इंदौर के भागीरथपुरा में दूषित पानी से हुई 36 मौतों के मामले में सोमवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच में सुनवाई हुई। मामले से जुड़ी जनहित याचिकाओं में याचिकाकर्ताओं के वकीलों की ओर से जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने और उसकी प्रति उपलब्ध कराने की मांग की गई थी।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता वाले एक सदस्यीय न्यायिक जांच आयोग की करीब 600 पन्नों की रिपोर्ट को हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड करने की अनुमति दे दी।
एक-दो दिन में वेबसाइट पर उपलब्ध हो सकती है रिपोर्ट
जांच रिपोर्ट अगस्त में हाईकोर्ट के समक्ष पेश की गई थी। रिपोर्ट को सीलबंद लिफाफे में प्रस्तुत किए जाने के बाद इसे सार्वजनिक करने पर रोक लगाई गई थी। हालांकि, मामले से जुड़े वकीलों को रजिस्ट्रार के समक्ष रिपोर्ट देखने और उसमें दर्ज बिंदुओं को नोट करने की अनुमति दी गई थी।
अब कोर्ट के निर्देश के बाद रिपोर्ट को स्कैन कर हाईकोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड किया जाएगा। रिपोर्ट एक-दो दिन में ऑनलाइन उपलब्ध होने की संभावना है। इसके साथ ही रिपोर्ट को सार्वजनिक करने पर लगी रोक भी हट गई है।
जनवरी में गठित हुआ था जांच आयोग
भागीरथपुरा दूषित पानी मामले की जांच के लिए हाईकोर्ट ने जनवरी 2026 में रिटायर्ड जस्टिस सुशील कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक सदस्यीय न्यायिक आयोग का गठन किया था। आयोग ने जांच पूरी करने के बाद करीब 600 पन्नों की रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश की। रिपोर्ट 25 अगस्त को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
रिपोर्ट सार्वजनिक किए जाने पर आपत्ति के बाद कोर्ट ने इसे फिलहाल सार्वजनिक नहीं करने का आदेश दिया था। इस दौरान संबंधित अधिवक्ताओं को रिपोर्ट का अवलोकन करने की अनुमति दी गई थी।
रिपोर्ट की प्रति उपलब्ध कराने की भी मांग
जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने और उसकी प्रति उपलब्ध कराने के लिए एडवोकेट मनीष यादव और एडवोकेट रितेश ईनानी के माध्यम से इंटरविनर याचिका दायर की गई थी। इसी मांग को लेकर कोर्ट में आवेदन पर सुनवाई हुई।
भागीरथपुरा मामले में कुल सात जनहित याचिकाएं दायर हैं। अब रिपोर्ट ऑनलाइन उपलब्ध होने के बाद इन याचिकाओं से जुड़े वकील जांच आयोग के निष्कर्षों का विस्तृत अध्ययन कर सकेंगे।
रिपोर्ट में 36 मौतों की जांच
जांच आयोग ने भागीरथपुरा में हुई 36 मौतों से जुड़े मामलों की जांच की है। रिपोर्ट के सार्वजनिक होने से पहले सामने आए मीडिया विवरणों के मुताबिक, आयोग ने 24 मौतों को दूषित पानी से सीधे जुड़ा बताया था, जबकि 12 मामलों में ऐसा संबंध निर्णायक रूप से स्थापित नहीं हो सका था। हालांकि, रिपोर्ट के आधिकारिक तौर पर ऑनलाइन उपलब्ध होने के बाद ही उसके पूरे निष्कर्षों की पुष्टि की जा सकेगी।

