अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और घरेलू स्तर पर पेट्रोल-डीजल की कीमतें स्थिर रहने के बीच निजी ईंधन कंपनियों ने कुछ आउटलेट्स पर बिक्री सीमित कर दी है। रिपोर्टों के मुताबिक, Jio-bp और नायरा एनर्जी ने बढ़ी मांग और सप्लाई दबाव के बीच डीजल-पेट्रोल की बिक्री पर सीमा लगाई है।
नायरा के पंपों पर 200 लीटर डीजल और 30 लीटर पेट्रोल की सीमा
रिपोर्ट के अनुसार, नायरा एनर्जी के कुछ आउटलेट्स पर एक वाहन को अधिकतम 200 लीटर डीजल और 30 लीटर पेट्रोल दिया जा रहा है। Jio-bp ने भी कुछ स्थानों पर डीजल की बिक्री सीमित की है, हालांकि कंपनी ने अपनी सटीक सीमा सार्वजनिक नहीं की है।
कंपनियों की ओर से बिक्री सीमित करने के पीछे बढ़ी मांग, रिटेल और बल्क डीजल की कीमतों के बीच अंतर तथा इन्वेंट्री पर दबाव को वजह बताया गया है। रिपोर्टों में यह भी कहा गया है कि कुछ ग्राहक बल्क खरीद के बजाय सस्ते रिटेल ईंधन की ओर आ रहे हैं।
महंगे क्रूड और स्थिर कीमतों से बढ़ा दबाव
अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में हाल के दिनों में तेज बढ़ोतरी हुई है। 29 सितंबर को ब्रेंट क्रूड करीब 105 डॉलर प्रति बैरल के आसपास कारोबार कर रहा था।
वहीं, भारत में पेट्रोल-डीजल की घरेलू खुदरा कीमतें मई के बाद से नहीं बदली हैं। इससे तेल विपणन कंपनियों के मार्जिन पर दबाव बढ़ा है। ICRA के सितंबर के आकलन के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल पर करीब ₹8 प्रति लीटर और डीजल पर करीब ₹9 प्रति लीटरका नकारात्मक मार्केटिंग मार्जिन हो रहा था।
पहले ₹5 और ₹23 प्रति लीटर तक का अनुमान था नुकसान
सितंबर की शुरुआत में जब ब्रेंट क्रूड 100 डॉलर प्रति बैरल के पार गया था, तब ICRA ने पेट्रोल पर करीब ₹5 प्रति लीटर और डीजल पर करीब ₹23 प्रति लीटर के नकारात्मक मार्जिन का अनुमान लगाया था। इसके बाद कच्चे तेल की कीमतों में और तेजी आई।
सरकारी कंपनियों पर भी बढ़ा वित्तीय दबाव
ICRA के मुताबिक, इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम जैसी सरकारी तेल कंपनियों को पेट्रोल, डीजल और LPG की बिक्री पर मिलाकर करीब ₹530 करोड़ रोजाना का नुकसान हो रहा था। घरेलू LPG पर भी करीब ₹300 प्रति सिलेंडर की अंडर-रिकवरी का अनुमान लगाया गया था।
ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर असर
निजी पेट्रोल पंपों पर बिक्री की सीमा का असर खास तौर पर भारी वाहनों और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर पड़ सकता है। डीजल की मात्रा सीमित होने के कारण लंबी दूरी के ट्रक और अन्य व्यावसायिक वाहन चालकों को रास्ते में ज्यादा बार ईंधन भराने की जरूरत पड़ सकती है।
इस बीच, निजी पंपों पर उपलब्धता सीमित होने से ग्राहक सरकारी कंपनियों के पेट्रोल पंपों की ओर भी रुख कर रहे हैं। रिपोर्टों के अनुसार, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियां भी मांग और इन्वेंट्री की स्थिति पर नजर रख रही हैं।
