CGPSC भर्ती मामले में जेल में बंद पूर्व अध्यक्ष टामन सिंह सोनवानी को इलाज के लिए रायपुर के मेकाहारा अस्पताल लाए जाने के दौरान कथित VIP ट्रीटमेंट मिलने का मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में सोनवानी अस्पताल परिसर में परिजनों से बातचीत करते नजर आ रहे हैं। वीडियो में उनके बिना हथकड़ी दिखाई देने को लेकर भी सवाल उठाए जा रहे हैं।
हालांकि, वायरल वीडियो और लगाए जा रहे आरोपों को लेकर फिलहाल अस्पताल प्रबंधन या जेल प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक पक्ष सामने नहीं आया है।
इलाज के लिए मेकाहारा लाए गए थे सोनवानी
जानकारी के मुताबिक, टामन सिंह सोनवानी को स्वास्थ्य संबंधी जांच या इलाज के लिए मेकाहारा अस्पताल लाया गया था। इसी दौरान वह अस्पताल परिसर में परिजनों से बातचीत करते दिखाई दिए। उनके साथ सुरक्षाकर्मी भी मौजूद थे।
इस दृश्य के सामने आने के बाद न्यायिक हिरासत में बंद आरोपी को अस्पताल ले जाने के दौरान अपनाई गई सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, अस्पताल ले जाते समय किसी बंदी को हथकड़ी लगाई जाएगी या नहीं, यह संबंधित सुरक्षा परिस्थितियों और नियमों पर निर्भर करता है।
बिना हथकड़ी नजर आने पर चर्चा
वायरल वीडियो में सोनवानी बिना हथकड़ी के दिखाई दे रहे हैं। इसे लेकर सोशल मीडिया पर कथित VIP सुविधा दिए जाने के दावे किए जा रहे हैं। हालांकि, अधिकारियों ने अभी यह स्पष्ट नहीं किया है कि उन्हें अस्पताल लाने और परिजनों से मुलाकात की अनुमति किस प्रक्रिया के तहत दी गई थी।
इसलिए वायरल वीडियो के आधार पर लगाए जा रहे VIP ट्रीटमेंट के दावे की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
ED ने दाखिल की 99 पेज की अभियोजन शिकायत
CGPSC भर्ती मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 22 सितंबर को रायपुर की विशेष PMLA अदालत में टामन सिंह सोनवानी समेत सात लोगों के खिलाफ अभियोजन शिकायत दाखिल की थी। शिकायत 99 पेज की है और इसके साथ करीब 3,700 पेज के दस्तावेज भी पेश किए गए हैं।
ED की शिकायत में सोनवानी के अलावा श्रवण गोयल, तत्कालीन CGPSC उप परीक्षा नियंत्रक ललित गणवीर, उत्कर्ष चंद्राकर, विकास चंद्राकर, अनिल चंद्राकर और चेतन बोरघरिया के नाम शामिल हैं। एजेंसी की जांच CGPSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं और उनसे जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों से संबंधित है।
मेकाहारा में पहले भी सामने आया था ऐसा मामला
मेकाहारा अस्पताल में न्यायिक हिरासत या पुलिस अभिरक्षा में इलाज करा रहे आरोपियों को कथित तौर पर अतिरिक्त सुविधाएं मिलने के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। ऐसे मामलों में अस्पताल और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल उठे हैं।
फिलहाल सोनवानी से जुड़े ताजा मामले में अस्पताल प्रबंधन और जेल प्रशासन के आधिकारिक बयान का इंतजार है। जांच या आधिकारिक स्पष्टीकरण के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि अस्पताल में उनके लिए निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन हुआ था या नहीं।

