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Heavy Rain Alert: UP में बढ़ा Flood Risk, Gujarat के कई जिले पानी में डूबे; Bihar में IMD की बड़ी चेतावनी

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देशभर में मानसून अब अपने सबसे सक्रिय दौर में पहुंच चुका है। लगातार हो रही बारिश (Heavy Rain) ने उत्तर भारत से लेकर पश्चिमी भारत तक कई राज्यों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। उत्तर प्रदेश में गंगा, यमुना समेत 10 प्रमुख नदियां उफान पर हैं, गुजरात के कई जिले बाढ़ की चपेट में हैं और बिहार के 19 जिलों के लिए भारी बारिश का अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग का कहना है कि अगले 24 से 48 घंटे कई राज्यों के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो सकते हैं।

उत्तर प्रदेश में बढ़ा बाढ़ का खतरा, गंगा-यमुना समेत 10 नदियों का जलस्तर बढ़ा

उत्तर प्रदेश में लगातार बारिश के कारण गंगा, यमुना, घाघरा, शारदा, राप्ती, सरयू और अन्य प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। कई जिलों के निचले इलाकों में पानी पहुंचने लगा है, जिससे लोगों की चिंता बढ़ गई है।

स्थानीय प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले परिवारों को सतर्क रहने की सलाह दी है। राहत एवं बचाव दलों को तैयार रखा गया है और संवेदनशील क्षेत्रों पर लगातार निगरानी की जा रही है। यदि बारिश का सिलसिला इसी तरह जारी रहा तो कुछ इलाकों में बाढ़ की स्थिति और गंभीर हो सकती है।

Gujarat Flood: लगातार बारिश से कई जिलों में जनजीवन प्रभावित

गुजरात में मूसलाधार बारिश ने कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। कई सड़कें पानी में डूब गई हैं, जबकि निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है।

राज्य सरकार ने राहत एवं बचाव अभियान तेज कर दिया है। एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें प्रभावित इलाकों में तैनात हैं। प्रशासन लगातार हालात पर नजर बनाए हुए है ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत सहायता पहुंचाई जा सके।

Bihar Weather: 19 जिलों में Heavy Rain Alert जारी

बिहार में भी मानसून का असर लगातार देखने को मिल रहा है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने राज्य के 19 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। कई स्थानों पर तेज बारिश के साथ आकाशीय बिजली गिरने की भी आशंका जताई गई है।

प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे खराब मौसम के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें और मौसम विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। जिला प्रशासन भी लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए है।

IMD Weather Forecast: अगले 48 घंटे रहेंगे बेहद अहम

मौसम विभाग के अनुसार उत्तर प्रदेश, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और पूर्वोत्तर भारत के कई हिस्सों में अगले दो दिनों तक भारी से बहुत भारी बारिश होने की संभावना है। कुछ क्षेत्रों में जलभराव, फ्लैश फ्लड और भूस्खलन का खतरा भी बना हुआ है।

विशेषज्ञों का कहना है कि जिन इलाकों में पहले से ही नदियां उफान पर हैं, वहां लोगों को अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है। स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करना और मौसम संबंधी आधिकारिक अपडेट पर नजर बनाए रखना सबसे सुरक्षित विकल्प होगा।

लोगों के लिए जरूरी सलाह

बारिश और बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने लोगों से नदी किनारे जाने से बचने, जलभराव वाले रास्तों का उपयोग न करने और केवल आधिकारिक सूचनाओं पर भरोसा करने की अपील की है। जरूरत पड़ने पर तुरंत स्थानीय प्रशासन या आपदा राहत टीम से संपर्क करने की सलाह भी दी गई है।

देश के कई हिस्सों में मानसून अभी और सक्रिय रहने वाला है। ऐसे में आने वाले दिनों में मौसम से जुड़ी हर नई जानकारी पर नजर रखना बेहद जरूरी होगा।

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Yukta

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आशीष कुमार दश

Infosys Leadership आशीष कुमार दश संभालेंगे CEO पद, पहली तिमाही में कंपनी का मुनाफा 12.2% बढ़ा

देश की दिग्गज आईटी कंपनी Infosys के लिए जुलाई का महीना कई मायनों में खास रहा है। कंपनी ने जहां अपने नए CEO के नाम का ऐलान किया है, वहीं पहली तिमाही के शानदार नतीजों से बाजार में सकारात्मक माहौल बना है। आशीष कुमार दश अब इंफोसिस की कमान संभालेंगे और उनके सामने कंपनी को टेक्नोलॉजी के बदलते दौर में नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने की बड़ी जिम्मेदारी होगी। इंफोसिस के ताजा Q1 Results के अनुसार, कंपनी ने अप्रैल-जून तिमाही में मजबूत वित्तीय प्रदर्शन किया है। कंपनी का नेट प्रॉफिट 12.2% बढ़कर ₹7,769 करोड़ हो गया है। पिछले साल की इसी अवधि में इंफोसिस का मुनाफा ₹6,922 करोड़ था। वहीं, कंपनी का रेवेन्यू 14% बढ़कर ₹48,211 करोड़ पहुंच गया है। आशीष कुमार दश बने Infosys के नए CEO इंफोसिस ने नेतृत्व में बदलाव करते हुए आशीष कुमार दश को नया Chief Executive Officer (CEO) नियुक्त किया है। आईटी सेक्टर की तेज प्रतिस्पर्धा, AI क्रांति और डिजिटल बदलाव के दौर में उनकी भूमिका काफी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। कंपनी को उम्मीद है कि नए CEO के नेतृत्व में Infosys अपने डिजिटल बिजनेस, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), क्लाउड टेक्नोलॉजी और ग्लोबल मार्केट में अपनी पकड़ को और मजबूत करेगी। Q1 Results में Infosys का शानदार प्रदर्शन पहली तिमाही के नतीजों ने दिखाया है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद Infosys की ग्रोथ रफ्तार बनी हुई है। कंपनी को डिजिटल सर्विसेज, क्लाउड सॉल्यूशन और एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी प्रोजेक्ट्स से फायदा मिला है। आईटी सेक्टर में पिछले कुछ समय से मांग को लेकर दबाव देखा जा रहा था, लेकिन इंफोसिस के बेहतर आंकड़ों ने निवेशकों का भरोसा बढ़ाया है। AI और Digital Transformation पर रहेगा फोकस टेक्नोलॉजी की दुनिया में तेजी से हो रहे बदलाव के बीच AI अब कंपनियों की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में शामिल है। Infosys भी AI आधारित सेवाओं और नए डिजिटल सॉल्यूशन पर लगातार निवेश कर रही है। नए CEO आशीष कुमार दश के सामने सबसे बड़ी चुनौती कंपनी की ग्रोथ को बनाए रखना, नए क्लाइंट जोड़ना और बदलते टेक्नोलॉजी ट्रेंड के साथ आगे बढ़ना होगी। Investors की नजर अब नई रणनीति पर मजबूत तिमाही नतीजों और नए नेतृत्व के ऐलान के बाद अब निवेशकों की नजर Infosys की आने वाली रणनीति पर होगी। बाजार यह देखना चाहेगा कि नए CEO के नेतृत्व में कंपनी किस तरह AI, डिजिटल सर्विसेज और इंटरनेशनल बिजनेस को आगे बढ़ाती है। कुल मिलाकर, Infosys के लिए यह दौर बदलाव और नई संभावनाओं का है। एक ओर कंपनी को नया नेतृत्व मिला है, वहीं दूसरी ओर शानदार वित्तीय प्रदर्शन ने उसकी मजबूत स्थिति को साबित किया है। Infosys Q1 Results Highlights: हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Commonwealth Games 2026

Team India at Commonwealth Games 2026: तिरंगे के साथ Mirabai Chanu और Lovlina Borgohain की दमदार एंट्री

कॉमनवेल्थ गेम्स (Commonwealth Games) 2026 का आगाज शानदार उद्घाटन समारोह के साथ हुआ। रोशनी, संगीत, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और हजारों दर्शकों की मौजूदगी में हुए इस आयोजन ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। भारत के लिए सबसे खास पल वह रहा, जब ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू और स्टार मुक्केबाज लवलीना बोरगोहेन (Lovlina Borgohain) ने हाथों में तिरंगा लेकर भारतीय दल की अगुआई की। दोनों खिलाड़ियों का आत्मविश्वास और गर्व पूरे देश के लिए यादगार क्षण बन गया। Mirabai Chanu और Lovlina Borgohain बनीं भारत की Flag Bearer भारतीय ओलंपिक संघ (IOA) ने इस बार महिला खिलाड़ियों पर भरोसा जताते हुए मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन को ध्वजवाहक चुना। जैसे ही भारतीय दल स्टेडियम में पहुंचा, वहां मौजूद दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट से खिलाड़ियों का स्वागत किया। तिरंगे के साथ दोनों खिलाड़ियों की तस्वीरें कुछ ही देर में सोशल मीडिया पर वायरल हो गईं। यह सम्मान इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि दोनों खिलाड़ी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत को कई बड़े मंचों पर गौरवान्वित कर चुकी हैं। King Charles ने किया Commonwealth Games 2026 का उद्घाटन उद्घाटन समारोह में King Charles ने आधिकारिक रूप से कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की शुरुआत की घोषणा की। अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि खेल केवल प्रतिस्पर्धा का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे विभिन्न देशों और संस्कृतियों को जोड़ने का सबसे मजबूत जरिया भी हैं। उन्होंने सभी खिलाड़ियों को शुभकामनाएं देते हुए खेल भावना को सर्वोपरि रखने की अपील की। Opening Ceremony में दिखी संस्कृति और तकनीक की शानदार झलक ओपनिंग सेरेमनी में मेजबान देश ने अपनी सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक तकनीक के साथ पेश किया। पारंपरिक नृत्य, लाइव म्यूजिक, लेजर शो, ड्रोन डिस्प्ले और आतिशबाजी ने समारोह को यादगार बना दिया। दुनिया के अलग-अलग देशों के खिलाड़ियों ने परेड ऑफ नेशंस में हिस्सा लिया और अपने-अपने राष्ट्रीय ध्वज के साथ स्टेडियम में प्रवेश किया। भारत को इन खेलों में पदकों की बड़ी उम्मीद कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में भारत का दल कई खेलों में मजबूत दावेदार माना जा रहा है। वेटलिफ्टिंग, बॉक्सिंग, बैडमिंटन, शूटिंग, कुश्ती, टेबल टेनिस और एथलेटिक्स जैसी स्पर्धाओं में भारतीय खिलाड़ियों से शानदार प्रदर्शन की उम्मीद है। विशेषज्ञों का मानना है कि अनुभवी खिलाड़ियों के साथ-साथ युवा प्रतिभाएं भी इस बार भारत की पदक तालिका को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकती हैं। देशवासियों की उम्मीदों के साथ शुरू हुआ सफर उद्घाटन समारोह के साथ ही कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की आधिकारिक शुरुआत हो चुकी है। भारतीय खिलाड़ियों के सामने अब देश की उम्मीदों पर खरा उतरने की चुनौती होगी। मीराबाई चानू और लवलीना बोरगोहेन द्वारा तिरंगा लेकर स्टेडियम में प्रवेश करना पूरे देश के लिए गर्व का क्षण रहा। अब खेल प्रेमियों की नजरें आने वाले मुकाबलों पर हैं, जहां भारत अधिक से अधिक पदक जीतकर अपना दम दिखाने की कोशिश करेगा. हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Tariff

US Trade Policy: भारत के Export पर असर? अमेरिका ने लगाया 10% Extra Tariff, 60 देश भी निशाने पर

अमेरिका ने वैश्विक व्यापार को प्रभावित करने वाला बड़ा फैसला लेते हुए भारत समेत 60 देशों से आने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा की है। भारत पर 10% Extra Tariff लगाया गया है, जबकि कुछ अन्य देशों पर यह शुल्क 12.5% तक रखा गया है। अमेरिकी प्रशासन का कहना है कि यह कदम उन उत्पादों की सप्लाई चेन में Forced Labour (जबरन मजदूरी) से जुड़े जोखिमों को देखते हुए उठाया गया है। इस फैसले के बाद भारतीय निर्यातकों और कारोबारियों की नजर अब भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों पर टिक गई है। क्या है अमेरिका का नया टैरिफ फैसला? अमेरिका ने ट्रेड एक्ट की Section 301 के तहत यह कार्रवाई की है। व्हाइट हाउस का कहना है कि कई देशों में जबरन मजदूरी से बने सामान को रोकने के लिए पर्याप्त कदम नहीं उठाए गए हैं। ऐसे में इन देशों से आयात होने वाले उत्पादों पर अतिरिक्त शुल्क लगाया जा रहा है। नई व्यवस्था के तहत भारत, ब्रिटेन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, कनाडा, मैक्सिको, यूरोपीय संघ समेत कुल 60 देशों को इस दायरे में रखा गया है। भारत पर सिर्फ 10% Extra Tariff क्यों? अमेरिकी प्रशासन के अनुसार जिन देशों ने Forced Labour को रोकने के लिए कुछ ठोस नीतियां लागू की हैं, उन्हें अपेक्षाकृत कम टैरिफ श्रेणी में रखा गया है। भारत पर 10% अतिरिक्त शुल्क लगाया गया है, जबकि जिन देशों के प्रयास कमजोर माने गए हैं, उनके लिए यह दर 12.5% तक तय की गई है। हालांकि अमेरिका ने यह भी संकेत दिया है कि यदि संबंधित देश अपनी नीतियों में सुधार करते हैं तो भविष्य में इन टैरिफ की समीक्षा की जा सकती है। किन उत्पादों पर नहीं लगेगा असर? नई टैरिफ नीति में कुछ आवश्यक वस्तुओं को राहत दी गई है। इनमें कच्चा तेल, प्राकृतिक गैस, उर्वरक, कुछ खाद्य उत्पाद और अमेरिका-मेक्सिको-कनाडा (USMCA) समझौते के तहत आने वाले सामान शामिल हैं। इसके अलावा अधिकांश आयातित वस्तुओं पर नया शुल्क लागू होगा। भारतीय कारोबार पर क्या होगा असर? विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले का असर भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात पर पड़ सकता है। टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग गुड्स, मैन्युफैक्चरिंग और कुछ अन्य निर्यात आधारित उद्योगों की लागत बढ़ सकती है। यदि अतिरिक्त शुल्क लंबे समय तक जारी रहता है, तो भारतीय कंपनियों की प्रतिस्पर्धा प्रभावित हो सकती है। हालांकि कई जानकारों का मानना है कि भारत और अमेरिका के बीच चल रही व्यापार वार्ताओं के दौरान इस मुद्दे पर समाधान निकालने की कोशिश की जा सकती है। कई देशों ने जताई नाराजगी अमेरिका के इस फैसले पर कई देशों ने आपत्ति दर्ज कराई है। उनका कहना है कि एकतरफा टैरिफ वैश्विक व्यापार व्यवस्था को प्रभावित कर सकते हैं। दूसरी ओर अमेरिकी प्रशासन का दावा है कि यह कदम केवल मानवाधिकारों की रक्षा और वैश्विक सप्लाई चेन को अधिक पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से उठाया गया है। भारत के लिए आगे की राह भारत के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती अपने निर्यात को प्रतिस्पर्धी बनाए रखना और अमेरिका के साथ व्यापारिक संवाद को मजबूत करना होगी। यदि दोनों देशों के बीच बातचीत सकारात्मक दिशा में बढ़ती है, तो भविष्य में इस अतिरिक्त टैरिफ पर राहत मिलने की संभावना भी बन सकती है। फिलहाल इतना तय है कि अमेरिका का यह फैसला सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि वैश्विक व्यापार जगत के लिए भी एक बड़ा संकेत है। आने वाले दिनों में इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार, निर्यात और व्यापारिक संबंधों पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Layoffs

Tech Layoffs 2026: Amazon और Meta ने 40 हजार कर्मचारियों को निकाला, AI बना सबसे बड़ी वजह?

Amazon Layoffs और Meta Layoffs ने एक बार फिर दुनिया भर के टेक कर्मचारियों की चिंता बढ़ा दी है। पिछले करीब 10 महीनों में दोनों कंपनियां मिलकर लगभग 40 हजार कर्मचारियों की छंटनी कर चुकी हैं। इन फैसलों के पीछे सबसे बड़ा कारण Artificial Intelligence (AI) पर बढ़ता निवेश, लागत में कटौती और कंपनियों का तेजी से बदलता बिजनेस मॉडल माना जा रहा है। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या यह सिर्फ शुरुआत है या आने वाले समय में टेक सेक्टर में नौकरी जाने का सिलसिला और तेज हो सकता है? Amazon ने क्यों घटाई अपनी Workforce? ई-कॉमर्स और क्लाउड सर्विस की दिग्गज कंपनी Amazon ने इस साल कई विभागों में कर्मचारियों की संख्या कम की है। जनवरी 2026 में कंपनी ने करीब 16 हजार कॉर्पोरेट कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखाया। इसके बाद हाल ही में Artificial General Intelligence (AGI) से जुड़े कुछ प्रोजेक्ट्स में भी टीमों का पुनर्गठन किया गया। कंपनी का कहना है कि वह AI तकनीक में बड़े पैमाने पर निवेश कर रही है। ऐसे में जिन क्षेत्रों में ऑटोमेशन संभव है, वहां संसाधनों का नए तरीके से इस्तेमाल किया जा रहा है। Amazon का फोकस अब भविष्य की टेक्नोलॉजी तैयार करने पर है। Meta भी AI Strategy पर कर रही बड़ा दांव Facebook, Instagram और WhatsApp की पैरेंट कंपनी Meta ने भी अपने वैश्विक कर्मचारियों का लगभग 10 प्रतिशत, यानी करीब 8 हजार लोगों की छंटनी की है। इसके साथ ही कई नई भर्तियों को भी फिलहाल रोक दिया गया है। Meta का मानना है कि आने वाले वर्षों में AI ही कंपनी की सबसे बड़ी ताकत बनने वाला है। इसी वजह से कंपनी अपने खर्चों को कम कर AI इंफ्रास्ट्रक्चर, स्मार्ट टूल्स और नई तकनीकों पर ज्यादा निवेश कर रही है। आखिर क्यों बढ़ रही हैं Tech Layoffs? पिछले कुछ वर्षों में टेक कंपनियों ने बड़े पैमाने पर भर्ती की थी। अब बाजार की बदलती परिस्थितियों और AI के बढ़ते इस्तेमाल के कारण कंपनियां अपनी कार्यप्रणाली में बदलाव कर रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे कई प्रमुख कारण हैं— क्या आगे भी बढ़ सकता है Layoffs का आंकड़ा? टेक इंडस्ट्री से जुड़े जानकारों का मानना है कि फिलहाल छंटनी पूरी तरह रुकने वाली नहीं है। आने वाले महीनों में भी कुछ कंपनियां अपने बिजनेस और AI रणनीति के अनुसार कर्मचारियों की संख्या में बदलाव कर सकती हैं। हालांकि इसका दूसरा पहलू भी है। AI के कारण कुछ पारंपरिक नौकरियां जरूर प्रभावित हो रही हैं, लेकिन दूसरी ओर AI Engineer, Machine Learning Specialist, Data Scientist, Cloud Engineer, Cyber Security Expert और Prompt Engineer जैसी नई भूमिकाओं की मांग तेजी से बढ़ रही है। यानी नौकरी के अवसर खत्म नहीं हो रहे, बल्कि उनका स्वरूप बदल रहा है। कर्मचारियों के लिए क्या है सबसे बड़ी सीख? विशेषज्ञों का मानना है कि आज के दौर में केवल अनुभव ही नहीं, बल्कि नई तकनीकों की समझ भी उतनी ही जरूरी हो गई है। जो प्रोफेशनल समय के साथ खुद को अपडेट करेंगे और AI से जुड़ी नई स्किल्स सीखेंगे, उनके लिए भविष्य में बेहतर अवसर बने रहेंगे। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Lok Sabha

Lok Sabha Rajya Sabha Kharge बोले- PM सदन में आकर दें जवाब, हंगामे के बीच कार्यवाही 12 बजे तक स्थगित

संसद के मानसून सत्र में शुक्रवार को एक बार फिर राजनीतिक माहौल गर्म रहा। लोकसभा (Lok Sabha) और राज्यसभा (Rajya Sabha) की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्ष ने कई अहम मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। हंगामे के बीच कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सदन में आकर बयान देने की मांग की। उनका कहना था कि देश से जुड़े महत्वपूर्ण मामलों पर प्रधानमंत्री को संसद के भीतर जवाब देना चाहिए। लगातार नारेबाजी और विरोध के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही सुचारु रूप से नहीं चल सकी। आखिरकार पीठासीन अधिकारियों ने लोकसभा और राज्यसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित कर दी। Kharge ने PM Modi से क्या कहा? मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि संसद लोकतंत्र का सबसे बड़ा मंच है और यहां उठाए गए सवालों का जवाब भी यहीं मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि यदि प्रधानमंत्री स्वयं सदन में आकर बयान देंगे, तभी उनकी बातों को आधिकारिक रूप से स्वीकार किया जा सकेगा। खड़गे ने सरकार से विपक्ष के सवालों का सीधे जवाब देने की अपील भी की। विपक्ष ने सरकार को किन मुद्दों पर घेरा? सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी सांसदों ने कई राष्ट्रीय और जनहित से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। विपक्ष का आरोप था कि सरकार महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा से बच रही है और संसद में स्पष्ट जवाब नहीं दे रही। विपक्ष ने मांग की कि सभी अहम मुद्दों पर विस्तृत चर्चा कराई जाए और प्रधानमंत्री स्वयं सदन में अपना पक्ष रखें। हंगामे के कारण नहीं चल सकी कार्यवाही विपक्ष के लगातार विरोध और शोर-शराबे के चलते लोकसभा और राज्यसभा में सामान्य कामकाज प्रभावित हुआ। कई बार सदन को व्यवस्थित करने की कोशिश की गई, लेकिन स्थिति सामान्य नहीं हो सकी। इसके बाद दोनों सदनों की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई। सरकार और विपक्ष के बीच बढ़ा राजनीतिक टकराव मानसून सत्र के दौरान सरकार और विपक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है। विपक्ष जवाबदेही की मांग कर रहा है, जबकि सरकार का कहना है कि वह संसद में चर्चा के लिए तैयार है। हालांकि, लगातार हो रहे हंगामे के कारण कई महत्वपूर्ण विधायी और संसदीय कार्य प्रभावित हो रहे हैं। अब आगे क्या होगा? अब सभी की नजर दोपहर 12 बजे के बाद शुरू होने वाली संसद की कार्यवाही पर रहेगी। यदि सरकार और विपक्ष के बीच सहमति बनती है तो सदन की कार्यवाही सामान्य हो सकती है। वहीं, यदि गतिरोध जारी रहा तो संसद में एक बार फिर हंगामा देखने को मिल सकता है।

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