बिलासपुर समेत छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों में सरकारी विभागों के कर्मचारियों ने अपनी 11 सूत्रीय मांगों को लेकर आंदोलन शुरू कर दिया है। हड़ताल के पहले ही दिन कलेक्ट्रेट सहित अधिकांश सरकारी दफ्तरों में सन्नाटा पसरा रहा, जिससे सरकारी कामकाज पूरी तरह प्रभावित हुआ। जरूरी कार्यों के लिए कार्यालय पहुंचे आम नागरिक भटकते नजर आए।
वहीं दूसरी ओर कर्मचारियों ने नेहरू चौक पर एकत्र होकर धरना-प्रदर्शन किया और शासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। कर्मचारी नेताओं ने साफ कहा कि यह आंदोलन लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर किया जा रहा है, जिसे सरकार लगातार नजरअंदाज करती रही है।
कर्मचारी नेताओं का आरोप: सरकार के रवैए से बढ़ा आक्रोश
कर्मचारी महासंघ के पदाधिकारियों ने कहा कि वे काफी समय से शांतिपूर्ण तरीके से अपनी मांगें रखते आ रहे थे, लेकिन शासन की ओर से केवल आश्वासन ही मिले। धरातल पर कोई ठोस फैसला नहीं होने के कारण कर्मचारियों में आक्रोश बढ़ता गया और अब उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ा। यह हड़ताल सोमवार से बुधवार तक चलेगी।
पहले ही दिन दिखा हड़ताल का असर
सोमवार को कलेक्ट्रेट समेत सभी प्रमुख सरकारी कार्यालयों में कर्मचारी नदारद रहे। इसके चलते फाइलों का निपटारा नहीं हो सका और आम जनता को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। कई लोग जरूरी काम के लिए बार-बार दफ्तरों के चक्कर काटते नजर आए।

नेहरू चौक पर प्रदर्शन, बेमियादी हड़ताल की चेतावनी
हड़ताल के पहले दिन कर्मचारियों ने नेहरू चौक पर प्रदर्शन किया। इस दौरान नेताओं ने कहा कि पुरानी पेंशन योजना कर्मचारियों के बुढ़ापे का सहारा थी, जिसे सरकार ने बंद कर दिया। अन्य मांगों को लेकर भी लगातार संवाद की कोशिश की गई, लेकिन सरकार की ओर से कोई सकारात्मक पहल नहीं हुई। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि अगर जल्द समाधान नहीं निकला, तो वे बेमियादी हड़ताल पर जाएंगे।
ये हैं अधिकारी-कर्मचारियों की 11 सूत्रीय मांगें
- पुरानी पेंशन योजना को तत्काल लागू किया जाए।
- संविदा एवं दैनिक वेतनभोगी कर्मचारियों का नियमितीकरण।
- लंबित महंगाई भत्ते के एरियर का नकद भुगतान।
- सातवें वेतन आयोग की वेतन विसंगतियों का निराकरण।
- सभी रिक्त पदों पर स्थायी भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
- कर्मचारियों के लिए कैशलेस चिकित्सा कार्ड सुविधा।
- प्रचार पर लगी पाबंदी हटाकर समय पर प्रचार की अनुमति।
- आउटसोर्सिंग प्रथा समाप्त कर सीधी भर्ती।
- महिला कर्मचारियों के लिए चाइल्ड केयर लीव का सरलीकरण।
- सेवाकाल में मृत कर्मचारियों के आश्रितों को तत्काल नियुक्ति।
- स्थानांतरण नीति को पारदर्शी और कर्मचारी हितैषी बनाया जाए।
