संसद के मॉनसून सत्र (Monsoon Session 2026) की शुरुआत सोमवार को भारी हंगामे के साथ हुई। लोकसभा की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने कई अहम राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर सरकार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। लगातार नारेबाजी और वेल में पहुंचकर प्रदर्शन करने के कारण सदन की कार्यवाही सामान्य रूप से नहीं चल सकी। आखिरकार लोकसभा अध्यक्ष को कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी।
पहले ही दिन गरमाया संसद का माहौल
सत्र के पहले दिन विपक्ष पूरी तैयारी के साथ सदन पहुंचा। विपक्षी सांसदों ने विभिन्न मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगते हुए तत्काल चर्चा की मांग रखी। सदन में शोर-शराबा बढ़ने के बाद प्रश्नकाल भी प्रभावित हुआ और कार्यवाही बार-बार बाधित होती रही।
लोकसभा अध्यक्ष ने कई बार सभी सांसदों से अपनी सीटों पर लौटने और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की, लेकिन हंगामा नहीं थमा। इसके बाद कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
इन मुद्दों पर सरकार को घेर रहा विपक्ष
मॉनसून सत्र के पहले दिन विपक्ष ने कई महत्वपूर्ण विषयों को लेकर सरकार पर निशाना साधा। इनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं—
- राम मंदिर चढ़ावा चोरी का मामला
- NEET परीक्षा विवाद
- जंतर-मंतर पर प्रदर्शन
- महंगाई और बेरोजगारी
- किसानों से जुड़े मुद्दे
- कानून-व्यवस्था और अन्य राष्ट्रीय विषय
विपक्ष का कहना है कि इन सभी मुद्दों पर सरकार को संसद में स्पष्ट जवाब देना चाहिए और विस्तृत चर्चा करानी चाहिए।
सरकार का फोकस महत्वपूर्ण विधेयकों पर
दूसरी ओर केंद्र सरकार मॉनसून सत्र के दौरान कई अहम विधेयक और नीतिगत प्रस्ताव सदन में पेश करने की तैयारी कर चुकी है। सरकार का कहना है कि वह विकास, अर्थव्यवस्था, प्रशासनिक सुधार और जनहित से जुड़े विषयों पर संसद में चर्चा चाहती है। हालांकि पहले ही दिन हुए हंगामे ने सरकार के विधायी एजेंडे की शुरुआत को प्रभावित किया।
पूरे सत्र में जारी रह सकता है राजनीतिक टकराव
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बार का मॉनसून सत्र काफी हंगामेदार रहने वाला है। विपक्ष जहां लगातार जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति बना रहा है, वहीं सरकार अपने विधेयकों को पारित कराने पर जोर दे रही है। ऐसे में आने वाले दिनों में संसद के भीतर तीखी बहस और राजनीतिक टकराव देखने को मिल सकता है।
संसद के बाहर भी जारी रहा विरोध
संसद परिसर के बाहर भी विपक्षी नेताओं ने मीडिया से बातचीत के दौरान सरकार पर कई सवाल उठाए। उनका कहना है कि वे आम जनता से जुड़े मुद्दों को संसद के भीतर और बाहर दोनों जगह मजबूती से उठाते रहेंगे। वहीं सरकार ने सभी दलों से अपील की है कि लोकतांत्रिक परंपराओं का सम्मान करते हुए सदन की कार्यवाही सुचारू रूप से चलाने में सहयोग करें।
क्या रहा पहले दिन का निष्कर्ष?
मॉनसून सत्र का पहला दिन राजनीतिक गर्माहट से भरा रहा। विपक्ष के हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही दोपहर 12 बजे तक स्थगित करनी पड़ी और कई महत्वपूर्ण कामकाज प्रभावित हुए। अब सभी की नजर अगले कुछ दिनों पर है कि संसद में चर्चा का माहौल बनता है या फिर हंगामे का सिलसिला जारी रहता है।
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