 लाख की ठगी का आरोप, ब्रोकर समेत दो पर FIR

शहर के एरोड्रम थाना क्षेत्र में प्लॉट बेचने के नाम पर धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। आरोप है कि प्लॉट का सौदा करने के बाद ब्रोकर और प्लॉट मालिक ने फरियादी से 7 लाख 80 हजार रुपये ले लिए, लेकिन न तो प्लॉट की रजिस्ट्री कराई और न ही कब्जा दिया। शिकायत की जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर ली है। 9.30 लाख में तय हुआ था प्लॉट का सौदा पुलिस के मुताबिक, नंदबाग कॉलोनी निवासी विजय चौहान ने शिकायत में बताया कि उन्होंने नंदबाग में एक प्लॉट का सौदा 9 लाख 30 हजार रुपये में तय किया था। इस संबंध में एग्रीमेंट भी किया गया था। फरियादी ने आरोप लगाया कि उन्होंने नकद और ऑनलाइन माध्यम से कुल 7 लाख 80 हजार रुपये का भुगतान कर दिया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें प्लॉट का कब्जा नहीं मिला और रजिस्ट्री भी नहीं कराई गई। ब्रोकर ने परिचित बताकर कराया था सौदा विजय चौहान के अनुसार, धर्मेंद्र ठाकुर ने उन्हें बताया था कि नंदकिशोर मनावत उसका परिचित है और वह अपना प्लॉट बेचना चाहता है। इसके बाद धर्मेंद्र ने सौदे में ब्रोकर की भूमिका निभाई और इसके बदले 10 हजार रुपये लिए। शिकायतकर्ता का आरोप है कि भुगतान के बाद जब उन्होंने रजिस्ट्री कराने और प्लॉट का कब्जा देने की मांग की, तो उन्हें लगातार टालमटोल का सामना करना पड़ा। 25 से ज्यादा केस होने की धमकी देने का आरोप फरियादी ने आरोप लगाया कि रजिस्ट्री और कब्जे के लिए दबाव बनाने पर धर्मेंद्र ठाकुर ने धमकी दी। शिकायत के मुताबिक, उसने कहा कि उसके खिलाफ 25 से ज्यादा मामले चल रहे हैं। साथ ही, उसके या नंदकिशोर मनावत के पास दोबारा आने पर अंजाम भुगतने की चेतावनी भी दी। 2.80 लाख रुपये लौटाए, 5 लाख बाकी होने का दावा विजय चौहान के मुताबिक, पुलिस में शिकायत करने की बात कहने के बाद नंदकिशोर मनावत ने 2 लाख 50 हजार रुपये नकद और 30 हजार रुपये ऑनलाइन वापस किए। हालांकि, फरियादी का आरोप है कि बाकी 5 लाख रुपये लौटाने से इनकार कर दिया गया। इसके बाद विजय चौहान ने पुलिस अधिकारियों से शिकायत की। जांच के बाद एरोड्रम थाना पुलिस ने नंदकिशोर मनावत और धर्मेंद्र ठाकुर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले में लगाए गए आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के तहत होनी बाकी है।

SIR के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले छात्रों से मिले राहुल गांधी, दिल्ली पुलिस पर मारपीट के आरोप

नई दिल्ली। SIR के खिलाफ दिल्ली में प्रदर्शन करने वाले छात्रों ने बुधवार को कांग्रेस नेता राहुल गांधी से मुलाकात की। इसके बाद राहुल गांधी और छात्रों ने संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस की, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने दिल्ली पुलिस पर मारपीट और हिरासत के दौरान दुर्व्यवहार करने के आरोप लगाए। प्रेस कॉन्फ्रेंस में NSUI के छात्रों, कार्यकर्ताओं और कंटेंट क्रिएटर्स ने अपने साथ हुई कथित घटनाओं की जानकारी दी। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस की कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। छात्रा ने कान पर चोट लगने का लगाया आरोप प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक छात्रा ने आरोप लगाया कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मी ने उसके प्राइवेट पार्ट पर लात मारी। वहीं, दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा अदिरा ने दावा किया कि पुलिस की पिटाई के कारण उसके एक कान की सुनने की क्षमता चली गई। प्रदर्शनकारियों ने हिरासत के दौरान कथित ज्यादती और मारपीट से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी सामने नहीं आई है। RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर हिरासत का आरोप एक अन्य प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि पुलिस RSS और भाजपा से जुड़े लोगों के कहने पर प्रदर्शनकारियों को हिरासत में ले रही थी। यह आरोप भी प्रदर्शनकारियों की ओर से लगाया गया है। राहुल गांधी ने सबूत सुरक्षित रखने को कहा राहुल गांधी ने छात्रों से घटनाओं से जुड़े वीडियो और अन्य सबूत सुरक्षित रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इन सबूतों के आधार पर पुलिसकर्मियों से लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त तक, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की जाएगी। प्रदर्शनकारियों के आरोपों और पुलिस की कार्रवाई को लेकर आगे क्या कदम उठाए जाते हैं, इस पर नजर रहेगी।

बांग्लादेश टेस्ट सीरीज से बाहर हुए शाई होप और अल्जारी जोसेफ, केविन विकहम को पहली बार मिला मौका

क्रिकेट न्यूज। वेस्टइंडीज को बांग्लादेश के खिलाफ आगामी दो टेस्ट मैचों की सीरीज से पहले बड़ा झटका लगा है। टीम के बल्लेबाज शाई होप और तेज गेंदबाज अल्जारी जोसेफ सीरीज से बाहर हो गए हैं। क्रिकेट वेस्टइंडीज (CWI) ने 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया है। ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। CWI के मुताबिक, मेडिकल जांच और विशेषज्ञों की सलाह के बाद अल्जारी जोसेफ को सीरीज से हटाने का फैसला लिया गया। बोर्ड उनके कार्यभार को नियंत्रित कर चोट के जोखिम को कम करना चाहता है। वहीं, तीनों फॉर्मेट में लगातार खेलने के बाद शाई होप को आराम दिया गया है। चोट के खतरे को देखते हुए जोसेफ को आराम क्रिकेट वेस्टइंडीज ने बताया कि अल्जारी जोसेफ को टीम से बाहर रखने का फैसला उनकी सहमति से लिया गया है। बोर्ड के अनुसार, टेस्ट क्रिकेट में तेज गेंदबाजों को लंबे स्पेल में लगातार गेंदबाजी करनी पड़ती है। इससे छोटे फॉर्मेट की तुलना में कार्यभार और चोट का जोखिम बढ़ सकता है। इसी को ध्यान में रखते हुए जोसेफ के वर्कलोड को कम करने का फैसला किया गया है, ताकि उनके स्वास्थ्य और फिटनेस का ध्यान रखा जा सके। शाई होप को भी दिया गया आराम CWI ने कहा कि शाई होप तीनों फॉर्मेट में लगातार खेल रहे थे। ऐसे में उनके कार्यभार और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए उन्हें टेस्ट सीरीज से आराम दिया गया है। बोर्ड का यह फैसला फरवरी 2027 में होने वाले वनडे वर्ल्ड कप क्वालिफायर्स को ध्यान में रखकर भी लिया गया है। टीम प्रबंधन चाहता है कि खिलाड़ी आगामी महत्वपूर्ण मुकाबलों के लिए फिट रहें। केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में मौका शाई होप की गैरमौजूदगी में 23 वर्षीय टॉप ऑर्डर बल्लेबाज केविन विकहम को पहली बार टेस्ट टीम में शामिल किया गया है। इसके अलावा ऑलराउंडर कीमो पॉल को भी टीम में जगह मिली है। अब देखना होगा कि बांग्लादेश की घरेलू परिस्थितियों में वेस्टइंडीज की टीम नए संयोजन के साथ कैसा प्रदर्शन करती है। कोच डैरेन सैमी ने सीरीज जीत को बताया अहम वेस्टइंडीज के मुख्य कोच डैरेन सैमी ने कहा कि वर्ल्ड टेस्ट चैंपियनशिप के मौजूदा चक्र की शुरुआत में टीम ने कुछ लक्ष्य तय किए थे। इनमें टेस्ट रैंकिंग के ऊपरी आधे हिस्से में जगह बनाना भी शामिल है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश के खिलाफ सीरीज जीतने से टीम अपने लक्ष्य के करीब पहुंच सकती है। सैमी के मुताबिक, बांग्लादेश को उसकी घरेलू परिस्थितियों में हराना चुनौतीपूर्ण होगा, लेकिन टीम इसके लिए तैयार है। 28 अक्टूबर से शुरू होगा पहला टेस्ट बांग्लादेश और वेस्टइंडीज के बीच दो टेस्ट मैचों की सीरीज खेली जाएगी। पहला टेस्ट 28 अक्टूबर से ढाका में शुरू होगा, जबकि दूसरा टेस्ट 5 नवंबर से सिलहट में खेला जाएगा।

IMF ने बढ़ाया भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान, 2026 और 2027 में 7% विकास दर रहने की उम्मीद

नई दिल्ली। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) ने साल 2026 के लिए भारत की आर्थिक विकास दर का अनुमान 6.4% से बढ़ाकर 7% कर दिया है। वैश्विक तनाव, आर्थिक सुस्ती और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं का ध्यान खींचा है। मजबूत घरेलू मांग और सर्विसेज सेक्टर के बेहतर प्रदर्शन को भारत की तेज विकास दर की प्रमुख वजह माना गया है। IMF ने अक्टूबर 2026 की अपनी वर्ल्ड इकोनॉमिक आउटलुक रिपोर्ट में भारत की विकास संभावनाओं को सकारात्मक बताया है। रिपोर्ट के अनुसार, ऊर्जा आयात पर निर्भर कई उभरती अर्थव्यवस्थाएं जहां दबाव का सामना कर रही हैं, वहीं भारत की आर्थिक गतिविधियों में मजबूती बनी हुई है। 2027 में भी 7% ग्रोथ का अनुमान IMF ने 2026 के लिए भारत की विकास दर के अनुमान में जुलाई के मुकाबले 0.6 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी की है। वहीं, 2027 के लिए भी विकास दर का अनुमान बढ़ाकर 7% कर दिया गया है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, 2027 का अनुमान जुलाई के मुकाबले 0.3 प्रतिशत अंक और अप्रैल के मुकाबले 0.5 प्रतिशत अंक अधिक है। इससे संकेत मिलता है कि वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भी भारत में विकास की संभावनाओं को लेकर उम्मीद बनी हुई है। IMF से पहले विश्व बैंक और आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन (OECD) जैसी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं भी भारत की विकास दर के अनुमान में बढ़ोतरी कर चुकी हैं। चीन की सुस्ती के बीच भारत पर नजर रिपोर्ट के मुताबिक, एशिया की अर्थव्यवस्थाओं में मजबूती देखने को मिल रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़ी गतिविधियों में तेजी ने भी वैश्विक आर्थिक परिदृश्य को प्रभावित किया है। भारत और चीन एशिया की आर्थिक गतिविधियों में अहम भूमिका निभा रहे हैं, हालांकि दोनों देशों की विकास संभावनाओं में अंतर दिखाई दे रहा है। IMF के अनुमान के अनुसार, चीन की विकास दर 2026 में 4.5% और 2027 में 4% रह सकती है। वैश्विक तनाव और ऊर्जा की ऊंची कीमतों को चीन की आर्थिक वृद्धि के सामने चुनौतियों में शामिल किया गया है। दुनिया की आर्थिक विकास दर पर दबाव IMF के मुताबिक, 2028 से 2031 के बीच वैश्विक अर्थव्यवस्था औसतन 3.2% की दर से बढ़ सकती है। यह 2000 से 2019 के बीच महामारी से पहले दर्ज औसत 3.7% की विकास दर से कम है। रिपोर्ट में वैश्विक तनाव, ऊर्जा बाजार में अनिश्चितता और ऊर्जा आयात पर निर्भर उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर पड़ने वाले दबाव को आर्थिक विकास के लिए चुनौती बताया गया है। ऐसे माहौल में भारत की अनुमानित विकास दर अपेक्षाकृत मजबूत दिखाई देती है। मजबूत घरेलू मांग और जनसांख्यिकी से मिल रहा सहारा भारत की आर्थिक मजबूती के पीछे बढ़ता घरेलू बाजार, मजबूत मांग, अनुकूल जनसांख्यिकी और सुधारों को अहम कारक माना गया है। सर्विसेज सेक्टर का बेहतर प्रदर्शन भी विकास दर को सहारा दे रहा है। हालांकि, बेहतर अनुमान के बावजूद चुनौतियां खत्म नहीं हुई हैं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतें भारत के आयात बिल और महंगाई पर दबाव डाल सकती हैं। इसके अलावा, अंतरराष्ट्रीय तनाव और वैश्विक मांग में कमजोरी का असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है।

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