छत्तीसगढ़ में MBBS के बाद एक साल की अनिवार्य ग्रामीण सेवा की व्यवस्था खत्म करने की तैयारी की जा रही है। इसके साथ ही ग्रामीण सेवा नहीं करने पर लगने वाला 25 लाख रुपए तक का जुर्माना और डिग्री रोकने की बाध्यता भी समाप्त हो सकती है। चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग इस संबंध में प्रस्ताव का ड्राफ्ट तैयार कर रहे हैं।
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत ग्रामीण अस्पतालों में उन्हीं डॉक्टरों की पोस्टिंग की जाएगी, जो अपनी इच्छा से वहां सेवा देना चाहेंगे। अन्य खाली पदों को भर्ती के जरिए भरने की योजना पर विचार किया जा रहा है। हालांकि, इस संबंध में अभी अंतिम फैसला नहीं हुआ है।
PG के बाद ग्रामीण सेवा का बॉन्ड रहेगा लागू
फिलहाल छत्तीसगढ़ में MBBS के बाद एक साल और पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) के बाद दो साल की ग्रामीण सेवा का बॉन्ड अनिवार्य है। तय अवधि तक सेवा नहीं देने पर MBBS डॉक्टरों को 25 लाख रुपए और PG डॉक्टरों को 50 लाख रुपए तक का जुर्माना देना पड़ता है।
आरक्षित वर्ग के डॉक्टरों के लिए यह राशि क्रमशः 20 लाख और 40 लाख रुपए है। जुर्माना जमा नहीं करने पर डिग्री रोकने का प्रावधान है। डिग्री नहीं मिलने से छत्तीसगढ़ मेडिकल काउंसिल में रजिस्ट्रेशन कराने में परेशानी होती है और डॉक्टर प्रैक्टिस नहीं कर पाते।
फिलहाल प्रस्ताव केवल MBBS के बाद अनिवार्य ग्रामीण सेवा समाप्त करने से जुड़ा है। PG के बाद दो साल की ग्रामीण सेवा की बाध्यता खत्म करने को लेकर अभी कोई संकेत नहीं मिले हैं।
जूनियर डॉक्टरों की हड़ताल के बाद शुरू हुई कवायद
ग्रामीण सेवा के बॉन्ड में राहत देने की मांग जूनियर डॉक्टरों की राज्यव्यापी हड़ताल के दौरान उठाई गई थी। हड़ताल के दौरान डॉक्टरों ने इस व्यवस्था में बदलाव की मांग की थी।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने जूनियर डॉक्टरों से चर्चा के दौरान उचित निर्णय लेने का आश्वासन दिया था। इसके बाद चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य विभाग ने अनिवार्य ग्रामीण सेवा की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव को लेकर ड्राफ्ट तैयार करने की प्रक्रिया शुरू की।
हर सत्र में 800 से ज्यादा डॉक्टरों की होती है पोस्टिंग
रिपोर्ट के मुताबिक, हर सत्र में 800 से अधिक डॉक्टर अनिवार्य ग्रामीण सेवा के तहत अस्पतालों में पदस्थ किए जाते हैं। इसके बावजूद दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की उपलब्धता एक बड़ी चुनौती बनी हुई है।
जानकारी के अनुसार, कई डॉक्टर ग्रामीण क्षेत्रों में पोस्टिंग मिलने के बाद अलग-अलग तरीकों से अपना तबादला करवा लेते हैं। विभागीय स्तर पर भी इस समस्या की जानकारी है। ऐसे में अब अस्थायी व्यवस्था के बजाय ग्रामीण अस्पतालों में डॉक्टरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के स्थायी विकल्प पर विचार किया जा रहा है।
खाली पद भरने की व्यवस्था पर मंथन
अनिवार्य ग्रामीण सेवा की बाध्यता समाप्त होने की स्थिति में ग्रामीण अस्पतालों के खाली पदों को किस तरह भरा जाएगा, इस पर अभी विचार चल रहा है। विभागों का जोर भर्ती प्रक्रिया के जरिए इन पदों को भरने पर है।
प्रस्तावित बदलाव से MBBS के बाद ग्रामीण सेवा नहीं करने वाले डॉक्टरों को बॉन्ड और जुर्माने से राहत मिल सकती है। हालांकि, ग्रामीण क्षेत्रों में डॉक्टरों की कमी दूर करने के लिए सरकार क्या व्यवस्था लागू करेगी, यह अंतिम निर्णय और विभागीय योजना सामने आने के बाद स्पष्ट होगा।






































