इंदौर के मोती तबेला इलाके में शासकीय भूमि पर छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने के लिए तैयार किए जा रहे ढांचे को नगर निगम द्वारा हटाए जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। कार्रवाई से नाराज स्थानीय रहवासी, क्षेत्रीय पार्षद और हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता गुरुवार रात पंढरीनाथ थाने पहुंचे।
प्रदर्शनकारियों ने थाने के बाहर नारेबाजी करते हुए निर्माणाधीन चबूतरा तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाकर मामला शांत कराया।
सरकारी जमीन पर तैयार किया गया था चबूतरा
जानकारी के मुताबिक, मोती तबेला क्षेत्र में शासकीय भूमि पर स्थानीय लोगों और जनप्रतिनिधियों की ओर से छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने की तैयारी की जा रही थी। इसके लिए मौके पर चबूतरा बनाया गया था।
गुरुवार को नगर निगम की टीम मौके पर पहुंची और निर्माणाधीन ढांचे को ध्वस्त कर दिया। स्थानीय लोगों का कहना है कि कार्रवाई से पहले उन्हें कोई सूचना नहीं दी गई। ढांचा हटाए जाने की जानकारी सामने आने के बाद इलाके में विरोध शुरू हो गया।
पार्षद के नेतृत्व में थाने पहुंचे प्रदर्शनकारी
क्षेत्रीय पार्षद रूपाली पंडित के नेतृत्व में बड़ी संख्या में रहवासी और विभिन्न हिंदूवादी संगठनों के कार्यकर्ता एकत्र हुए। इसके बाद सभी जुलूस के रूप में पंढरीनाथ थाने पहुंचे।
प्रदर्शनकारियों ने चबूतरा तोड़ने की कार्रवाई में शामिल लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। साथ ही प्रतिमा स्थापना को लेकर अनुमति देने की मांग भी रखी।
प्रतिमा स्थापना की अनुमति देने की मांग
पार्षद रूपाली पंडित और प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा स्थापित करने के लिए विधिवत अनुमति दी जाए। उन्होंने बिना संवाद के कार्रवाई किए जाने का आरोप लगाते हुए संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।
पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को समझाकर मामला शांत कराया। पार्षद की ओर से मामले को लेकर पुलिस को लिखित शिकायत भी दी गई है।



