जियो-बीपी और नायरा एनर्जी के कुछ पेट्रोल पंपों पर डीजल की बिक्री को लेकर लिमिट तय किए जाने की बात सामने आई है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जियो-बीपी के कुछ पंपों पर एक वाहन को एक बार में अधिकतम 50 लीटर तक डीजल दिया जा रहा है। वहीं, नायरा एनर्जी के कुछ पंपों पर 70 से 200 लीटर तक की सीमा बताई जा रही है।
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच कच्चे तेल की कीमतों में तेजी आई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक ब्रेंट क्रूड की कीमत 21 सितंबर को 117.4 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इस स्थिति का असर तेल कंपनियों के मार्जिन पर पड़ा है।
वहीं, देश में 90% से ज्यादा पेट्रोल पंप संचालित करने वाली सरकारी तेल कंपनियों—इंडियन ऑयल, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम—के पंपों पर ऐसी किसी डीजल सीमा की जानकारी नहीं है।
सवाल 1: जियो-बीपी और नायरा पंपों पर कितनी लिमिट?
जियो-बीपी: रिपोर्ट्स के अनुसार, कुछ पंपों पर एक वाहन को एक बार में अधिकतम 50 लीटर डीजल दिया जा रहा है। कुछ पंपों पर प्रतिदिन 6,000 लीटर से अधिक डीजल की बिक्री नहीं करने की सीमा भी बताई गई है।
नायरा एनर्जी: कंपनी के कुछ पेट्रोल पंपों पर एक बार में 70 से 200 लीटर तक डीजल देने की सीमा बताई गई है।
सवाल 2: ट्रकों और लॉजिस्टिक्स पर क्या असर?
सरकारी तेल कंपनियों के पंपों पर सामान्य रूप से डीजल उपलब्ध होने के बावजूद लंबी दूरी तय करने वाले ट्रकों और मालवाहक वाहनों को कुछ इलाकों में परेशानी हो सकती है।
खासकर ग्रामीण क्षेत्रों और हाईवे के उन हिस्सों में जहां पेट्रोल पंप काफी दूरी पर हैं, वहां वाहन चालकों को एक बार में जरूरत के मुताबिक डीजल नहीं मिल पाने से यात्रा प्रभावित हो सकती है।
सवाल 3: कच्चे तेल की कीमत कितनी बढ़ी?
रिपोर्ट के मुताबिक, ब्रेंट क्रूड की कीमत 21 सितंबर को 117.4 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गई। इस साल इसकी औसत कीमत करीब 66 डॉलर प्रति बैरल बताई गई है।
यानी मौजूदा कीमत साल के औसत स्तर से काफी ऊपर पहुंच गई है।
सवाल 4: क्या पेट्रोल-डीजल महंगा होगा?
कच्चे तेल की कीमत बढ़ने के बावजूद फिलहाल आम उपभोक्ताओं के लिए पेट्रोल और डीजल की खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी नहीं की गई है।
यदि कच्चे तेल की कीमत लंबे समय तक 110 से 120 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बनी रहती है, तो तेल कंपनियों पर बढ़ते दबाव के बीच खुदरा कीमतों में बदलाव की संभावना पर विचार किया जा सकता है।
सवाल 5: तेल कंपनियों को कितना नुकसान?
रेटिंग एजेंसी इक्रा के अनुमान के मुताबिक, मौजूदा परिस्थितियों में तेल कंपनियों को डीजल की बिक्री पर करीब 9 रुपए प्रति लीटर और पेट्रोल पर करीब 8 रुपए प्रति लीटर का नुकसान हो रहा है।
रिपोर्ट के अनुसार, हिंदुस्तान पेट्रोलियम, भारत पेट्रोलियम और इंडियन ऑयल को मिलाकर रोजाना करीब 530 करोड़ रुपए का नुकसान होने का अनुमान है।
इसी तरह के मार्जिन दबाव के बीच कुछ निजी कंपनियों की ओर से डीजल की बिक्री सीमित करने की बात सामने आई है।
सवाल 6: डीजल की किल्लत की वजह क्या है?
डीजल की उपलब्धता पर दबाव की एक वजह कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों के साथ सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों को भी बताया जा रहा है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, सऊदी अरब की कंपनी सऊदी अरामको की पाइपलाइन पर हमले के बाद भारत को कच्चे तेल की आपूर्ति प्रभावित हुई है। इसके चलते भारतीय तेल कंपनियों को दूसरे स्रोतों से अपेक्षाकृत महंगा तेल खरीदना पड़ रहा है।
हालांकि, अधिकारियों के अनुसार देश में डीजल खत्म नहीं हुआ है। कुछ निजी कंपनियों ने घाटे से बचने के लिए सीमित अवधि के लिए कुछ पंपों पर बिक्री कम करने का फैसला किया है।
नोट: डीजल की बिक्री सीमा, कंपनियों के नुकसान और कच्चे तेल की सप्लाई से जुड़े आंकड़े रिपोर्ट्स और उपलब्ध अनुमानों पर आधारित हैं।



