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सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर लगाई रोक, कहा- ‘टिप्पणी असंवेदनशील और अमानवीय’

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक फैसले पर रोक लगाते हुए उसकी कड़ी आलोचना की। हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि किसी नाबालिग लड़की के ब्रेस्ट पकड़ना और उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता। सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को ‘असंवेदनशील’ और ‘अमानवीय दृष्टिकोण’ बताया है। सुप्रीम कोर्ट की कड़ी प्रतिक्रिया जस्टिस बीआर गवई और जस्टिस एजी मसीह की पीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए कहा, “यह बहुत गंभीर मामला है और जिस जज ने यह फैसला दिया, उसकी तरफ से बहुत असंवेदनशीलता दिखाई गई। हमें यह कहते हुए बहुत दुख हो रहा है कि फैसला लिखने वाले में संवेदनशीलता की पूरी तरह से कमी थी।” सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार, उत्तर प्रदेश सरकार और अन्य पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। इससे पहले मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के फैसले पर स्वतः संज्ञान लिया था। यह फैसला आते ही कानूनी विशेषज्ञों, राजनेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने इसका विरोध किया था। सुप्रीम कोर्ट ने इस मुद्दे को गंभीर मानते हुए तुरंत सुनवाई का निर्णय लिया। केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी सुप्रीम कोर्ट के रुख का समर्थन किया। उन्होंने कहा, सुप्रीम कोर्ट ने खुद लिया संज्ञान “कुछ फैसलों को रोकने के पीछे महत्वपूर्ण कारण होते हैं, और यह उनमें से एक है।” हाईकोर्ट का विवादास्पद फैसला इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने फैसले में कहा था, “किसी लड़की के निजी अंग पकड़ लेना, उसके पायजामे का नाड़ा तोड़ देना और जबरन उसे पुलिया के नीचे खींचने की कोशिश करना रेप या ‘अटेम्प्ट टु रेप’ की श्रेणी में नहीं आता।” हाईकोर्ट के इस फैसले के बाद महिला संगठनों और कानूनी विशेषज्ञों ने इसकी आलोचना करते हुए कहा कि यह पीड़िता के अधिकारों का हनन करता है और यौन उत्पीड़न को हल्के में लेने जैसा है। न्यायपालिका पर उठे सवाल यह मामला देश में महिला सुरक्षा से जुड़े कानूनी ढांचे को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे फैसले अपराधियों को बचाव का आधार दे सकते हैं और महिलाओं के प्रति हो रहे अपराधों के खिलाफ न्याय मिलने में बाधा बन सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से अब पीड़िता को न्याय मिलने की उम्मीद जगी है। इस मामले की अगली सुनवाई जल्द ही होने की संभावना है। (देश हरपल की विशेष रिपोर्ट)
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Jio Platforms IPO का आज आखिरी दिन, 20 गुना सब्सक्राइब होने का दावा; GMP से ₹1,377 पर लिस्टिंग के संकेत

Jio Platforms के IPO में बोली लगाने का आज आखिरी दिन है। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, इश्यू अब तक करीब 20 गुना सब्सक्राइब हो चुका है। संस्थागत निवेशकों की ओर से जबरदस्त मांग देखने को मिली है, जबकि रिटेल निवेशकों का हिस्सा 2.69 गुना सब्सक्राइब हुआ है। दावा किया जा रहा है कि यह IPO एक करोड़ आवेदन का आंकड़ा पार करने वाला दुनिया का पहला इश्यू बन गया है। इससे पहले यह रिकॉर्ड Waaree Energies के नाम था, जिसके IPO को करीब 97 लाख आवेदन मिले थे। नोट: IPO के सब्सक्रिप्शन आंकड़े, आवेदन संख्या और बोली की अंतिम समयसीमा को निवेश करने से पहले आधिकारिक एक्सचेंज या रजिस्ट्रार की वेबसाइट पर जरूर जांच लें। पहले दिन ही 3 गुना से ज्यादा सब्सक्राइब हुआ था IPO दिए गए आंकड़ों के अनुसार, IPO के पहले दिन यानी 21 अक्टूबर को ही इश्यू 3.02 गुना सब्सक्राइब हो गया था। 19.75 करोड़ शेयरों के मुकाबले 59.68 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां मिली थीं। दूसरे दिन संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी के चलते सब्सक्रिप्शन का आंकड़ा 3.50 गुना से आगे निकल गया था। इसके बाद भी इश्यू में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ने का दावा किया गया है। IPO में न्यूनतम ₹13,428 लगाने होंगे Jio Platforms IPO का प्राइस बैंड ₹1,065 से ₹1,119 प्रति शेयर बताया गया है। दिए गए विवरण के मुताबिक, एक लॉट में 12 शेयर शामिल हैं। अपर प्राइस बैंड के आधार पर एक लॉट के लिए निवेशकों को ₹13,428 लगाने होंगे। वहीं, अधिकतम 14 लॉट यानी 168 शेयरों के लिए आवेदन करने पर करीब ₹1.88 लाख की राशि लगेगी। आवेदन से पहले आधिकारिक IPO दस्तावेजों में लॉट साइज और निवेश की सीमा की पुष्टि करना जरूरी है। GMP के आधार पर ₹1,377 पर लिस्टिंग का अनुमान IPO की लिस्टिंग से पहले ग्रे मार्केट में शेयर का प्रीमियम (GMP) ₹258 प्रति शेयर, यानी करीब 23% बताया गया है। अगर अपर प्राइस बैंड ₹1,119 और GMP ₹258 को जोड़ें, तो संभावित लिस्टिंग कीमत ₹1,377 बनती है। हालांकि, ग्रे मार्केट प्रीमियम अनौपचारिक संकेतक है। इसके आधार पर लिस्टिंग कीमत या मुनाफे की गारंटी नहीं दी जा सकती। वास्तविक कीमत लिस्टिंग के दिन बाजार की परिस्थितियों और निवेशकों की मांग पर निर्भर करेगी। एंकर निवेशकों से ₹8,110 करोड़ जुटाने का दावा दिए गए विवरण के अनुसार, Jio Platforms इस IPO के जरिए कुल ₹30,213 करोड़ जुटाने की योजना बना रही है। इश्यू खुलने से पहले एंकर निवेशकों को शेयर आवंटित करके ₹8,110 करोड़ जुटाए जाने की जानकारी दी गई है। एंकर निवेशकों को आवंटन के बाद आम निवेशकों और अन्य पात्र श्रेणियों के लिए करीब ₹22,103 करोड़ का शुद्ध इश्यू रहने का दावा किया गया है। IPO से मिलने वाली रकम का कहां होगा इस्तेमाल? IPO से जुटाई जाने वाली रकम का इस्तेमाल कंपनी की प्रमुख सब्सिडियरी Reliance Jio Infocomm Limited (RJIL) के कर्ज के भुगतान के लिए किए जाने की जानकारी दी गई है। इसके अलावा, राशि का एक हिस्सा सामान्य कॉर्पोरेट जरूरतों पर भी खर्च किया जाएगा। दिए गए आंकड़ों के मुताबिक, इश्यू के बाद प्रमोटर और प्रमोटर समूह की हिस्सेदारी 66.43% से घटकर 64.48% रह सकती है। वहीं, सार्वजनिक शेयरधारिता 33.57% से बढ़कर 35.52% होने का अनुमान है। क्या होती है एंकर बुक? IPO में एंकर बुक संस्थागत निवेशकों के लिए आरक्षित हिस्सा होता है। इसमें म्यूचुअल फंड, विदेशी संस्थागत निवेशक और बीमा कंपनियों जैसे बड़े निवेशकों को आम जनता के लिए IPO खुलने से पहले शेयर आवंटित किए जा सकते हैं। एंकर निवेशकों की भागीदारी से इश्यू के प्रति संस्थागत मांग का संकेत मिल सकता है। हालांकि, बड़े निवेशकों का निवेश भी इस बात की गारंटी नहीं है कि शेयर की लिस्टिंग पर मुनाफा ही होगा या भविष्य में उसका प्रदर्शन अच्छा रहेगा।

भोपाल में शिक्षिका के निलंबन की मांग पर फिर धरने पर बैठे छात्र, बोले- अब करेंगे सड़क जाम

भोपाल के मिसरोद स्थित शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय में शिक्षिका के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर छात्र-छात्राओं ने शुक्रवार को फिर प्रदर्शन किया। विद्यार्थी स्कूल परिसर में ही धरने पर बैठ गए और हाथों में तख्तियां लेकर शिक्षिका बविता कुशवाहा को तत्काल निलंबित करने की मांग की। विद्यार्थियों का कहना है कि शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। उन्होंने चेतावनी दी कि मांग पूरी नहीं होने पर वे सड़क जाम करेंगे। 5 अक्टूबर को भी किया था प्रदर्शन विद्यार्थियों के मुताबिक, उन्होंने 5 अक्टूबर को भी शिक्षिका के खिलाफ प्रदर्शन कर उनके निलंबन की मांग की थी। उस समय जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षिका का स्थानांतरण कर मामले की जांच कराने और उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया था। विद्यार्थियों का आरोप है कि जांच के लिए अतिरिक्त समय दिए जाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। इसी के विरोध में उन्होंने दोबारा प्रदर्शन शुरू कर दिया है। विद्यार्थियों की तीन प्रमुख मांगें प्रदर्शन कर रहे छात्र-छात्राओं ने प्रशासन के सामने तीन प्रमुख मांगें रखी हैं: जांच को प्रभावित करने का भी आरोप विद्यार्थियों ने जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए शिक्षिका पर कथित राजनीतिक प्रभाव के जरिए जांच को प्रभावित करने का आरोप लगाया है। हालांकि, इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। विद्यार्थियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस कदम नहीं उठाए जाते, उनका विरोध जारी रहेगा। उन्होंने चेतावनी दी है कि कार्रवाई नहीं होने पर वे सड़क जाम कर प्रदर्शन करेंगे।

भारतीय महिला क्रिकेटर सब्बिनेनी मेघना ने 30 साल की उम्र में लिया संन्यास, अब युवा खिलाड़ियों को देंगी ट्रेनिंग

भारतीय महिला क्रिकेटर सब्बिनेनी मेघना ने 30 साल की उम्र में क्रिकेट के सभी फॉर्मेट से संन्यास लेने का ऐलान किया है। आंध्र प्रदेश की रहने वाली मेघना ने साल 2016 में भारतीय टीम के लिए डेब्यू किया था। अपने करियर में उन्होंने 3 वनडे और 17 टी-20 इंटरनेशनल मैच खेले। इसके अलावा, वह महिला प्रीमियर लीग (WPL) के तीन सीजन में भी मैदान पर उतरीं। संन्यास के बाद मेघना युवा खिलाड़ियों को मार्गदर्शन देने और क्रिकेट के विकास में योगदान करना चाहती हैं। अब युवा खिलाड़ियों को तैयार करना चाहती हैं मेघना संन्यास की घोषणा करते हुए मेघना ने कहा कि क्रिकेट का मैदान उनके लिए दूसरे घर जैसा रहा है। इस खेल ने उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में डटे रहना सिखाया और ऐसी दोस्तियां दीं, जिन्हें वह जीवनभर याद रखेंगी। मेघना ने स्पष्ट किया कि खिलाड़ी के रूप में उनका सफर भले ही खत्म हो रहा है, लेकिन क्रिकेट से उनका जुड़ाव बना रहेगा। वह भविष्य में युवा खिलाड़ियों को तैयार करने और उन्हें सही दिशा दिखाने में अपनी भूमिका निभाना चाहती हैं। 20 साल की उम्र में किया था इंटरनेशनल डेब्यू मेघना ने 20 नवंबर 2016 को वेस्टइंडीज के खिलाफ विजयवाड़ा में टी-20 इंटरनेशनल क्रिकेट से डेब्यू किया था। अपने पहले मैच में उन्होंने 16 गेंदों पर 17 रन बनाए, हालांकि भारतीय टीम को 31 रन से हार का सामना करना पड़ा। वनडे इंटरनेशनल में उन्हें पदार्पण का मौका करीब पांच साल बाद मिला। फरवरी 2022 में न्यूजीलैंड के क्वीन्सटाउन में उन्होंने अपना पहला वनडे खेला। इस मुकाबले में मेघना 14 गेंदों पर सिर्फ 4 रन बना सकीं। हालांकि, अगले दो मैचों में उन्होंने शानदार वापसी की। दूसरे वनडे में 50 गेंदों पर 49 रन बनाए, जबकि तीसरे वनडे में 41 गेंदों पर 61 रन की पारी खेली। घरेलू क्रिकेट में भी दिखाया दम इंटरनेशनल क्रिकेट में जगह बनाने के लिए मेघना ने घरेलू क्रिकेट में भी शानदार प्रदर्शन किया। 2021-22 के सीनियर महिला वनडे टूर्नामेंट में रेलवे की ओर से खेलते हुए उन्होंने 6 मैचों में 388 रन बनाए और प्रतियोगिता की सबसे ज्यादा रन बनाने वाली बल्लेबाज रहीं। इस दौरान मेघना ने एक शतक और दो अर्धशतक लगाए। टूर्नामेंट में उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 142 रन रहा। एशिया कप विजेता टीम का हिस्सा रहीं मेघना भारतीय महिला टीम का हिस्सा थीं, जिसने 2016 और 2022 में महिला टी-20 एशिया कप का खिताब जीता था। साल 2022 में उन्हें बर्मिंघम कॉमनवेल्थ गेम्स के लिए चुनी गई भारतीय टीम में भी जगह मिली। यह टूर्नामेंट भारतीय महिला क्रिकेट के लिए खास था, क्योंकि पहली बार कॉमनवेल्थ गेम्स में महिला टी-20 क्रिकेट को शामिल किया गया था। भारतीय टीम ने फाइनल तक का सफर तय किया, जहां उसे ऑस्ट्रेलिया के खिलाफ हार मिली और सिल्वर मेडल से संतोष करना पड़ा। 17 टी-20 इंटरनेशनल मैचों में बनाए 258 रन मेघना ने भारत के लिए 17 टी-20 इंटरनेशनल मैचों में कुल 258 रन बनाए। इस फॉर्मेट में उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 69 रन रहा और उन्होंने एक अर्धशतक लगाया। उनका आखिरी इंटरनेशनल मुकाबला अक्टूबर 2022 में थाईलैंड के खिलाफ था। इसके बाद उन्हें भारतीय टीम के लिए खेलने का मौका नहीं मिला। WPL में गुजरात जायंट्स से शुरुआत, RCB के साथ जीता खिताब इंटरनेशनल क्रिकेट के अलावा मेघना ने महिला प्रीमियर लीग में भी हिस्सा लिया। उन्होंने 2023 में WPL के पहले सीजन में गुजरात जायंट्स की ओर से खेलना शुरू किया। इसके बाद वह रॉयल चैलेंजर्स बेंगलुरु (RCB) से जुड़ीं और 2024 तथा 2025 के सीजन में टीम का हिस्सा रहीं। मेघना ने WPL में कुल 15 मैच खेले, जिनमें 302 रन बनाए। इस लीग में उनका सर्वश्रेष्ठ स्कोर 53 रन रहा। RCB के साथ रहते हुए उन्होंने टीम की खिताबी सफलता भी देखी।
SIR

Delhi SIR Protest: बंगला साहिब के पास प्रदर्शन, ‘ज्ञानेश कुमार गद्दी छोड़ो’ के नारे

दिल्ली में SIR (Special Intensive Revision) को लेकर विरोध तेज होता नजर आ रहा है। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को बंगला साहिब गुरुद्वारे के पास प्रदर्शनकारियों ने जुटकर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने ‘ज्ञानेश कुमार गद्दी छोड़ो’ के नारे लगाते हुए चुनाव आयोग के कार्यालय तक मार्च निकालने का ऐलान किया। इसे देखते हुए पुलिस ने इलाके में बैरिकेडिंग की और सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी। इस प्रदर्शन के केंद्र में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR की प्रक्रिया है। आंदोलन से जुड़े संगठन इस प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं और चुनाव आयोग से जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। Delhi Protest: बंगला साहिब के पास जुटे प्रदर्शनकारी SIR के विरोध में विभिन्न संगठनों से जुड़े लोगों ने दिल्ली में प्रदर्शन का आह्वान किया। प्रदर्शनकारियों के जुटने के लिए बंगला साहिब गुरुद्वारे के आसपास, गोल डाकखाना और गोल मार्केट जैसे स्थानों का जिक्र किया गया। आंदोलन से जुड़े लोगों ने चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर मार्च निकालने की योजना बनाई। प्रदर्शनकारियों ने राष्ट्रीय ध्वज के साथ मार्च निकालने और अपनी मांगें उठाने की बात कही। आयोजकों की योजना के मुताबिक, मार्च रोके जाने की स्थिति में शांतिपूर्ण सभा करने का विकल्प भी रखा गया था। SIR Controversy: आखिर क्यों हो रहा है विरोध? SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची की विशेष जांच और संशोधन की प्रक्रिया है। इसका उद्देश्य मतदाता सूची में दर्ज जानकारी का सत्यापन करना और सूची को अपडेट करना है। हालांकि, इस प्रक्रिया को लेकर कई संगठनों ने चिंता जताई है। प्रदर्शन कर रहे संगठनों का आरोप है कि SIR के दौरान बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम सूची से हटने का खतरा है। उनका कहना है कि किसी भी पात्र नागरिक को मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाना चाहिए। आंदोलन से जुड़े कुछ संगठनों ने मतदाता सूची से कथित तौर पर हटाए गए 13.41 करोड़ लोगों के नाम और मतदान अधिकार बहाल करने की मांग उठाई है। यह आंकड़ा संगठनों का दावा है, जिसकी स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। Election Commission से प्रदर्शनकारियों की क्या मांगें हैं? SIR के विरोध में उतरे संगठनों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उनकी प्रमुख मांगों में शामिल हैं: इन मांगों के जरिए प्रदर्शनकारी चुनाव आयोग पर दबाव बनाना चाहते हैं। हालांकि, इन मांगों पर आयोग की ओर से किसी नए आधिकारिक फैसले या प्रतिक्रिया की पुष्टि होने पर ही स्थिति स्पष्ट होगी। Delhi Police Alert: बैरिकेडिंग और Traffic Advisory प्रदर्शन को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने संबंधित इलाकों में बैरिकेडिंग की और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की। चुनाव आयोग की ओर जाने वाले रास्तों पर भीड़ और यातायात की स्थिति को देखते हुए लोगों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई। यातायात प्रतिबंधों या रूट डायवर्जन के कारण आम लोगों को परेशानी हो सकती है। ऐसे में इन इलाकों से गुजरने वाले लोगों को निकलने से पहले दिल्ली ट्रैफिक पुलिस की ताजा एडवाइजरी देखनी चाहिए और अतिरिक्त समय लेकर यात्रा करनी चाहिए। पहले भी उठ चुका है SIR का मुद्दा SIR को लेकर दिल्ली में पहले भी विरोध प्रदर्शन और राजनीतिक बयानबाजी देखने को मिली है। आंदोलन से जुड़े संगठनों का कहना है कि मतदाता सूची में पारदर्शिता और पात्र मतदाताओं के अधिकारों की सुरक्षा सुनिश्चित की जानी चाहिए। वहीं, SIR के उद्देश्य और इसके क्रियान्वयन को लेकर जारी बहस में मतदाता सूची की शुद्धता, नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग की जवाबदेही जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। आगे क्या होगा? दिल्ली में इस प्रदर्शन के बाद अब सबकी नजर चुनाव आयोग तक मार्च की स्थिति और प्रदर्शनकारियों की मांगों पर होने वाली प्रतिक्रिया पर है। पुलिस की ओर से मार्च को लेकर क्या कदम उठाए जाते हैं और चुनाव आयोग इस मुद्दे पर कोई आधिकारिक बयान देता है या नहीं, यह आगे महत्वपूर्ण रहेगा। फिलहाल, प्रदर्शनकारियों ने SIR के खिलाफ अपनी आवाज उठाई है। इस पूरे मामले में सबसे अहम सवाल यही है कि मतदाता सूची को दुरुस्त करने की प्रक्रिया के साथ पात्र नागरिकों के मतदान के अधिकारों की सुरक्षा कैसे सुनिश्चित की जाती है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Tiger Shroff

Tiger Shroff Firing Case: कोटा में पकड़े गए 3 आरोपी, ट्रेन के General Coach में पुलिस का ऑपरेशन

मुंबई में बॉलीवुड एक्टर टाइगर श्रॉफ (Tiger Shroff) की कार पर फायरिंग की घटना ने सभी को चौंका दिया था। वारदात के बाद आरोपी शहर से निकल गए, लेकिन पुलिस की जांच और लगातार मिल रहे इनपुट के चलते उनकी फरारी ज्यादा लंबी नहीं चल सकी। राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन पर पुलिस ने ट्रेन के जनरल कोच से तीनों आरोपियों को पकड़ लिया। इस पूरे ऑपरेशन में करीब 15 से 20 मिनट लगे। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों को पकड़ने के लिए मुंबई पुलिस से मिली जानकारी, तकनीकी इनपुट और स्थानीय पुलिस की टीमों ने अहम भूमिका निभाई। अब मुंबई पुलिस इस मामले में हमले की वजह और कथित साजिश की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। Tiger Shroff Firing Case: क्या है पूरा मामला? 18 अक्टूबर 2026 की शाम मुंबई के जुहू इलाके में Tiger Shroff की कार पर फायरिंग की घटना सामने आई थी। पुलिस के अनुसार, बाइक पर सवार हमलावरों ने कार को निशाना बनाते हुए कई राउंड फायर किए। इस घटना में टाइगर श्रॉफ सुरक्षित रहे, जबकि उनके ड्राइवर और एक अन्य व्यक्ति को चोटें आईं। घटना के बाद पुलिस ने केस दर्ज कर जांच शुरू की। मौके से मिले सुराग, आसपास के CCTV फुटेज और संदिग्धों की आवाजाही की जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई गई। पुलिस यह पता लगाने में जुटी कि हमले की योजना किसने बनाई और इसमें किन लोगों की भूमिका थी। मुंबई से सूरत होते हुए कोटा पहुंचे आरोपी जांच के दौरान पुलिस को जानकारी मिली कि घटना के बाद आरोपी मुंबई से बाहर निकल गए थे। रिपोर्टों के मुताबिक, वे सूरत पहुंचे और फिर ट्रेन से जयपुर की ओर जा रहे थे। पुलिस को शक था कि उनका अगला पड़ाव दिल्ली हो सकता है और वहां से वे नेपाल जाने की कोशिश कर सकते हैं। मुंबई पुलिस से मिले इनपुट के बाद कोटा पुलिस ने रेलवे स्टेशन पर तलाश शुरू की। पुणे-जयपुर सुपरफास्ट एक्सप्रेस के जनरल कोच में संदिग्धों की पहचान की गई। इसके बाद अलग-अलग टीमों ने मिलकर कार्रवाई की और तीनों को हिरासत में ले लिया। 15 मिनट में पूरा हुआ Kota Police का ऑपरेशन कोटा पुलिस अधीक्षक तेजस्विनी गौतम के मुताबिक, इस कार्रवाई में स्थानीय पुलिस, साइबर सेल और रेलवे से जुड़ी टीमों ने मिलकर काम किया। पुलिस ने ट्रेन और स्टेशन परिसर में तलाश की। करीब 15 से 20 मिनट के भीतर तीनों संदिग्धों को पकड़ लिया गया। इस कार्रवाई की खास बात यह रही कि पुलिस को मुंबई से मिली जानकारी के आधार पर सीमित समय में संदिग्धों तक पहुंचना था। गिरफ्तारी के बाद तीनों को मुंबई पुलिस के हवाले कर दिया गया, जहां उनसे पूछताछ की गई। कौन हैं Tiger Shroff Firing Case के तीन आरोपी? मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान रेहान उर्फ सुक्का, ऋतिक कुर्मी उर्फ रोशन और फूल सिंह के रूप में हुई है। पुलिस इन तीनों की कथित भूमिका, आपसी संपर्क और घटना से जुड़े अन्य लोगों के बारे में पूछताछ कर रही है। जांच एजेंसियों को यह भी पता लगाना है कि हमले में इस्तेमाल किए गए हथियार कहां से आए और घटना के पीछे क्या मकसद था। पुलिस ने अदालत में हथियार बरामद करने और कथित साजिश की जांच के लिए आरोपियों की हिरासत मांगी थी। Latest Update: 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत 21 अक्टूबर 2026 को मुंबई की अदालत ने तीनों आरोपियों को 31 अक्टूबर तक पुलिस हिरासत में भेज दिया। पुलिस का कहना है कि पूछताछ के जरिए हमले की वजह, हथियारों की बरामदगी और दूसरे संदिग्धों की भूमिका का पता लगाया जाएगा। जांच में कुछ अन्य लोगों के नाम भी सामने आए हैं। पुलिस कथित तौर पर हथियारों की सप्लाई और आरोपियों के संपर्कों की कड़ियां जोड़ रही है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि न्यायिक प्रक्रिया के जरिए होनी बाकी है। अब पुलिस किन सवालों के जवाब तलाश रही है? टाइगर श्रॉफ फायरिंग केस में पुलिस के सामने कई अहम सवाल हैं। हमले की साजिश किसने रची, आरोपियों को किसने मदद दी और घटना के पीछे असली मकसद क्या था—इन सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। कोटा रेलवे स्टेशन पर हुई गिरफ्तारी ने जांच को आगे बढ़ाने में मदद की है। अब मुंबई पुलिस की पूछताछ और आगे मिलने वाले सबूतों से इस मामले की बाकी कड़ियां स्पष्ट होने की उम्मीद है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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