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Cockroach Janata Party Protest: “शिक्षा मंत्री इस्तीफा दो” के नारों से गूंजा जंतर-मंतर

Table of Content

नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शनिवार को माहौल उस समय गरमा गया जब ‘Cockroach Janata Party’ के नेतृत्व में हजारों लोग विरोध प्रदर्शन के लिए सड़कों पर उतर आए। इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र, युवा और सामाजिक संगठनों के लोग शामिल हुए। पार्टी के फाउंडर अभिजीत भी मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने मंच से सरकार की शिक्षा नीतियों पर तीखा हमला बोला।

“Education Minister इस्तीफा दो” के लगे नारे

सुबह से ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ जुटनी शुरू हो गई थी। हाथों में पोस्टर और बैनर लिए लोग “Education Minister इस्तीफा दो”, “छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ बंद करो” और “युवाओं की आवाज सुनो” जैसे नारे लगा रहे थे। पूरे इलाके में प्रदर्शनकारियों का जोश साफ दिखाई दे रहा था।

छात्रों ने बताई अपनी परेशानियां

प्रदर्शन में शामिल छात्रों का कहना था कि लगातार बढ़ती फीस, परीक्षा व्यवस्था में बदलाव और रोजगार की कमी ने युवाओं की परेशानियां बढ़ा दी हैं। कई छात्रों ने कहा कि पढ़ाई पूरी करने के बाद भी नौकरी नहीं मिल रही, जिससे भविष्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है।

अभिजीत ने सरकार पर साधा निशाना

पार्टी फाउंडर अभिजीत ने अपने संबोधन में कहा कि यह आंदोलन किसी राजनीति से ज्यादा छात्रों और आम लोगों की आवाज है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार शिक्षा से जुड़े असली मुद्दों से ध्यान भटका रही है। अभिजीत ने कहा कि अगर छात्रों की मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन और बड़ा किया जाएगा।

सुरक्षा के रहे कड़े इंतजाम

दिल्ली पुलिस ने प्रदर्शन को देखते हुए जंतर-मंतर और आसपास के इलाकों में सुरक्षा के सख्त इंतजाम किए थे। कई जगह बैरिकेडिंग लगाई गई और अतिरिक्त पुलिस बल भी तैनात रहा। हालांकि प्रदर्शन शांतिपूर्ण तरीके से चलता रहा।

सोशल मीडिया पर भी ट्रेंड हुआ प्रदर्शन

सोशल मीडिया पर भी यह प्रदर्शन तेजी से चर्चा में आ गया। #JantarMantarProtest और #EducationMinisterResign जैसे हैशटैग ट्रेंड करते नजर आए। प्रदर्शन से जुड़े वीडियो और तस्वीरें लोगों के बीच तेजी से शेयर की जा रही हैं।

आने वाले समय में बढ़ सकता है आंदोलन

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि छात्रों और युवाओं से जुड़े मुद्दे आने वाले समय में देश की राजनीति में बड़ा असर डाल सकते हैं। फिलहाल सरकार की ओर से इस प्रदर्शन पर कोई बड़ा आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।

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Yukta

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CJP

CJP Protest in Delhi: सुरक्षा के बीच 16 Metro Station बंद, बंगाल से पहुंचे 2 हजार CRPF जवान

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में CJP (Committee for Justice and Peace) के प्रदर्शन ने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है। बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों के जुटने की संभावना को देखते हुए प्रशासन ने पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी है। एहतियात के तौर पर 16 मेट्रो स्टेशनों को अस्थायी रूप से बंद किया गया है, जबकि पश्चिम बंगाल से करीब 2,000 CRPF जवानों को दिल्ली बुलाया गया है। इस बीच आंदोलन से जुड़े पक्षों की ओर से बातचीत की संभावना भी जताई गई है, जिससे हालात सामान्य होने की उम्मीद बढ़ी है। राजधानी में हाई अलर्ट, सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क दिल्ली पुलिस, अर्धसैनिक बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियां प्रदर्शन को लेकर पूरी तरह अलर्ट पर हैं। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। कई स्थानों पर बैरिकेडिंग की गई है और सरकारी भवनों, संसद क्षेत्र तथा प्रमुख संस्थानों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए ड्रोन कैमरों, सीसीटीवी और क्विक रिस्पॉन्स टीमों की भी मदद ली जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना उनकी पहली प्राथमिकता है। 16 Metro Station बंद, यात्रियों को पहले से यात्रा की सलाह प्रदर्शन के असर को देखते हुए दिल्ली मेट्रो के 16 स्टेशनों के प्रवेश और निकास द्वार अस्थायी रूप से बंद कर दिए गए हैं। कुछ स्टेशनों पर ट्रेनें गुजर रही हैं, लेकिन वहां यात्रियों के चढ़ने और उतरने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा, राजधानी के कई प्रमुख मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन लागू किया गया है। ऐसे में रोजाना यात्रा करने वाले लोगों को घर से निकलने से पहले ट्रैफिक और मेट्रो की ताजा जानकारी देखने की सलाह दी गई है। बंगाल से पहुंचे 2 हजार CRPF जवान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पश्चिम बंगाल से लगभग 2,000 CRPF जवान दिल्ली भेजे गए हैं। इन जवानों को प्रदर्शन स्थलों, संवेदनशील क्षेत्रों और महत्वपूर्ण सरकारी परिसरों के आसपास तैनात किया गया है। सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह कदम पूरी तरह एहतियाती है और शांति बनाए रखने के उद्देश्य से उठाया गया है। प्रदर्शनकारियों की मांगों पर बना हुआ है गतिरोध प्रदर्शन में शामिल संगठनों का कहना है कि वे अपनी लंबित मांगों को लेकर लंबे समय से सरकार से संवाद की कोशिश कर रहे हैं। उनका आरोप है कि अब तक उनकी समस्याओं का संतोषजनक समाधान नहीं हुआ, इसलिए उन्हें विरोध प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा। प्रदर्शनकारी नेताओं का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर स्पष्ट और ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। बातचीत के लिए तैयार होने के संकेत घटनाक्रम के बीच ‘कॉकरोच पार्टी’ की ओर से बयान आया है कि सरकार बातचीत के लिए तैयार है। पार्टी का कहना है कि विवाद का समाधान केवल संवाद के जरिए ही संभव है। हालांकि सरकार की ओर से औपचारिक बातचीत कब शुरू होगी, इसे लेकर अभी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। प्रशासन की अपील दिल्ली पुलिस ने लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है। प्रशासन ने कहा है कि नागरिक केवल आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करें और यात्रा के दौरान ट्रैफिक एडवाइजरी का पालन करें। फिलहाल राजधानी में हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन सुरक्षा एजेंसियां हर गतिविधि पर लगातार नजर बनाए हुए हैं। आने वाले समय में बातचीत आगे बढ़ती है या प्रदर्शन तेज होता है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है. हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Commonwealth Games 2026

Commonwealth Games 2026: Opening Ceremony से पहले Indian Boxing Team को झटका

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 (Commonwealth Games 2026) की शुरुआत से पहले भारतीय बॉक्सिंग टीम को एक ऐसी परेशानी का सामना करना पड़ा, जिसने खिलाड़ियों की तैयारियों पर असर डाल दिया। बेलफास्ट (आयरलैंड) से स्कॉटलैंड के ग्लासगो रवाना हुई टीम का जरूरी सामान एयरपोर्ट पर ही छूट गया। इसमें खिलाड़ियों की ट्रेनिंग किट, बॉक्सिंग गियर और ओपनिंग सेरेमनी (Opening Ceremony) के लिए निर्धारित आधिकारिक ड्रेस भी शामिल हैं। मुकाबलों से ठीक पहले हुई इस घटना ने खिलाड़ियों और टीम प्रबंधन दोनों की चिंता बढ़ा दी है। हालांकि अधिकारियों का कहना है कि सामान जल्द से जल्द खिलाड़ियों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। कैसे हुआ पूरा मामला? भारतीय बॉक्सिंग टीम पिछले कुछ दिनों से बेलफास्ट में विशेष प्रशिक्षण शिविर में हिस्सा ले रही थी। कैंप खत्म होने के बाद टीम ग्लासगो पहुंची, लेकिन एयरपोर्ट पर सामान का इंतजार करते-करते खिलाड़ियों को पता चला कि उनके कई बैग विमान में लोड ही नहीं किए गए थे। बताया जा रहा है कि जिस विमान से टीम ने यात्रा की, उसकी कार्गो क्षमता सीमित थी। इसी वजह से कई खिलाड़ियों और अधिकारियों का सामान बेलफास्ट एयरपोर्ट पर ही रह गया। एयरलाइन ने बाद में सामान को अगली उपलब्ध उड़ान से भेजने की प्रक्रिया शुरू की। इन खिलाड़ियों का सामान नहीं पहुंचा रिपोर्ट्स के मुताबिक जिन खिलाड़ियों और अधिकारियों का सामान पीछे रह गया, उनमें शामिल हैं— इन खिलाड़ियों के बैग में बॉक्सिंग ग्लव्स, ट्रेनिंग किट, निजी सामान और उद्घाटन समारोह में पहनने वाली आधिकारिक ड्रेस रखी हुई थी। Opening Ceremony से पहले बढ़ी चिंता कॉमनवेल्थ गेम्स का उद्घाटन समारोह 23 जुलाई को आयोजित होना है, जबकि बॉक्सिंग प्रतियोगिता अगले ही दिन से शुरू होगी। ऐसे में खिलाड़ियों के पास अभ्यास और अंतिम तैयारियों के लिए सीमित समय बचा है। यदि सामान समय पर नहीं पहुंचता, तो खिलाड़ियों को नए उपकरण और ड्रेस की व्यवस्था करनी पड़ सकती है। हालांकि भारतीय दल को उम्मीद है कि एयरलाइन जल्द ही पूरा सामान ग्लासगो पहुंचा देगी। दूसरी बार सामने आई ऐसी समस्या भारतीय बॉक्सिंग टीम के साथ यह पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले दोहा से बेलफास्ट की यात्रा के दौरान भी कुछ खिलाड़ियों का सामान निर्धारित समय पर नहीं पहुंचा था। लगातार दूसरी बार ऐसी स्थिति बनने से टीम प्रबंधन ने लॉजिस्टिक व्यवस्था को लेकर चिंता जताई है। रहने की व्यवस्था को लेकर भी सवाल सिर्फ सामान ही नहीं, बल्कि टीम की आवास व्यवस्था भी चर्चा में है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार महिला टीम की कोच को खिलाड़ियों से अलग होटल में ठहराया गया है। इससे खिलाड़ियों और कोच के बीच समन्वय प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। हालांकि भारतीय ओलंपिक संघ और टीम अधिकारी इन सभी मुद्दों को जल्द सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं ताकि खिलाड़ियों का पूरा ध्यान प्रतियोगिता पर बना रहे। भारत को बॉक्सिंग से बड़ी उम्मीद कॉमनवेल्थ गेम्स में भारतीय बॉक्सिंग टीम हमेशा मजबूत दावेदार रही है। इस बार भी टीम से कई पदकों की उम्मीद की जा रही है। अनुभवी और युवा मुक्केबाज शानदार फॉर्म में हैं और उनका लक्ष्य देश के लिए अधिक से अधिक पदक जीतना है। शुरुआती परेशानियों के बावजूद खिलाड़ियों का मनोबल ऊंचा है। टीम का विश्वास है कि जैसे ही सामान पहुंच जाएगा, वे पूरी तैयारी के साथ रिंग में उतरेंगे और भारत का नाम रोशन करने की कोशिश करेंगे.
Sikkim

Sikkim Tunnel Accident: लैंडस्लाइड के बाद 20 मजदूरों की मौत, Methane Gas से Rescue Operation प्रभावित

Sikkim में निर्माणाधीन टनल पर हुआ भीषण Landslide पूरे देश को झकझोर देने वाला साबित हुआ है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 20 मजदूरों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 5 मजदूर अब भी लापता हैं। कई दिनों से लगातार चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के बावजूद खराब मौसम, भारी मलबा और टनल के भीतर फैली मीथेन गैस (Methane Gas) राहत कार्य में सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। रेस्क्यू टीम के अधिकारियों का कहना है कि हर पल जोखिम बढ़ रहा है, लेकिन लापता मजदूरों तक पहुंचने के लिए अभियान बिना रुके जारी है। कैसे हुआ Sikkim Tunnel Landslide? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्र में अचानक भूस्खलन हुआ। देखते ही देखते बड़ी मात्रा में मलबा निर्माणाधीन टनल के प्रवेश मार्ग पर आ गिरा। उस समय कई मजदूर टनल के अंदर काम कर रहे थे और बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस, NDRF, SDRF और भारतीय सेना की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत अभियान शुरू किया गया। 20 शव मिले, 5 मजदूरों की तलाश अभी जारी रेस्क्यू टीम ने लगातार कई दिनों तक मलबा हटाने के बाद अब तक 20 मजदूरों के शव बाहर निकाले हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभी भी 5 मजदूरों के टनल के भीतर फंसे होने की आशंका है। हालांकि समय बीतने के साथ उम्मीदें कमजोर पड़ रही हैं, लेकिन बचाव दल का कहना है कि जब तक अंतिम मजदूर का पता नहीं चल जाता, तब तक अभियान जारी रहेगा। Methane Gas बनी सबसे बड़ी चुनौती रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान टनल के अंदर मीथेन गैस की मौजूदगी ने हालात और गंभीर बना दिए। गैस का स्तर बढ़ने से कुछ बचावकर्मियों को सांस लेने में परेशानी हुई और कई कर्मी बेहोश हो गए। इसके बाद ऑपरेशन को कुछ समय के लिए रोककर टनल में गैस की जांच की गई। अब बचाव दल विशेष ऑक्सीजन उपकरण, गैस डिटेक्टर और सुरक्षा किट के साथ अंदर प्रवेश कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बंद टनलों में मीथेन गैस का जमा होना बेहद खतरनाक होता है, क्योंकि इससे ऑक्सीजन का स्तर कम हो सकता है और विस्फोट का खतरा भी बना रहता है। युद्धस्तर पर चल रहा Rescue Operation घटनास्थल पर NDRF, SDRF, भारतीय सेना, पुलिस, प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम लगातार काम कर रही है। भारी मशीनों और आधुनिक ड्रिलिंग उपकरणों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। लगातार बारिश और पहाड़ी इलाके की कठिन परिस्थितियों के बावजूद रेस्क्यू टीम चौबीसों घंटे अभियान में जुटी हुई है। सरकार ने मांगी पूरी रिपोर्ट हादसे के बाद राज्य सरकार ने घटना की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन यह पता लगाएगा कि निर्माण कार्य के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। साथ ही मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। पूरे देश की नजर Rescue Operation पर सिक्किम का यह हादसा केवल एक निर्माण दुर्घटना नहीं, बल्कि उन मजदूर परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया। देशभर से लोग लापता मजदूरों के सुरक्षित मिलने की प्रार्थना कर रहे हैं। फिलहाल बचाव अभियान जारी है और प्रशासन का कहना है कि मौसम चाहे जितनी चुनौती पेश करे, अंतिम मजदूर तक पहुंचने की हर संभव कोशिश की जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
America

America Iran Conflict: 5 शहर बने निशाना, Pentagon ने बताया युद्ध का भारी खर्च

मध्य पूर्व में America और Iran के बीच जारी तनाव अब और गंभीर होता जा रहा है।America ने लगातार 11वीं रात ईरान के पांच शहरों में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में ड्रोन ठिकानों, सैन्य अड्डों और विमान हैंगर को निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, अमेरिकी रक्षा विभाग ने बताया है कि इस सैन्य अभियान पर अब तक 37.5 अरब डॉलर (करीब ₹3.6 लाख करोड़) से अधिक खर्च हो चुका है। लगातार बढ़ते हमलों ने एक बार फिर पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ईरान के पांच शहरों में America की Airstrike America सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ताजा कार्रवाई में Iran के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर सटीक एयरस्ट्राइक की गई। इन हमलों का उद्देश्य ईरान की ड्रोन क्षमता और सैन्य नेटवर्क को कमजोर करना बताया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, जिन इलाकों को निशाना बनाया गया वहां ड्रोन स्टोरेज, एयरक्राफ्ट हैंगर और सैन्य उपकरण मौजूद थे। हालांकि ईरान ने अभी तक हमलों से हुए नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है। लगातार 11वीं रात जारी रहा हमला अमेरिका का यह अभियान लगातार 11वीं रात तक जारी रहा। पिछले कई दिनों से दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई तेज होती जा रही है। जहां एक ओर अमेरिका अपने अभियान को आतंकवाद और सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है, वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बता रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात इसी तरह बने रहे तो आने वाले दिनों में संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है। युद्ध पर अब तक ₹3.6 लाख करोड़ से ज्यादा खर्च अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) के अनुसार, ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान पर अब तक 37.5 अरब डॉलर, यानी भारतीय मुद्रा में करीब ₹3.6 लाख करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बाद अमेरिकी संसद में भी इस अभियान को लेकर सवाल उठने लगे हैं। रक्षा विभाग ने आगे की सैन्य जरूरतों को देखते हुए अतिरिक्त बजट की मांग भी की है। ट्रंप ने दिए सख्त संकेत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि यदि ईरान अपनी सैन्य गतिविधियों में कमी नहीं लाता, तो अमेरिका आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रखेगा। वहीं ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई के संकेत दिए हैं, जिससे पूरे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच फिलहाल किसी बड़े कूटनीतिक समाधान के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। दुनिया पर भी दिखने लगा असर अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर अब सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और शेयर बाजार पर भी इस युद्ध का असर पड़ने लगा है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। आगे क्या? लगातार हो रहे हवाई हमले, बढ़ता सैन्य खर्च और दोनों देशों के सख्त रुख को देखते हुए यह साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी खत्म होता नजर नहीं आ रहा। यदि जल्द कोई कूटनीतिक पहल नहीं होती, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान अगला कदम क्या उठाते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Monsoon Session

Monsoon Session Black Dress में दिखा विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन, Rahul Gandhi ने सरकार को घेरा

संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) में सियासी गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। विपक्ष ने अपने विरोध प्रदर्शन को और तेज करते हुए मंगलवार को संसद परिसर में शक्ति प्रदर्शन किया। INDIA गठबंधन के लगभग सभी सांसद काले कपड़ों में संसद पहुंचे और केंद्र सरकार के खिलाफ एकजुटता दिखाई। इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विरोध प्रदर्शन की अगुवाई की। विपक्ष का कहना है कि देश से जुड़े कई अहम मुद्दों पर संसद में खुलकर चर्चा नहीं हो रही है। इसी को लेकर सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया और सरकार से जवाब देने की मांग उठाई। PM आवास मार्च के बाद Protest हुआ और तेज संसद में विरोध प्रदर्शन से पहले विपक्षी दल प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकाल चुके हैं। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के चलते उन्हें रास्ते में रोक दिया गया था। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने सड़क पर धरना दिया। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा बताते हुए सरकार पर सवाल उठाए थे। अब उसी विरोध का दूसरा चरण संसद परिसर में देखने को मिला, जहां विपक्ष ने काले कपड़े पहनकर अपना संदेश देने की कोशिश की। Black Dress में दिखी विपक्ष की एकजुटता मंगलवार सुबह कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी), आरजेडी और INDIA गठबंधन के अन्य दलों के सांसद काले कपड़ों में संसद पहुंचे। नेताओं ने संसद परिसर में नारेबाजी की और सरकार से विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग दोहराई। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव पूरे प्रदर्शन के दौरान सांसदों के बीच मौजूद रहे। तीनों नेताओं ने विपक्षी दलों के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ एकजुटता का संदेश दिया। किन मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना? विपक्ष का आरोप है कि बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था, चुनाव प्रक्रिया और अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर संसद में पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है। विपक्ष चाहता है कि इन मुद्दों पर सरकार सदन में विस्तृत जवाब दे। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि वह संसदीय नियमों के तहत हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन लगातार हंगामे से सदन की कार्यवाही प्रभावित हो रही है। संसद की कार्यवाही पर पड़ा असर विपक्ष के प्रदर्शन का असर संसद की कार्यवाही पर भी दिखाई दिया। लोकसभा और राज्यसभा में कई बार हंगामा हुआ, जिसके चलते कार्यवाही बाधित रही। दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने से मानसून सत्र के शुरुआती दिनों में राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है। आगे क्या होगा? INDIA गठबंधन ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर सरकार सकारात्मक रुख नहीं अपनाती है तो संसद के भीतर और बाहर विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में मानसून सत्र के और अधिक हंगामेदार रहने की संभावना है। राजनीतिक नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध कब खत्म होगा और संसद की कार्यवाही सामान्य रूप से चल पाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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