गणेश चतुर्थी (Ganesh Chaturthi) का पहला दिन भक्ति और उत्साह से भरा होता है। इस दिन लोग घरों और पंडालों में विघ्नहर्ता श्री गणेश जी की स्थापना करते हैं। माना जाता है कि भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणपति बप्पा का पृथ्वी पर आगमन होता है।
गणेश चतुर्थी का महत्व
- गणपति जी बुद्धि, सफलता और सौभाग्य के देवता हैं।
- शास्त्रों में कहा गया है कि किसी भी शुभ कार्य की शुरुआत से पहले गणेश जी की पूजा करना अनिवार्य है।
- इस दिन गणेश जी की आराधना करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
गणेश जी का प्रिय रंग और शुभ रंग (Day 1)
- पहले दिन गणेश जी को लाल रंग विशेष रूप से प्रिय है।
- भक्त लाल वस्त्र पहनकर पूजा करते हैं।
- घर और पंडाल की सजावट में लाल, पीला और केसरिया रंग शुभ माना जाता है।
- पूजा के दौरान लाल फूल (गेंदे, गुड़हल), लाल वस्त्र और लाल सिंदूर का प्रयोग अवश्य करें।
शुभ दिशा
- गणेश प्रतिमा की स्थापना उत्तर-पूर्व (ईशान कोण) या उत्तर दिशा में करना सबसे शुभ माना जाता है।
- इस दिशा में बैठकर पूजा करने से सकारात्मक ऊर्जा और सुख-समृद्धि आती है।
पूजा विधि (Day 1)
- स्नान कर संकल्प लें और प्रतिमा को शुभ मुहूर्त में स्थापित करें।
- गणपति जी को स्नान कराकर नए वस्त्र और गहनों से सजाएं।
- दूर्वा, लाल फूल, मोदक और लड्डू का भोग लगाएं।
- गणेश अथर्वशीर्ष, गणपति स्तोत्र या 108 नामों का पाठ करें।
- आरती कर परिवार सहित जयकारे लगाएं – “गणपति बप्पा मोरया”।
पहले दिन की विशेषता
- पहले दिन को गणपति स्वागत दिवस माना जाता है।
- भक्त घरों और पंडालों में भव्य सजावट करते हैं।
- समाजिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की शुरुआत इसी दिन होती है।
- यह दिन उत्साह, उमंग और एकता का संदेश देता है।
व्रत और आस्था
- कई भक्त फलाहार व्रत रखते हैं।
- दिनभर भक्ति गीत, भजन और आरती का आयोजन किया जाता है।
- माना जाता है कि पहले दिन का व्रत रखने से परिवार में सुख-समृद्धि और सौभाग्य बढ़ता है।
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