महाराष्ट्र की राजनीति एक बार फिर बड़े घटनाक्रम की ओर बढ़ती दिखाई दे रही है। शिवसेना (UBT) के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान अब खुलकर सामने आती नजर आ रही है। दिल्ली में आयोजित संसदीय दल की अहम बैठक में पार्टी के 9 सांसदों में से केवल 3 सांसदों का पहुंचना कई सवाल खड़े कर रहा है। इस बैठक में राज्यसभा सांसद संजय राउत मौजूद रहे, लेकिन अधिकांश सांसदों की गैरमौजूदगी ने राजनीतिक गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
सूत्रों के अनुसार, पार्टी के कई सांसद नेतृत्व की कार्यशैली और भविष्य की राजनीतिक दिशा को लेकर असंतुष्ट बताए जा रहे हैं। यही वजह है कि अब उद्धव ठाकरे गुट में एक और बड़ी टूट की संभावना पर चर्चा तेज हो गई है।
बैठक में कम उपस्थिति ने बढ़ाई चिंता
संसदीय दल की बैठक को संगठनात्मक दृष्टि से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था। ऐसे में अधिकांश सांसदों का बैठक से दूर रहना केवल सामान्य घटना नहीं माना जा रहा। राजनीतिक जानकार इसे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष का संकेत बता रहे हैं।
चर्चा यह भी है कि लोकसभा में UBT के 9 सांसदों में से 6 सांसद अलग रुख अपना सकते हैं। हालांकि अभी तक किसी सांसद ने सार्वजनिक रूप से बगावत का ऐलान नहीं किया है, लेकिन घटनाक्रम तेजी से बदलता नजर आ रहा है।
संजय राउत ने किया डैमेज कंट्रोल
बैठक के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए संजय राउत ने पार्टी में किसी भी प्रकार की टूट की खबरों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि शिवसेना UBT पूरी तरह एकजुट है और विरोधी दल जानबूझकर भ्रम फैलाने का प्रयास कर रहे हैं।
राउत ने दावा किया कि सभी सांसद पार्टी नेतृत्व के संपर्क में हैं और जल्द ही स्थिति स्पष्ट हो जाएगी। हालांकि राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि केवल बयानबाजी से पार्टी के भीतर की नाराजगी को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
उद्धव ठाकरे के सामने बढ़ी राजनीतिक चुनौती
एकनाथ शिंदे की बगावत के बाद शिवसेना पहले ही बड़े विभाजन का सामना कर चुकी है। ऐसे में यदि सांसदों का एक बड़ा वर्ग भी पार्टी से दूरी बनाता है, तो यह उद्धव ठाकरे के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है।
आने वाले समय में महाराष्ट्र की राजनीति के साथ-साथ स्थानीय निकाय चुनावों और विपक्षी गठबंधन की रणनीति पर भी इसका असर पड़ सकता है। पार्टी की संसदीय ताकत कमजोर होने की स्थिति में उद्धव ठाकरे के राजनीतिक समीकरण प्रभावित हो सकते हैं।
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