देश में बढ़ती बिजली खपत और अंतरराष्ट्रीय तेल संकट के बीच PM Modi की ऊर्जा बचाने की अपील का असर अब राज्यों में साफ नजर आने लगा है। केंद्र सरकार के संकेत के बाद कई राज्यों ने बिजली और ईंधन बचाने के लिए बड़े फैसले लेने शुरू कर दिए हैं। सरकारी दफ्तरों से लेकर VIP काफिलों तक में कटौती की जा रही है, ताकि आने वाले समय में ऊर्जा संकट का असर कम किया जा सके।
12 राज्यों में शुरू हुआ Power Saving अभियान
सूत्रों के अनुसार देश के करीब 12 राज्यों ने ऊर्जा बचत को लेकर नई गाइडलाइन जारी की हैं। सरकारी विभागों को साफ निर्देश दिए गए हैं कि गैरजरूरी बिजली इस्तेमाल पर रोक लगाई जाए और सरकारी वाहनों का उपयोग सीमित किया जाए।
कई दफ्तरों में ऑनलाइन मीटिंग को बढ़ावा दिया जा रहा है ताकि यात्रा कम हो और पेट्रोल-डीजल की बचत हो सके। वहीं, सरकारी भवनों में अतिरिक्त लाइटिंग और एसी के उपयोग पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है।
त्रिपुरा सरकार का बड़ा फैसला, सिर्फ 50% कर्मचारी आएंगे ऑफिस
ऊर्जा बचत की दिशा में सबसे बड़ा कदम त्रिपुरा सरकार ने उठाया है। राज्य सरकार ने फैसला लिया है कि सरकारी दफ्तरों में केवल 50 प्रतिशत कर्मचारी ही मौजूद रहेंगे, जबकि बाकी कर्मचारी घर से काम करेंगे।
सरकार का कहना है कि इस कदम से बिजली और ईंधन दोनों की बचत होगी। इसके अलावा दफ्तरों में एसी के सीमित इस्तेमाल और बिजली उपकरणों को जरूरत पड़ने पर ही चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं।
Andhra Pradesh और Goa में छोटा हुआ CM Convoy
आंध्र प्रदेश और गोवा सरकार ने भी ऊर्जा बचत को लेकर बड़ा संदेश दिया है। दोनों राज्यों में मुख्यमंत्री के काफिले में शामिल गाड़ियों की संख्या कम कर दी गई है।
सरकारी अधिकारियों का मानना है कि जब सरकार खुद बचत का उदाहरण पेश करेगी, तभी आम लोग भी इस अभियान को गंभीरता से लेंगे। आने वाले दिनों में अन्य राज्यों में भी VIP मूवमेंट को सीमित किया जा सकता है।
सरकारी भवनों में लागू हुई नई Guidelines
ऊर्जा बचत के लिए कई राज्यों ने सरकारी कार्यालयों में नई गाइडलाइन लागू की हैं। इनमें शामिल हैं:
- गैरजरूरी लाइट बंद रखना
- एसी का तापमान तय सीमा में रखना
- सजावटी लाइटिंग कम करना
- सरकारी वाहनों का सीमित उपयोग
- ऑनलाइन मीटिंग को प्राथमिकता देना
- ऑफिस टाइमिंग में बदलाव पर विचार
इन फैसलों का मकसद केवल खर्च कम करना नहीं, बल्कि देश में ऊर्जा संसाधनों का सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना भी है।
Oil Crisis ने बढ़ाई सरकार की चिंता
मध्य पूर्व में जारी तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भारत की चिंता बढ़ा दी है। भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम लोगों की जेब पर पड़ सकता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि हालात लंबे समय तक ऐसे ही बने रहे, तो आने वाले समय में और सख्त कदम देखने को मिल सकते हैं।
आम लोगों से भी की गई अपील
सरकार ने नागरिकों से भी बिजली और ईंधन बचाने की अपील की है। लोगों को सार्वजनिक परिवहन का ज्यादा इस्तेमाल करने, गैरजरूरी यात्रा से बचने और घरों में बिजली की खपत कम करने की सलाह दी गई है।
सरकार का मानना है कि छोटी-छोटी बचत भी देश के लिए बड़ा फर्क ला सकती है।
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