केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) 12वीं परीक्षा 2026 के नतीजों ने मध्यप्रदेश की स्कूली शिक्षा की तस्वीर साफ कर दी है। सरकारी मॉडल पर चलने वाले जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) और केंद्रीय विद्यालय (KV) ने शानदार प्रदर्शन किया, जबकि सबसे ज्यादा छात्रों वाले निजी स्कूलों का रिजल्ट सबसे कमजोर रहा।
दिलचस्प बात यह है कि निजी स्कूलों की फीस JNV और KV के मुकाबले कई गुना ज्यादा होती है। इसके बावजूद उनका प्रदर्शन उम्मीद के मुताबिक नहीं रहा।
भोपाल रीजन देश में 19वें स्थान पर
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, निजी स्कूलों के कमजोर परिणाम का असर भोपाल रीजन की रैंकिंग पर भी पड़ा। इसी वजह से मध्यप्रदेश का भोपाल रीजन देश के 22 CBSE रीजन में 19वें स्थान पर पहुंच गया।
वहीं, हर श्रेणी में छात्राओं ने छात्रों से बेहतर प्रदर्शन किया। भोपाल रीजन में लड़कियां करीब 5 प्रतिशत अंकों से आगे रहीं।
नवोदय विद्यालय सबसे आगे
Jawahar Navodaya Vidyalaya का प्रदर्शन सबसे बेहतर रहा।
- कुल पास प्रतिशत: 98.16%
- लड़के: 97.81%
- लड़कियां: 98.73%
विशेषज्ञों का कहना है कि नवोदय विद्यालयों की रेजिडेंशियल व्यवस्था, अनुशासित माहौल और नियमित अकादमिक मॉनिटरिंग इसकी सफलता की बड़ी वजह है।
केंद्रीय विद्यालयों ने भी बनाए शानदार रिकॉर्ड
Kendriya Vidyalaya Sangathan का रिजल्ट भी बेहद मजबूत रहा।
- कुल पास प्रतिशत: 97.90%
- लड़के: 97.66%
- लड़कियां: 98.11%
शिक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, प्रशिक्षित शिक्षक और नियमित मूल्यांकन केंद्रीय विद्यालयों की सफलता का मुख्य आधार हैं।
आदिवासी छात्रों के स्कूलों ने भी किया अच्छा प्रदर्शन
Eklavya Model Residential Schools (EMRS) का कुल पास प्रतिशत 85.47% रहा।
- लड़के: 83.46%
- लड़कियां: 86.89%
सीमित संसाधनों के बावजूद यह प्रदर्शन सकारात्मक माना जा रहा है। यहां भी छात्राओं ने बेहतर नतीजे दिए।
सरकारी स्कूलों के सामने संसाधनों की चुनौती
सरकारी स्कूलों का कुल पास प्रतिशत 80.60% रहा।
- लड़के: 79.86%
- लड़कियां: 80.88%
विशेषज्ञों का मानना है कि शिक्षकों की कमी और बुनियादी सुविधाओं की चुनौतियों के बावजूद सरकारी स्कूलों का प्रदर्शन संतोषजनक है।
सबसे ज्यादा छात्र, फिर भी सबसे कमजोर निजी स्कूल
सीबीएसई से संबद्ध निजी (इंडिपेंडेंट) स्कूलों में सबसे ज्यादा 61,419 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। इनमें से 61,242 छात्र परीक्षा में शामिल हुए।
इसके बावजूद इन स्कूलों का कुल पास प्रतिशत सिर्फ 76.85% रहा, जो सभी श्रेणियों में सबसे कम है।
- लड़के: 74.12%
- लड़कियां: 80.02%
विशेषज्ञों का मानना है कि व्यावसायिक दबाव, बोर्ड परीक्षा की कमजोर तैयारी और छात्रों पर बढ़ते मानसिक तनाव जैसे कारण निजी स्कूलों के खराब प्रदर्शन की वजह हो सकते हैं।
हर श्रेणी में लड़कियां आगे
भोपाल रीजन में:
- लड़कों का पास प्रतिशत: 76.87%
- लड़कियों का पास प्रतिशत: 82.19%
शिक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, नियमित पढ़ाई और परीक्षा को लेकर गंभीरता छात्राओं की सफलता का प्रमुख कारण है।
12% छात्र सभी विषयों में फेल
भोपाल रीजन के नतीजों में एक चिंताजनक तथ्य भी सामने आया। करीब 12.14% छात्र ऐसे रहे, जो सभी विषयों में फेल हो गए।
विशेषज्ञ इसे स्कूलों की अकादमिक निगरानी और सीखने की गुणवत्ता से जोड़कर देख रहे हैं। कोविड के बाद पढ़ाई के स्तर में आई गिरावट और डिजिटल डिस्ट्रैक्शन को भी इसकी बड़ी वजह माना जा रहा है।
देश का दूसरा सबसे बड़ा CBSE रीजन
भोपाल रीजन देश के सबसे बड़े CBSE रीजन में शामिल है। यहां 1291 संबद्ध स्कूल संचालित हैं। स्कूलों की संख्या के मामले में यह 1483 स्कूलों वाले लुधियाना रीजन के बाद दूसरा सबसे बड़ा रीजन है।
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