भोपाल। मध्य प्रदेश में लाड़ली बहना योजना की राशि से महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों और कारोबार में भागीदारी बढ़ने का दावा किया गया है। योजना शुरू होने से पहले प्रदेश में 44% महिलाएं कारोबार से जुड़ी थीं। अब यह आंकड़ा बढ़कर 61% हो गया है। यानी कारोबार करने वाली महिलाओं के अनुपात में 17 प्रतिशत अंक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
यह दावा अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के सेंटर फॉर इकोनॉमी, ट्रेड एंड इनोवेशन के सर्वे में किया गया है। सर्वे में शामिल हर पांच में से चार महिलाओं ने घरेलू आमदनी बढ़ने की बात कही। वहीं, हर 10 में से छह महिलाओं ने अपने उद्यम को मुनाफे में बताया।
गौरतलब है कि 2023 के विधानसभा चुनाव में लाड़ली बहना योजना को भाजपा की जीत में अहम भूमिका निभाने वाली योजनाओं में शामिल माना गया था।
41 किस्तों में महिलाओं के खातों में पहुंचे 67,270 करोड़ रुपये
रिपोर्ट के मुताबिक, लाड़ली बहना योजना से महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों के साथ उनकी बचत की आदत में भी बदलाव आया है। सर्वे के दूसरे चरण में शामिल 29% महिलाएं पहले केवल गृहिणी थीं। योजना शुरू होने के बाद उन्होंने नया व्यवसाय शुरू किया या परिवार के मौजूदा कारोबार में सहयोग करना शुरू किया।
जून 2023 से अक्टूबर 2026 तक योजना की 41 किस्तों के जरिए महिलाओं के बैंक खातों में कुल 67,270 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए जा चुके हैं। नवंबर में योजना की 42वीं किस्त जारी की जाएगी।
47.4% महिलाओं ने योजना की राशि मिलने के बाद शुरू किया काम
सर्वे में महिलाओं के कारोबार और बचत से जुड़े कई अहम आंकड़े सामने आए हैं।
- 29% महिलाएं: पहले केवल गृहिणी थीं, लेकिन योजना के बाद व्यवसाय शुरू किया या परिवार के कारोबार में हाथ बंटाने लगीं।
- 47.4% महिलाएं: उन्होंने लाड़ली बहना योजना की राशि मिलने के बाद ही अपना काम शुरू किया।
- 59.5% महिलाएं: उन्होंने बताया कि योजना से मिली राशि सीधे कारोबार में लगाई।
- 21.3% महिलाएं: उन्होंने पहली बार बचत करना शुरू किया।
- 19.8% महिलाएं: उनकी बचत की राशि में बढ़ोतरी हुई।
10 संभागों के 13 जिलों में हुआ सर्वे
अटल बिहारी वाजपेयी सुशासन एवं नीति विश्लेषण संस्थान के सर्वे में प्रदेश के 10 संभागों के 13 जिलों और 26 ब्लॉकों को शामिल किया गया। सर्वे का उद्देश्य योजना के बाद महिलाओं की आर्थिक गतिविधियों, कारोबार में भागीदारी और बचत की आदतों में आए बदलाव को समझना था।
एक्सपर्ट की राय: नकद सहायता के साथ प्रशिक्षण और मेंटरशिप भी जरूरी
IIM इंदौर के रणनीति एवं अंतरराष्ट्रीय व्यापार विभाग के प्रोफेसर डॉ. प्रशांत सलवान के मुताबिक, मुफ्त योजनाएं गरीबी कम करने और अल्पकाल में आय व बचत बढ़ाने में कुछ हद तक प्रभावी हो सकती हैं। हालांकि, केवल नकद सहायता से महिलाओं का स्थायी आर्थिक सशक्तिकरण या टिकाऊ कारोबार खड़ा करना संभव नहीं है।
उन्होंने कहा कि महिलाओं को प्रशिक्षण, मार्गदर्शन यानी मेंटरशिप और बाजार तक पहुंच उपलब्ध कराना भी जरूरी है। भारत की मुद्रा, स्टैंड-अप इंडिया और पीएमईजीपी जैसी योजनाओं में भी नीतिगत रूपरेखा और जमीनी स्तर पर उनके क्रियान्वयन के बीच अंतर सामने आया है।

