प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi) ने 23 साल बाद साइप्रस (Cyprus) की ऐतिहासिक यात्रा की है। यह यात्रा सिर्फ औपचारिक नहीं बल्कि भारत की बदलती वैश्विक नीति और रणनीतिक सोच का प्रतीक बन गई है। इस दौरे से भारत और साइप्रस के रिश्ते मजबूत हुए हैं, साथ ही टर्की (Turkey) को भी अप्रत्यक्ष रूप से सख्त संदेश दिया गया है।
23 साल बाद भारत से PM का Cyprus दौरा
यह दौरा ऐतिहासिक इसलिए भी है क्योंकि पिछली बार भारत के किसी प्रधानमंत्री ने साल 2002 में Cyprus का दौरा किया था। 23 वर्षों बाद PM Modi की मौजूदगी ने भारत-साइप्रस संबंधों को नई ऊर्जा दी है।
Turkey को कूटनीतिक संदेश
Cyprus और टर्की के बीच लंबे समय से क्षेत्रीय तनाव है। हाल ही में टर्की ने पाकिस्तान का समर्थन किया था, जिससे भारत असहज था। PM Modi की यह यात्रा इस तनाव के बीच भारत की रणनीतिक स्थिति को मजबूत करती है और टर्की को स्पष्ट संदेश देती है कि भारत अपने हितों को प्राथमिकता देता है।
EU Presidency की तैयारी में साइप्रस, भारत बना सहयोगी
साइप्रस 2026 की शुरुआत में यूरोपीय संघ (EU) काउंसिल की अध्यक्षता करेगा। ऐसे समय में भारत का साइप्रस के साथ गहरे रिश्ते बनाना भारत-यूरोप रिश्तों को मजबूती देने का संकेत है।
IMEC Corridor में साइप्रस की भूमिका अहम
India-Middle East-Europe Economic Corridor (IMEC) भारत की सबसे महत्वाकांक्षी परियोजनाओं में से एक है। इस यात्रा में IMEC को लेकर भी चर्चा हुई, जिसमें साइप्रस को एक महत्वपूर्ण समुद्री गेटवे (Gateway) के रूप में देखा जा रहा है।
Business Roundtable: निवेश और तकनीकी सहयोग पर चर्चा
Limassol में आयोजित बिजनेस मीटिंग में भारत और साइप्रस के बिजनेस लीडर्स ने Finance, Technology, Tourism, Defence, और Logistics जैसे क्षेत्रों में निवेश और सहयोग की संभावनाएं तलाशीं। भारत-साइप्रस-ग्रीस त्रिकोणीय साझेदारी की भी शुरुआत हुई।
Energy और Defence में strategic सहयोग
पूर्वी भूमध्यसागर में स्थित साइप्रस के पास Natural Gas के बड़े भंडार हैं। भारत ने यहां एनर्जी सेक्टर में निवेश और डिफेंस कोऑपरेशन पर चर्चा की। इससे भारत की एनर्जी सुरक्षा और सामरिक साझेदारी मजबूत होगी।
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