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Virat Kohli-Anushka Sharma: मुंबई में कीर्तन में पहुंचे, VIDEO सोशल मीडिया पर वायरल

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क्रिकेटर विराट कोहली (Virat Kohli) और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह क्रिकेट का मैदान या बॉलीवुड नहीं, बल्कि भक्ति और आध्यात्मिकता है। मुंबई में कृष्ण दास (Krishna Das) के कीर्तन कार्यक्रम में दोनों शामिल हुए। यहां अनुष्का शर्मा भजन के साथ तालियां बजाती नजर आईं, जबकि विराट कोहली भी भक्ति संगीत का आनंद लेते दिखे। कार्यक्रम से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं।

Virat Kohli-Anushka Sharma को अक्सर अपने परिवार के साथ समय बिताते और धार्मिक स्थलों पर जाते देखा गया है। वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज से उनकी मुलाकातें भी काफी चर्चा में रही हैं।

Mumbai में Krishna Das के Kirtan में पहुंचे विराट-अनुष्का

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Virat Kohli-Anushka Sharma 25 अक्टूबर को मुंबई में आयोजित कृष्ण दास के लाइव कीर्तन में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान दोनों एक साथ बैठे दिखाई दिए। अनुष्का भक्ति संगीत में डूबी नजर आईं और तालियां बजाकर कीर्तन में शामिल हुईं। विराट भी उनके साथ कार्यक्रम का आनंद लेते दिखे।

इस दौरान कपल का सादगी भरा अंदाज लोगों को पसंद आया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो को लेकर फैंस अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। हालांकि, वीडियो के सभी विवरणों और कार्यक्रम से जुड़ी जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।

कौन हैं Krishna Das, जिनके कीर्तन में शामिल हुए विराट-अनुष्का?

कृष्ण दास अमेरिका के मशहूर कीर्तन गायक हैं। उनका असली नाम जेफ्री कैगल है। वह भारतीय मंत्रों और भक्ति संगीत को अपनी खास शैली में पेश करने के लिए दुनियाभर में जाने जाते हैं।

कृष्ण दास का भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से गहरा जुड़ाव रहा है। वह नीम करोली बाबा से भी प्रभावित रहे हैं। उनके कीर्तन में शामिल होने के लिए अलग-अलग देशों से लोग पहुंचते हैं।

विराट और अनुष्का का उनके कार्यक्रम में शामिल होना भी इसी आध्यात्मिक जुड़ाव की ओर ध्यान खींचता है।

Premanand Maharaj से कई बार मिल चुके हैं विराट और अनुष्का

Virat Kohli-Anushka Sharma की वृंदावन यात्राएं पहले भी सुर्खियों में रही हैं। दोनों संत प्रेमानंद महाराज से मिलने के लिए कई बार वृंदावन जा चुके हैं। इन मुलाकातों के वीडियो सामने आने पर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई थी।

दोनों को संत प्रेमानंद महाराज से बातचीत करते और उनका मार्गदर्शन लेते देखा गया है। रिपोर्ट्स में उनके अब तक करीब आठ बार मुलाकात करने का दावा किया गया है, हालांकि इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है।

विराट और अनुष्का की आध्यात्मिक रुचि को देखते हुए मुंबई के कीर्तन में उनकी मौजूदगी को भी इसी सिलसिले से जोड़कर देखा जा रहा है।

London में भी Krishna Das के कार्यक्रम में पहुंचे थे दोनों

मुंबई के कार्यक्रम से पहले भी विराट कोहली और अनुष्का शर्मा कृष्ण दास के कीर्तन में शामिल हो चुके हैं। जुलाई 2026 में लंदन के यूनियन चैपल में आयोजित उनके कार्यक्रम में दोनों की मौजूदगी की खबरें सामने आई थीं।

यह कपल अपनी निजी जिंदगी को आमतौर पर निजी रखना पसंद करता है। इसलिए जब भी दोनों किसी धार्मिक या आध्यात्मिक कार्यक्रम में साथ नजर आते हैं, तो उनकी तस्वीरें और वीडियो चर्चा का विषय बन जाते हैं।

विराट-अनुष्का की सादगी ने जीता फैंस का दिल

विराट कोहली क्रिकेट की दुनिया के बड़े सितारे हैं और अनुष्का शर्मा बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री हैं। दोनों की व्यस्त जिंदगी के बीच भक्ति संगीत के लिए समय निकालना लोगों का ध्यान खींच रहा है।

मुंबई के कीर्तन से सामने आए वीडियो ने एक बार फिर दिखाया कि यह कपल सिर्फ अपने पेशेवर काम ही नहीं, बल्कि निजी आस्था और आध्यात्मिक अनुभवों को भी महत्व देता है। फिलहाल, विराट-अनुष्का का यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में बना हुआ है।

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OBC Reservation

OBC Reservation: UPSC के 958 उम्मीदवारों की ट्रेनिंग में देरी, केंद्र ने SC से मांगी राहत

OBC क्रीमीलेयर के नियमों को लेकर चल रही कानूनी उलझन का असर अब UPSC सिविल सेवा परीक्षा 2025 के चयनित उम्मीदवारों पर पड़ रहा है। परीक्षा में सफल हुए 958 उम्मीदवारों का सर्विस अलॉटमेंट और फाउंडेशन ट्रेनिंग अभी तक शुरू नहीं हो सकी है। केंद्र सरकार चाहती है कि सुप्रीम कोर्ट इस मामले में स्पष्ट निर्देश दे, ताकि नियुक्ति की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सके। इस पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि OBC उम्मीदवारों की क्रीमीलेयर स्थिति तय करने के लिए माता-पिता की आय और उनके पद को किस तरह देखा जाए। सुप्रीम कोर्ट के 11 मार्च 2026 के फैसले के बाद केंद्र सरकार ने पुराने और नए नियमों को लागू करने के तरीके पर स्पष्टीकरण मांगा है। 25 अक्टूबर की रिपोर्टों के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर को केंद्र की याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। वहीं, 26 अक्टूबर को सामने आई रिपोर्ट के अनुसार, अधिकारियों ने भरोसा दिलाया है कि इस कानूनी विवाद से UPSC CSE 2025 बैच की वरिष्ठता प्रभावित नहीं होगी। हालांकि, सर्विस अलॉटमेंट और ट्रेनिंग शुरू होने की तारीख को लेकर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं है। OBC Creamy Layer विवाद क्या है? OBC Reservation के तहत नॉन-क्रीमीलेयर श्रेणी में आने वाले पात्र उम्मीदवारों को सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ मिलता है। वहीं, निर्धारित मानदंडों के तहत क्रीमीलेयर में आने वाले उम्मीदवार इस लाभ के पात्र नहीं होते। विवाद इस बात को लेकर है कि क्रीमीलेयर तय करते समय माता-पिता की सैलरी को किस तरह शामिल किया जाए और उनकी नौकरी के पद तथा सेवा की श्रेणी का कितना महत्व हो। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2026 को Union of India vs Rohith Nathan मामले में फैसला सुनाते हुए स्पष्ट किया कि OBC क्रीमीलेयर की पहचान केवल माता-पिता की आय के आधार पर नहीं की जा सकती। माता-पिता के पद और उनकी सेवा की श्रेणी जैसे पहलुओं पर भी विचार करना जरूरी है। अदालत ने 8 सितंबर 1993 के सरकारी कार्यालय ज्ञापन और 14 अक्टूबर 2004 के स्पष्टीकरण के बीच संबंध पर भी विचार किया। फैसले के अनुसार, 2004 के स्पष्टीकरण को 1993 के मूल नियमों से अलग करके लागू नहीं किया जा सकता। केंद्र सरकार ने Supreme Court से क्या मांग की? केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) ने 24 अगस्त 2026 को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर फैसले को लागू करने के तरीके पर स्पष्ट निर्देश मांगे थे। सरकार का अनुरोध है कि UPSC CSE 2025 के 958 चयनित उम्मीदवारों का सर्विस अलॉटमेंट पहले लागू OBC क्रीमीलेयर मानदंडों के आधार पर पूरा करने की अनुमति दी जाए। केंद्र का कहना है कि परीक्षा का अंतिम परिणाम 6 मार्च 2026 को घोषित हुआ था, जबकि सुप्रीम कोर्ट का फैसला इसके पांच दिन बाद आया। उस समय सर्विस अलॉटमेंट की प्रक्रिया पूरी नहीं हुई थी। सरकार के सामने चुनौती यह है कि अगर नए फैसले को बिना स्पष्ट दिशा-निर्देशों के पिछली भर्तियों पर भी लागू किया जाता है, तो पहले से नियुक्त अधिकारियों की वरिष्ठता, कैडर और सेवा संबंधी मामलों पर सवाल उठ सकते हैं। इसी कारण केंद्र ने अदालत से यह स्पष्ट करने का अनुरोध किया है कि फैसले को पुरानी भर्तियों और पहले से पूरी हो चुकी चयन प्रक्रियाओं पर किस तरह लागू किया जाए। 958 उम्मीदवारों की IAS-IPS Training क्यों रुकी? UPSC सिविल सेवा परीक्षा के चयनित उम्मीदवारों का फाउंडेशन कोर्स आमतौर पर अगस्त के आखिरी सप्ताह या सितंबर की शुरुआत में शुरू होता है। इस प्रशिक्षण में अधिकारियों को प्रशासन, संविधान, सरकारी नीतियों और सार्वजनिक सेवा से जुड़े विषयों की जानकारी दी जाती है। इस साल OBC क्रीमीलेयर विवाद के कारण 2025 बैच का सर्विस अलॉटमेंट पूरा नहीं हो पाया। इसी वजह से फाउंडेशन कोर्स भी निर्धारित समय पर शुरू नहीं हुआ। केंद्र सरकार के अनुसार, संबंधित विभाग और प्रशिक्षण संस्थान प्रक्रिया शुरू करने के लिए तैयार हैं। लेकिन एक बार सर्विस अलॉटमेंट और कैडर तय होने के बाद उसमें बदलाव करना जटिल हो सकता है। इसलिए सरकार अदालत के निर्देश मिलने से पहले अंतिम निर्णय लेने से बच रही है। यह देरी उन उम्मीदवारों के लिए चिंता का विषय है, जिन्होंने लंबी चयन प्रक्रिया पूरी करने के बाद सिविल सेवाओं में जगह बनाई है। हालांकि, अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि ट्रेनिंग में देरी से इस बैच की वरिष्ठता, ग्रेडेशन या अन्य सेवा शर्तें प्रभावित नहीं होंगी। क्या पुराने अधिकारियों की नौकरी और Seniority पर असर पड़ेगा? इस मामले का असर केवल नए उम्मीदवारों तक सीमित रहने की आशंका नहीं है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के सामने यह चिंता भी रखी है कि फैसले को पिछली भर्तियों पर लागू करने से कई पुराने मामलों की दोबारा समीक्षा करनी पड़ सकती है। इसमें प्रमुख रूप से ये मुद्दे शामिल हैं: केंद्र का तर्क है कि यदि पुराने मामलों को दोबारा खोला जाता है, तो कई साल से सेवा कर रहे अधिकारियों की स्थिति पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि, अभी यह तय नहीं है कि किन मामलों की समीक्षा होगी। इस पर अंतिम स्थिति अदालत के निर्देशों और सरकार द्वारा लागू किए जाने वाले नियमों से स्पष्ट होगी। OBC Reservation Rules पर फैसले का क्या होगा असर? OBC क्रीमीलेयर का मुद्दा आरक्षण की पात्रता से जुड़ा है, इसलिए इस मामले का प्रभाव भविष्य की सरकारी भर्तियों पर भी पड़ सकता है। सरकार के सामने एक चुनौती ऐसे स्पष्ट मानदंड तैयार करने की है, जिनके आधार पर सरकारी कर्मचारियों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी कंपनियों में कार्यरत माता-पिता के पदों तथा सेवा की स्थिति का आकलन किया जा सके। केंद्र ने यह भी चिंता जताई है कि यदि नियमों की व्याख्या अलग-अलग तरीके से की गई, तो समान परिस्थितियों वाले उम्मीदवारों के साथ अलग व्यवहार होने और नए कानूनी विवाद पैदा होने की आशंका रहेगी। इसलिए सुप्रीम कोर्ट से मांगी गई स्पष्टता केवल 958 उम्मीदवारों के सर्विस अलॉटमेंट तक सीमित नहीं है। इसका संबंध OBC आरक्षण के नियमों को लागू करने और पहले से लिए गए फैसलों की स्थिति स्पष्ट करने से भी है। अब आगे क्या होगा? सुप्रीम कोर्ट ने 24 सितंबर 2026 को केंद्र की याचिका पर सुनवाई के बाद अपना आदेश सुरक्षित रख लिया था। 26...
Kharge

Bihar Politics: Kharge के बयान पर BJP का हमला, राहुल गांधी और खरगे से माफी की मांग

बिहार की राजधानी पटना में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे (Mallikarjun Kharge) के एक बयान को लेकर सियासत गरमा गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की गई उनकी टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने कड़ी आपत्ति जताई है। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने इस बयान की आलोचना करते हुए खरगे और राहुल गांधी से माफी मांगने की मांग की है। वहीं, BJP के एक कार्यकर्ता ने मामले में पुलिस से शिकायत भी की है। यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है, जब बिहार में चुनावी प्रक्रिया, मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप को लेकर पहले से ही माहौल गर्म है। पटना में मल्लिकार्जुन खरगे ने क्या कहा? मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह मामला 25 अक्टूबर 2026 को पटना के बापू सभागार में आयोजित एक कार्यक्रम का है। कार्यक्रम का आयोजन बिहार के पहले मुख्यमंत्री डॉ. श्रीकृष्ण सिंह की 139वीं जयंती के अवसर पर किया गया था। कार्यक्रम में भाषण के दौरान एक व्यक्ति ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जिक्र करते हुए खरगे को टोका। इसके जवाब में कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा, “मोदी का बाप भी जाएगा।” उनके इस बयान के बाद राजनीतिक विवाद शुरू हो गया। BJP नेताओं ने इस टिप्पणी को प्रधानमंत्री के प्रति आपत्तिजनक बताते हुए कांग्रेस नेतृत्व से जवाब मांगा है। Samrat Choudhary का कांग्रेस पर हमला, मांगी माफी बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मल्लिकार्जुन खरगे के बयान पर नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि राजनीतिक मतभेद अपनी जगह हैं, लेकिन नेताओं को सार्वजनिक मंच से बोलते समय भाषा का ध्यान रखना चाहिए। सम्राट चौधरी ने खरगे के साथ राहुल गांधी से भी माफी मांगने की मांग की। BJP का कहना है कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को इस तरह की टिप्पणी पर अपना रुख स्पष्ट करना चाहिए। इस बयान के बाद BJP और कांग्रेस के बीच जुबानी जंग तेज होने के संकेत मिल रहे हैं। हालांकि, माफी की मांग करना और किसी बयान को लेकर राजनीतिक आपत्ति जताना अलग-अलग बातें हैं। मामले में आगे कांग्रेस की आधिकारिक प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होगी। BJP कार्यकर्ता ने Police में दी शिकायत खरगे की टिप्पणी के बाद BJP कार्यकर्ता कृष्ण कुमार सिंह ने पटना के कोतवाली थाने में शिकायत दी। शिकायत में बयान पर आपत्ति जताते हुए कार्रवाई की मांग की गई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, शिकायतकर्ता ने खरगे से 24 घंटे के भीतर माफी मांगने की मांग भी की। घटना के स्थान और संबंधित थाने को लेकर पुलिस स्तर पर आगे की प्रक्रिया की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, शिकायत दिए जाने और FIR दर्ज होने में अंतर होता है। उपलब्ध जानकारी के आधार पर इस मामले में किसी अंतिम कानूनी फैसले या आगे की कार्रवाई की पुष्टि नहीं की जा सकती। Amit Shah ने भी कांग्रेस पर साधा निशाना केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी इस विवाद के बीच कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कांग्रेस नेताओं की राजनीतिक बयानबाजी की आलोचना की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर की जाने वाली टिप्पणियों पर सवाल उठाए। BJP का आरोप है कि कांग्रेस नेताओं को राजनीतिक विरोध करते समय मर्यादा का ध्यान रखना चाहिए। दूसरी ओर, इस विवाद को समझने के लिए खरगे के पूरे भाषण और संबंधित नेताओं की प्रतिक्रियाओं को भी ध्यान में रखना जरूरी है। SIR और चुनावी प्रक्रिया पर भी बोले थे खरगे पटना में अपने संबोधन के दौरान मल्लिकार्जुन खरगे ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी Special Intensive Revision (SIR) का मुद्दा भी उठाया था। खरगे ने चुनावी प्रक्रिया को लेकर सवाल किए और आरोप लगाया कि SIR के दौरान मतदाताओं के नाम हटाए जाने से विपक्ष को नुकसान हो सकता है। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए और विपक्षी दलों से एकजुट होकर मतदान के अधिकार की रक्षा करने की अपील की। गौरतलब है कि मतदाता सूची में गड़बड़ी और चुनावी प्रक्रिया को लेकर लगाए गए ये आरोप कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवाल हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जाना चाहिए। Kharge Statement पर क्यों बढ़ा राजनीतिक विवाद? मल्लिकार्जुन खरगे की टिप्पणी के बाद BJP नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री के प्रति अनुचित भाषा का मामला बताया है। वहीं, कांग्रेस और विपक्ष की ओर से चुनावी प्रक्रिया तथा SIR जैसे मुद्दों पर सवाल उठाए जाते रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम में दो बातें अहम हैं—पहली, खरगे के बयान पर BJP की आपत्ति और पुलिस शिकायत; दूसरी, चुनावी प्रक्रिया को लेकर कांग्रेस की ओर से उठाए गए सवाल। अब इस मामले में कांग्रेस की आधिकारिक प्रतिक्रिया और पुलिस शिकायत पर आगे होने वाली कार्रवाई पर नजर रहेगी। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Virat Kohli-Anushka Sharma

Virat Kohli-Anushka Sharma: मुंबई में कीर्तन में पहुंचे, VIDEO सोशल मीडिया पर वायरल

क्रिकेटर विराट कोहली (Virat Kohli) और अभिनेत्री अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। इस बार वजह क्रिकेट का मैदान या बॉलीवुड नहीं, बल्कि भक्ति और आध्यात्मिकता है। मुंबई में कृष्ण दास (Krishna Das) के कीर्तन कार्यक्रम में दोनों शामिल हुए। यहां अनुष्का शर्मा भजन के साथ तालियां बजाती नजर आईं, जबकि विराट कोहली भी भक्ति संगीत का आनंद लेते दिखे। कार्यक्रम से जुड़े वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में हैं। Virat Kohli-Anushka Sharma को अक्सर अपने परिवार के साथ समय बिताते और धार्मिक स्थलों पर जाते देखा गया है। वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज से उनकी मुलाकातें भी काफी चर्चा में रही हैं। Mumbai में Krishna Das के Kirtan में पहुंचे विराट-अनुष्का मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, Virat Kohli-Anushka Sharma 25 अक्टूबर को मुंबई में आयोजित कृष्ण दास के लाइव कीर्तन में शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान दोनों एक साथ बैठे दिखाई दिए। अनुष्का भक्ति संगीत में डूबी नजर आईं और तालियां बजाकर कीर्तन में शामिल हुईं। विराट भी उनके साथ कार्यक्रम का आनंद लेते दिखे। इस दौरान कपल का सादगी भरा अंदाज लोगों को पसंद आया। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो को लेकर फैंस अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। हालांकि, वीडियो के सभी विवरणों और कार्यक्रम से जुड़ी जानकारियों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है। कौन हैं Krishna Das, जिनके कीर्तन में शामिल हुए विराट-अनुष्का? कृष्ण दास अमेरिका के मशहूर कीर्तन गायक हैं। उनका असली नाम जेफ्री कैगल है। वह भारतीय मंत्रों और भक्ति संगीत को अपनी खास शैली में पेश करने के लिए दुनियाभर में जाने जाते हैं। कृष्ण दास का भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं से गहरा जुड़ाव रहा है। वह नीम करोली बाबा से भी प्रभावित रहे हैं। उनके कीर्तन में शामिल होने के लिए अलग-अलग देशों से लोग पहुंचते हैं। विराट और अनुष्का का उनके कार्यक्रम में शामिल होना भी इसी आध्यात्मिक जुड़ाव की ओर ध्यान खींचता है। Premanand Maharaj से कई बार मिल चुके हैं विराट और अनुष्का Virat Kohli-Anushka Sharma की वृंदावन यात्राएं पहले भी सुर्खियों में रही हैं। दोनों संत प्रेमानंद महाराज से मिलने के लिए कई बार वृंदावन जा चुके हैं। इन मुलाकातों के वीडियो सामने आने पर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा हुई थी। दोनों को संत प्रेमानंद महाराज से बातचीत करते और उनका मार्गदर्शन लेते देखा गया है। रिपोर्ट्स में उनके अब तक करीब आठ बार मुलाकात करने का दावा किया गया है, हालांकि इस संख्या की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं है। विराट और अनुष्का की आध्यात्मिक रुचि को देखते हुए मुंबई के कीर्तन में उनकी मौजूदगी को भी इसी सिलसिले से जोड़कर देखा जा रहा है। London में भी Krishna Das के कार्यक्रम में पहुंचे थे दोनों मुंबई के कार्यक्रम से पहले भी विराट कोहली और अनुष्का शर्मा कृष्ण दास के कीर्तन में शामिल हो चुके हैं। जुलाई 2026 में लंदन के यूनियन चैपल में आयोजित उनके कार्यक्रम में दोनों की मौजूदगी की खबरें सामने आई थीं। यह कपल अपनी निजी जिंदगी को आमतौर पर निजी रखना पसंद करता है। इसलिए जब भी दोनों किसी धार्मिक या आध्यात्मिक कार्यक्रम में साथ नजर आते हैं, तो उनकी तस्वीरें और वीडियो चर्चा का विषय बन जाते हैं। विराट-अनुष्का की सादगी ने जीता फैंस का दिल विराट कोहली क्रिकेट की दुनिया के बड़े सितारे हैं और अनुष्का शर्मा बॉलीवुड की जानी-मानी अभिनेत्री हैं। दोनों की व्यस्त जिंदगी के बीच भक्ति संगीत के लिए समय निकालना लोगों का ध्यान खींच रहा है। मुंबई के कीर्तन से सामने आए वीडियो ने एक बार फिर दिखाया कि यह कपल सिर्फ अपने पेशेवर काम ही नहीं, बल्कि निजी आस्था और आध्यात्मिक अनुभवों को भी महत्व देता है। फिलहाल, विराट-अनुष्का का यह वीडियो सोशल मीडिया पर चर्चा में बना हुआ है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
Defamation Case

Amit Shah Defamation Case: राहुल गांधी दोषमुक्त, 2018 में दर्ज हुआ था मानहानि का केस

कांग्रेस नेता राहुल गांधी (Rahul Gandhi) को अमित शाह (Amit Shah) पर टिप्पणी से जुड़े मानहानि मामले (Defamation Case) में बड़ी कानूनी राहत मिली है। उत्तर प्रदेश के सुलतानपुर की MP/MLA कोर्ट ने 26 अक्टूबर 2026 को इस मामले में राहुल गांधी को दोषमुक्त कर दिया। साल 2018 में दर्ज हुई शिकायत पर लंबे समय से सुनवाई चल रही थी। अब अदालत के फैसले के बाद यह मामला एक बार फिर राजनीतिक और कानूनी चर्चा में आ गया है। Rahul Gandhi Case: क्या है पूरा मामला? यह मामला मई 2018 में कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान राहुल गांधी की ओर से दिए गए एक बयान से जुड़ा है। उस समय अमित शाह भारतीय जनता पार्टी (BJP) के राष्ट्रीय अध्यक्ष थे। राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में अमित शाह का जिक्र करते हुए सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले को लेकर टिप्पणी की थी। इस बयान के बाद भाजपा नेता विजय मिश्रा ने 4 अगस्त 2018 को राहुल गांधी के खिलाफ मानहानि की शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का कहना था कि इस टिप्पणी से अमित शाह की छवि को नुकसान पहुंचा है। इसके बाद मामला अदालत पहुंचा और कानूनी प्रक्रिया शुरू हुई। Sultanpur Court Verdict: अदालत ने क्या फैसला सुनाया? करीब आठ साल तक चली कानूनी प्रक्रिया के बाद सुलतानपुर की विशेष MP/MLA अदालत ने 26 अक्टूबर 2026 को राहुल गांधी को दोषमुक्त कर दिया। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, अदालत ने संबंधित टिप्पणी को मानहानिकारक नहीं माना। फैसले के दिन राहुल गांधी अदालत में पेश हुए थे। इस निर्णय से उन्हें 2018 में दर्ज इसी मानहानि मामले में राहत मिली है। हालांकि, इस फैसले को राहुल गांधी के खिलाफ चल रहे अन्य मामलों से जोड़कर नहीं देखना चाहिए, क्योंकि प्रत्येक मामले के तथ्य और कानूनी प्रक्रिया अलग हैं। 2018 से 2026 तक कैसे आगे बढ़ा केस? इस मामले की शुरुआत कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान हुई थी। शिकायत दर्ज होने के बाद अदालत में सुनवाई शुरू हुई और राहुल गांधी को पेश होने के लिए समन जारी किया गया। फरवरी 2024 में राहुल गांधी सुलतानपुर की अदालत में पेश हुए थे, जहां उन्हें जमानत मिली थी। इसके बाद मामले में उनका बयान दर्ज किया गया और आरोपों को लेकर कानूनी कार्यवाही आगे बढ़ी। अक्टूबर 2026 में अदालत ने फैसले के लिए तारीख तय की। आखिरकार 26 अक्टूबर को निर्णय सुनाया गया और राहुल गांधी को दोषमुक्त कर दिया गया। Amit Shah Case: सोहराबुद्दीन मामले से क्या था संबंध? राहुल गांधी के बयान का संदर्भ सोहराबुद्दीन शेख मुठभेड़ मामले से जुड़ा था। इस मामले में अमित शाह को वर्ष 2014 में मुंबई की विशेष CBI अदालत ने आरोपमुक्त कर दिया था। इसके कई साल बाद राहुल गांधी की टिप्पणी को लेकर मानहानि की शिकायत दर्ज हुई। यानी अमित शाह से जुड़े पुराने आपराधिक मामले और राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मानहानि की शिकायत दो अलग-अलग कानूनी मामले थे। सुलतानपुर कोर्ट का ताजा फैसला राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज मानहानि की शिकायत से संबंधित है। Rahul Gandhi को मिली कानूनी राहत, जानिए आगे क्या? इस फैसले से राहुल गांधी को अमित शाह पर टिप्पणी से जुड़े मामले में राहत मिली है। यह मामला लंबे समय से अदालत में चल रहा था और इसके फैसले का इंतजार किया जा रहा था। अदालत के निर्णय को समझते समय यह ध्यान रखना जरूरी है कि दोषमुक्ति का फैसला इसी मामले तक सीमित है। राहुल गांधी के खिलाफ दूसरे मामलों की स्थिति पर इसका अपने आप कोई असर नहीं माना जा सकता। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!
राष्ट्रपति भवन

North Block Fire: राष्ट्रपति भवन के पास नॉर्थ ब्लॉक में लगी आग, धुएं का गुबार देख मचा हड़कंप

नई दिल्ली में राष्ट्रपति भवन के पास स्थित नॉर्थ ब्लॉक में आग लगने की खबर से इलाके में हलचल मच गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, आग लगने के बाद आसमान में धुएं का गुबार दिखाई दिया। घटना की सूचना मिलने पर दमकल की कई गाड़ियों को मौके के लिए रवाना किया गया। फिलहाल आग लगने की वजह और इससे हुए नुकसान को लेकर विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। घटना में किसी के घायल होने की भी आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। North Block Fire: धुएं का गुबार दिखने से बढ़ी चिंता नॉर्थ ब्लॉक दिल्ली की महत्वपूर्ण सरकारी इमारतों में से एक है। ऐसे में यहां आग लगने की खबर सामने आने के बाद घटना को लेकर चिंता बढ़ गई। शुरुआती जानकारी में बताया गया कि मौके पर दमकल की कई गाड़ियां भेजी गईं, ताकि आग पर काबू पाने के लिए जरूरी कदम उठाए जा सकें। हालांकि, आग इमारत के किस हिस्से में लगी और उस समय वहां कितने लोग मौजूद थे, इसकी जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है। नॉर्थ ब्लॉक में आग कैसे लगी? फिलहाल आग लगने के कारणों का पता नहीं चल पाया है। शॉर्ट सर्किट या किसी अन्य वजह को लेकर भी कोई आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। आग लगने के सही कारणों का पता जांच के बाद ही चल सकेगा। इसके अलावा, आग से सरकारी कार्यालयों, दस्तावेजों या इमारत को कितना नुकसान पहुंचा है, इस बारे में भी फिलहाल कोई पुष्ट जानकारी उपलब्ध नहीं है। राष्ट्रपति भवन के पास स्थित है नॉर्थ ब्लॉक नॉर्थ ब्लॉक राजधानी दिल्ली के प्रमुख प्रशासनिक भवनों में शामिल है। यह ऐतिहासिक इमारत राष्ट्रपति भवन के नजदीक स्थित है और लंबे समय तक केंद्र सरकार के महत्वपूर्ण मंत्रालयों के कार्यालयों का केंद्र रही है। इस इलाके में आग जैसी घटना होने पर दमकल विभाग और संबंधित एजेंसियों की भूमिका अहम हो जाती है। फिलहाल लोगों की नजर आग पर काबू पाने की कार्रवाई और अधिकारियों की ओर से जारी होने वाली जानकारी पर है। North Block Fire Latest Update: आधिकारिक जानकारी का इंतजार नॉर्थ ब्लॉक में आग लगने की घटना को लेकर अभी कई अहम सवालों के जवाब मिलने बाकी हैं। आग लगने की वजह क्या थी, दमकल की टीमों को स्थिति पर काबू पाने में कितना समय लगा और कितना नुकसान हुआ—इन सभी बिंदुओं पर आधिकारिक जानकारी का इंतजार है। हर ख़बर, हर पल — सिर्फ़ देशहरपल पर!

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