Lok Sabha सीटों की संख्या बढ़ाने से जुड़ा अहम बिल संसद में पास नहीं हो सका। इस बिल को पास करने के लिए 352 वोटों की जरूरत थी, लेकिन सरकार को केवल 298 वोट ही मिल पाए। यानी यह बिल 54 वोटों से गिर गया।
यह पहली बार है जब मोदी सरकार किसी बड़े बिल को संसद में पास कराने में नाकाम रही है। सरकार को उम्मीद थी कि उसे पर्याप्त समर्थन मिलेगा, लेकिन विपक्ष के कड़े विरोध और कुछ सहयोगी दलों के रुख के कारण यह संभव नहीं हो पाया।
इस बिल का मकसद देश में बढ़ती जनसंख्या के हिसाब से लोकसभा सीटों का पुनर्गठन करना था, ताकि प्रतिनिधित्व बेहतर हो सके। लेकिन विपक्ष ने इस पर कई सवाल उठाए और इसे लेकर बहस भी काफी तीखी रही।
राजनीतिक जानकार मानते हैं कि इस घटना से आने वाले समय में संसद के अंदर सरकार के लिए चुनौतियां बढ़ सकती हैं। वहीं, विपक्ष इसे अपनी बड़ी जीत के तौर पर देख रहा है।
इस फैसले का असर सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि आम जनता के प्रतिनिधित्व से भी जुड़ा है। ऐसे में अब लोगों की नजरें इस पर टिकी हैं कि सरकार आगे क्या कदम उठाती है।
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