यमन में मौत की सजा का सामना कर रहीं भारतीय नर्स निमिषा प्रिया (Nimisha Priya) को फिलहाल बड़ी राहत मिली है। 16 जुलाई को होने वाली फांसी स्थगित (postponed) कर दी गई है। यह फैसला भारत सरकार, धार्मिक नेताओं और अंतरराष्ट्रीय प्रयासों के चलते आया है। अब Blood Money (दिया) के जरिए निमिषा की जान बचाने की कोशिशें तेज़ हो गई हैं।
Nimisha Priya Case Background – क्या है पूरा मामला?
केरल की निवासी निमिषा प्रिया, एक नर्स थीं जो 2011 में नर्सिंग कार्य के लिए यमन गई थीं। वहां उन्होंने एक यमनी नागरिक के साथ मिलकर मेडिकल क्लिनिक खोला था। लेकिन विवाद और प्रताड़ना के चलते मामला बिगड़ गया और 2017 में उस व्यक्ति की हत्या हो गई।
यमनी कोर्ट ने निमिषा को मर्डर केस में मौत की सज़ा (death sentence) दी, और वह तब से यमन की सना जेल में बंद हैं।
Religious Diplomacy ने कैसे बचाई जान?
- Indian Sunni Cleric का हस्तक्षेप:
भारत के सुन्नी धर्मगुरु कंठापुरम ए.पी. अबूबकर मुसलियार और यमन के प्रसिद्ध सूफी स्कॉलर शेख हबीब उमर बिन हाफिज़ ने मामले में हस्तक्षेप किया। - Blood Money की पेशकश:
शरिया कानून के तहत, अगर मृतक का परिवार दिया (Blood Money) स्वीकार कर ले, तो आरोपी की फांसी टाली जा सकती है।
Nimisha Priya की ओर से $1 मिलियन (₹8.6 करोड़) की राशि की पेशकश की गई है। - मृतक परिवार से बातचीत:
शुरू में मृतक का परिवार ब्लड मनी लेने को तैयार नहीं था, लेकिन अब बातचीत का दरवाज़ा खुल चुका है, जिससे उम्मीदें बढ़ गई हैं।
India Government की भूमिका
- भारत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि यमन में कोई मान्यता प्राप्त सरकार नहीं है, वहां हूती विद्रोही सत्ता में हैं, जिससे कूटनीतिक हस्तक्षेप सीमित हो गया है।
- सरकार और गैर-सरकारी संगठनों ने स्थानीय हौथी प्रशासन, जेल अधिकारियों और धार्मिक नेताओं से संपर्क किया, जिससे फांसी पर रोक लगाई जा सकी।
परिवार की भावुक अपील
Nimisha Priya की मां और 9 साल की बेटी ने भारत के लोगों और सरकार से अपील की है कि ब्लड मनी के लिए आर्थिक मदद करें।
एक फंड रेज़िंग कैंपेन भी शुरू किया गया है जिससे राशि जुटाई जा सके।
