खंडवा रेलवे स्टेशन पर मादक पदार्थ चरस के साथ पकड़े गए आरोपी को कोर्ट ने 10 साल के कारावास की सजा सुनाई है। द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अनिल चौधरी की अदालत ने आरोपी सीमरूद्दीन शेख पिता सरफुद्दीन शेख (35), निवासी इंदौर को एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी ठहराते हुए 10 साल की सजा और एक लाख रुपए के जुर्माने से दंडित किया।
मामले में अभियोजन की ओर से अतिरिक्त सहायक निदेशक अभियोजन रामदास जमरे ने पैरवी की।
प्लेटफॉर्म नंबर-6 के पीछे पकड़ा गया था आरोपी
अभियोजन के अनुसार, घटना 3 जून 2024 की दरम्यानी रात की है। कोतवाली खंडवा पुलिस को सूचना मिली थी कि रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-6 के पीछे काले रंग के कपड़े पहने एक संदिग्ध व्यक्ति मौजूद है। उसके पास कपड़े की थैली में मादक पदार्थ होने और ट्रेन से भागने की कोशिश करने की सूचना पुलिस को मिली थी।
सूचना के बाद टीआई दिलीपसिंह देवड़ा के नेतृत्व में पुलिस टीम मौके पर पहुंची। टीम में एसआई चंद्रकांत सोनवने, एएसआई जितेंद्र तिवारी, प्रधान आरक्षक लतेश तोमर, अमित यादव समेत अन्य पुलिसकर्मी शामिल थे।
पुलिस ने मुखबिर द्वारा बताए स्थान पर पहुंचकर प्लेटफॉर्म नंबर-6 की सीढ़ियों के सामने संदिग्ध व्यक्ति की घेराबंदी कर उसे पकड़ लिया।
थैली से मिली 3.7 किलो चरस
पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम सीमरूद्दीन शेख बताया। पुलिस ने उसके पास मौजूद कपड़े की थैली की तलाशी ली। इसमें पॉलीथिन के अंदर काले-कत्थई रंग का मादक पदार्थ मिला।
आरोपी ने पुलिस को बताया कि यह चरस है। इलेक्ट्रॉनिक कांटे से वजन करने पर पॉलीथिन समेत इसका कुल वजन 3 किलो 700 ग्राम पाया गया। पुलिस के अनुसार, बरामद चरस की अनुमानित कीमत 18 लाख 50 हजार रुपए थी।
पुलिस ने चरस के अलावा आरोपी का मोबाइल फोन और मादक पदार्थ रखने के लिए इस्तेमाल की गई कपड़े की थैली भी जब्त की। कार्रवाई पूरी करने के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया।
जांच के बाद कोर्ट में पेश किया गया चालान
पुलिस ने मामले की जांच पूरी करने के बाद आरोपी के खिलाफ अभियोग पत्र न्यायालय में पेश किया। सुनवाई के दौरान अभियोजन ने आरोपी के कब्जे से चरस की बरामदगी, मौके की कार्रवाई और अन्य साक्ष्य न्यायालय के सामने रखे।
मामले में प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर द्वितीय अपर सत्र न्यायाधीश अनिल चौधरी की अदालत ने आरोपी को एनडीपीएस एक्ट के तहत दोषी ठहराया। कोर्ट ने उसे 10 साल के कठोर कारावास और 1 लाख रुपए के अर्थदंड की सजा सुनाई।



