मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर विपक्षी INDIA गठबंधन का विरोध लगातार जारी है। शुक्रवार, 9 अक्टूबर को प्रदर्शन का चौथा दिन है। विपक्षी दल चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठा रहे हैं और अपनी मांगों को लेकर आंदोलन तेज करने की तैयारी में हैं। इस बीच, राष्ट्रपति भवन तक मार्च करने की संभावना ने दिल्ली की सियासत में हलचल बढ़ा दी है। वहीं, मुख्य चुनाव आयुक्त के आवास और चुनाव आयोग के कार्यालय के आसपास सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी की गई है।
SIR के खिलाफ विपक्ष का प्रदर्शन, राष्ट्रपति से मिलने की मांग
विपक्षी दलों का कहना है कि SIR प्रक्रिया को लेकर उनकी कई चिंताएं हैं, जिन पर चुनाव आयोग को स्पष्ट जवाब देना चाहिए। विपक्ष इस मुद्दे को मतदाताओं के अधिकार और लोकतांत्रिक प्रक्रिया से जोड़कर देख रहा है। इसी के विरोध में INDIA गठबंधन के नेता लगातार प्रदर्शन कर रहे हैं।
विपक्षी सांसद राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर अपनी शिकायतें और मांगें उनके सामने रखना चाहते हैं। इसके लिए राष्ट्रपति से समय मांगा गया है। विपक्ष का कहना है कि वह चुनाव प्रक्रिया से जुड़े सवालों पर राष्ट्रपति का ध्यान आकर्षित करना चाहता है।
अगर मुलाकात का समय नहीं मिलता है, तो विपक्षी सांसद राष्ट्रपति भवन तक मार्च करने का विकल्प अपना सकते हैं। प्रधानमंत्री आवास तक जाने की संभावना को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं हैं। हालांकि, इन संभावित मार्चों की अंतिम योजना और अनुमति को लेकर आधिकारिक पुष्टि जरूरी है।
राजघाट पर भी विपक्षी नेताओं ने दिया धरना
इससे पहले गुरुवार को विपक्षी नेताओं ने दिल्ली के राजघाट पर प्रदर्शन किया था। इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे, राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और INDIA गठबंधन के दूसरे नेता मौजूद रहे। नेताओं ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि देने के साथ SIR और चुनाव आयोग की भूमिका को लेकर अपना विरोध जताया।
राहुल गांधी समेत विपक्ष के कई नेताओं ने कहा है कि मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों पर सवाल उठाना जरूरी है। विपक्ष का आरोप है कि SIR की प्रक्रिया में ऐसी समस्याएं सामने आ सकती हैं, जिनका असर आम मतदाताओं पर पड़ेगा। इसी वजह से गठबंधन चुनाव आयोग से जवाब मांग रहा है।
विपक्ष ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठाई है। हालांकि, विपक्ष के आरोपों और चुनाव आयोग के पक्ष को अलग-अलग समझना जरूरी है। इन आरोपों को अभी स्थापित तथ्य के रूप में नहीं देखा जा सकता।
CEC ज्ञानेश कुमार के घर और दफ्तर की सुरक्षा बढ़ी
प्रदर्शन के बीच मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार की सुरक्षा को लेकर भी सतर्कता बढ़ाई गई है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उनके आवास और चुनाव आयोग के मुख्यालय निर्वाचन सदन के आसपास अतिरिक्त सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। उनके पारिवारिक आवास पर भी सुरक्षा बढ़ाए जाने की खबरें सामने आई हैं।
दिल्ली में संवेदनशील सरकारी इमारतों और प्रमुख इलाकों पर पुलिस की निगरानी बढ़ाई गई है। प्रशासन की प्राथमिकता कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी अप्रिय स्थिति से बचना है।
लगातार चौथे दिन चल रहे प्रदर्शन को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियां भी सतर्क हैं। ऐसे में विपक्ष की आगे की रणनीति और प्रशासन की प्रतिक्रिया पर सभी की नजर बनी हुई है।
आखिर SIR को लेकर क्या है विवाद?
SIR यानी Special Intensive Revision मतदाता सूची की विशेष गहन समीक्षा की प्रक्रिया है। इसके तहत मतदाता सूची की जांच की जाती है और जरूरत के अनुसार उसमें संशोधन किया जाता है।
विपक्षी दलों का आरोप है कि इस प्रक्रिया को लेकर पारदर्शिता और मतदाताओं के अधिकारों से जुड़े सवालों का संतोषजनक जवाब नहीं मिला है। विपक्ष चाहता है कि चुनाव आयोग इन चिंताओं पर स्पष्टता दे और कथित अनियमितताओं की जांच की जाए।
वहीं, चुनाव आयोग की प्रक्रिया और उसके फैसलों को कानूनी प्रावधानों के संदर्भ में देखा जाना चाहिए। SIR को लेकर उठाए गए राजनीतिक आरोपों की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और आधिकारिक जानकारी के आधार पर ही की जा सकती है।
आगे क्या होगा?
अब सबकी नजर राष्ट्रपति भवन से मिलने वाले जवाब और INDIA गठबंधन की अगली रणनीति पर है। अगर विपक्ष को राष्ट्रपति से मुलाकात का समय मिलता है, तो नेता अपनी शिकायतें सीधे उनके सामने रख सकते हैं। दूसरी ओर, मुलाकात नहीं होने की स्थिति में मार्च या दूसरे विरोध कार्यक्रमों पर फैसला लिया जा सकता है।
फिलहाल, ज्ञानेश कुमार और SIR को लेकर शुरू हुआ यह विवाद राजनीतिक रूप से और तेज होता दिखाई दे रहा है। आने वाले दिनों में विपक्ष के आंदोलन, चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया और सुरक्षा व्यवस्था से जुड़े घटनाक्रम इस मामले की दिशा तय करेंगे।
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