लद्दाख (Ladakh) के दुर्गम पहाड़ी इलाके तंगत्से (Tangtse) में शुक्रवार को भारतीय सेना का चीता (Cheetah) लाइट हेलीकॉप्टर हादसे का शिकार हो गया। इस दुर्घटना में सेना के दो पायलट और 3 इन्फैंट्री डिवीजन के डिवीजन कमांडर मेजर जनरल सचिन मेहता घायल हो गए। हालांकि राहत की बात यह रही कि सभी अधिकारी सुरक्षित बच गए और किसी की हालत गंभीर नहीं बताई जा रही है।
Routine Mission के दौरान हुआ हादसा
जानकारी के मुताबिक, सेना का यह हेलीकॉप्टर नियमित मिशन पर था। लेह के पास ऊंचाई वाले क्षेत्र में उड़ान के दौरान अचानक तकनीकी समस्या आने के बाद हेलीकॉप्टर क्रैश हो गया। हेलीकॉप्टर में एक लेफ्टिनेंट कर्नल, एक मेजर और मेजर जनरल सचिन मेहता सवार थे।
स्थानीय सेना इकाइयों ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया और सभी घायलों को सुरक्षित बाहर निकालकर सैन्य अस्पताल पहुंचाया गया। अधिकारियों के मुताबिक, सभी की हालत अब स्थिर है।
खराब मौसम और तकनीकी खराबी पर जांच
सेना ने हादसे की जांच के आदेश दे दिए हैं। शुरुआती रिपोर्ट्स में खराब मौसम और तकनीकी खराबी को दुर्घटना की संभावित वजह माना जा रहा है। लद्दाख जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में तेज हवाएं और अचानक बदलता मौसम उड़ानों को काफी चुनौतीपूर्ण बना देता है।
भारतीय सेना ने मामले में कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी शुरू कर दी है, ताकि हादसे की असली वजह सामने आ सके।
पुराने Cheetah Helicopter पर फिर उठे सवाल
इस हादसे के बाद एक बार फिर सेना के पुराने चीता हेलीकॉप्टरों की सुरक्षा को लेकर चर्चा तेज हो गई है। कई दशकों से इस्तेमाल हो रहे ये हेलीकॉप्टर सियाचिन, लद्दाख और पूर्वोत्तर के दुर्गम इलाकों में सेना की लाइफलाइन माने जाते हैं।
हालांकि लगातार हो रहे हादसों के बीच भारतीय सेना अब पुराने Cheetah और Chetak हेलीकॉप्टरों को हटाकर नए Light Utility Helicopter (LUH) शामिल करने की तैयारी कर रही है।
कठिन इलाकों में अहम भूमिका निभाते हैं Army Helicopters
लद्दाख और सियाचिन जैसे इलाकों में सड़क संपर्क सीमित होने की वजह से सेना काफी हद तक हेलीकॉप्टरों पर निर्भर रहती है। जवानों तक राशन पहुंचाने से लेकर मेडिकल इमरजेंसी और निगरानी मिशन तक, ये हेलीकॉप्टर अहम भूमिका निभाते हैं।
इस हादसे ने एक बार फिर यह दिखा दिया कि देश की सुरक्षा में तैनात सैनिक और अधिकारी हर दिन कितनी चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में काम करते हैं।
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