₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर प्रस्तावित 0.4% मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर सरकार और व्यापारी संगठनों के बीच विवाद बढ़ गया है। सरकार के सूत्रों के मुताबिक, यह शुल्क ग्राहकों से नहीं लिया जाएगा और MDR से मिलने वाली पूरी रकम UPI सिस्टम से जुड़े बैंकों और दूसरी संस्थाओं के बीच बांटी जाएगी।
सरकारी सूत्रों ने विपक्ष के उस आरोप को भी खारिज किया है, जिसमें MDR को ग्राहकों पर लगाया जाने वाला टैक्स बताया गया था। सरकार का कहना है कि MDR न टैक्स है, न सेस और न ही सरचार्ज।
MDR की रकम कैसे बांटी जाएगी?
सरकार से जुड़े सूत्रों के अनुसार, कुल MDR की रकम का वितरण इस तरह होगा:
- 40% — ग्राहक के बैंक को
- 30% — पेमेंट गेटवे को
- 20% — UPI ऐप को
- 10% — UPI ऐप के प्रायोजक बैंक को
सूत्रों के मुताबिक, MDR से मिलने वाली राशि का कोई हिस्सा सीधे सरकारी खजाने में नहीं जाएगा।
2 अक्टूबर को देशभर में ‘नो UPI डे’
प्रस्तावित UPI शुल्क के विरोध में व्यापारी संगठनों ने 2 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का ऐलान किया है। इस दिन देशभर के व्यापारी और दुकानदार UPI से पेमेंट नहीं लेने की योजना बना रहे हैं।
विरोध के दौरान दुकानों पर लगे UPI QR कोड, स्कैनर, साउंड बॉक्स और दूसरे डिजिटल पेमेंट डिवाइस को काले कपड़े से ढककर विरोध जताने की बात कही गई है।
व्यापारी संगठनों की मांग है कि 15 अक्टूबर से लागू होने वाले प्रस्तावित चार्ज को वापस लिया जाए।
500 से ज्यादा व्यापारी संगठन आंदोलन में शामिल होने का दावा
महाराष्ट्र चैंबर ऑफ कॉमर्स, इंडस्ट्री एंड एग्रीकल्चर (MACCIA) के अध्यक्ष रवींद्र मंगवे के मुताबिक, यह आंदोलन सिर्फ महाराष्ट्र तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने दावा किया कि देशभर के 500 से ज्यादा प्रमुख व्यापारी संगठन इसमें शामिल होंगे।
व्यापारी संगठनों का कहना है कि रिटेल व्यापारी और डिस्ट्रीब्यूटर कम मार्जिन पर काम करते हैं। ऐसे में डिजिटल पेमेंट पर अतिरिक्त शुल्क लगने से उनकी लागत बढ़ सकती है।
व्यापारियों ने UPI चार्ज का विरोध क्यों किया?
व्यापारी संगठनों की ओर से दिए गए तर्कों के मुताबिक:
- कम मार्जिन वाले कारोबार पर अतिरिक्त लागत का असर पड़ेगा।
- डिजिटल पेमेंट का उद्देश्य लेनदेन को आसान बनाना है, न कि व्यापारियों पर अतिरिक्त बोझ डालना।
- UPI ने कैश के इस्तेमाल को कम करने में भूमिका निभाई है।
- व्यापारियों का कहना है कि वे डिजिटल और पारदर्शी भुगतान व्यवस्था को बढ़ावा दे रहे हैं।
- संगठनों ने चेतावनी दी है कि फैसला वापस नहीं लिया गया तो आंदोलन को और तेज किया जा सकता है।
बड़े और छोटे व्यापारियों के लिए अलग नियम
प्रस्तावित व्यवस्था में व्यापारियों को उनके UPI कलेक्शन के आधार पर अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया है।
बड़े व्यापारियों पर 0.4% MDR: जिन व्यापारियों की महीने में UPI से कमाई ₹1 लाख से ज्यादा है, उन्हें ₹2,000 से अधिक के प्रत्येक पर्सन-टू-मर्चेंट पेमेंट पर 0.4% MDR + GST देना होगा।
छोटे व्यापारियों को राहत: जिन व्यापारियों का मासिक UPI कलेक्शन ₹1 लाख तक है, उन पर ₹2,000 से ज्यादा के पेमेंट पर भी MDR नहीं लगेगा।
लगातार तीन महीने का नियम: अगर कोई छोटा व्यापारी लगातार तीन महीने तक ₹1 लाख से ज्यादा का UPI कलेक्शन करता है, तो बैंक उसे बड़े मर्चेंट की कैटेगरी में डाल सकते हैं।
₹2,000 तक के पेमेंट पर कोई शुल्क नहीं
बड़े व्यापारियों को भी ₹2,000 या उससे कम के हर UPI पेमेंट पर MDR नहीं देना होगा। ₹2,000 की सीमा पूरे दिन की बिक्री पर नहीं, बल्कि हर एक ट्रांजैक्शन पर लागू होगी।
वहीं, ₹75,000 या उससे अधिक के ट्रांजैक्शन पर MDR की अधिकतम सीमा ₹300 + GST बताई गई है।
कुछ सेक्टर में सिर्फ ₹5 की फ्लैट फीस
पेट्रोल पंप, रेलवे, बिल पेमेंट, टेलीकॉम, इंश्योरेंस और एजुकेशन से जुड़े व्यापारियों के लिए ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर 0.4% MDR के बजाय ₹5 की फ्लैट फीस प्रस्तावित है।
व्यापारी संगठनों के मुताबिक, यह शुल्क क्रेडिट कार्ड के 1.5% से 2.5% और डेबिट कार्ड के 0.90% तक के शुल्क की तुलना में कम है।
MDR क्या होता है?
MDR यानी Merchant Discount Rate वह शुल्क है जो व्यापारी डिजिटल पेमेंट सुविधा उपलब्ध कराने के लिए बैंक, पेमेंट गेटवे या पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर को देता है।
यह शुल्क डिजिटल पेमेंट के इंफ्रास्ट्रक्चर और लेनदेन नेटवर्क से जुड़ी लागत को पूरा करने के लिए लिया जाता है। इस व्यवस्था में शुल्क व्यापारी से लिया जाता है, ग्राहक से नहीं।



