भारत ने ईरान के युद्धपोत IRIS Lavan को कोच्चि बंदरगाह में आपातकालीन डॉकिंग की अनुमति देकर 183 नाविकों की जान बचाई। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि यह कदम मानवीय दृष्टिकोण और अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानूनों के पालन के लिए लिया गया, न कि किसी राजनीतिक कारण से।
IRIS Lavan क्यों आया कोच्चि?
ईरान ने 28 फरवरी 2026 को जहाज के तकनीकी खराबियों और चालक दल की सुरक्षा के मद्देनज़र कोच्चि में डॉकिंग की अनुमति मांगी थी। भारत ने इस अनुरोध को 1 मार्च को मंज़ूरी दी और 4 मार्च को IRIS Lavan सुरक्षित रूप से कोच्चि बंदरगाह पर डॉक हुआ।
मानव जीवन की सुरक्षा बनी प्राथमिकता
जयशंकर ने बताया कि जहाज में नौसैनिकों के लिए उचित सुविधाएँ नहीं थीं और खुले समुद्र में रहने से उनकी जान खतरे में थी। भारत ने तुरंत मानवीय सहायता प्रदान की और सभी 183 नाविकों को भारतीय नौसेना की सुविधाओं में ठहराया।
भारत का संदेश: मानवीय कदम और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबद्धता
इस कदम से भारत ने यह संदेश दिया कि वह मानवीय संकटों में सहयोग करने के लिए हमेशा तैयार है और समुद्री सुरक्षा नियमों का पालन करता है। यह निर्णय विशेष रूप से मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के समय आया, जिससे यह कदम और भी महत्वपूर्ण बन गया।
हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!


