छत्तीसगढ़ में सरकारी स्कूलों के बाद अब शासकीय कॉलेजों के युक्तियुक्तकरण की तैयारी शुरू हो गई है। प्रदेश के 7 सरकारी कॉलेजों में पिछले सत्र में एक भी छात्र ने दाखिला नहीं लिया, जबकि 23 कॉलेजों में विद्यार्थियों की संख्या 100 तक नहीं पहुंची। इसके अलावा 38 कॉलेज ऐसे हैं, जहां स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर कुल दर्ज विद्यार्थियों की संख्या 200 से कम है।
इन आंकड़ों के बाद उच्च शिक्षा संचालनालय ने सरकारी कॉलेजों की स्थिति की समीक्षा शुरू कर दी है। इसके लिए सभी संबंधित कॉलेजों से पिछले पांच वर्षों के दाखिले, स्वीकृत सीटें, शिक्षकों के पद, रिक्त पदों और सरकारी बजट का ब्योरा मांगा गया है। कॉलेजों के आसपास स्थित दूसरे महाविद्यालयों की दूरी और स्कूली स्तर पर उपलब्ध विद्यार्थियों की संख्या की जानकारी भी जुटाई जा रही है।
चार श्रेणियों में बांटे गए कॉलेज
उच्च शिक्षा संचालनालय ने विद्यार्थियों की संख्या के आधार पर कॉलेजों को चार श्रेणियों में बांटा है। इनमें शून्य छात्र संख्या, 1 से 100, 101 से 200 और 201 से 300 विद्यार्थियों वाले कॉलेज शामिल हैं।
कॉलेजों को शैक्षणिक सत्र 2021-22 से 2025-26 तक का रिकॉर्ड उपलब्ध कराना होगा। इसमें बीए, बीकॉम, बीएससी सहित अलग-अलग पाठ्यक्रमों में स्वीकृत सीटों और दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की साल-दर-साल जानकारी मांगी गई है।
इसके साथ ही पिछले पांच वर्षों में छात्र संख्या में हुई वृद्धि या कमी का प्रतिशत भी बताना होगा। इससे पता चलेगा कि किन पाठ्यक्रमों में दाखिले बढ़े हैं और किनमें लगातार गिरावट आई है।
इस जानकारी के आधार पर कम छात्र संख्या वाले कॉलेजों की स्थिति का आकलन किया जाएगा। आगे चलकर कॉलेजों के विलय या अन्य बदलावों को लेकर फैसला लिया जा सकता है।
इन 23 कॉलेजों में 100 से कम छात्रों ने लिया दाखिला
शैक्षणिक सत्र 2025-26 में प्रदेश के 23 सरकारी कॉलेजों में 100 से कम विद्यार्थियों ने दाखिला लिया। इनमें शामिल हैं:
- नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय, बस्तर
- शासकीय नवीन महाविद्यालय, जटगा
- शासकीय आदर्श महाविद्यालय, कोरबा
- शासकीय नवीन महाविद्यालय, सिरी कुरुद
- नवीन शासकीय महाविद्यालय, बोरतरा, बेमेतरा
- नवीन शासकीय महाविद्यालय, बेलतरा, बिलासपुर
- वीरांगना रानी अवंती बाई लोधी शासकीय कला एवं वाणिज्य महाविद्यालय, रामाटोला, राजनांदगांव
- नवीन शासकीय कन्या महाविद्यालय, मनेन्द्रगढ़
- नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय, अंबिकापुर
- नवीन शासकीय महाविद्यालय, ठेलका, बेमेतरा
- शासकीय महाविद्यालय, कुटरू, बीजापुर
- दाऊ स्व. श्री मोहन लाल साहू शासकीय महाविद्यालय, बासीन, बालोद
- नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय, बिलासपुर
- वीर नांगुल दोरला शासकीय महाविद्यालय, आवापल्ली, बीजापुर
- नवीन शासकीय संगीत महाविद्यालय, दुर्ग
- शहीद डेबरीधुर शासकीय महाविद्यालय, तोंगपाल, सुकमा
- पं. दीनदयाल उपाध्याय स्नातक शासकीय महाविद्यालय, झलमला, कबीरधाम
- नवीन शासकीय महाविद्यालय, छोटे डोंगर, नारायणपुर
- नवीन शासकीय महाविद्यालय, घोटिया, बालोद
- शासकीय आदर्श आवासीय कन्या महाविद्यालय, सुकमा
- शासकीय नवीन महाविद्यालय, नागपुर, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर
- नवीन शासकीय महाविद्यालय, केरा, जांजगीर
- शासकीय नवीन महाविद्यालय, ओड़गी, सूरजपुर
इन 7 कॉलेजों में पिछले सत्र में नहीं हुआ एक भी दाखिला
पिछले शैक्षणिक सत्र में सात सरकारी कॉलेजों में दाखिले की संख्या शून्य दर्ज की गई। इनमें शामिल हैं:
- बीएएलएलबी नवीन शासकीय महाविद्यालय, कुरुद, धमतरी
- शासकीय महाविद्यालय, नगरनार, बस्तर
- शासकीय महाविद्यालय, किलेपाल, बस्तर
- नवीन संगीत महाविद्यालय, रायगढ़
- नवीन शासकीय शारीरिक शिक्षा स्नातक महाविद्यालय, रायगढ़
- शासकीय महाविद्यालय, फरसाबहार, जशपुर
- शासकीय महाविद्यालय, करडेगा, जशपुर
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इन कॉलेजों में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर दर्ज विद्यार्थियों की संख्या शून्य थी।
प्रदेश में 343 शासकीय कॉलेज, पांच साल में खुले 64 नए संस्थान
छत्तीसगढ़ में फिलहाल उच्च शिक्षा से संबद्ध 343 शासकीय महाविद्यालय हैं। वर्ष 2009-10 में इनकी संख्या 159 थी, जो समय के साथ बढ़ती गई। पिछले पांच वर्षों में प्रदेश में 64 नए सरकारी कॉलेज खोले गए।
हालांकि, कई कॉलेजों में भवन और बुनियादी सुविधाओं की कमी का मुद्दा भी सामने आता रहा है। कुछ संस्थान खुद के भवन के बिना चार-पांच कमरों में संचालित हो रहे हैं। कई जगह प्रयोगशालाओं और लाइब्रेरी जैसी सुविधाओं की उपलब्धता पर भी सवाल उठते रहे हैं।
क्षेत्रीय कार्यालयों से मांगी गई जानकारी
उच्च शिक्षा संचालनालय ने सभी क्षेत्रीय कार्यालयों के अपर संचालकों को पत्र भेजकर कॉलेजों की विस्तृत जानकारी मांगी है। इसमें विद्यार्थियों की संख्या, स्वीकृत सीटें, शिक्षकों की उपलब्धता, रिक्त पद, बजट और आसपास के अन्य कॉलेजों की स्थिति शामिल है।
फिलहाल विभाग आंकड़े जुटाकर कॉलेजों की स्थिति का आकलन कर रहा है। इस प्रक्रिया के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन संस्थानों में बदलाव या युक्तियुक्तकरण की जरूरत मानी जाती है।


