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New Labour Law नौकरी छोड़ते ही Company को 48 Hours में करना होगा FnF Payment

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नौकरी छोड़ने या अचानक नौकरी जाने के बाद सबसे बड़ी चिंता होती है — आखिरी सैलरी और बाकी बकाया पैसे कब मिलेंगे?
अब इस परेशानी पर बड़ा कानूनी बदलाव हुआ है। नए लेबर कानून के तहत कंपनियों को कर्मचारी का Full & Final (FnF) settlement सिर्फ 2 working days के भीतर पूरा करना होगा।

यह बदलाव उन लाखों कर्मचारियों के लिए राहत लेकर आया है, जिन्हें पहले resignation या termination के बाद अपने ही पैसों के लिए हफ्तों तक इंतज़ार करना पड़ता था।

क्या बदला है नए Labour Law में?

पहले ज्यादातर कंपनियां final settlement को अगले payroll cycle में डाल देती थीं। इसकी वजह से कर्मचारियों को 30 से 45 दिन, और कई बार उससे भी ज्यादा इंतजार करना पड़ता था।

अब नए नियम के मुताबिक अगर कोई कर्मचारी:

  • नौकरी छोड़ता है
  • कंपनी उसे निकालती है
  • रिटायरमेंट होता है
  • कंपनी बंद होती है
  • layoff या retrenchment होता है

तो कंपनी को 2 working days के अंदर salary और बाकी wage-related dues clear करना जरूरी होगा।

यानी exit process अब सिर्फ HR formalities नहीं, बल्कि legal compliance भी बन गया है।

Full & Final Settlement में क्या-क्या मिलेगा?

FnF settlement सिर्फ आखिरी महीने की salary नहीं होती। इसमें कई financial components शामिल होते हैं, जैसे:

  • आखिरी महीने की pending salary
  • Notice period adjustment
  • बची हुई leaves का encashment
  • Bonus और incentives
  • Reimbursements
  • Variable pay dues
  • Gratuity (अगर लागू हो)
  • PF और अन्य exit formalities

हालांकि gratuity जैसी कुछ statutory payments की अलग timeline हो सकती है, लेकिन salary-related dues जल्दी देना अनिवार्य माना जा रहा है।

Employees के लिए क्यों है बड़ी राहत?

जॉब बदलने के दौरान EMI, किराया, daily expenses और नई नौकरी के बीच का gap सबसे ज्यादा pressure बनाता है। ऐसे समय पर final settlement जल्दी मिलना employees के लिए बड़ी financial support साबित होगा।

यही वजह है कि यह नया rule खासतौर पर middle-class salaried professionals के लिए काफी राहतभरा माना जा रहा है।

इससे कंपनियों की मनमानी policies पर भी काफी हद तक रोक लगेगी।

Companies पर क्या पड़ेगा असर?

इस नियम का सीधा असर HR, payroll और finance teams पर पड़ेगा।
अब उन्हें exit clearance, leave calculation, company assets recovery और approvals जैसी प्रक्रियाओं को काफी तेज करना होगा।

जिन कंपनियों का payroll system अभी भी manual है, उनके लिए 48 घंटे में FnF settlement करना एक operational challenge बन सकता है।

अगर कंपनी 2 दिन में settlement न करे तो क्या करें?

अगर कंपनी नए नियम के बाद भी देरी करती है, तो कर्मचारी ये कदम उठा सकते हैं:

  • HR को email के जरिए written reminder भेजें
  • FnF breakup लिखित में मांगें
  • resignation acceptance mail संभालकर रखें
  • salary slips और offer letter सुरक्षित रखें
  • Labour department में शिकायत करें
  • जरूरत पड़े तो legal notice भेजें

क्यों महत्वपूर्ण है यह बदलाव?

यह नया कानून सिर्फ payment timeline नहीं बदलता, बल्कि employee dignity और financial security को भी मजबूत करता है।

नौकरी छूटने का समय पहले से ही emotionally और financially stressful होता है। ऐसे में अपने earned money के लिए लंबा इंतजार न करना कर्मचारियों के लिए बहुत बड़ी राहत है।

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Yukta

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WhatsApp, Facebook और Instagram के नए Plus फीचर्स आएंगे, यूजर्स को देना पड़ सकता है पैसा

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Twisha

Twisha Case Investigation: CBI ने तेज की जांच, गिरफ्तारी को लेकर बढ़ा Suspense

Twisha केस की जांच अब ऐसे मोड़ पर पहुंच गई है, जहां हर नई जानकारी लोगों की बेचैनी बढ़ा रही है। केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने मामले में अपनी कार्रवाई और तेज कर दी है। सूत्रों के मुताबिक, मुख्य संदिग्ध मानी जा रही गिरिबाला से लगातार पूछताछ की जा रही है और एजेंसी अब हर छोटे-बड़े सबूत को जोड़कर केस की पूरी सच्चाई सामने लाने की कोशिश में जुटी है। जांच से जुड़े अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस केस में बड़ा कदम उठाया जा सकता है। इसी वजह से गिरिबाला की गिरफ्तारी को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। हालांकि CBI की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। 3D Camera Technology से रिकॉर्ड हो रहा पूरा घर इस हाई-प्रोफाइल मामले में CBI आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रही है। जांच टीम ने घटनास्थल और घर के अंदर के हिस्सों को 3D कैमरे की मदद से रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया है। इससे पूरे घर का डिजिटल मॉडल तैयार किया जाएगा, ताकि घटना के समय की परिस्थितियों को बेहतर तरीके से समझा जा सके। सूत्रों के अनुसार, टीम घर के हर कमरे, एंट्री और एग्जिट पॉइंट, फर्नीचर की स्थिति और अन्य संदिग्ध जगहों की बारीकी से जांच कर रही है। माना जा रहा है कि इस डिजिटल रिकॉर्डिंग से जांच एजेंसी को कई अहम सुराग मिल सकते हैं। पूछताछ में सामने आ रहे नए पहलू CBI अधिकारियों ने गिरिबाला से कई दौर की पूछताछ की है। जांच एजेंसी मोबाइल डेटा, कॉल रिकॉर्ड, डिजिटल सबूत और घटनास्थल से मिले संकेतों को एक-दूसरे से जोड़कर पूरे घटनाक्रम को समझने की कोशिश कर रही है। सूत्रों का दावा है कि पूछताछ के दौरान कुछ ऐसे जवाब मिले हैं, जिन्होंने जांच को नई दिशा दी है। यही वजह है कि एजेंसी अब मामले से जुड़े हर व्यक्ति पर नजर बनाए हुए है। इलाके में बढ़ी हलचल ट्विशा केस को लेकर स्थानीय लोगों में भी काफी चर्चा है। इलाके में लगातार CBI की मौजूदगी और जांच टीम की गतिविधियों ने लोगों की उत्सुकता बढ़ा दी है। परिवार के करीबी लोगों का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि जांच के बाद जल्द सच्चाई सामने आएगी। फिलहाल CBI हर एंगल से केस की जांच कर रही है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स और तकनीकी टीम की मदद से जुटाए जा रहे सबूत आने वाले दिनों में इस मामले में बड़ा खुलासा कर सकते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
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बकरीद 2026 के मौके पर पूरे देश में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और उत्तराखंड में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। त्योहार के बीच जहां एक ओर शांति और सौहार्द बनाए रखने की कोशिश हो रही है, वहीं दूसरी ओर अलग-अलग राज्यों से कुछ चर्चित मुद्दे भी सामने आए हैं। Delhi-UP में मस्जिदों और भीड़भाड़ वाले इलाकों पर Drone से निगरानी दिल्ली और उत्तर प्रदेश में बकरीद के अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया गया है।प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में ड्रोन कैमरों की मदद से लगातार निगरानी शुरू की है। अधिकारियों के अनुसार, किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी की गई है ताकि त्योहार शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो सके। West Bengal में Security Tight, Flag March से बढ़ा Confidence पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में सुरक्षा बलों ने फ्लैग मार्च निकाला। इसका मकसद लोगों में भरोसा बढ़ाना और किसी भी तरह की अफवाह या तनाव को रोकना है। संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस की अतिरिक्त तैनाती की गई है और लगातार पेट्रोलिंग जारी है। Uttarakhand में Cow को National Animal बनाने की मांग पर चर्चा उत्तराखंड में बकरीद के दौरान एक अलग ही मुद्दा चर्चा में रहा। कुछ लोगों ने गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग उठाई है। इस मांग के बाद स्थानीय स्तर पर बहस शुरू हो गई है और अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। प्रशासन फिलहाल स्थिति पर नजर बनाए हुए है। Administration Alert: Peaceful Celebration की अपील देशभर के प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बकरीद को शांति, भाईचारे और आपसी सम्मान के साथ मनाया जाए। Administration Alert: Peaceful Celebration की अपील देशभर के प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि बकरीद को शांति, भाईचारे और आपसी सम्मान के साथ मनाया जाए।

गुना में पारिवारिक विवाद से परेशान विवाहिता मोबाइल टावर पर चढ़ी, 3 घंटे बाद प्रशासन ने सुरक्षित उतारा

मध्य प्रदेश के गुना जिले में गुरुवार सुबह उस समय हड़कंप मच गया, जब एक विवाहिता पारिवारिक विवाद से परेशान होकर गांव के मोबाइल टावर पर चढ़ गई। करीब तीन घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ड्रामे के बाद पुलिस और प्रशासन की टीम ने समझाइश देकर महिला को सुरक्षित नीचे उतार लिया। मामला गुना जिले की कुंभराज तहसील के ग्राम खेजरा रामा का है। जानकारी के अनुसार, 23 वर्षीय निकिता की शादी करीब तीन साल पहले कुलदीप मीना से हुई थी। बताया जा रहा है कि ससुराल में लंबे समय से पारिवारिक विवाद चल रहा था। इसी बात से नाराज होकर गुरुवार सुबह करीब 5 बजे निकिता गांव में लगे मोबाइल टावर पर चढ़ गई। ग्रामीणों ने दी पुलिस को सूचना सुबह ग्रामीणों की नजर महिला पर पड़ी तो गांव में अफरा-तफरी मच गई। लोगों ने तुरंत पुलिस और प्रशासन को सूचना दी। खबर मिलते ही कुंभराज तहसीलदार कमल मंडेलिया, थाना प्रभारी पंकज त्यागी और पटवारी प्रवीण सिंह राणा टीम के साथ मौके पर पहुंचे। स्थिति को देखते हुए नगर परिषद और स्वास्थ्य विभाग की टीम को भी मौके पर बुलाया गया। समझाइश से शांत हुआ मामला महिला काफी नाराज थी और नीचे आने को तैयार नहीं हो रही थी। ऐसे में प्रशासन ने बल प्रयोग करने के बजाय बातचीत का रास्ता अपनाया। अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के जरिए महिला से लगातार संवाद किया और भरोसा दिलाया कि उसकी हर समस्या सुनी जाएगी। अधिकारियों ने महिला से कहा कि उसकी शिकायतों पर प्रशासन और कानून के दायरे में रहकर उचित कार्रवाई की जाएगी। लगातार समझाइश और भरोसे के बाद महिला का गुस्सा शांत हुआ और वह धीरे-धीरे टावर से नीचे उतर आई। सुरक्षित नीचे उतरने पर लोगों ने ली राहत की सांस महिला के सुरक्षित नीचे आने के बाद मौके पर मौजूद ग्रामीणों और अधिकारियों ने राहत की सांस ली। स्वास्थ्य विभाग की टीम ने तुरंत महिला का प्राथमिक स्वास्थ्य परीक्षण किया। घटना के बाद गांव में काफी देर तक लोगों की भीड़ जुटी रही। www.deshharpal.com पर पढ़ें देश-दुनिया और प्रदेश की ताजा खबरें।

ईद पर इंदौर से दिखी गंगा-जमुनी तहजीब, शहर काजी ने गाय को राष्ट्रीय धरोहर बनाने की उठाई मांग

ईद के मौके पर देश के सबसे स्वच्छ शहर इंदौर से गंगा-जमुनी तहजीब और सांप्रदायिक सौहार्द की खूबसूरत तस्वीर सामने आई। सदर बाजार स्थित ईदगाह में नमाज से पहले शहर काजी डॉ. इशरत अली ने भाईचारे, पर्यावरण संरक्षण और नशे से दूर रहने का संदेश दिया। उन्होंने खुले मंच से गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की, जिसका वहां मौजूद हजारों नमाजियों ने हाथ उठाकर समर्थन किया। इसके बाद शांतिपूर्ण माहौल में ईद की नमाज अदा की गई। गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग शहर काजी डॉ. इशरत अली ने कहा कि गाय को दूसरी कौम के लोग बेहद सम्मान की नजर से देखते हैं। मुसलमानों पर अक्सर गोवंश को लेकर आरोप लगाए जाते हैं। उन्होंने कहा कि अब समय आ गया है कि गाय को राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए, ताकि उसके वध पर पूरी तरह रोक लग सके। पानी बचाने और पर्यावरण बचाने की अपील अपने संबोधन में शहर काजी ने लोगों से पानी बचाने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि बारिश के पानी को जमीन में उतारना हर नागरिक की जिम्मेदारी है। सिर्फ सरकार या प्रशासन के भरोसे नहीं रहना चाहिए। उन्होंने लोगों से ज्यादा से ज्यादा पेड़ लगाने की भी अपील की। नशे के कारोबार पर जताई चिंता शहर काजी ने नशे के बढ़ते कारोबार पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि समाज के कुछ लोग खुद नशा बेच रहे हैं, जिससे युवा पीढ़ी बर्बाद हो रही है। उन्होंने कहा कि इंदौर में नशे का मुद्दा वे लगातार उठाते रहे हैं। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय भी इस विषय को गंभीरता से उठा चुके हैं। इंदौर की ईद एक और वजह से खास रही। यहां पिछले 50 वर्षों से एक हिंदू परिवार शहर काजी को उनके घर से ईदगाह तक लाने और वापस छोड़ने की परंपरा निभा रहा है। 50 साल पुरानी परंपरा बनी मिसाल इस बार भी सत्यनारायण सलवाडिया और उनके परिवार ने शहर काजी का फूल-मालाओं से स्वागत किया और उन्हें ससम्मान विशेष रूप से सजाई गई बग्घी में ईदगाह तक पहुंचाया। इस परंपरा को लोगों ने गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल बताया। खंडवा में भी उठी गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग बकरीद के मौके पर खंडवा के मुख्य ईदगाह समेत करीब 40 मस्जिदों में मुल्क की खुशहाली के लिए दुआ की गई। शहर काजी सैयद निसार अली ने केंद्र सरकार से गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग की। उन्होंने कहा कि खंडवा के मुस्लिम समाज ने वर्षों से हिंदू समाज की भावनाओं का सम्मान करते हुए गोवंश की कुर्बानी नहीं दी है। साथ ही उन्होंने गोवंश के नाम पर होने वाली मॉब लिंचिंग और अवैध कारोबार पर सख्त कार्रवाई की मांग भी की। धीरेंद्र शास्त्री ने भी किया समर्थन बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने भी गाय को राष्ट्र माता घोषित करने की मांग को लेकर 27 जुलाई से राष्ट्रव्यापी अभियान चलाने की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि देशभर में हस्ताक्षर अभियान चलाया जाएगा और जिलों में ज्ञापन सौंपे जाएंगे। धीरेंद्र शास्त्री ने कहा कि अब देश में इस मुद्दे को लेकर माहौल बदल रहा है और सभी समाजों से समर्थन मिल रहा है www.deshharpal.com पर पढ़ें देश-दुनिया और प्रदेश की ताजा खबरें।

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