23 सितंबर 2025 को भारतीय Rupee अमेरिकी डॉलर के मुकाबले ₹88.53 के ऐतिहासिक निचले स्तर पर पहुंच गया। वित्तीय विशेषज्ञों का कहना है कि यह गिरावट कई वैश्विक और घरेलू कारणों के कारण हुई है।
अमेरिकी वीज़ा शुल्क और H-1B Visa का असर
हाल ही में अमेरिका ने H-1B वीज़ा शुल्क में बढ़ोतरी की है, जिससे भारतीय आईटी पेशेवरों के लिए अमेरिका में काम करना महंगा हो गया है। इस कदम ने विदेशी निवेशकों का विश्वास कम कर दिया और विदेशी पूंजी प्रवाह में कमी आई है।
अमेरिका के टैरिफ से निर्यात प्रभावित
अमेरिका द्वारा भारतीय उत्पादों पर 50% तक के उच्च टैरिफ लगाने से भारतीय निर्यात प्रभावित हुआ है। इससे विदेशी मुद्रा का प्रवाह और घट गया और बाजार पर दबाव बढ़ा।
RBI का हस्तक्षेप और रुपया दबाव में
रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने डॉलर की बिक्री के माध्यम से हस्तक्षेप किया, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में Rupee दबाव में बना हुआ है। इस कमजोरी का असर आयातित वस्तुओं, शिक्षा और पर्यटन पर भी पड़ेगा।
आगे की संभावनाएं
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर अमेरिकी नीतियों में बदलाव नहीं होता है, तो रुपया और कमजोर हो सकता है। वहीं, RBI की हस्तक्षेप नीतियों और वैश्विक मुद्रा प्रवाह में सुधार से कुछ राहत मिलने की संभावना है।
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