छत्तीसगढ़ के बिलासपुर रेल हादसे में घायल कॉलेज छात्रा महविश परवीन (19) ने एक सप्ताह तक जिंदगी और मौत से जूझने के बाद दम तोड़ दिया। इसके साथ ही इस दर्दनाक हादसे में मृतकों की संख्या 12 पहुंच गई है।
हादसे में गंभीर रूप से घायल थी छात्रा
महविश बिलासपुर के डीपी विप्र कॉलेज में बीएससी गणित की नियमित छात्रा थी। वह जांजगीर-चांपा जिले के अकलतरा की रहने वाली थी और बिलासपुर में रहकर पढ़ाई करती थी।
4 नवंबर को वह रिश्तेदार की शादी में शामिल होकर घर से कोरबा-बिलासपुर मेमू ट्रेन से लौट रही थी। लालखदान स्टेशन के पास यह ट्रेन मालगाड़ी से टकरा गई।
महविश ट्रेन के महिला कोच में सवार थी। टक्कर इतनी तेज थी कि उसके दोनों पैर लोहे के एंगल के नीचे दब गए और कई जगह फ्रैक्चर हो गए। झटके के कारण उसकी कॉलर बोन और पसलियों की चार हड्डियां भी टूट गईं।
घटना के तुरंत बाद उसे सिम्स लाया गया, जहां से हालत गंभीर होने पर अपोलो अस्पताल रेफर किया गया।
एक सप्ताह तक जिंदगी से लड़ती रही, फिर मौत ने छीन ली जिंदगी
अपोलो अस्पताल में डॉक्टर लगातार उसका इलाज कर रहे थे, लेकिन उसकी हालत बिगड़ती गई।
मंगलवार रात इलाज के दौरान महविश ने अंतिम सांस ली। बुधवार को पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया, जो उसे लेकर अकलतरा रवाना हो गए।
दिल की मरीज रह चुकी थी महविश, भाई की शादी में गई थी घर
महविश के चाचा मोहम्मद रहमान ने बताया कि बचपन में उसे हृदय संबंधी बीमारी थी और रायपुर के एस्कॉर्ट अस्पताल में उसकी ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी। इलाज के बाद वह पूरी तरह स्वस्थ हो चुकी थी।
12वीं के बाद उसे बिलासपुर के डीपी विप्र कॉलेज में दाखिला दिलाया गया था।
वह अपने चचेरे भाई की शादी के लिए घर गई थी — शादी 2 नवंबर को हुई थी और 4 नवंबर को वह बिलासपुर लौट रही थी, तभी यह हादसा हो गया।
मुआवजे के लिए फर्जी दावा करने की कोशिश का खुलासा
इस बीच, सोमवार को एक अन्य व्यक्ति पवन गढ़ेवाल को मृत अवस्था में सिम्स लाया गया।
साथ आए लोगों ने दावा किया कि वह भी इसी रेल हादसे में घायल था। लेकिन पुलिस जांच में पता चला कि पवन की कोई मेडिकल हिस्ट्री या इलाज का रिकॉर्ड नहीं मिला।
सीएसपी गगन कुमार ने बताया कि मुआवजे के लिए उसकी मौत को रेल हादसे से जोड़ने की कोशिश की जा रही थी।
रेल हादसे की जांच अब भी जारी है, जबकि मृतकों के परिजनों को मुआवजा और घायलों के इलाज की जिम्मेदारी रेलवे प्रशासन ने ली है।
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