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Varanasi Bulldozer Action: 200 साल पुरानी मस्जिद पर प्रशासन की बड़ी कार्रवाई

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Varanasi (काशी) में देर रात प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई करते हुए करीब 200 साल पुरानी मस्जिद को ढहा दिया। यह पूरा ऑपरेशन तेजी से सिर्फ 22 मिनट में पूरा किया गया, जिससे इलाके में देर रात हलचल मच गई।

आधी रात 1000 जवानों की तैनाती, पूरा इलाका सील

सूत्रों के अनुसार, कार्रवाई से पहले पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया था। करीब 1000 पुलिसकर्मी मौके पर तैनात किए गए और आसपास की गलियों को पूरी तरह खाली करा दिया गया ताकि किसी भी तरह का विरोध या भीड़ जमा न हो सके

5 बुलडोजर से चला ध्वस्तीकरण अभियान

कार्रवाई के दौरान 5 बुलडोजर लगाए गए जिन्होंने मस्जिद को ढहाने का काम किया। प्रशासन ने पूरे ऑपरेशन को बेहद नियंत्रित और योजनाबद्ध तरीके से अंजाम दिया।

रातों-रात हटाया गया मलबा, सुबह तक साफ हुआ इलाका

मस्जिद गिराए जाने के बाद मलबा भी तुरंत हटवा दिया गया, जिससे सुबह तक पूरा इलाका साफ दिखाई दिया। प्रशासन की कोशिश रही कि स्थिति जल्द से जल्द सामान्य हो जाए।

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Yukta

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Sikkim

Sikkim Tunnel Accident: लैंडस्लाइड के बाद 20 मजदूरों की मौत, Methane Gas से Rescue Operation प्रभावित

Sikkim में निर्माणाधीन टनल पर हुआ भीषण Landslide पूरे देश को झकझोर देने वाला साबित हुआ है। इस दर्दनाक हादसे में अब तक 20 मजदूरों के शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि 5 मजदूर अब भी लापता हैं। कई दिनों से लगातार चल रहे रेस्क्यू ऑपरेशन के बावजूद खराब मौसम, भारी मलबा और टनल के भीतर फैली मीथेन गैस (Methane Gas) राहत कार्य में सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है। रेस्क्यू टीम के अधिकारियों का कहना है कि हर पल जोखिम बढ़ रहा है, लेकिन लापता मजदूरों तक पहुंचने के लिए अभियान बिना रुके जारी है। कैसे हुआ Sikkim Tunnel Landslide? प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, लगातार हो रही भारी बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्र में अचानक भूस्खलन हुआ। देखते ही देखते बड़ी मात्रा में मलबा निर्माणाधीन टनल के प्रवेश मार्ग पर आ गिरा। उस समय कई मजदूर टनल के अंदर काम कर रहे थे और बाहर निकलने का रास्ता पूरी तरह बंद हो गया। हादसे की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन, पुलिस, NDRF, SDRF और भारतीय सेना की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत अभियान शुरू किया गया। 20 शव मिले, 5 मजदूरों की तलाश अभी जारी रेस्क्यू टीम ने लगातार कई दिनों तक मलबा हटाने के बाद अब तक 20 मजदूरों के शव बाहर निकाले हैं। अधिकारियों का कहना है कि अभी भी 5 मजदूरों के टनल के भीतर फंसे होने की आशंका है। हालांकि समय बीतने के साथ उम्मीदें कमजोर पड़ रही हैं, लेकिन बचाव दल का कहना है कि जब तक अंतिम मजदूर का पता नहीं चल जाता, तब तक अभियान जारी रहेगा। Methane Gas बनी सबसे बड़ी चुनौती रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान टनल के अंदर मीथेन गैस की मौजूदगी ने हालात और गंभीर बना दिए। गैस का स्तर बढ़ने से कुछ बचावकर्मियों को सांस लेने में परेशानी हुई और कई कर्मी बेहोश हो गए। इसके बाद ऑपरेशन को कुछ समय के लिए रोककर टनल में गैस की जांच की गई। अब बचाव दल विशेष ऑक्सीजन उपकरण, गैस डिटेक्टर और सुरक्षा किट के साथ अंदर प्रवेश कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि बंद टनलों में मीथेन गैस का जमा होना बेहद खतरनाक होता है, क्योंकि इससे ऑक्सीजन का स्तर कम हो सकता है और विस्फोट का खतरा भी बना रहता है। युद्धस्तर पर चल रहा Rescue Operation घटनास्थल पर NDRF, SDRF, भारतीय सेना, पुलिस, प्रशासन और तकनीकी विशेषज्ञों की संयुक्त टीम लगातार काम कर रही है। भारी मशीनों और आधुनिक ड्रिलिंग उपकरणों की मदद से मलबा हटाया जा रहा है। लगातार बारिश और पहाड़ी इलाके की कठिन परिस्थितियों के बावजूद रेस्क्यू टीम चौबीसों घंटे अभियान में जुटी हुई है। सरकार ने मांगी पूरी रिपोर्ट हादसे के बाद राज्य सरकार ने घटना की विस्तृत जांच के आदेश दिए हैं। प्रशासन यह पता लगाएगा कि निर्माण कार्य के दौरान सभी सुरक्षा मानकों का पालन किया गया था या नहीं। साथ ही मृतकों के परिजनों को हरसंभव सहायता उपलब्ध कराने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। पूरे देश की नजर Rescue Operation पर सिक्किम का यह हादसा केवल एक निर्माण दुर्घटना नहीं, बल्कि उन मजदूर परिवारों के लिए अपूरणीय क्षति है, जिन्होंने अपने प्रियजनों को खो दिया। देशभर से लोग लापता मजदूरों के सुरक्षित मिलने की प्रार्थना कर रहे हैं। फिलहाल बचाव अभियान जारी है और प्रशासन का कहना है कि मौसम चाहे जितनी चुनौती पेश करे, अंतिम मजदूर तक पहुंचने की हर संभव कोशिश की जाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
America

America Iran Conflict: 5 शहर बने निशाना, Pentagon ने बताया युद्ध का भारी खर्च

मध्य पूर्व में America और Iran के बीच जारी तनाव अब और गंभीर होता जा रहा है।America ने लगातार 11वीं रात ईरान के पांच शहरों में बड़े पैमाने पर हवाई हमले किए हैं। इन हमलों में ड्रोन ठिकानों, सैन्य अड्डों और विमान हैंगर को निशाना बनाया गया। दूसरी ओर, अमेरिकी रक्षा विभाग ने बताया है कि इस सैन्य अभियान पर अब तक 37.5 अरब डॉलर (करीब ₹3.6 लाख करोड़) से अधिक खर्च हो चुका है। लगातार बढ़ते हमलों ने एक बार फिर पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है। ईरान के पांच शहरों में America की Airstrike America सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, ताजा कार्रवाई में Iran के कई रणनीतिक सैन्य ठिकानों पर सटीक एयरस्ट्राइक की गई। इन हमलों का उद्देश्य ईरान की ड्रोन क्षमता और सैन्य नेटवर्क को कमजोर करना बताया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक, जिन इलाकों को निशाना बनाया गया वहां ड्रोन स्टोरेज, एयरक्राफ्ट हैंगर और सैन्य उपकरण मौजूद थे। हालांकि ईरान ने अभी तक हमलों से हुए नुकसान का आधिकारिक आंकड़ा जारी नहीं किया है। लगातार 11वीं रात जारी रहा हमला अमेरिका का यह अभियान लगातार 11वीं रात तक जारी रहा। पिछले कई दिनों से दोनों देशों के बीच सैन्य कार्रवाई तेज होती जा रही है। जहां एक ओर अमेरिका अपने अभियान को आतंकवाद और सुरक्षा से जोड़कर देख रहा है, वहीं ईरान इसे अपनी संप्रभुता पर हमला बता रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात इसी तरह बने रहे तो आने वाले दिनों में संघर्ष और व्यापक रूप ले सकता है। युद्ध पर अब तक ₹3.6 लाख करोड़ से ज्यादा खर्च अमेरिकी रक्षा विभाग (Pentagon) के अनुसार, ईरान के खिलाफ चल रहे सैन्य अभियान पर अब तक 37.5 अरब डॉलर, यानी भारतीय मुद्रा में करीब ₹3.6 लाख करोड़ खर्च किए जा चुके हैं। इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बाद अमेरिकी संसद में भी इस अभियान को लेकर सवाल उठने लगे हैं। रक्षा विभाग ने आगे की सैन्य जरूरतों को देखते हुए अतिरिक्त बजट की मांग भी की है। ट्रंप ने दिए सख्त संकेत अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ किया है कि यदि ईरान अपनी सैन्य गतिविधियों में कमी नहीं लाता, तो अमेरिका आगे भी इसी तरह की कार्रवाई जारी रखेगा। वहीं ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई के संकेत दिए हैं, जिससे पूरे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया है। दोनों देशों के बीच फिलहाल किसी बड़े कूटनीतिक समाधान के संकेत नहीं दिखाई दे रहे हैं। दुनिया पर भी दिखने लगा असर अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर अब सिर्फ युद्ध क्षेत्र तक सीमित नहीं है। होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के कारण अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है। ऊर्जा आपूर्ति, वैश्विक व्यापार और शेयर बाजार पर भी इस युद्ध का असर पड़ने लगा है। कई देशों ने दोनों पक्षों से संयम बरतने और बातचीत के जरिए समाधान निकालने की अपील की है। आगे क्या? लगातार हो रहे हवाई हमले, बढ़ता सैन्य खर्च और दोनों देशों के सख्त रुख को देखते हुए यह साफ है कि अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अभी खत्म होता नजर नहीं आ रहा। यदि जल्द कोई कूटनीतिक पहल नहीं होती, तो इसका असर केवल मध्य पूर्व ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पर भी पड़ सकता है। दुनिया की निगाहें अब इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में अमेरिका और ईरान अगला कदम क्या उठाते हैं। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Monsoon Session

Monsoon Session Black Dress में दिखा विपक्ष का शक्ति प्रदर्शन, Rahul Gandhi ने सरकार को घेरा

संसद के मानसून सत्र (Monsoon Session) में सियासी गर्मी लगातार बढ़ती जा रही है। विपक्ष ने अपने विरोध प्रदर्शन को और तेज करते हुए मंगलवार को संसद परिसर में शक्ति प्रदर्शन किया। INDIA गठबंधन के लगभग सभी सांसद काले कपड़ों में संसद पहुंचे और केंद्र सरकार के खिलाफ एकजुटता दिखाई। इस दौरान कांग्रेस नेता राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने विरोध प्रदर्शन की अगुवाई की। विपक्ष का कहना है कि देश से जुड़े कई अहम मुद्दों पर संसद में खुलकर चर्चा नहीं हो रही है। इसी को लेकर सांसदों ने संसद परिसर में प्रदर्शन किया और सरकार से जवाब देने की मांग उठाई। PM आवास मार्च के बाद Protest हुआ और तेज संसद में विरोध प्रदर्शन से पहले विपक्षी दल प्रधानमंत्री आवास की ओर मार्च निकाल चुके हैं। हालांकि सुरक्षा व्यवस्था के चलते उन्हें रास्ते में रोक दिया गया था। इसके बाद राहुल गांधी, प्रियंका गांधी समेत कई विपक्षी नेताओं ने सड़क पर धरना दिया। विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक अधिकारों का मुद्दा बताते हुए सरकार पर सवाल उठाए थे। अब उसी विरोध का दूसरा चरण संसद परिसर में देखने को मिला, जहां विपक्ष ने काले कपड़े पहनकर अपना संदेश देने की कोशिश की। Black Dress में दिखी विपक्ष की एकजुटता मंगलवार सुबह कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, तृणमूल कांग्रेस, शिवसेना (यूबीटी), आरजेडी और INDIA गठबंधन के अन्य दलों के सांसद काले कपड़ों में संसद पहुंचे। नेताओं ने संसद परिसर में नारेबाजी की और सरकार से विभिन्न राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा कराने की मांग दोहराई। राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और अखिलेश यादव पूरे प्रदर्शन के दौरान सांसदों के बीच मौजूद रहे। तीनों नेताओं ने विपक्षी दलों के साथ मिलकर सरकार के खिलाफ एकजुटता का संदेश दिया। किन मुद्दों को लेकर सरकार पर निशाना? विपक्ष का आरोप है कि बेरोजगारी, महंगाई, कानून-व्यवस्था, चुनाव प्रक्रिया और अन्य महत्वपूर्ण राष्ट्रीय विषयों पर संसद में पर्याप्त चर्चा नहीं हो रही है। विपक्ष चाहता है कि इन मुद्दों पर सरकार सदन में विस्तृत जवाब दे। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि वह संसदीय नियमों के तहत हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन लगातार हंगामे से सदन की कार्यवाही प्रभावित हो रही है। संसद की कार्यवाही पर पड़ा असर विपक्ष के प्रदर्शन का असर संसद की कार्यवाही पर भी दिखाई दिया। लोकसभा और राज्यसभा में कई बार हंगामा हुआ, जिसके चलते कार्यवाही बाधित रही। दोनों पक्षों के बीच सहमति नहीं बनने से मानसून सत्र के शुरुआती दिनों में राजनीतिक तनाव लगातार बना हुआ है। आगे क्या होगा? INDIA गठबंधन ने साफ संकेत दिए हैं कि यदि उनकी मांगों पर सरकार सकारात्मक रुख नहीं अपनाती है तो संसद के भीतर और बाहर विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। ऐसे में आने वाले दिनों में मानसून सत्र के और अधिक हंगामेदार रहने की संभावना है। राजनीतिक नजरें अब इस बात पर टिकी हैं कि सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध कब खत्म होगा और संसद की कार्यवाही सामान्य रूप से चल पाएगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

जबलपुर में NSUI और कांग्रेस का प्रदर्शन, वाटर कैनन से खदेड़े गए कार्यकर्ता

दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में जबलपुर में भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर NSUI ने सांकेतिक अर्थी यात्रा निकाली, जबकि शाम को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने मालवीय चौक पर प्रदर्शन कर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। दोनों प्रदर्शनों के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच तीखी नोकझोंक हुई तथा स्थिति नियंत्रित करने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। अर्थी यात्रा को पुलिस ने रोका NSUI कार्यकर्ताओं की अर्थी यात्रा सिविल लाइन स्थित साईं मंदिर से शुरू होकर महाकौशल महाविद्यालय की ओर बढ़ रही थी। पुलिस ने सिविल लाइन क्षेत्र में उन्हें आगे बढ़ने से रोक दिया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि दिल्ली में 21 दिनों से आंदोलन कर रहे छात्रों की मांगों को सरकार नजरअंदाज कर रही है और शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वालों पर बल प्रयोग किया जा रहा है। 48 घंटे में इस्तीफे की मांग NSUI ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं दिया गया तो NSUI, यूथ कांग्रेस और अन्य सहयोगी संगठन और बड़ा आंदोलन करेंगे। मालवीय चौक पर कांग्रेस का उग्र प्रदर्शन शाम को मालवीय चौक पर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। इस दौरान शिक्षा मंत्री के विरोध में पोस्टर जलाने की कोशिश की गई, जिसे रोकने के दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की हो गई। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने दो बार वाटर कैनन चलाकर प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर किया। इस दौरान कुछ कार्यकर्ता मशाल लेकर अंजुमन स्कूल की ओर बढ़े, जबकि अन्य मालवीय चौक पर दोबारा एकत्र होकर विरोध प्रदर्शन करते रहे। कांग्रेस ने सरकार पर लगाए आरोप कांग्रेस नेता सौरभ नाटी शर्मा ने आरोप लगाया कि छात्रों की आवाज दबाने के लिए सरकार दमनात्मक रवैया अपना रही है। उन्होंने कहा कि छात्रों पर लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है तथा शिक्षा मंत्री को बचाने के लिए सरकार विपक्ष की आवाज दबा रही है। काफी देर तक चले हंगामे के बाद पुलिस ने स्थिति पर नियंत्रण पाया, हालांकि देर रात तक प्रदर्शन जारी रहा। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

बिलासपुर के राजेश सोंथालिया बने भारत स्काउट्स एवं गाइड्स छत्तीसगढ़ के सहायक राज्य आयुक्त

बिलासपुर के वरिष्ठ स्काउटर राजेश सोंथालिया को भारत स्काउट्स एवं गाइड्स, छत्तीसगढ़ राज्य संघ का सहायक राज्य आयुक्त (Assistant State Commissioner) नियुक्त किया गया है। इस संबंध में राज्य मुख्य आयुक्त इंदरजीत सिंह खालसा ने सोमवार को नियुक्ति आदेश जारी किया। राजेश सोंथालिया की नियुक्ति राज्य के शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव की अनुशंसा पर की गई है। स्काउट आंदोलन में उनकी वर्षों की सक्रिय भागीदारी, संगठनात्मक क्षमता और सेवा भावना को देखते हुए उन्हें यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। निभाएंगे अहम जिम्मेदारी सहायक राज्य आयुक्त के रूप में राजेश सोंथालिया अब प्रदेशभर में स्काउट गतिविधियों के संचालन, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, संगठन के विस्तार और युवा नेतृत्व को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। सामाजिक कार्यों में रहा उल्लेखनीय योगदान राजेश सोंथालिया शिक्षा, पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता अभियान, वृक्षारोपण, आपदा प्रबंधन प्रशिक्षण और सामाजिक सरोकारों से जुड़े कई कार्यक्रमों में सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं। उम्मीद जताई जा रही है कि उनके नेतृत्व में प्रदेश में स्काउट आंदोलन को नई ऊर्जा और नई दिशा मिलेगी। अधिक जानकारी के लिए विजिट करें:deshharpal.com

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