मध्यप्रदेश के इंदौर में करंट लगने से एक युवक की मौत के बाद सिस्टम की बड़ी लापरवाही सामने आई है। 21 वर्षीय युवक के शव का पोस्टमॉर्टम कराने के लिए परिजन करीब 9 घंटे तक बाइक पर शव लेकर भटकते रहे। इस दौरान उन्होंने लगभग 25 किलोमीटर का सफर तय किया। आरोप है कि सूचना देने के बावजूद पुलिस ने समय पर जिम्मेदारी नहीं निभाई।
निर्माणाधीन मकान में लगा करंट
जानकारी के मुताबिक, अलवासा गांव निवासी अंकित फुलेरिया (21) को 11 मई को निर्माणाधीन मकान में सरिए की कटिंग के दौरान करंट लग गया था। गंभीर हालत में उसका ममेरा भाई नीलेश और अन्य लोग उसे बाइक से Aurobindo Hospital लेकर पहुंचे।
अस्पताल में डॉक्टरों ने जांच के बाद अंकित को मृत घोषित कर दिया।
एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल तक भटकते रहे परिजन
इसके बाद परिजन शव लेकर सांवेर के जैन अस्पताल पहुंचे। वहां भी डॉक्टरों ने युवक को मृत घोषित कर दिया। इस दौरान परिजनों ने हंगामा किया, जिसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने पुलिस को सूचना दी।
सांवेर पुलिस मौके पर पहुंची और जांच में पता चला कि मामला Banganga Police Station क्षेत्र का है। आरोप है कि बाणगंगा पुलिस से संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन वहां से कोई जवाब नहीं मिला।
आखिरकार रात करीब 9 बजे परिजन दोबारा अरबिंदो अस्पताल पहुंचे और शव को मर्चुरी में रखवाया गया।
दूसरे दिन हंगामे के बाद हुआ पोस्टमॉर्टम
मंगलवार को पोस्टमॉर्टम में देरी होने पर परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा और उन्होंने अस्पताल में हंगामा किया। इसके बाद बाणगंगा थाने से पुलिसकर्मी मौके पर पहुंचे और जरूरी कागजी कार्रवाई शुरू की गई।
तब जाकर युवक का पोस्टमॉर्टम हो सका और अंतिम संस्कार किया गयापहले भी लग चुके हैं लापरवाही के आरोप

पहले भी लग चुके हैं लापरवाही के आरोप
अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले भी बाणगंगा पुलिस की कथित लापरवाही के कारण परिजन शव लेकर अस्पताल से लौट चुके हैं।
वहीं, अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त Ramsnehi Mishra ने कहा कि अगर जांच में पुलिस की लापरवाही सामने आती है, तो जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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