मध्यप्रदेश सरकार (MP Government) के वेतन भुगतान सिस्टम में आई गड़बड़ी से लगभग 50,000 कर्मचारियों (Government Employees) को बीते कई महीनों से सैलरी नहीं मिल पाई है। इसका सीधा असर ₹230 करोड़ प्रति माह (Monthly Salary Hold) की सरकारी राशि पर पड़ा है, जिससे अब तक करीब ₹1380 करोड़ से अधिक की रकम रोकी जा चुकी है।
क्या है MP Salary Scam का मामला?
वित्त विभाग (Finance Department) ने इसे घोटाला (Scam) मानने से इनकार करते हुए कहा है कि यह “Ghost Employees” का मामला नहीं, बल्कि डेटा एंट्री (Data Entry Error) में हुई चूक और तकनीकी खामी का नतीजा है।
सरकार की रिपोर्ट के अनुसार जिन 50,000 कर्मचारियों की सैलरी रोकी गई, उनमें:
- 21,461 कर्मचारी अब जीवित नहीं हैं
- 10,983 ने नौकरी छोड़ी, रिटायर या बर्खास्त हुए
- 4,654 अन्य विभागों में ट्रांसफर पर हैं
- 483 सस्पेंड किए गए हैं
- 1,656 कर्मचारियों की सैलरी सरकारी आदेशों के तहत रोकी गई
- 2,342 “फ्री पूल” में हैं (कोई डिपार्टमेंट अलॉट नहीं)
- 1,022 तकनीकी कारणों से रोके गए
- 2,247 केस में अन्य कारण
MP Government की कार्रवाई
सरकार ने सभी जिलों के 6,000+ DDOs (Drawing and Disbursement Officers) को निर्देश दिए हैं कि वे 15 दिनों के अंदर हर कर्मचारी की स्थिति स्पष्ट करें और रिपोर्ट सौंपें। जिन विभागों ने सही डेटा अपलोड नहीं किया, उन्हें कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है।
Financial Loss: ₹1380 Crore का सवाल
हर महीने अगर ₹230 करोड़ की सैलरी फंसी रही तो 6 महीने में ₹1380 करोड़ का नुकसान राज्य सरकार को हुआ है। अब यह जांच का विषय है कि ये पैसा सरकारी अकाउंट में है, ब्लॉक है या कहीं और गया?
आगे की योजना: IFMIS System Update
सरकार अब IFMIS (Integrated Financial Management Information System) को अपग्रेड करने की दिशा में काम कर रही है ताकि भविष्य में ऐसा दोबारा न हो। ऑटोमैटिक एग्जिट एंट्री, सस्पेंशन रिकॉर्ड और मृत्यु की सूचना अपडेट को मैन्युअल न रखते हुए डिजिटल इंटीग्रेशन की योजना बनाई जा रही है।
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